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मनरेगा आम बागवानी योजना में अनियमितता का आरोप, दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग

मनरेगा आम बागवानी योजना में अनियमितता का आरोप, दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग

जमशेदपुर/डुमरिया | झारखंड जनशक्ति क्रांतिकारी मोर्चा के केंद्रीय अध्यक्ष वीरसिंह देवगम ने उपायुक्त (डीसी) को ज्ञापन सौंपकर डुमरिया प्रखंड में मनरेगा के तहत संचालित आम बागवानी योजना में कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच कराने तथा संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है।

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उपायुक्त को सौंपे गए पत्र में श्री देवगम ने आरोप लगाया है कि वर्ष 2020 में केंदुआ पंचायत के रांगामटिया गांव निवासी विधवा महिला श्रीमती छीता मार्डी (पति स्वर्गीय भोगल मार्डी) की भूमि पर मनरेगा के तहत आम बागवानी योजना स्वीकृत की गई थी। हालांकि, योजना स्थल पर आम के पौधे लगाए बिना ही योजना की राशि की निकासी कर योजना को बंद कर दिया गया।

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उन्होंने बताया कि मामले की जानकारी मिलने पर आरटीआई कार्यकर्ता सिर्मा देवगम ने प्रधानमंत्री कार्यालय, नई दिल्ली में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए प्रधानमंत्री कार्यालय ने झारखंड सरकार के उप सचिव एम.डी. हुसैन के माध्यम से संबंधित विभाग से 15 दिनों के भीतर जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था।

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ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि शिकायत की जानकारी मिलने के बाद संबंधित अधिकारियों ने अपने विरुद्ध संभावित कार्रवाई से बचने के उद्देश्य से लाभुक श्रीमती छीता मार्डी के घर जाकर उन पर दबाव बनाने का प्रयास किया। आरोप है कि अधिकारियों ने उनसे जबरन अंगूठा निशान लेने की कोशिश की, लेकिन लाभुक द्वारा इनकार किए जाने पर कथित रूप से फर्जी अंगूठा निशान लगाकर अपने पक्ष में जांच रिपोर्ट तैयार कर प्रधानमंत्री कार्यालय को भेज दी गई।

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रिपोर्ट में दावा किया गया कि आम बागवानी का कार्य पूर्ण कर लिया गया है, योजना की घेराबंदी की गई है तथा लाभुक को खाद भी उपलब्ध कराई गई है। जबकि शिकायतकर्ता का कहना है कि वास्तविक स्थिति इससे भिन्न है। उनके अनुसार संबंधित भूमि पर न तो आम के पौधे लगाए गए हैं, न ही घेराबंदी की गई है और न ही लाभुक को खाद उपलब्ध कराई गई है। योजना स्थल पर केवल गड्ढे खोदकर छोड़ दिए गए हैं।

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वीरसिंह देवगम ने उपायुक्त से पूरे मामले की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराने तथा मनरेगा कनीय अभियंता बाबूलाल हेम्ब्रम, सहायक अभियंता राज शंकर मुर्मू एवं पंचायत राज पदाधिकारी चंडी चरण भोल सहित दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध विधिसम्मत कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की है।

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दिव्यांग किसान सोनाराम हेंब्रम बने प्रेरणा के स्रोत, आम बागवानी और फूलों की खेती से लिखी सफलता की कहानी

दिव्यांग किसान सोनाराम हेंब्रम बने प्रेरणा के स्रोत, आम बागवानी और फूलों की खेती से लिखी सफलता की कहानी

बंदगांव | अक्सर यह धारणा बनाई जाती है कि शारीरिक चुनौतियां व्यक्ति की प्रगति में बाधा बनती हैं, लेकिन बंदगांव प्रखंड की लांडूपोदा पंचायत अंतर्गत डोमगोड़ा गांव निवासी दिव्यांग किसान सोनाराम हेंब्रम ने अपनी मेहनत, लगन और दृढ़ इच्छाशक्ति से इस सोच को गलत साबित कर दिया है।

