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झारखंड में PESA नियमावली 2025 को मंजूरी, लेकिन पारदर्शिता पर उठे सवाल

झारखंड में PESA नियमावली 2025 को मंजूरी, लेकिन पारदर्शिता पर उठे सवाल

‎झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार ने 23 दिसंबर 2025 को मंत्रिपरिषद की बैठक में पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों तक विस्तार) झारखंड नियमावली, 2025 (PESA Rules 2025) को मंजूरी प्रदान की है। यह फैसला PESA Act 1996 (प्रावधान ऑफ द पंचायत्स (एक्सटेंशन टू शेड्यूल्ड एरियाज) एक्ट, 1996) के कार्यान्वयन में एक महत्वपूर्ण कदम है,जो लगभग 29 वर्ष पुराने केंद्रीय कानून को झारखंड में प्रभावी बनाने की दिशा में लंबे इंतजार को समाप्त करता है। राज्य में 2000 में गठन के बाद भी यह नियमावली लंबित रही है और झारखंड हाईकोर्ट के दबाव (विशेषकर contempt proceedings की चेतावनी) के बाद यह मंजूरी मिली है।


‎सरकार के अनुसार यह नियमावली PESA Act 1996 के मूल प्रावधानों के अनुरुप बनाई गई है,जिसमें कोई प्रमुख कटौती नही की गई। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इसे “जनता को समर्पित” बताया और कहा कि यह झारखंड के 25 वर्ष पूरे होने पर दिशोम गुरु शिबू सोरेन को समर्पित है। पंचायती राज विभाग के सचिव मनोज कुमार ने स्पष्ट किया कि नियमावली PESA के सभी प्रमुख प्रावधानों को शामिल करती है,इसके साथ ही स्थानीय मुद्दों को ध्यान में रखा गया है। इसमें कहा जा रहा है कि पेसा नियमावली में माइनर संशोधनों के साथ सभी मूल प्रावधान रखा गया है और ग्राम सभा को निर्णायक भूमिका दी गई है।


