चक्रधरपुर | पश्चिमी सिंहभूम जिले के जगन्नाथपुर प्रखंड की सात युवतियों को चक्रधरपुर पुलिस ने समय रहते रेस्क्यू कर सुरक्षित उनके घर पहुंचाया। बताया गया कि सभी युवतियां रोजगार की तलाश में दूसरे प्रदेश जाने के लिए निकली थीं। जानकारी के अनुसार, रेलवे स्टेशन परिसर में चक्रधरपुर थाना प्रभारी अवधेश कुमार की नजर इन युवतियों पर पड़ी। संदेह होने पर उन्होंने सभी से पूछताछ की। पूछताछ के दौरान युवतियों ने बताया कि वे मजदूरी एवं रोजगार की तलाश में बाहर जाने की तैयारी में थीं।
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इसके बाद थाना प्रभारी ने युवतियों को बाहर काम करने के दौरान संभावित जोखिमों, मानव तस्करी तथा अन्य प्रकार के शोषण से जुड़े खतरों के प्रति जागरूक किया। पुलिस की पहल पर सभी युवतियों को टाटा मैजिक वाहन से सुरक्षित उनके घर वापस भेज दिया गया।
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थाना प्रभारी की इस मानवीय एवं संवेदनशील पहल की क्षेत्र में सराहना की जा रही है। गौरतलब है कि पश्चिमी सिंहभूम समेत आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में युवक-युवतियां रोजगार की तलाश में दूसरे राज्यों की ओर पलायन करते हैं। ऐसे मामलों में कई बार नाबालिग बच्चियों और युवतियों के मानव तस्करी तथा शोषण का शिकार होने की आशंका बनी रहती है। ऐसे में पुलिस द्वारा समय रहते की गई यह कार्रवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
दिल्ली | दिल्ली की राजनीति में एक बार फिर बड़ा कानूनी और राजनीतिक मोड़ सामने आया है। एक्साइज पॉलिसी केस से जुड़े सोशल मीडिया पोस्ट और सार्वजनिक बयानों को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट ने मुख्यमंत्री Arvind Kejriwal समेत आम आदमी पार्टी (AAP) के कई नेताओं के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्रवाई शुरू की है।
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अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि न्यायपालिका के खिलाफ सुनियोजित तरीके से माहौल बनाने और जनता के बीच अदालत की निष्पक्षता पर सवाल खड़े करने का प्रयास किया गया। इस मामले में Manish Sisodia, Sanjay Singh, Saurabh Bharadwaj और Vinay Mishra के नाम भी शामिल हैं।
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कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि न्यायिक फैसलों की आलोचना लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन न्यायपालिका की छवि खराब करने या अदालत की निष्पक्षता पर अविश्वास पैदा करने वाला अभियान गंभीर मामला माना जाएगा।
इस घटनाक्रम के बाद राजनीति के साथ-साथ न्यायपालिका की गरिमा, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और उसकी सीमाओं को लेकर नई बहस छिड़ गई है। आने वाले दिनों में इस मामले की सुनवाई और अदालत की टिप्पणियों पर देशभर की नजरें टिकी रहेंगी।
नई दिल्ली | सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर गुरुवार को अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि वर्तमान व्यवस्था में कार्यपालिका का अत्यधिक नियंत्रण दिखाई देता है, जो लोकतंत्र के लिए चिंता का विषय हो सकता है। अदालत ने सवाल उठाया कि निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने वाली संस्था के चयन में किसी स्वतंत्र सदस्य को शामिल क्यों नहीं किया गया है।
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सुप्रीम कोर्ट मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया से जुड़े मामले की सुनवाई कर रहा था। सुनवाई के दौरान जस्टिस दीपांकर दत्ता ने कहा कि केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) के निदेशक के चयन में भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) चयन समिति का हिस्सा होते हैं, लेकिन चुनाव आयोग के प्रमुख की नियुक्ति में उन्हें शामिल नहीं किया जाता। जस्टिस दत्ता ने कहा, “CBI निदेशक की नियुक्ति में CJI शामिल होते हैं। इसे कानून-व्यवस्था बनाए रखने या कानून के शासन से जोड़कर देखा जा सकता है। लेकिन लोकतंत्र को बनाए रखने और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए ऐसा क्यों नहीं होना चाहिए?”