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शारीरिक चुनौतियों के बावजूद वे कृषि एवं बागवानी के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य कर रहे हैं और क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गए हैं।

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सोनाराम हेंब्रम ने अपने खेत में आम की बागवानी के साथ-साथ फूलों की खेती को भी व्यवस्थित एवं आकर्षक ढंग से विकसित किया है। उनकी बागवानी न केवल आर्थिक रूप से लाभदायक साबित हो रही है, बल्कि क्षेत्र के किसानों को आधुनिक कृषि और उद्यानिकी अपनाने के लिए भी प्रेरित कर रही है।

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बंदगांव प्रखंड के कृषि पदाधिकारी विजय सिंह जोंकों ने सोनाराम हेंब्रम के बागान का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने आम के बगीचे एवं फूलों की खेती का अवलोकन किया और सोनाराम की मेहनत, समर्पण तथा नवाचार की सराहना की।

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कृषि पदाधिकारी ने कहा कि सीमित संसाधनों और शारीरिक चुनौतियों के बावजूद जिस प्रकार सोनाराम ने बागवानी को सफल बनाया है, वह अन्य किसानों के लिए एक अनुकरणीय उदाहरण है।

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सोनाराम हेंब्रम की सफलता यह साबित करती है कि यदि व्यक्ति में दृढ़ इच्छाशक्ति, परिश्रम और आत्मविश्वास हो तो किसी भी चुनौती को अवसर में बदला जा सकता है। उनकी उपलब्धि ग्रामीण क्षेत्र के किसानों और युवाओं के लिए प्रेरणादायक संदेश है।

जमशेदपुर : बस किराया बढ़ोतरी फिलहाल टली, <br>अधिकांश रूटों पर पुराने दरों पर ही सफर

जमशेदपुर : बस किराया बढ़ोतरी फिलहाल टली,
अधिकांश रूटों पर पुराने दरों पर ही सफर

जमशेदपुर | शहर के भुइयांडीह स्थित जेपी सेतु बस पड़ाव से झारखंड के विभिन्न जिलों तथा बिहार के लिए संचालित बसों के किराये में प्रस्तावित 15 प्रतिशत बढ़ोतरी फिलहाल लागू नहीं हो सकी है। हालांकि, जमशेदपुर बस ऑनर वेलफेयर एसोसिएशन ने 6 जून से नई किराया दरें लागू करने की घोषणा की थी, लेकिन यात्रियों की कम संख्या और ऑफ-सीजन के कारण अधिकांश बस संचालक अभी भी पुरानी दरों पर ही किराया वसूल रहे हैं।

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जानकारी के अनुसार, टाटा-चाईबासा रूट पर कुछ बसों में यात्रियों से पहले के 100 रुपये के स्थान पर 120 रुपये तक किराया लिया जा रहा है।

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इसे लेकर कई स्थानों पर यात्रियों और बस कर्मियों के बीच नोकझोंक की स्थिति भी देखने को मिली है। वहीं, जमशेदपुर से धनबाद, बोकारो और पुरुलिया जाने वाली बसों में फिलहाल किराये में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है तथा यात्रियों से पुरानी दरों के अनुसार ही शुल्क लिया जा रहा है।

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जमशेदपुर बस ऑनर वेलफेयर एसोसिएशन के मुख्य संरक्षक उपेंद्र शर्मा ने बताया कि डीजल की बढ़ती कीमतों, वाहनों के रखरखाव तथा अन्य परिचालन खर्चों में लगातार वृद्धि के कारण किराया बढ़ाना बस मालिकों की मजबूरी बन गया है। इस संबंध में एसोसिएशन की ओर से एक सर्कुलर भी जारी किया जा चुका है।

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उन्होंने कहा कि वर्तमान में गर्मी और ऑफ-सीजन के कारण यात्रियों की संख्या में काफी कमी आई है। ऐसे में बढ़े हुए किराये को सख्ती से लागू करने पर यात्रियों के वैकल्पिक साधनों की ओर रुख करने की संभावना बढ़ जाती है, जिससे बस संचालकों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। यही कारण है कि फिलहाल अधिकांश रूटों पर पुराने किराये को ही बरकरार रखा गया है।

