जगन्नाथपुर (सिंहभूम) | जगन्नाथपुर के पोटका क्षेत्र में स्थित देवी फ्यूल्स पेट्रोल पंप का शुक्रवार को भव्य उद्घाटन किया गया। इस नए पेट्रोल पंप का उद्घाटन सिंहभूम की सांसद जोबा माझी ने नारियल फोड़कर और फीता काटकर विधिवत रूप से किया।
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यह पेट्रोल पंप पहले से ही चक्रधरपुर क्षेत्र में ग्राहकों की पहली पसंद बना हुआ है, और अब इसकी सेवाएं जगन्नाथपुर तथा आसपास के क्षेत्रों के लोगों को भी उपलब्ध होंगी।
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इस अवसर पर पेट्रोल पंप के संचालक उदय माझी ने कहा कि चक्रधरपुर की तरह ही जगन्नाथपुर में भी ग्राहकों को गुणवत्तापूर्ण ईंधन, सही मात्रा और बेहतर ग्राहक सेवा उपलब्ध कराई जाएगी। उन्होंने बताया कि नए पंप के शुरू होने से स्थानीय लोगों को ईंधन के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा, जिससे समय और संसाधनों की बचत होगी।
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उद्घाटन समारोह में झामुमो के केंद्रीय सदस्य अभिषेक सिंकु, डॉ. धनु माझी, पार्वती सामंता, सोनू सिरका, देवा मुर्मू, भीम माझी, संतोष मिश्रा सहित बड़ी संख्या में स्थानीय लोग एवं ग्राहक उपस्थित रहे।
चाईबासा | पश्चिमी सिंहभूम जिले में मनरेगा अंतर्गत संचालित बिरसा हरित ग्राम योजना के तहत उत्पादित फलों के विपणन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुक्रवार को सदर अनुमंडल कार्यालय के द्वितीय प्रवेश द्वार पर दूसरे आम बिक्री केंद्र का उद्घाटन किया गया। इस अवसर पर सदर अनुमंडल पदाधिकारी संजय कुमार, भूमि सुधार उप समाहर्ता जीतराय मुर्मू, सामाजिक कार्यकर्ता त्रिशानु राय सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
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जिला प्रशासन द्वारा प्रोजेक्ट बदलाव के तहत झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसायटी (जेएसएलपीएस) के समन्वित प्रयासों से संचालित इस पहल का उद्देश्य किसानों एवं लाभुकों को उनके उत्पादों के लिए बेहतर बाजार उपलब्ध कराना है। कार्यक्रम के दौरान खूंटपानी प्रखंड की पूर्णिया पंचायत की बिरसा हरित ग्राम योजना की लाभुक सुनीता होनहागा ने अपने बागान में उत्पादित आमों की बिक्री के लिए स्टॉल लगाया।
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अधिकारियों ने बताया कि इस व्यवस्था के माध्यम से स्थानीय उत्पादकों को सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंचने का अवसर मिल रहा है। इससे बिचौलियों पर निर्भरता कम होगी तथा किसानों को उनके उत्पादों का बेहतर मूल्य मिलने की संभावना बढ़ेगी। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सदर अनुमंडल पदाधिकारी संजय कुमार ने कहा कि बिरसा हरित ग्राम योजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण किसानों की आय में वृद्धि करना और उन्हें सीधे बाजार से जोड़ना है। उन्होंने कहा कि प्रोजेक्ट बदलाव के तहत जेएसएलपीएस की सहभागिता से किसानों को उत्पादन के साथ-साथ विपणन व्यवस्था से जोड़ने की दिशा में भी प्रभावी कार्य किया जा रहा है।
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उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन किसानों की आजीविका को सुदृढ़ करने तथा स्थानीय उत्पादों के लिए बेहतर विपणन व्यवस्था विकसित करने के लिए निरंतर प्रयासरत है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सके।
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इस अवसर पर सहायक जिला परियोजना पदाधिकारी विवेक कुमार पाढ़ी, जिला आजीविका प्रबंधक पलाश भरत राठौर सहित बड़ी संख्या में स्थानीय लोग उपस्थित थे।