‎PESA Act 1996 के मूल प्रावधान (केंद्रीय कानून के मुख्य बिंदु)
‎PESA Act 1996, 24 दिसंबर 1996 को पारित हुआ,जो संविधान की पांचवीं अनुसूची (Fifth Schedule) के क्षेत्रों में पारंपरिक ग्राम सभा को सशक्त बनाने के लिए बनाया गया है। यह पंचायती राज (73वें संशोधन) को अनुसूचित क्षेत्रों तक विस्तार देता है,लेकिन कुछ संशोधनों के साथ। मुख्य प्रावधान धारा 4 में हैं।
‎धारा 4(a) – राज्य अनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम सभा की परंपरागत अधिकारों और स्व-शासन व्यवस्था को मान्यता दें।
‎धारा 4(d) -ग्राम सभा प्राकृतिक संसाधनों (जल, जंगल, जमीन) के प्रबंधन,संरक्षण और उपयोग में केंद्रीय भूमिका निभाए।
‎धारा 4(e)- ग्राम सभा को लघु वन उपज (Minor Forest Produce – MFP) पर स्वामित्व और नियंत्रण।
‎धारा 4(i)-ग्राम सभा की पूर्व सहमति (prior consent) या परामर्श आवश्यक।
‎भूमि अधिग्रहण या पुनर्वास।
‎खनन पट्टे (mining leases)।
‎लघु खनिज (minor minerals)।
‎जल संसाधन प्रबंधन।
‎स्थानीय बाजार,शराब,नशीले पदार्थों पर नियंत्रण।
‎धारा 4(m)- ग्राम सभा को
‎विकास योजनाओं की पहचान,अनुमोदन और कार्यान्वयन।
‎लाभार्थियों का चयन।
‎सामाजिक-आर्थिक योजनाओं की निगरानी।
‎पारंपरिक विवाद समाधान।
‎धारा 4(n)-ग्राम सभा को पारंपरिक रीति-रिवाजों और सामाजिक-आर्थिक प्रथाओं के अनुसार कार्य करने की छूट।
‎अन्य: ग्राम सभा को स्थानीय संस्थाओं पर नियंत्रण, और भूमि हस्तांतरण पर रोक (non-tribals को रोक)।
‎ये प्रावधान आदिवासी समुदायों को जल-जंगल-जमीन (Jal-Jangal-Jameen) पर नियंत्रण देते हैं, जो झारखंड जैसे आदिवासी बहुल राज्य के लिए महत्वपूर्ण हैं।
‎झारखंड PESA नियमावली 2025 में मूल प्रावधानों की स्थिति समाचार स्रोतों और सरकारी बयानों के आधार पर झारखंड की 2025 नियमावली PESA 1996 के मूल प्रावधानों को काफी हद तक बनाए रखती है। इसमें अभी तक कोई बड़ा प्रावधान हटाने की रिपोर्ट नही है।
‎मुख्य बिंदु ।
‎ग्राम सभा को निर्णायक अधिकार ।
‎खनन,भूमि अधिग्रहण,वन भूमि उपयोग,लघु खनिज,जल संसाधन प्रबंधन में पूर्व सहमति अनिवार्य। कोई बड़ा निर्णय ग्राम सभा की सहमति के बिना नही होगी।
‎लघु वन उपज पर नियंत्रण- ग्राम सभा को MFP पर स्वामित्व और प्रबंधन का अधिकार।
‎भूमि अधिग्रहण और पुनर्वास-ग्राम सभा की पूर्व सहमति या परामर्श आवश्यक। गैर-आदिवासियों को भूमि हस्तांतरण पर रोक और धोखाधड़ी से ली गई भूमि वापसी का प्रावधान।
‎विकास योजनाएं- ग्राम सभा को योजनाओं की पहचान,अनुमोदन,लाभार्थी चयन और निगरानी का अधिकार। सरकारी योजनाओं में ग्राम सभा की प्राथमिकता।
‎पारंपरिक स्वशासन- पारंपरिक ग्राम सभा को मान्यता,रीति-रिवाजों और विवाद समाधान में छूट।
‎खनन और प्राकृतिक संसाधन- खनन पट्टे, बालू घाट आदि में ग्राम सभा की सहमति अनिवार्य (हाईकोर्ट के फैसलों के अनुरुप)।
‎अन्य नशीले पदार्थों,स्थानीय बाजारों पर नियंत्रण।ग्राम सभा की सीमांकन जिला प्रशासन द्वारा।
‎ पंचायती राज सचिव मनोज कुमार ने कहा कि नियमावली PESA Act के सभी प्रावधानों को शामिल करती है और झारखंड पंचायती राज अधिनियम 2001 के साथ सामंजस्य बनाया गया है (तीन-स्तरीय पंचायत चुनावों पर कोई प्रभाव नही होगा)। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इसे “व्यापक विमर्श” के बाद बताया, जिसमें विभागीय मंतव्य और हितधारकों की राय शामिल थी।
‎ मेरा इसको लेकर पारदर्शिता का सवाल है क्यों इसकी नियमावली सार्वजनिक नही की गई।
‎ विस्तृत प्रभाव और महत्व।
‎यह नियमावली झारखंड के 13 पूर्ण और 2 आंशिक अनुसूचित जिलों (कुल 15 जिलों) में लागू होगी। यह आदिवासी समुदायों को स्वशासन की शक्ति देगी, जिससे
‎खनन और औद्योगिक परियोजनाओं में स्थानीय विरोध कम हो सकता है,क्योंकि सहमति अनिवार्य।
‎वन और जल संसाधनों का बेहतर प्रबंधन, गरीबी-प्रवास कम।
‎भूमि अधिकार – धोखाधड़ी वाली भूमि वापसी संभव।
‎विकास: ग्राम सभा केंद्रित योजनाएं अधिक प्रभावी।
‎यह सिर्फ कानून नही,भावना है। अधिसूचना जारी होने के बाद यह प्रभावी होगी।
‎जब तक झारखंड सरकार द्वारा पारित नियमावली पब्लिक डोमेन में नही आ जाती है स्पष्ट कुछ कहा नही जा सकता है।

