संस्कृति

कोल्हान ब्ह: रूमुल–2026 को लेकर आयोजन समिति की बैठक, तैयारियों पर हुई समीक्षा

कोल्हान ब्ह: रूमुल–2026 को लेकर आयोजन समिति की बैठक, तैयारियों पर हुई समीक्षा

चाईबासा : खूंटकट्टी मैदान, ताम्बो में प्रस्तावित कोल्हान ब्ह: रूमुल–2026 के आयोजन को लेकर आयोजन समिति की ओर से एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में आगामी मार्च माह में होने वाले इस कार्यक्रम को भव्य, सुव्यवस्थित और ऐतिहासिक बनाने को लेकर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक के दौरान कार्यक्रम की तिथि निर्धारण, स्थल व्यवस्था, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, पारंपरिक रीति-रिवाजों के संरक्षण, अतिथियों के स्वागत, सुरक्षा व्यवस्था और प्रचार-प्रसार जैसे महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विचार-विमर्श किया गया। समिति सदस्यों ने कहा कि कोल्हान ब्ह: रूमुल आदिवासी समाज की सांस्कृतिक पहचान और एकता का प्रतीक है, इसलिए इसके आयोजन में किसी भी तरह की कमी नहीं होनी चाहिए।
कार्यक्रम के सफल संचालन के लिए विभिन्न उप-समितियों के गठन पर भी चर्चा हुई। साथ ही स्थानीय ग्रामीणों, सामाजिक संगठनों और युवाओं की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।
बैठक के अंत में आयोजन समिति ने विश्वास व्यक्त किया कि सभी के सहयोग से कोल्हान ब्ह: रूमुल–2026 का आयोजन सफल, ऐतिहासिक और स्मरणीय होगा तथा कोल्हान क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को व्यापक पहचान मिलेगी।

