जगन्नाथपुर में संदिग्ध फोन हैकिंग, बिना भुगतान किए खाते से उड़े ₹1 लाख

पश्चिम सिंहभूम जिले के जगन्नाथपुर निवासी कृष्णा चतर के बैंक खाते से ₹1,00,000 की ऑनलाइन निकासी का मामला सामने आया है। पीड़ित का दावा है कि घटना के समय उनका मोबाइल फोन घर में ही रखा हुआ था और उन्होंने स्वयं कोई UPI भुगतान नहीं किया। इसके बावजूद उनके बैंक खाते से Amazon Pay UPI के माध्यम से ₹1 लाख का सफल ट्रांजैक्शन दर्ज हुआ।

पीड़ित के अनुसार, जब उन्होंने बैंक खाते और ट्रांजैक्शन हिस्ट्री की जांच की, तब उन्हें खाते से ₹1,00,000 डेबिट होने की जानकारी मिली। उनका कहना है कि उन्होंने न तो किसी को अपना UPI PIN बताया और न ही स्वयं उक्त भुगतान किया। घटना के बाद उन्होंने इसे संभावित साइबर धोखाधड़ी का मामला बताते हुए संबंधित एजेंसियों से जांच की मांग की है।

मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कृष्णा दिग्गी (IT Professional, Cyber Security Expert ) ने कहा कि प्रारंभिक तथ्यों के आधार पर यह एक गंभीर साइबर सुरक्षा घटना प्रतीत होती है। उन्होंने आशंका जताई कि मोबाइल डिवाइस में किसी प्रकार का मालवेयर युक्त APK, रिमोट एक्सेस एप्लिकेशन, या अन्य दुर्भावनापूर्ण सॉफ्टवेयर इंस्टॉल किया गया हो सकता है, जिसके माध्यम से साइबर अपराधियों ने डिवाइस तक अनधिकृत पहुंच प्राप्त की हो।

कृष्णा दिग्गी ने कहा, “आजकल साइबर अपराधी फर्जी APK फाइल, स्क्रीन शेयरिंग ऐप, रिमोट कंट्रोल टूल और सोशल इंजीनियरिंग तकनीकों का उपयोग करके मोबाइल डिवाइस तक पहुंच प्राप्त करने का प्रयास करते हैं। यदि किसी डिवाइस पर मालवेयर सक्रिय हो जाए, तो वह उपयोगकर्ता की गतिविधियों की निगरानी कर सकता है तथा वित्तीय जानकारी को निशाना बना सकता है। हालांकि इस मामले में वास्तविक कारण का निर्धारण केवल तकनीकी एवं डिजिटल फॉरेंसिक जांच के बाद ही किया जा सकता है।”

उन्होंने लोगों को सलाह दी कि वे किसी भी अज्ञात APK फाइल को इंस्टॉल न करें, मोबाइल में इंस्टॉल ऐप्स की नियमित जांच करें, केवल आधिकारिक ऐप स्टोर से ही एप्लिकेशन डाउनलोड करें तथा अपने UPI PIN, OTP और बैंकिंग जानकारी को गोपनीय रखें।

कृष्णा दिग्गी – साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ के अनुसार, किसी भी संदिग्ध ऑनलाइन वित्तीय लेन-देन की स्थिति में पीड़ित को तुरंत अपने बैंक को सूचित करना चाहिए, संबंधित भुगतान सेवा प्रदाता के पास शिकायत दर्ज करनी चाहिए तथा राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 और साइबर अपराध पोर्टल पर शिकायत करनी चाहिए। समय पर रिपोर्टिंग से धनराशि को ट्रैक और रिकवर करने की संभावना बढ़ जाती है।

By maskal.news

You May Also Like