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एसोसिएशन का कहना है कि जैसे ही यात्रियों की संख्या में वृद्धि होगी और यात्रा सीजन शुरू होगा, नई किराया दरों को पूरी तरह लागू करने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे। ऐसे में आने वाले दिनों में यात्रियों को बस यात्रा के लिए अधिक किराया चुकाना पड़ सकता है।

घरेलू एलपीजी सिलेंडर 29 रुपये महंगा, दिल्ली में कीमत 942 रुपये हुई

घरेलू एलपीजी सिलेंडर 29 रुपये महंगा, दिल्ली में कीमत 942 रुपये हुई

नई दिल्ली | आम उपभोक्ताओं को एक बार फिर महंगाई का झटका लगा है। घरेलू रसोई गैस (एलपीजी) सिलेंडर की कीमत में 29 रुपये की बढ़ोतरी की गई है। 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत दिल्ली में 913 रुपये से बढ़कर 942 रुपये हो गई है। नई दरें 7 जून से प्रभावी होंगी।

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जानकारी के अनुसार, पिछले तीन महीनों में यह दूसरी बार है जब घरेलू गैस सिलेंडर के दाम बढ़ाए गए हैं। इससे पहले मार्च में प्रति सिलेंडर 60 रुपये की वृद्धि की गई थी। इस ताजा बढ़ोतरी के बाद तीन महीनों में 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत कुल 89 रुपये बढ़ चुकी है।

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विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक ऊर्जा बाजार में लगातार बढ़ती कीमतों तथा पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव का असर भारत समेत कई देशों पर पड़ रहा है। ईंधन आपूर्ति शृंखला प्रभावित होने के कारण एलपीजी के साथ-साथ पेट्रोल, डीजल और सीएनजी की कीमतों पर भी दबाव बना हुआ है।

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सूत्रों के मुताबिक, सरकारी तेल विपणन कंपनियों को घरेलू एलपीजी सिलेंडर की बिक्री पर प्रति सिलेंडर लगभग 703 रुपये का नुकसान हो रहा था। इसी कारण कीमतों में संशोधन का निर्णय लिया गया है।

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ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि खाड़ी क्षेत्र में स्थिति सामान्य होने और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से जहाजों की निर्बाध आवाजाही बहाल होने के बाद ईंधन की कीमतों में कुछ राहत मिल सकती है। भारत अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए बड़े पैमाने पर कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस का आयात करता है, जिसका महत्वपूर्ण हिस्सा खाड़ी देशों से आता है।

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हालांकि, ताजा मूल्य वृद्धि का सीधा असर आम उपभोक्ताओं के घरेलू बजट पर पड़ने की संभावना है, जिससे रसोई का खर्च और बढ़ सकता है।

डिंबुली की 110.53 एकड़ रैयती भूमि वापसी मामले में NCST और जनजातीय कार्य मंत्रालय ने लिया संज्ञान, जिला प्रशासन से मांगी रिपोर्ट

डिंबुली की 110.53 एकड़ रैयती भूमि वापसी मामले में NCST और जनजातीय कार्य मंत्रालय ने लिया संज्ञान, जिला प्रशासन से मांगी रिपोर्ट

चाईबासा | पश्चिम सिंहभूम जिले के मनोहरपुर प्रखंड अंतर्गत डिंबुली राजस्व ग्राम में उद्योग स्थापना के नाम पर अधिग्रहित की गई 110.53 एकड़ रैयती भूमि की वापसी की मांग अब निर्णायक चरण में पहुंचती नजर आ रही है। वर्षों से न्याय की प्रतीक्षा कर रहे प्रभावित रैयतों के पक्ष में राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (NCST) तथा भारत सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय ने संज्ञान लेते हुए झारखंड सरकार और जिला प्रशासन को मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।

