संस्कृति

सरायकेला-खरसावां: फ्रांस की 75 वर्षीय नागरिक जिज़ेल बुसों ईचा में स्थानीय संस्कृति और ऐतिहासिक स्थलों से हुई अवगत

सरायकेला-खरसावां: फ्रांस की 75 वर्षीय नागरिक जिज़ेल बुसों ईचा में स्थानीय संस्कृति और ऐतिहासिक स्थलों से हुई अवगत

सरायकेला-खरसावां : राजनगर प्रखंड स्थित ईचा गांव में सोमवार को फ्रांस की 75 वर्षीय नागरिक जिज़ेल बुसों का भव्य स्वागत किया गया। उनका स्वागत ईचा राजपरिवार के सदस्यों राजेश्वर सिंहदेव और छऊ गुरु तपन पटनायक ने शॉल ओढ़ाकर सम्मानित कर किया।
श्रीमती बुसों ने ईचा राजमहल (पैलेस) और लगभग 250 वर्ष पुराने श्री रघुनाथ मंदिर का दौरा किया। उन्होंने मंदिर की प्राचीनता और ईचा की समृद्ध सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक विरासत का निकट से अवलोकन किया। इसके अलावा, उन्हें ईचा छऊ नृत्य का प्रदर्शन देखने का अवसर भी मिला, जिसने उन्हें बेहद प्रभावित किया।
जिज़ेल बुसों ने ईचा की संस्कृति, इतिहास और मंदिर की प्राचीनता की सराहना की और राजपरिवार के आतिथ्य को अविस्मरणीय अनुभव बताया।
ईचा राजपरिवार के सदस्य राजेश्वर सिंहदेव ने कहा कि विदेशी अतिथि की यह यात्रा ईचा की ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उजागर करने में मदद करेगी। इस दौरान राजेश्वर सिंहदेव, छऊ गुरु तपन पटनायक, बैधनाथ सिंहदेव, जितेश सिंहदेव और मलवीर सिंह सहित अन्य उपस्थित थे।

सरायकेला में क्षेत्रीय गौड़ समाज का वार्षिक वनभोज सह मिलन समारोह

सरायकेला में क्षेत्रीय गौड़ समाज का वार्षिक वनभोज सह मिलन समारोह

सरायकेला : क्षेत्रीय गौड़ समाज महालिमोरूप का वार्षिक वनभोज सह मिलन समारोह 4 जनवरी, रविवार को सरायकेला प्रखंड के मुरुप स्थित दैवी स्थल माता ठाकुराणी के दरबार में आयोजित होगा।
समाज के अध्यक्ष नागेश्वर प्रधान ने बताया कि समारोह के दौरान माता ठाकुराणी के दरबार में पूजा अर्चना की जाएगी और समाज के सुख, शांति व समृद्धि की कामना की जाएगी। इसके बाद गौड़ समाज के सर्वांगीण विकास पर चर्चा की जाएगी और गौड़ सेवा संघ के कार्यक्रम का वार्षिक कैलेंडर भी विमोचित किया जाएगा।
समारोह में गौड़ सेवा संघ के केंद्रीय, जिला और प्रखंड कमेटी के पदाधिकारी अतिथि के रूप में शामिल होंगे। अध्यक्ष नागेश्वर प्रधान ने समाज के बुद्धिजीवी और क्षेत्रीय लोगों से परिवार सहित समारोह में उपस्थित होने की अपील की है।

खरसावां शहीद दिवस पर अर्जुन मुंडा ने दी श्रद्धांजलि, आदिवासी अधिकारों के संरक्षण का लिया संकल्प

खरसावां शहीद दिवस पर अर्जुन मुंडा ने दी श्रद्धांजलि, आदिवासी अधिकारों के संरक्षण का लिया संकल्प

