कोल्हान

बिरसा हरित ग्राम योजना के तहत क्रेता-विक्रेता सम्मेलन आयोजित, किसानों को बेहतर बाजार से जोड़ने पर जोर

बिरसा हरित ग्राम योजना के तहत क्रेता-विक्रेता सम्मेलन आयोजित, किसानों को बेहतर बाजार से जोड़ने पर जोर

चाईबासा | उपायुक्त मनीष कुमार की अध्यक्षता में सोमवार को बिरसा हरित ग्राम योजना के अंतर्गत क्रेता-विक्रेता सम्मेलन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य आम उत्पादकों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराना, उत्पादों की गुणवत्ता में सुधार लाना तथा किसानों को सीधे खरीदारों से जोड़ना था।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उपायुक्त मनीष कुमार ने कहा कि बिरसा हरित ग्राम योजना के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में फलोत्पादन को बढ़ावा देने के साथ किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में लगातार कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने के लिए जिला प्रशासन हरसंभव प्रयास कर रहा है और इस प्रकार के आयोजन किसानों के लिए लाभकारी साबित होंगे।

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उपायुक्त ने फल संरक्षण, पैकेजिंग एवं विपणन से संबंधित आवश्यक जानकारी किसानों तक पहुंचाने के लिए संबंधित अधिकारियों एवं विशेषज्ञों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक और सुदृढ़ विपणन व्यवस्था से किसानों को सीधा लाभ मिलेगा तथा उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।
सम्मेलन के दौरान विभिन्न क्रेताओं, विक्रेताओं और आम उत्पादकों के बीच संवाद स्थापित किया गया। इस अवसर पर किसानों को बाजार की मांग, गुणवत्ता मानकों और विपणन प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी दी गई। साथ ही फल विपणन से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर उत्पादकों को प्रशिक्षण भी प्रदान किया गया।

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उपायुक्त ने समाहरणालय परिसर में बिरसा हरित ग्राम योजना के तहत उत्पादित फलों के लिए स्थायी विपणन व्यवस्था सुनिश्चित करने हेतु प्लास के जिला आजीविका प्रबंधक को आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया। इसके अतिरिक्त उन्होंने समाहरणालय परिसर में किसानों द्वारा लगाए गए आम उत्पादन प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया।
कार्यक्रम में उप विकास आयुक्त, संबंधित विभागों के पदाधिकारी, विशेषज्ञ, क्रेता-विक्रेता प्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे।

नदी में डूबने से तीन वर्षीय बच्ची की मौत, झाड़-फूंक में समय गंवाने से नहीं बच सकी जान

नदी में डूबने से तीन वर्षीय बच्ची की मौत, झाड़-फूंक में समय गंवाने से नहीं बच सकी जान

चाईबासा/मंझारी | पश्चिमी सिंहभूम जिले के मंझारी थाना क्षेत्र अंतर्गत तांतनगर ओपी के छोटा तेंताडा गांव में शनिवार को नदी में डूबने से तीन वर्षीय बच्ची की मौत हो गई। मृत बच्ची की पहचान संगीता सिरका के रूप में हुई है। इस दर्दनाक घटना ने ग्रामीण क्षेत्रों में आपात स्थिति के दौरान अंधविश्वास और समय पर चिकित्सा सुविधा नहीं मिलने की गंभीर समस्या को एक बार फिर उजागर कर दिया है।
खेलते-खेलते नदी में उतरी बच्ची, गहरे पानी में डूबी
प्राप्त जानकारी के अनुसार, संगीता गांव के अन्य बच्चों के साथ खेलते-खेलते नदी किनारे पहुंच गई थी। उस समय कुछ बच्चे नदी में नहा रहे थे। उन्हें देखकर वह भी पानी में उतर गई। खेल के दौरान वह अनजाने में गहरे पानी की ओर चली गई और डूबने लगी।

