नई दिल्ली | नीट-यूजी परीक्षा में पेपर लीक की घटना के बाद सरकार 21 जून को प्रस्तावित री-टेस्ट को पूरी तरह सुरक्षित और पारदर्शी बनाने की दिशा में गंभीर तैयारी कर रही है। इसी क्रम में परीक्षा प्रश्नपत्रों को परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाने के लिए भारतीय वायुसेना के विमानों के उपयोग पर विचार किया जा रहा है।
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सूत्रों के अनुसार, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक में इस रणनीति पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक में परीक्षा की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और किसी भी तरह की अनियमितता को रोकने के उपायों पर मंथन किया गया।
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बताया जा रहा है कि वायुसेना के विमानों के इस्तेमाल से प्रश्नपत्रों की सुरक्षित और समयबद्ध ढंग से डिलीवरी सुनिश्चित की जा सकती है। हालांकि, इस प्रस्ताव पर अंतिम फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा लिया जाएगा।
बेंगलुरु | कर्नाटक के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद सिद्धारमैया ने आज प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपने फैसले पर विस्तार से बात की। इस दौरान उनके साथ उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार भी मौजूद रहे। सिद्धारमैया ने कहा कि उनके लिए राज्य का हित सबसे ऊपर है और उनके इस निर्णय के साथ पार्टी के सभी विधायक एकजुट हैं। प्रेस कॉन्फ्रेंस में सिद्धारमैया ने बड़ा बयान देते हुए कहा कि पार्टी हाईकमान ने उन्हें राज्यसभा जाने का सुझाव दिया था, लेकिन उन्होंने इसे विनम्रता से टाल दिया। उन्होंने कहा, “मुझे जनता ने पांच साल के लिए चुना है। मैं यहीं रहकर राजनीति करूंगा, सक्रिय राजनीति में बना रहूंगा और सांप्रदायिक ताकतों के खिलाफ लड़ाई जारी रखूंगा।”
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हाईकमान के निर्देश के बाद सौंपा इस्तीफा सिद्धारमैया ने बताया कि हाईकमान के निर्देश के बाद उन्होंने अपना इस्तीफा सौंप दिया है। उन्होंने कहा, “मुझे पूरा विश्वास है कि राज्यपाल लौटने के बाद मेरे इस्तीफे को स्वीकार कर लेंगे, क्योंकि यह संवैधानिक प्रक्रिया का हिस्सा है।” राज्यपाल बेंगलुरु से बाहर उन्होंने जानकारी दी कि राज्यपाल फिलहाल बेंगलुरु में मौजूद नहीं हैं और देर रात लौटने वाले हैं। सिद्धारमैया ने कहा, “राज्यपाल कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार वे शहर से बाहर हैं। इसलिए मैंने अपना इस्तीफा उनके सचिव को कार्यालय में सौंप दिया है।”
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राज्यहित को बताया सर्वोपरि सिद्धारमैया ने दोहराया कि उनका निर्णय पूरी तरह राज्य के हित को ध्यान में रखकर लिया गया है। उन्होंने कहा कि राज्यपाल के लौटने के बाद इस्तीफा मंजूर हो जाएगा और उन्हें इस प्रक्रिया पर पूरा भरोसा है। सोनिया गांधी, राहुल गांधी और खरगे का जताया आभार प्रेस कॉन्फ्रेंस में सिद्धारमैया ने पार्टी नेतृत्व के प्रति आभार भी व्यक्त किया। उन्होंने कहा, “हमारे पास पूर्ण बहुमत है, इसलिए सरकार गठन की संवैधानिक प्रक्रिया पूरी होगी। मैं सोनिया गांधी, राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे का तहे दिल से आभार व्यक्त करता हूं, जिन्होंने मुझे यह अवसर दिया।” ‘मेरा राजनीतिक जीवन एक ओपन बुक’
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अपने राजनीतिक सफर का जिक्र करते हुए सिद्धारमैया ने कहा कि उन्होंने कभी पद, पैसा या संपत्ति के पीछे राजनीति नहीं की। उन्होंने कहा, “मैंने 50 वर्षों तक राजनीति की है। मेरा राजनीतिक जीवन एक ओपन बुक है। मैंने कभी अधिकारियों या पैसे के पीछे नहीं भागा, जनता की सेवा ही मेरे लिए सबसे महत्वपूर्ण रही है।” सिद्धारमैया के इस्तीफे और उनके बयानों के बाद कर्नाटक की राजनीति में नई चर्चाएं तेज हो गई हैं।