खरसावां : खरसावां शहीद दिवस के अवसर पर झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा एवं मीरा मुंडा भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ खेलारीसाई स्कूल से पदयात्रा करते हुए शहीद स्माधि स्थल पहुंचे। उन्होंने 1 जनवरी 1948 के खरसावां गोलीकांड में शहीद हुए वीर सपूतों की स्मृति में स्थापित शहीद वेदी पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।
श्रद्धांजलि के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए अर्जुन मुंडा ने कहा कि आज़ादी के बाद भी आदिवासी समाज के बलिदानों से सरकारें ठोस सबक नहीं ले सकीं। जिन शहीदों ने अपने रक्त से इतिहास रचा, उनकी धरती आज भी न्याय की प्रतीक्षा कर रही है। उन्होंने कहा कि आज़ादी से पहले आदिवासी समाज का संघर्ष अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ था, लेकिन आज़ादी के बाद भी खरसावां की धरती ने यह संदेश दिया कि आदिवासी जीवन, संस्कृति और परंपराओं को समझे बिना स्वतंत्रता अधूरी है।
उन्होंने कहा कि अनुसूचित क्षेत्रों में आज भी संविधान की मूल भावना के अनुरूप शासन व्यवस्था लागू नहीं हो पा रही है। पेसा कानून लागू होने के बावजूद उसकी नियमावली आदिवासी जीवन पद्धति और परंपराओं के अनुरूप नहीं है, जो शहीदों के बलिदान के साथ अन्याय है। अर्जुन मुंडा ने चिंता जताते हुए कहा कि शहरीकरण, खनन, बालू घोटाले और भूमि अधिग्रहण के माध्यम से आदिवासियों के जल-जंगल-जमीन और संस्कृति पर लगातार हमला हो रहा है। गगनचुंबी इमारतें बनाकर क्षेत्रों को शहरी घोषित करने का प्रयास अनुसूचित क्षेत्र की पहचान मिटाने की साजिश है।
उन्होंने कहा कि जब पूरी दुनिया नववर्ष मना रही है, तब हम शहीद वेदी पर यह संकल्प लेते हैं कि आदिवासी अधिकारों की रक्षा, जल-जंगल-जमीन के संरक्षण और संविधान प्रदत्त अधिकारों के पूर्ण क्रियान्वयन के लिए संघर्ष जारी रहेगा। सच्ची श्रद्धांजलि तभी होगी जब पेसा कानून को उसकी मूल भावना के अनुरूप पूरी तरह लागू किया जाएगा।
इस अवसर पर भाजपा नेता जेबी तुबिद, पूर्व विधायक मंगल सिंह सोय, पूर्व विधायक गुरूचरण नायक, जिप अध्यक्ष सोनाराम बोदरा, जिप सदस्य झिंगी हेम्ब्रम, भाजपा जिला अध्यक्ष उदय सिंह देव, बोबी सिंह, सुधीर मंडल, अमित कैशरी, विजय महतो, रामदास मुर्मू सहित अन्य लोग उपस्थित थे।

आदिवासी किसान मजदूर पार्टी के बैनर तले कोल्हान क्षेत्र में शहीदों को दी गई श्रद्धांजलि

आदिवासी किसान मजदूर पार्टी के बैनर तले कोल्हान क्षेत्र में शहीदों को दी गई श्रद्धांजलि