हो समाज महासभा का दो दिवसीय वार्षिक अधिवेशन किरीबुरु में शुरू

हो समाज महासभा का दो दिवसीय वार्षिक अधिवेशन किरीबुरु में शुरू

किरीबुरु : किरीबुरु स्थित आदिवासी कल्याण केंद्र में शनिवार को आदिवासी हो समाज महासभा के दो दिवसीय वार्षिक अधिवेशन का शुभारंभ हुआ। पहले दिन की शुरुआत दियूरी धनुर्जय लागुरी द्वारा बोंगा बुरु अनुष्ठान से हुई। इसके बाद महासभा का ध्वजारोहण एवं हो समाज की सामूहिक प्रार्थना (गोवारी) संपन्न कराई गई।
कार्यक्रम का औपचारिक उद्घाटन आदिवासी कल्याण केंद्र के अध्यक्ष श्री हीरालाल सुंडी, श्री करम्पदा मुंडा एवं श्री राजेश मुंडा ने संयुक्त रूप से किया। इसके पश्चात प्रतिनिधि सभा की बैठक आयोजित हुई।
बैठक में “केया-केपेया आंदी” (भाग कर शादी) की सामाजिक प्रक्रिया पर विस्तार से चर्चा की गई। प्रतिनिधि सभा ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि बाला अनुष्ठान के दौरान विवाह संपन्न करना हो समाज की परंपरा के विरुद्ध है। समाज की परंपरा के अनुसार लड़की के घर बाला में लड़के का जाना तथा लड़के के घर बाला में लड़की का जाना मान्य नहीं है। अतः बाला के दौरान विवाह की प्रक्रिया को अमान्य घोषित किया गया और समाज से परंपराओं में मनमाने बदलाव न करने की अपील की गई।
प्रतिनिधि सभा ने यह भी निर्णय लिया कि भाग कर शादी की प्रथा मान्य रहेगी, लेकिन इसके लिए घर के आंगन में ससंग-सुनुम एवं आदिंग-हेबे आदेर की प्रक्रिया पूरी करना अनिवार्य होगा। इसके बाद अजिहनर के रूप में लड़की पक्ष के लोगों के लड़के के घर आने पर ही बाला संपन्न किया जाएगा।
बैठक में हो समाज की महत्वपूर्ण परंपरा ‘मारंग बोंगा’ पर भी चर्चा हुई। बताया गया कि प्रत्येक किली (गोत्र) का अपना ऐतिहासिक महत्व होता है, जिसे मारंग बोंगा के रूप में सम्मान दिया जाता है। कई किलियों में यह परंपरा विलुप्त होती जा रही है। इसे पुनर्जीवित करने के लिए महासभा ने सभी किलियों से संबंधित विधान एवं ऐतिहासिक विवरण आमंत्रित करने का निर्णय लिया।
इस अवसर पर महासभा के अध्यक्ष श्री मुकेश बिरुवा ने बिरुवा किली के मारंग बोंगा का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि बिरुवा किली के लोग वर्तमान में लगभग 84 गांवों में निवास करते हैं और उनके पूर्वज विभिन्न क्षेत्रों से प्रवास करते हुए यहां बसे। अधिवेशन में फिलहाल केवल बिरुवा किली का मारंग बोंगा महासभा को सौंपा गया।
