स्वास्थ्य

प्रोजेक्ट प्राण के तहत पश्चिमी सिंहभूम के 221 पंचायत सचिवालयों और विद्यालयों में लगे माहवारी स्वच्छता भस्मक

प्रोजेक्ट प्राण के तहत पश्चिमी सिंहभूम के 221 पंचायत सचिवालयों और विद्यालयों में लगे माहवारी स्वच्छता भस्मक

चाईबासा | पश्चिमी सिंहभूम जिला प्रशासन द्वारा उपायुक्त श्री मनीष कुमार के नेतृत्व में संचालित “प्रोजेक्ट प्राण” के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण के साथ-साथ सामाजिक सरोकारों से जुड़े मुद्दों पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसी क्रम में महिलाओं एवं किशोरियों के स्वास्थ्य, सम्मान और स्वच्छता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से पंचायत सचिवालयों और विद्यालयों में माहवारी स्वच्छता हेतु सेनेटरी नैपकिन इंसिनरेटर (भस्मक) स्थापित किए जा रहे हैं। जिला प्रशासन की यह पहल ग्रामीण क्षेत्रों में सुरक्षित माहवारी प्रबंधन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

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ग्रामीण क्षेत्रों में लंबे समय से उपयोग किए गए सेनेटरी नैपकिन के वैज्ञानिक एवं सुरक्षित निस्तारण की समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण स्वच्छता संबंधी समस्याएं उत्पन्न होती थीं। इस आवश्यकता को देखते हुए जिला प्रशासन ने पंचायत स्तर पर स्थायी समाधान विकसित करने का निर्णय लिया, जिसका सकारात्मक प्रभाव अब पूरे जिले में दिखाई देने लगा है।
15वें वित्त आयोग की मद से स्थानीय मुखिया एवं पंचायत सचिवों के समन्वित प्रयासों से जिले के 158 पंचायत सचिवालयों और 63 विद्यालयों, यानी कुल 221 स्थानों पर माहवारी स्वच्छता भस्मकों की स्थापना पूरी कर ली गई है। इन भस्मकों के माध्यम से उपयोग किए गए सेनेटरी नैपकिन का सुरक्षित, स्वच्छ और पर्यावरण-अनुकूल निस्तारण सुनिश्चित होगा। इससे पंचायत सचिवालयों एवं विद्यालय परिसरों की स्वच्छता बेहतर होगी तथा खुले में अपशिष्ट फेंकने की प्रवृत्ति पर भी प्रभावी नियंत्रण लगाया जा सकेगा।

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जिला प्रशासन का उद्देश्य केवल उपकरण उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि माहवारी स्वच्छता के प्रति समाज में जागरूकता बढ़ाना, मिथकों एवं संकोच को दूर करना तथा महिलाओं एवं किशोरियों के लिए सम्मानजनक वातावरण तैयार करना भी है। इसी उद्देश्य से प्रत्येक स्थापना स्थल पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। इन कार्यक्रमों में स्थानीय जनप्रतिनिधियों, पंचायत सचिवों, स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं, शिक्षकों, आंगनबाड़ी सेविकाओं, सहियाओं एवं छात्राओं को भस्मक के सुरक्षित उपयोग, रखरखाव तथा वैज्ञानिक अपशिष्ट प्रबंधन की विस्तृत जानकारी दी गई।

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विद्यालयों में आयोजित जागरूकता कार्यक्रमों के दौरान छात्राओं को व्यक्तिगत स्वच्छता, माहवारी के दौरान बरती जाने वाली आवश्यक सावधानियों, संक्रमण से बचाव तथा स्वच्छता से जुड़े वैज्ञानिक तथ्यों की जानकारी दी गई। उन्हें बताया गया कि माहवारी एक सामान्य जैविक प्रक्रिया है और इसके प्रति किसी भी प्रकार की झिझक या सामाजिक संकोच रखने की आवश्यकता नहीं है। विशेषज्ञों ने छात्राओं को स्वच्छता संबंधी अच्छी आदतें अपनाने के लिए प्रेरित किया, ताकि उनका स्वास्थ्य बेहतर रहे और विद्यालयों में उनकी नियमित उपस्थिति सुनिश्चित हो सके।

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वहीं पंचायत सचिवालयों में स्थापित भस्मक ग्रामीण महिलाओं, स्वयं सहायता समूहों की सदस्यों, पंचायत प्रतिनिधियों तथा विभिन्न कार्यों से सचिवालय आने वाली महिलाओं के लिए अत्यंत उपयोगी साबित होंगे। इससे पंचायत सचिवालय महिलाओं के अनुकूल सार्वजनिक परिसरों के रूप में विकसित होंगे तथा ग्रामीण स्तर पर स्वच्छता और स्वास्थ्य के प्रति सकारात्मक व्यवहार परिवर्तन को भी बढ़ावा मिलेगा।
उपायुक्त श्री मनीष कुमार ने कहा कि प्रोजेक्ट प्राण का उद्देश्य पंचायत सचिवालयों को केवल प्रशासनिक गतिविधियों तक सीमित रखना नहीं, बल्कि उन्हें ग्रामीण विकास, जनकल्याण, स्वास्थ्य, स्वच्छता और महिला सशक्तिकरण के प्रभावी केंद्र के रूप में विकसित करना है। उन्होंने कहा कि माहवारी स्वच्छता महिलाओं एवं किशोरियों के स्वास्थ्य, गरिमा और आत्मसम्मान से जुड़ा अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है। पंचायत सचिवालयों एवं विद्यालयों में भस्मकों की स्थापना से सुरक्षित अपशिष्ट प्रबंधन को बढ़ावा मिलेगा, पर्यावरण संरक्षण को मजबूती मिलेगी तथा स्वच्छ और स्वस्थ पंचायतों के निर्माण की दिशा में यह पहल मील का पत्थर साबित होगी।

