संस्कृति

महाशिवरात्रि पर सरायकेला के शिवालयों में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़

महाशिवरात्रि पर सरायकेला के शिवालयों में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़

सरायकेला : महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर सरायकेला जिला मुख्यालय तथा आसपास के क्षेत्रों के सभी शिवालयों में भगवान भोलेनाथ के दर्शन और जलाभिषेक के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। सूर्योदय से पहले ही भक्तों का आना शुरू हो गया था, जो दोपहर बाद तक जारी रहा।

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सरायकेला के कुदरसाही स्थित बाबा बुद्धेश्वर नाथ के प्राचीन मंदिर में सबसे अधिक भीड़ देखने को मिली। शहर के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचे।

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मंदिर के पुजारी और भक्त मंडली ने श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए महिला और पुरुषों के लिए अलग-अलग कतारों की व्यवस्था की। पूजा सामग्री और नारियल-फल की दुकानों को बैरिकेडिंग कर मुख्य सड़क के किनारे व्यवस्थित किया गया, ताकि यातायात बाधित न हो। मंदिर परिसर के बाहर छोटे-बड़े वाहनों की पार्किंग की व्यवस्था की गई। सुरक्षा के मद्देनजर अगरबत्ती और दीप जलाने की व्यवस्था मंदिर के मुख्य द्वार के सामने की गई।

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इसके अलावा मजना घाट स्थित बाबा पंचमुखी महादेव मंदिर, मलिक बांध, इंद्र टांडी, गेस्ट हाउस, कवि टोला सहित अन्य शिवालयों में भी भक्तों की अच्छी-खासी भीड़ रही।
भीड़ नियंत्रण के लिए प्रशासन द्वारा सभी प्रमुख मंदिरों में आवश्यकतानुसार महिला एवं पुरुष पुलिस बल की तैनाती की गई थी।

हो-समाज, दिल्ली प्रतिनिधिमंडल की जोबा माझी से मुलाकात, हो-भाषा में बातचीत और सामाजिक मुद्दों पर चर्चा

हो-समाज, दिल्ली प्रतिनिधिमंडल की जोबा माझी से मुलाकात, हो-भाषा में बातचीत और सामाजिक मुद्दों पर चर्चा

चाईबासा : हो-समाज, दिल्ली के प्रतिनिधिमंडल ने शुक्रवार को सांसद जोबा माझी से शिष्टाचार मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व पालो पुरती कुड़ु ने किया। इस अवसर पर मागे पोरोब में सहयोग के लिए सांसद को शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया गया तथा वार्षिक पत्रिका धुमकुड़िया भेंट की गई।

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मुलाकात की खास बात यह रही कि पूरी बातचीत हो-भाषा में हुई, जिसे मातृभाषा के संरक्षण और संवर्धन की दिशा में सकारात्मक पहल माना जा रहा है।
बैठक के दौरान महिला सशक्तिकरण, महिलाओं की शिक्षा तथा आदिवासी समाज की पारंपरिक संस्कृति—जैसे भाषा, पर्व-त्योहार, नृत्य-गीत, पूजा-पाठ, पारंपरिक वेशभूषा और खान-पान—के संरक्षण पर विस्तार से चर्चा हुई।

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इसके अलावा जल, जंगल और जमीन पर अतिक्रमण के मुद्दे पर चिंता व्यक्त की गई। साथ ही पश्चिम सिंहभूम के सुदूर आदिवासी क्षेत्रों में सड़क और पुल निर्माण की आवश्यकता पर भी चर्चा की गई, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन बेहतर हो सके और विकास कार्यों को गति मिल सके।

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इस मौके पर श्रीमती पालो पुरती कुड़ु के अतिरिक्त हो-समाज की ओर से सुश्री ललिता मइ तियु, श्री गंगाराम गागराई, श्री घनश्याम बोदरा, श्री राजू जेराई, श्री संजय तियु तथा अन्य सदस्यगण उपस्थित रहे।

मागे पर्व पर पैतृक गांव पाताहातु पहुंचे मधु कोड़ा और गीता कोड़ा, पारंपरिक पूजा में हुए शामिल

मागे पर्व पर पैतृक गांव पाताहातु पहुंचे मधु कोड़ा और गीता कोड़ा, पारंपरिक पूजा में हुए शामिल