प्रतिनिधि सभा ने यह भी निर्णय लिया कि अंतर्जातीय विवाह को हो समाज में मान्यता नहीं दी जाएगी तथा ऐसे विवाहों में किसी भी पारंपरिक पूजा-पाठ या घर के आदिंग में स्थान नहीं होगा। साथ ही रिंग सेरेमनी को भी हो समाज की पारंपरिक विवाह व्यवस्था का हिस्सा नहीं माना जाएगा।
अधिवेशन में सोमा कोड़ा, चैतन्य कुंकल, बामिया बारी, छोटेलाल तामसोय, माधव चंद्र कोड़ा, रोया राम चंपिया, गोपी लागुरी, रमेश लागुरी, बलभद्र बिरुली, श्याम बिरुवा, अमर बिरुवा, जयराम पाट पिंगुवा, भूषण लागुरी, पुतकर लागुरी, अमरसिंह सुंडी, नीलिमा पुरती, गीता लागुरी, पदमुनि लागुरी सहित बड़ी संख्या में समाज के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

सरायकेला-खरसावां: फ्रांस की 75 वर्षीय नागरिक जिज़ेल बुसों ईचा में स्थानीय संस्कृति और ऐतिहासिक स्थलों से हुई अवगत

सरायकेला-खरसावां: फ्रांस की 75 वर्षीय नागरिक जिज़ेल बुसों ईचा में स्थानीय संस्कृति और ऐतिहासिक स्थलों से हुई अवगत

सरायकेला-खरसावां : राजनगर प्रखंड स्थित ईचा गांव में सोमवार को फ्रांस की 75 वर्षीय नागरिक जिज़ेल बुसों का भव्य स्वागत किया गया। उनका स्वागत ईचा राजपरिवार के सदस्यों राजेश्वर सिंहदेव और छऊ गुरु तपन पटनायक ने शॉल ओढ़ाकर सम्मानित कर किया।
श्रीमती बुसों ने ईचा राजमहल (पैलेस) और लगभग 250 वर्ष पुराने श्री रघुनाथ मंदिर का दौरा किया। उन्होंने मंदिर की प्राचीनता और ईचा की समृद्ध सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक विरासत का निकट से अवलोकन किया। इसके अलावा, उन्हें ईचा छऊ नृत्य का प्रदर्शन देखने का अवसर भी मिला, जिसने उन्हें बेहद प्रभावित किया।
जिज़ेल बुसों ने ईचा की संस्कृति, इतिहास और मंदिर की प्राचीनता की सराहना की और राजपरिवार के आतिथ्य को अविस्मरणीय अनुभव बताया।
ईचा राजपरिवार के सदस्य राजेश्वर सिंहदेव ने कहा कि विदेशी अतिथि की यह यात्रा ईचा की ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उजागर करने में मदद करेगी। इस दौरान राजेश्वर सिंहदेव, छऊ गुरु तपन पटनायक, बैधनाथ सिंहदेव, जितेश सिंहदेव और मलवीर सिंह सहित अन्य उपस्थित थे।

