कोल्हान

झारखंड की शांभवी तिवारी ने CISCE 12वीं साइंस में 100% अंक लाकर रचा इतिहास, बनीं राष्ट्रीय टॉपर

झारखंड की शांभवी तिवारी ने CISCE 12वीं साइंस में 100% अंक लाकर रचा इतिहास, बनीं राष्ट्रीय टॉपर

जमशेदपुर |झारखंड की प्रतिभाशाली छात्रा शांभवी तिवारी ने काउंसिल फॉर द इंडियन स्कूल सर्टिफिकेट एग्जामिनेशंस (CISCE) की 12वीं कक्षा (साइंस) परीक्षा में 100 प्रतिशत अंक हासिल कर राष्ट्रीय स्तर पर टॉपर बनकर इतिहास रच दिया है। उनकी इस अभूतपूर्व सफलता से न केवल उनके परिवार और विद्यालय में हर्ष का माहौल है, बल्कि पूरे राज्य में गर्व की भावना देखी जा रही है।

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शांभवी की यह उपलब्धि कड़ी मेहनत, अनुशासन और समर्पण का उत्कृष्ट उदाहरण मानी जा रही है। उन्होंने अपनी पढ़ाई के दौरान निरंतरता बनाए रखते हुए प्रत्येक विषय पर मजबूत पकड़ बनाई, जिसका परिणाम आज पूरे देश के सामने है।

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विद्यालय के शिक्षकों के अनुसार, शांभवी शुरू से ही एक मेधावी और परिश्रमी छात्रा रही हैं। उनमें सीखने की प्रबल इच्छा रही है और उन्होंने हर चुनौती का सामना आत्मविश्वास के साथ किया। स्कूल प्रबंधन ने उनकी इस सफलता पर गर्व व्यक्त करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है।

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परिजनों ने भी खुशी जाहिर करते हुए बताया कि शांभवी ने शुरू से ही अपने लक्ष्य को लेकर स्पष्ट दृष्टिकोण रखा और उसी दिशा में लगातार मेहनत करती रहीं।
शांभवी तिवारी की इस ऐतिहासिक उपलब्धि ने राज्य के अन्य विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा का कार्य किया है, यह संदेश देते हुए कि मेहनत, लगन और सही दिशा में प्रयास से किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।

पश्चिमी सिंहभूम: नाबालिग से दुष्कर्म मामले में आरोपी को 15 साल की सजा, चाईबासा कोर्ट का सख्त फैसला

पश्चिमी सिंहभूम: नाबालिग से दुष्कर्म मामले में आरोपी को 15 साल की सजा, चाईबासा कोर्ट का सख्त फैसला

चाईबासा | झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले से न्यायपालिका का एक सख्त और महत्वपूर्ण फैसला सामने आया है। चाईबासा की अदालत ने नाबालिग लड़की से दुष्कर्म के मामले में आरोपी को 15 वर्ष की कठोर कारावास की सजा सुनाई है। इस फैसले को समाज में एक कड़ा संदेश माना जा रहा है कि जघन्य अपराधों पर कानून सख्ती से कार्रवाई करता है।

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यह मामला मुफ्फसिल थाना क्षेत्र के गोप बस्ती टोला गोसाईं से जुड़ा है। अदालत ने आरोपी सुमन गोप को भारतीय दंड संहिता की धारा 376(1) के तहत दोषी ठहराते हुए 15 साल की कठोर कारावास और 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। जुर्माना नहीं चुकाने की स्थिति में सजा अवधि बढ़ाई जा सकती है।

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मामले के अनुसार, 19 नवंबर 2022 को आरोपी ने नाबालिग लड़की को डरा-धमकाकर दुष्कर्म किया था। साथ ही घटना की जानकारी किसी को देने पर जान से मारने की धमकी भी दी गई थी। घटना के बाद पीड़िता के परिजनों ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद मामला प्रकाश में आया।

