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चाईबासा: प्रोजेक्ट ‘परख’ के तहत शिक्षकों का उन्मुखीकरण, शिक्षा गुणवत्ता सुधार पर जोर

चाईबासा: प्रोजेक्ट ‘परख’ के तहत शिक्षकों का उन्मुखीकरण, शिक्षा गुणवत्ता सुधार पर जोर

चाईबासा | पश्चिमी सिंहभूम जिले के कोल्हन विश्वविद्यालय के ऑडिटोरियम में बुधवार को जिला दंडाधिकारी सह उपायुक्त मनीष कुमार की अध्यक्षता में प्रोजेक्ट ‘परख’ के अंतर्गत एक दिवसीय उन्मुखीकरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में जिले के सभी माध्यमिक विद्यालयों के प्रधानाचार्य एवं शिक्षक शामिल हुए। कार्यक्रम के दौरान शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास को लेकर विस्तृत चर्चा की गई।

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उपायुक्त ने अपने संबोधन में प्रधानाचार्यों और शिक्षकों को उनके समर्पण के लिए बधाई देते हुए बताया कि जिले ने इस वर्ष राज्य स्तर पर 17वां स्थान हासिल किया है। उन्होंने विश्वास जताया कि सामूहिक प्रयासों से आगामी वर्ष में जिला राज्य में प्रथम स्थान प्राप्त कर सकता है। उन्होंने कहा कि यदि विद्यार्थी, अभिभावक और शिक्षक मिलकर शत-प्रतिशत प्रयास करें, तो सफलता निश्चित है।

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कार्यक्रम के दौरान उपायुक्त ने विद्यालयों में शैक्षणिक एवं सह-शैक्षणिक गतिविधियों को सुदृढ़ करने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए। उन्होंने सभी स्कूलों में नियमित पैरेंट-टीचर मीटिंग आयोजित करने, प्रत्येक माह की 5 तारीख को खेल दिवस मनाने तथा खेल सामग्री की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर जोर दिया। इसके साथ ही विद्यालयों की प्रयोगशालाओं को पूरी तरह क्रियाशील रखने, विद्यार्थियों के लेखन कौशल को विकसित करने के लिए प्रतिदिन एक घंटे की राइटिंग क्लास संचालित करने तथा नियमित रूप से होमवर्क देने और उसकी निगरानी करने के निर्देश दिए।
उपायुक्त ने समय पर विद्यालय पहुंचने वाले विद्यार्थियों को गुलाब फूल देकर सम्मानित करने की पहल अपनाने का सुझाव भी दिया। प्रोजेक्ट ‘परख’ के तहत साप्ताहिक टेस्ट सीरीज आयोजित करने के निर्देश भी दिए गए।

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इसके अतिरिक्त, “बात तो करनी होगी” पहल के अंतर्गत मासिक धर्म, बाल श्रम, बाल विवाह और यौन उत्पीड़न जैसे संवेदनशील विषयों पर विद्यार्थियों से खुलकर संवाद करने पर बल दिया गया। सभी विद्यालयों को प्लास्टिक मुक्त बनाने का लक्ष्य भी निर्धारित किया गया। वहीं “बोलेगा चाईबासा” पहल के तहत प्रतिदिन प्रार्थना सभा का संचालन दो विद्यार्थियों द्वारा कराने का निर्देश दिया गया, ताकि उनमें नेतृत्व क्षमता और आत्मविश्वास का विकास हो सके।
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों द्वारा बनाई गई पेंटिंग्स का उपायुक्त एवं अन्य अतिथियों ने अवलोकन किया और बच्चों के प्रयासों की सराहना की। इस अवसर पर उप विकास आयुक्त, चक्रधरपुर के अनुमंडल पदाधिकारी, शिक्षा विभाग के पदाधिकारी, प्रधानाचार्य, शिक्षकगण एवं अन्य संबंधित लोग उपस्थित थे।

सरायकेला में सड़क सुरक्षा को लेकर सख्ती, विशेष जांच अभियान में चालकों पर कार्रवाई

