नई दिल्ली | पेट्रोल और डीजल की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी को लेकर देश की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। चुनावी माहौल समाप्त होते ही ईंधन के दामों में हुई वृद्धि पर विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और तृणमूल कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि आम जनता पहले से ही महंगाई की मार झेल रही है, ऐसे में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी ने लोगों की परेशानियों को और बढ़ा दिया है।

विपक्ष का कहना है कि चुनाव के दौरान जनता को राहत मिलने की उम्मीद दिखाई जाती है, लेकिन चुनाव समाप्त होते ही महंगाई का बोझ सीधे आम लोगों पर डाल दिया जाता है। विपक्षी नेताओं ने इसे आम जनता के साथ अन्याय बताते हुए सरकार से तत्काल राहत देने की मांग की है।

हालांकि, केंद्र सरकार की ओर से इस मुद्दे पर अब तक कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। इस बीच, सोशल मीडिया पर भी पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों को लेकर तीखी बहस देखने को मिल रही है। विभिन्न राजनीतिक दलों के समर्थक एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं।

आम लोगों के बीच भी बढ़ती ईंधन कीमतों को लेकर चिंता और नाराजगी साफ दिखाई दे रही है, खासकर उन लोगों में जो रोजमर्रा के कामकाज और परिवहन के लिए पेट्रोल और डीजल पर निर्भर हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी का असर परिवहन, खाद्य सामग्री और अन्य जरूरी वस्तुओं की कीमतों पर भी पड़ सकता है, जिससे महंगाई और बढ़ने की आशंका है।

