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के.एस. कॉलेज, सरायकेला में राष्ट्रीय गणित दिवस का आयोजन

के.एस. कॉलेज, सरायकेला में राष्ट्रीय गणित दिवस का आयोजन

सरायकेला : के.एस. कॉलेज, सरायकेला में बुधवार को राष्ट्रीय गणित दिवस का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रभारी प्राचार्य एवं भौतिकी विभागाध्यक्ष डॉ. प्रकाश सरकार ने महान गणितज्ञ श्रीनिवास रामानुजन के चित्र पर दीप प्रज्वलन एवं माल्यार्पण कर कार्यक्रम का उद्घाटन किया।

अपने संबोधन में डॉ. सरकार ने छात्र-छात्राओं को संख्या सिद्धांत, कंटीन्यू फ्रैक्शन, अनंत श्रेणी तथा पाई के मान की गणना की नई विधियों की जानकारी दी। उन्होंने विद्यार्थियों से मेहनत और लगन के साथ पढ़ाई करने का आह्वान करते हुए कहा कि वे ही महाविद्यालय का भविष्य हैं और अगले रामानुजन बन सकते हैं।

गणित विभागाध्यक्ष डॉ. अर्जुन कुमार ने रामानुजन के जीवन से प्रेरणा लेकर प्रतिभा निखारने की बात कही। आईटी विभागाध्यक्ष रवि शंकर झा ने रामानुजन के कार्यों और योगदान पर प्रकाश डाला। इतिहास विभाग के सहायक प्राध्यापक मोहन साहू ने शून्य के महत्व और उसकी खोज पर विस्तार से जानकारी दी, जबकि वाणिज्य विभाग की सहायक प्राध्यापक विभा कुमार ने गणित और वाणिज्य के आपसी संबंधों पर चर्चा की।

इस अवसर पर आयोजित क्विज प्रतियोगिता में करुणा कुमारी महतो ने प्रथम, अमन पति ने द्वितीय और कुमारी प्रिंसी ने तृतीय स्थान प्राप्त किया, जिन्हें पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम के दौरान छात्र-छात्राओं ने रामानुजन के चित्र पर रंगोली बनाई तथा उनके जन्मदिवस के अवसर पर केक काटकर उत्सव मनाया। कार्यक्रम में महाविद्यालय परिवार के सभी सदस्यों की गरिमामयी उपस्थिति रही।

आयुर्वेदिक कॉलेज जगन्नाथपुर (बुकासाई) बना सिस्टम की सुस्ती और लापरवाही का प्रतीक:- धी रामहरि पेरियार

आयुर्वेदिक कॉलेज जगन्नाथपुर (बुकासाई) बना सिस्टम की सुस्ती और लापरवाही का प्रतीक:- धी रामहरि पेरियार

भवन तैयार, बजट खर्च… फिर भी कॉलेज बंद

जगन्नाथपुर : जगन्नाथपुर प्रखंड अंतर्गत बुकासाई में आयुर्वेदिक कॉलेज एवं अस्पताल के रूप में विकसित की जा रही महत्वाकांक्षी योजना कागजों में तो तेज रफ्तार से आगे बढ़ती दिखती है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट है। छात्रावास बनकर तैयार हैं, कॉलेज भवन खड़े हैं, सरकारी धन खर्च हो चुका है, इसके बावजूद आज तक कॉलेज का सुचारु संचालन शुरू नहीं हो पाया, जिससे स्थानीय जनता में भारी आक्रोश व्याप्त है। स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्षों से केवल उद्घाटन, निरीक्षण और आश्वासन का खेल चल रहा है। शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाओं के नाम पर जनता को सिर्फ सपने दिखाए गए हैं, जबकि वास्तविक लाभ शून्य है।