चाईबासा : पाताहातु मागे पर्व के पावन अवसर पर झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा एवं पूर्व सांसद गीता कोड़ा सपरिवार अपने पैतृक गांव पाताहातु पहुंचे। इस दौरान दोनों ने गांव में आयोजित पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठान में भाग लिया और दिऊरियों के साथ आदिवासी परंपरा के अनुसार सिंहबोंगा की गोवारी (अर्चना) की।

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पर्व के अवसर पर दिऊरियों द्वारा विधिवत पूजा-अर्चना कर गांव की सुख-शांति, समृद्धि और खुशहाली के लिए देशाउली से प्रार्थना की गई। इस धार्मिक अनुष्ठान में गांव के बुजुर्गों, महिलाओं और युवाओं की भी बड़ी संख्या में सहभागिता रही। पारंपरिक वेशभूषा और सांस्कृतिक माहौल से पूरा गांव उत्सव के रंग में रंगा नजर आया।

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इस अवसर पर मधु कोड़ा ने कहा कि मागे पर्व आदिवासी समाज की सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक एकता का प्रतीक है। उन्होंने सभी ग्रामीणों को पर्व की शुभकामनाएं देते हुए आपसी भाईचारे और विकास की भावना को मजबूत करने का संदेश दिया। वहीं गीता कोड़ा ने भी ग्रामीणों के साथ पूजा-अर्चना कर क्षेत्र की उन्नति और लोगों के कल्याण की कामना की।

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मागे पर्व के अवसर पर पाताहातु गांव में पारंपरिक आस्था, संस्कृति और सामूहिक एकजुटता का अनुपम दृश्य देखने को मिला।

चाईबासा में मानकी-मुंडा संघ की मासिक बैठक, देशाउली फाउंडेशन ने स्वशासन और संस्कृति संरक्षण पर दिया जोर

चाईबासा में मानकी-मुंडा संघ की मासिक बैठक, देशाउली फाउंडेशन ने स्वशासन और संस्कृति संरक्षण पर दिया जोर

चाईबासा : चाईबासा स्थित मानकी मुंडा संघ सभागार में शुक्रवार, 13 फरवरी 2026 को मासिक बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में विशेष अतिथि के रूप में देशाउली फाउंडेशन के संस्थापक साधु हो शामिल हुए।

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बैठक में उपस्थित मानकी-मुंडाओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए साधु हो ने कहा कि देशाउली फाउंडेशन आदिवासी समुदाय द्वारा संचालित एक स्वायत्त सामाजिक संस्था है, जो पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ आदिवासी कला-संस्कृति, परंपरा, मान्यताओं और स्वशासन व्यवस्था के संरक्षण के लिए कार्य कर रही है।

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उन्होंने देशाउली-जयरा और अन्य पवित्र स्थलों के संरक्षण की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि स्वशासन व्यवस्था से जुड़े दियुरियों की स्थिति और प्राकृतिक रूप से स्थापित देशाउली स्थलों पर खतरा मंडरा रहा है। उन्होंने इन समस्याओं के समाधान के लिए कोल्हान क्षेत्र के मानकी-मुंडाओं से सहयोग करने और सामाजिक एकता एवं सौहार्द बनाए रखने की अपील की।

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साधु हो ने बताया कि आगामी “दियुरी संवाद” कार्यक्रम के तहत देशाउली फाउंडेशन द्वारा प्रखंड समन्वयकों को गांव-गांव भेजकर दियुरियों का डाटा संग्रह किया जाएगा। इस कार्य में सभी मुंडा-मानकी से सहयोग करने का अनुरोध किया गया।

चक्रधरपुर में महली समाज का भव्य वनभोज सह मिलन समारोह, हजारों लोगों की ऐतिहासिक भागीदारी

चक्रधरपुर में महली समाज का भव्य वनभोज सह मिलन समारोह, हजारों लोगों की ऐतिहासिक भागीदारी

चक्रधरपुर : पश्चिम सिंहभूम जिले के चक्रधरपुर प्रखंड अंतर्गत रामडा स्थित गुड़ाडीह मैदान में महली समाज एकता मंच के तत्वावधान में वनभोज सह मिलन समारोह का भव्य आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य महली समाज की सामाजिक एकता, सांस्कृतिक पहचान, शिक्षा के प्रति जागरूकता और भावी पीढ़ी को संगठित करना था। कार्यक्रम में कोल्हान क्षेत्र के दर्जनों गांवों से आए हजारों महिला, पुरुष, बच्चे और बुजुर्गों ने भाग लिया।