खरसावां : आज आदिवासी किसान मजदूर पार्टी के बैनर तले जिला अध्यक्ष मानसिंह तिरिया एवं सरायकेला जिला अध्यक्ष सुनील गगाराई के संयुक्त तत्वावधान में कोल्हान क्षेत्र के खरसावां, सेरेंगसिया, जगन्नाथपुर और राजाबासा में शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस अवसर पर शहीदों के अधूरे सपनों को पूरा करने का संकल्प लिया गया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मानसिंह तिरिया ने कहा कि कोल विद्रोह में शहीद हुए वीरों को याद कर उन्हें नमन किया गया। उन्होंने कहा कि 1 जनवरी को कोल्हान और 2 जनवरी को कलिंगनगर में हमारे ही आदिवासी भाइयों की निर्मम हत्या की गई थी, जिसकी हम कड़ी निंदा करते हैं। अंग्रेजों ने 1 और 2 जनवरी को आदिवासियों की हत्या कर इसे अपने लिए जश्न का दिन बना लिया। इस इतिहास को जानना हर आदिवासी के लिए जरूरी है और इन दिनों को शहीद दिवस के साथ-साथ संकल्प दिवस के रूप में मनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि दुर्भाग्य है कि जिन लोगों ने आदिवासियों पर गोलियां चलाईं, आज वही खुद को आदिवासी समाज का हितैषी बता रहे हैं।
उन्होंने कोल विद्रोह के जननायक वीर शहीद पोटो हो’ का उल्लेख करते हुए कहा कि फांसी के कई वर्षों बाद उनके नाम से राजाबासा गांव की पहचान बनी, लेकिन आज उस गांव की स्थिति बेहद दयनीय है। ग्रामीण जैंतगढ़, चंपुआ और अन्य क्षेत्रों में मजदूरी कर जीवन यापन कर रहे हैं। उन्होंने सरकार से गांव को गोद लेकर विकास पर ध्यान देने की मांग की।
मानसिंह तिरिया ने बताया कि आज ही के दिन गवर्नर जनरल के राजनीतिक एजेंट कैप्टन थॉमस विल्किंसन ने हो’ दिसुम (वर्तमान कोल्हान) के महान योद्धा पोटो हो’, नारा हो’, बड़ाय हो’, पांडुवा हो’ और बोड़ेया हो’ को फांसी की सजा सुनाई थी, जबकि अन्य सहयोगी योद्धाओं को कारावास की सजा दी गई थी।
उन्होंने कहा कि हो’ विद्रोह (1820-21), महान कोल विद्रोह (1831-32) और सेरेंगसिया घाटी युद्ध (1837) के दौरान लगभग 17 वर्षों तक अंग्रेजों और हो’ आदिवासियों के बीच भीषण संघर्ष हुआ। अंग्रेज जानते थे कि यदि पोटो हो’ और उनके साथी जीवित रहे, तो वे कोल्हान में कभी स्थायी रूप से शासन नहीं कर पाएंगे। इसी कारण 1 जनवरी 1838 को जगन्नाथपुर बाजार स्थित बरगद के पेड़ पर पोटो हो’, नारा हो’ और बड़ाय हो’ को फांसी दी गई, जबकि 2 जनवरी 1838 को सेरेंगसिया गांव में पीपल के पेड़ पर बोड़ेया हो’ और पांडुवा हो’ को फांसी दी गई। इस घटना पर लंदन बोर्ड ने भी आपत्ति जताई थी।
कार्यक्रम में सरायकेला जिला अध्यक्ष सुनील गगाराई ने कहा कि 1-2 जनवरी को फांसी देना अंग्रेजों की सोची-समझी राजनीतिक साजिश थी, ताकि आदिवासी अपने इतिहास और पूर्वजों को भूलकर नए साल के जश्न में डूबे रहें।
उन्होंने आगे कहा कि देश की आजादी के बाद 1 जनवरी 1948 को सरायकेला-खरसावां रियासत के ओडिशा में विलय और अलग झारखंड राज्य की मांग को लेकर खरसावां हाट मैदान में आदिवासियों की एक बड़ी शांतिपूर्ण सभा आयोजित हुई थी, जिस पर ओडिशा पुलिस ने मशीनगन से गोलीबारी की थी।
इस कार्यक्रम में चुमरू पिंगुवा, सजान देवगम, सुनील लागुरी, मदन सिंकु, नरसिंह पुर्ती, माटा करोवा, अर्जुन मुंडा, जोसेफ मुंडा, लुकुना पुर्ती, दामू बोबोंगा, सादु मुंडा, पुष्पा मुंडा, शांति पुर्ती, सरस्वती सवैया, हीरा मुनी सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित थे।

खरसावां को फूल नहीं, खून का हिसाब चाहिए, कुआँ खोदकर हो DNA जाँच, तभी साबित होगी आदिवासी हितैषी सरकार:- धी रामहरि पेरियार

खरसावां को फूल नहीं, खून का हिसाब चाहिए, कुआँ खोदकर हो DNA जाँच, तभी साबित होगी आदिवासी हितैषी सरकार:- धी रामहरि पेरियार