सरायकेला में सड़क सुरक्षा को लेकर सख्ती, विशेष जांच अभियान में चालकों पर कार्रवाई

सरायकेला |  जिले में सड़क सुरक्षा को लेकर प्रशासन सख्त नजर आ रहा है। उपायुक्त नितिश कुमार सिंह के निर्देश पर बुधवार को राजनगर थाना क्षेत्र में विशेष जांच अभियान चलाया गया। अभियान के दौरान जिला परिवहन पदाधिकारी गिरिजा शंकर महतो की मौजूदगी में दोपहिया वाहन चालकों की सघन जांच की गई।

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जांच के दौरान बिना हेलमेट वाहन चला रहे चालकों के खिलाफ मोटर वाहन अधिनियम के तहत जुर्माना लगाया गया। खास बात यह रही कि केवल कार्रवाई तक सीमित न रहकर कई चालकों को मौके पर हेलमेट भी उपलब्ध कराए गए और उन्हें यातायात नियमों के प्रति जागरूक किया गया।

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अभियान में पुलिस पदाधिकारियों के साथ-साथ सड़क सुरक्षा समिति के सदस्यों ने भी सक्रिय भागीदारी निभाई। इस दौरान आम लोगों को सुरक्षित ड्राइविंग के लिए प्रेरित करते हुए हेलमेट पहनने, निर्धारित गति सीमा का पालन करने और नशे की हालत में वाहन न चलाने की अपील की गई।

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प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सड़क सुरक्षा को लेकर किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ आगे भी कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी। साथ ही, सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने के उद्देश्य से ऐसे जांच और जागरूकता अभियान निरंतर चलाए जाएंगे।

खरसावां में महा रक्तदान शिविर का आयोजन, 80 यूनिट रक्त संग्रहित

खरसावां में महा रक्तदान शिविर का आयोजन, 80 यूनिट रक्त संग्रहित

खरसावां | प्रखंड मुख्यालय में बुधवार को प्रखंड प्रशासन एवं “समस्त रक्तवीर खरसावां” के संयुक्त तत्वावधान में एक महा रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में कुल 80 यूनिट रक्त का संग्रह किया गया। रक्तदान करने वाले सभी रक्तदाताओं को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम का उद्घाटन प्रखंड विकास पदाधिकारी प्रधान माझी, अंचल अधिकारी कप्तान सिंकू, खरसावां थाना प्रभारी गौरव कुमार, प्रखंड प्रमुख मनेन्द्र जामुदा एवं जिला परिषद सदस्य काली चरण बानरा सहित अन्य अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया।

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इस अवसर पर बीडीओ प्रधान माझी ने कहा कि विज्ञान ने भले ही काफी प्रगति कर ली हो, लेकिन रक्त का निर्माण आज भी मशीन से संभव नहीं है। रक्त केवल मानव शरीर से ही प्राप्त किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि रक्तदान मानवीय संवेदना का सर्वोत्तम उदाहरण है, क्योंकि रक्त किसी जाति, धर्म या मजहब को नहीं देखता, बल्कि केवल जीवन बचाने का कार्य करता है। उन्होंने यह भी बताया कि नियमित रक्तदान से हार्ट अटैक की संभावना कम होती है, रक्त पतला रहता है और थक्के जमने का खतरा घटता है। साथ ही, इससे वजन भी नियंत्रित रहता है। उन्होंने लोगों से वर्ष में कम से कम दो बार रक्तदान करने की अपील की।

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अंचल अधिकारी कप्तान सिंकू ने रक्तदान को एक अत्यंत सराहनीय एवं मानवहितकारी कार्य बताते हुए कहा कि इसके लिए खरसावां वासी बधाई के पात्र हैं। उन्होंने लोगों से स्वस्थ जीवनशैली, स्वच्छता और सकारात्मक सोच के साथ समाज सेवा में आगे आने का आह्वान किया।
शिविर के दौरान बड़ी संख्या में लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर रक्तदान किया और रक्तदाताओं के बीच प्रमाण पत्र वितरित किए गए।