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आसपास मौजूद बच्चों ने शोर मचाया, जिसके बाद उसकी भाभी तत्काल मौके पर पहुंचीं और काफी मशक्कत के बाद उसे पानी से बाहर निकाला। बाहर निकालने तक बच्ची अचेत हो चुकी थी।
अस्पताल ले जाने में हुई देरी, झाड़-फूंक का लिया सहारा
घटना के बाद परिजनों में अफरा-तफरी मच गई। हालांकि बच्ची को तुरंत अस्पताल ले जाने के बजाय परिजन झाड़-फूंक के सहारे उसे ठीक करने की कोशिश में जुट गए। ग्रामीणों के अनुसार, काफी देर तक ओझा-गुनी के माध्यम से बच्ची को होश में लाने का प्रयास किया जाता रहा।

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जब उसकी हालत में कोई सुधार नहीं हुआ, तब देर शाम उसे सदर अस्पताल चाईबासा लाया गया, जहां चिकित्सकों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया।
समय पर इलाज से बच सकती थी जान
चिकित्सकों का कहना है कि डूबने की घटनाओं में शुरुआती कुछ मिनट बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। समय पर प्राथमिक उपचार और तत्काल अस्पताल पहुंचाने से कई मामलों में जान बचाई जा सकती है।

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इस घटना ने ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य जागरूकता की कमी और अंधविश्वास के कारण उपचार में होने वाली देरी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना के बाद पूरे गांव में शोक का माहौल है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है तथा यूडी केस दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।

बंदगांव : “जनजातीय गरिमा उत्सव 2026” के तहत ‘जन भागीदारी अभियान – सबसे दूर, सबसे पहले’ का शुभारंभ

बंदगांव : “जनजातीय गरिमा उत्सव 2026” के तहत ‘जन भागीदारी अभियान – सबसे दूर, सबसे पहले’ का शुभारंभ

बंदगांव | “जनजातीय गरिमा उत्सव 2026” के अंतर्गत सोमवार को बंदगांव पंचायत भवन में “जन भागीदारी अभियान – सबसे दूर, सबसे पहले” कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। यह विशेष अभियान 18 मई से 25 मई तक संचालित किया जाएगा। अभियान का मुख्य उद्देश्य दूरस्थ एवं जनजातीय क्षेत्रों तक सरकारी योजनाओं और जनकल्याणकारी सेवाओं की प्रभावी पहुंच सुनिश्चित करना है।अभियान के तहत विभिन्न जनहितकारी कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। इनमें ओरिएंटेशन कार्यक्रम, वृक्षारोपण अभियान, ग्राम स्तरीय स्वास्थ्य जांच शिविर, ट्रांजेक्ट वॉक तथा आदि सेवा केंद्रों के माध्यम से जनसुनवाई प्रमुख रूप से शामिल हैं।

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जिला प्रशासन की ओर से इस दौरान स्वच्छता जागरूकता अभियान, सिकल सेल एनीमिया जांच, प्रोजेक्ट परख के तहत विद्यालयों में तिथि भोजन कार्यक्रम, राजस्व शिविर, भू-अर्जन मामलों के निष्पादन के लिए विशेष शिविर, पंचायत ज्ञान केंद्र का उद्घाटन तथा पंचायत दिवस जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इसके अलावा प्रोजेक्ट जागृति के अंतर्गत रक्तदान शिविर एवं सखी संवाद कार्यक्रम भी आयोजित होंगे।
अभियान के माध्यम से ग्रामीणों की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए जनसुनवाई कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। साथ ही अधिक से अधिक लोगों को सरकारी योजनाओं से जोड़ने और योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए विशेष पहल की जाएगी।

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इस अवसर पर उपस्थित जनप्रतिनिधियों एवं ग्रामीणों को अभियान की रूपरेखा तथा विभिन्न कार्यक्रमों की विस्तृत जानकारी दी गई। साथ ही कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए व्यापक प्रचार-प्रसार करने और जनभागीदारी सुनिश्चित करने का आग्रह किया गया।

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कार्यक्रम में अनुमंडल पदाधिकारी, पोड़ाहाट-चक्रधरपुर, प्रखंड विकास पदाधिकारी-सह-अंचल पदाधिकारी बंदगांव, जिला परिषद सदस्य, बंदगांव एवं सावनिया पंचायत के मुखिया, प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी (MOIC) बंदगांव, प्रखंड पशुपालन पदाधिकारी सहित कई जनप्रतिनिधि एवं ग्रामीण उपस्थित रहे।

