Blog

झारखंड के चार प्रमंडलों में खुलेंगे स्पोर्ट्स साइंस सेंटर

झारखंड के चार प्रमंडलों में खुलेंगे स्पोर्ट्स साइंस सेंटर

झारखंड सरकार राज्य के चार प्रमंडलों—उत्तरी छोटानागपुर, कोल्हान, संताल और पलामू—में स्पोर्ट्स साइंस सेंटर शुरू करने जा रही है। दक्षिण छोटानागपुर प्रमंडल के तहत रांची में पहले से अंतरराष्ट्रीय मानकों का हाई परफॉर्मेंस सेंटर संचालित है। सरकार का प्रयास है कि नए स्पोर्ट्स साइंस सेंटरों की शुरुआत इसी सत्र से की जाए।
इन सेंटरों का उद्देश्य खिलाड़ियों को वैज्ञानिक आधार पर प्रशिक्षण देना, चोट से बचाव करना और उनके प्रदर्शन में निरंतर सुधार लाना है। आधुनिक खेलों में मेहनत के साथ-साथ साइंस आधारित ट्रेनिंग अहम भूमिका निभाती है, इसी को ध्यान में रखते हुए यह पहल की जा रही है।
हर स्पोर्ट्स साइंस सेंटर में फिजियोथेरेपिस्ट, न्यूट्रिशनिस्ट, मसाजर और स्ट्रेंथ एंड कंडीशनिंग एक्सपर्ट सहित तकनीकी विशेषज्ञ मौजूद रहेंगे। खिलाड़ियों की फिटनेस, डाइट, रिकवरी और मानसिक मजबूती पर नियमित रूप से काम किया जाएगा। प्रशिक्षण से पहले और बाद में फिटनेस असेसमेंट कर खिलाड़ियों की कमजोरियों के अनुसार विशेष अभ्यास कराया जाएगा। गंभीर मामलों में खिलाड़ियों को प्रमंडलीय सेंटर या रांची के हाई परफॉर्मेंस सेंटर भेजा जाएगा।
साइंटिफिक ट्रेनिंग हमारी प्राथमिकता: सुदिव्य कुमार
खेल मंत्री सुदिव्य कुमार ने कहा कि राज्य सरकार खिलाड़ियों को साइंटिफिक ट्रेनिंग देने पर जोर दे रही है। परंपरागत बैटरी टेस्ट से आगे बढ़कर आधुनिक जरूरतों के अनुसार प्रशिक्षण दिया जाएगा, ताकि झारखंड खेलों में बेहतर प्रदर्शन कर सके। उन्होंने कहा कि इससे ओवरएज की समस्या पर भी नियंत्रण लगेगा और खिलाड़ियों को उनकी उम्र व क्षमता के अनुसार सही प्रशिक्षण मिल सकेगा।
प्रस्तावित स्पोर्ट्स साइंस सेंटर साई सेंटर, नेशनल क्रिकेट अकादमी और ओलंपिक ट्रेनिंग सेंटर की तर्ज पर काम करेंगे, जहां डेटा एनालिसिस, बायोमैकेनिक्स, न्यूट्रिशन और इंजरी मैनेजमेंट के जरिए खिलाड़ियों का प्रदर्शन बेहतर किया जाता है।

खरसावां शहीद दिवस पर अर्जुन मुंडा ने दी श्रद्धांजलि, आदिवासी अधिकारों के संरक्षण का लिया संकल्प

खरसावां शहीद दिवस पर अर्जुन मुंडा ने दी श्रद्धांजलि, आदिवासी अधिकारों के संरक्षण का लिया संकल्प

