चाईबासा एसीसी प्लांट पर त्रिपक्षीय वार्ता बेनतीजा, काम बंद रहने तक सामान की आवाजाही पर रोक: उपायुक्त

चाईबासा | चाईबासा स्थित एसीसी सीमेंट प्लांट को बंद होने से बचाने के लिए रविवार को जिला समाहरणालय में एक महत्वपूर्ण त्रिपक्षीय वार्ता आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता झारखंड के भू-राजस्व एवं परिवहन मंत्री दीपक बिरुआ ने की। हालांकि कई घंटों तक चली इस वार्ता का कोई ठोस परिणाम नहीं निकल सका और बातचीत बेनतीजा रही।
बैठक में प्लांट प्रबंधन, मजदूर प्रतिनिधियों, ग्रामीणों और प्रशासनिक अधिकारियों ने हिस्सा लिया। वार्ता विफल रहने के बाद जिला प्रशासन ने स्पष्ट निर्देश जारी किए कि जब तक प्लांट में कामकाज बंद रहेगा, तब तक न तो प्लांट से कोई सामान बाहर भेजा जाएगा और न ही किसी प्रकार की सामग्री अंदर लाई जाएगी।

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उपायुक्त ने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए क्षेत्र में धारा 144 लागू करने का निर्देश दिया गया है। साथ ही एसीसी प्रबंधन को अपने उच्च प्रबंधन, विशेष रूप से अहमदाबाद बोर्ड से वार्ता कर जल्द समाधान निकालने को कहा गया है। प्रशासन ने यह भी निर्देश दिया कि मजदूरों के बकाया भुगतान की प्रक्रिया पूरी होने तक कर्मचारियों को अन्य कार्यों में नहीं लगाया जाए।

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ग्रामीणों और मजदूरों में बढ़ी चिंता
ग्रामीणों और मजदूर प्रतिनिधियों ने बैठक में आशंका जताई कि 30 अप्रैल से ‘शटडाउन’ के नाम पर स्थानीय मजदूरों की छंटनी की जा रही है और प्लांट का उत्पादन एवं डिस्पैच पूरी तरह बंद है। उनका कहना है कि बिना किसी स्पष्ट नीति के काम बंद होने से उनकी आजीविका पर संकट गहरा गया है।
मजदूरों ने आरोप लगाया कि प्लांट से कोयला, स्टील और क्लिंकर जैसी सामग्री को गुप्त तरीके से अन्य स्थानों पर भेजे जाने की कोशिश की जा रही है, जिससे यह आशंका बढ़ रही है कि फैक्ट्री को स्थायी रूप से बंद करने की तैयारी चल रही है।
पहले भी हुआ था विरोध प्रदर्शन

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इस मुद्दे को लेकर स्थानीय ग्रामीणों और मजदूरों ने 29 मई को एसीसी प्रबंधन के खिलाफ पदयात्रा निकालने और उपायुक्त को ज्ञापन सौंपने की तैयारी की थी। हालांकि मंत्री दीपक बिरुआ के हस्तक्षेप और त्रिपक्षीय वार्ता के आश्वासन के बाद आंदोलन को फिलहाल स्थगित कर दिया गया।
ग्रामीणों का कहना है कि चाईबासा का यह ऐतिहासिक प्लांट केवल रोजगार का साधन नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की पहचान और अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार है। यदि फैक्ट्री पूरी तरह बंद हो जाती है, तो हजारों परिवारों के सामने रोजी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा।
बैठक में पुलिस अधीक्षक, जनप्रतिनिधि, मजदूर संगठनों के सदस्य, संघर्ष समिति के पदाधिकारी और एसीसी प्रबंधन के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।

By maskal.news

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