चक्रधरपुर रेलवे स्टेशन का औचक निरीक्षण, एसडीपीओ ने परखी सुरक्षा व्यवस्था और यात्री सुविधाएं

चक्रधरपुर रेलवे स्टेशन का औचक निरीक्षण, एसडीपीओ ने परखी सुरक्षा व्यवस्था और यात्री सुविधाएं

चक्रधरपुर | चक्रधरपुर रेलवे स्टेशन पर शनिवार देर रात उस समय हलचल बढ़ गई, जब एसडीपीओ डॉ. सैयद मुस्तफा हासमी अचानक स्टेशन पहुंचे और यात्री सुविधाओं तथा सुरक्षा व्यवस्था का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने स्टेशन परिसर में मौजूद यात्रियों और आम लोगों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं तथा यात्रा संबंधी जानकारी प्राप्त की।

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निरीक्षण के क्रम में एसडीपीओ जीआरपी थाना भी पहुंचे, जहां उन्होंने थाना प्रभारी सोहेल खान से स्टेशन की सुरक्षा व्यवस्था, संदिग्ध गतिविधियों और यात्रियों की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर विस्तृत जानकारी ली। उन्होंने स्टेशन परिसर में सुरक्षा व्यवस्था को और सुदृढ़ बनाए रखने के निर्देश दिए।

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इस दौरान एसडीपीओ ने ट्रेन का इंतजार कर रहे यात्रियों से बातचीत कर उनकी यात्रा, गंतव्य और स्टेशन पर उपलब्ध सुविधाओं के संबंध में जानकारी ली। देर रात हुए इस औचक निरीक्षण से स्टेशन परिसर में मौजूद यात्रियों और आम लोगों के बीच सुरक्षा को लेकर भरोसा बढ़ा।

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गौरतलब है कि पिछले कुछ समय में रोजगार दिलाने के नाम पर बाल मजदूरों और युवतियों की दूसरे राज्यों में तस्करी के कई मामले सामने आए हैं। हालांकि चक्रधरपुर पुलिस की सक्रियता के कारण अब तक दर्जनों नाबालिग बच्चियों को रेस्क्यू कर उन्हें सीडब्ल्यूसी, चाईबासा के सुपुर्द किया जा चुका है।
वहीं, हाल ही में गुरुवार रात थाना प्रभारी अवधेश कुमार ने सात युवतियों को दूसरे प्रदेशों में संभावित शोषण और प्रताड़ना की आशंका से अवगत कराते हुए समझाया-बुझाया तथा सुरक्षित उनके घर वापस भेजा था। पुलिस की इस सतर्कता और सक्रियता को मानव तस्करी रोकने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

चाईबासा: ड्रिप सिंचाई और स्ट्रॉबेरी खेती से संजुक्ता दीदी बनीं आत्मनिर्भरता की मिसाल

चाईबासा: ड्रिप सिंचाई और स्ट्रॉबेरी खेती से संजुक्ता दीदी बनीं आत्मनिर्भरता की मिसाल

चाईबासा | “जहाँ चाह, वहाँ राह” कहावत को साकार करते हुए चाईबासा की संजुक्ता दीदी ने मेहनत, लगन और आधुनिक कृषि तकनीकों के माध्यम से सफलता की नई मिसाल कायम की है। Jharkhand State Livelihood Promotion Society (JSLPS) और कृषि विभाग के सहयोग से उन्होंने ड्रिप सिंचाई आधारित स्ट्रॉबेरी खेती अपनाकर न केवल अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत की है, बल्कि क्षेत्र की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनी हैं।
संजुक्ता दीदी प्रगति महिला समिति स्वयं सहायता समूह (SHG) की सक्रिय सदस्य हैं। पहले उनका परिवार पारंपरिक खेती पर निर्भर था, जिससे सीमित आय ही हो पाती थी। आर्थिक चुनौतियों के बावजूद उन्होंने कुछ नया करने का संकल्प लिया और आधुनिक खेती की दिशा में कदम बढ़ाया। इस सफर में उनके पति अभिमन्यु महतो ने भी हर कदम पर उनका सहयोग किया।