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जानकारी के अनुसार, वर्ष 2005 में M/s V. Dempo & Co. Pvt. Ltd. द्वारा उद्योग स्थापना के उद्देश्य से छोटानागपुर काश्तकारी (CNT) अधिनियम की धारा-49 के तहत डिंबुली क्षेत्र के आदिवासी रैयतों से 110.53 एकड़ भूमि खरीदी गई थी। उस समय संबंधित टी.ए. मिस केस (T.A. Misc. Case) की सुनवाई के दौरान पश्चिम सिंहभूम के उपायुक्त द्वारा यह शर्त निर्धारित की गई थी कि तय अवधि के भीतर औद्योगिक इकाई स्थापित की जाएगी। ऐसा नहीं होने की स्थिति में भूमि मूल रैयतों को वापस लौटाई जाएगी।

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हालांकि, भूमि अधिग्रहण के लगभग दो दशक बाद भी न तो क्षेत्र में कोई उद्योग स्थापित हो सका और न ही भूमि रैयतों को वापस की गई। इसके बाद प्रभावित रैयतों ने अपनी जमीन की वापसी की मांग को लेकर लगातार आवाज उठाई।
इस मुद्दे को लेकर भारत आदिवासी पार्टी, पश्चिम सिंहभूम के जिलाध्यक्ष सुशील बारला के नेतृत्व में रैयतों ने वर्ष 2022 और 2023 में जिला प्रशासन तथा राज्य सरकार को कई ज्ञापन सौंपे थे। इसके बाद 25 फरवरी 2026 को राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग और भारत सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय को विस्तृत आवेदन भेजकर हस्तक्षेप की मांग की गई।
आवेदन पर संज्ञान लेते हुए राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने 18 मार्च 2026 को पश्चिम सिंहभूम के उपायुक्त को नोटिस जारी कर 15 दिनों के भीतर मामले से संबंधित रिपोर्ट तथा अब तक की गई कार्रवाई का विवरण उपलब्ध कराने को कहा है। वहीं, भारत सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय ने 21 मई 2026 को झारखंड सरकार के जनजातीय कल्याण विभाग को पत्र भेजकर मामले की जांच कर उचित कार्रवाई करने का अनुरोध किया है।

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केंद्र सरकार और राष्ट्रीय आयोग के हस्तक्षेप से डिंबुली के प्रभावित रैयतों में नई उम्मीद जगी है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि निर्धारित शर्तों के अनुरूप उद्योग स्थापित नहीं हुआ है, तो CNT अधिनियम की मूल भावना के तहत उनकी पुश्तैनी जमीन उन्हें वापस मिलनी चाहिए।

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भारत आदिवासी पार्टी के जिलाध्यक्ष सुशील बारला ने कहा कि यह केवल भूमि का मामला नहीं, बल्कि आदिवासी समुदाय के अधिकार, अस्तित्व और न्याय से जुड़ा विषय है। उन्होंने कहा कि लंबे संघर्ष के बाद राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग और जनजातीय कार्य मंत्रालय द्वारा मामले का संज्ञान लिया जाना रैयतों की लड़ाई की बड़ी सफलता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि संबंधित विभाग शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेकर प्रभावित परिवारों को न्याय दिलाएंगे।

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फिलहाल, इस मामले में जिला प्रशासन और झारखंड सरकार की आगामी कार्रवाई पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि वर्षों से लंबित इस मामले में प्रभावित रैयतों को उनकी भूमि वापस मिल पाती है या नहीं।

जगन्नाथपुर: देवी फ्यूल्स पेट्रोल पंप का भव्य उद्घाटन, सांसद जोबा माझी ने किया शुभारंभ

जगन्नाथपुर: देवी फ्यूल्स पेट्रोल पंप का भव्य उद्घाटन, सांसद जोबा माझी ने किया शुभारंभ