‎लक्ष्मीनारायण मुंडा
‎रांची।

जामताड़ा में ज्वेलरी दुकान में सशस्त्र लूट, गोली लगने से व्यवसायी गंभीर घायल

जामताड़ा में ज्वेलरी दुकान में सशस्त्र लूट, गोली लगने से व्यवसायी गंभीर घायल

जामताड़ा : बीती देर शाम जामताड़ा विधानसभा क्षेत्र में एक ज्वेलरी दुकान में सशस्त्र लूट की घटना हुई। लूट के दौरान अपराधियों ने गोली चलाई, जिससे व्यवसायी बर्मन गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें बेहतर इलाज के लिए रेफर किया गया है और उनका उपचार जारी है।
घटना की सूचना मिलते ही विधायक स्वयं घटनास्थल पर पहुंचे और पुलिस व जिला प्रशासन को बुलाकर 24 घंटे के भीतर अपराधियों की पहचान कर गिरफ्तारी के निर्देश दिए। शहर के सभी इलाकों में सीसीटीवी, मोबाइल लोकेशन, वाहन मूवमेंट, टोल और बॉर्डर एंट्री-एग्जिट प्वाइंट्स पर सघन निगरानी शुरू कर दी गई है। विधायक ने जनता को भरोसा दिलाया कि अपराधियों को जल्द गिरफ्तार कर कानून के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी।

खरसावां गोलीकांड के शहीद वीर डोलो मानकी सोय की स्मृति में स्मारक का होगा उद्घाटन।

खरसावां गोलीकांड के शहीद वीर डोलो मानकी सोय की स्मृति में स्मारक का होगा उद्घाटन।

सरायकेला-खरसावां : कुचाई प्रखंड अंतर्गत बंदेलोहर पंचायत के बाईडीह फुटबॉल मैदान (पंचायत भवन के सामने) में खरसावां गोलीकांड के दौरान शहीद हुए वीर शहीद डोलो मानकी सोय की स्मृति में निर्मित स्मारक का उद्घाटन किया जाएगा।
स्मारक का उद्घाटन 25 दिसंबर 2025 (गुरुवार) को दोपहर 3:00 बजे खरसावां विधानसभा क्षेत्र के विधायक एवं क्षेत्र के विकास पुरुष माननीय श्री दशरथ गागराई के कर-कमलों द्वारा किया जाएगा।
ज्ञात हो कि 01 जनवरी 1948 को खरसावां हाट मैदान में हुए गोलीकांड में वीर शहीद डोलो मानकी सोय शहीद हुए थे। उनका जन्म वर्ष 1930 में हुआ था। वे बंदेलोहर गांव (बाईडीह), पंचायत बंदेलोहर, प्रखंड कुचाई, जिला सरायकेला-खरसावां के निवासी थे।
यह स्मारक शहीदों की स्मृति को सहेजने और आदिवासी इतिहास एवं संघर्ष को सम्मान देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

खरसावां में राष्ट्रीय गणित दिवस पर गणित प्रदर्शनी सह प्रतियोगिता का आयोजन

खरसावां में राष्ट्रीय गणित दिवस पर गणित प्रदर्शनी सह प्रतियोगिता का आयोजन

खरसावां : सरायकेला-खरसावां जिले के प्लस टू राजकीय उच्च विद्यालय, खरसावां में राष्ट्रीय गणित दिवस के अवसर पर गणित प्रदर्शनी सह प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ महान गणितज्ञ श्रीनिवास रामानुजन के चित्र पर पुष्प अर्पित कर किया गया।

कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने गणितीय आकलन, नवाचार आधारित प्रदर्श, मॉडल चार्ट और गणितीय पहेलियों के माध्यम से अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया और गणित के प्रति रुचि दिखाई।

प्रतियोगिता के जूनियर वर्ग में रौनक एवं अमन ने प्रथम स्थान, निशा एवं रितु ने द्वितीय स्थान तथा मान्यता और मनीषा ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। वहीं सीनियर वर्ग में सुजित एवं गौरव प्रथम, रोहित एवं सिद्धार्थ द्वितीय तथा लक्ष्मी एवं अंतरा तृतीय स्थान पर रहे।

कार्यक्रम में उपस्थित प्रखंड विकास पदाधिकारी प्रधान माझी ने विद्यार्थियों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि गणित दैनिक जीवन के हर क्षेत्र में उपयोगी है और यह तार्किक व विश्लेषणात्मक सोच को विकसित करता है। डीएसए सचिव मो. दिलदार ने कहा कि जागने से लेकर सोने तक हमारे जीवन में गणित का महत्वपूर्ण योगदान है और वैज्ञानिक युग में इसका महत्व और बढ़ गया है।

कार्यक्रम का संचालन कक्षा 11 के छात्र-छात्राओं निशा मोदक एवं रोहित महतो ने किया। निर्णायक मंडली में रामेश्वर मुंडा, पुष्पा बाखला एवं रेणुका पथाल शामिल रहे।

पीएनबी आरसेटी सरायकेला में 30 दिवसीय मोबाइल मरम्मत प्रशिक्षण का समापन, 19 प्रशिक्षुओं को मिले प्रमाण पत्र

पीएनबी आरसेटी सरायकेला में 30 दिवसीय मोबाइल मरम्मत प्रशिक्षण का समापन, 19 प्रशिक्षुओं को मिले प्रमाण पत्र

सरायकेला : पीएनबी रूरल सेल्फ एम्प्लॉयमेंट ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट (आरसेटी), सरायकेला में आयोजित 30 दिवसीय मोबाइल मरम्मत प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन किया गया। समापन समारोह में प्रशिक्षण प्राप्त 19 प्रशिक्षुओं को प्रमाण पत्र वितरित किए गए।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं संस्थान के निदेशक उमा शंकर तांती ने सभी प्रशिक्षुओं को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि मोबाइल मरम्मत आज के समय में रोजगार का एक बेहतर साधन है। उन्होंने कहा कि शहर से लेकर गांव तक मोबाइल का व्यापक उपयोग हो रहा है, जिससे इस क्षेत्र में स्वरोजगार की अच्छी संभावनाएं हैं। निदेशक ने प्रशिक्षुओं से प्रशिक्षण के दौरान प्राप्त ज्ञान का उपयोग कर आत्मनिर्भर बनने का आह्वान किया।

इस अवसर पर संस्थान के संकाय सदस्य गोविंद राय, दिलीप आचार्य, इंद्रजीत कैबत, द्रौपदी महतो सहित अन्य लोग उपस्थित थे।