चाईबासा : एंटी करप्शन ऑफ इंडिया के प्रदेश अध्यक्ष सह लोकसभा एवं विधानसभा प्रत्याशी रहे धी. रामहरि पेरियार ने गुरुवार को सरायकेला–खरसावां जिला अंतर्गत खरसावां स्थित शहीद स्थल पर पहुँचकर खरसावां गोलीकांड के शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की।
इस अवसर पर उन्होंने कहा कि खरसावां गोलीकांड में 35 शहीदों पर सरकारी मुहर लगी, लेकिन आजादी के 77 वर्षों बाद भी सिर्फ 2 परिवारों को ही सरकारी संवेदना मिली। शेष 33 शहीद आज भी सरकारी ताले में बंद हैं। यह कोई प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि एक सुनियोजित साजिश है, आदिवासी शहादत को इतिहास से मिटाने की साजिश।
       धी. पेरियार ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि वर्तमान अबुआ सरकार वास्तव में आदिवासी हितैषी है, तो केवल मंच से भाषण देने, पुष्प अर्पित करने और औपचारिक संवेदना जताने से काम नहीं चलेगा। सरकार को खरसावां शहीद स्थल का कुआँ खुदवाकर सभी अस्थियों को बाहर निकालना होगा, DNA जाँच करानी होगी और शहीदों की पहचान कर उनके वास्तविक परिजनों तक पहुँचना होगा। तभी यह सरकार आदिवासियों की उम्मीदों की सरकार कही जाएगी।
        उन्होंने कहा कि खरसावां कोई प्रतीकात्मक स्मारक नहीं, बल्कि आदिवासी अस्मिता, संघर्ष और बलिदान का रक्तरंजित इतिहास है। जब तक 33 अज्ञात शहीदों के नाम उजागर नहीं होते, उनके परिवारों को न्याय, सम्मान और अधिकार नहीं मिलता, तब तक हर सरकार कटघरे में खड़ी रहेगी।
      धी. रामहरि पेरियार ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि खरसावां को फूल नहीं, खून का हिसाब चाहिए।
अब समय आ गया है कि अबुआ सरकार सच्चाई से भागना बंद करे और ऐतिहासिक अन्याय को स्वीकार कर उसे सुधारने की दिशा में ठोस कदम उठाए।
      उन्होंने मांग की कि राज्य सरकार अविलंब एक स्वतंत्र उच्चस्तरीय जांच समिति का गठन करे, DNA परीक्षण की प्रक्रिया शुरू करे और शहीद परिवारों को शहीद का दर्जा, मुआवजा तथा सामाजिक सम्मान सुनिश्चित करे।

खरसावां शहीद दिवस की तैयारियों की समीक्षा, उपायुक्त व एसपी ने किया स्थल निरीक्षण

खरसावां शहीद दिवस की तैयारियों की समीक्षा, उपायुक्त व एसपी ने किया स्थल निरीक्षण

खरसावां : आगामी 1 जनवरी 2026 को खरसावां शहीद स्थल पर आयोजित होने वाले शहीद दिवस कार्यक्रम को लेकर जिला प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। कार्यक्रम में राज्य के मुख्यमंत्री, भारत सरकार के पूर्व केंद्रीय मंत्री सहित कई मंत्री एवं विधायकगण के संभावित आगमन के मद्देनज़र उपायुक्त सरायकेला–खरसावां श्री नितिश कुमार सिंह एवं पुलिस अधीक्षक श्री मुकेश कुमार लुणायत ने संयुक्त रूप से शहीद पार्क, पीडब्ल्यूडी गेस्ट हाउस तथा अर्जुना स्टेडियम परिसर में निर्माणाधीन हेलीपैड सहित अन्य महत्वपूर्ण स्थलों का निरीक्षण किया।
निरीक्षण के दौरान गेस्ट हाउस एवं हेलीपैड से जुड़े लंबित कार्यों को निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूर्ण करने का निर्देश संबंधित एजेंसियों को दिया गया। साथ ही कार्यक्रम के दौरान विधि-व्यवस्था, यातायात प्रबंधन एवं सुचारू संचालन सुनिश्चित करने के लिए संबंधित पदाधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।
प्रशासन ने सभा स्थल पर समतलीकरण, पेयजल, शौचालय, जूता-चप्पल स्टैंड सहित अन्य आधारभूत सुविधाओं की समयबद्ध व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा। इसके अलावा आगमन-प्रस्थान मार्गों एवं यातायात व्यवस्था को लेकर भी विस्तार से चर्चा की गई।
इस अवसर पर परियोजना निदेशक आईटीडीए सह उप विकास आयुक्त सुश्री रीना हांसदा, डीआरडीए निदेशक श्री अजय तिर्की, अपर उपायुक्त श्री जयवर्धन कुमार, सिविल सर्जन डॉ. सरजू प्रसाद सिंह सहित विभिन्न विभागों के वरीय पदाधिकारी उपस्थित रहे।