जगन्नाथपुर (सिंहभूम) | जगन्नाथपुर के पोटका क्षेत्र में स्थित देवी फ्यूल्स पेट्रोल पंप का शुक्रवार को भव्य उद्घाटन किया गया। इस नए पेट्रोल पंप का उद्घाटन सिंहभूम की सांसद जोबा माझी ने नारियल फोड़कर और फीता काटकर विधिवत रूप से किया।

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यह पेट्रोल पंप पहले से ही चक्रधरपुर क्षेत्र में ग्राहकों की पहली पसंद बना हुआ है, और अब इसकी सेवाएं जगन्नाथपुर तथा आसपास के क्षेत्रों के लोगों को भी उपलब्ध होंगी।

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इस अवसर पर पेट्रोल पंप के संचालक उदय माझी ने कहा कि चक्रधरपुर की तरह ही जगन्नाथपुर में भी ग्राहकों को गुणवत्तापूर्ण ईंधन, सही मात्रा और बेहतर ग्राहक सेवा उपलब्ध कराई जाएगी। उन्होंने बताया कि नए पंप के शुरू होने से स्थानीय लोगों को ईंधन के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा, जिससे समय और संसाधनों की बचत होगी।

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उद्घाटन समारोह में झामुमो के केंद्रीय सदस्य अभिषेक सिंकु, डॉ. धनु माझी, पार्वती सामंता, सोनू सिरका, देवा मुर्मू, भीम माझी, संतोष मिश्रा सहित बड़ी संख्या में स्थानीय लोग एवं ग्राहक उपस्थित रहे।

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चाईबासा: बिरसा हरित ग्राम योजना के आमों की बिक्री के लिए दूसरे बिक्री केंद्र का उद्घाटन

चाईबासा: बिरसा हरित ग्राम योजना के आमों की बिक्री के लिए दूसरे बिक्री केंद्र का उद्घाटन

चाईबासा | पश्चिमी सिंहभूम जिले में मनरेगा अंतर्गत संचालित बिरसा हरित ग्राम योजना के तहत उत्पादित फलों के विपणन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुक्रवार को सदर अनुमंडल कार्यालय के द्वितीय प्रवेश द्वार पर दूसरे आम बिक्री केंद्र का उद्घाटन किया गया। इस अवसर पर सदर अनुमंडल पदाधिकारी संजय कुमार, भूमि सुधार उप समाहर्ता जीतराय मुर्मू, सामाजिक कार्यकर्ता त्रिशानु राय सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

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जिला प्रशासन द्वारा प्रोजेक्ट बदलाव के तहत झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसायटी (जेएसएलपीएस) के समन्वित प्रयासों से संचालित इस पहल का उद्देश्य किसानों एवं लाभुकों को उनके उत्पादों के लिए बेहतर बाजार उपलब्ध कराना है। कार्यक्रम के दौरान खूंटपानी प्रखंड की पूर्णिया पंचायत की बिरसा हरित ग्राम योजना की लाभुक सुनीता होनहागा ने अपने बागान में उत्पादित आमों की बिक्री के लिए स्टॉल लगाया।

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अधिकारियों ने बताया कि इस व्यवस्था के माध्यम से स्थानीय उत्पादकों को सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंचने का अवसर मिल रहा है। इससे बिचौलियों पर निर्भरता कम होगी तथा किसानों को उनके उत्पादों का बेहतर मूल्य मिलने की संभावना बढ़ेगी।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सदर अनुमंडल पदाधिकारी संजय कुमार ने कहा कि बिरसा हरित ग्राम योजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण किसानों की आय में वृद्धि करना और उन्हें सीधे बाजार से जोड़ना है। उन्होंने कहा कि प्रोजेक्ट बदलाव के तहत जेएसएलपीएस की सहभागिता से किसानों को उत्पादन के साथ-साथ विपणन व्यवस्था से जोड़ने की दिशा में भी प्रभावी कार्य किया जा रहा है।

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उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन किसानों की आजीविका को सुदृढ़ करने तथा स्थानीय उत्पादों के लिए बेहतर विपणन व्यवस्था विकसित करने के लिए निरंतर प्रयासरत है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सके।