खरसावां : खरसावां शहीद दिवस के अवसर पर झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा एवं मीरा मुंडा भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ खेलारीसाई स्कूल से पदयात्रा करते हुए शहीद स्माधि स्थल पहुंचे। उन्होंने 1 जनवरी 1948 के खरसावां गोलीकांड में शहीद हुए वीर सपूतों की स्मृति में स्थापित शहीद वेदी पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।
श्रद्धांजलि के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए अर्जुन मुंडा ने कहा कि आज़ादी के बाद भी आदिवासी समाज के बलिदानों से सरकारें ठोस सबक नहीं ले सकीं। जिन शहीदों ने अपने रक्त से इतिहास रचा, उनकी धरती आज भी न्याय की प्रतीक्षा कर रही है। उन्होंने कहा कि आज़ादी से पहले आदिवासी समाज का संघर्ष अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ था, लेकिन आज़ादी के बाद भी खरसावां की धरती ने यह संदेश दिया कि आदिवासी जीवन, संस्कृति और परंपराओं को समझे बिना स्वतंत्रता अधूरी है।
उन्होंने कहा कि अनुसूचित क्षेत्रों में आज भी संविधान की मूल भावना के अनुरूप शासन व्यवस्था लागू नहीं हो पा रही है। पेसा कानून लागू होने के बावजूद उसकी नियमावली आदिवासी जीवन पद्धति और परंपराओं के अनुरूप नहीं है, जो शहीदों के बलिदान के साथ अन्याय है। अर्जुन मुंडा ने चिंता जताते हुए कहा कि शहरीकरण, खनन, बालू घोटाले और भूमि अधिग्रहण के माध्यम से आदिवासियों के जल-जंगल-जमीन और संस्कृति पर लगातार हमला हो रहा है। गगनचुंबी इमारतें बनाकर क्षेत्रों को शहरी घोषित करने का प्रयास अनुसूचित क्षेत्र की पहचान मिटाने की साजिश है।
उन्होंने कहा कि जब पूरी दुनिया नववर्ष मना रही है, तब हम शहीद वेदी पर यह संकल्प लेते हैं कि आदिवासी अधिकारों की रक्षा, जल-जंगल-जमीन के संरक्षण और संविधान प्रदत्त अधिकारों के पूर्ण क्रियान्वयन के लिए संघर्ष जारी रहेगा। सच्ची श्रद्धांजलि तभी होगी जब पेसा कानून को उसकी मूल भावना के अनुरूप पूरी तरह लागू किया जाएगा।
इस अवसर पर भाजपा नेता जेबी तुबिद, पूर्व विधायक मंगल सिंह सोय, पूर्व विधायक गुरूचरण नायक, जिप अध्यक्ष सोनाराम बोदरा, जिप सदस्य झिंगी हेम्ब्रम, भाजपा जिला अध्यक्ष उदय सिंह देव, बोबी सिंह, सुधीर मंडल, अमित कैशरी, विजय महतो, रामदास मुर्मू सहित अन्य लोग उपस्थित थे।

आदिवासी किसान मजदूर पार्टी के बैनर तले कोल्हान क्षेत्र में शहीदों को दी गई श्रद्धांजलि

आदिवासी किसान मजदूर पार्टी के बैनर तले कोल्हान क्षेत्र में शहीदों को दी गई श्रद्धांजलि