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पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया था। तब से वह लगातार जेल में बंद था। गुरुवार को अदालत में सुनवाई पूरी होने के बाद सजा सुनाई गई।

यह फैसला चाईबासा के अपर सत्र न्यायाधीश द्वितीय की अदालत ने प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर सुनाया, जिसमें आरोपी को दोषी करार दिया गया।

इस फैसले से यह स्पष्ट होता है कि नाबालिगों के खिलाफ अपराधों पर न्यायालय सख्त रुख अपनाता है। यह निर्णय न केवल अपराधियों के लिए चेतावनी है, बल्कि पीड़ितों और उनके परिवारों के लिए न्याय प्रणाली पर विश्वास भी मजबूत करता है।

नोवामुंडी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में बदहाल व्यवस्था, मरीजों को हो रही भारी परेशानी

नोवामुंडी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में बदहाल व्यवस्था, मरीजों को हो रही भारी परेशानी

नोवामुंडी | भीषण गर्मी और लू के प्रकोप के बीच नोवामुंडी प्रखंड स्थित रुतागुटू सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। पिछले दो दिनों से तेज धूप और लू के कारण अस्वस्थ हुए एक स्थानीय व्यक्ति जब इलाज के लिए केंद्र पहुंचे, तो वहां की वास्तविक स्थिति सामने आई।

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मरीज के अनुसार, स्वास्थ्य केंद्र में केवल एक ही डॉक्टर तैनात हैं और स्टाफ की भारी कमी है। जब उन्होंने कमजोरी के कारण सलाइन चढ़ाने का अनुरोध किया, तो मौजूद डॉक्टर ने स्टाफ की कमी का हवाला देते हुए असमर्थता जताई। वहीं, एक कर्मचारी ने बताया कि डॉक्टर की तबीयत भी ठीक नहीं है, जिसके कारण वे नियमित रूप से उपलब्ध नहीं हैं।

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मरीज को इलाज के नाम पर केवल जिंक टैबलेट का एक पत्ता और तीन ORS पैकेट देकर भेज दिया गया। मजबूरी में उन्हें बाद में एक निजी क्लिनिक में जाकर इलाज कराना पड़ा।

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निरीक्षण के दौरान स्वास्थ्य केंद्र की अन्य खामियां भी उजागर हुईं। केंद्र परिसर में साफ-सफाई की स्थिति बेहद खराब है, मरीजों के लिए पर्याप्त बेड उपलब्ध नहीं हैं और भीषण गर्मी के बावजूद पंखे या ठंडक की कोई समुचित व्यवस्था नहीं है। इतना ही नहीं, गरीब मरीजों के लिए पीने के स्वच्छ पानी की भी सुविधा नहीं पाई गई।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यह स्थिति लंबे समय से बनी हुई है, जिससे खासकर गरीब तबके के लोगों को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

इस पूरे मामले में यह स्पष्ट है कि समस्या केवल डॉक्टरों या कर्मचारियों की नहीं, बल्कि स्वास्थ्य व्यवस्था में संसाधनों की कमी और सरकारी तंत्र की विफलता का परिणाम है। ऐसे में जरूरत है कि संबंधित विभाग जल्द से जल्द संज्ञान लेकर स्वास्थ्य केंद्र की स्थिति में सुधार के लिए ठोस कदम उठाए, ताकि आम जनता को बेहतर चिकित्सा सुविधा मिल सके।

जिले में 1 मई से शुरू होगी जनगणना, डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़ी प्रक्रिया

जिले में 1 मई से शुरू होगी जनगणना, डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़ी प्रक्रिया

पश्चिम सिंहभूम | जिले में आगामी 1 मई से शुरू होने वाली जनगणना को लेकर प्रशासन द्वारा प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर विस्तृत जानकारी साझा की गई। अधिकारियों ने बताया कि इस बार जनगणना के लिए कुल 33 बिंदु निर्धारित किए गए हैं, जिनके आधार पर आंकड़ों का संकलन किया जाएगा।

