नई दिल्ली | प्रधानमंत्री Narendra Modi ने देशवासियों से अपील की है कि वे कम-से-कम एक वर्ष तक सोने की खरीदारी से बचें। इसी बीच केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए सोना, चांदी समेत अन्य कीमती धातुओं पर आयात शुल्क (इंपोर्ट ड्यूटी) में भारी बढ़ोतरी कर दी है। नई दरें बुधवार रात से प्रभावी हो जाएंगी।
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केंद्र सरकार द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, सोने और चांदी पर आयात शुल्क को 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया गया है। सरकार का कहना है कि यह फैसला विदेशों से कीमती धातुओं के आयात को नियंत्रित करने और देश के विदेशी मुद्रा भंडार (फॉरेन एक्सचेंज रिजर्व) पर बढ़ते दबाव को कम करने के उद्देश्य से लिया गया है।
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सरकार का मानना है कि बढ़ती वैश्विक अनिश्चितताओं और विदेशी मुद्रा पर दबाव के बीच गैर-जरूरी आयात को सीमित करना जरूरी है। आयात शुल्क बढ़ने के बाद घरेलू बाजार में सोना और चांदी महंगे होने की संभावना जताई जा रही है।
सरायकेला | अंतरराष्ट्रीय नर्स दिवस के अवसर पर मंगलवार को सदर अस्पताल परिसर में नर्सों को उनकी उत्कृष्ट सेवाओं, समर्पण और मानवता के प्रति योगदान के लिए सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में रीजनल डिप्टी डायरेक्टर (RDD), नगर पंचायत अध्यक्ष मनोज कुमार चौधरी, सिविल सर्जन, सदर अस्पताल के उपाधीक्षक सहित बड़ी संख्या में नर्सें एवं स्वास्थ्यकर्मी उपस्थित रहे।
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कार्यक्रम की शुरुआत अतिथियों के स्वागत के साथ हुई। इसके बाद नर्सों ने मोमबत्ती प्रज्वलित कर सामूहिक रूप से सेवा की शपथ दोहराई। इस अवसर पर केक काटकर अंतरराष्ट्रीय नर्स दिवस की खुशियां भी साझा की गईं।
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RDD ने अपने संबोधन में कहा कि नर्सें स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ होती हैं और मरीजों की सेवा में उनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। वहीं नगर पंचायत अध्यक्ष मनोज कुमार चौधरी ने कोरोना काल में नर्सों के योगदान को याद करते हुए उन्हें सच्चा कोरोना योद्धा बताया।
सिविल सर्जन ने कहा कि मरीजों के प्रति संवेदनशील व्यवहार और सेवा भाव ही स्वास्थ्य सेवा का सबसे बड़ा दायित्व है। सदर अस्पताल के उपाधीक्षक ने भी नर्सों की सेवा भावना, कर्तव्यनिष्ठा और समर्पण की सराहना की। कार्यक्रम में बिंदिया कुजूर, प्रमिला रोबोट, प्रसादी खेत, अलका प्रधान, नीलम सोरेन, सुनीता शर्मा, सीमा महतो, सुजाता महतो, चिंता कुमारी, रश्मि लकड़ा सहित कई नर्सें एवं स्वास्थ्यकर्मी उपस्थित रहे।
काठमांडू | नेपाल की राजधानी काठमांडू स्थित त्रिभुवन अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर रविवार को एक बड़ा विमान हादसा टल गया। इस्तांबुल से काठमांडू आ रही तुर्की एयरलाइंस की फ्लाइट टीके-726 के लैंडिंग के दौरान विमान के टायर में अचानक आग लग गई। घटना के बाद एयरपोर्ट परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया, हालांकि दमकल कर्मियों की तत्परता से आग पर समय रहते काबू पा लिया गया। जानकारी के अनुसार, विमान में कुल 289 लोग सवार थे, जिनमें 278 यात्री और 11 चालक दल के सदस्य शामिल थे। राहत की बात यह रही कि सभी यात्रियों और क्रू मेंबर्स को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया और किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है।
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एयरपोर्ट सुरक्षा मामलों के एसपी राजकुमार सिलावल ने एएनआई से बातचीत में बताया कि तुर्की एयरलाइंस का विमान इस्तांबुल से काठमांडू पहुंचा था। लैंडिंग के दौरान विमान के टायर में आग लग गई, जिसके बाद तत्काल दमकल टीम को मौके पर भेजा गया। उन्होंने कहा कि आग पर पूरी तरह काबू पा लिया गया है और सभी यात्रियों को सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया गया।