खरसावां : आज आदिवासी किसान मजदूर पार्टी के बैनर तले जिला अध्यक्ष मानसिंह तिरिया एवं सरायकेला जिला अध्यक्ष सुनील गगाराई के संयुक्त तत्वावधान में कोल्हान क्षेत्र के खरसावां, सेरेंगसिया, जगन्नाथपुर और राजाबासा में शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस अवसर पर शहीदों के अधूरे सपनों को पूरा करने का संकल्प लिया गया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मानसिंह तिरिया ने कहा कि कोल विद्रोह में शहीद हुए वीरों को याद कर उन्हें नमन किया गया। उन्होंने कहा कि 1 जनवरी को कोल्हान और 2 जनवरी को कलिंगनगर में हमारे ही आदिवासी भाइयों की निर्मम हत्या की गई थी, जिसकी हम कड़ी निंदा करते हैं। अंग्रेजों ने 1 और 2 जनवरी को आदिवासियों की हत्या कर इसे अपने लिए जश्न का दिन बना लिया। इस इतिहास को जानना हर आदिवासी के लिए जरूरी है और इन दिनों को शहीद दिवस के साथ-साथ संकल्प दिवस के रूप में मनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि दुर्भाग्य है कि जिन लोगों ने आदिवासियों पर गोलियां चलाईं, आज वही खुद को आदिवासी समाज का हितैषी बता रहे हैं।
उन्होंने कोल विद्रोह के जननायक वीर शहीद पोटो हो’ का उल्लेख करते हुए कहा कि फांसी के कई वर्षों बाद उनके नाम से राजाबासा गांव की पहचान बनी, लेकिन आज उस गांव की स्थिति बेहद दयनीय है। ग्रामीण जैंतगढ़, चंपुआ और अन्य क्षेत्रों में मजदूरी कर जीवन यापन कर रहे हैं। उन्होंने सरकार से गांव को गोद लेकर विकास पर ध्यान देने की मांग की।
मानसिंह तिरिया ने बताया कि आज ही के दिन गवर्नर जनरल के राजनीतिक एजेंट कैप्टन थॉमस विल्किंसन ने हो’ दिसुम (वर्तमान कोल्हान) के महान योद्धा पोटो हो’, नारा हो’, बड़ाय हो’, पांडुवा हो’ और बोड़ेया हो’ को फांसी की सजा सुनाई थी, जबकि अन्य सहयोगी योद्धाओं को कारावास की सजा दी गई थी।
उन्होंने कहा कि हो’ विद्रोह (1820-21), महान कोल विद्रोह (1831-32) और सेरेंगसिया घाटी युद्ध (1837) के दौरान लगभग 17 वर्षों तक अंग्रेजों और हो’ आदिवासियों के बीच भीषण संघर्ष हुआ। अंग्रेज जानते थे कि यदि पोटो हो’ और उनके साथी जीवित रहे, तो वे कोल्हान में कभी स्थायी रूप से शासन नहीं कर पाएंगे। इसी कारण 1 जनवरी 1838 को जगन्नाथपुर बाजार स्थित बरगद के पेड़ पर पोटो हो’, नारा हो’ और बड़ाय हो’ को फांसी दी गई, जबकि 2 जनवरी 1838 को सेरेंगसिया गांव में पीपल के पेड़ पर बोड़ेया हो’ और पांडुवा हो’ को फांसी दी गई। इस घटना पर लंदन बोर्ड ने भी आपत्ति जताई थी।
कार्यक्रम में सरायकेला जिला अध्यक्ष सुनील गगाराई ने कहा कि 1-2 जनवरी को फांसी देना अंग्रेजों की सोची-समझी राजनीतिक साजिश थी, ताकि आदिवासी अपने इतिहास और पूर्वजों को भूलकर नए साल के जश्न में डूबे रहें।
उन्होंने आगे कहा कि देश की आजादी के बाद 1 जनवरी 1948 को सरायकेला-खरसावां रियासत के ओडिशा में विलय और अलग झारखंड राज्य की मांग को लेकर खरसावां हाट मैदान में आदिवासियों की एक बड़ी शांतिपूर्ण सभा आयोजित हुई थी, जिस पर ओडिशा पुलिस ने मशीनगन से गोलीबारी की थी।
इस कार्यक्रम में चुमरू पिंगुवा, सजान देवगम, सुनील लागुरी, मदन सिंकु, नरसिंह पुर्ती, माटा करोवा, अर्जुन मुंडा, जोसेफ मुंडा, लुकुना पुर्ती, दामू बोबोंगा, सादु मुंडा, पुष्पा मुंडा, शांति पुर्ती, सरस्वती सवैया, हीरा मुनी सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित थे।

खरसावां को फूल नहीं, खून का हिसाब चाहिए, कुआँ खोदकर हो DNA जाँच, तभी साबित होगी आदिवासी हितैषी सरकार:- धी रामहरि पेरियार

खरसावां को फूल नहीं, खून का हिसाब चाहिए, कुआँ खोदकर हो DNA जाँच, तभी साबित होगी आदिवासी हितैषी सरकार:- धी रामहरि पेरियार

