चाईबासा | पश्चिमी सिंहभूम जिला समाहरणालय स्थित प्रकोष्ठ में उपायुक्त मनीष कुमार की अध्यक्षता में बैंक ऑफ इंडिया ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (BOI-RSETI) द्वारा संचालित विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रमों की समीक्षात्मक बैठक आयोजित की गई। बैठक में उप विकास आयुक्त उत्कर्ष कुमार, अग्रणी जिला बैंक प्रबंधक तथा आरसेटी निदेशक सहित अन्य संबंधित पदाधिकारी उपस्थित रहे।
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बैठक के दौरान जानकारी दी गई कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में विभिन्न ट्रेडों के तहत 909 ग्रामीण युवक-युवतियों को प्रशिक्षण प्रदान किया गया है। वहीं, वर्ष 2026-27 में प्रशिक्षण आधारित दो बैचों का प्रशिक्षण पूर्ण हो चुका है तथा एक बैच वर्तमान में संचालित है। समीक्षा के क्रम में उपायुक्त ने निर्देश दिया कि केंद्र के बाहर संचालित प्रशिक्षण कार्यक्रमों के तहत जिले के मंडल कारा में चार बैचों के माध्यम से फिनायल एवं पेपर कप निर्माण, मशरूम उत्पादन तथा फास्ट फूड निर्माण से संबंधित प्रशिक्षण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि इससे जेल से बाहर आने के बाद बंदियों को सम्मानजनक आजीविका प्राप्त करने में सहायता मिलेगी।
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उपायुक्त ने यह भी निर्देशित किया कि प्रशिक्षण केंद्र से प्रशिक्षण प्राप्त कर जीविकोपार्जन के क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन कर रही जेएसएलपीएस की दीदियों की सूची तैयार की जाए। साथ ही, प्रशिक्षण सत्रों के दौरान उनकी उपस्थिति सुनिश्चित कराते हुए नए प्रशिक्षुओं के बीच उनके अनुभव साझा कराए जाएं, ताकि अन्य लोग भी प्रेरित हो सकें।
बैठक में उपायुक्त ने प्रशिक्षण केंद्र में उपलब्ध सुविधाओं, प्रशिक्षुओं के लिए आवासन व्यवस्था, भोजन की गुणवत्ता एवं अन्य व्यवस्थाओं की भी समीक्षा की। उन्होंने अधिकाधिक ग्रामीण क्षेत्रों के 18 से 45 वर्ष आयु वर्ग के युवक-युवतियों को रोजगारपरक प्रशिक्षण से जोड़ने पर जोर देते हुए ब्यूटी पार्लर, सिलाई, कंप्यूटर, सीसीटीवी इंस्टॉलेशन सहित अन्य तकनीकी कौशल आधारित प्रशिक्षण उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
चाईबासा | पश्चिमी सिंहभूम जिला समाहरणालय सभागार में सिंहभूम सांसद जोबा माझी की अध्यक्षता में जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति (दिशा) की बैठक आयोजित की गई। बैठक का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। इस अवसर पर अतिथियों का पारंपरिक रूप से शॉल ओढ़ाकर तथा पौधा एवं वेजिटेबल बास्केट भेंट कर स्वागत किया गया। बैठक में केंद्र एवं राज्य सरकार की विभिन्न विकास योजनाओं की प्रगति, लंबित कार्यों, बुनियादी सुविधाओं तथा जनसमस्याओं की विस्तार से समीक्षा की गई। सांसद जोबा माझी ने कहा कि योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे, यह सुनिश्चित करना सभी अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी है। उन्होंने पिछली बैठक में दिए गए निर्देशों के अनुपालन की समीक्षा करते हुए सभी कार्यों को निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा करने का निर्देश दिया।
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समीक्षा के दौरान कौशल विकास केंद्रों के माध्यम से अधिक से अधिक लोगों को रोजगारपरक प्रशिक्षण उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया। कल्याण विभाग को सामुदायिक वन पट्टा वितरण, एकलव्य विद्यालयों में पेयजल व्यवस्था सुनिश्चित करने तथा प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के निर्देश दिए गए। वहीं, वन विभाग को एलीफेंट अलर्ट सिस्टम एवं हाईमास्ट लाइट लगाने की दिशा में कार्य तेज करने को कहा गया।