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इन लोगों को किया गया सम्मानित
सरायकेला-खरसावां मॉडल महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. बिनय कुमार सिंह को अब तक 81 बार रक्तदान एवं 79 बार कैंसर पीड़ितों के लिए प्लेटलेट्स डोनेट करने सहित कुल 160 बार रक्त एवं प्लेटलेट्स दान करने के लिए प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। इसके अलावा खरसावां के शिक्षाविद् एवं समाजसेवी आलोक दास (36 बार रक्तदान), प्रखंड विकास पदाधिकारी प्रधान माझी (31 बार रक्तदान) तथा अंचल अधिकारी कप्तान सिंकू (12 बार रक्तदान) को भी उनके योगदान के लिए सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम में उप प्रमुख ज्योत्सना मंडल, जिला परिषद सदस्य सावित्री बानरा, मुखिया सुनिता तापे, प्रभाकर मंडल सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

चक्रधरपुर रेलवे स्टेशन से 7 नाबालिग बच्चियां रेस्क्यू, तस्करी की आशंका

चक्रधरपुर रेलवे स्टेशन से 7 नाबालिग बच्चियां रेस्क्यू, तस्करी की आशंका

चक्रधरपुर | पश्चिमी सिंहभूम जिले के चक्रधरपुर रेलवे स्टेशन परिसर में मंगलवार देर रात पुलिस ने कार्रवाई करते हुए सात नाबालिग बच्चियों को रेस्क्यू किया। सभी बच्चियों को सुरक्षित बरामद कर चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (CWC), चाईबासा को सौंप दिया गया है।

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जानकारी के अनुसार, सभी बच्चियां झींकपानी और गोइलकेरा प्रखंड के कुईडा क्षेत्र की रहने वाली हैं। बताया जा रहा है कि वे गुजरात के राजकोट में एक कंपनी में काम करने जा रही थीं। इसी दौरान चक्रधरपुर थाना प्रभारी अवधेश कुमार के नेतृत्व में पुलिस ने रात करीब 11 बजे स्टेशन परिसर में छापेमारी कर उन्हें बरामद किया।

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रेस्क्यू के दौरान CWC की प्रतिनिधि पिंकू बोदरा ने अन्य किशोरियों से भी पूछताछ की, जिनमें कुछ बालिग पाई गईं। फिलहाल सभी नाबालिग बच्चियों को संरक्षण में रखा गया है और उनके परिजनों से संपर्क किया जा रहा है।

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पुलिस मामले की जांच कर रही है और बच्चियों को बाहर भेजने वाले संभावित नेटवर्क की भी पड़ताल की जा रही है।

उल्लेखनीय है कि पिछले एक महीने में यह तीसरा मामला है, जिससे क्षेत्र में मानव तस्करी की आशंका बढ़ गई है।

सरायकेला: नव पदस्थापित एसपी निधि द्विवेदी ने थाना का किया औचक निरीक्षण, व्यवस्थाओं का लिया जायजा

सरायकेला: नव पदस्थापित एसपी निधि द्विवेदी ने थाना का किया औचक निरीक्षण, व्यवस्थाओं का लिया जायजा

सरायकेला | जिले की नव पदस्थापित पुलिस अधीक्षक निधि द्विवेदी ने मंगलवार को सरायकेला थाना का औचक निरीक्षण कर कानून-व्यवस्था एवं प्रशासनिक व्यवस्थाओं का गहन जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने थाना प्रभारी विनय कुमार से क्षेत्र में अपराध नियंत्रण, लंबित मामलों की स्थिति तथा पुलिस कार्यप्रणाली से संबंधित विस्तृत जानकारी प्राप्त की।

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निरीक्षण के क्रम में एसपी ने अनुसूचित जाति-जनजाति थाना, महिला थाना, थाना हाजत, आगंतुक कक्ष एवं बाल मित्र थाना का बारीकी से अवलोकन किया। थाना परिसर में साफ-सफाई एवं व्यवस्थाएं संतोषजनक पाए जाने पर उन्होंने संतोष व्यक्त करते हुए थाना प्रभारी के कार्यों की सराहना की।

