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विपद तारिणी पूजा श्रद्धा और उल्लास के साथ संपन्न, सरायकेला रथ मेला बना आस्था और संस्कृति का केंद्र

विपद तारिणी पूजा श्रद्धा और उल्लास के साथ संपन्न, सरायकेला रथ मेला बना आस्था और संस्कृति का केंद्र

सरायकेला | सरायकेला स्थित गुंडिचा मंदिर परिसर में आयोजित विपद तारिणी पूजा मंगलवार को श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ संपन्न हुई। इस अवसर पर हजारों महिलाओं एवं श्रद्धालुओं ने मां विपद तारिणी की विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर अपने परिवार की सुख-समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और मंगलमय जीवन की कामना की। मंदिर परिसर पूरे दिन भक्तिमय वातावरण से सराबोर रहा, जहां श्रद्धालुओं ने व्रत एवं पूजा-अनुष्ठान संपन्न किए।

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विपद तारिणी पूजा एवं श्री जगन्नाथ रथ मेला के सफल आयोजन में जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन, श्री जगन्नाथ मेला समिति, सेवायतगण, पुजारियों, स्वयंसेवकों, मीडिया प्रतिनिधियों तथा विभिन्न सामाजिक संस्थाओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

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श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए प्रशासन द्वारा सुरक्षा, यातायात एवं भीड़ प्रबंधन के व्यापक इंतजाम किए गए, जिससे हजारों श्रद्धालुओं ने शांतिपूर्ण एवं सुव्यवस्थित ढंग से दर्शन एवं पूजा का लाभ उठाया।

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श्री जगन्नाथ मेला समिति के अध्यक्ष मनोज कुमार चौधरी ने कहा कि सरायकेला का ऐतिहासिक श्री जगन्नाथ रथ मेला अब केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आस्था, संस्कृति और सनातन परंपरा का विराट महोत्सव बन चुका है। उन्होंने कहा कि रांची के बाद सरायकेला का रथ मेला झारखंड के प्रमुख धार्मिक आयोजनों में अपनी विशिष्ट पहचान बना चुका है। यहां की रथयात्रा एवं अधिकांश धार्मिक अनुष्ठान श्रीजगन्नाथ पुरी की परंपरा के अनुरूप संपन्न होते हैं, जो इस मेले की सबसे बड़ी विशेषता है।

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उन्होंने बताया कि कोल्हान, झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओडिशा सहित विभिन्न क्षेत्रों से प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु महाप्रभु श्रीजगन्नाथ, श्रीबलभद्र एवं देवी सुभद्रा के दर्शन के लिए सरायकेला पहुंच रहे हैं। महाप्रभु के दिव्य दर्शन तथा भव्य रथ मेला श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।

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श्रद्धा, भक्ति और सांस्कृतिक परंपराओं से सराबोर यह ऐतिहासिक मेला क्षेत्रीय एकता, सामाजिक सौहार्द और सनातन संस्कृति का जीवंत प्रतीक बनकर उभर रहा है।