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बैठक में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना एवं मुख्यमंत्री ग्राम सड़क सुदृढ़ीकरण योजना के तहत सड़कों की मरम्मत, पेयजल संकट को देखते हुए चापाकलों की मरम्मत, जलमीनारों के संचालन तथा बंद पड़ी ग्रामीण जलापूर्ति योजनाओं को पुनः चालू करने पर भी जोर दिया गया। चक्रधरपुर एवं जगन्नाथपुर में जर्जर पानी टंकियों के सुरक्षित निस्तारण के निर्देश भी दिए गए। इसके अलावा पंचायत स्तर पर योजनाओं की मॉनिटरिंग, जिला परिषद की निर्माणाधीन योजनाओं को शीघ्र पूर्ण करने, नवोदय विद्यालय नामांकन प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने, तांतनगर में फार्मेसिस्ट कॉलेज संचालन तथा नवजात शिशुओं के स्वास्थ्य निरीक्षण को लेकर भी दिशा-निर्देश जारी किए गए। बैठक में मोबाइल कनेक्टिविटी, भूमिहीन परिवारों को आवास हेतु भूमि उपलब्ध कराने, पशुपालन योजनाओं के लाभुकों को प्रशिक्षण देने तथा बिजली व्यवस्था को सुचारू रखने पर भी चर्चा हुई। उपायुक्त मनीष कुमार ने बताया कि आपदा से संबंधित लंबित मुआवजा मामलों में कार्रवाई जारी है। उन्होंने कहा कि आंधी-तूफान एवं बारिश से प्रभावित लोगों को त्वरित राहत उपलब्ध कराने तथा सभी स्वास्थ्य केंद्रों में सर्पदंश से निपटने के लिए एंटीवेनम उपलब्ध रखने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने यह भी बताया कि जिले में जैक बोर्ड परीक्षा परिणाम में सुधार हुआ है तथा ब्लड बैंक लाइसेंस एवं होमगार्ड प्रशिक्षण को लेकर आवश्यक कार्रवाई की जा रही है।
बैठक में मिशन वात्सल्य योजना के तहत एकल अभिभावक वाले बच्चों को स्पॉन्सरशिप योजना से जोड़ने की अपील की गई। योजना के तहत बच्चों को 18 वर्ष की आयु तक प्रतिमाह चार हजार रुपये की सहायता प्रदान की जाती है। लाभुकों के बीच परिसंपत्तियों का वितरण बैठक के दौरान विभिन्न योजनाओं के लाभुकों के बीच आवास योजना के डमी चेक, प्रेशर कुकर, साइकिल, सामुदायिक वन पट्टा, खेल किट, स्कूल बैग, किताबें, मत्स्य विपणन किट, ट्रैक्टर एवं कृषि उपकरण, एचपीवी वैक्सीनेशन प्रमाण पत्र सहित अन्य सामग्री वितरित की गई। साथ ही जैक बोर्ड परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्र-छात्राओं को सम्मानित किया गया। जागरूकता रथों को दिखाई गई हरी झंडी बैठक के उपरांत अतिथियों ने पोषण, जनगणना, आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन, टीबी मुक्त भारत, एचपीवी वैक्सीनेशन, रक्तदान, पेयजल एवं स्वच्छता तथा जेएसएलपीएस के प्रोजेक्ट बदलाव से संबंधित जागरूकता रथों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। समाहरणालय परिसर में विभिन्न विभागों द्वारा लगाए गए स्टॉलों का निरीक्षण भी किया गया। बैठक में कालीचरण मुंडा, निरल पुरती, सुखराम उरांव, सोनाराम सिंकु, जगत माझी सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।
चक्रधरपुर | पश्चिमी सिंहभूम जिले के जगन्नाथपुर प्रखंड की सात युवतियों को चक्रधरपुर पुलिस ने समय रहते रेस्क्यू कर सुरक्षित उनके घर पहुंचाया। बताया गया कि सभी युवतियां रोजगार की तलाश में दूसरे प्रदेश जाने के लिए निकली थीं। जानकारी के अनुसार, रेलवे स्टेशन परिसर में चक्रधरपुर थाना प्रभारी अवधेश कुमार की नजर इन युवतियों पर पड़ी। संदेह होने पर उन्होंने सभी से पूछताछ की। पूछताछ के दौरान युवतियों ने बताया कि वे मजदूरी एवं रोजगार की तलाश में बाहर जाने की तैयारी में थीं।