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वर्ष 2018 में JSLPS से जुड़ने के बाद संजुक्ता दीदी को आधुनिक खेती, ड्रिप सिंचाई तकनीक, फसल प्रबंधन और उन्नत कृषि पद्धतियों का प्रशिक्षण प्राप्त हुआ। नियमित मार्गदर्शन और तकनीकी सहायता से प्रेरित होकर उन्होंने ड्रिप सिंचाई आधारित खेती के साथ स्ट्रॉबेरी उत्पादन की शुरुआत की।

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शुरुआती दौर उनके लिए आसान नहीं था। आधुनिक तकनीकों की सीमित जानकारी, सिंचाई प्रबंधन, आर्थिक संसाधनों की कमी और उत्पादों के विपणन जैसी कई चुनौतियाँ सामने थीं। हालांकि, निरंतर मेहनत, प्रशिक्षण और विशेषज्ञों के मार्गदर्शन से उन्होंने इन चुनौतियों को अवसर में बदल दिया।
आज उनकी मेहनत का सकारात्मक परिणाम स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। ड्रिप सिंचाई तकनीक के उपयोग से पानी की बचत के साथ कम लागत में बेहतर उत्पादन संभव हुआ है। स्ट्रॉबेरी जैसी उन्नत फसल से उन्हें अतिरिक्त लाभ मिला और अब वे वर्ष में तीन अलग-अलग फसलें सफलतापूर्वक उगा रही हैं। खेती के विस्तार के लिए उन्होंने स्वयं सहायता समूह से लगभग एक लाख रुपये का ऋण लेकर कृषि कार्य को और आगे बढ़ाया।

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आधुनिक खेती और पशुपालन के समन्वय से संजुक्ता दीदी ने अपने परिवार के लिए स्थायी आजीविका का निर्माण किया है। वर्ष 2024-25 में उन्होंने खेती और पशुपालन से दो लाख रुपये से अधिक की आय अर्जित की। कृषि के साथ उन्होंने डेयरी गतिविधियों को भी अपनाया है और वर्तमान में उनके पास लगभग 15 गायें हैं, जिनसे उन्हें नियमित अतिरिक्त आय प्राप्त हो रही है।
आज संजुक्ता दीदी अपने क्षेत्र में एक सफल महिला कृषक के रूप में पहचान बना चुकी हैं। उनकी सफलता ने गाँव और आसपास की महिलाओं को आधुनिक खेती, ड्रिप सिंचाई और स्वरोजगार अपनाने के लिए प्रेरित किया है।
संजुक्ता दीदी की कहानी यह संदेश देती है कि सही मार्गदर्शन, आधुनिक तकनीक और आत्मविश्वास के बल पर ग्रामीण महिलाएँ भी आत्मनिर्भर और आर्थिक रूप से सशक्त बन सकती हैं।

अर्जुन मुंडा के समर्थन में उतरी भाजपा, चाईबासा प्रशासन के रवैये पर उठाए सवाल

अर्जुन मुंडा के समर्थन में उतरी भाजपा, चाईबासा प्रशासन के रवैये पर उठाए सवाल

रांची | पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा द्वारा चाईबासा में प्रशासन के रवैये पर सवाल उठाए जाने के बाद यह मामला राजनीतिक रूप लेता नजर आ रहा है। सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर अर्जुन मुंडा की नाराजगी सामने आने के बाद भारतीय जनता पार्टी उनके समर्थन में उतर आई है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू, नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी और गोड्डा सांसद निशिकांत दुबे समेत कई नेताओं ने राज्य सरकार और प्रशासन के रवैये पर सवाल खड़े किए हैं।