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बाल मित्र थाना को और आकर्षक बनाने के निर्देश
बाल मित्र थाना के निरीक्षण के दौरान एसपी ने इसे और अधिक बच्चों के अनुकूल बनाने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने निर्देश दिया कि परिसर को पूरी तरह चाइल्ड-फ्रेंडली बनाया जाए। इसके तहत फर्श पर मैट बिछाने, दीवारों पर रंगीन पेंटिंग कराने एवं सजावट के माध्यम से बच्चों के लिए सहज और सुरक्षित वातावरण तैयार करने की बात कही।

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निरीक्षण के बाद आयोजित समीक्षा बैठक में एसपी निधि द्विवेदी ने लंबित मामलों के शीघ्र निष्पादन के सख्त निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आम जनता को त्वरित न्याय दिलाना पुलिस की प्राथमिक जिम्मेदारी है। साथ ही अधिकारियों को कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और संवेदनशीलता बनाए रखने की हिदायत भी दी।

“नाला दिसुम का जाल”: पलायन, शोषण और शिक्षा व्यवस्था की विफलता पर प्रेम सिंह डिंगिल की कड़ी चेतावनी

“नाला दिसुम का जाल”: पलायन, शोषण और शिक्षा व्यवस्था की विफलता पर प्रेम सिंह डिंगिल की कड़ी चेतावनी

चक्रधरपुर | KNT के शिक्षक और सामाजिक कार्यकर्ता प्रेम सिंह डिंगिल ने चक्रधरपुर और आसपास के क्षेत्रों से गए प्रवासी श्रमिकों के साथ हुई घटना को केवल मारपीट का मामला मानने से इनकार करते हुए इसे शिक्षा व्यवस्था और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की विफलता का सीधा परिणाम बताया है। उनका कहना है कि जब तक युवाओं को अपने गांव में भविष्य नहीं दिखेगा, तब तक वे “नाला दिसुम” (बाहरी दुनिया) के लालच में फंसते रहेंगे।

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तमिलनाडु के नमक्कल से लौटे श्रमिकों—अनिल समद और मंकी हेस्सा—के बयान बेहद चौंकाने वाले हैं। उन्होंने बताया कि कपड़ा मिलों में स्थिति बंधुआ मजदूरी जैसी थी, जहां मजदूरों के साथ न केवल मारपीट की गई, बल्कि उनकी मजदूरी तक रोक ली गई। कई मामलों में इलाज का खर्च भी मजदूरों से ही वसूला गया और उन्हें परिसर से बाहर निकलने तक की अनुमति नहीं थी।

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सबसे चिंताजनक पहलू यह सामने आया कि कई किशोर-किशोरियां अपनी उम्र आधार कार्ड (Aadhaar) में बढ़ाकर इस “पलायन के जाल” में शामिल हो रहे हैं। यह न केवल गैरकानूनी है, बल्कि उन्हें किसी भी तरह की कानूनी सुरक्षा से भी वंचित कर देता है, जिससे वे शोषण के लिए आसान शिकार बन जाते हैं।

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प्रेम सिंह डिंगिल के अनुसार, यह पूरी स्थिति दर्शाती है कि गांवों में शिक्षा, रोजगार और कौशल विकास के अवसरों की कितनी भारी कमी है। “नाला दिसुम” जाना अब मजबूरी के साथ-साथ एक खतरनाक मानसिकता बनती जा रही है।
समाधान की दिशा में जरूरी कदम:
इस गंभीर सामाजिक संकट से निपटने के लिए केवल जांच नहीं, बल्कि ठोस नीतिगत कदम जरूरी हैं—
पंचायत स्तर पर प्रवासी श्रमिकों का अनिवार्य पंजीकरण
झारखंड और तमिलनाडु सरकार के बीच बेहतर समन्वय और त्वरित रेस्क्यू सिस्टम
स्थानीय स्तर पर कौशल विकास और रोजगार के अवसर
बिचौलियों (एजेंट्स) की पहचान कर सख्त कानूनी कार्रवाई
यह मामला सिर्फ कुछ मजदूरों का नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम पर सवाल खड़ा करता है—क्या हम अपने युवाओं को उनके ही घर में सुरक्षित और सम्मानजनक भविष्य दे पा रहे हैं?