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उपायुक्त ने सभी मुखिया, पंचायत सचिवों, विद्यालय प्रबंधन समितियों, शिक्षकों, आंगनबाड़ी सेविकाओं, सहियाओं एवं स्वयं सहायता समूहों से भस्मकों के नियमित उपयोग, रखरखाव और जनजागरूकता गतिविधियों को निरंतर जारी रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि जब समुदाय स्वयं इन सुविधाओं को अपनाएगा और इनके संरक्षण में सक्रिय भागीदारी निभाएगा, तभी इस पहल का वास्तविक उद्देश्य सफल हो सकेगा।
जिला प्रशासन का मानना है कि महिलाओं और किशोरियों के लिए सुरक्षित एवं सम्मानजनक माहवारी प्रबंधन सुनिश्चित करना केवल स्वास्थ्य का विषय नहीं, बल्कि सामाजिक समानता, गरिमा और महिला सशक्तिकरण का भी महत्वपूर्ण आधार है। इसी सोच के साथ प्रोजेक्ट प्राण के अंतर्गत पंचायत सचिवालयों को आधुनिक, जनहितैषी और समावेशी सुविधाओं से सुसज्जित किया जा रहा है। प्रशासन ने बताया कि भविष्य में भी इस परियोजना के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में नागरिक सुविधाओं के विस्तार, स्वच्छता, स्वास्थ्य और जनभागीदारी को बढ़ावा देने के लिए ऐसी नवाचारी पहलें लगातार जारी रहेंगी।

पश्चिमी सिंहभूम में मलेरिया का बढ़ता प्रकोप, 100 आवासीय छात्र संक्रमित; सारंडा सबसे अधिक प्रभावित

पश्चिमी सिंहभूम में मलेरिया का बढ़ता प्रकोप, 100 आवासीय छात्र संक्रमित; सारंडा सबसे अधिक प्रभावित

चाईबासा | पश्चिमी सिंहभूम जिले में मलेरिया का प्रकोप लगातार बढ़ रहा है। जिले में अब तक लगभग 1,600 मलेरिया मरीजों की पहचान की जा चुकी है। गंभीर स्थिति को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने प्रभावित क्षेत्रों में विशेष अभियान तेज कर दिया है। जानकारी के अनुसार, संक्रमण का सबसे अधिक असर सारंडा और आसपास के वन क्षेत्रों में देखा जा रहा है।

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स्वास्थ्य विभाग की टीमें प्रभावित गांवों में घर-घर जाकर रैपिड टेस्ट किट से जांच कर रही हैं तथा संक्रमित मरीजों को तत्काल दवाएं उपलब्ध करा रही हैं। मच्छरों के प्रजनन को रोकने के लिए फॉगिंग, कीटनाशक छिड़काव और मच्छरदानी वितरण का कार्य भी जारी है। राहत की बात यह है कि समय पर उपचार मिलने से जिले में अब तक मलेरिया से किसी की मृत्यु नहीं हुई है।
विशेष रूप से आवासीय विद्यालयों के लगभग 100 छात्र मलेरिया से संक्रमित पाए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग ने विद्यालयों में जांच और उपचार की व्यवस्था बढ़ा दी है।

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कोल्हान और गोड्डा संभाग के सात प्रखंड सबसे अधिक प्रभावित
सारंडा वन क्षेत्र का विस्तार मुख्य रूप से मनोहरपुर, नोवामुंडी, गोइलकेरा और आनंदपुर प्रखंडों में होने के कारण ये क्षेत्र संक्रमण से सबसे अधिक प्रभावित हैं।
स्वास्थ्य विभाग के मिशन निदेशक पहुंचे सरायकेला, चार डेंजर जोन प्रखंडों पर विशेष नजर
सरायकेला: पूर्वी सिंहभूम जिले में मलेरिया से हुई हालिया मौतों के बाद राज्य सरकार पूरी तरह सतर्क हो गई है। इसी क्रम में स्वास्थ्य विभाग के मिशन निदेशक शशि प्रकाश झा बुधवार को सरायकेला-खरसावां पहुंचे।