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उन्होंने आगे कहा कि अदालत यह नहीं कह रही कि चयन समिति में CJI को ही शामिल किया जाए, लेकिन किसी स्वतंत्र सदस्य की मौजूदगी आवश्यक होनी चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि तीसरा सदस्य मंत्रालय से ही क्यों होना चाहिए। जस्टिस दत्ता ने कहा, “आज प्रधानमंत्री एक सदस्य चुनते हैं और विपक्ष के नेता (LoP) दूसरे सदस्य को चुनते हैं। यदि दोनों के बीच मतभेद हो, तो क्या तीसरा सदस्य विपक्ष के नेता के पक्ष में जाएगा?” इस पर अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने कहा कि वह इस विषय पर कोई अटकल नहीं लगाना चाहते और व्यावहारिक रूप से स्थिति अलग भी हो सकती है। इस पर जस्टिस दत्ता ने टिप्पणी करते हुए कहा, “तो इसका मतलब है कि कार्यपालिका ही सब कुछ कंट्रोल कर रही है।”
पीठ ने यह भी कहा कि इस प्रकार की नियुक्तियों में निर्णय व्यवहारिक रूप से 2:1 के बहुमत से होगा, क्योंकि कैबिनेट मंत्री के प्रधानमंत्री के रुख से अलग राय रखने की संभावना बेहद कम होती है। सुनवाई के दौरान जस्टिस दत्ता ने यह भी सवाल उठाया कि कार्यपालिका को “वीटो” जैसी स्थिति क्यों दी गई है। उन्होंने कहा कि संसद के पास कानून बनाने का अधिकार है, लेकिन कानूनों की अंतिम व्याख्या करने का अधिकार सुप्रीम कोर्ट के पास ही रहेगा। उन्होंने कहा, “पहली नजर में हमें इस बात से परेशानी हो रही है कि कार्यपालिका को वीटो का अधिकार क्यों दिया गया है। संसद कानून बना सकती है, लेकिन कानूनों की अंतिम व्याख्या सुप्रीम कोर्ट ही करेगा।”
सरायकेला-खरसावां | उपायुक्त नितिश कुमार सिंह के निर्देशानुसार गुरुवार को जिला खनन पदाधिकारी के नेतृत्व में जिले के कुचाई थाना क्षेत्र अंतर्गत मौजा मेरोमजंगा में औचक निरीक्षण अभियान चलाया गया।
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निरीक्षण के दौरान उक्त क्षेत्र में क्वार्ट्ज/क्वार्टजाइट खनिज का अवैध उत्खनन होते पाया गया। मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित जमीन मालिक एवं अवैध खनन गतिविधियों में संलिप्त व्यक्तियों के विरुद्ध कुचाई थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई गई है।
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उपायुक्त नितिश कुमार सिंह ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि जिले में किसी भी स्थान पर खनिजों के अवैध उत्खनन, भंडारण अथवा परिवहन की गतिविधियों को किसी भी परिस्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जिला प्रशासन एवं खनन विभाग द्वारा लगातार निगरानी रखते हुए ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई की जा रही है।
जिला प्रशासन ने आमजन से अपील की है कि खनिजों के अवैध उत्खनन अथवा परिवहन से संबंधित किसी भी गतिविधि की जानकारी तत्काल प्रशासन को दें, ताकि त्वरित एवं प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
चक्रधरपुर | उपायुक्त पश्चिमी सिंहभूम, चाईबासा के मार्गदर्शन में संचालित “प्रोजेक्ट बचपन” के तहत गुरुवार को चक्रधरपुर प्रखंड के आंगनबाड़ी केंद्र कुदलीबाड़ी एवं भलियाकुदर में बाल भोज-सह-जन्मोत्सव कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के अंतर्गत मई माह में जन्मे आंगनबाड़ी केंद्रों में पंजीकृत बच्चों का सामूहिक रूप से जन्मोत्सव मनाया गया। इस दौरान बच्चों के साथ केक काटा गया और उनके लिए विशेष बाल भोज का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