रांची | भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन 5 जून को दो दिवसीय दौरे पर झारखंड पहुंचेंगे। उनके इस दौरे का मुख्य उद्देश्य आगामी राज्यसभा चुनाव को लेकर रणनीति तैयार करना बताया जा रहा है। इसके साथ ही वे प्रदेश नेतृत्व के साथ राज्य के मौजूदा राजनीतिक हालात और संगठनात्मक गतिविधियों पर भी चर्चा करेंगे।
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जानकारी के अनुसार, नितिन नबीन 6 जून को पार्टी के मंडल पदाधिकारियों के सम्मेलन में शामिल होंगे। इसके अलावा वे भाजपा कोर कमिटी की बैठक में हिस्सा लेकर संगठनात्मक कार्यों और चुनावी तैयारियों की समीक्षा करेंगे। झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों के लिए 18 जून को चुनाव होना है। इन चुनावों में भाजपा ने पर्याप्त संख्याबल नहीं होने के बावजूद उम्मीदवार उतारने का फैसला किया है। पार्टी को उम्मीद है कि वह आवश्यक समर्थन जुटाने में सफल रहेगी। भाजपा ने उम्मीदवार उतारने का लिया निर्णय झारखंड भाजपा की चुनाव प्रबंध समिति की बैठक में राज्यसभा चुनाव के लिए उम्मीदवार उतारने पर सहमति बन चुकी है। भाजपा के पास वर्तमान में 21 विधायक हैं और सहयोगी दलों को मिलाकर एनडीए के कुल 24 विधायक हैं। राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए प्रथम वरीयता के कम से कम 28 मतों की आवश्यकता होती है।
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भाजपा को भरोसा है कि वह चुनाव के दौरान जरूरी आंकड़ा हासिल कर लेगी। पार्टी नेताओं का मानना है कि सत्तापक्ष के कुछ विधायक ‘अंतरात्मा की आवाज’ पर मतदान कर सकते हैं। जेडीयू नेता खीरू महतो ने भी कहा है कि सत्तापक्ष में ऐसे विधायक हो सकते हैं जो केंद्र की मोदी सरकार की नीतियों से प्रभावित हों और भविष्य में एनडीए सरकार बनने की संभावना को देखते हुए समर्थन दें। एनडीए सहयोगियों से भी हो सकता है मंथन सूत्रों के मुताबिक, राष्ट्रीय अध्यक्ष अपने दौरे के दौरान एनडीए के सहयोगी दलों—लोजपा (रामविलास), जेडीयू और आजसू पार्टी—के नेताओं के साथ भी बैठक कर चुनावी रणनीति पर चर्चा कर सकते हैं।
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भाजपा के फैसले पर झामुमो ने जताई आपत्ति इधर, झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने भाजपा के उम्मीदवार उतारने के फैसले को लेकर केंद्रीय निर्वाचन आयोग को पत्र लिखकर शिकायत दर्ज कराई है। झामुमो ने आरोप लगाया है कि पर्याप्त संख्याबल नहीं होने के बावजूद भाजपा उम्मीदवार उतारकर संभावित हॉर्स-ट्रेडिंग की स्थिति पैदा कर सकती है। झामुमो का कहना है कि सत्तापक्ष के विधायकों को भय, दबाव या प्रलोभन के जरिए भाजपा उम्मीदवार के पक्ष में मतदान के लिए प्रभावित किया जा सकता है। पार्टी ने निर्वाचन आयोग से केंद्रीय जांच एजेंसियों को सतर्क रहने का निर्देश देने की भी मांग की है। वहीं भाजपा ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि चुनाव लड़ना उसका संवैधानिक और लोकतांत्रिक अधिकार है तथा किसी भी दल को चुनाव लड़ने से रोका नहीं जा सकता।
धर्मशाला | आईपीएल फाइनल में दोनों टीमों की बल्लेबाजी बेहद मजबूत नजर आ रही है। आंकड़ों पर नजर डालें तो शीर्ष क्रम के बल्लेबाजों ने पूरे सीजन में शानदार प्रदर्शन किया है और फाइनल मुकाबले में भी उनसे बड़ी पारियां खेलने की उम्मीद रहेगी।
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रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) की ओर से शीर्ष क्रम में सूर्यवंशी (583 रन), यशस्वी जायसवाल (397 रन) और ध्रुव जुरेल (458 रन) ने अहम योगदान दिया है। वहीं, सनराइजर्स हैदराबाद (SRH) के लिए अभिषेक शर्मा (563 रन), ट्रैविस हेड (393 रन) और ईशान किशन (569 रन) ने टीम की बल्लेबाजी को मजबूती प्रदान की है।