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प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अधिकारियों ने बताया कि जनगणना प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और सुगम बनाने के लिए इसे डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ा गया है।


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अब नागरिक स्वयं भी ऑनलाइन माध्यम के जरिए अपने परिवार से संबंधित जानकारी दर्ज कर सकते हैं। इससे न केवल समय की बचत होगी, बल्कि आंकड़ों की सटीकता भी सुनिश्चित की जा सकेगी।


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अधिकारियों ने आम जनता से अपील की है कि वे जनगणना कार्य में सक्रिय सहयोग करें और सही एवं पूर्ण जानकारी उपलब्ध कराएं, ताकि सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में सहायता मिल सके।

चाईबासा: प्रोजेक्ट ‘परख’ के तहत शिक्षकों का उन्मुखीकरण, शिक्षा गुणवत्ता सुधार पर जोर

चाईबासा: प्रोजेक्ट ‘परख’ के तहत शिक्षकों का उन्मुखीकरण, शिक्षा गुणवत्ता सुधार पर जोर

चाईबासा | पश्चिमी सिंहभूम जिले के कोल्हन विश्वविद्यालय के ऑडिटोरियम में बुधवार को जिला दंडाधिकारी सह उपायुक्त मनीष कुमार की अध्यक्षता में प्रोजेक्ट ‘परख’ के अंतर्गत एक दिवसीय उन्मुखीकरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में जिले के सभी माध्यमिक विद्यालयों के प्रधानाचार्य एवं शिक्षक शामिल हुए। कार्यक्रम के दौरान शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास को लेकर विस्तृत चर्चा की गई।

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उपायुक्त ने अपने संबोधन में प्रधानाचार्यों और शिक्षकों को उनके समर्पण के लिए बधाई देते हुए बताया कि जिले ने इस वर्ष राज्य स्तर पर 17वां स्थान हासिल किया है। उन्होंने विश्वास जताया कि सामूहिक प्रयासों से आगामी वर्ष में जिला राज्य में प्रथम स्थान प्राप्त कर सकता है। उन्होंने कहा कि यदि विद्यार्थी, अभिभावक और शिक्षक मिलकर शत-प्रतिशत प्रयास करें, तो सफलता निश्चित है।

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कार्यक्रम के दौरान उपायुक्त ने विद्यालयों में शैक्षणिक एवं सह-शैक्षणिक गतिविधियों को सुदृढ़ करने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए। उन्होंने सभी स्कूलों में नियमित पैरेंट-टीचर मीटिंग आयोजित करने, प्रत्येक माह की 5 तारीख को खेल दिवस मनाने तथा खेल सामग्री की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर जोर दिया। इसके साथ ही विद्यालयों की प्रयोगशालाओं को पूरी तरह क्रियाशील रखने, विद्यार्थियों के लेखन कौशल को विकसित करने के लिए प्रतिदिन एक घंटे की राइटिंग क्लास संचालित करने तथा नियमित रूप से होमवर्क देने और उसकी निगरानी करने के निर्देश दिए।
उपायुक्त ने समय पर विद्यालय पहुंचने वाले विद्यार्थियों को गुलाब फूल देकर सम्मानित करने की पहल अपनाने का सुझाव भी दिया। प्रोजेक्ट ‘परख’ के तहत साप्ताहिक टेस्ट सीरीज आयोजित करने के निर्देश भी दिए गए।