रामगढ़ में आदिवासी हो समाज का सामाजिक जागरूकता अभियान, मांगे पर्व मनाने की अपील

रामगढ़ में आदिवासी हो समाज का सामाजिक जागरूकता अभियान, मांगे पर्व मनाने की अपील

रामगढ़ : आदिवासी हो समाज रामगढ़ कमेटी की ओर से रविवार को सामाजिक जागरूकता अभियान चलाया गया। यह अभियान रामगढ़ के भरेचनागर सांडी गांव से शुरू हुआ।

अभियान का उद्देश्य शहरों में रह रहे हो समाज के लोगों को अपनी भाषा, संस्कृति और पारंपरिक रीति-रिवाजों के संरक्षण के प्रति जागरूक करना था। इस दौरान समाज के लोगों से अपील की गई कि वे अन्य समुदायों के बीच रहते हुए भी अपनी पहचान और सांस्कृतिक परंपराओं को न भूलें तथा अपने पर्व-त्योहारों को नियमित रूप से उत्साह के साथ मनाएं।

कमेटी की ओर से 01 फरवरी 2026 को मांगे पर्व मनाने की जानकारी दी गई। साथ ही समाज के लोगों से अधिक संख्या में भाग लेने और आयोजन को सफल बनाने के लिए आर्थिक सहयोग करने की अपील की गई।

अभियान के माध्यम से समाज में एकता, सांस्कृतिक जागरूकता और सामाजिक जिम्मेदारी का संदेश दिया गया।

सिलायडीह में 13 वर्ष बाद आदिवासी परिवार की सरना धर्म में घर वापसी

सिलायडीह में 13 वर्ष बाद आदिवासी परिवार की सरना धर्म में घर वापसी

कुचाई : सिलायडीह गांव में रविवार को एक आदिवासी परिवार ने 13 साल बाद ईसाई धर्म छोड़कर पुनः सरना धर्म स्वीकार किया। राम मुंडा, उनकी पत्नी मंजू मुंडा और उनके तीन बच्चे—जरासन, सुनील और मेनका मुंडा—ने बोंगा–बुरू पूजा पद्धति के अनुसार शुद्धिकरण कर अपने मूल धर्म में वापसी की। शुद्धिकरण समारोह सरना धर्म गुरू शिवचरण मुंडा, वनमाली मुंडा और डोमन मुंडा द्वारा संपन्न की गई।।

मंजू मुंडा ने बताया कि 13 वर्ष पहले बच्चों की लगातार खराब तबीयत और जानकारी के अभाव में उन्होंने ईसाई धर्म अपनाया था। वहीं जरासन मुंडा ने कहा कि उस समय मार्गदर्शन की कमी के कारण वे गलत दिशा में चले गए थे, लेकिन अब शिक्षा और समझ बढ़ने के साथ वे अपने मूल धर्म में लौट आए हैं। परिवार की बेटी मेनका ने समाज से अपील की कि धर्म परिवर्तन जैसे महत्वपूर्ण निर्णय सही जानकारी और समझ के आधार पर ही लें।