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इसके बाद थाना प्रभारी ने युवतियों को बाहर काम करने के दौरान संभावित जोखिमों, मानव तस्करी तथा अन्य प्रकार के शोषण से जुड़े खतरों के प्रति जागरूक किया। पुलिस की पहल पर सभी युवतियों को टाटा मैजिक वाहन से सुरक्षित उनके घर वापस भेज दिया गया।
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थाना प्रभारी की इस मानवीय एवं संवेदनशील पहल की क्षेत्र में सराहना की जा रही है। गौरतलब है कि पश्चिमी सिंहभूम समेत आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में युवक-युवतियां रोजगार की तलाश में दूसरे राज्यों की ओर पलायन करते हैं। ऐसे मामलों में कई बार नाबालिग बच्चियों और युवतियों के मानव तस्करी तथा शोषण का शिकार होने की आशंका बनी रहती है। ऐसे में पुलिस द्वारा समय रहते की गई यह कार्रवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
दिल्ली | दिल्ली की राजनीति में एक बार फिर बड़ा कानूनी और राजनीतिक मोड़ सामने आया है। एक्साइज पॉलिसी केस से जुड़े सोशल मीडिया पोस्ट और सार्वजनिक बयानों को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट ने मुख्यमंत्री Arvind Kejriwal समेत आम आदमी पार्टी (AAP) के कई नेताओं के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्रवाई शुरू की है।
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अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि न्यायपालिका के खिलाफ सुनियोजित तरीके से माहौल बनाने और जनता के बीच अदालत की निष्पक्षता पर सवाल खड़े करने का प्रयास किया गया। इस मामले में Manish Sisodia, Sanjay Singh, Saurabh Bharadwaj और Vinay Mishra के नाम भी शामिल हैं।
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कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि न्यायिक फैसलों की आलोचना लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन न्यायपालिका की छवि खराब करने या अदालत की निष्पक्षता पर अविश्वास पैदा करने वाला अभियान गंभीर मामला माना जाएगा।
इस घटनाक्रम के बाद राजनीति के साथ-साथ न्यायपालिका की गरिमा, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और उसकी सीमाओं को लेकर नई बहस छिड़ गई है। आने वाले दिनों में इस मामले की सुनवाई और अदालत की टिप्पणियों पर देशभर की नजरें टिकी रहेंगी।
नई दिल्ली | सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर गुरुवार को अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि वर्तमान व्यवस्था में कार्यपालिका का अत्यधिक नियंत्रण दिखाई देता है, जो लोकतंत्र के लिए चिंता का विषय हो सकता है। अदालत ने सवाल उठाया कि निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने वाली संस्था के चयन में किसी स्वतंत्र सदस्य को शामिल क्यों नहीं किया गया है।
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सुप्रीम कोर्ट मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया से जुड़े मामले की सुनवाई कर रहा था। सुनवाई के दौरान जस्टिस दीपांकर दत्ता ने कहा कि केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) के निदेशक के चयन में भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) चयन समिति का हिस्सा होते हैं, लेकिन चुनाव आयोग के प्रमुख की नियुक्ति में उन्हें शामिल नहीं किया जाता। जस्टिस दत्ता ने कहा, “CBI निदेशक की नियुक्ति में CJI शामिल होते हैं। इसे कानून-व्यवस्था बनाए रखने या कानून के शासन से जोड़कर देखा जा सकता है। लेकिन लोकतंत्र को बनाए रखने और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए ऐसा क्यों नहीं होना चाहिए?”