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इसके अतिरिक्त, “बात तो करनी होगी” पहल के अंतर्गत मासिक धर्म, बाल श्रम, बाल विवाह और यौन उत्पीड़न जैसे संवेदनशील विषयों पर विद्यार्थियों से खुलकर संवाद करने पर बल दिया गया। सभी विद्यालयों को प्लास्टिक मुक्त बनाने का लक्ष्य भी निर्धारित किया गया। वहीं “बोलेगा चाईबासा” पहल के तहत प्रतिदिन प्रार्थना सभा का संचालन दो विद्यार्थियों द्वारा कराने का निर्देश दिया गया, ताकि उनमें नेतृत्व क्षमता और आत्मविश्वास का विकास हो सके।
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों द्वारा बनाई गई पेंटिंग्स का उपायुक्त एवं अन्य अतिथियों ने अवलोकन किया और बच्चों के प्रयासों की सराहना की। इस अवसर पर उप विकास आयुक्त, चक्रधरपुर के अनुमंडल पदाधिकारी, शिक्षा विभाग के पदाधिकारी, प्रधानाचार्य, शिक्षकगण एवं अन्य संबंधित लोग उपस्थित थे।

चक्रधरपुर रेलवे स्टेशन से 7 नाबालिग बच्चियां रेस्क्यू, तस्करी की आशंका

चक्रधरपुर रेलवे स्टेशन से 7 नाबालिग बच्चियां रेस्क्यू, तस्करी की आशंका

चक्रधरपुर | पश्चिमी सिंहभूम जिले के चक्रधरपुर रेलवे स्टेशन परिसर में मंगलवार देर रात पुलिस ने कार्रवाई करते हुए सात नाबालिग बच्चियों को रेस्क्यू किया। सभी बच्चियों को सुरक्षित बरामद कर चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (CWC), चाईबासा को सौंप दिया गया है।

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जानकारी के अनुसार, सभी बच्चियां झींकपानी और गोइलकेरा प्रखंड के कुईडा क्षेत्र की रहने वाली हैं। बताया जा रहा है कि वे गुजरात के राजकोट में एक कंपनी में काम करने जा रही थीं। इसी दौरान चक्रधरपुर थाना प्रभारी अवधेश कुमार के नेतृत्व में पुलिस ने रात करीब 11 बजे स्टेशन परिसर में छापेमारी कर उन्हें बरामद किया।

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रेस्क्यू के दौरान CWC की प्रतिनिधि पिंकू बोदरा ने अन्य किशोरियों से भी पूछताछ की, जिनमें कुछ बालिग पाई गईं। फिलहाल सभी नाबालिग बच्चियों को संरक्षण में रखा गया है और उनके परिजनों से संपर्क किया जा रहा है।

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पुलिस मामले की जांच कर रही है और बच्चियों को बाहर भेजने वाले संभावित नेटवर्क की भी पड़ताल की जा रही है।

उल्लेखनीय है कि पिछले एक महीने में यह तीसरा मामला है, जिससे क्षेत्र में मानव तस्करी की आशंका बढ़ गई है।

“नाला दिसुम का जाल”: पलायन, शोषण और शिक्षा व्यवस्था की विफलता पर प्रेम सिंह डिंगिल की कड़ी चेतावनी

“नाला दिसुम का जाल”: पलायन, शोषण और शिक्षा व्यवस्था की विफलता पर प्रेम सिंह डिंगिल की कड़ी चेतावनी

चक्रधरपुर | KNT के शिक्षक और सामाजिक कार्यकर्ता प्रेम सिंह डिंगिल ने चक्रधरपुर और आसपास के क्षेत्रों से गए प्रवासी श्रमिकों के साथ हुई घटना को केवल मारपीट का मामला मानने से इनकार करते हुए इसे शिक्षा व्यवस्था और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की विफलता का सीधा परिणाम बताया है। उनका कहना है कि जब तक युवाओं को अपने गांव में भविष्य नहीं दिखेगा, तब तक वे “नाला दिसुम” (बाहरी दुनिया) के लालच में फंसते रहेंगे।