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अधिकारियों ने बताया कि “प्रोजेक्ट बचपन” के तहत प्रत्येक माह की 14 तारीख को जिले के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों में इस प्रकार के कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। योजना का मुख्य उद्देश्य बच्चों में पोषण, स्वच्छता और सामाजिक सहभागिता को बढ़ावा देना है।
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इस अवसर पर पोड़ाहाट-चक्रधरपुर अनुमंडल पदाधिकारी, चक्रधरपुर अंचल अधिकारी तथा प्रखंड विकास पदाधिकारी भी उपस्थित रहे। अधिकारियों ने आंगनबाड़ी सेविकाओं को बच्चों को पौष्टिक एवं स्वच्छ भोजन उपलब्ध कराने तथा उनके स्वास्थ्य एवं पोषण पर विशेष ध्यान देने का निर्देश दिया।
रांची | झारखंड सरकार की महत्वाकांक्षी मंईयां सम्मान योजना एक बार फिर चर्चा में है। जानकारी के अनुसार योजना की अप्रैल और मई माह की सम्मान राशि अब तक लाभुक महिलाओं के खातों में नहीं पहुंच पाई है। बताया जा रहा है कि ट्रेजरी से जुड़े कथित वित्तीय गड़बड़ी और भुगतान प्रक्रिया की जांच के कारण राशि जारी होने में देरी हो रही है। इससे राज्य की हजारों महिलाओं के सामने आर्थिक परेशानी खड़ी हो गई है।
सूत्रों के मुताबिक ट्रेजरी स्तर पर भुगतान प्रक्रिया की तकनीकी और प्रशासनिक जांच जारी है। इसी वजह से योजना की राशि फिलहाल रोक दी गई है। कई जिलों की महिलाओं ने बताया कि वे इस योजना से मिलने वाली राशि का उपयोग घर खर्च, बच्चों की पढ़ाई और दैनिक जरूरतों को पूरा करने में करती हैं। लगातार दो महीने से भुगतान नहीं मिलने के कारण उन्हें कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
इधर, मामले को लेकर विपक्ष ने राज्य सरकार पर हमला बोला है। विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया है कि वित्तीय अनियमितताओं और प्रशासनिक लापरवाही का सीधा असर गरीब एवं जरूरतमंद महिलाओं पर पड़ रहा है। उनका कहना है कि सरकार को जल्द से जल्द भुगतान सुनिश्चित करना चाहिए।
वहीं राज्य सरकार की ओर से कहा गया है कि पूरे मामले की जांच की जा रही है और सभी पात्र लाभुकों को जल्द सम्मान राशि उपलब्ध करा दी जाएगी। अधिकारियों का दावा है कि जांच प्रक्रिया पूरी होते ही लंबित भुगतान जारी कर दिया जाएगा।
फिलहाल योजना से जुड़ी लाखों महिलाएं सरकार के अगले फैसले और भुगतान की तारीख का इंतजार कर रही हैं।
सरायकेला | सरायकेला-खरसावां जिले में अवैध खनन एवं खनन पट्टों में अनियमितताओं के खिलाफ जिला प्रशासन की कार्रवाई लगातार जारी है। उपायुक्त नितिश कुमार सिंह के निर्देश पर बुधवार को जिला खनन पदाधिकारी के नेतृत्व में सरायकेला अंचल के उगमा एवं राइडीह क्षेत्र में संचालित दो पत्थर खनन पट्टों का औचक निरीक्षण किया गया।
निरीक्षण के दौरान खनन पट्टों में सीमांकन, खनिज भंडारण, खनिज प्रेषण तथा पर्यावरणीय स्वीकृति के अनुपालन समेत अन्य वैधानिक प्रावधानों की गहन जांच की गई। जांच के क्रम में कई प्रकार की अनियमितताएं सामने आने पर संबंधित पट्टाधारियों के विरुद्ध विभागीय नियमानुसार नोटिस एवं मांगपत्र निर्गत करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
उपायुक्त ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया है कि जिले में अवैध खनन, खनिज भंडारण एवं परिवहन गतिविधियों पर लगातार निगरानी रखी जाए तथा नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि अवैध खनन के विरुद्ध चलाया जा रहा अभियान आगे भी निरंतर जारी रहेगा।