चक्रधरपुर से तमिलनाडु तक: किशोर पलायन, बंधुआ मजदूरी और शिक्षा-रोजगार संकट का खौफनाक सच

चक्रधरपुर से तमिलनाडु तक: किशोर पलायन, बंधुआ मजदूरी और शिक्षा-रोजगार संकट का खौफनाक सच

पश्चिम सिंहभूम | यह घटना केवल मारपीट का मामला नहीं है, बल्कि यह हमारी शिक्षा व्यवस्था (स्कूल छोड़ने की दर) और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की विफलता का आईना है। जब तक किशोरों को अपनी मिट्टी में भविष्य नहीं दिखेगा, वे इसी तरह अपनी पहचान बदलकर “लालच के जाल” में फंसते रहेंगे।

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चक्रधरपुर और आसपास के क्षेत्रों से गए इन प्रवासी श्रमिकों के साथ जो हुआ, वह मानवाधिकारों का खुला उल्लंघन है। विशेष रूप से यह तथ्य कि किशोर-किशोरी अपनी उम्र आधार कार्ड (Aadhaar) में बढ़ाकर इस “पलायन के जाल” में फंस रहे हैं, एक गहरे सामाजिक संकट की ओर इशारा करता है।
इस पूरे घटनाक्रम और आपके द्वारा उठाए गए बिंदुओं का विश्लेषण कुछ इस प्रकार है:

1. शोषण का भयावह स्वरूप

तमिलनाडु के नमक्कल से लौटे श्रमिकों (जैसे अनिल समद और मंकी हेस्सा) के बयान यह साफ करते हैं कि वहां की कपड़ा मिलों में स्थितियां बंधुआ मजदूरी के समान हो गई थीं:
शारीरिक उत्पीड़न: लाठियों और मशीन के पुर्जों से मारपीट करना।
आर्थिक शोषण: मजदूरी का भुगतान न करना और इलाज का खर्च भी मजदूरों पर डालना।
बंधक बनाना: परिसर छोड़ने पर पाबंदी और जान बचाकर भागने की नौबत आना।

2. ‘नाला दिसुम’ (बाहरी दुनिया) का घातक आकर्षण

आपने बिल्कुल सही कहा कि आंकड़ों से परे हकीकत यह है कि स्थानीय स्तर पर शिक्षा और रोजगार की कमी ने “पलायन” को एक मजबूरी भरा ‘आकर्षण’ बना दिया है:

3.उम्र की जालसाजी:

18 साल से कम उम्र के बच्चे बेहतर जीवन के लालच में अपने पहचान पत्रों (Aadhaar) के साथ छेड़छाड़ कर रहे हैं ताकि वे बाहर जा सकें। यह उन्हें कानूनी सुरक्षा के दायरे से बाहर कर देता है और शोषण के प्रति अधिक संवेदनशील बनाता है।

मानसिकता: ‘
नाला दिसुम’ जाने को एकमात्र उद्देश्य मान लेना यह दर्शाता है कि गांवों में विकास और संभावनाओं की कितनी भारी कमी है।

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झारखंड सरकार और प्रशासन के लिए आवश्यक कदम

इस समस्या के समाधान के लिए केवल जांच काफी नहीं है, बल्कि एक ठोस नीति की आवश्यकता है:

श्रमिक पंजीकरण अनिवार्य हो: पंचायत स्तर पर हर बाहर जाने वाले श्रमिक का अनिवार्य पंजीकरण होना चाहिए ताकि संकट के समय उनका पता लगाया जा सके।

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हेल्पलाइन और त्वरित कार्रवाई: तमिलनाडु और झारखंड सरकार के बीच बेहतर समन्वय होना चाहिए ताकि ऐसे मामलों में तुरंत रेस्क्यू किया जा सके।

स्थानीय स्तर पर कौशल विकास: किशोरों को गांव में ही तकनीकी शिक्षा या कौशल विकास से जोड़ा जाए ताकि वे उम्र बढ़ाकर मजदूरी करने के बजाय सम्मानजनक काम की ओर बढ़ें।

बिचौलियों (Agents) पर नकेल: उन एजेंटों की पहचान कर उन पर कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए जो झूठे वादे करके भोले-भाले आदिवासियों को दूसरे राज्यों में बेच देते हैं।

पश्चिम सिंहभूम में 26 लाख गबन कांड: आरक्षी ने ‘किंगफिशर FC’ के नाम पर खेला जुआ, चौंकाने वाला खुलासा!