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कार्यक्रम में रंग-बिरंगे पारंपरिक परिधानों, पारंपरिक नृत्य, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और स्वागत दल ने माहौल को उत्सवमय बना दिया। सुबह से ही कार्यक्रम स्थल पर उत्साह का माहौल देखने को मिला।

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इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में यूसीआईएल जादूगोड़ा के डीजीएम श्री मनोरंजन महली उपस्थित रहे। विशिष्ट अतिथियों में टाटा स्टील के श्री रामचन्द्र बेसरा, हेडमास्टर श्री ब्रह्मा बेसरा, फॉरेस्टर श्री बीरेंद्र महली, G2C 2025 में जर्मनी में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाली सुश्री मलोती हेंब्रम, सामाजिक कार्यकर्ता श्री इंदर हेंब्रम तथा मानवाधिकार कार्यकर्ता श्री जवाहरलाल महली शामिल थे। अतिथियों का पारंपरिक तरीके से स्वागत किया गया तथा फीता काटकर एवं दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ।
महली समाज एकता मंच के अध्यक्ष श्री गणपति महली ने स्वागत भाषण में कहा कि समाज की एकता ही उसकी सबसे बड़ी ताकत है और ऐसे आयोजन समाज को संगठित करने में अहम भूमिका निभाते हैं। वहीं श्री जवाहरलाल महली ने समाज को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संगठित करने की आवश्यकता पर बल दिया।
सामाजिक कार्यकर्ता श्री इंदर हेंब्रम ने युवाओं से समाज सेवा और शिक्षा के क्षेत्र में आगे आने की अपील की। हेडमास्टर श्री ब्रह्मा महली ने शिक्षा को समाज की उन्नति का आधार बताते हुए बच्चों को अधिक से अधिक शिक्षा से जोड़ने पर जोर दिया।
मुख्य अतिथि श्री मनोरंजन महली ने महली समाज के इतिहास पर प्रकाश डालते हुए कहा कि समाज आने वाले समय में अपनी अलग पहचान और अधिकारों के लिए संगठित प्रयास करेगा।

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कार्यक्रम में सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने दर्शकों का मन मोह लिया। समाज की बच्चियों ने गीतों के माध्यम से शिक्षा, एकता और समाज सुधार का संदेश दिया। साथ ही मैट्रिक, इंटरमीडिएट और स्नातक स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले मेधावी छात्रों को सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर झामुमो महासचिव श्री बहादुर महली द्वारा नृत्य मंडली एवं सांस्कृतिक दलों को पारंपरिक साड़ी भेंट कर सम्मानित किया गया।
हजारों ग्रामीणों की सहभागिता वाले इस आयोजन को समाज की एकता, सांस्कृतिक संरक्षण और शिक्षा के प्रति जागरूकता की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बताया गया। उपस्थित लोगों ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम समाज को नई दिशा और मजबूत पहचान देने में सहायक सिद्ध होते हैं।

संरंगसिया घाटी में वीर शहीदों को श्रद्धांजलि, झारखंड ड्राइवर महासंघ ने किया खिचड़ी भोग का आयोजन

संरंगसिया घाटी में वीर शहीदों को श्रद्धांजलि, झारखंड ड्राइवर महासंघ ने किया खिचड़ी भोग का आयोजन

चाईबासा : टोंटो प्रखंड स्थित सेरेंगसिया घाटी में 02 फरवरी को वीर शहीदों की शहादत को नमन करते हुए झारखंड ड्राइवर महासंघ की ओर से खिचड़ी भोग का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में खरसावां विधानसभा के माननीय विधायक श्री दशरथ गागराई की धर्मपत्नी श्रीमती बसंती गागराई तथा आदिवासी अभिनेता एवं हो कॉमेडियन शिवा देवगाम विशेष रूप से उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के दौरान शहीदों के बलिदान को याद करते हुए उनके सम्मान में श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस अवसर पर महासंघ के केंद्रीय अध्यक्ष महेश बिरुवा, जगमोहन पिंगुवा, मनीष गोप, पश्चिमी सिंहभूम जिला अध्यक्ष नेल्सन तियू, सचिव जुमाल कोड़ा, कोषाध्यक्ष दिशु हेम्ब्रोम, महामंत्री संजय कुमार हेम्ब्रोम सहित सभी प्रखंड पदाधिकारी और सदस्य मौजूद रहे।