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उन्होंने सिविल सर्जन कार्यालय में अधिकारियों के साथ बैठक कर जिले में मलेरिया की स्थिति, जांच और उपचार व्यवस्था की समीक्षा की। इसके बाद सदर अस्पताल का निरीक्षण कर स्वास्थ्य सेवाओं का जायजा लिया।
कुचाई, सरायकेला, राजनगर और खरसावां डेंजर जोन घोषित
बैठक के दौरान जिला मलेरिया पदाधिकारी डॉ. सुजाता मुर्मू ने बताया कि कुचाई, सरायकेला, राजनगर और खरसावां प्रखंडों को डेंजर जोन के रूप में चिन्हित किया गया है। मानसून के दौरान इन क्षेत्रों में मलेरिया के सबसे अधिक मामले सामने आते हैं।

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मिशन निदेशक ने इन चारों प्रखंडों पर विशेष निगरानी रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मानकी-मुंडा सहित स्थानीय पारंपरिक जनप्रतिनिधियों के सहयोग से व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाया जाए, ताकि लोग बुखार होने पर झोलाछाप डॉक्टरों के बजाय सरकारी अस्पताल पहुंचकर जांच और इलाज कराएं।
उन्होंने प्रभावित क्षेत्रों में मलेरिया जांच किट और दवाओं की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए तथा जरूरत पड़ने पर अन्य प्रखंडों से डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की प्रतिनियुक्ति (मैनपावर शिफ्टिंग) करने का आश्वासन दिया।
बैठक के बाद मिशन निदेशक ने सदर अस्पताल, सरायकेला का निरीक्षण किया। उन्होंने माइक्रोस्कोप से मलेरिया जांच की प्रक्रिया का अवलोकन किया और इंडोर वार्ड में भर्ती मरीजों से बातचीत कर उनका हालचाल जाना तथा उपचार व्यवस्था की जानकारी ली।

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फील्ड वर्कर्स को हर महीने 100 ब्लड सैंपल जांच का लक्ष्य
मिशन निदेशक ने निर्देश दिया कि प्रत्येक फील्ड लेवल स्वास्थ्यकर्मी हर महीने कम से कम 100 ब्लड सैंपल की जांच सुनिश्चित करें।
उन्होंने चेतावनी दी कि लक्ष्य से कम जांच करने वाले कर्मचारियों के खिलाफ वेतन रोकने सहित विभागीय कार्रवाई की जाएगी। अगले तीन महीनों तक विशेष “मिशन मोड” में अभियान चलाया जाएगा और सभी स्वास्थ्यकर्मियों की नियमित निगरानी होगी।
साथ ही निर्देश दिया गया कि अस्पताल में बुखार की शिकायत लेकर आने वाले प्रत्येक मरीज की मलेरिया जांच अनिवार्य रूप से की जाए।

पश्चिमी सिंहभूम में आयुष विभाग के निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर सफल, 377 मरीजों का हुआ उपचार

पश्चिमी सिंहभूम में आयुष विभाग के निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर सफल, 377 मरीजों का हुआ उपचार

चाईबासा | पश्चिमी सिंहभूम जिले के विभिन्न सुदूर एवं ग्रामीण क्षेत्रों में आयुष विभाग द्वारा निःशुल्क स्वास्थ्य शिविरों का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। शिविरों के माध्यम से कुल 377 मरीजों के स्वास्थ्य की जांच की गई तथा उनकी आवश्यकता के अनुसार निःशुल्क होम्योपैथिक एवं आयुर्वेदिक दवाओं का वितरण किया गया। विभाग की इस पहल से जिले के अत्यंत पिछड़े एवं दूर-दराज के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को उनके घर के समीप ही बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिला।

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शिविरों के दौरान आधुनिक एवं पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों के समन्वय के साथ मरीजों के रक्तचाप, मधुमेह, हीमोग्लोबिन, मलेरिया एवं सिकल सेल एनीमिया जैसी बीमारियों की जांच की गई। इसके अलावा शरीर दर्द, पेट संबंधी रोग, महिलाओं की स्वास्थ्य समस्याओं, बच्चों एवं बुजुर्गों से जुड़ी बीमारियों तथा त्वचा रोगों का परीक्षण कर आवश्यक चिकित्सीय परामर्श एवं उपचार उपलब्ध कराया गया।

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आयुष विभाग के चिकित्सकों की टीम ने इस अभियान को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। शिविरों में डॉ. प्रदीप, डॉ. सुशील, डॉ. राधिका, डॉ. सूर्या भूषण, डॉ. धर्मराज, डॉ. सुष्मिता, डॉ. आशिक, डॉ. टिम्मा रानी, डॉ. मैनुद्दीन, डॉ. अनीश, डॉ. यशवंती एवं डॉ. कविता सहित अन्य चिकित्सकों ने मरीजों की जांच कर उन्हें आवश्यक परामर्श एवं उपचार प्रदान किया।