कार्यक्रम में समाजसेवी और जनप्रतिनिधि संदीप मुंडा, चमर सिंह मुंडा, मुखिया मंगल सिंह मुंडा, रविन्द्र मुंडा, रामचन्द्र सिंह मुंडा, जगन्नाथ सिंह मुंडा, केपी सेट सोय, मेघनाथ सिंह मुंडा, गुरूवा मुंडा, श्रवण सरदार, ग्राम मुंडा गणेश राम मुंडा, भूषण मुंडा, दीना मुंडा, कुशल मुंडा, जिला परिषद सदस्य जिंगी हेम्ब्रम, शम्भू सिंह मुंडा, तुलसी मुंडा सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद थे।

ग्रामीणों का मानना है कि परिवार की यह घर वापसी समुदाय में सांस्कृतिक जागरूकता और अपनी परंपराओं की ओर लौटने का महत्वपूर्ण संदेश देती है।

रांची राजभवन में ‘उरांव धर्म एवं प्रथाएं’ पुस्तक का भव्य लोकार्पण – राज्यपाल ने सराहा जनजातीय ज्ञान परंपराओं का संरक्षण

रांची राजभवन में ‘उरांव धर्म एवं प्रथाएं’ पुस्तक का भव्य लोकार्पण – राज्यपाल ने सराहा जनजातीय ज्ञान परंपराओं का संरक्षण

रांची : आज राजभवन में एक भव्य एवं गरिमामय समारोह में प्रसिद्ध मानवशास्त्री शरत चंद्र राय द्वारा लिखित तथा श्री राज रतन सहाय द्वारा हिंदी में अनुवादित पुस्तक ‘उरांव धर्म एवं प्रथाएं’ का औपचारिक लोकार्पण किया गया। समारोह की अध्यक्षता माननीय राज्यपाल श्री संतोष गंगवार ने की।

करीब सौ वर्ष पूर्व लिखी गई यह महत्वपूर्ण पुस्तक उरांव जनजाति की जीवन-पद्धति, धार्मिक आस्थाओं, सामाजिक संरचना और सांस्कृतिक परंपराओं पर आधारित एक विस्तृत एवं शोधसमृद्ध दस्तावेज मानी जाती है। इसके हिंदी रूपांतरण से शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों और सामान्य पाठकों के लिए जनजातीय समाज के अध्ययन का एक सुलभ स्रोत उपलब्ध हुआ है।

अपने संबोधन में राज्यपाल श्री संतोष गंगवार ने कहा कि यह पुस्तक केवल एक शोध-ग्रंथ नहीं, बल्कि भारत की समृद्ध जनजातीय विरासत का आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक परिचय है। उन्होंने अनुवाद की सहज भाषा और स्पष्ट प्रस्तुति की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह कृति मुख्यधारा के पाठकों को उरांव समाज की सोच, जीवन-दृष्टि और सांस्कृतिक धरोहर से परिचित कराती है। साथ ही उन्होंने चेताया कि पारंपरिक ज्ञान-व्यवस्था और सांस्कृतिक मूल्यों का संरक्षण आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है, और इस तरह के साहित्यिक प्रयास समाज के लिए अत्यंत महत्त्वपूर्ण हैं।

समारोह में उपस्थित पूर्व मुख्यमंत्री श्री अर्जुन मुंडा ने भी पुस्तक के लोकार्पण पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि जनजातीय संस्कृति और परंपराएँ किसी भी राज्य की पहचान व आत्मा होती हैं। अनुवाद कार्य को उन्होंने शब्दों का पुनर्लेखन नहीं, बल्कि भाव, संदर्भ और सांस्कृतिक संवेदनाओं के पुन:संप्रेषण की कला बताया, जो अत्यंत मूल्यवान है।

पुस्तक के अनुवादक श्री राज रतन सहाय ने इसे अपनी सेवा-भावना एवं जनजातीय समाज के प्रति समर्पण का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि इस कार्य के लिए स्वयं को नियति का चयनित मानते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि इससे पहले वे शरत चंद्र राय की दो अन्य महत्वपूर्ण पुस्तकों—‘आदिम मुंडा एवं उनका प्रदेश’ और ‘बिरहोर’—का भी सफलतापूर्वक हिंदी अनुवाद कर चुके हैं। उनका उद्देश्य है कि जनजातीय ज्ञान-परंपराएँ अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचे और शोध के नए आयाम खुलें।