चाईबासा : एंटी करप्शन ऑफ इंडिया के प्रदेश अध्यक्ष सह लोकसभा एवं विधानसभा प्रत्याशी रहे धी. रामहरि पेरियार ने गुरुवार को सरायकेला–खरसावां जिला अंतर्गत खरसावां स्थित शहीद स्थल पर पहुँचकर खरसावां गोलीकांड के शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की।
इस अवसर पर उन्होंने कहा कि खरसावां गोलीकांड में 35 शहीदों पर सरकारी मुहर लगी, लेकिन आजादी के 77 वर्षों बाद भी सिर्फ 2 परिवारों को ही सरकारी संवेदना मिली। शेष 33 शहीद आज भी सरकारी ताले में बंद हैं। यह कोई प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि एक सुनियोजित साजिश है, आदिवासी शहादत को इतिहास से मिटाने की साजिश।
       धी. पेरियार ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि वर्तमान अबुआ सरकार वास्तव में आदिवासी हितैषी है, तो केवल मंच से भाषण देने, पुष्प अर्पित करने और औपचारिक संवेदना जताने से काम नहीं चलेगा। सरकार को खरसावां शहीद स्थल का कुआँ खुदवाकर सभी अस्थियों को बाहर निकालना होगा, DNA जाँच करानी होगी और शहीदों की पहचान कर उनके वास्तविक परिजनों तक पहुँचना होगा। तभी यह सरकार आदिवासियों की उम्मीदों की सरकार कही जाएगी।
        उन्होंने कहा कि खरसावां कोई प्रतीकात्मक स्मारक नहीं, बल्कि आदिवासी अस्मिता, संघर्ष और बलिदान का रक्तरंजित इतिहास है। जब तक 33 अज्ञात शहीदों के नाम उजागर नहीं होते, उनके परिवारों को न्याय, सम्मान और अधिकार नहीं मिलता, तब तक हर सरकार कटघरे में खड़ी रहेगी।
      धी. रामहरि पेरियार ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि खरसावां को फूल नहीं, खून का हिसाब चाहिए।
अब समय आ गया है कि अबुआ सरकार सच्चाई से भागना बंद करे और ऐतिहासिक अन्याय को स्वीकार कर उसे सुधारने की दिशा में ठोस कदम उठाए।
      उन्होंने मांग की कि राज्य सरकार अविलंब एक स्वतंत्र उच्चस्तरीय जांच समिति का गठन करे, DNA परीक्षण की प्रक्रिया शुरू करे और शहीद परिवारों को शहीद का दर्जा, मुआवजा तथा सामाजिक सम्मान सुनिश्चित करे।

खरसावां शहीद दिवस पर मुख्यमंत्री का बड़ा ऐलान

खरसावां शहीद दिवस पर मुख्यमंत्री का बड़ा ऐलान

खरसावां : खरसावां शहीद दिवस के अवसर पर आयोजित श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने खरसावां गोलीकांड के शहीदों को लेकर महत्वपूर्ण घोषणा की। उन्होंने कहा कि जिस तरह गुवा गोलीकांड के शहीदों की पहचान कर उन्हें सम्मानित किया गया, उसी तर्ज पर खरसावां गोलीकांड के शहीदों की भी पहचान की जाएगी और अगले वर्ष इसी मंच से उन्हें सम्मान दिया जाएगा।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने शहीद वेदी पर पहुंचकर वीर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि जहां पूरी दुनिया में नया साल उत्सव के रूप में मनाया जाता है, वहीं खरसावां में यह दिन शहीद दिवस के रूप में मनाया जाता है। जब लोग जश्न मना रहे होते हैं, तब खरसावां में शहीदों को नमन किया जाता है।
उन्होंने कहा कि झारखंड का शहीदी इतिहास अत्यंत गौरवपूर्ण और संघर्षपूर्ण रहा है। आदिवासी समाज ने अपनी जमीन, जंगल और संसाधनों की रक्षा के लिए लंबे संघर्ष किए हैं। इस दौरान कई लोगों ने अपने प्राणों की आहुति दी और कई ने जेलों में यातनाएं सहीं।
मुख्यमंत्री ने खरसावां गोलीकांड को आजादी के बाद की सबसे दर्दनाक घटनाओं में से एक बताया। उन्होंने कहा कि जब देश आजादी का जश्न मना रहा था, उसी समय खरसावां में निर्दोष लोगों पर गोलियां चलाई गईं। उन्होंने कहा कि हमें उन वीर सपूतों पर गर्व है जिन्होंने कभी हार नहीं मानी।
मुख्यमंत्री ने संथाल परगना आंदोलन, बिरसा मुंडा के संघर्ष सहित अन्य आंदोलनों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन सभी आंदोलनों का उद्देश्य अपनी पहचान, संस्कृति और संसाधनों की रक्षा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार शहीदों की पहचान कर उन्हें सम्मान देने के लिए प्रतिबद्ध है और यह कार्य सरकार की प्राथमिकता में शामिल है।