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तमिलनाडु के नमक्कल से लौटे श्रमिकों—अनिल समद और मंकी हेस्सा—के बयान बेहद चौंकाने वाले हैं। उन्होंने बताया कि कपड़ा मिलों में स्थिति बंधुआ मजदूरी जैसी थी, जहां मजदूरों के साथ न केवल मारपीट की गई, बल्कि उनकी मजदूरी तक रोक ली गई। कई मामलों में इलाज का खर्च भी मजदूरों से ही वसूला गया और उन्हें परिसर से बाहर निकलने तक की अनुमति नहीं थी।

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सबसे चिंताजनक पहलू यह सामने आया कि कई किशोर-किशोरियां अपनी उम्र आधार कार्ड (Aadhaar) में बढ़ाकर इस “पलायन के जाल” में शामिल हो रहे हैं। यह न केवल गैरकानूनी है, बल्कि उन्हें किसी भी तरह की कानूनी सुरक्षा से भी वंचित कर देता है, जिससे वे शोषण के लिए आसान शिकार बन जाते हैं।

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प्रेम सिंह डिंगिल के अनुसार, यह पूरी स्थिति दर्शाती है कि गांवों में शिक्षा, रोजगार और कौशल विकास के अवसरों की कितनी भारी कमी है। “नाला दिसुम” जाना अब मजबूरी के साथ-साथ एक खतरनाक मानसिकता बनती जा रही है।
समाधान की दिशा में जरूरी कदम:
इस गंभीर सामाजिक संकट से निपटने के लिए केवल जांच नहीं, बल्कि ठोस नीतिगत कदम जरूरी हैं—
पंचायत स्तर पर प्रवासी श्रमिकों का अनिवार्य पंजीकरण
झारखंड और तमिलनाडु सरकार के बीच बेहतर समन्वय और त्वरित रेस्क्यू सिस्टम
स्थानीय स्तर पर कौशल विकास और रोजगार के अवसर
बिचौलियों (एजेंट्स) की पहचान कर सख्त कानूनी कार्रवाई
यह मामला सिर्फ कुछ मजदूरों का नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम पर सवाल खड़ा करता है—क्या हम अपने युवाओं को उनके ही घर में सुरक्षित और सम्मानजनक भविष्य दे पा रहे हैं?

चक्रधरपुर से तमिलनाडु तक: किशोर पलायन, बंधुआ मजदूरी और शिक्षा-रोजगार संकट का खौफनाक सच

चक्रधरपुर से तमिलनाडु तक: किशोर पलायन, बंधुआ मजदूरी और शिक्षा-रोजगार संकट का खौफनाक सच

पश्चिम सिंहभूम | यह घटना केवल मारपीट का मामला नहीं है, बल्कि यह हमारी शिक्षा व्यवस्था (स्कूल छोड़ने की दर) और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की विफलता का आईना है। जब तक किशोरों को अपनी मिट्टी में भविष्य नहीं दिखेगा, वे इसी तरह अपनी पहचान बदलकर “लालच के जाल” में फंसते रहेंगे।

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चक्रधरपुर और आसपास के क्षेत्रों से गए इन प्रवासी श्रमिकों के साथ जो हुआ, वह मानवाधिकारों का खुला उल्लंघन है। विशेष रूप से यह तथ्य कि किशोर-किशोरी अपनी उम्र आधार कार्ड (Aadhaar) में बढ़ाकर इस “पलायन के जाल” में फंस रहे हैं, एक गहरे सामाजिक संकट की ओर इशारा करता है।
इस पूरे घटनाक्रम और आपके द्वारा उठाए गए बिंदुओं का विश्लेषण कुछ इस प्रकार है:

1. शोषण का भयावह स्वरूप

तमिलनाडु के नमक्कल से लौटे श्रमिकों (जैसे अनिल समद और मंकी हेस्सा) के बयान यह साफ करते हैं कि वहां की कपड़ा मिलों में स्थितियां बंधुआ मजदूरी के समान हो गई थीं:
शारीरिक उत्पीड़न: लाठियों और मशीन के पुर्जों से मारपीट करना।
आर्थिक शोषण: मजदूरी का भुगतान न करना और इलाज का खर्च भी मजदूरों पर डालना।
बंधक बनाना: परिसर छोड़ने पर पाबंदी और जान बचाकर भागने की नौबत आना।