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उन्होंने आगे कहा कि अदालत यह नहीं कह रही कि चयन समिति में CJI को ही शामिल किया जाए, लेकिन किसी स्वतंत्र सदस्य की मौजूदगी आवश्यक होनी चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि तीसरा सदस्य मंत्रालय से ही क्यों होना चाहिए। जस्टिस दत्ता ने कहा, “आज प्रधानमंत्री एक सदस्य चुनते हैं और विपक्ष के नेता (LoP) दूसरे सदस्य को चुनते हैं। यदि दोनों के बीच मतभेद हो, तो क्या तीसरा सदस्य विपक्ष के नेता के पक्ष में जाएगा?” इस पर अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने कहा कि वह इस विषय पर कोई अटकल नहीं लगाना चाहते और व्यावहारिक रूप से स्थिति अलग भी हो सकती है। इस पर जस्टिस दत्ता ने टिप्पणी करते हुए कहा, “तो इसका मतलब है कि कार्यपालिका ही सब कुछ कंट्रोल कर रही है।”
पीठ ने यह भी कहा कि इस प्रकार की नियुक्तियों में निर्णय व्यवहारिक रूप से 2:1 के बहुमत से होगा, क्योंकि कैबिनेट मंत्री के प्रधानमंत्री के रुख से अलग राय रखने की संभावना बेहद कम होती है। सुनवाई के दौरान जस्टिस दत्ता ने यह भी सवाल उठाया कि कार्यपालिका को “वीटो” जैसी स्थिति क्यों दी गई है। उन्होंने कहा कि संसद के पास कानून बनाने का अधिकार है, लेकिन कानूनों की अंतिम व्याख्या करने का अधिकार सुप्रीम कोर्ट के पास ही रहेगा। उन्होंने कहा, “पहली नजर में हमें इस बात से परेशानी हो रही है कि कार्यपालिका को वीटो का अधिकार क्यों दिया गया है। संसद कानून बना सकती है, लेकिन कानूनों की अंतिम व्याख्या सुप्रीम कोर्ट ही करेगा।”
सरायकेला-खरसावां | उपायुक्त नितिश कुमार सिंह के निर्देशानुसार गुरुवार को जिला खनन पदाधिकारी के नेतृत्व में जिले के कुचाई थाना क्षेत्र अंतर्गत मौजा मेरोमजंगा में औचक निरीक्षण अभियान चलाया गया।
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निरीक्षण के दौरान उक्त क्षेत्र में क्वार्ट्ज/क्वार्टजाइट खनिज का अवैध उत्खनन होते पाया गया। मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित जमीन मालिक एवं अवैध खनन गतिविधियों में संलिप्त व्यक्तियों के विरुद्ध कुचाई थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई गई है।
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उपायुक्त नितिश कुमार सिंह ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि जिले में किसी भी स्थान पर खनिजों के अवैध उत्खनन, भंडारण अथवा परिवहन की गतिविधियों को किसी भी परिस्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जिला प्रशासन एवं खनन विभाग द्वारा लगातार निगरानी रखते हुए ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई की जा रही है।
जिला प्रशासन ने आमजन से अपील की है कि खनिजों के अवैध उत्खनन अथवा परिवहन से संबंधित किसी भी गतिविधि की जानकारी तत्काल प्रशासन को दें, ताकि त्वरित एवं प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
चक्रधरपुर | उपायुक्त पश्चिमी सिंहभूम, चाईबासा के मार्गदर्शन में संचालित “प्रोजेक्ट बचपन” के तहत गुरुवार को चक्रधरपुर प्रखंड के आंगनबाड़ी केंद्र कुदलीबाड़ी एवं भलियाकुदर में बाल भोज-सह-जन्मोत्सव कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के अंतर्गत मई माह में जन्मे आंगनबाड़ी केंद्रों में पंजीकृत बच्चों का सामूहिक रूप से जन्मोत्सव मनाया गया। इस दौरान बच्चों के साथ केक काटा गया और उनके लिए विशेष बाल भोज का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