सरायकेला । समाहरणालय सभागार में उपायुक्त नीतिश कुमार सिंह की अध्यक्षता में जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट (डीएमएफटी) की शासी परिषद की बैठक आयोजित की गई। बैठक में खनन प्रभावित क्षेत्रों में संचालित विभिन्न विकास योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई तथा नई योजनाओं के चयन और उनके प्रभावी क्रियान्वयन पर विस्तृत चर्चा हुई।
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बैठक में खरसावां विधायक दशरथ गागराई, ईचागढ़ विधायक सविता महतो, जिला परिषद अध्यक्ष सोनाराम बोदरा, उप विकास आयुक्त रीना हांसदा सहित शासी परिषद के सदस्य एवं विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।
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समीक्षा के दौरान स्वास्थ्य, शिक्षा, कौशल विकास, पेयजल, आंगनबाड़ी भवन निर्माण, विद्यालयों की आधारभूत संरचना सुदृढ़ीकरण, कृषि एवं आजीविका संवर्द्धन तथा स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार से संबंधित योजनाओं की प्रगति पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।
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परिषद के सदस्यों ने जिले में हड्डी रोग विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने, शव वाहनों की संख्या बढ़ाने, बंद पड़े कोल्ड स्टोरेज को पुनः संचालित करने तथा जर्जर आंगनबाड़ी भवनों के निर्माण जैसे महत्वपूर्ण सुझाव दिए। उपायुक्त नीतिश कुमार सिंह ने संबंधित विभागों को प्राप्त सुझावों पर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश देते हुए कहा कि डीएमएफटी निधि का उपयोग खनन प्रभावित क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य, आधारभूत संरचना, कौशल विकास एवं आजीविका संवर्द्धन जैसी जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए प्राथमिकता के आधार पर किया जाए, ताकि स्थानीय समुदायों को अधिकतम लाभ मिल सके।
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बैठक के दौरान विभिन्न विभागों द्वारा योजनाओं की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की गई। साथ ही परिषद के सदस्यों द्वारा दिए गए सुझावों के आधार पर भावी कार्ययोजना एवं विकास कार्यों को और अधिक प्रभावी बनाने के उपायों पर भी चर्चा की गई।
कुचाई | जिले में अवैध शराब के निर्माण, भंडारण और बिक्री पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने के उद्देश्य से चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत उत्पाद विभाग ने कुचाई थाना क्षेत्र के जिलिंग्दा गांव में सघन छापेमारी अभियान चलाया। कार्रवाई के दौरान चार अवैध महुआ चुलाई भट्टियों को ध्वस्त कर दिया गया तथा भारी मात्रा में अवैध शराब निर्माण में प्रयुक्त सामग्री बरामद की गई।
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उत्पाद विभाग को प्राप्त गुप्त सूचना के आधार पर बुधवार को की गई इस छापेमारी में करीब 1300 किलोग्राम जावा महुआ और 30 लीटर अवैध महुआ चुलाई शराब बरामद की गई। बरामद सामग्री को जब्त करने के बाद नियमानुसार नष्ट कर दिया गया।
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विभागीय अधिकारियों ने बताया कि छापेमारी के दौरान चिन्हित अवैध चुलाई अड्डों के संचालकों के विरुद्ध झारखंड उत्पाद अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज करने की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है। अभियान के दौरान क्षेत्र में अवैध शराब कारोबार से जुड़े अन्य संभावित ठिकानों की भी जांच की गई।
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जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि अवैध शराब के निर्माण, परिवहन, भंडारण एवं बिक्री में संलिप्त व्यक्तियों के खिलाफ आगे भी लगातार और कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी। प्रशासन ने आम नागरिकों से अपील की है कि अवैध शराब से संबंधित किसी भी गतिविधि की जानकारी तत्काल संबंधित विभाग को दें, ताकि समय रहते प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