        पूर्व मुख्यमंत्री का क्षेत्र, फिर भी विकास ठप यह वही विधानसभा क्षेत्र है जहाँ से पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा और पूर्व सांसद गीता कोड़ा का पैतृक प्रखंड जुड़ा हुआ है। इसके बावजूद यदि क्षेत्र में इतनी महत्वपूर्ण शैक्षणिक और स्वास्थ्य परियोजना वर्षों तक ठप पड़ी है, तो यह साफ तौर पर शासन–प्रशासन की गंभीर विफलता को दर्शाता है।
       स्थानीय बुद्धिजीवियों का मानना है कि जब प्रभावशाली राजनीतिक पहचान के बावजूद योजनाएँ धरातल पर नहीं उतर पा रहीं, तो आम क्षेत्रों की स्थिति का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है।
योजना नहीं, परिणाम चाहिए
विशेषज्ञों का कहना है कि
सिर्फ योजना बना देना, शिलान्यास कर देना या औपचारिक निरीक्षण कर लेना विकास नहीं होता। विकास तब कहलाता है जब योजना तय समय-सीमा में पूरी हो, नियमित निगरानी हो और जनता को वास्तविक लाभ मिले।
     बुकासाई आयुर्वेदिक कॉलेज की वर्तमान स्थिति इस बात का उदाहरण बन चुकी है कि किस प्रकार योजनाओं को जानबूझकर लटकाकर लूट का बाजार खड़ा कर दिया जाता है।


निरीक्षण में भी खुली पोल
निरीक्षण के दौरान कॉलेज का सत्यापन एवं परीक्षण किया गया। निरीक्षण में यह स्पष्ट हुआ कि संसाधन उपलब्ध हैं, भवन पूरी तरह तैयार हैं, फिर भी न पढ़ाई शुरू है और न ही अस्पताल की कोई सेवा। यह स्थिति या तो घोर प्रशासनिक लापरवाही की ओर इशारा करती है, या फिर यह संदेह को जन्म देती है कि कहीं भ्रष्टाचार के कारण तो इस योजना को ठंडे बस्ते में नहीं डाला गया।
      जवाबदेही तय करने की मांग
इस मामले को लेकर एंटी करप्शन ऑफ इंडिया, झारखंड प्रदेश अध्यक्ष धी रामहरि पेरियार ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि इस सिस्टम को सुधारना केवल जरूरत नहीं, हमारा कर्तव्य है। अब सवालों से कोई नहीं बच सकता।


उन्होंने स्पष्ट रूप से सवाल उठाए
कॉलेज संचालन में देरी के लिए ज़िम्मेदार कौन है? तय समय-सीमा का उल्लंघन क्यों किया गया?
आयुर्वेदिक कॉलेज और अस्पताल आम जनता के लिए कब खोले जाएंगे? जनता को आश्वासन नहीं, कार्रवाई चाहिए, स्थानीय लोगों का कहना है कि अब वे झूठे आश्वासनों से थक चुके हैं। यदि शीघ्र ही कॉलेज और अस्पताल का संचालन शुरू नहीं हुआ, तो यह मुद्दा व्यापक स्तर पर उठाया जाएगा।
   अंत में एक ही सवाल गूंज रहा है,
विकास आखिर कब कागजों से निकलकर जमीन पर आएगा?
क्योंकि विकास कोई एहसान नहीं, जनता का अधिकार है।

युवा कांग्रेस सांगठनिक चुनाव परिणाम घोषित, प्रीतम बांकिरा पुनः  पश्चिमी सिंहभूम के जिलाध्यक्ष बने

युवा कांग्रेस सांगठनिक चुनाव परिणाम घोषित, प्रीतम बांकिरा पुनः  पश्चिमी सिंहभूम के जिलाध्यक्ष बने