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नंबर चार पर बल्लेबाजी करने वाले हेनरिक क्लासेन (606 रन) का प्रदर्शन विशेष रूप से उल्लेखनीय रहा है। उन्होंने पूरे टूर्नामेंट में लगातार प्रभावशाली बल्लेबाजी करते हुए टीम को कई महत्वपूर्ण मौकों पर मजबूती दी है।
दोनों टीमों के बल्लेबाजी क्रम में विस्फोटक क्षमता मौजूद है। हालांकि, यशस्वी जायसवाल और ट्रैविस हेड जैसे बल्लेबाजों के प्रदर्शन में निरंतरता फाइनल मुकाबले में निर्णायक भूमिका निभा सकती है। ऐसे में क्रिकेट प्रशंसकों को एक हाई-स्कोरिंग और रोमांचक मुकाबले की उम्मीद रहेगी।
बेंगलुरु | कर्नाटक में मुख्यमंत्री पद को लेकर लंबे समय से चल रही सियासी खींचतान के बीच मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के बीच जारी विवाद अब खत्म होता नजर आ रहा है। सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस नेतृत्व ने इस मामले पर सहमति का रास्ता निकाल लिया है और मुख्यमंत्री सिद्धारमैया जल्द अपने पद से इस्तीफा दे सकते हैं।
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जानकारी के मुताबिक, दिल्ली में कांग्रेस हाईकमान के साथ हुई अहम बैठकों के बाद डीके शिवकुमार के मुख्यमंत्री बनने की संभावनाएं मजबूत हुई हैं। वहीं, सिद्धारमैया को पार्टी में राष्ट्रीय स्तर की भूमिका और राज्यसभा भेजे जाने का प्रस्ताव दिए जाने की चर्चा है। हालांकि, इस पर अभी आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
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कांग्रेस नेतृत्व ने सार्वजनिक रूप से मुख्यमंत्री बदलने की अटकलों को खारिज किया है, लेकिन अंदरखाने सत्ता हस्तांतरण को लेकर चर्चाएं तेज हैं। बताया जा रहा है कि पार्टी ने आंतरिक विवाद को बढ़ने से रोकने और संगठनात्मक संतुलन बनाए रखने के लिए समझौते का फार्मूला तैयार किया है।
यदि सब कुछ तय योजना के अनुसार रहा, तो कर्नाटक में जल्द नेतृत्व परिवर्तन देखने को मिल सकता है। हालांकि, अंतिम फैसला और आधिकारिक घोषणा का इंतजार किया जा रहा है।
नई दिल्ली | भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जन्म जयंती वर्ष के अवसर पर रविवार को नई दिल्ली में भव्य जनजातीय सांस्कृतिक समागम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर रामलीला मैदान से लाल किला तक विशाल शोभायात्रा निकाली गई, जिसमें जनजातीय समाज की समृद्ध संस्कृति, परंपरा और गौरव का भव्य प्रदर्शन किया गया। बड़ी संख्या में जनजातीय समाज के लोगों एवं कार्यकर्ताओं ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर कार्यक्रम को ऐतिहासिक बनाया।
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शोभायात्रा में पारंपरिक वेशभूषा, सांस्कृतिक झांकियां और जनजातीय कला आकर्षण का केंद्र रहीं। पूरे मार्ग में जनजातीय संस्कृति की विविधता और विरासत की झलक देखने को मिली, जिसे उपस्थित लोगों ने खूब सराहा।
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कार्यक्रम में भाजपा अनुसूचित जनजाति मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष समीर उरांव, झारखंड प्रदेश अध्यक्ष शिव शंकर उरांव, पश्चिम बंगाल सरकार के आदिवासी मंत्री खुदीराम टुडू, अशोक बडाईक, अनुसूचित जनजाति मोर्चा के प्रदेश मंत्री आनंद मुर्मू एवं आईटी सेल सह प्रभारी अनिल बोदरा सहित झारखंड से पहुंचे कई कार्यकर्ता मौजूद रहे।
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इस दौरान उपस्थित नेताओं ने भगवान बिरसा मुंडा के संघर्ष, त्याग और आदर्शों को याद करते हुए समाज से उनके बताए मार्ग पर चलने का आह्वान किया। कार्यक्रम के माध्यम से जनजातीय समाज की एकता, संस्कृति और परंपराओं को सशक्त बनाने का संदेश दिया गया।
सासाराम | पंडित दीनदयाल उपाध्याय–गया रेलखंड के सासाराम रेलवे स्टेशन पर सोमवार सुबह एक पैसेंजर ट्रेन में अचानक आग लगने से अफरातफरी मच गई। सासाराम से आरा होते हुए पटना जाने वाली पैसेंजर ट्रेन की एक बोगी में आग लगने के बाद प्लेटफॉर्म और ट्रेन में मौजूद यात्रियों के बीच हड़कंप मच गया। घटना सोमवार सुबह करीब 6 बजे की बताई जा रही है। हालांकि राहत की बात यह रही कि इस हादसे में किसी यात्री के हताहत होने की सूचना नहीं है। एक बोगी पूरी तरह जलकर खाक