झारखंड कैबिनेट द्वारा पेसा कानून को स्वीकृति दिए जाने पर कांग्रेस ने जताई खुशी

झारखंड कैबिनेट द्वारा पेसा कानून को स्वीकृति दिए जाने पर कांग्रेस ने जताई खुशी

चाईबासा : पेसा दिवस की पूर्व संध्या पर झारखंड कैबिनेट द्वारा पेसा कानून को स्वीकृति दिए जाने पर पश्चिमी सिंहभूम जिला कांग्रेस के प्रवक्ता त्रिशानु राय ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, विभागीय मंत्री दीपिका पांडेय सिंह, कैबिनेट के सभी सदस्यों एवं झारखंड कांग्रेस प्रभारी के. राजू को बधाई दी है।
बुधवार को जारी बयान में त्रिशानु राय ने कहा कि यह निर्णय हजारों वर्ष पुरानी आदिवासी पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था को आधुनिक युग में पुनः स्थापित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल है। उन्होंने कहा कि पेसा कानून लागू होने से आदिवासी समुदायों को स्वशासन का अधिकार मिलेगा और ग्राम सभाएं और अधिक सशक्त होंगी।
उन्होंने बताया कि पेसा कानून के तहत अनुसूचित क्षेत्रों में जल, जंगल और जमीन जैसे प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, प्रबंधन और उपयोग पर ग्राम सभा का नियंत्रण होगा। साथ ही विकास योजनाओं को लागू करने से पहले ग्राम सभा की स्वीकृति अनिवार्य होगी।
त्रिशानु राय ने कहा कि यह कानून आदिवासी समुदायों की सांस्कृतिक पहचान, रीति-रिवाजों और पारंपरिक अधिकारों की रक्षा करेगा। इससे अवैध भूमि अतिक्रमण पर रोक लगेगी और भूमि बहाली की प्रक्रिया को मजबूती मिलेगी। उन्होंने कहा कि पेसा एक्ट से आदिवासी समाज का शोषण रुकेगा और वे अपने विकास की दिशा स्वयं तय कर सकेंगे।

पेसा नियमावली 2025 पर उठे सवाल, आदिवासी स्वशासन को लेकर चिंत

पेसा नियमावली 2025 पर उठे सवाल, आदिवासी स्वशासन को लेकर चिंत

चाईबासा : झारखंड निर्माण के 25 वर्षों बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अगुवाई वाली राज्य कैबिनेट द्वारा पेसा नियमावली 2025 को पारित किया जाना एक स्वागत योग्य कदम माना जा रहा है। हालांकि, इसे लेकर अभी बधाई देना जल्दबाजी होगी। यह देखना जरूरी है कि क्या इस नियमावली के माध्यम से पेसा कानून 1996 का मूल उद्देश्य—पारंपरिक ग्रामसभाओं को वास्तविक शासन शक्ति और अधिकार देना—पूरी तरह पूरा हो पा रहा है या नहीं।

आदिवासी संगठनों और बुद्धिजीवियों का कहना है कि यदि पेसा नियमावली 2025 के तहत फिर से पारंपरिक आदिवासी स्वशासन व्यवस्था पर पंचायत राज व्यवस्था थोपने का प्रयास किया गया, तो इसका कड़ा विरोध किया जाएगा। आरोप है कि झारखंड कैबिनेट ने संसदीय अधिनियम 1996 के अनुरूप नियमावली बनाने के बजाय झारखंड पंचायत राज अधिनियम 2001 की त्रि-स्तरीय पंचायत व्यवस्था को ही लागू कर दिया है।

गौरतलब है कि झारखंड उच्च न्यायालय ने आदिवासी बुद्धिजीवी मंच द्वारा दायर जनहित याचिका (WP(PIL) No. 1589/2021) में स्पष्ट कहा था कि पंचायत राज अधिनियम 2001 को संसदीय अधिनियम 1996 के अनुरूप नहीं माना जा सकता। इसके बावजूद राज्य सरकार द्वारा अनुसूचित क्षेत्रों के लिए बने संसदीय अधिनियम 1996 को नजरअंदाज कर नियमावली पारित करने पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान पेसा नियमावली 2025, संसदीय अधिनियम 1996 की धारा 3 और धारा 4(एम) के प्रावधानों के विपरीत है, जिनमें ग्रामसभा और पंचायतों को कुछ अपवादों के साथ कुल सात महत्वपूर्ण अधिकार दिए गए हैं। ऐसे में यह नियमावली आदिवासी स्वशासन की भावना को कमजोर करती प्रतीत हो रही है।