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अधिकारियों ने बताया कि “प्रोजेक्ट बचपन” के तहत प्रत्येक माह की 14 तारीख को जिले के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों में इस प्रकार के कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। योजना का मुख्य उद्देश्य बच्चों में पोषण, स्वच्छता और सामाजिक सहभागिता को बढ़ावा देना है।
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इस अवसर पर पोड़ाहाट-चक्रधरपुर अनुमंडल पदाधिकारी, चक्रधरपुर अंचल अधिकारी तथा प्रखंड विकास पदाधिकारी भी उपस्थित रहे। अधिकारियों ने आंगनबाड़ी सेविकाओं को बच्चों को पौष्टिक एवं स्वच्छ भोजन उपलब्ध कराने तथा उनके स्वास्थ्य एवं पोषण पर विशेष ध्यान देने का निर्देश दिया।
रांची | झारखंड सरकार की महत्वाकांक्षी मंईयां सम्मान योजना एक बार फिर चर्चा में है। जानकारी के अनुसार योजना की अप्रैल और मई माह की सम्मान राशि अब तक लाभुक महिलाओं के खातों में नहीं पहुंच पाई है। बताया जा रहा है कि ट्रेजरी से जुड़े कथित वित्तीय गड़बड़ी और भुगतान प्रक्रिया की जांच के कारण राशि जारी होने में देरी हो रही है। इससे राज्य की हजारों महिलाओं के सामने आर्थिक परेशानी खड़ी हो गई है।
सूत्रों के मुताबिक ट्रेजरी स्तर पर भुगतान प्रक्रिया की तकनीकी और प्रशासनिक जांच जारी है। इसी वजह से योजना की राशि फिलहाल रोक दी गई है। कई जिलों की महिलाओं ने बताया कि वे इस योजना से मिलने वाली राशि का उपयोग घर खर्च, बच्चों की पढ़ाई और दैनिक जरूरतों को पूरा करने में करती हैं। लगातार दो महीने से भुगतान नहीं मिलने के कारण उन्हें कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
इधर, मामले को लेकर विपक्ष ने राज्य सरकार पर हमला बोला है। विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया है कि वित्तीय अनियमितताओं और प्रशासनिक लापरवाही का सीधा असर गरीब एवं जरूरतमंद महिलाओं पर पड़ रहा है। उनका कहना है कि सरकार को जल्द से जल्द भुगतान सुनिश्चित करना चाहिए।
वहीं राज्य सरकार की ओर से कहा गया है कि पूरे मामले की जांच की जा रही है और सभी पात्र लाभुकों को जल्द सम्मान राशि उपलब्ध करा दी जाएगी। अधिकारियों का दावा है कि जांच प्रक्रिया पूरी होते ही लंबित भुगतान जारी कर दिया जाएगा।
फिलहाल योजना से जुड़ी लाखों महिलाएं सरकार के अगले फैसले और भुगतान की तारीख का इंतजार कर रही हैं।
सरायकेला | सरायकेला-खरसावां जिले में अवैध खनन एवं खनन पट्टों में अनियमितताओं के खिलाफ जिला प्रशासन की कार्रवाई लगातार जारी है। उपायुक्त नितिश कुमार सिंह के निर्देश पर बुधवार को जिला खनन पदाधिकारी के नेतृत्व में सरायकेला अंचल के उगमा एवं राइडीह क्षेत्र में संचालित दो पत्थर खनन पट्टों का औचक निरीक्षण किया गया।
निरीक्षण के दौरान खनन पट्टों में सीमांकन, खनिज भंडारण, खनिज प्रेषण तथा पर्यावरणीय स्वीकृति के अनुपालन समेत अन्य वैधानिक प्रावधानों की गहन जांच की गई। जांच के क्रम में कई प्रकार की अनियमितताएं सामने आने पर संबंधित पट्टाधारियों के विरुद्ध विभागीय नियमानुसार नोटिस एवं मांगपत्र निर्गत करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