खरसावां शहीद दिवस पर सांसद कालीचरण मुंडा ने शहीदों को दी श्रद्धांजलि

खरसावां शहीद दिवस पर सांसद कालीचरण मुंडा ने शहीदों को दी श्रद्धांजलि

खरसावां : खरसावां शहीद दिवस के अवसर पर खूंटी लोकसभा क्षेत्र के सांसद कालीचरण मुंडा खरसावां शहीद स्थल पहुंचे और वीर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने शहीद स्मारक पर पुष्प अर्पित कर नमन किया और शहीदों के बलिदान को झारखंड के इतिहास का स्वर्णिम अध्याय बताया।

इस मौके पर सांसद कालीचरण मुंडा ने कहा कि खरसावां के शहीदों का बलिदान कभी भुलाया नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि शहीदों की कुर्बानियों से झारखंड की अस्मिता और पहचान को मजबूती मिली है। उन्होंने युवाओं से शहीदों के संघर्ष और त्याग से प्रेरणा लेने की अपील की।

श्रद्धांजलि कार्यक्रम में स्थानीय जनप्रतिनिधि, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि, बुद्धिजीवी वर्ग और बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे। सभी ने दो मिनट का मौन रखकर शहीदों को श्रद्धांजलि दी और उनके आदर्शों पर चलने का संकल्प लिया।

1 जनवरी से चक्रधरपुर रेल मंडल में तीन नई मेमू ट्रेनों का परिचालन शुरू

1 जनवरी से चक्रधरपुर रेल मंडल में तीन नई मेमू ट्रेनों का परिचालन शुरू

चक्रधरपुर : चक्रधरपुर रेल मंडल के अंतर्गत यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए 1 जनवरी से कई नई मेमू ट्रेनों का परिचालन शुरू किया जा रहा है। इसके तहत टाटानगर–चाईबासा, टाटानगर–चाकुलिया और हावड़ा–पुरुलिया रेलखंड पर एक-एक जोड़ी नई मेमू ट्रेनें चलाई जाएंगी।
टाटानगर–चाईबासा के बीच मेमू ट्रेन संख्या 68137 टाटानगर से रात 8:55 बजे प्रस्थान कर रात 11:00 बजे चाईबासा पहुंचेगी। वापसी में ट्रेन संख्या 68138 चाईबासा से सुबह 3:20 बजे रवाना होकर सुबह 5:45 बजे टाटानगर पहुंचेगी।
टाटानगर–चाकुलिया के बीच भी एक जोड़ी नई मेमू ट्रेन का संचालन किया जाएगा। ट्रेन संख्या 68128 रविवार को छोड़कर प्रतिदिन सुबह 11:00 बजे टाटानगर से प्रस्थान कर दोपहर 12:45 बजे चाकुलिया पहुंचेगी। वहीं ट्रेन संख्या 68127 शनिवार को छोड़कर प्रतिदिन दोपहर 3:00 बजे चाकुलिया से रवाना होकर शाम 5:00 बजे टाटानगर पहुंचेगी।
इसके अलावा हावड़ा–पुरुलिया रेलखंड पर भी 1 जनवरी से नई मेमू ट्रेन चलाई जाएगी। हावड़ा–पुरुलिया मेमू शुक्रवार को छोड़कर प्रतिदिन शाम 4:15 बजे हावड़ा से प्रस्थान कर रात 11:55 बजे पुरुलिया पहुंचेगी। वहीं पुरुलिया–हावड़ा मेमू शनिवार को छोड़कर प्रतिदिन सुबह 11:40 बजे पुरुलिया से रवाना होकर अगले दिन सुबह 4:00 बजे हावड़ा पहुंचेगी।