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ग्रामीण क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के उद्देश्य से इन शिविरों का आयोजन मंझारी प्रखंड के दोकाट्टा, गोइलकेरा के कुईड़ा एवं गोइलकेरा बाजार, मनोहरपुर के मौलडीहा, खूंटपानी के गोटाई एवं केंदुसाई, सदर प्रखंड के दलियामार्चा, नोआमुंडी के खास जामदा, चक्रधरपुर के लक्ष्मीपोसी, तांतनगर के कोकचो, हटगम्हरिया के कालीमाटी तथा गुदड़ी प्रखंड के डुरा गांव में किया गया। शिविरों में बड़ी संख्या में ग्रामीण महिला-पुरुषों एवं बच्चों ने स्वास्थ्य जांच कराकर स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठाया।

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उपचार के साथ-साथ शिविरों में स्वास्थ्य जागरूकता पर भी विशेष बल दिया गया। चिकित्सकों ने ग्रामीणों को मलेरिया, डेंगू एवं चिकनगुनिया जैसी मौसमी बीमारियों से बचाव के उपायों की जानकारी दी। साथ ही स्वच्छता बनाए रखने, शुद्ध पेयजल का उपयोग करने तथा तंबाकू एवं अन्य नशीले पदार्थों से दूर रहने के लिए जागरूक किया गया। ग्रामीणों को नियमित स्वास्थ्य जांच कराने तथा किसी भी प्रकार के बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर तत्काल गांव की सहिया अथवा नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क कर चिकित्सकीय परामर्श लेने की सलाह दी गई।

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शिविर के समापन पर ग्रामीणों के शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के उद्देश्य से विशेष योग सत्र का आयोजन किया गया। योग प्रशिक्षकों एवं चिकित्सकों ने नियमित योगाभ्यास, संतुलित एवं पौष्टिक आहार तथा स्वच्छ जीवनशैली अपनाने के महत्व पर प्रकाश डालते हुए स्वस्थ एवं निरोग जीवन के लिए इन आदतों को दैनिक दिनचर्या में शामिल करने का संदेश दिया।

चक्रधरपुर की दो दवा दुकानों का औचक निरीक्षण, रिकॉर्ड सही मिले; सुरक्षा मानकों के पालन के दिए निर्देश

चक्रधरपुर की दो दवा दुकानों का औचक निरीक्षण, रिकॉर्ड सही मिले; सुरक्षा मानकों के पालन के दिए निर्देश

चक्रधरपुर | पश्चिमी सिंहभूम जिले में दवा निरीक्षक ने चक्रधरपुर स्थित दो खुदरा दवा दुकानों का औचक निरीक्षण किया। इस कार्रवाई का उद्देश्य प्रतिबंधित एवं नशीली दवाओं के अवैध भंडारण और बिक्री पर रोक सुनिश्चित करना था।

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निरीक्षण के दौरान एक दुकान में नींद की गोलियां पाई गईं। दवा निरीक्षक ने इन दवाओं के खरीद, बिक्री एवं स्टॉक से संबंधित अभिलेखों की जांच की, जो पूरी तरह सही पाए गए।

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वहीं दूसरी दुकान में न्यूरोलॉजिकल विकारों के उपचार में प्रयुक्त दवाएं मिलीं, जिनका दुरुपयोग नशीले पदार्थों के रूप में किए जाने की आशंका रहती है। इन दवाओं के खरीद, बिक्री एवं स्टॉक संबंधी दस्तावेजों का भी गहन परीक्षण किया गया, जिसमें सभी रिकॉर्ड नियमानुसार एवं सही पाए गए।

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इसके अतिरिक्त, दोनों दुकानों में कोडीन युक्त कफ सिरप की उपलब्धता की भी जांच की गई, लेकिन किसी भी दुकान में इसका स्टॉक नहीं मिला। निरीक्षण के दौरान दवाओं के भंडारण एवं रखरखाव की व्यवस्था दवा एवं सौंदर्य प्रसाधन अधिनियम के निर्धारित मानकों के अनुरूप पाई गई। दोनों दुकानों में साफ-सफाई की संतोषजनक व्यवस्था तथा संक्रमण से बचाव के लिए ढक्कनयुक्त डस्टबिन का समुचित उपयोग भी पाया गया।

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हालांकि, सुरक्षा व्यवस्था में कुछ कमियां सामने आईं। एक दुकान में अग्निशामक यंत्र उपलब्ध था, जबकि दूसरी दुकान में इसकी व्यवस्था नहीं मिली। इस पर संबंधित दुकानदार को किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तत्काल अग्निशामक यंत्र स्थापित करने का सख्त निर्देश दिया गया।
निरीक्षण के दौरान दोनों दुकानों में सीसीटीवी कैमरे चालू अवस्था में मिले। दवा निरीक्षक ने दुकानदारों को कैमरों का फोकस मुख्य रूप से दुकान के प्रवेश द्वार एवं सामने के क्षेत्र की ओर रखने का निर्देश दिया, ताकि किसी भी संदिग्ध गतिविधि की प्रभावी निगरानी की जा सके।