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इस अवसर पर सहायक जिला परियोजना पदाधिकारी विवेक कुमार पाढ़ी, जिला आजीविका प्रबंधक पलाश भरत राठौर सहित बड़ी संख्या में स्थानीय लोग उपस्थित थे।

सरायकेला: डीएमएफटी शासी परिषद की बैठक में विकास योजनाओं की समीक्षा, जनकल्याणकारी कार्यों को प्राथमिकता देने के निर्देश

सरायकेला: डीएमएफटी शासी परिषद की बैठक में विकास योजनाओं की समीक्षा, जनकल्याणकारी कार्यों को प्राथमिकता देने के निर्देश

सरायकेला । समाहरणालय सभागार में उपायुक्त नीतिश कुमार सिंह की अध्यक्षता में जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट (डीएमएफटी) की शासी परिषद की बैठक आयोजित की गई। बैठक में खनन प्रभावित क्षेत्रों में संचालित विभिन्न विकास योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई तथा नई योजनाओं के चयन और उनके प्रभावी क्रियान्वयन पर विस्तृत चर्चा हुई।

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बैठक में खरसावां विधायक दशरथ गागराई, ईचागढ़ विधायक सविता महतो, जिला परिषद अध्यक्ष सोनाराम बोदरा, उप विकास आयुक्त रीना हांसदा सहित शासी परिषद के सदस्य एवं विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।

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समीक्षा के दौरान स्वास्थ्य, शिक्षा, कौशल विकास, पेयजल, आंगनबाड़ी भवन निर्माण, विद्यालयों की आधारभूत संरचना सुदृढ़ीकरण, कृषि एवं आजीविका संवर्द्धन तथा स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार से संबंधित योजनाओं की प्रगति पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।

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परिषद के सदस्यों ने जिले में हड्डी रोग विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने, शव वाहनों की संख्या बढ़ाने, बंद पड़े कोल्ड स्टोरेज को पुनः संचालित करने तथा जर्जर आंगनबाड़ी भवनों के निर्माण जैसे महत्वपूर्ण सुझाव दिए।
उपायुक्त नीतिश कुमार सिंह ने संबंधित विभागों को प्राप्त सुझावों पर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश देते हुए कहा कि डीएमएफटी निधि का उपयोग खनन प्रभावित क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य, आधारभूत संरचना, कौशल विकास एवं आजीविका संवर्द्धन जैसी जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए प्राथमिकता के आधार पर किया जाए, ताकि स्थानीय समुदायों को अधिकतम लाभ मिल सके।

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बैठक के दौरान विभिन्न विभागों द्वारा योजनाओं की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की गई। साथ ही परिषद के सदस्यों द्वारा दिए गए सुझावों के आधार पर भावी कार्ययोजना एवं विकास कार्यों को और अधिक प्रभावी बनाने के उपायों पर भी चर्चा की गई।

कुचाई में उत्पाद विभाग की बड़ी कार्रवाई, चार अवैध महुआ चुलाई भट्टियां ध्वस्त

कुचाई में उत्पाद विभाग की बड़ी कार्रवाई, चार अवैध महुआ चुलाई भट्टियां ध्वस्त

कुचाई | जिले में अवैध शराब के निर्माण, भंडारण और बिक्री पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने के उद्देश्य से चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत उत्पाद विभाग ने कुचाई थाना क्षेत्र के जिलिंग्दा गांव में सघन छापेमारी अभियान चलाया। कार्रवाई के दौरान चार अवैध महुआ चुलाई भट्टियों को ध्वस्त कर दिया गया तथा भारी मात्रा में अवैध शराब निर्माण में प्रयुक्त सामग्री बरामद की गई।

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उत्पाद विभाग को प्राप्त गुप्त सूचना के आधार पर बुधवार को की गई इस छापेमारी में करीब 1300 किलोग्राम जावा महुआ और 30 लीटर अवैध महुआ चुलाई शराब बरामद की गई। बरामद सामग्री को जब्त करने के बाद नियमानुसार नष्ट कर दिया गया।