सरायकेला में क्षेत्रीय गौड़ समाज का वार्षिक वनभोज सह मिलन समारोह

सरायकेला में क्षेत्रीय गौड़ समाज का वार्षिक वनभोज सह मिलन समारोह

सरायकेला : क्षेत्रीय गौड़ समाज महालिमोरूप का वार्षिक वनभोज सह मिलन समारोह 4 जनवरी, रविवार को सरायकेला प्रखंड के मुरुप स्थित दैवी स्थल माता ठाकुराणी के दरबार में आयोजित होगा।
समाज के अध्यक्ष नागेश्वर प्रधान ने बताया कि समारोह के दौरान माता ठाकुराणी के दरबार में पूजा अर्चना की जाएगी और समाज के सुख, शांति व समृद्धि की कामना की जाएगी। इसके बाद गौड़ समाज के सर्वांगीण विकास पर चर्चा की जाएगी और गौड़ सेवा संघ के कार्यक्रम का वार्षिक कैलेंडर भी विमोचित किया जाएगा।
समारोह में गौड़ सेवा संघ के केंद्रीय, जिला और प्रखंड कमेटी के पदाधिकारी अतिथि के रूप में शामिल होंगे। अध्यक्ष नागेश्वर प्रधान ने समाज के बुद्धिजीवी और क्षेत्रीय लोगों से परिवार सहित समारोह में उपस्थित होने की अपील की है।

खरसावां शहीद दिवस पर अर्जुन मुंडा ने दी श्रद्धांजलि, आदिवासी अधिकारों के संरक्षण का लिया संकल्प

खरसावां शहीद दिवस पर अर्जुन मुंडा ने दी श्रद्धांजलि, आदिवासी अधिकारों के संरक्षण का लिया संकल्प

खरसावां : खरसावां शहीद दिवस के अवसर पर झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा एवं मीरा मुंडा भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ खेलारीसाई स्कूल से पदयात्रा करते हुए शहीद स्माधि स्थल पहुंचे। उन्होंने 1 जनवरी 1948 के खरसावां गोलीकांड में शहीद हुए वीर सपूतों की स्मृति में स्थापित शहीद वेदी पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।
श्रद्धांजलि के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए अर्जुन मुंडा ने कहा कि आज़ादी के बाद भी आदिवासी समाज के बलिदानों से सरकारें ठोस सबक नहीं ले सकीं। जिन शहीदों ने अपने रक्त से इतिहास रचा, उनकी धरती आज भी न्याय की प्रतीक्षा कर रही है। उन्होंने कहा कि आज़ादी से पहले आदिवासी समाज का संघर्ष अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ था, लेकिन आज़ादी के बाद भी खरसावां की धरती ने यह संदेश दिया कि आदिवासी जीवन, संस्कृति और परंपराओं को समझे बिना स्वतंत्रता अधूरी है।
उन्होंने कहा कि अनुसूचित क्षेत्रों में आज भी संविधान की मूल भावना के अनुरूप शासन व्यवस्था लागू नहीं हो पा रही है। पेसा कानून लागू होने के बावजूद उसकी नियमावली आदिवासी जीवन पद्धति और परंपराओं के अनुरूप नहीं है, जो शहीदों के बलिदान के साथ अन्याय है। अर्जुन मुंडा ने चिंता जताते हुए कहा कि शहरीकरण, खनन, बालू घोटाले और भूमि अधिग्रहण के माध्यम से आदिवासियों के जल-जंगल-जमीन और संस्कृति पर लगातार हमला हो रहा है। गगनचुंबी इमारतें बनाकर क्षेत्रों को शहरी घोषित करने का प्रयास अनुसूचित क्षेत्र की पहचान मिटाने की साजिश है।
उन्होंने कहा कि जब पूरी दुनिया नववर्ष मना रही है, तब हम शहीद वेदी पर यह संकल्प लेते हैं कि आदिवासी अधिकारों की रक्षा, जल-जंगल-जमीन के संरक्षण और संविधान प्रदत्त अधिकारों के पूर्ण क्रियान्वयन के लिए संघर्ष जारी रहेगा। सच्ची श्रद्धांजलि तभी होगी जब पेसा कानून को उसकी मूल भावना के अनुरूप पूरी तरह लागू किया जाएगा।
इस अवसर पर भाजपा नेता जेबी तुबिद, पूर्व विधायक मंगल सिंह सोय, पूर्व विधायक गुरूचरण नायक, जिप अध्यक्ष सोनाराम बोदरा, जिप सदस्य झिंगी हेम्ब्रम, भाजपा जिला अध्यक्ष उदय सिंह देव, बोबी सिंह, सुधीर मंडल, अमित कैशरी, विजय महतो, रामदास मुर्मू सहित अन्य लोग उपस्थित थे।

