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खरसावां को फूल नहीं, खून का हिसाब चाहिए, कुआँ खोदकर हो DNA जाँच, तभी साबित होगी आदिवासी हितैषी सरकार:- धी रामहरि पेरियार

खरसावां को फूल नहीं, खून का हिसाब चाहिए, कुआँ खोदकर हो DNA जाँच, तभी साबित होगी आदिवासी हितैषी सरकार:- धी रामहरि पेरियार

चाईबासा : एंटी करप्शन ऑफ इंडिया के प्रदेश अध्यक्ष सह लोकसभा एवं विधानसभा प्रत्याशी रहे धी. रामहरि पेरियार ने गुरुवार को सरायकेला–खरसावां जिला अंतर्गत खरसावां स्थित शहीद स्थल पर पहुँचकर खरसावां गोलीकांड के शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की।
इस अवसर पर उन्होंने कहा कि खरसावां गोलीकांड में 35 शहीदों पर सरकारी मुहर लगी, लेकिन आजादी के 77 वर्षों बाद भी सिर्फ 2 परिवारों को ही सरकारी संवेदना मिली। शेष 33 शहीद आज भी सरकारी ताले में बंद हैं। यह कोई प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि एक सुनियोजित साजिश है, आदिवासी शहादत को इतिहास से मिटाने की साजिश।
       धी. पेरियार ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि वर्तमान अबुआ सरकार वास्तव में आदिवासी हितैषी है, तो केवल मंच से भाषण देने, पुष्प अर्पित करने और औपचारिक संवेदना जताने से काम नहीं चलेगा। सरकार को खरसावां शहीद स्थल का कुआँ खुदवाकर सभी अस्थियों को बाहर निकालना होगा, DNA जाँच करानी होगी और शहीदों की पहचान कर उनके वास्तविक परिजनों तक पहुँचना होगा। तभी यह सरकार आदिवासियों की उम्मीदों की सरकार कही जाएगी।
        उन्होंने कहा कि खरसावां कोई प्रतीकात्मक स्मारक नहीं, बल्कि आदिवासी अस्मिता, संघर्ष और बलिदान का रक्तरंजित इतिहास है। जब तक 33 अज्ञात शहीदों के नाम उजागर नहीं होते, उनके परिवारों को न्याय, सम्मान और अधिकार नहीं मिलता, तब तक हर सरकार कटघरे में खड़ी रहेगी।
      धी. रामहरि पेरियार ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि खरसावां को फूल नहीं, खून का हिसाब चाहिए।
अब समय आ गया है कि अबुआ सरकार सच्चाई से भागना बंद करे और ऐतिहासिक अन्याय को स्वीकार कर उसे सुधारने की दिशा में ठोस कदम उठाए।
      उन्होंने मांग की कि राज्य सरकार अविलंब एक स्वतंत्र उच्चस्तरीय जांच समिति का गठन करे, DNA परीक्षण की प्रक्रिया शुरू करे और शहीद परिवारों को शहीद का दर्जा, मुआवजा तथा सामाजिक सम्मान सुनिश्चित करे।