सेरेंसिया घाटी के जंगल में देशाउली फाउंडेशन की एक दिवसीय बैठक “मंथन” का आयोजन

सेरेंसिया घाटी के जंगल में देशाउली फाउंडेशन की एक दिवसीय बैठक “मंथन” का आयोजन

सेरेंसिया घाटी (कोल्हान) : देशाउली फाउंडेशन की ओर से रविवार को सेरेंसिया घाटी के जंगलों के बीच एक दिवसीय बैठक “मंथन” का आयोजन किया गया। यह बैठक फाउंडेशन के लिए विशेष महत्व की रही, क्योंकि वर्ष 2019 के बाद पहली बार इतने लंबे अंतराल के बाद देशाउली फाउंडेशन के सदस्यों का इतना बड़ा पुनर्मिलन हुआ।

इस बैठक में कोल्हान क्षेत्र के विभिन्न इलाकों के साथ-साथ ओडिशा से भी बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। खुले जंगल और प्राकृतिक वातावरण के बीच सभी प्रतिभागियों ने एक साथ समय बिताया और समाज से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर गहन विचार-विमर्श किया।

बैठक में नशा और शराब की बढ़ती समस्या, रोजगार के अवसर, परम्परागत मानकी-मुण्डा स्वशासन व्यवस्था, शिक्षा की वर्तमान स्थिति एवं उसमें सुधार जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।

मुख्य रूप से चार महत्वपूर्ण विषयों पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया—

1. देशाउली फाउंडेशन की रूप-रेखा

आने वाले समय में देशाउली फाउंडेशन की दिशा, उद्देश्य, कार्यप्रणाली और सामाजिक पहचान को लेकर स्पष्ट रणनीति पर विचार किया गया।

2. दिउरी की मजबूती में योगदान

गाँव के धार्मिक प्रधान दिउरी की गरिमा बनाए रखने, उनके महत्व को नई पीढ़ी तक पहुँचाने तथा गाँव को बाहरी हस्तक्षेप से सुरक्षित रखने में समाज की भूमिका पर खुली चर्चा हुई।

3. पर्यावरण संरक्षण में सहभागिता

जंगल, जल, जमीन और जैव-विविधता की रक्षा के लिए व्यक्तिगत एवं सामूहिक स्तर पर किए जाने वाले ठोस कदमों पर सुझाव रखे गए और प्रतिबद्धता जताई गई।

4. सामाजिक एकता को सुदृढ़ करना

समाज में आपसी भाईचारे, एकजुटता और विश्वास को मजबूत करने में प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका पर गंभीर मंथन हुआ।

यह बैठक केवल चर्चा तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसमें शामिल प्रत्येक व्यक्ति ने अपने विचार साझा किए और एक-दूसरे से सीखने का अवसर प्राप्त किया। प्रकृति के बीच हुआ यह आयोजन भावनात्मक रूप से जोड़ने वाला होने के साथ-साथ भविष्य के लिए दिशा-निर्देश देने वाला भी सिद्ध हुआ।

देशाउली फाउंडेशन ने सभी साथियों का आभार व्यक्त किया, जिन्होंने दूर-दराज़ से आकर इस “मंथन” को सफल और सार्थक बनाया। बैठक का समापन एकजुट होकर समाजहित में कार्य करने के नए संकल्प और ऊर्जा के साथ किया गया।

पंडरासाली गांव में गणतंत्र दिवस पर इंद्र पूजा, छाता मेला व फुटबॉल प्रतियोगिता का आयोजन

पंडरासाली गांव में गणतंत्र दिवस पर इंद्र पूजा, छाता मेला व फुटबॉल प्रतियोगिता का आयोजन