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दवा निरीक्षक को निरीक्षण के दौरान किसी भी प्रकार की संदिग्ध गतिविधि नहीं मिली। इसके बावजूद, नशीली दवाओं के दुरुपयोग के प्रति सामाजिक जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से दोनों दुकानों पर जागरूकता संबंधी पोस्टर लगाने के निर्देश दिए गए। साथ ही, दुकानदारों को स्पष्ट रूप से चेतावनी दी गई कि वे बिना वैध चिकित्सकीय पर्चे (प्रिस्क्रिप्शन) के किसी भी प्रकार की दवा का विक्रय न करें। उन्हें यह भी निर्देशित किया गया कि आसपास किसी भी प्रकार की संदिग्ध गतिविधि दिखाई देने पर तत्काल संबंधित पदाधिकारी अथवा निकटतम पुलिस थाना को इसकी सूचना दें।

सदर अस्पताल चाईबासा के मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर में जटिल शल्य चिकित्सा सफल, महिला मरीज का बायां अंडाशय सुरक्षित निकाला गया

सदर अस्पताल चाईबासा के मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर में जटिल शल्य चिकित्सा सफल, महिला मरीज का बायां अंडाशय सुरक्षित निकाला गया

चाईबासा | पश्चिमी सिंहभूम जिले के सदर अस्पताल, चाईबासा के अत्याधुनिक मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर (शल्य कक्ष) में एक महिला मरीज की जटिल शल्य चिकित्सा सफलतापूर्वक संपन्न की गई। मरीज को पेट संबंधी गंभीर समस्या तथा बाएं अंडाशय में जटिल रोग की आशंका के कारण ऑपरेशन की आवश्यकता थी।

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विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम ने आवश्यक जांच एवं गहन परीक्षण के बाद शल्य चिकित्सा कर प्रभावित बाएं अंडाशय को सुरक्षित रूप से निकाल दिया। अस्पताल प्रशासन के अनुसार, ऑपरेशन सफल रहा और वर्तमान में मरीज की स्थिति स्थिर है। उसे चिकित्सकों की सतत निगरानी में रखा गया है।

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इस सफल शल्य चिकित्सा का नेतृत्व सर्जन डॉ. प्रदीप्तो मांझी एवं डॉ. प्रिंस पिंगुआ ने किया। वहीं, निश्चेतना (एनेस्थीसिया) की जिम्मेदारी डॉ. गीता रानी टुडू एवं डॉ. अमित तिर्की ने संभाली। इस जटिल प्रक्रिया को सफल बनाने में शल्य कक्ष के नर्सिंग कर्मियों, तकनीकी सहायकों तथा संपूर्ण ऑपरेशन थिएटर टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

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अस्पताल प्रशासन ने बताया कि सदर अस्पताल, चाईबासा में अत्याधुनिक मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर और अनुभवी विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता के कारण अब जटिल एवं उच्च स्तरीय शल्य चिकित्साएं भी स्थानीय स्तर पर सफलतापूर्वक की जा रही हैं। इससे पश्चिमी सिंहभूम सहित आसपास के जिलों के मरीजों को अपने जिले में ही गुणवत्तापूर्ण उपचार की सुविधा मिल रही है और उन्हें इलाज के लिए बड़े शहरों का रुख करने की आवश्यकता भी कम हो रही है।


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सिविल सर्जन एवं अस्पताल प्रबंधन ने सफल शल्य चिकित्सा के लिए सर्जिकल टीम, एनेस्थीसिया टीम, नर्सिंग स्टाफ तथा ऑपरेशन थिएटर से जुड़े सभी कर्मियों को बधाई देते हुए उनके प्रयासों की सराहना की। साथ ही प्रबंधन ने दोहराया कि सदर अस्पताल, चाईबासा आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार एवं सुदृढ़ीकरण के माध्यम से आमजन को सुरक्षित, गुणवत्तापूर्ण और सुलभ चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है।

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मझगांव मारपीट मामले में अस्पताल पहुंचे बाबूलाल मरांडी व अन्य भाजपा नेता, निष्पक्ष जांच की उठाई मांग

मझगांव मारपीट मामले में अस्पताल पहुंचे बाबूलाल मरांडी व अन्य भाजपा नेता, निष्पक्ष जांच की उठाई मांग

चाईबासा | मझगांव थाना क्षेत्र में हुई मारपीट की घटना की जानकारी मिलने के बाद नेता प्रतिपक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी, पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा, भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष एवं पूर्व सांसद श्रीमती गीता कोड़ा, पूर्व मंत्री बड़कुवर गागराई, पूर्व विधायक शशिभूषण सामड तथा वरिष्ठ नेता जे.बी. तुबिड़ ने चाईबासा सदर अस्पताल पहुंचकर घायल ग्रामीणों का हालचाल जाना।

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अस्पताल में भर्ती ग्रामीणों ने नेताओं को बताया कि देशाउली में कथित रूप से कचरा फेंके जाने की शिकायत के बाद विवाद उत्पन्न हुआ। ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिस की मौजूदगी में कुछ युवकों ने आदिवासी ग्रामीणों के साथ मारपीट की, लेकिन पुलिस ने उन्हें बचाने के बजाय कोई प्रभावी हस्तक्षेप नहीं किया। ग्रामीणों ने यह भी दावा किया कि इस प्रकार की घटनाएं पूर्व में भी हो चुकी हैं तथा पहले दिए गए आवेदन पर स्थानीय थाना स्तर पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई।