झारखंड की सेकोर टीम ने आंध्र प्रदेश में पेसा महोत्सव में हिस्सा लिया

झारखंड की सेकोर टीम ने आंध्र प्रदेश में पेसा महोत्सव में हिस्सा लिया

चाईबासा : 20 दिसंबर 2025 को झारखंड की सेकोर टीम आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम के लिए रवाना हुई। इस अवसर पर लेखक हिर्ला डोबरो बिरूली और टाटा स्टील फाउंडेशन के अधिकारी आनंद बोईपाई और बिरंग तियु ने खिलाड़ियों को विदाई दी।
पंचायत राज मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा आयोजित पेसा महोत्सव के अंतर्गत डेमो गेम में झारखंड की विशेष सेकोर टीम को आमंत्रित किया गया था। सभी खिलाड़ी सुरक्षित रूप से आंध्र प्रदेश पहुंच गए।
टीम के लिए चाईबासा से रांची तक यात्रा की सुविधा उपलब्ध कराई गई, जबकि रांची से आंध्र प्रदेश तक बस सेवा प्रदान की गई। महोत्सव के दौरान खिलाड़ियों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया।
डेमो खेल में जमशेद टाइगर (पूर्णिया), तंतनगर प्रखंड और मांझरी प्रखंड दिरीबासा से कोल्हान कुला—इन दोनों टीमों ने भाग लिया। आयोजन समिति ने दोनों टीमों को प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया।
इस अवसर पर बीरसिंह बोईपाई, मुकुरु बोईपाई, तुराम बोईपाई, सोमय बोईपाई, जराम कुंकल, गोपेश चंद्र कुंकल सहित अन्य खिलाड़ी उपस्थित रहे।

पश्चिमीसिंहभूम में कांग्रेस का संगठन सृजन अभियान जारी

पश्चिमीसिंहभूम में कांग्रेस का संगठन सृजन अभियान जारी

चाईबासा : जिला कांग्रेस कमिटी, प०सिंहभूम के तत्वावधान में संगठन सृजन अभियान के तहत बुधवार को कांग्रेस भवन, चाईबासा में बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता जिला अध्यक्ष रंजन बोयपाई ने की।
बैठक में मुख्य रूप से राष्ट्रीय सचिव सह प्रदेश सह-प्रभारी भूपेंद्र मरावी उपस्थित थे। उन्होंने कहा कि संगठन सृजन अभियान कांग्रेस को मजबूत करेगा और सभी पदाधिकारियों को अपने कर्तव्यों और जिम्मेदारियों का पालन लगन के साथ करना चाहिए। उन्होंने जिला, प्रखण्ड, मंडल, पंचायत, वार्ड और बूथ स्तर के पदाधिकारियों को मार्गदर्शन भी दिया।
भूपेंद्र मरावी ने यह भी बताया कि कांग्रेस का 140वां स्थापना दिवस 28 दिसंबर 2025 को पूरे देश में मनाया जाएगा। झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमिटी ने निर्णय लिया है कि इस अवसर पर सभी जिला, प्रखंड, मंडल, ग्राम पंचायत और वार्ड स्तर पर कांग्रेस का झंडा फहराया जाएगा।
कार्यकारी अध्यक्ष सह पूर्व मंत्री बंधु तिर्की ने कहा कि स्थापना दिवस संगठन की मजबूती और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा का प्रतीक है। पूर्व कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष डॉ. प्रदीप कुमार बलमुचू ने संगठन को अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाने पर जोर दिया और कहा कि राहुल गांधी द्वारा उठाए गए जन मुद्दों को संगठनात्मक रणनीति से सफल बनाना होगा।
जिला अध्यक्ष रंजन बोयपाई ने कहा कि जिला कमिटी भाजपा की केंद्र सरकार के खिलाफ लगातार आंदोलन कर रही है और संगठन में नए लोगों को जोड़ने का काम बड़े पैमाने पर हो रहा है।