पश्चिम सिंहभूम में 26 लाख गबन कांड: आरक्षी ने ‘किंगफिशर FC’ के नाम पर खेला जुआ, चौंकाने वाला खुलासा!

चाईबासा | पश्चिम सिंहभूम जिले से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां पुलिस विभाग से जुड़ी सरकारी राशि के गबन में बड़ा खुलासा हुआ है। आरोपी आरक्षी देवनारायण मुर्मू ने करीब 26 लाख रुपए का गबन कर न सिर्फ फुटबॉल टीम बनाई, बल्कि उसी के नाम पर बड़े टूर्नामेंट में जुआ भी खेलता रहा।

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मामले का खुलासा तब हुआ जब महालेखाकार, रांची कार्यालय की समीक्षा के दौरान चाईबासा जिला कोषागार से पुलिस मद की राशि निकासी में गड़बड़ी का शक हुआ। इसके बाद उपायुक्त के निर्देश पर जांच कमेटी गठित की गई।

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जांच रिपोर्ट सामने आते ही जिला कोषागार पदाधिकारी सुमित कुमार ने प्राथमिकी दर्ज कराई। जांच में पाया गया कि देवनारायण मुर्मू, जो 2016 से लेखा कार्य संभाल रहा था, ने मृत पुलिसकर्मियों के आश्रितों के नाम में हेरफेर कर अपने रिश्तेदारों और दोस्तों के बैंक खातों में पैसे ट्रांसफर किए।

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हैरानी की बात ये है कि आरोपी ने अपने साला, जीजा और एक करीबी मित्र के खातों का इस्तेमाल किया। पूछताछ में उसने यह भी कबूल किया कि गबन की रकम से उसने ‘किंगफिशर FC’ नाम की फुटबॉल टीम बनाई और उसी के जरिए लाखों रुपए का जुआ खेलता था।
फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुटी है और आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की तैयारी की जा रही है। इस खुलासे के बाद पूरे जिले में हड़कंप मच गया है।

सरायकेला-खरसावां में निजी स्कूलों की फीस पर लगेगा नियंत्रण, जिला स्तरीय समिति की पहली बैठक में अहम फैसले

सरायकेला-खरसावां में निजी स्कूलों की फीस पर लगेगा नियंत्रण, जिला स्तरीय समिति की पहली बैठक में अहम फैसले

सरायकेला_खरसावां | झारखंड शिक्षा न्यायाधिकरण (संशोधन) अधिनियम, 2017 के तहत समाहरणालय सभागार में जिला स्तरीय शुल्क निर्धारण समिति की पहली बैठक उपायुक्त की अध्यक्षता में आयोजित की गई। बैठक में जनप्रतिनिधियों के प्रतिनिधि, जिला शिक्षा पदाधिकारी कैलाश मिश्रा, विभिन्न विभागों के अधिकारी, निजी विद्यालयों के प्रधानाचार्य तथा अभिभावक सदस्य उपस्थित रहे।

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बैठक में निजी विद्यालयों द्वारा की जा रही मनमानी फीस वृद्धि पर अंकुश लगाने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। समिति ने तय किया कि सभी मान्यता प्राप्त निजी विद्यालय अधिकतम 10 प्रतिशत तक ही फीस बढ़ा सकेंगे। इससे अधिक वृद्धि के लिए जिला समिति की पूर्व अनुमति अनिवार्य होगी। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि एक बार फीस बढ़ाने के बाद दो वर्षों से पहले दोबारा वृद्धि लागू नहीं की जा सकेगी।