चाईबासा : मंझारी प्रखंड के पंडरासाली गांव में गणतंत्र दिवस के अवसर पर इंद्र पूजा सह छाता मेला एवं फुटबॉल खेल प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इस मेले में आसपास के गांवों के साथ-साथ उड़ीसा क्षेत्र से भी बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए।
आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम में कुल 15 टीमों ने भाग लिया। प्रत्येक टीम में 70 से 150 नृत्य कलाकार शामिल थे, जो दर्शकों के आकर्षण का केंद्र बने रहे। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पूर्व मुख्यमंत्री सह विधायक सरायकेला–खरसावां श्री चम्पाई सोरेन थे, हालांकि विशेष कारणों से वे कार्यक्रम में शामिल नहीं हो सके। विशिष्ट अतिथि के रूप में जिला परिषद अध्यक्ष सरायकेला–खरसावां श्री सोनाराम बोदरा उपस्थित रहे।
सभा को संबोधित करते हुए श्री सोनाराम बोदरा ने कहा कि इस तरह के मेले हमारी लोक कला, संस्कृति और परंपराओं को जीवित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
सांस्कृतिक प्रतियोगिता में आदिवासी हो समाज सुपर आकड़ा पूरनापानी गांव को प्रथम पुरस्कार ₹20,000, जय जवान जय किसान युवक संघ तरना गांव (उड़ीसा) को द्वितीय पुरस्कार ₹15,000, संस्कृति क्लब भवन हरिगुटु चाईबासा को तृतीय पुरस्कार ₹10,000, जोमको जुड़ी बोडेसाईं गांव को चतुर्थ पुरस्कार ₹7,000, ताला माई आनदी सुसन रंगामटिया गांव को पांचवां पुरस्कार ₹5,000, निशा न्यू बॉयज क्लब बलियाडिपा गांव को छठा पुरस्कार ₹3,000 प्रदान किया गया। अन्य प्रतिभागियों को सांत्वना पुरस्कार के रूप में ₹2,000 दिए गए।
फुटबॉल प्रतियोगिता में जयराम एफसी ने प्रथम स्थान प्राप्त कर ₹50,000, तुरमसाईं एफसी ने द्वितीय स्थान पर ₹30,000, किनाबसा ने तृतीय स्थान पर ₹15,000 तथा एडीमसाईं ने चतुर्थ स्थान पर ₹10,000 का पुरस्कार प्राप्त किया।
पुरस्कार वितरण जिला परिषद अध्यक्ष श्री सोनाराम बोदरा, ऑल इंडिया हो लैंग्वेज एक्शन कमेटी झारखंड के प्रदेश अध्यक्ष श्री सावन सोय, समाजसेवी अमन हांसदा एवं सोनाराम गगराई के हाथों किया गया।
इस आयोजन को सफल बनाने में ए.एन.एफ.सी. पंडरासाली के संरक्षक श्री सावन सोय, अध्यक्ष विकास बिरुआ, सचिव साधु चरण बिरुआ, उपसचिव रवि बिरुआ, कोषाध्यक्ष अंकुरा बिरुआ, मुंडा घनश्याम बिरुआ, डकुआ पीताम्बर कालिंदी , श्री बैजनाथ बिरुआ , तुराम बिरुआ ,धर्मेंद्र गोप, कल्पना बिरुआ ,ललिता बोदरा, बासमती बिरुआ, कृष्णा कालिंदी,  एवं हजारों की संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे ।

कोल्हान ब्ह: रूमुल–2026 को लेकर आयोजन समिति की बैठक, तैयारियों पर हुई समीक्षा

कोल्हान ब्ह: रूमुल–2026 को लेकर आयोजन समिति की बैठक, तैयारियों पर हुई समीक्षा

चाईबासा : खूंटकट्टी मैदान, ताम्बो में प्रस्तावित कोल्हान ब्ह: रूमुल–2026 के आयोजन को लेकर आयोजन समिति की ओर से एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में आगामी मार्च माह में होने वाले इस कार्यक्रम को भव्य, सुव्यवस्थित और ऐतिहासिक बनाने को लेकर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक के दौरान कार्यक्रम की तिथि निर्धारण, स्थल व्यवस्था, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, पारंपरिक रीति-रिवाजों के संरक्षण, अतिथियों के स्वागत, सुरक्षा व्यवस्था और प्रचार-प्रसार जैसे महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विचार-विमर्श किया गया। समिति सदस्यों ने कहा कि कोल्हान ब्ह: रूमुल आदिवासी समाज की सांस्कृतिक पहचान और एकता का प्रतीक है, इसलिए इसके आयोजन में किसी भी तरह की कमी नहीं होनी चाहिए।
कार्यक्रम के सफल संचालन के लिए विभिन्न उप-समितियों के गठन पर भी चर्चा हुई। साथ ही स्थानीय ग्रामीणों, सामाजिक संगठनों और युवाओं की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।
बैठक के अंत में आयोजन समिति ने विश्वास व्यक्त किया कि सभी के सहयोग से कोल्हान ब्ह: रूमुल–2026 का आयोजन सफल, ऐतिहासिक और स्मरणीय होगा तथा कोल्हान क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को व्यापक पहचान मिलेगी।