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प्रशासन के अनुसार, अवैध शराब का कारोबार जनस्वास्थ्य, सामाजिक सुरक्षा तथा कानून-व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा है। इसी को देखते हुए जिले में इसके विरुद्ध विशेष अभियान लगातार चलाया जा रहा है।
चिरिया । बंद पड़ी टुंगविल माइंस के पुनः संचालन की चर्चाओं के बीच स्थानीय ग्रामीणों और बेरोजगार युवाओं ने अपने अधिकारों को लेकर आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है। बुधवार को चिरिया टुंगविल माइंस से प्रभावित छह गांवों—चिरिया, बिनुवा, अंकुवा, लोइडी, टिमरा और सोंगा—के ग्रामीणों की एक सामूहिक बैठक हाट परिसर में आयोजित की गई।
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प्रकाश सिद्धू की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में पांच गांवों के पारंपरिक मुंडाओं सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण और युवा शामिल हुए। बैठक के दौरान वक्ताओं ने सेल (SAIL) प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वर्षों से जारी खनन गतिविधियों के कारण स्थानीय लोगों की उपजाऊ कृषि भूमि और खलिहान प्रभावित हुए हैं। साथ ही क्षेत्र की नदियों का पानी भी प्रदूषित हुआ है, जिससे किसानों को लगातार आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
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ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि माइंस से निकलने वाले अपशिष्ट पदार्थों के कारण खेतों का कटाव बढ़ा है और प्रभावित परिवारों को आज तक उचित मुआवजा नहीं मिल सका है। उन्होंने कहा कि पीढ़ियों से इस समस्या का सामना करने के बावजूद उनकी मांगों की अनदेखी की जाती रही है।
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बैठक में उपस्थित युवाओं ने भी नाराजगी जताते हुए कहा कि सेल प्रबंधन स्थानीय प्रभावित परिवारों के युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता देने के बजाय बाहरी लोगों को अवसर दे रहा है। इसे स्थानीय लोगों के साथ अन्याय बताते हुए युवाओं ने रोजगार में प्राथमिकता सुनिश्चित करने की मांग की।
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सेल प्रबंधन की कथित वादाखिलाफी के विरोध में ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से 3 जून से आंदोलन शुरू करने का निर्णय लिया। आंदोलन की प्रमुख मांगों में प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा, स्थानीय युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता तथा क्षेत्रीय हितों की रक्षा शामिल है। बैठक में मुंडा विजय लागुरी, सोमा चेरवा, गांजो सुरीन, माडु चेरवा सहित कई ग्रामीण और युवा उपस्थित थे।
चाईबासा | पश्चिमी सिंहभूम जिले में अवैध शराब के निर्माण, बिक्री एवं परिवहन पर रोक लगाने के लिए उत्पाद विभाग द्वारा लगातार अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में अधीक्षक उत्पाद, पश्चिमी सिंहभूम के निर्देश पर 3 जून 2026 को चक्रधरपुर एवं टोकलो थाना क्षेत्रों में छापेमारी कर दो लोगों को गिरफ्तार किया गया।
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उत्पाद विभाग की टीम ने चक्रधरपुर थाना क्षेत्र के चैनपुर गांव में अवैध रूप से शराब बिक्री की सूचना के आधार पर छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान एक आरोपी को अवैध चुलाई शराब बेचते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया।
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इसी तरह टोकलो थाना क्षेत्र के चीटपिल गांव में अवैध चुलाई शराब की बिक्री के लिए कुख्यात स्थल पर छापेमारी की गई। इस दौरान एक अन्य शराब विक्रेता को गिरफ्तार किया गया। दोनों अभियानों के दौरान कुल 17 लीटर अवैध चुलाई शराब बरामद की गई। गिरफ्तार आरोपियों के विरुद्ध उत्पाद अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