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घटना को गंभीर बताते हुए नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने पुलिस अधीक्षक से दूरभाष पर बातचीत की और मामले में निष्पक्ष एवं त्वरित कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि यदि किसी भी व्यक्ति ने कानून अपने हाथ में लिया है, तो उसके विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए। साथ ही पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ विधिसम्मत कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए।

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भाजपा नेताओं ने आदिवासी ग्रामीणों के साथ मारपीट के आरोपियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि मामले में यदि पुलिस की ओर से किसी प्रकार की लापरवाही बरती गई है, तो इसकी भी निष्पक्ष जांच कर संबंधित थाना प्रभारी के विरुद्ध उचित कार्रवाई की जाए।

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भाजपा नेताओं ने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है और किसी भी समुदाय के व्यक्ति के साथ हिंसा या अन्याय किसी भी परिस्थिति में स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई करने की मांग की।

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आयुष्मान आरोग्य मंदिर की सरकारी जमीन पर कथित अवैध जुताई का मामला, पंचायत प्रतिनिधियों ने लिया संज्ञान

आयुष्मान आरोग्य मंदिर की सरकारी जमीन पर कथित अवैध जुताई का मामला, पंचायत प्रतिनिधियों ने लिया संज्ञान

बंदगांव | प्रखंड के लण्डूपदा स्थित आयुष्मान आरोग्य मंदिर के लिए चिन्हित सरकारी भूमि पर कथित रूप से अज्ञात लोगों द्वारा हल चलाकर जुताई किए जाने का मामला सामने आया है। घटना की जानकारी मिलने पर गांव के मुंडा श्यामघन प्रधान एवं पंचायत के मुखिया कुश पूर्ति ने संयुक्त रूप से स्थल का निरीक्षण कर स्थिति का जायजा लिया।

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निरीक्षण के दौरान मुंडा श्यामघन प्रधान ने कहा कि सरकारी भूमि पर किसी भी प्रकार का अतिक्रमण या अवैध कब्जा स्वीकार्य नहीं है।

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उन्होंने कहा कि विकास योजनाओं के लिए निर्धारित भूमि पर इस प्रकार की गतिविधियां न केवल सरकारी कार्यों को प्रभावित कर सकती हैं, बल्कि गांव में विवाद की स्थिति भी उत्पन्न कर सकती हैं। उन्होंने संबंधित मामले की निष्पक्ष जांच कर आवश्यक कार्रवाई किए जाने की मांग की।

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वहीं, पंचायत के मुखिया कुश पूर्ति ने मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि पंचायत स्तर पर इसकी समीक्षा की जाएगी। उन्होंने बताया कि जल्द ही ग्रामीणों की बैठक बुलाकर पूरे प्रकरण पर चर्चा की जाएगी तथा भविष्य में सरकारी भूमि पर अतिक्रमण रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

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फिलहाल, इस मामले में किसी व्यक्ति की पहचान नहीं हो सकी है और न ही प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि या बयान जारी किया गया है। पंचायत प्रतिनिधियों ने संबंधित अधिकारियों से मामले की जांच कर दोषियों के विरुद्ध आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की है।

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15 दिवसीय योग, आयुर्वेद एवं नशा मुक्ति शिविर का भव्य समापन, नियमित योग अपनाने का लिया संकल्प

15 दिवसीय योग, आयुर्वेद एवं नशा मुक्ति शिविर का भव्य समापन, नियमित योग अपनाने का लिया संकल्प

सरायकेला | सरायकेला-खरसावां जिला चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज द्वारा मारवाड़ी धर्मशाला में आयोजित 15 दिवसीय योग, आयुर्वेद दर्शन एवं नशा मुक्ति शिविर का गुरुवार को भव्य समापन हुआ। समापन समारोह में बड़ी संख्या में व्यापारी, युवा, योग साधक एवं गणमान्य नागरिक शामिल हुए।

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समारोह के दौरान चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल ने मुख्य योग प्रशिक्षक किशोर मिश्रा को अंगवस्त्र एवं पुष्पगुच्छ भेंट कर सम्मानित किया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि नगर पंचायत सरायकेला के अध्यक्ष एवं चैंबर के महासचिव मनोज कुमार चौधरी ने कहा कि वर्तमान समय के तनावपूर्ण जीवन में योग केवल व्यायाम नहीं, बल्कि स्वस्थ, संतुलित और सकारात्मक जीवनशैली का आधार बन चुका है। उन्होंने युवाओं से नशे से दूर रहकर नियमित योग अपनाने की अपील करते हुए कहा कि नशामुक्त युवा ही सशक्त समाज और विकसित राष्ट्र की मजबूत नींव हैं।