आदिवासी किसान मजदूर पार्टी के बैनर तले कोल्हान क्षेत्र में शहीदों को दी गई श्रद्धांजलि

आदिवासी किसान मजदूर पार्टी के बैनर तले कोल्हान क्षेत्र में शहीदों को दी गई श्रद्धांजलि

खरसावां : आज आदिवासी किसान मजदूर पार्टी के बैनर तले जिला अध्यक्ष मानसिंह तिरिया एवं सरायकेला जिला अध्यक्ष सुनील गगाराई के संयुक्त तत्वावधान में कोल्हान क्षेत्र के खरसावां, सेरेंगसिया, जगन्नाथपुर और राजाबासा में शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस अवसर पर शहीदों के अधूरे सपनों को पूरा करने का संकल्प लिया गया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मानसिंह तिरिया ने कहा कि कोल विद्रोह में शहीद हुए वीरों को याद कर उन्हें नमन किया गया। उन्होंने कहा कि 1 जनवरी को कोल्हान और 2 जनवरी को कलिंगनगर में हमारे ही आदिवासी भाइयों की निर्मम हत्या की गई थी, जिसकी हम कड़ी निंदा करते हैं। अंग्रेजों ने 1 और 2 जनवरी को आदिवासियों की हत्या कर इसे अपने लिए जश्न का दिन बना लिया। इस इतिहास को जानना हर आदिवासी के लिए जरूरी है और इन दिनों को शहीद दिवस के साथ-साथ संकल्प दिवस के रूप में मनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि दुर्भाग्य है कि जिन लोगों ने आदिवासियों पर गोलियां चलाईं, आज वही खुद को आदिवासी समाज का हितैषी बता रहे हैं।
उन्होंने कोल विद्रोह के जननायक वीर शहीद पोटो हो’ का उल्लेख करते हुए कहा कि फांसी के कई वर्षों बाद उनके नाम से राजाबासा गांव की पहचान बनी, लेकिन आज उस गांव की स्थिति बेहद दयनीय है। ग्रामीण जैंतगढ़, चंपुआ और अन्य क्षेत्रों में मजदूरी कर जीवन यापन कर रहे हैं। उन्होंने सरकार से गांव को गोद लेकर विकास पर ध्यान देने की मांग की।
मानसिंह तिरिया ने बताया कि आज ही के दिन गवर्नर जनरल के राजनीतिक एजेंट कैप्टन थॉमस विल्किंसन ने हो’ दिसुम (वर्तमान कोल्हान) के महान योद्धा पोटो हो’, नारा हो’, बड़ाय हो’, पांडुवा हो’ और बोड़ेया हो’ को फांसी की सजा सुनाई थी, जबकि अन्य सहयोगी योद्धाओं को कारावास की सजा दी गई थी।
उन्होंने कहा कि हो’ विद्रोह (1820-21), महान कोल विद्रोह (1831-32) और सेरेंगसिया घाटी युद्ध (1837) के दौरान लगभग 17 वर्षों तक अंग्रेजों और हो’ आदिवासियों के बीच भीषण संघर्ष हुआ। अंग्रेज जानते थे कि यदि पोटो हो’ और उनके साथी जीवित रहे, तो वे कोल्हान में कभी स्थायी रूप से शासन नहीं कर पाएंगे। इसी कारण 1 जनवरी 1838 को जगन्नाथपुर बाजार स्थित बरगद के पेड़ पर पोटो हो’, नारा हो’ और बड़ाय हो’ को फांसी दी गई, जबकि 2 जनवरी 1838 को सेरेंगसिया गांव में पीपल के पेड़ पर बोड़ेया हो’ और पांडुवा हो’ को फांसी दी गई। इस घटना पर लंदन बोर्ड ने भी आपत्ति जताई थी।
कार्यक्रम में सरायकेला जिला अध्यक्ष सुनील गगाराई ने कहा कि 1-2 जनवरी को फांसी देना अंग्रेजों की सोची-समझी राजनीतिक साजिश थी, ताकि आदिवासी अपने इतिहास और पूर्वजों को भूलकर नए साल के जश्न में डूबे रहें।
उन्होंने आगे कहा कि देश की आजादी के बाद 1 जनवरी 1948 को सरायकेला-खरसावां रियासत के ओडिशा में विलय और अलग झारखंड राज्य की मांग को लेकर खरसावां हाट मैदान में आदिवासियों की एक बड़ी शांतिपूर्ण सभा आयोजित हुई थी, जिस पर ओडिशा पुलिस ने मशीनगन से गोलीबारी की थी।
इस कार्यक्रम में चुमरू पिंगुवा, सजान देवगम, सुनील लागुरी, मदन सिंकु, नरसिंह पुर्ती, माटा करोवा, अर्जुन मुंडा, जोसेफ मुंडा, लुकुना पुर्ती, दामू बोबोंगा, सादु मुंडा, पुष्पा मुंडा, शांति पुर्ती, सरस्वती सवैया, हीरा मुनी सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित थे।