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विद्यालयों को निर्देश दिया गया है कि वे पिछले तीन शैक्षणिक सत्रों के साथ-साथ सत्र 2026-27 की कक्षावार फीस का विस्तृत विवरण एक सप्ताह के भीतर जिला समिति को उपलब्ध कराएं। शुल्क निर्धारण प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए प्रत्येक विद्यालय में शुल्क समिति एवं अभिभावक-शिक्षक संघ (PTA) का गठन अनिवार्य किया गया है, जिसकी जानकारी सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करनी होगी।

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अभिभावकों को राहत देते हुए प्रशासन ने स्पष्ट किया कि किसी भी प्रकार के अवैध शुल्क—जैसे एडमिशन, री-एडमिशन या अन्य नामों पर—की वसूली नहीं की जाएगी। साथ ही स्कूल प्रबंधन अभिभावकों को किसी विशेष दुकान से किताब, कॉपी या यूनिफॉर्म खरीदने के लिए बाध्य नहीं कर सकेगा।

छात्रों की सुरक्षा को लेकर भी सख्त निर्देश जारी किए गए। उपायुक्त ने कहा कि स्कूल वाहनों में क्षमता से अधिक बच्चों को नहीं बैठाया जाए और सभी सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन किया जाए। बाहरी वाहनों की निगरानी और छात्रों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने पर जोर दिया गया।

बैठक में शिक्षा का अधिकार (RTE) के तहत पात्र बच्चों का नामांकन सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए। उपायुक्त ने स्पष्ट कहा कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिकता है तथा किसी भी प्रकार की अनियमितता या नियमों के उल्लंघन पर संबंधित विद्यालयों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

खूंटी सांसद कालीचरण मुंडा ने सरायकेला-खरसावां में विकास योजनाओं की समीक्षा की, लापरवाही पर जताई नाराजगी

खूंटी सांसद कालीचरण मुंडा ने सरायकेला-खरसावां में विकास योजनाओं की समीक्षा की, लापरवाही पर जताई नाराजगी

सरायकेला-खरसावां | खूंटी लोकसभा क्षेत्र के सांसद कालीचरण मुंडा ने अपने दो दिवसीय दौरे के दौरान जिले में संचालित विभिन्न विकास योजनाओं की गहन समीक्षा की। इस क्रम में उन्होंने कुचाई प्रखंड का दौरा कर जमीनी स्तर पर योजनाओं की स्थिति का जायजा लिया, जहां प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) एवं अंचल अधिकारी (सीओ) भी उपस्थित रहे।

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दौरे के दौरान सरायकेला परिसदन में आयोजित समीक्षा बैठक में सांसद ने पेयजल, स्वच्छता, ग्रामीण कार्य, बिजली, शिक्षा एवं गव्य विकास विभागों के कार्यों पर असंतोष जताते हुए संबंधित अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई। उन्होंने स्पष्ट कहा कि योजनाओं के क्रियान्वयन में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

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समीक्षा बैठक में खरसावां जलापूर्ति योजना में हो रही देरी पर सांसद ने गहरी नाराजगी जताई। गोंडामारा (खरसावां) और मरांगहातु (कुचाई) सहित कई क्षेत्रों में जलापूर्ति योजनाओं का लाभ आम लोगों तक सही ढंग से नहीं पहुंचने पर उन्होंने चिंता व्यक्त की। जल जीवन मिशन के तहत चल रही योजनाओं में अनियमितताओं की शिकायत मिलने पर उन्होंने तत्काल जांच के निर्देश दिए।

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इसके अलावा प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत सड़कों के निर्माण में हो रही देरी पर भी उन्होंने नाराजगी जताई और कार्य में तेजी लाने का निर्देश दिया। बिजली विभाग को नियमित और पूर्ण वोल्टेज के साथ आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।

सांसद मुंडा ने अधिकारियों को योजनाओं का पारदर्शी, प्रभावी और समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित करने पर जोर देते हुए कहा कि सरकार की योजनाओं का सीधा लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए। उन्होंने लंबित योजनाओं को शीघ्र पूरा करने और कार्यों में जवाबदेही तय करने के भी निर्देश दिए।