सरायकेला | सरायकेला की विश्वविख्यात छऊ कला के संरक्षण, कलाकारों के सम्मान और सांस्कृतिक विरासत के पुनर्जीवन को लेकर नगर पंचायत अध्यक्ष मनोज कुमार चौधरी ने झारखंड सरकार के कला, संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू से शिष्टाचार मुलाकात कर विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की।
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इस दौरान उन्होंने विभागीय सचिव मुकेश कुमार तथा कला संस्कृति निदेशक आशिक अकरम से भी मुलाकात कर सरायकेला की सांस्कृतिक धरोहरों, कलाकारों की समस्याओं और विकास से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया।
नगर पंचायत अध्यक्ष मनोज कुमार चौधरी ने कहा कि सरायकेला की छऊ नृत्य कला केवल एक सांस्कृतिक परंपरा नहीं, बल्कि पूरे झारखंड और देश की गौरवशाली पहचान है। उन्होंने कहा कि वर्षों से देश-विदेश में सम्मान प्राप्त करने वाली इस कला के संरक्षण और संवर्धन के लिए ठोस एवं दीर्घकालिक पहल की आवश्यकता है।
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मुलाकात के दौरान उन्होंने राजकीय छऊ नृत्य कला केंद्र के पुनर्जीवन एवं नियमित संचालन, छऊ नृत्य और वाद्य प्रशिक्षकों की नियुक्ति, स्थानीय कलाकारों के लिए सम्मानजनक पेंशन एवं प्रोत्साहन सुविधा उपलब्ध कराने, सरायकेला में बहुउद्देशीय कला भवन निर्माण तथा युवा पीढ़ी को पारंपरिक कलाओं से जोड़ने के लिए नियमित प्रशिक्षण एवं सांस्कृतिक गतिविधियों के विस्तार की मांग उठाई।
मनोज कुमार चौधरी ने कहा कि सरायकेला की धरती ने देश को अनेक प्रतिष्ठित छऊ कलाकार दिए हैं, जिन्होंने अपनी प्रतिभा और साधना से विश्व स्तर पर झारखंड का नाम रोशन किया है। ऐसे कलाकारों का सम्मान और उनका भविष्य सुरक्षित करना सरकार एवं समाज दोनों की जिम्मेदारी है।
इस अवसर पर नगर पंचायत अध्यक्ष ने मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू को सरायकेला की सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक पारंपरिक छऊ मुखौटा और प्रसिद्ध सरायकेला लड्डू भेंट कर सम्मानित किया। मंत्री ने भी छऊ कला की महत्ता को स्वीकार करते हुए इसके संरक्षण एवं संवर्धन के लिए सकारात्मक पहल और आवश्यक सहयोग का आश्वासन दिया।
बैठक के दौरान नगर पंचायत क्षेत्र के समग्र विकास हेतु अतिरिक्त विशेष फंड उपलब्ध कराने की मांग भी उठाई गई। मनोज कुमार चौधरी ने कहा कि ऐतिहासिक एवं जिला मुख्यालय होने के बावजूद सरायकेला आज भी कई आधारभूत समस्याओं से जूझ रहा है। पेयजल, सड़क, नाली, विद्युत व्यवस्था एवं शहरी आधारभूत सुविधाओं को मजबूत करने के लिए राज्य सरकार से विशेष सहयोग की आवश्यकता है।
इसके साथ ही उन्होंने सरायकेला क्षेत्र के प्रमुख ऐतिहासिक एवं धार्मिक पर्यटन स्थलों — श्री जगन्नाथ मंदिर, कुदरसाईं मंदिर एवं मिर्गी चिंगड़ा — के संरक्षण, सौंदर्यीकरण तथा पर्यटन मानचित्र में शामिल किए जाने की मांग भी सरकार के समक्ष रखी गई।
चाईबासा | नीट-2026 परीक्षा पेपर लीक प्रकरण को लेकर कांग्रेस के छात्र संगठन एनएसयूआई ने बुधवार को प्रधानमंत्री और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करते हुए पुतला दहन किया। इस दौरान कांग्रेस कार्यकर्ता कांग्रेस भवन, चाईबासा में एकत्रित हुए और जमकर नारेबाजी की। इसके बाद विरोध स्वरूप दोनों नेताओं के पुतलों को आग के हवाले किया गया।
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एनएसयूआई के जिलाध्यक्ष अनीष गोप ने कहा कि नीट-2026 परीक्षा में हुए पेपर लीक ने देशभर के लाखों छात्र-छात्राओं और उनके परिवारों की मेहनत पर पानी फेर दिया है। उन्होंने कहा कि हजारों परिवारों ने अपने बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए आर्थिक कठिनाइयों का सामना करते हुए कोचिंग और पढ़ाई पर भारी खर्च किया था, लेकिन परीक्षा निरस्त होने से छात्रों में भारी निराशा और आक्रोश है।