खरसावां को फूल नहीं, खून का हिसाब चाहिए, कुआँ खोदकर हो DNA जाँच, तभी साबित होगी आदिवासी हितैषी सरकार:- धी रामहरि पेरियार

खरसावां को फूल नहीं, खून का हिसाब चाहिए, कुआँ खोदकर हो DNA जाँच, तभी साबित होगी आदिवासी हितैषी सरकार:- धी रामहरि पेरियार

चाईबासा : एंटी करप्शन ऑफ इंडिया के प्रदेश अध्यक्ष सह लोकसभा एवं विधानसभा प्रत्याशी रहे धी. रामहरि पेरियार ने गुरुवार को सरायकेला–खरसावां जिला अंतर्गत खरसावां स्थित शहीद स्थल पर पहुँचकर खरसावां गोलीकांड के शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की।
इस अवसर पर उन्होंने कहा कि खरसावां गोलीकांड में 35 शहीदों पर सरकारी मुहर लगी, लेकिन आजादी के 77 वर्षों बाद भी सिर्फ 2 परिवारों को ही सरकारी संवेदना मिली। शेष 33 शहीद आज भी सरकारी ताले में बंद हैं। यह कोई प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि एक सुनियोजित साजिश है, आदिवासी शहादत को इतिहास से मिटाने की साजिश।
       धी. पेरियार ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि वर्तमान अबुआ सरकार वास्तव में आदिवासी हितैषी है, तो केवल मंच से भाषण देने, पुष्प अर्पित करने और औपचारिक संवेदना जताने से काम नहीं चलेगा। सरकार को खरसावां शहीद स्थल का कुआँ खुदवाकर सभी अस्थियों को बाहर निकालना होगा, DNA जाँच करानी होगी और शहीदों की पहचान कर उनके वास्तविक परिजनों तक पहुँचना होगा। तभी यह सरकार आदिवासियों की उम्मीदों की सरकार कही जाएगी।
        उन्होंने कहा कि खरसावां कोई प्रतीकात्मक स्मारक नहीं, बल्कि आदिवासी अस्मिता, संघर्ष और बलिदान का रक्तरंजित इतिहास है। जब तक 33 अज्ञात शहीदों के नाम उजागर नहीं होते, उनके परिवारों को न्याय, सम्मान और अधिकार नहीं मिलता, तब तक हर सरकार कटघरे में खड़ी रहेगी।
      धी. रामहरि पेरियार ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि खरसावां को फूल नहीं, खून का हिसाब चाहिए।
अब समय आ गया है कि अबुआ सरकार सच्चाई से भागना बंद करे और ऐतिहासिक अन्याय को स्वीकार कर उसे सुधारने की दिशा में ठोस कदम उठाए।
      उन्होंने मांग की कि राज्य सरकार अविलंब एक स्वतंत्र उच्चस्तरीय जांच समिति का गठन करे, DNA परीक्षण की प्रक्रिया शुरू करे और शहीद परिवारों को शहीद का दर्जा, मुआवजा तथा सामाजिक सम्मान सुनिश्चित करे।

खरसावां शहीद दिवस की तैयारियों की समीक्षा, उपायुक्त व एसपी ने किया स्थल निरीक्षण

खरसावां शहीद दिवस की तैयारियों की समीक्षा, उपायुक्त व एसपी ने किया स्थल निरीक्षण

खरसावां : आगामी 1 जनवरी 2026 को खरसावां शहीद स्थल पर आयोजित होने वाले शहीद दिवस कार्यक्रम को लेकर जिला प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। कार्यक्रम में राज्य के मुख्यमंत्री, भारत सरकार के पूर्व केंद्रीय मंत्री सहित कई मंत्री एवं विधायकगण के संभावित आगमन के मद्देनज़र उपायुक्त सरायकेला–खरसावां श्री नितिश कुमार सिंह एवं पुलिस अधीक्षक श्री मुकेश कुमार लुणायत ने संयुक्त रूप से शहीद पार्क, पीडब्ल्यूडी गेस्ट हाउस तथा अर्जुना स्टेडियम परिसर में निर्माणाधीन हेलीपैड सहित अन्य महत्वपूर्ण स्थलों का निरीक्षण किया।
निरीक्षण के दौरान गेस्ट हाउस एवं हेलीपैड से जुड़े लंबित कार्यों को निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूर्ण करने का निर्देश संबंधित एजेंसियों को दिया गया। साथ ही कार्यक्रम के दौरान विधि-व्यवस्था, यातायात प्रबंधन एवं सुचारू संचालन सुनिश्चित करने के लिए संबंधित पदाधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।
प्रशासन ने सभा स्थल पर समतलीकरण, पेयजल, शौचालय, जूता-चप्पल स्टैंड सहित अन्य आधारभूत सुविधाओं की समयबद्ध व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा। इसके अलावा आगमन-प्रस्थान मार्गों एवं यातायात व्यवस्था को लेकर भी विस्तार से चर्चा की गई।
इस अवसर पर परियोजना निदेशक आईटीडीए सह उप विकास आयुक्त सुश्री रीना हांसदा, डीआरडीए निदेशक श्री अजय तिर्की, अपर उपायुक्त श्री जयवर्धन कुमार, सिविल सर्जन डॉ. सरजू प्रसाद सिंह सहित विभिन्न विभागों के वरीय पदाधिकारी उपस्थित रहे।