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लोकतांत्रिक मर्यादाओं का उल्लंघन: आदित्य साहू
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने ‘एक्स’ पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री, पूर्व केंद्रीय मंत्री और जनजातीय समाज के सम्मानित नेता अर्जुन मुंडा के साथ चाईबासा परिसदन में जिस प्रकार का व्यवहार किया गया, वह केवल एक व्यक्ति से जुड़ा मामला नहीं है, बल्कि लोकतांत्रिक परंपराओं, प्रशासनिक मर्यादाओं और जनजातीय समाज के सम्मान का भी विषय है। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक मूल्यों के उल्लंघन से जोड़ते हुए चिंता जताई।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अधिकारियों को दें नसीहत: बाबूलाल मरांडी

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नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को संबोधित करते हुए कहा कि सत्ता स्थायी नहीं होती और लोकतंत्र की मर्यादाओं तथा सामाजिक सम्मान को कमजोर नहीं होने देना चाहिए। उन्होंने कहा कि झारखंड की पहचान केवल सरकारों से नहीं, बल्कि यहां की संस्कृति, आदिवासी परंपराओं, सामाजिक सौहार्द और लोकतांत्रिक व्यवहार से बनती है।
मरांडी ने कहा कि यदि प्रशासन जनप्रतिनिधियों, वरिष्ठ सार्वजनिक व्यक्तित्वों और समाज की भावनाओं के प्रति संवेदनहीन हो जाए, तो यह केवल किसी एक व्यक्ति का नहीं बल्कि पूरे लोकतांत्रिक संस्कार का अपमान बन जाता है। उन्होंने कहा कि अधिकारियों को यह समझाया जाना चाहिए कि कुर्सी का अहंकार क्षणिक होता है, जबकि सम्मान और व्यवहार की छाप लंबे समय तक बनी रहती है।
2019 से यह सब झेल रहा हूं: निशिकांत दुबे
गोड्डा सांसद निशिकांत दुबे ने भी इस मामले पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यह स्थिति गलत है, लेकिन वे स्वयं वर्ष 2019 से ऐसी परिस्थितियों का सामना कर रहे हैं। दुबे ने दावा किया कि उनके और उनके परिवार के खिलाफ 52 मामले दर्ज हैं। उन्होंने कहा कि सामूहिक संघर्ष से ही ऐसी प्रवृत्तियों का मुकाबला किया जा सकता है।
क्या है पूरा मामला?

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दरअसल, पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने शुक्रवार को ‘एक्स’ पर पोस्ट कर चाईबासा में प्रशासन के रवैये पर नाराजगी जताई थी। उन्होंने लिखा था कि वर्तमान में वे न विधायक हैं, न सांसद और न ही मंत्री, लेकिन पूर्व में झारखंड के मुख्यमंत्री और केंद्र सरकार में मंत्री रह चुके हैं। इसके बावजूद उनके चाईबासा प्रवास के दौरान प्रशासन द्वारा शिष्टाचार और सामान्य सौजन्यता जैसी आवश्यक औपचारिकताओं का पालन नहीं किया गया।
अर्जुन मुंडा ने इसे प्रशासनिक अनुभव की कमी, प्रशासनिक अकड़ अथवा सरकार की लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति उदासीनता से जोड़ते हुए सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पहले की परंपरा के अनुसार जिले में आने वाले वरिष्ठ सार्वजनिक नेताओं से प्रशासन विकास, जनसरोकार और स्थानीय गतिविधियों पर चर्चा करता था, जिससे प्रशासनिक कार्यसंस्कृति और जिले की गरिमा मजबूत होती थी। उन्होंने यह भी कहा कि पश्चिम सिंहभूम एक ऐतिहासिक और जनजातीय बहुल जिला है, ऐसे में इस तरह का व्यवहार चिंता का विषय है।

चक्रधरपुर में P-4 तसर प्रजनन केंद्र का निरीक्षण, एसडीओ ने किसानों तक लाभ पहुंचाने पर दिया जोर

चक्रधरपुर में P-4 तसर प्रजनन केंद्र का निरीक्षण, एसडीओ ने किसानों तक लाभ पहुंचाने पर दिया जोर

चक्रधरपुर | अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीओ) पोड़ाहाट, चक्रधरपुर ने शुक्रवार को DMFT PMU टीम के साथ केंद्रीय रेशम बोर्ड द्वारा संचालित P-4 तसर प्रजनन केंद्र का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान केंद्र की कार्यप्रणाली, तसर उत्पादन प्रक्रिया तथा किसानों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं की विस्तृत जानकारी प्राप्त की गई।