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आग इतनी तेजी से फैली कि ट्रेन की एक बोगी पूरी तरह जलकर खाक हो गई। बाद में सुरक्षा के मद्देनजर जली हुई बोगी को ट्रेन से अलग कर दिया गया। सूचना मिलने के बाद रेलवे प्रशासन और अग्निशमन टीम मौके पर पहुंची तथा कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया। आरपीएफ निरीक्षक संजीव कुमार ने बताया कि शुरुआती जांच में आग लगने की वजह शॉर्ट सर्किट मानी जा रही है। हालांकि घटना के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए रेल प्रशासन द्वारा विस्तृत जांच की जा रही है।
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व्यवस्था पर उठे सवाल घटना के बाद स्थानीय लोगों और रेल यात्रियों में नाराजगी देखी गई। प्रत्यक्षदर्शियों ने रेलवे प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि यदि समय पर पानी और कार्यशील अग्निशमन यंत्र उपलब्ध होते, तो नुकसान को काफी हद तक रोका जा सकता था।
लोगों का आरोप है कि ट्रेन में रिफिलिंग के लिए बिछाई गई पाइपलाइन में पानी नहीं था और रेलवे के अग्निशमन सिलेंडर भी खाली या अनुपयोगी थे। उनका कहना है कि शुरुआती स्तर पर आग बुझाने की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने के कारण आग तेजी से फैल गई और एक बोगी पूरी तरह जल गई। फिलहाल रेल प्रशासन मामले की जांच में जुटा है और आग लगने के कारणों के साथ-साथ सुरक्षा व्यवस्था की भी समीक्षा की जा रही है।
नई दिल्ली | वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि “सुपर अल-नीनो” अब केवल इतिहास की एक भयावह घटना नहीं रह गया है, बल्कि वर्ष 2026 में इसके दोबारा गंभीर रूप लेने की आशंका बढ़ती जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, प्रशांत महासागर में तेजी से बढ़ता तापमान दुनिया को एक बड़े जलवायु संकट की ओर धकेल सकता है।
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वैज्ञानिकों का कहना है कि वर्ष 1877-78 में आए अब तक के सबसे शक्तिशाली अल-नीनो ने वैश्विक स्तर पर भारी तबाही मचाई थी। उस दौरान दुनिया के कई हिस्सों में भीषण सूखा, फसलों की बर्बादी, अकाल और बीमारियों का लंबा दौर देखने को मिला था। अब 2026 में फिर वैसी ही परिस्थितियां बनने के संकेत मिल रहे हैं। रिपोर्टों के अनुसार, प्रशांत महासागर की सतह और गहराई दोनों में तापमान तेजी से बढ़ रहा है। कुछ जलवायु पूर्वानुमानों में यह आशंका जताई गई है कि मौजूदा स्थिति 1877-78 के रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ सकती है। वैज्ञानिकों का कहना है कि इस बार खतरा इसलिए अधिक है, क्योंकि आज पृथ्वी पहले से ही ग्लोबल वार्मिंग के कारण ज्यादा गर्म हो चुकी है। ऐसे में सूखा, बाढ़, गर्मी की लहर और खाद्य संकट जैसी आपदाओं की तीव्रता बढ़ सकती है।
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इतिहास के अनुसार, 1876 से 1878 के बीच आए सुपर अल-नीनो ने भारत, चीन, ब्राजील और अफ्रीका के बड़े हिस्सों को गंभीर रूप से प्रभावित किया था। कई क्षेत्रों में मानसून पूरी तरह विफल हो गया था, जिससे फसलें सूख गईं, पशुधन नष्ट हो गया और करोड़ों लोग भुखमरी का शिकार हुए। विभिन्न अनुमानों के मुताबिक उस समय दुनिया की कुल आबादी का लगभग 2 से 3 प्रतिशत प्रभावित हुआ था और करीब 3 से 6 करोड़ लोगों की मौत हुई थी। कई विशेषज्ञ यह आंकड़ा लगभग 5 करोड़ तक बताते हैं।
जलवायु वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि यदि मौजूदा तापमान वृद्धि का सिलसिला जारी रहा, तो आने वाले महीनों में दुनिया को गंभीर पर्यावरणीय और मानवीय चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।