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अधिकारियों के मुताबिक, विमान में संयुक्त राष्ट्र (यूएन) के कुछ अधिकारी भी सवार थे। सभी यात्रियों को सुरक्षित तरीके से विमान से बाहर निकाला गया और स्थिति को जल्द नियंत्रित कर लिया गया।
गौरतलब है कि पिछले कुछ समय में दुनिया भर में विमान हादसों और तकनीकी खराबी की घटनाओं में बढ़ोतरी देखी गई है। ऐसे में एयरपोर्ट प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां लगातार सतर्क मोड में काम कर रही हैं, ताकि किसी भी आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके।
नई दिल्ली | केंद्र सरकार ने विदेशी निवेश से जुड़े नियमों में एक महत्वपूर्ण बदलाव करते हुए बड़ा फैसला लिया है। वित्त मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, अब उन विदेशी कंपनियों को भी भारत में निवेश की अनुमति दी गई है, जिनमें चीन की हिस्सेदारी 10 प्रतिशत तक है।
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इस नए प्रावधान के तहत ऐसी कंपनियां फेमा (Foreign Exchange Management Act) के अंतर्गत ऑटोमैटिक रूट के जरिए भारत में निवेश कर सकेंगी। इससे पहले चीन से जुड़े निवेश पर कड़े प्रतिबंध लागू थे और अधिकांश मामलों में सरकारी मंजूरी आवश्यक होती थी।
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सरकार का यह फैसला 1 मई 2026 से प्रभावी हो गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से भारत में विदेशी निवेश को बढ़ावा मिलेगा और कई क्षेत्रों में पूंजी प्रवाह तेज हो सकता है।
जमशेदपुर | पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और मिडल ईस्ट में बढ़ती अस्थिरता का असर अब झारखंड के सड़क निर्माण कार्यों पर स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के कारण खाड़ी देशों से आने वाली बिटुमिनस (अलकतरा) की आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिससे इसकी कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया है। राज्य के कई हिस्सों, विशेषकर जमशेदपुर और पूर्वी सिंहभूम जिले में सड़क निर्माण की नई परियोजनाएं लगभग ठप हो गई हैं। बढ़ती लागत के कारण ठेकेदारों ने कार्य जारी रखने में असमर्थता जताई है।
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दामों में भारी उछाल, बजट से बाहर हुआ निर्माण सड़क निर्माण में उपयोग होने वाला प्रमुख कच्चा माल बिटुमिनस अब काफी महंगा हो चुका है। कुछ महीने पहले इसकी कीमत 40,000 से 50,000 रुपये प्रति टन के बीच थी, जो अब बढ़कर 61,000 से 1,00,000 रुपये प्रति टन तक पहुंच गई है। तकनीकी रूप से, एक किलोमीटर सड़क निर्माण में कुल सामग्री का लगभग 5 से 8 प्रतिशत हिस्सा बिटुमिनस का होता है। हालांकि, मौजूदा कीमतों ने प्रति किलोमीटर लागत को इतना बढ़ा दिया है कि पुराने टेंडर रेट पर काम करना ठेकेदारों के लिए घाटे का सौदा साबित हो रहा है। नई परियोजनाओं पर लगा ब्रेक जमशेदपुर पथ प्रमंडल के कार्यपालक पदाधिकारी दीपक सहाय के अनुसार, फिलहाल मरम्मत कार्य किसी तरह जारी है, लेकिन नई परियोजनाओं की शुरुआत नहीं हो पा रही है। हाल ही में टेंडर प्राप्त करने वाले कई संवेदकों ने कार्य शुरू करने से इनकार कर दिया है।
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ठेकेदारों का कहना है कि मौजूदा बाजार दरों पर कच्चा माल खरीदकर परियोजनाओं को पूरा करना संभव नहीं है। उन्होंने विभाग से कम से कम एक महीने की मोहलत मांगी है, ताकि अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति सामान्य हो सके। NHAI के लक्ष्यों पर भी असर रांची स्थित राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के परियोजना निदेशक विजय कुमार ने भी स्थिति को गंभीर बताया है। उनके अनुसार, युद्ध जैसे हालात के चलते लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन पर गहरा असर पड़ा है।
विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर बढ़ते जोखिम के कारण मालवाहक जहाजों का किराया और बीमा लागत बढ़ गई है, जिसका सीधा प्रभाव बिटुमिनस की कीमतों पर पड़ा है। आगे की स्थिति विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हालात जल्द नहीं सुधरे, तो झारखंड में सड़क निर्माण की रफ्तार लंबे समय तक प्रभावित रह सकती है। इसका असर न केवल इंफ्रास्ट्रक्चर विकास पर पड़ेगा, बल्कि रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी नकारात्मक प्रभाव देखने को मिल सकता है।
बैंकॉक | बैंकॉक में 29 मार्च से 5 अप्रैल 2026 तक आयोजित वर्ल्ड पैरा आर्चरी सीरीज 2026 (लेग-1) में भारतीय तीरंदाजी टीम ने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए देश का नाम रोशन किया। इस प्रतियोगिता में पहली बार भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व करते हुए विजय सुन्डी ने ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की।
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पुरुष वर्ग के रिकर्व राउंड टीम इवेंट में विजय सुन्डी और हरविंदर सिंह की जोड़ी ने फाइनल मुकाबले में चाइनीज ताइपे को 6-2 अंकों से हराकर स्वर्ण पदक जीता।
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वहीं मिक्स टीम इवेंट में विजय सुन्डी और भावना की जोड़ी ने कांस्य पदक अपने नाम किया। फाइनल ब्रॉन्ज मुकाबले में स्लोवेनिया के खिलाफ मुकाबला 4-4 से बराबरी पर रहा, जिसके बाद शूट-ऑफ में भारत ने 10.9 अंक हासिल किए, जबकि स्लोवेनिया 9.8 अंक ही बना सका। इस तरह भारतीय टीम ने कांस्य पदक जीत लिया।
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व्यक्तिगत प्रदर्शन में भी विजय सुन्डी ने शानदार खेल दिखाते हुए 70 मीटर राउंड में 323 और 318 अंक हासिल कर कुल 641 अंक बनाए। इस प्रदर्शन के साथ उन्होंने वर्ल्ड पैरा आर्चरी सीरीज में टॉप-1 रैंक हासिल कर इतिहास रच दिया।
इधर चाईबासा स्थित तुरतुंग तीरंदाजी प्रशिक्षण केंद्र, सिकुरसाई में इस जीत की खुशी में जश्न मनाया गया।
विजय सुन्डी के कोच महर्षि महेंद्र सिंकू ने उनकी सफलता पर खुशी जताते हुए कहा कि तीरंदाजी में सफलता के लिए कड़ी मेहनत, अनुशासन, धैर्य और निरंतर अभ्यास बेहद जरूरी है। उन्होंने बताया कि विजय का माइंडसेट, प्रेजेंस ऑफ माइंड और शूटिंग तकनीक काफी मजबूत है। उन्हें उम्मीद है कि विजय सुन्डी आने वाले समय में पैरा एशियन गेम्स और पैरालंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे।
विजय सुन्डी की इस उपलब्धि पर कई प्रमुख हस्तियों ने उन्हें बधाई दी। बधाई देने वालों में भारतीय तीरंदाजी संघ के अध्यक्ष एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा, द्रोणाचार्य व पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित पूर्णिमा महतो, झारखंड तीरंदाजी संघ के वरिष्ठ उपाध्यक्ष सुमंत चंद्र मोहंती, पश्चिमी सिंहभूम के उपायुक्त चंदन कुमार सहित खेल जगत, प्रशासन और समाज के कई गणमान्य लोग शामिल हैं।
सभी ने विजय सुन्डी को उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं देते हुए उनकी इस ऐतिहासिक सफलता पर गर्व जताया।
असम | आज नरेन्द्र मोदी ने डिब्रूगढ़ में चाय बागान में कार्यरत महिला श्रमिकों के साथ संवाद किया। इस दौरान उन्होंने महिलाओं के योगदान की सराहना करते हुए उनके जीवन, कार्य परिस्थितियों और सामने आने वाली चुनौतियों के बारे में विस्तार से जानकारी ली।
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प्रधानमंत्री ने कहा कि देश की अर्थव्यवस्था, विशेषकर चाय उद्योग के विकास में इन महिला श्रमिकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि उनके परिश्रम और समर्पण से भारत की चाय विश्व स्तर पर अपनी पहचान बनाए हुए है।