पश्चिमी सिंहभूम : युवा कांग्रेस के सांगठनिक चुनाव के परिणाम घोषित कर दिए गए हैं। यह चुनाव प्रखंड अध्यक्ष, विधानसभा अध्यक्ष, जिला महासचिव, जिलाध्यक्ष, प्रदेश महासचिव और प्रदेश अध्यक्ष पदों के लिए आयोजित किया गया था। 18 से 35 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं ने सदस्यता लेकर मतदान में भाग लिया। मतदान की प्रक्रिया लगभग एक महीने तक चली।
चुनाव परिणामों के अनुसार प्रीतम बांकिरा को दूसरी बार पश्चिमी सिंहभूम जिला युवा कांग्रेस का अध्यक्ष निर्वाचित किया गया है। उनके पुनः जिलाध्यक्ष बनने पर जिले के युवा कार्यकर्ताओं में उत्साह और खुशी देखी जा रही है।
प्रीतम बांकिरा छात्र हितों और जिले की जनसमस्याओं को लेकर लगातार सक्रिय रहे हैं। उनके कार्यकाल में युवा कांग्रेस संगठन का विस्तार जिला से लेकर पंचायत स्तर तक किया गया है।
पुनः निर्वाचित होने के बाद प्रीतम बांकिरा ने कहा कि संगठन को जमीनी स्तर पर और अधिक मजबूत करना उनकी प्राथमिकता होगी। उन्होंने बताया कि ऐसे युवाओं को संगठन से जोड़ा जाएगा जिनकी कोई राजनीतिक पृष्ठभूमि नहीं है, लेकिन वे राजनीति के माध्यम से समाज सेवा करना चाहते हैं। शिक्षित और ऊर्जावान युवाओं की भागीदारी से आम जनता को सीधा लाभ मिलेगा।
प्रीतम बांकिरा के जिलाध्यक्ष बनने पर जगन्नाथपुर के विधायक सोनाराम सिंकु, जिला पर्यवेक्षक डॉ. प्रदीप बालमूचू, जिला कांग्रेस अध्यक्ष रंजन बोयपाई सहित कई कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने उन्हें बधाई दी।

किरिबुरु में एंटी क्राइम चेकिंग के दौरान चोरी की बाइक बरामद, चालक गिरफ्तार

किरिबुरु में एंटी क्राइम चेकिंग के दौरान चोरी की बाइक बरामद, चालक गिरफ्तार

गुवा : किरीबुरु थाना पुलिस ने एंटी क्राइम चेकिंग अभियान के दौरान एक चोरी की बाइक बरामद की है और बाइक चला रहे दारा सिंह बगवार को गिरफ्तार किया है। बरामद बाइक के संबंध में सदर थाना में पहले से चोरी का मामला दर्ज है। गिरफ्तार आरोपी दारा सिंह बगवार किरीबुरु का निवासी है। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि चोरी और अन्य आपराधिक गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए एंटी क्राइम चेकिंग अभियान आगे भी जारी रहेगा। साथ ही आम लोगों से अपील की गई है कि किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें।

मनरेगा रद्द करना गरीब मजदूरों के खिलाफ साजिश : बुधराम लागुरी

मनरेगा रद्द करना गरीब मजदूरों के खिलाफ साजिश : बुधराम लागुरी

चाईबासा : झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के जिला प्रवक्ता बुधराम लागुरी ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि मनरेगा को रद्द करना भाजपा की गरीब और मजदूर विरोधी मानसिकता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि मनरेगा ग्रामीण मजदूरों के लिए केवल एक योजना नहीं, बल्कि उनकी आजीविका का सुरक्षा कवच है, जिसे केंद्र की भाजपा सरकार साजिश के तहत समाप्त करने का प्रयास कर रही है।
श्री लागुरी ने बताया कि मनरेगा और प्रस्तावित “वीबी-जी रामजी बिल 2025” में बड़ा अंतर है। यह बिल संसद के शीतकालीन सत्र में राज्यों से बिना परामर्श और व्यापक चर्चा के जल्दबाजी में पारित किया गया, जिससे ग्रामीण गरीबों के रोजगार के संवैधानिक अधिकार कमजोर होंगे।
उन्होंने कहा कि मनरेगा का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में प्रत्येक परिवार को हर साल कम से कम 100 दिनों का गारंटीकृत रोजगार देकर गरीबी कम करना, टिकाऊ परिसंपत्तियों का निर्माण करना और महिलाओं तथा एससी/एसटी वर्गों को सामाजिक रूप से सशक्त बनाना है।
बुधराम लागुरी ने घोषणा की कि 27 दिसंबर को दिन के 11 बजे भाजपा सरकार के खिलाफ पुराना डीसी कार्यालय, चाईबासा में जोरदार विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। इस कार्यक्रम में झामुमो पश्चिमी सिंहभूम जिला के सभी जिला व वर्ग संगठन, प्रखंड, नगर समितियों के सदस्य, पदाधिकारी और केंद्रीय सदस्य शामिल होंगे।
उन्होंने कहा कि मनरेगा ग्रामीणों को काम, सम्मान और आर्थिक सुरक्षा देता है, जबकि नया बिल मजदूरों की सौदेबाजी की ताकत छीनने का प्रयास है।

पेसा नियमावली 2025 एक स्वागतयोग्य कदम या पारंपरिक स्वशासन पर नया हमला?