बैठक का संचालन युथ इंटक प्रदेश सचिव सुरेश सावैयां ने किया और धन्यवाद ज्ञापन कांग्रेस जिला प्रवक्ता त्रिशानु राय ने दिया। बैठक में आरजीपीआरएस प्रदेश अध्यक्ष सुनीत शर्मा, प्रदेश सचिव अशरफुल होदा , ओबीसी विभाग प्रदेश महासचिव मायाधर बेहरा, पूर्व जिलाध्यक्ष सन्नी सिंकु, जिला उपाध्यक्ष राजेश शुक्ला, जिला महासचिव कैरा बिरुवा , अविनाश कोड़ाह , आरजीपीआरएस जिलाध्यक्ष रितेश तामसोय , मुखिया अतेन सुरीन, नगर अध्यक्ष मो.सलीम, प्रखंड अध्यक्ष दिकु सावैयां , ललित दोराईबुरु , सोनाराम कोड़ाह , विजय सिंह सामड , सुखलाल हेम्ब्रम , जादोराय मुंडरी , चंद्र भूषण बिरुवा , सिकुर गोप , शैलेश गोप , सकारी दोंगो , सुरेश चन्द्र सावैयां , नगर उपाध्यक्ष मो.ऐहसान , सुभाष राम तुरी , महासचिव नसीम अख्तर , वरीय कांग्रेसी राम सिंह सावैयां , मो.तस्लीम अंसारी , ललित कर्ण , हरि राव,जुम्बल सुंडी, पूर्ण चन्द्र कायम, विवेक विशाल प्रधान , शिवकर बोयपाई, जितेन्द्र गोप , बिजय सिंह सुम्बरुई,महेश प्रसाद साहू,संजय बिरुवा, गोपी चाम्पिया , विनीत लागुरी,विश्वनाथ बोबोंगा , सेलाय बांकिरा,विक्रमादित्य सुंडी , सुबदिया पुरती,आशीष बेहरा,अमर ज्योति गोंड, राजीव बोयपाई, सुरसेन टोपनो, रोहित बिरुली,नारंगा देवगम,राजू गागराई,प्रवीण लागुरी , बिरसा बारजो,भोलेनाथ बोदरा , यारमिया चेरोवा,सुशील दास आदि उपस्थित थे।

युवा कांग्रेस संगठनात्मक चुनाव: वीर सिंह बालमुचू सदर विधानसभा अध्यक्ष निर्वाचित

युवा कांग्रेस संगठनात्मक चुनाव: वीर सिंह बालमुचू सदर विधानसभा अध्यक्ष निर्वाचित

पश्चिमी सिंहभूम : युवा कांग्रेस के संगठनात्मक चुनाव में वीर सिंह बालमुचू को सदर विधानसभा अध्यक्ष चुना गया है। उनके निर्वाचन से संगठन में उत्साह का माहौल है।

वीर सिंह बालमुचू इससे पहले नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) के कोल्हान विश्वविद्यालय अध्यक्ष रह चुके हैं। छात्र राजनीति के दौरान उन्होंने छात्र हितों के साथ-साथ सामाजिक मुद्दों और अधिकारों की लड़ाई में सक्रिय भूमिका निभाई। वे कई सामाजिक संगठनों से भी जुड़े रहे हैं और जनसरोकारों से जुड़े विषयों पर लगातार सक्रिय रहे हैं।

छात्र राजनीति और सामाजिक आंदोलनों के माध्यम से वीर सिंह ने समाज में एक सक्रिय युवा नेता के रूप में पहचान बनाई है। उन्होंने दलित, पिछड़े और आदिवासी समुदायों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया और अन्याय के खिलाफ आवाज बुलंद की।

उनके सदर विधानसभा अध्यक्ष बनने से युवा कांग्रेस के संगठनात्मक ढांचे को मजबूती मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। पार्टी नेताओं का मानना है कि उनके नेतृत्व में युवा कांग्रेस संगठन को नई दिशा और मजबूती मिलेगी।

निर्वाचन के बाद पार्टी पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं और सामाजिक संगठनों ने वीर सिंह बालमुचू को बधाई और शुभकामनाएं दी हैं।