कार्यक्रम में पूर्व मंत्री एवं विधायक श्री रामेश्वर उरांव, पूर्व मंत्री एवं जमशेदपुर पश्चिमी के विधायक श्री सरयू राय, पूर्व सांसद श्री सुदर्शन भगत, झारखंड राय विश्वविद्यालय की कुलपति श्रीमती सविता सेंगर, पूर्व कुलपति डॉ. सत्यनारायण मुंडा, डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी, सहित अनेक गणमान्य अतिथि, शिक्षाविद, शोधकर्ता, लेखक एवं विभिन्न जनजातीय समुदायों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

बारीडीह में शहीद कोका कमार करमाली की 164वीं जयंती पर भव्य समारोह, सांस्कृतिक कार्यक्रमों से गूंजा वातावरण

बारीडीह में शहीद कोका कमार करमाली की 164वीं जयंती पर भव्य समारोह, सांस्कृतिक कार्यक्रमों से गूंजा वातावरण

बारीडीह : वीर शहीद कोका कमार करमाली की 164वीं जयंती के अवसर पर बारीडीह स्थित उनके नाम पर बने चौक में भव्य समारोह का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम की अगुवाई प्रमुख संस्थापक बलराम कर्मकार और आयोजक राजू लोहरा ने की।

समारोह के दौरान आजाद समाज पार्टी (का.) के जिला प्रभारी सनत सिंह सरदार और संगठन एवं मीडिया प्रभारी परमबीर पात्रो को जेएमएम के नगर अध्यक्ष गोविंद लोहार और राजू लोहार द्वारा सम्मानित किया गया। वक्ताओं ने शहीद कोका कमार करमाली के योगदान को समाज के लिए प्रेरणास्रोत बताते हुए आदिवासी भाषा और संस्कृति संरक्षण की आवश्यकता पर बल दिया।

सुबह 7 बजे माल्यार्पण के साथ जयंती समारोह की शुरुआत हुई। स्थानीय ग्रामीणों, युवाओं, महिलाओं और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर शहीद को श्रद्धांजलि दी। इस दौरान लोगों ने उनके संघर्ष और आदिवासी समाज के उत्थान के लिए किए गए प्रयासों को याद किया।

शाम 6 बजे दीप प्रज्वलन के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन हुआ। आदिवासी पारंपरिक नृत्य, गीत और ढोल-नगाड़ों की लय से पूरा माहौल उत्सवमय हो उठा। कलाकारों द्वारा सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक एकता पर आधारित प्रस्तुति ने उपस्थित दर्शकों का दिल जीत लिया।

यह आयोजन वीर शहीद कोका कमार करमाली सेना संघर्ष समिति और बिरसा सेना के संयुक्त तत्वावधान में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। कार्यक्रम में रविन्द्र लोहारा, कृष्णा लोहार, घनश्याम कर्मकार, राजू कंवर, मोहन कंवर, जय नारायण मुंडा, दीपक रंजीत, सुनील सोरेन, दिवान सोरेन, सुबोध लोहार, राजा राय मुर्मू, सुनील हेंब्रम, जेरी सोरेन, पंकज लोहार, मिहिलाय मुर्मू, दीप लोहार, बेसराम चाय, असमान बाजरे, राजू राम, डॉ. रवी प्रसाद, भोलाराम कंवर, बिनोद कंवर समेत अनेक सामाजिक कार्यकर्ता और ग्रामीणों की सहभागिता रही।

कार्यक्रम के अंत में आयोजक बलराम कर्मकार और राजू लोहरा ने सभी सहयोगियों एवं उपस्थित लोगों का हृदय से आभार प्रकट किया। समारोह शांतिपूर्ण और गरिमामय माहौल में संपन्न हुआ।