पेसा नियमावली 2025 एक स्वागतयोग्य कदम या पारंपरिक स्वशासन पर नया हमला?

रांची : झारखंड राज्य के गठन को 25 वर्ष पूरे होने पर “अबुआ सरकार” झामुमो नेतृत्व वाली हेमंत सोरेन द्वारा 23 दिसंबर 2025 को कैबिनेट में पंचायती राज (अनुसूचित क्षेत्रों में विस्तार) झारखंड नियमावली, 2025 को मंजूरी देना निश्चित रुप से एक महत्वपूर्ण घटना है। यह पेसा अधिनियम 1996 की राज्य स्तर पर नियमावली बनाने की लंबी प्रतीक्षा का अंत प्रतीत होता है। केंद्र सरकार द्वारा 1996 में पारित पेसा कानून का मूल उद्देश्य अनुसूचित क्षेत्रों में आदिवासी समुदायों की पारंपरिक ग्राम सभाओं को शासन की वास्तविक शक्ति प्रदान करना था – जल, जंगल,जमीन और खनिज संसाधनों पर नियंत्रण,स्थानीय विकास योजनाओं की मंजूरी और परंपरागत स्वशासन व्यवस्था की रक्षा।
यह कदम स्वागतयोग्य है क्योंकि इससे राज्य के 15 अनुसूचित जिलों में ग्राम सभाओं को खनन, भूमि अधिग्रहण,वन उत्पाद और स्थानीय योजनाओं पर निर्णायक अधिकार मिलने का रास्ता खुलता है। कैबिनेट की मंजूरी के बाद अधिसूचना जारी होने पर बालू घाटों की नीलामी जैसी रुकी हुई प्रशासनिक प्रक्रियाएं भी आगे बढ़ सकती हैं। झारखंड हाईकोर्ट की लगातार निगरानी और अवमानना याचिकाओं के दबाव में यह निर्णय आया है,जो दर्शाता है कि न्यायिक हस्तक्षेप ने सरकार को मजबूर किया है।
लेकिन बधाई देना जरुरी है मगर रुकिए ?
मेरी चिंता यह है कि क्या यह नियमावली वाकई पेसा कानून की “आत्मा” को जीवंत करेगी, या फिर यह पारंपरिक आदिवासी स्वशासन पर सामान्य पंचायती राज व्यवस्था को थोपने का एक और प्रयास होगी ? पिछले अनुभव और उपलब्ध जानकारी से यह संदेह गहराता है।
पेसा अधिनियम की मूल भावना भूरिया समिति की सिफारिशों पर आधारित थी, जो आदिवासियों की रुढ़िगत व्यवस्था को प्राथमिकता देती है। लेकिन कई राज्यों में पेसा नियमावलियां बनाते समय राज्य सरकारों ने इसे सामान्य पंचायती राज अधिनियमों के साथ मिलाकर कमजोर कर दिया है। झारखंड में भी 2023-2025 के ड्राफ्ट्स पर आदिवासी संगठनों और विशेषज्ञों ने यही आलोचना की है कि नियमावली में ग्राम सभा की शक्ति को ऊपरी पंचायत स्तरों (पंचायत समिति या जिला परिषद) से बांधने की कोशिश की गई है। इसमें उल्लेख है कि ड्राफ्ट में पारंपरिक प्रमुखों (जैसे मानकी-मुंडा) की भूमिका को सीमित रखा गया है,जबकि तीन-स्तरीय पंचायत व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है – जो पेसा की भावना के विपरीत है।
खुंटी,गुमला जैसे आदिवासी बहुल जिलों में पत्थलगड़ी आंदोलन जैसी घटनाएं इसी संदेह से उपजी हैं,जहाँ ग्राम सभाओं ने खुद को संविधान की पांचवीं अनुसूची के तहत स्वायत्त घोषित किया है। हाल के वर्षों में 30-40 गांवों ने राज्य सरकार की देरी से तंग आकर खुद पेसा लागू करने की घोषणा की है। यदि नई नियमावली में पारंपरिक ग्राम सभाओं की बजाय चुनावी पंचायतों को प्राथमिकता दी गई, तो यह आदिवासी अस्मिता पर एक और कुठाराघात  होगा। हम भी इस मंजूरी का स्वागत के साथ चेतावनी भी देते हैं कि यदि नियमावली में “आत्मा से छेड़छाड़” हुई तो विरोध होगा। इसलिए सतर्कता और संघर्ष जरुरी है।
यह नियमावली अभी केवल कैबिनेट से पारित हुई है। अधिसूचना और वास्तविक कार्यान्वयन बाकी है। आदिवासी संगठनों,बुद्धिजीवियों और नागरिक समाज को इसका बारीकी से अध्ययन करना चाहिए। यदि यह पारंपरिक स्वशासन को मजबूत करने की बजाय केंद्रीकृत नियंत्रण बढ़ाती है तो इसका पुरजोर विरोध करना है। पेसा सिर्फ एक कानून नही है बल्कि आदिवासी अधिकारों की रक्षा का संवैधानिक हथियार है। 25 वर्षों की प्रतीक्षा के बाद मिला यह कदम यदि आधा-अधूरा साबित हुआ तो यह झारखंड के आदिवासियों के साथ विश्वासघात होगा।
जय जोहार! जय आदिवासी! सतर्क रहें,संघर्ष जारी रखें।