खरसावां शहीद दिवस की तैयारियों की समीक्षा, उपायुक्त व एसपी ने किया स्थल निरीक्षण

खरसावां शहीद दिवस की तैयारियों की समीक्षा, उपायुक्त व एसपी ने किया स्थल निरीक्षण

खरसावां : आगामी 1 जनवरी 2026 को खरसावां शहीद स्थल पर आयोजित होने वाले शहीद दिवस कार्यक्रम को लेकर जिला प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। कार्यक्रम में राज्य के मुख्यमंत्री, भारत सरकार के पूर्व केंद्रीय मंत्री सहित कई मंत्री एवं विधायकगण के संभावित आगमन के मद्देनज़र उपायुक्त सरायकेला–खरसावां श्री नितिश कुमार सिंह एवं पुलिस अधीक्षक श्री मुकेश कुमार लुणायत ने संयुक्त रूप से शहीद पार्क, पीडब्ल्यूडी गेस्ट हाउस तथा अर्जुना स्टेडियम परिसर में निर्माणाधीन हेलीपैड सहित अन्य महत्वपूर्ण स्थलों का निरीक्षण किया।
निरीक्षण के दौरान गेस्ट हाउस एवं हेलीपैड से जुड़े लंबित कार्यों को निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूर्ण करने का निर्देश संबंधित एजेंसियों को दिया गया। साथ ही कार्यक्रम के दौरान विधि-व्यवस्था, यातायात प्रबंधन एवं सुचारू संचालन सुनिश्चित करने के लिए संबंधित पदाधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।
प्रशासन ने सभा स्थल पर समतलीकरण, पेयजल, शौचालय, जूता-चप्पल स्टैंड सहित अन्य आधारभूत सुविधाओं की समयबद्ध व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा। इसके अलावा आगमन-प्रस्थान मार्गों एवं यातायात व्यवस्था को लेकर भी विस्तार से चर्चा की गई।
इस अवसर पर परियोजना निदेशक आईटीडीए सह उप विकास आयुक्त सुश्री रीना हांसदा, डीआरडीए निदेशक श्री अजय तिर्की, अपर उपायुक्त श्री जयवर्धन कुमार, सिविल सर्जन डॉ. सरजू प्रसाद सिंह सहित विभिन्न विभागों के वरीय पदाधिकारी उपस्थित रहे।

खरसावां शहीद दिवस को लेकर यातायात व्यवस्था में बदलाव, कई मार्गों पर नो एंट्री लागू

खरसावां शहीद दिवस को लेकर यातायात व्यवस्था में बदलाव, कई मार्गों पर नो एंट्री लागू

सरायकेला : खरसावां शहीद दिवस कार्यक्रम के अवसर पर झारखंड के मुख्यमंत्री के आगमन को लेकर सरायकेला-खरसावां जिला प्रशासन द्वारा यातायात व्यवस्था को सुचारु एवं सुरक्षित बनाए रखने हेतु कुछ मार्गों पर नो एंट्री के निर्देश जारी किए गए हैं।
जारी निर्देशों के अनुसार, सरायकेला से खरसावां जाने वाले मार्ग पर बिरसा चौक (सरायकेला), पांड्राशाली से खरसावां मार्ग पर पांड्राशाली चौक, कुचाई से खरसावां मार्ग पर कुचाई चौक, सीनी से खरसावां मार्ग पर सीनी चौक तथा खरसावां से रड़गांव जाने वाले मार्ग पर हुडंगदा पिकेट के समीप नो एंट्री लागू रहेगी।
इन सभी मार्गों पर 31 दिसंबर 2025 की रात 9:00 बजे से 1 जनवरी 2026 की रात 8:00 बजे तक सभी प्रकार के व्यावसायिक (बड़े) वाहनों का परिचालन पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगा।
यह जानकारी जिला परिवहन पदाधिकारी द्वारा जारी की गई है।

खरसावां शहीद दिवस: मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन होंगे मुख्य अतिथि

खरसावां शहीद दिवस: मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन होंगे मुख्य अतिथि

रांची : शहीद स्मारक समिति, खरसावां के एक प्रतिनिधिमंडल ने विधायक दशरथ गागराई के नेतृत्व में झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मुलाकात कर आगामी 1 जनवरी 2026 को खरसावां में आयोजित शहीद दिवस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होने का आधिकारिक निमंत्रण सौंपा। मुख्यमंत्री ने निमंत्रण स्वीकार करते हुए कार्यक्रम में शामिल होने की सहमति दी।

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन हर वर्ष खरसावां गोलीकांड के शहीदों को श्रद्धांजलि देने के लिए खरसावां आते हैं। इस अवसर पर उनकी पत्नी एवं गांडेय की विधायक कल्पना सोरेन सहित अन्य मंत्री और विधायक भी उपस्थित रह सकते हैं।

कार्यक्रम के शांतिपूर्ण और सुव्यवस्थित आयोजन को लेकर जिला प्रशासन और शहीद स्मारक समिति द्वारा तैयारियां तेज कर दी गई हैं।