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संवाद के दौरान महिला श्रमिकों ने भी अपने अनुभव साझा किए और कार्यस्थल से जुड़े विभिन्न मुद्दों को प्रधानमंत्री के समक्ष रखा। प्रधानमंत्री ने उनकी बातों को गंभीरता से सुनते हुए आश्वासन दिया कि सरकार उनके कल्याण, सुरक्षा और सशक्तिकरण के लिए निरंतर प्रयासरत है।
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यह संवाद कार्यक्रम महिला श्रमिकों के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता और उनके जीवन स्तर में सुधार के प्रयासों को दर्शाता है।
नई दिल्ली | पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण तेल और गैस की वैश्विक आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिससे कई देशों के साथ भारत में भी ईंधन संकट की स्थिति बन गई है। इस चुनौती से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है, ताकि आम जनता तक वैकल्पिक ईंधन की आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके।
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29 मार्च को जारी गजट नोटिफिकेशन के अनुसार, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने 21 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत 60 दिनों के लिए सुपीरियर केरोसिन ऑयल (SKO) की अस्थायी आपूर्ति को मंजूरी दी है। इस सूची में दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और गुजरात जैसे राज्य शामिल हैं। इसका उद्देश्य रसोई गैस (LPG) और अन्य ईंधनों की संभावित कमी के बीच लोगों को राहत देना है।
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सरकार ने पेट्रोलियम नियमों में अस्थायी ढील देते हुए सार्वजनिक क्षेत्र की ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के चुनिंदा पेट्रोल पंपों को केरोसिन के भंडारण और बिक्री की अनुमति दी है। प्रत्येक चयनित पेट्रोल पंप पर अधिकतम 5,000 लीटर केरोसिन रखा जा सकेगा, और हर जिले में अधिकतम दो पेट्रोल पंपों को इसके लिए नामित किया जाएगा।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि पेट्रोल में केरोसिन मिलाने (मिलावट) की अनुमति नहीं दी गई है और इस पर सख्त निगरानी रखी जाएगी। यह कदम केवल ईंधन आपूर्ति को सुचारु बनाए रखने और आम लोगों की जरूरतों को पूरा करने के लिए उठाया गया है।
नई दिल्ली/तिरुवनंतपुरम | केंद्र सरकार ने केरल का नाम बदलकर “केरलम” करने का निर्णय लिया है। यह फैसला सेवा तीर्थ कैबिनेट की पहली बैठक में लिया गया। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, राज्य का नाम अब सभी सरकारी अभिलेखों में “केरलम” दर्ज किया जाएगा।
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गौरतलब है कि केरल विधानसभा पहले ही राज्य के नाम को आधिकारिक रिकॉर्ड में बदलने संबंधी प्रस्ताव पारित कर चुकी है। इसके बाद केंद्र सरकार की मंजूरी के साथ प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई है।
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इधर, राज्य की 140 सदस्यीय विधानसभा के लिए चुनाव मई से पहले कराए जाने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, भारत निर्वाचन आयोग की ओर से अभी तक चुनाव कार्यक्रम की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
चाईबासा। पश्चिमी सिंहभूम जिले से लगभग 13–14 वर्ष पहले लापता हुआ एक बालक आखिरकार केरल के कन्नूर जिले में सुरक्षित मिला है। उस समय महज 5–6 वर्ष की उम्र में भटककर केरल पहुंच गया यह बच्चा अब लगभग 18 वर्ष का हो चुका है। लंबे समय तक घर से दूर रहने के कारण वह अपनी मातृभाषा, गांव और जिले का नाम तक भूल चुका था। उसे केवल अपने पिता बलराम, माता मानी, भाई फंटूश और छोटी बहन टुरकी के नाम तथा घर के पहाड़ पर होने की धुंधली यादें ही थीं।
बालक अब तक एनजीओ और चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (CWC) के संरक्षण में केरल में रह रहा था। उम्र 18 वर्ष के करीब पहुंचने के कारण उसे संस्था में रखने की सीमा समाप्त हो रही थी, जिसके बाद उसके परिवार को खोजने की प्रक्रिया तेज की गई।