लक्ष्मीनारायण मुंडा (रांची)

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के जमशेदपुर और आदित्यपुर आगमन की तैयारियां अंतिम चरण में

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के जमशेदपुर और आदित्यपुर आगमन की तैयारियां अंतिम चरण में

जमशेदपुर : 29 दिसंबर को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के जमशेदपुर और आदित्यपुर आगमन को लेकर प्रशासन ने तैयारियों को अंतिम रूप दिया है। इसी कड़ी में सचिव, वाणिज्य कर विभाग अमिताभ कौशल और जोनल आईजी मनोज कौशिक ने परिसदन जमशेदपुर में समीक्षा बैठक की। बैठक में उपायुक्त पूर्वी सिंहभूम कर्ण सत्यार्थी, उपायुक्त सरायकेला-खरसावां नितिश कुमार सिंह, एसएसपी पूर्वी सिंहभूम पीयूष पांडेय, एसपी सरायकेला-खरसावां मुकेश लुणायत सहित अन्य प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी मौजूद रहे।
बैठक में परिभ्रमण मार्ग की मैपिंग, यातायात प्रबंधन, रास्ते से निर्माण सामग्री हटाने, बेरिकेटिंग, पुलिस बल की तैनाती, रिहर्सल, नो-फ्लाई जोन घोषित करना और प्रोटोकॉल पालन जैसे विषयों पर चर्चा की गई।
समीक्षा बैठक के बाद सचिव और जोनल आईजी ने करनडीह कार्यक्रम स्थल, एनआईटी जमशेदपुर और एयरपोर्ट का निरीक्षण किया। इस दौरान सुरक्षा और विधि व्यवस्था की तैयारियों का जायजा लिया गया और सभी तैयारियों को समय पर पूरा करने के निर्देश दिए गए।