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सके अतिरिक्त उपायुक्त के निर्देश पर अनुज्ञप्ति प्राप्त खुदरा शराब दुकानों (अनुज्ञप्ति संख्या 001_COM_WES_25-26 एवं 007_COM_WES_25-26) का औचक निरीक्षण भी किया गया। निरीक्षण के दौरान एक दुकान में अनधिकृत व्यक्ति द्वारा मदिरा बिक्री किए जाने का मामला सामने आया। इस पर संबंधित अनुज्ञप्तिधारी के विरुद्ध अनियमितता दर्ज करते हुए दंडात्मक कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
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उत्पाद विभाग ने स्पष्ट किया है कि जिले में अवैध शराब के निर्माण, बिक्री एवं परिवहन के विरुद्ध अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा तथा कानून का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
चाईबासा | एंटी करप्शन ऑफ इंडिया, झारखंड के प्रदेश अध्यक्ष रामहरि गोप ने पश्चिमी सिंहभूम के उपायुक्त को ज्ञापन सौंपकर गुआ, किरीबुरू, मेघाहातुबुरू एवं सारंडा क्षेत्र के स्थानीय लोगों की रोजगार एवं आजीविका संबंधी समस्याओं की उच्चस्तरीय जांच कराने तथा ठोस कार्रवाई की मांग की है। रामहरि गोप ने कहा कि पश्चिमी सिंहभूम जिला देश के सबसे समृद्ध खनिज क्षेत्रों में गिना जाता है। यहां से प्रतिवर्ष करोड़ों रुपये मूल्य के लौह अयस्क एवं अन्य खनिज संसाधनों का दोहन किया जाता है। खनन कंपनियां और सरकार इस क्षेत्र से भारी राजस्व अर्जित करती हैं, लेकिन विडंबना यह है कि इसी क्षेत्र के मूल निवासी, आदिवासी एवं ग्रामीण परिवार आज भी रोजगार और सम्मानजनक आजीविका के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि दिनांक 31 मई 2026 को चाईबासा रेलवे स्टेशन परिसर में गुआ क्षेत्र से आए कई ग्रामीणों से बातचीत के दौरान अत्यंत चिंताजनक तथ्य सामने आए। ग्रामीणों ने बताया कि उनके क्षेत्र में रोजगार के पर्याप्त अवसर उपलब्ध नहीं होने के कारण वे लगभग 100 किलोमीटर से अधिक दूरी तय कर लकड़ी, दातून, पत्ता एवं अन्य वन उत्पाद बेचने के लिए चाईबासा आते हैं।
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ग्रामीणों के अनुसार वे टाटा-गुआ पैसेंजर ट्रेन से दोपहर में गुआ से प्रस्थान कर शाम को चाईबासा पहुंचते हैं। आर्थिक तंगी के कारण वे किसी होटल या किराए के स्थान पर ठहरने में सक्षम नहीं होते और पूरी रात रेलवे स्टेशन परिसर में ही गुजारते हैं। अगले दिन सुबह लगभग चार बजे उठकर अपने सामान के साथ बाजारों में निकल जाते हैं और दिनभर मेहनत कर सामान बेचने के बाद पुनः रेलवे स्टेशन पहुंचकर ट्रेन से अपने गांव लौटते हैं। रामहरि गोप ने कहा कि यह दृश्य किसी भी संवेदनशील व्यक्ति को झकझोर देने वाला है। जिस धरती की गोद से देश की उद्योग व्यवस्था चलाने वाले खनिज निकाले जा रहे हैं, उसी धरती के लोग रोजगार और सम्मानजनक जीवन के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं। यह केवल आर्थिक समस्या नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय, विकास और संवैधानिक अधिकारों से जुड़ा गंभीर प्रश्न है।
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उन्होंने कहा कि यदि खनन परियोजनाओं, औद्योगिक गतिविधियों और विकास योजनाओं का वास्तविक लाभ स्थानीय लोगों तक नहीं पहुंच रहा है, तो यह पूरे विकास मॉडल पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। खनिज संपदा से प्रभावित क्षेत्रों के युवाओं को प्राथमिकता के आधार पर रोजगार मिलना चाहिए, लेकिन वर्तमान स्थिति इसके विपरीत दिखाई दे रही है। एंटी करप्शन ऑफ इंडिया ने प्रशासन से मांग की है कि गुआ, किरीबुरू, मेघाहातुबुरू एवं सारंडा क्षेत्र में स्थानीय लोगों की रोजगार एवं आजीविका की वर्तमान स्थिति की निष्पक्ष जांच कराई जाए। खनन प्रभावित युवाओं के लिए विशेष रोजगार अभियान चलाया जाए तथा वन आधारित आजीविका, लघु उद्योग, स्वरोजगार एवं कौशल विकास योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू किया जाए। साथ ही खनन कंपनियों द्वारा स्थानीय रोजगार, पुनर्वास एवं कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) के तहत किए जा रहे कार्यों की भी समीक्षा की जाए।