दिल्ली | राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) द्वारा आयोजित NEET-UG परीक्षा को लेकर बड़ा फैसला लिया गया है। 3 मई को आयोजित हुई परीक्षा में पेपर लीक के आरोप सामने आने के बाद सरकार ने परीक्षा रद्द कर दी थी। अब NEET-UG परीक्षा का दोबारा आयोजन 21 जून 2026 को किया जाएगा। शिक्षा मंत्री Dharmendra Pradhan ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर परीक्षा से जुड़ी तैयारियों, सुरक्षा व्यवस्था और पेपर लीक मामले की जांच की जानकारी दी। उन्होंने स्वीकार किया कि परीक्षा प्रणाली में चूक हुई है और इसकी जिम्मेदारी भी ली। इस दौरान शिक्षा मंत्री ने अभ्यर्थियों के हित में कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। उन्होंने बताया कि सभी परीक्षार्थियों को 14 जून तक एडमिट कार्ड उपलब्ध करा दिए जाएंगे। साथ ही छात्रों को अपनी पसंद का परीक्षा शहर चुनने के लिए एक सप्ताह का अतिरिक्त समय दिया जाएगा।
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सरकार की ओर से यह भी घोषणा की गई कि परीक्षार्थियों के लिए परिवहन सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी और परीक्षा के दौरान छात्रों को 15 मिनट का अतिरिक्त समय दिया जाएगा। शिक्षा मंत्री ने स्पष्ट कहा कि दोबारा परीक्षा के कारण छात्रों पर किसी प्रकार का आर्थिक बोझ नहीं पड़ने दिया जाएगा। इसके अलावा उन्होंने घोषणा की कि अगले वर्ष से NEET परीक्षा कंप्यूटर आधारित मोड में आयोजित की जाएगी, ताकि पारदर्शिता और सुरक्षा को और मजबूत किया जा सके।
वहीं, NTA ने शुक्रवार सुबह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर परीक्षा की नई तारीख की आधिकारिक घोषणा की। एजेंसी ने कहा कि भारत सरकार की स्वीकृति के बाद NEET (UG) परीक्षा का पुनर्नियोजन 21 जून 2026, रविवार को किया गया है।
NTA ने अभ्यर्थियों और अभिभावकों से केवल आधिकारिक माध्यमों पर ही भरोसा करने की अपील की है। किसी भी जानकारी या सहायता के लिए NTA ने हेल्पलाइन नंबर 011-40759000 और 011-69227700 जारी किए हैं। इसके अलावा अभ्यर्थी neet-ug@nta.ac.in पर ईमेल के माध्यम से भी संपर्क कर सकते हैं।
नई दिल्ली | पेट्रोल और डीजल की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी को लेकर देश की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। चुनावी माहौल समाप्त होते ही ईंधन के दामों में हुई वृद्धि पर विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और तृणमूल कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि आम जनता पहले से ही महंगाई की मार झेल रही है, ऐसे में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी ने लोगों की परेशानियों को और बढ़ा दिया है।
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विपक्ष का कहना है कि चुनाव के दौरान जनता को राहत मिलने की उम्मीद दिखाई जाती है, लेकिन चुनाव समाप्त होते ही महंगाई का बोझ सीधे आम लोगों पर डाल दिया जाता है। विपक्षी नेताओं ने इसे आम जनता के साथ अन्याय बताते हुए सरकार से तत्काल राहत देने की मांग की है।
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हालांकि, केंद्र सरकार की ओर से इस मुद्दे पर अब तक कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। इस बीच, सोशल मीडिया पर भी पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों को लेकर तीखी बहस देखने को मिल रही है। विभिन्न राजनीतिक दलों के समर्थक एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं।
आम लोगों के बीच भी बढ़ती ईंधन कीमतों को लेकर चिंता और नाराजगी साफ दिखाई दे रही है, खासकर उन लोगों में जो रोजमर्रा के कामकाज और परिवहन के लिए पेट्रोल और डीजल पर निर्भर हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी का असर परिवहन, खाद्य सामग्री और अन्य जरूरी वस्तुओं की कीमतों पर भी पड़ सकता है, जिससे महंगाई और बढ़ने की आशंका है।