सोशल मीडिया से मिला परिवार का सुराग
परिवार का कोई ठोस पता नहीं मिलने पर सामाजिक कार्यकर्ता बासिल हेम्ब्रोम ने बच्चे का एक वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर साझा किया। वीडियो में बच्चे ने अपनी यादों के आधार पर घर और परिवार का विवरण बताया तथा लोगों से पहचान कराने की अपील की गई। यह वीडियो तेजी से वायरल हुआ और लाखों लोगों तक पहुंच गया।
इसी दौरान वीडियो परिवार के एक सदस्य हिम्मत गोप तक पहुंचा, जिन्होंने “ग्रामीण विमर्श” टीम से संपर्क किया। इसके बाद खोजबीन करते हुए टीम को सोनुवा प्रखंड के आसनतलिया पंचायत अंतर्गत हाड़ीमारा गांव में बच्चे के परिवार की जानकारी मिली।
अब परिवार में सिर्फ मां और तीन बहनें
ग्रामीण विमर्श के सदस्य जब हाड़ीमारा गांव पहुंचे तो पाया कि बालक का घर पहाड़ पर स्थित है, लेकिन वहां कोई नहीं रहता और घर बंद पड़ा है। ग्रामीणों से जानकारी मिली कि परिवार कई वर्ष पहले ही रोज़गार की तलाश में पश्चिम बंगाल के कल्याणी स्थित एक ईंट भट्ठा में काम करने चला गया है।
जांच में यह भी सामने आया कि बच्चे के पिता बोड़राम गोप और बड़े भाई फंटूश गोप का निधन हो चुका है। वर्तमान में परिवार में मां मानी गोप, बहनें बलेमा गोप, परमिला गोप, लक्ष्मी गोप और भतीजी स्वीटी गोप ही हैं, जो ईंट भट्ठे में मजदूरी कर जीवनयापन कर रहे हैं।
राजा के भविष्य को लेकर चिंता
ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने परिवार की दयनीय आर्थिक स्थिति देखकर चिंता जताई कि यदि बालक वापस घर आता है तो क्या उसे शिक्षा और बेहतर वातावरण मिल पाएगा। लोगों का कहना है कि गरीबी और संसाधनों की कमी के कारण उसका भविष्य प्रभावित हो सकता है और वह भी कम उम्र में मजदूरी के दायरे में फंस सकता है।
NIOS से +2 में दाखिला और केरल में फुटबॉल से बनाई पहचान
बालक, जिसे अब राजा के नाम से पहचाना जा रहा है, ने केरल में रहते हुए फुटबॉल में अपनी प्रतिभा दिखाई। वह इंडियन सुपर लीग (ISL) क्लब Kerala Blasters FC की जूनियर टीम से भी जुड़ा रहा, जिससे उसे राज्य स्तर पर पहचान मिली है।
वह वर्तमान में National Institute of Open Schooling (NIOS) से उच्च माध्यमिक (+2) की पढ़ाई कर रहा है। पदाधिकारियों के अनुसार क्लब से जुड़े रहने के कारण उसे नियमित स्कूलिंग कर पाना संभव नहीं हो पा रहा था, इसलिए ओपन स्कूलिंग के माध्यम से पढ़ाई जारी रखी गई। बताया जा रहा है कि राजा फुटबॉल में काफी प्रतिभाशाली है और भविष्य में इस खेल में अच्छा करियर बना सकता है।
सामाजिक संगठनों की पहल से मिली सफलता
मामले में नया मोड़ तब आया जब “मिसिंग फाउंड” ग्रुप में बच्चे की तस्वीर साझा हुई। इसके बाद मुंबई प्रोजेक्ट को लीड कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता फरदीन खान (Railway Children India) ने परिवार खोजने की जिम्मेदारी उठाई। फरदीन खान झारखंड के कोडरमा जिले के निवासी हैं और पिछले सात वर्षों से हजारों बच्चों को उनके परिवार से मिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं।
खोज के दौरान उनके सहयोगी शुभम तिग्गा (इंडियन एक्सप्रेस) तथा स्थानीय सोशल मीडिया क्रिएटर्स आयुष और बासिल हेम्ब्रोम की मदद से वीडियो तैयार किया गया। वीडियो लगभग 10 लाख से अधिक लोगों तक पहुंचा, जिसके बाद परिवार ने संपर्क किया।
बालक की मां ने भावुक होकर बताया कि उन्होंने अपने बेटे के जीवित होने की उम्मीद छोड़ दी थी और उसे मृत मान लिया था। अब उसके मिलने की खबर से परिवार बेहद खुश है।
जल्द हो सकेगा परिवार से मिलन
फिलहाल फरदीन खान और उनकी टीम संबंधित सरकारी प्रक्रियाएं पूरी कराने में जुटी है। कानूनी औपचारिकताएं पूरी होते ही बालक को सुरक्षित उसके परिवार से मिलाया जाएगा।
यह घटना साबित करती है कि समर्पण, टीमवर्क और सोशल मीडिया की ताकत से वर्षों पुरानी बिछड़न भी समाप्त की जा सकती है।