समाहरणालय में नीति आयोग की विकास योजनाओं की समीक्षा बैठक

समाहरणालय में नीति आयोग की विकास योजनाओं की समीक्षा बैठक

सरायकेला : समाहरणालय सभागार में मंगलवार को आकांक्षी जिला कार्यक्रम (ABP) के तहत नीति आयोग द्वारा नामित केंद्रीय प्रभारी पदाधिकारी विकास सिंह, निदेशक, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय, नई दिल्ली ने जिले में संचालित विकासात्मक और जनकल्याणकारी योजनाओं की सूचकांक-आधारित समीक्षा की। बैठक में उपायुक्त नीतिश कुमार सिंह, पुलिस अधीक्षक मुकेश कुमार लुनायत, उप विकास आयुक्त रीना हांसदा और विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
बैठक में स्वास्थ्य, शिक्षा, पोषण, कृषि, पशुपालन, पेयजल, स्वच्छता और सामाजिक सुरक्षा जैसे प्रमुख क्षेत्रों के सूचकांकों पर विभागवार प्रगति की समीक्षा की गई। स्वास्थ्य क्षेत्र में संस्थागत प्रसव, टीकाकरण, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं और स्वास्थ्य संस्थानों की कार्यशीलता पर चर्चा हुई। शिक्षा क्षेत्र में नामांकन, उपस्थिति, ड्रॉपआउट दर, आधारभूत संरचना और शिक्षण गुणवत्ता की स्थिति पर ध्यान दिया गया। सामाजिक सुरक्षा क्षेत्र में पेंशन योजनाओं सहित अन्य योजनाओं के लाभार्थियों तक लाभ पहुँचाने की प्रगति पर भी समीक्षा हुई।
केंद्रीय प्रभारी पदाधिकारी ने लक्ष्य प्राप्ति सुनिश्चित करने, सूचकांकों में सुधार हेतु केंद्रित हस्तक्षेप करने, लंबित मामलों का शीघ्र निपटान करने और फील्ड स्तर पर नियमित अनुश्रवण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने अंतरविभागीय समन्वय मजबूत करने और योजनाओं के प्रभावी, गुणवत्तापूर्ण तथा परिणामोन्मुखी क्रियान्वयन पर विशेष बल देने पर भी जोर दिया।

सरायकेला-खरसावां में आयोजित मासिक लोक अदालत में 13 मामले निपटाए गए

सरायकेला-खरसावां में आयोजित मासिक लोक अदालत में 13 मामले निपटाए गए

सरायकेला : झालसा, रांची के दिशा-निर्देश और प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह अध्यक्ष, डीएलएसए सरायकेला-खरसावां, रमाशंकर सिंह के मार्गदर्शन में मंगलवार को सरायकेला सिविल कोर्ट और चांडिल अनुमंडलीय न्यायालय में मासिक लोक अदालत आयोजित हुई।
अदालती कार्यवाही के लिए 11 पीठों का गठन किया गया, जिनमें विभिन्न मामलों की सुनवाई हुई। समाचार लिखे जाने तक 13 मामलों का निस्तारण किया जा चुका था और कुल ₹47,000 वसूल किए गए।
सामान्यतः यह लोक अदालत हर महीने के अंतिम शनिवार को आयोजित की जाती है, लेकिन आगामी शीतकालीन अवकाश (24 दिसंबर 2025 से 1 जनवरी 2026) को ध्यान में रखते हुए इसे 23 दिसंबर को आयोजित किया गया।
कड़ाके की ठंड और घने कोहरे के बावजूद बड़ी संख्या में वादकारी उपस्थित हुए और न्यायिक प्रक्रिया में भाग लेकर इसे सफल बनाया। यह आयोजन वर्ष 2025 की अंतिम लोक अदालत भी रही।

अवैध बालू खनन पर जिला प्रशासन की सख्ती, शहरबेड़ा और सापड़ा घाट में 10 डोंगी नावें विनष्ट

अवैध बालू खनन पर जिला प्रशासन की सख्ती, शहरबेड़ा और सापड़ा घाट में 10 डोंगी नावें विनष्ट

सरायकेला : उपायुक्त नीतीश कुमार सिंह के निर्देश पर मंगलवार को गम्हरिया अंचल अधिकारी एवं जिला खनन विभाग की संयुक्त टीम ने आदित्यपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत शहरबेड़ा और सापड़ा घाट में अवैध बालू खनन, भंडारण एवं परिवहन के खिलाफ औचक निरीक्षण अभियान चलाया।

निरीक्षण के दौरान नदी घाटों पर अवैध बालू उत्खनन में प्रयुक्त डोंगी नावों का उपयोग पाया गया। स्थानीय युवकों के सहयोग से कुल 10 डोंगी नावों को विनष्ट किया गया।

उपायुक्त ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि जिले के किसी भी क्षेत्र में खनिजों के अवैध खनन, भंडारण या परिवहन को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस प्रकार की कार्रवाई आगे भी लगातार और समय-समय पर जारी रहेगी।