उन्होंने मांग की कि खनिज संपदा से प्राप्त राजस्व और विकास योजनाओं का लाभ वास्तविक रूप से स्थानीय ग्रामीणों और आदिवासी समुदायों तक पहुंचाने के लिए विशेष कार्ययोजना बनाई जाए तथा प्रभावित क्षेत्रों के सामाजिक और आर्थिक उत्थान के लिए ठोस एवं समयबद्ध कदम उठाए जाएं। रामहरि गोप ने कहा कि यदि खनिज संपदा से समृद्ध क्षेत्र के लोगों को ही रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और सम्मानजनक जीवन का अधिकार नहीं मिल रहा है, तो यह विकास नहीं बल्कि स्थानीय समुदायों के साथ अन्याय है। प्रशासन को इस मामले को गंभीरता से लेते हुए त्वरित कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि क्षेत्र के युवाओं और ग्रामीण परिवारों को अपने ही क्षेत्र में सम्मानजनक रोजगार और बेहतर भविष्य मिल सके।
चाईबासा | चाईबासा स्थित एसीसी सीमेंट प्लांट को बंद होने से बचाने के लिए रविवार को जिला समाहरणालय में एक महत्वपूर्ण त्रिपक्षीय वार्ता आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता झारखंड के भू-राजस्व एवं परिवहन मंत्री दीपक बिरुआ ने की। हालांकि कई घंटों तक चली इस वार्ता का कोई ठोस परिणाम नहीं निकल सका और बातचीत बेनतीजा रही। बैठक में प्लांट प्रबंधन, मजदूर प्रतिनिधियों, ग्रामीणों और प्रशासनिक अधिकारियों ने हिस्सा लिया। वार्ता विफल रहने के बाद जिला प्रशासन ने स्पष्ट निर्देश जारी किए कि जब तक प्लांट में कामकाज बंद रहेगा, तब तक न तो प्लांट से कोई सामान बाहर भेजा जाएगा और न ही किसी प्रकार की सामग्री अंदर लाई जाएगी।
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उपायुक्त ने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए क्षेत्र में धारा 144 लागू करने का निर्देश दिया गया है। साथ ही एसीसी प्रबंधन को अपने उच्च प्रबंधन, विशेष रूप से अहमदाबाद बोर्ड से वार्ता कर जल्द समाधान निकालने को कहा गया है। प्रशासन ने यह भी निर्देश दिया कि मजदूरों के बकाया भुगतान की प्रक्रिया पूरी होने तक कर्मचारियों को अन्य कार्यों में नहीं लगाया जाए।
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ग्रामीणों और मजदूरों में बढ़ी चिंता ग्रामीणों और मजदूर प्रतिनिधियों ने बैठक में आशंका जताई कि 30 अप्रैल से ‘शटडाउन’ के नाम पर स्थानीय मजदूरों की छंटनी की जा रही है और प्लांट का उत्पादन एवं डिस्पैच पूरी तरह बंद है। उनका कहना है कि बिना किसी स्पष्ट नीति के काम बंद होने से उनकी आजीविका पर संकट गहरा गया है। मजदूरों ने आरोप लगाया कि प्लांट से कोयला, स्टील और क्लिंकर जैसी सामग्री को गुप्त तरीके से अन्य स्थानों पर भेजे जाने की कोशिश की जा रही है, जिससे यह आशंका बढ़ रही है कि फैक्ट्री को स्थायी रूप से बंद करने की तैयारी चल रही है। पहले भी हुआ था विरोध प्रदर्शन
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इस मुद्दे को लेकर स्थानीय ग्रामीणों और मजदूरों ने 29 मई को एसीसी प्रबंधन के खिलाफ पदयात्रा निकालने और उपायुक्त को ज्ञापन सौंपने की तैयारी की थी। हालांकि मंत्री दीपक बिरुआ के हस्तक्षेप और त्रिपक्षीय वार्ता के आश्वासन के बाद आंदोलन को फिलहाल स्थगित कर दिया गया। ग्रामीणों का कहना है कि चाईबासा का यह ऐतिहासिक प्लांट केवल रोजगार का साधन नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की पहचान और अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार है। यदि फैक्ट्री पूरी तरह बंद हो जाती है, तो हजारों परिवारों के सामने रोजी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा। बैठक में पुलिस अधीक्षक, जनप्रतिनिधि, मजदूर संगठनों के सदस्य, संघर्ष समिति के पदाधिकारी और एसीसी प्रबंधन के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।