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विभागीय अधिकारियों ने बताया कि छापेमारी के दौरान चिन्हित अवैध चुलाई अड्डों के संचालकों के विरुद्ध झारखंड उत्पाद अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज करने की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है। अभियान के दौरान क्षेत्र में अवैध शराब कारोबार से जुड़े अन्य संभावित ठिकानों की भी जांच की गई।

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जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि अवैध शराब के निर्माण, परिवहन, भंडारण एवं बिक्री में संलिप्त व्यक्तियों के खिलाफ आगे भी लगातार और कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी। प्रशासन ने आम नागरिकों से अपील की है कि अवैध शराब से संबंधित किसी भी गतिविधि की जानकारी तत्काल संबंधित विभाग को दें, ताकि समय रहते प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

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प्रशासन के अनुसार, अवैध शराब का कारोबार जनस्वास्थ्य, सामाजिक सुरक्षा तथा कानून-व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा है। इसी को देखते हुए जिले में इसके विरुद्ध विशेष अभियान लगातार चलाया जा रहा है।

चिरिया: टुंगविल माइंस के पुनः संचालन की सुगबुगाहट के बीच ग्रामीणों ने खोला मोर्चा, स्थानीय युवाओं को रोजगार और मुआवजे की मांग

चिरिया: टुंगविल माइंस के पुनः संचालन की सुगबुगाहट के बीच ग्रामीणों ने खोला मोर्चा, स्थानीय युवाओं को रोजगार और मुआवजे की मांग

चिरिया । बंद पड़ी टुंगविल माइंस के पुनः संचालन की चर्चाओं के बीच स्थानीय ग्रामीणों और बेरोजगार युवाओं ने अपने अधिकारों को लेकर आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है। बुधवार को चिरिया टुंगविल माइंस से प्रभावित छह गांवों—चिरिया, बिनुवा, अंकुवा, लोइडी, टिमरा और सोंगा—के ग्रामीणों की एक सामूहिक बैठक हाट परिसर में आयोजित की गई।

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प्रकाश सिद्धू की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में पांच गांवों के पारंपरिक मुंडाओं सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण और युवा शामिल हुए। बैठक के दौरान वक्ताओं ने सेल (SAIL) प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वर्षों से जारी खनन गतिविधियों के कारण स्थानीय लोगों की उपजाऊ कृषि भूमि और खलिहान प्रभावित हुए हैं। साथ ही क्षेत्र की नदियों का पानी भी प्रदूषित हुआ है, जिससे किसानों को लगातार आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।

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ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि माइंस से निकलने वाले अपशिष्ट पदार्थों के कारण खेतों का कटाव बढ़ा है और प्रभावित परिवारों को आज तक उचित मुआवजा नहीं मिल सका है। उन्होंने कहा कि पीढ़ियों से इस समस्या का सामना करने के बावजूद उनकी मांगों की अनदेखी की जाती रही है।


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बैठक में उपस्थित युवाओं ने भी नाराजगी जताते हुए कहा कि सेल प्रबंधन स्थानीय प्रभावित परिवारों के युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता देने के बजाय बाहरी लोगों को अवसर दे रहा है। इसे स्थानीय लोगों के साथ अन्याय बताते हुए युवाओं ने रोजगार में प्राथमिकता सुनिश्चित करने की मांग की।


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सेल प्रबंधन की कथित वादाखिलाफी के विरोध में ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से 3 जून से आंदोलन शुरू करने का निर्णय लिया। आंदोलन की प्रमुख मांगों में प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा, स्थानीय युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता तथा क्षेत्रीय हितों की रक्षा शामिल है।
बैठक में मुंडा विजय लागुरी, सोमा चेरवा, गांजो सुरीन, माडु चेरवा सहित कई ग्रामीण और युवा उपस्थित थे।