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निरीक्षण के दौरान अधिकारियों को बताया गया कि यह केंद्र बंदगांव क्षेत्र के लगभग 300 रेशम किसानों से जुड़ा हुआ है। किसानों से कोकून क्रय कर उन्हें केंद्र में वैज्ञानिक एवं स्वच्छ वातावरण में विश्राम अवस्था (रेस्टिंग स्टेज) में सुरक्षित रखा जाता है। इसके बाद मॉथ द्वारा अंडे दिए जाने पर अनुसंधान एवं परीक्षण की प्रक्रिया पूरी कर रोगमुक्त अंडा समूह (DFL) तैयार किया जाता है, जिसे किसानों को तसर कीट पालन के लिए उपलब्ध कराया जाता है।

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अधिकारियों को यह भी जानकारी दी गई कि केंद्र में वर्ष में दो बार प्रजनन सत्र (ब्रीडिंग सीजन) आयोजित किए जाते हैं। वर्तमान में विश्राम अवस्था की प्रक्रिया जारी है, जिसके मध्य जून तक पूर्ण होने की संभावना है। इसके उपरांत कीट एवं रोग जांच सहित अन्य आवश्यक परीक्षण पूरे कर पंजीकृत किसानों के बीच DFL का वितरण किया जाएगा।
निरीक्षण के क्रम में बताया गया कि उद्योग विभाग के सहयोग से सिल्क किसानों, रेशम दूतों तथा अन्य हितधारकों के लिए समय-समय पर प्रशिक्षण कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं। संस्थान का मुख्य उद्देश्य तसर बीजों की आनुवंशिक शुद्धता बनाए रखना और किसानों को गुणवत्तापूर्ण एवं रोगमुक्त अंडे उपलब्ध कराना है।

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निरीक्षण के अंत में एसडीओ ने केंद्र प्रबंधन को निर्देश दिया कि अधिक से अधिक किसानों को इस पहल से जोड़ा जाए तथा व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए, ताकि क्षेत्र के सभी रेशम उत्पादक किसानों को इसका लाभ मिल सके और तसर उत्पादन को बढ़ावा दिया जा सके।

पश्चिम सिंहभूम के सामुदायिक पुस्तकालय प्रतिनिधियों ने उपायुक्त से की मुलाकात, शिक्षा व सामाजिक जागरूकता पर हुई चर्चा

पश्चिम सिंहभूम के सामुदायिक पुस्तकालय प्रतिनिधियों ने उपायुक्त से की मुलाकात, शिक्षा व सामाजिक जागरूकता पर हुई चर्चा

चाईबासा | पश्चिम सिंहभूम जिले के विभिन्न प्रखंडों में संचालित लगभग 24 निशुल्क सामुदायिक ग्रामीण एवं मोहल्ला पुस्तकालयों के प्रतिनिधियों ने शुक्रवार को जिला उपायुक्त से शिष्टाचार मुलाकात की। इस दौरान उपायुक्त ने पुस्तकालयों के संचालन, उनकी गतिविधियों तथा ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा के प्रसार को लेकर विस्तृत चर्चा की।

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उपायुक्त ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि पुस्तकालय समाज को जागरूक और शिक्षित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने पुस्तकालयों के बेहतर संचालन हेतु आवश्यक सहयोग और मदद उपलब्ध कराने का आश्वासन भी दिया।

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मौके पर उपायुक्त ने संचालन समितियों से पुस्तकालय परिसरों में वृक्षारोपण करने, बच्चों के लिए करियर काउंसलिंग कार्यक्रम आयोजित करने तथा समय-समय पर बुक फेयर आयोजित करने का आग्रह किया। उन्होंने स्थानीय भाषाओं में अध्ययन सामग्री और पाठ्यक्रम को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया।
इसके अलावा उन्होंने प्रत्येक माह की 20 तारीख को पुस्तकालय से जुड़े बच्चों का सामूहिक जन्मोत्सव मनाने की पहल करने की बात कही। साथ ही जिले में आयोजित रक्तदान शिविरों में बढ़-चढ़कर भाग लेने के लिए भी प्रेरित किया।
उपायुक्त ने कहा कि “एक बेहतर पुस्तकालय, एक बेहतर समाज की नींव है।”