नई दिल्ली | देश में एक बार फिर कमर्शियल LPG गैस सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी की गई है। तेल कंपनियों द्वारा जारी नई दरों के अनुसार, दिल्ली में 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमत में 42 रुपये की वृद्धि हुई है। इसके बाद इसकी नई कीमत 3,113.50 रुपये हो गई है।
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वहीं, कोलकाता में कमर्शियल LPG सिलेंडर के दाम में 53.50 रुपये की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसके साथ ही 5 किलोग्राम वाले LPG सिलेंडर की कीमत में भी 11 रुपये का इजाफा किया गया है, जिसके बाद इसकी नई कीमत 821.50 रुपये हो गई है।
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हालांकि, राहत की बात यह है कि घरेलू LPG गैस सिलेंडर की कीमतों में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया गया है।
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कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमतों में हुई इस बढ़ोतरी का असर होटल, रेस्तरां और छोटे व्यवसायों पर पड़ सकता है, जहां इन सिलेंडरों का व्यापक उपयोग होता है।
चाईबासा | एंटी करप्शन ऑफ इंडिया के झारखंड प्रदेश अध्यक्ष धी रामहरि पेरियार ने झारखंड, विशेषकर पश्चिमी सिंहभूम के सारंडा-कोल्हान क्षेत्र में विकास के दावों पर सवाल उठाते हुए कहा कि जमीनी स्तर पर स्थिति अब भी चिंताजनक बनी हुई है। उन्होंने कहा कि खनिज संपदा से समृद्ध गुआ, किरीबुरु, मेघाहातुबुरु और आसपास के क्षेत्रों के लोग आज भी रोजगार और आजीविका के अभाव में 100 किलोमीटर से अधिक दूरी तय कर चाईबासा पहुंचकर लकड़ी, दातून और जंगल से प्राप्त अन्य उत्पाद बेचने को मजबूर हैं।
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धी रामहरि पेरियार ने बताया कि चाईबासा रेलवे स्टेशन परिसर में उनकी मुलाकात ऐसे कई लोगों से हुई, जिन्होंने क्षेत्र में रोजगार के सीमित अवसरों की समस्या साझा की। लोगों ने बताया कि परिवार के भरण-पोषण के लिए उन्हें जंगलों से लकड़ी, दातून और पत्ते लाकर बाजारों में बेचना पड़ता है। उन्होंने कहा कि यह स्थिति उस क्षेत्र की वास्तविक तस्वीर पेश करती है, जहां से हर वर्ष करोड़ों-अरबों रुपये मूल्य के लौह अयस्क और अन्य खनिजों का दोहन किया जाता है।
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उन्होंने कहा कि यदि प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध क्षेत्र के मूल निवासी ही रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और सम्मानजनक जीवन के लिए संघर्ष कर रहे हैं, तो विकास के दावों की गंभीर समीक्षा आवश्यक है। उनके अनुसार विकास का अर्थ केवल खदानों का विस्तार, राजस्व संग्रह या बड़ी परियोजनाओं की स्थापना नहीं होना चाहिए, बल्कि इसका वास्तविक लाभ स्थानीय लोगों के जीवन स्तर में सुधार के रूप में दिखाई देना चाहिए। धी रामहरि पेरियार ने राज्य सरकार, जिला प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और संबंधित विभागों से गुआ एवं आसपास के क्षेत्रों में रोजगार सृजन, स्वरोजगार, लघु उद्योग, वनाधारित आजीविका, शिक्षा और कौशल विकास से जुड़ी प्रभावी योजनाएं लागू करने की मांग की। उन्होंने कहा कि ऐसी योजनाएं लागू होने से लोगों को आजीविका के लिए लंबी दूरी तय करने की मजबूरी से राहत मिल सकेगी।
उन्होंने कहा कि विकास के आंकड़ों से आगे बढ़कर जमीनी सच्चाई को देखने की आवश्यकता है। जब खनिज संपदा से समृद्ध क्षेत्र का आम नागरिक लकड़ी और दातून बेचकर जीवन यापन करने को मजबूर हो, तो यह सवाल स्वाभाविक है कि विकास का लाभ आखिर किसे मिल रहा है। इस गंभीर मुद्दे पर उन्होंने राज्य सरकार, प्रशासन, जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों और नीति-निर्माताओं से गंभीरता से विचार कर ठोस कदम उठाने की अपील की है।