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मुख्य योग प्रशिक्षक किशोर मिश्रा ने प्रतिभागियों को विभिन्न योगासन, प्राणायाम एवं ध्यान का अभ्यास कराया। उन्होंने कहा कि नियमित योगाभ्यास से शरीर स्वस्थ, मन शांत और जीवन अनुशासित बनता है। उन्होंने बताया कि आयुर्वेद प्राकृतिक एवं संतुलित जीवन जीने की वैज्ञानिक पद्धति है तथा योग आधुनिक जीवनशैली से जुड़ी अनेक बीमारियों की रोकथाम का प्रभावी माध्यम है।

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इस अवसर पर पतंजलि योगपीठ के जिला प्रतिनिधि नंदकिशोर झा, वीरेंद्र नाथ महतो एवं विश्वनाथ परिहारी ने भी योग और आयुर्वेद के महत्व पर प्रकाश डालते हुए लोगों से प्रतिदिन 30 से 45 मिनट योग करने तथा परिवार के प्रत्येक सदस्य को योग से जोड़ने का आह्वान किया।

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चैंबर अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल ने कहा कि शिविर को लोगों का भरपूर सहयोग और उत्साह मिला। उन्होंने विश्वास जताया कि चैंबर भविष्य में भी व्यापारिक गतिविधियों के साथ-साथ सामाजिक सरोकार एवं स्वास्थ्य जागरूकता से जुड़े कार्यक्रमों का आयोजन करता रहेगा।

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समापन समारोह में गौर गोविंद साह, सत्यनारायण अग्रवाल, संजय अग्रवाल गुप्ता, केशव पड़िहारी, आकाश अग्रवाल, शंकर साहू सहित बड़ी संख्या में व्यापारी, योग साधक एवं नागरिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों ने नियमित योग करने, आयुर्वेदिक जीवनशैली अपनाने तथा नशामुक्त समाज के निर्माण में सक्रिय योगदान देने का संकल्प लिया।

तांतनगर के दो विद्यालयों का उपायुक्त ने किया निरीक्षण, शिक्षा की गुणवत्ता और मध्याह्न भोजन व्यवस्था का लिया जायजा

तांतनगर के दो विद्यालयों का उपायुक्त ने किया निरीक्षण, शिक्षा की गुणवत्ता और मध्याह्न भोजन व्यवस्था का लिया जायजा

चाईबासा | पश्चिमी सिंहभूम के जिला दण्डाधिकारी-सह-उपायुक्त मनीष कुमार ने बुधवार को तांतनगर प्रखंड स्थित मध्य विद्यालय, कोकचो एवं प्राथमिक विद्यालय, गितिलादेर का निरीक्षण कर शैक्षणिक गतिविधियों, आधारभूत सुविधाओं तथा मध्याह्न भोजन योजना के संचालन का विस्तृत जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने विद्यार्थियों को उपलब्ध कराई जा रही शैक्षणिक एवं पोषण संबंधी सुविधाओं का निरीक्षण करते हुए संबंधित अधिकारियों एवं शिक्षकों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

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निरीक्षण की शुरुआत मध्य विद्यालय, कोकचो से हुई। उपायुक्त ने विभिन्न कक्षाओं का भ्रमण कर विद्यार्थियों से आत्मीय संवाद किया तथा हिन्दी, अंग्रेजी, गणित और सामान्य ज्ञान सहित विभिन्न विषयों से जुड़े प्रश्न पूछकर उनकी सीखने की क्षमता एवं शैक्षणिक स्तर का आकलन किया। विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक प्रश्नों के उत्तर दिए।
उपायुक्त ने बच्चों को नियमित रूप से विद्यालय आने, अनुशासन का पालन करने, पुस्तकों का निरंतर अध्ययन करने तथा जीवन में बड़े लक्ष्य निर्धारित कर उन्हें प्राप्त करने के लिए मेहनत करने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा ही उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव है और प्रत्येक विद्यार्थी को उपलब्ध अवसरों का पूरा लाभ उठाना चाहिए।

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उन्होंने विद्यालय के शिक्षकों से विद्यार्थियों की उपस्थिति, पाठ्यक्रम की प्रगति, शैक्षणिक गतिविधियों और सीखने के परिणामों की जानकारी ली। साथ ही निर्देश दिया कि प्रत्येक बच्चे की सीखने की क्षमता के अनुरूप शिक्षण कार्य सुनिश्चित किया जाए तथा जिन विद्यार्थियों को अतिरिक्त सहयोग की आवश्यकता है, उन्हें विशेष मार्गदर्शन प्रदान किया जाए। उन्होंने विद्यालयों में नियमित शैक्षणिक वातावरण, नवाचार, रचनात्मकता एवं नैतिक मूल्यों के विकास पर भी विशेष बल दिया।

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इसके बाद उपायुक्त ने प्राथमिक विद्यालय, गितिलादेर का निरीक्षण किया। उन्होंने विद्यालय की पाकशाला का निरीक्षण कर भोजन तैयार करने की प्रक्रिया, रसोईघर की स्वच्छता, खाद्यान्न के सुरक्षित भंडारण, पेयजल व्यवस्था एवं भोजन वितरण प्रणाली का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने स्वयं मध्याह्न भोजन का स्वाद चखकर उसकी गुणवत्ता, स्वच्छता, स्वाद एवं पोषण स्तर का भी आकलन किया।
उपायुक्त ने कहा कि मध्याह्न भोजन योजना केवल बच्चों को भोजन उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उनके बेहतर स्वास्थ्य, पोषण एवं विद्यालय में नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने का महत्वपूर्ण माध्यम है। इसलिए योजना के संचालन में गुणवत्ता एवं स्वच्छता के सभी निर्धारित मानकों का सख्ती से पालन किया जाना चाहिए।