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कांग्रेस जिला प्रवक्ता त्रिशानु राय ने कहा कि नीट-2026 परीक्षा निरस्त होने से लाखों विद्यार्थियों की मेहनत पर कुठाराघात हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि परीक्षा आयोजन की जिम्मेदारी केंद्र सरकार द्वारा नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) को सौंपी गई है, जो सीधे केंद्रीय शिक्षा विभाग के अधीन कार्यरत है। उन्होंने कहा कि एजेंसी की कार्यप्रणाली लगातार सवालों के घेरे में रही है और कई परीक्षाएं पेपर लीक एवं नकल के कारण रद्द हो चुकी हैं, जिसकी सीधी जिम्मेदारी केंद्र सरकार की बनती है।
उन्होंने यह भी कहा कि बार-बार विवादों के बावजूद केंद्र सरकार ने न तो एनटीए के जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई की है और न ही एजेंसी की कार्यप्रणाली में सुधार के लिए प्रभावी कदम उठाए हैं। इसके विपरीत, इसकी कमियों को छिपाने का प्रयास किया जा रहा है। विरोध प्रदर्शन में एनएसयूआई जिला महासचिव सचिन बिरुवा, सदस्य संजु कुंकल, रुपसिंह बिरुवा, अरुण हेम्ब्रम, पूर्व नगर अध्यक्ष अजय कुमार, मो. अरसलाम, संजय साव, सुशील दास समेत अन्य कार्यकर्ता उपस्थित थे।
चाईबासा | राजस्थान में नीट परीक्षा पेपर लीक मामले के बाद केंद्र सरकार द्वारा राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) को पुनः परीक्षा आयोजित कराने की जिम्मेदारी सौंपे जाने के फैसले का एआईडीएसओ (AIDSO) ने कड़ा विरोध किया है। संगठन के पश्चिमी सिंहभूम जिला सचिव सत्येन महतो ने प्रेस वार्ता कर इस निर्णय को निंदनीय बताया।
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उन्होंने कहा कि एनटीए जैसी “भ्रष्ट संस्था” को दोबारा परीक्षा आयोजित करने की अनुमति देना छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह तीसरी बार है जब इस संस्था पर गंभीर सवाल उठे हैं, फिर भी सरकार उसी एजेंसी को परीक्षा संचालन की जिम्मेदारी दे रही है। उन्होंने एनटीए को भंग करने और इसके खिलाफ जिलेभर में मजबूत छात्र आंदोलन खड़ा करने की अपील की। जिला उपाध्यक्ष जतिन दास ने कहा कि इस वर्ष करीब 23 लाख अभ्यर्थियों ने नीट परीक्षा की तैयारी की थी, लेकिन पेपर लीक जैसी घटनाओं ने लाखों छात्रों की मेहनत और उम्मीदों पर पानी फेर दिया। उन्होंने कहा कि पश्चिमी सिंहभूम जिले के भी सैकड़ों छात्र मानसिक रूप से प्रभावित हुए हैं। इस मुद्दे पर जिले से लेकर देशभर में छात्रों को एकजुट होकर विरोध दर्ज कराना चाहिए।
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वहीं, जिला अध्यक्ष सगुन हाँसदा ने झारखंड सरकार के उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग द्वारा लागू किए गए क्लस्टर कॉलेज व्यवस्था का भी विरोध किया। उन्होंने बताया कि इसके खिलाफ कोल्हान प्रमंडल के विभिन्न छात्र संगठनों द्वारा आगामी 15 मई को कोल्हान विश्वविद्यालय प्रशासन के समक्ष विशाल प्रदर्शन आयोजित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जिले के छात्र पहले से ही छात्रवृत्ति में देरी, सत्र विलंब और शिक्षकों की कमी जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। सरकार इन मूल समस्याओं से ध्यान भटकाने के लिए ऐसे फैसले लागू कर रही है।
एआईडीएसओ ने सभी छात्रों, अभिभावकों और बुद्धिजीवियों से 15 मई को कोल्हान विश्वविद्यालय के समक्ष आयोजित प्रदर्शन में सक्रिय रूप से शामिल होने की अपील की।