उपायुक्त ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया है कि जिले में अवैध खनन, खनिज भंडारण एवं परिवहन गतिविधियों पर लगातार निगरानी रखी जाए तथा नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि अवैध खनन के विरुद्ध चलाया जा रहा अभियान आगे भी निरंतर जारी रहेगा।
सरायकेला | सरायकेला की विश्वविख्यात छऊ कला के संरक्षण, कलाकारों के सम्मान और सांस्कृतिक विरासत के पुनर्जीवन को लेकर नगर पंचायत अध्यक्ष मनोज कुमार चौधरी ने झारखंड सरकार के कला, संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू से शिष्टाचार मुलाकात कर विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की।
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इस दौरान उन्होंने विभागीय सचिव मुकेश कुमार तथा कला संस्कृति निदेशक आशिक अकरम से भी मुलाकात कर सरायकेला की सांस्कृतिक धरोहरों, कलाकारों की समस्याओं और विकास से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया।
नगर पंचायत अध्यक्ष मनोज कुमार चौधरी ने कहा कि सरायकेला की छऊ नृत्य कला केवल एक सांस्कृतिक परंपरा नहीं, बल्कि पूरे झारखंड और देश की गौरवशाली पहचान है। उन्होंने कहा कि वर्षों से देश-विदेश में सम्मान प्राप्त करने वाली इस कला के संरक्षण और संवर्धन के लिए ठोस एवं दीर्घकालिक पहल की आवश्यकता है।
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मुलाकात के दौरान उन्होंने राजकीय छऊ नृत्य कला केंद्र के पुनर्जीवन एवं नियमित संचालन, छऊ नृत्य और वाद्य प्रशिक्षकों की नियुक्ति, स्थानीय कलाकारों के लिए सम्मानजनक पेंशन एवं प्रोत्साहन सुविधा उपलब्ध कराने, सरायकेला में बहुउद्देशीय कला भवन निर्माण तथा युवा पीढ़ी को पारंपरिक कलाओं से जोड़ने के लिए नियमित प्रशिक्षण एवं सांस्कृतिक गतिविधियों के विस्तार की मांग उठाई।
मनोज कुमार चौधरी ने कहा कि सरायकेला की धरती ने देश को अनेक प्रतिष्ठित छऊ कलाकार दिए हैं, जिन्होंने अपनी प्रतिभा और साधना से विश्व स्तर पर झारखंड का नाम रोशन किया है। ऐसे कलाकारों का सम्मान और उनका भविष्य सुरक्षित करना सरकार एवं समाज दोनों की जिम्मेदारी है।
इस अवसर पर नगर पंचायत अध्यक्ष ने मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू को सरायकेला की सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक पारंपरिक छऊ मुखौटा और प्रसिद्ध सरायकेला लड्डू भेंट कर सम्मानित किया। मंत्री ने भी छऊ कला की महत्ता को स्वीकार करते हुए इसके संरक्षण एवं संवर्धन के लिए सकारात्मक पहल और आवश्यक सहयोग का आश्वासन दिया।
बैठक के दौरान नगर पंचायत क्षेत्र के समग्र विकास हेतु अतिरिक्त विशेष फंड उपलब्ध कराने की मांग भी उठाई गई। मनोज कुमार चौधरी ने कहा कि ऐतिहासिक एवं जिला मुख्यालय होने के बावजूद सरायकेला आज भी कई आधारभूत समस्याओं से जूझ रहा है। पेयजल, सड़क, नाली, विद्युत व्यवस्था एवं शहरी आधारभूत सुविधाओं को मजबूत करने के लिए राज्य सरकार से विशेष सहयोग की आवश्यकता है।
इसके साथ ही उन्होंने सरायकेला क्षेत्र के प्रमुख ऐतिहासिक एवं धार्मिक पर्यटन स्थलों — श्री जगन्नाथ मंदिर, कुदरसाईं मंदिर एवं मिर्गी चिंगड़ा — के संरक्षण, सौंदर्यीकरण तथा पर्यटन मानचित्र में शामिल किए जाने की मांग भी सरकार के समक्ष रखी गई।