2. ‘नाला दिसुम’ (बाहरी दुनिया) का घातक आकर्षण

आपने बिल्कुल सही कहा कि आंकड़ों से परे हकीकत यह है कि स्थानीय स्तर पर शिक्षा और रोजगार की कमी ने “पलायन” को एक मजबूरी भरा ‘आकर्षण’ बना दिया है:

3.उम्र की जालसाजी:

18 साल से कम उम्र के बच्चे बेहतर जीवन के लालच में अपने पहचान पत्रों (Aadhaar) के साथ छेड़छाड़ कर रहे हैं ताकि वे बाहर जा सकें। यह उन्हें कानूनी सुरक्षा के दायरे से बाहर कर देता है और शोषण के प्रति अधिक संवेदनशील बनाता है।

मानसिकता: ‘
नाला दिसुम’ जाने को एकमात्र उद्देश्य मान लेना यह दर्शाता है कि गांवों में विकास और संभावनाओं की कितनी भारी कमी है।

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झारखंड सरकार और प्रशासन के लिए आवश्यक कदम

इस समस्या के समाधान के लिए केवल जांच काफी नहीं है, बल्कि एक ठोस नीति की आवश्यकता है:

श्रमिक पंजीकरण अनिवार्य हो: पंचायत स्तर पर हर बाहर जाने वाले श्रमिक का अनिवार्य पंजीकरण होना चाहिए ताकि संकट के समय उनका पता लगाया जा सके।

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हेल्पलाइन और त्वरित कार्रवाई: तमिलनाडु और झारखंड सरकार के बीच बेहतर समन्वय होना चाहिए ताकि ऐसे मामलों में तुरंत रेस्क्यू किया जा सके।

स्थानीय स्तर पर कौशल विकास: किशोरों को गांव में ही तकनीकी शिक्षा या कौशल विकास से जोड़ा जाए ताकि वे उम्र बढ़ाकर मजदूरी करने के बजाय सम्मानजनक काम की ओर बढ़ें।

बिचौलियों (Agents) पर नकेल: उन एजेंटों की पहचान कर उन पर कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए जो झूठे वादे करके भोले-भाले आदिवासियों को दूसरे राज्यों में बेच देते हैं।

पश्चिम सिंहभूम में 26 लाख गबन कांड: आरक्षी ने ‘किंगफिशर FC’ के नाम पर खेला जुआ, चौंकाने वाला खुलासा!

पश्चिम सिंहभूम में 26 लाख गबन कांड: आरक्षी ने ‘किंगफिशर FC’ के नाम पर खेला जुआ, चौंकाने वाला खुलासा!

चाईबासा | पश्चिम सिंहभूम जिले से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां पुलिस विभाग से जुड़ी सरकारी राशि के गबन में बड़ा खुलासा हुआ है। आरोपी आरक्षी देवनारायण मुर्मू ने करीब 26 लाख रुपए का गबन कर न सिर्फ फुटबॉल टीम बनाई, बल्कि उसी के नाम पर बड़े टूर्नामेंट में जुआ भी खेलता रहा।

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मामले का खुलासा तब हुआ जब महालेखाकार, रांची कार्यालय की समीक्षा के दौरान चाईबासा जिला कोषागार से पुलिस मद की राशि निकासी में गड़बड़ी का शक हुआ। इसके बाद उपायुक्त के निर्देश पर जांच कमेटी गठित की गई।

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जांच रिपोर्ट सामने आते ही जिला कोषागार पदाधिकारी सुमित कुमार ने प्राथमिकी दर्ज कराई। जांच में पाया गया कि देवनारायण मुर्मू, जो 2016 से लेखा कार्य संभाल रहा था, ने मृत पुलिसकर्मियों के आश्रितों के नाम में हेरफेर कर अपने रिश्तेदारों और दोस्तों के बैंक खातों में पैसे ट्रांसफर किए।