हो समाज महासभा का दो दिवसीय वार्षिक अधिवेशन किरीबुरु में शुरू

हो समाज महासभा का दो दिवसीय वार्षिक अधिवेशन किरीबुरु में शुरू

किरीबुरु : किरीबुरु स्थित आदिवासी कल्याण केंद्र में शनिवार को आदिवासी हो समाज महासभा के दो दिवसीय वार्षिक अधिवेशन का शुभारंभ हुआ। पहले दिन की शुरुआत दियूरी धनुर्जय लागुरी द्वारा बोंगा बुरु अनुष्ठान से हुई। इसके बाद महासभा का ध्वजारोहण एवं हो समाज की सामूहिक प्रार्थना (गोवारी) संपन्न कराई गई।
कार्यक्रम का औपचारिक उद्घाटन आदिवासी कल्याण केंद्र के अध्यक्ष श्री हीरालाल सुंडी, श्री करम्पदा मुंडा एवं श्री राजेश मुंडा ने संयुक्त रूप से किया। इसके पश्चात प्रतिनिधि सभा की बैठक आयोजित हुई।
बैठक में “केया-केपेया आंदी” (भाग कर शादी) की सामाजिक प्रक्रिया पर विस्तार से चर्चा की गई। प्रतिनिधि सभा ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि बाला अनुष्ठान के दौरान विवाह संपन्न करना हो समाज की परंपरा के विरुद्ध है। समाज की परंपरा के अनुसार लड़की के घर बाला में लड़के का जाना तथा लड़के के घर बाला में लड़की का जाना मान्य नहीं है। अतः बाला के दौरान विवाह की प्रक्रिया को अमान्य घोषित किया गया और समाज से परंपराओं में मनमाने बदलाव न करने की अपील की गई।
प्रतिनिधि सभा ने यह भी निर्णय लिया कि भाग कर शादी की प्रथा मान्य रहेगी, लेकिन इसके लिए घर के आंगन में ससंग-सुनुम एवं आदिंग-हेबे आदेर की प्रक्रिया पूरी करना अनिवार्य होगा। इसके बाद अजिहनर के रूप में लड़की पक्ष के लोगों के लड़के के घर आने पर ही बाला संपन्न किया जाएगा।
बैठक में हो समाज की महत्वपूर्ण परंपरा ‘मारंग बोंगा’ पर भी चर्चा हुई। बताया गया कि प्रत्येक किली (गोत्र) का अपना ऐतिहासिक महत्व होता है, जिसे मारंग बोंगा के रूप में सम्मान दिया जाता है। कई किलियों में यह परंपरा विलुप्त होती जा रही है। इसे पुनर्जीवित करने के लिए महासभा ने सभी किलियों से संबंधित विधान एवं ऐतिहासिक विवरण आमंत्रित करने का निर्णय लिया।
इस अवसर पर महासभा के अध्यक्ष श्री मुकेश बिरुवा ने बिरुवा किली के मारंग बोंगा का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि बिरुवा किली के लोग वर्तमान में लगभग 84 गांवों में निवास करते हैं और उनके पूर्वज विभिन्न क्षेत्रों से प्रवास करते हुए यहां बसे। अधिवेशन में फिलहाल केवल बिरुवा किली का मारंग बोंगा महासभा को सौंपा गया।
प्रतिनिधि सभा ने यह भी निर्णय लिया कि अंतर्जातीय विवाह को हो समाज में मान्यता नहीं दी जाएगी तथा ऐसे विवाहों में किसी भी पारंपरिक पूजा-पाठ या घर के आदिंग में स्थान नहीं होगा। साथ ही रिंग सेरेमनी को भी हो समाज की पारंपरिक विवाह व्यवस्था का हिस्सा नहीं माना जाएगा।
अधिवेशन में सोमा कोड़ा, चैतन्य कुंकल, बामिया बारी, छोटेलाल तामसोय, माधव चंद्र कोड़ा, रोया राम चंपिया, गोपी लागुरी, रमेश लागुरी, बलभद्र बिरुली, श्याम बिरुवा, अमर बिरुवा, जयराम पाट पिंगुवा, भूषण लागुरी, पुतकर लागुरी, अमरसिंह सुंडी, नीलिमा पुरती, गीता लागुरी, पदमुनि लागुरी सहित बड़ी संख्या में समाज के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।