रामगढ़ में आदिवासी हो समाज का सामाजिक जागरूकता अभियान, मांगे पर्व मनाने की अपील

रामगढ़ में आदिवासी हो समाज का सामाजिक जागरूकता अभियान, मांगे पर्व मनाने की अपील

रामगढ़ : आदिवासी हो समाज रामगढ़ कमेटी की ओर से रविवार को सामाजिक जागरूकता अभियान चलाया गया। यह अभियान रामगढ़ के भरेचनागर सांडी गांव से शुरू हुआ।

अभियान का उद्देश्य शहरों में रह रहे हो समाज के लोगों को अपनी भाषा, संस्कृति और पारंपरिक रीति-रिवाजों के संरक्षण के प्रति जागरूक करना था। इस दौरान समाज के लोगों से अपील की गई कि वे अन्य समुदायों के बीच रहते हुए भी अपनी पहचान और सांस्कृतिक परंपराओं को न भूलें तथा अपने पर्व-त्योहारों को नियमित रूप से उत्साह के साथ मनाएं।

कमेटी की ओर से 01 फरवरी 2026 को मांगे पर्व मनाने की जानकारी दी गई। साथ ही समाज के लोगों से अधिक संख्या में भाग लेने और आयोजन को सफल बनाने के लिए आर्थिक सहयोग करने की अपील की गई।

अभियान के माध्यम से समाज में एकता, सांस्कृतिक जागरूकता और सामाजिक जिम्मेदारी का संदेश दिया गया।

सिलायडीह में 13 वर्ष बाद आदिवासी परिवार की सरना धर्म में घर वापसी

सिलायडीह में 13 वर्ष बाद आदिवासी परिवार की सरना धर्म में घर वापसी

कुचाई : सिलायडीह गांव में रविवार को एक आदिवासी परिवार ने 13 साल बाद ईसाई धर्म छोड़कर पुनः सरना धर्म स्वीकार किया। राम मुंडा, उनकी पत्नी मंजू मुंडा और उनके तीन बच्चे—जरासन, सुनील और मेनका मुंडा—ने बोंगा–बुरू पूजा पद्धति के अनुसार शुद्धिकरण कर अपने मूल धर्म में वापसी की। शुद्धिकरण समारोह सरना धर्म गुरू शिवचरण मुंडा, वनमाली मुंडा और डोमन मुंडा द्वारा संपन्न की गई।।

मंजू मुंडा ने बताया कि 13 वर्ष पहले बच्चों की लगातार खराब तबीयत और जानकारी के अभाव में उन्होंने ईसाई धर्म अपनाया था। वहीं जरासन मुंडा ने कहा कि उस समय मार्गदर्शन की कमी के कारण वे गलत दिशा में चले गए थे, लेकिन अब शिक्षा और समझ बढ़ने के साथ वे अपने मूल धर्म में लौट आए हैं। परिवार की बेटी मेनका ने समाज से अपील की कि धर्म परिवर्तन जैसे महत्वपूर्ण निर्णय सही जानकारी और समझ के आधार पर ही लें।

कार्यक्रम में समाजसेवी और जनप्रतिनिधि संदीप मुंडा, चमर सिंह मुंडा, मुखिया मंगल सिंह मुंडा, रविन्द्र मुंडा, रामचन्द्र सिंह मुंडा, जगन्नाथ सिंह मुंडा, केपी सेट सोय, मेघनाथ सिंह मुंडा, गुरूवा मुंडा, श्रवण सरदार, ग्राम मुंडा गणेश राम मुंडा, भूषण मुंडा, दीना मुंडा, कुशल मुंडा, जिला परिषद सदस्य जिंगी हेम्ब्रम, शम्भू सिंह मुंडा, तुलसी मुंडा सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद थे।

ग्रामीणों का मानना है कि परिवार की यह घर वापसी समुदाय में सांस्कृतिक जागरूकता और अपनी परंपराओं की ओर लौटने का महत्वपूर्ण संदेश देती है।