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हैरानी की बात ये है कि आरोपी ने अपने साला, जीजा और एक करीबी मित्र के खातों का इस्तेमाल किया। पूछताछ में उसने यह भी कबूल किया कि गबन की रकम से उसने ‘किंगफिशर FC’ नाम की फुटबॉल टीम बनाई और उसी के जरिए लाखों रुपए का जुआ खेलता था।
फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुटी है और आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की तैयारी की जा रही है। इस खुलासे के बाद पूरे जिले में हड़कंप मच गया है।

सरायकेला-खरसावां में निजी स्कूलों की फीस पर लगेगा नियंत्रण, जिला स्तरीय समिति की पहली बैठक में अहम फैसले

सरायकेला-खरसावां में निजी स्कूलों की फीस पर लगेगा नियंत्रण, जिला स्तरीय समिति की पहली बैठक में अहम फैसले

सरायकेला_खरसावां | झारखंड शिक्षा न्यायाधिकरण (संशोधन) अधिनियम, 2017 के तहत समाहरणालय सभागार में जिला स्तरीय शुल्क निर्धारण समिति की पहली बैठक उपायुक्त की अध्यक्षता में आयोजित की गई। बैठक में जनप्रतिनिधियों के प्रतिनिधि, जिला शिक्षा पदाधिकारी कैलाश मिश्रा, विभिन्न विभागों के अधिकारी, निजी विद्यालयों के प्रधानाचार्य तथा अभिभावक सदस्य उपस्थित रहे।

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बैठक में निजी विद्यालयों द्वारा की जा रही मनमानी फीस वृद्धि पर अंकुश लगाने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। समिति ने तय किया कि सभी मान्यता प्राप्त निजी विद्यालय अधिकतम 10 प्रतिशत तक ही फीस बढ़ा सकेंगे। इससे अधिक वृद्धि के लिए जिला समिति की पूर्व अनुमति अनिवार्य होगी। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि एक बार फीस बढ़ाने के बाद दो वर्षों से पहले दोबारा वृद्धि लागू नहीं की जा सकेगी।

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विद्यालयों को निर्देश दिया गया है कि वे पिछले तीन शैक्षणिक सत्रों के साथ-साथ सत्र 2026-27 की कक्षावार फीस का विस्तृत विवरण एक सप्ताह के भीतर जिला समिति को उपलब्ध कराएं। शुल्क निर्धारण प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए प्रत्येक विद्यालय में शुल्क समिति एवं अभिभावक-शिक्षक संघ (PTA) का गठन अनिवार्य किया गया है, जिसकी जानकारी सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करनी होगी।

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अभिभावकों को राहत देते हुए प्रशासन ने स्पष्ट किया कि किसी भी प्रकार के अवैध शुल्क—जैसे एडमिशन, री-एडमिशन या अन्य नामों पर—की वसूली नहीं की जाएगी। साथ ही स्कूल प्रबंधन अभिभावकों को किसी विशेष दुकान से किताब, कॉपी या यूनिफॉर्म खरीदने के लिए बाध्य नहीं कर सकेगा।

छात्रों की सुरक्षा को लेकर भी सख्त निर्देश जारी किए गए। उपायुक्त ने कहा कि स्कूल वाहनों में क्षमता से अधिक बच्चों को नहीं बैठाया जाए और सभी सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन किया जाए। बाहरी वाहनों की निगरानी और छात्रों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने पर जोर दिया गया।

बैठक में शिक्षा का अधिकार (RTE) के तहत पात्र बच्चों का नामांकन सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए। उपायुक्त ने स्पष्ट कहा कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिकता है तथा किसी भी प्रकार की अनियमितता या नियमों के उल्लंघन पर संबंधित विद्यालयों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।