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निरीक्षण के दौरान उन्होंने कक्षाओं की व्यवस्था, पेयजल, शौचालय एवं अन्य आधारभूत सुविधाओं का भी अवलोकन किया। संबंधित अधिकारियों एवं विद्यालय प्रबंधन समिति को निर्देश दिया गया कि विद्यालय परिसर को स्वच्छ, सुरक्षित एवं बच्चों के अनुकूल बनाए रखने के लिए नियमित निगरानी सुनिश्चित की जाए तथा किसी भी प्रकार की कमी पाए जाने पर उसका त्वरित निराकरण किया जाए।
इस अवसर पर उपायुक्त मनीष कुमार ने कहा कि जिला प्रशासन की प्राथमिकता सरकारी विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, बेहतर आधारभूत सुविधाएं एवं विद्यार्थियों के समग्र विकास के लिए अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराना है। इसी उद्देश्य से समय-समय पर विद्यालयों का निरीक्षण कर शैक्षणिक गतिविधियों और विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन की सतत समीक्षा की जा रही है।

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उन्होंने कहा कि बच्चों को बेहतर शिक्षा, पौष्टिक मध्याह्न भोजन और सकारात्मक शिक्षण वातावरण उपलब्ध कराने के लिए संबंधित विभागों, शिक्षकों एवं विद्यालय प्रबंधन समितियों को समन्वित रूप से कार्य करना होगा, ताकि प्रत्येक विद्यार्थी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त कर अपने जीवन में नई ऊंचाइयों तक पहुंच सके।

‘नमस्ते दिवस’ पर सफाई कर्मियों को वितरित हुई PPE किट, सुरक्षित कार्य वातावरण पर दिया गया जोर

‘नमस्ते दिवस’ पर सफाई कर्मियों को वितरित हुई PPE किट, सुरक्षित कार्य वातावरण पर दिया गया जोर

चक्रधरपुर | नगर परिषद कार्यालय में मंगलवार को ‘नमस्ते दिवस’ का आयोजन किया गया। इस अवसर पर नगर परिषद अध्यक्ष सन्नी उराँव ने सफाई कर्मियों के बीच व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण (PPE) किट का वितरण किया और उनके सुरक्षित एवं सम्मानजनक कार्य वातावरण सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता दोहराई।

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कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कार्यपालक पदाधिकारी ने राष्ट्रीय एक्शन फॉर मैकेनाइज्ड सैनिटेशन इकोसिस्टम (NAMASTE) योजना की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि योजना का मुख्य उद्देश्य सीवर एवं सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान होने वाली दुर्घटनाओं और मौतों को पूरी तरह समाप्त करना, खतरनाक सफाई कार्यों का मशीनीकरण करना तथा सफाई कर्मियों को मानव मल के सीधे संपर्क से बचाना है।

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उन्होंने कहा कि योजना के तहत सफाई कर्मियों को स्वयं सहायता समूहों से जोड़कर स्वरोजगार के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। साथ ही अब कूड़ा बीनने वाले श्रमिकों को भी योजना के दायरे में शामिल किया गया है, ताकि उन्हें भी सामाजिक सुरक्षा एवं आजीविका से जुड़ी सुविधाओं का लाभ मिल सके।

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कार्यपालक पदाधिकारी ने बताया कि योजना के अंतर्गत सफाई कर्मियों को निःशुल्क पीपीई किट, सुरक्षा उपकरण, कौशल विकास प्रशिक्षण, आयुष्मान भारत स्वास्थ्य बीमा, मशीनों की खरीद पर सब्सिडी तथा रियायती ऋण जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। इसके अलावा, जो श्रमिक वैकल्पिक रोजगार अपनाना चाहते हैं, उन्हें स्वरोजगार शुरू करने के लिए आर्थिक सहायता भी प्रदान की जाती है।

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उन्होंने जानकारी दी कि योजना का लाभ लेने के लिए आवेदक अथवा उसका परिवार सीवर सफाई, सेप्टिक टैंक सफाई, हाथ से मैला ढोने या कचरा प्रबंधन कार्य से जुड़ा होना चाहिए तथा संबंधित शहरी स्थानीय निकाय के डेटाबेस में पंजीकृत होना आवश्यक है। आवेदन के लिए आधार कार्ड या पैन कार्ड, निवास प्रमाण पत्र, कार्य प्रमाण पत्र, बैंक खाते का विवरण तथा पासपोर्ट आकार के फोटो सहित अन्य आवश्यक दस्तावेज जमा करने होंगे।

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कार्यक्रम में नगर परिषद के पदाधिकारी, कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में सफाई कर्मी उपस्थित रहे।