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आपातकालीन स्थिति में पुलिस, अग्निशमन एवं चिकित्सा सेवाओं के लिए 112 डायल करें।
टीम पीआरडी, पश्चिम सिंहभूम, चाईबासा

चाईबासा में बाल-संवेदनशील पुलिसिंग पर कार्यशाला आयोजित, CWPO को दिया गया विशेष प्रशिक्षण

चाईबासा में बाल-संवेदनशील पुलिसिंग पर कार्यशाला आयोजित, CWPO को दिया गया विशेष प्रशिक्षण

चाईबासा | पश्चिम सिंहभूम पुलिस विभाग द्वारा यूनिसेफ एवं सेंटर फॉर चाइल्ड राइट्स (CCR), NUSRL के तकनीकी सहयोग से पुलिस लाइन स्थित कॉन्फ्रेंस हॉल में “बाल-संवेदनशील पुलिसिंग: मामले का दस्तावेजीकरण और बाल-संवेदनशील प्रक्रियाएं” विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विशेष किशोर पुलिस इकाइयों (SJPU) को सशक्त बनाना तथा बाल संरक्षण से जुड़ी प्रक्रियाओं को अधिक संवेदनशील और प्रभावी बनाना था।

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कार्यशाला में रांची जिले के विभिन्न थानों से आए 39 बाल कल्याण पुलिस अधिकारियों (CWPO) ने भाग लिया। इस दौरान पश्चिम सिंहभूम के पुलिस अधीक्षक अमित रेनू ने किशोर न्याय अधिनियम (JJ Act) एवं पॉक्सो अधिनियम (POCSO Act) के तहत मामलों के उचित दस्तावेजीकरण और बाल-संवेदनशील प्रक्रियाओं के महत्व पर प्रकाश डालते हुए अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

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पुलिस लाइन के मेजर मंसूर गोप ने बताया कि यूनिसेफ और CCR, NUSRL के सहयोग से सभी बाल कल्याण पुलिस पदाधिकारियों के लिए सात चरणों में संवेदनशीलता कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का पांचवां चरण सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
कार्यक्रम की शुरुआत CCR, NUSRL के अनिरुद्ध सरकार के स्वागत भाषण एवं प्रशिक्षण-पूर्व मूल्यांकन सत्र के साथ हुई। तकनीकी सत्र में यूनिसेफ से जुड़े बाल संरक्षण अधिकारी गौरव कुमार ने किशोर न्याय अधिनियम 2015 और झारखंड किशोर न्याय नियम 2017 के अंतर्गत बाल-संवेदनशील पुलिसिंग के सिद्धांतों पर विस्तार से जानकारी दी।

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उन्होंने गरिमा, गोपनीयता, भेदभाव-रहित दृष्टिकोण और बाल हित सर्वोपरि रखने जैसे विषयों के साथ-साथ बाल भिक्षावृत्ति, मादक पदार्थों की तस्करी और बाल अपराध से जुड़े मामलों की पहचान एवं कार्रवाई की प्रक्रिया पर भी चर्चा की।
कार्यशाला के दौरान बाल विवाह, लैंगिक शोषण तथा विधि से संघर्षरत बच्चों (CCL) से संबंधित मामलों पर केस स्टडी आधारित अभ्यास कराया गया। वहीं, बाल कल्याण समिति के सदस्य मोहम्मद समीम ने प्रतिभागियों की क्षमता आकलन और भविष्य की रणनीतियों पर समूह चर्चा का संचालन किया। कार्यक्रम में पालक देखभाल (Foster Care) एवं आफ्टर केयर योजनाओं की भी जानकारी साझा की गई।
इसके अतिरिक्त, पीसीआई इंडिया के सलाहकार हिमांशु जेना ने बाल विवाह उन्मूलन सहित विभिन्न बाल संरक्षण मुद्दों पर अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।

चाईबासा सदर अस्पताल की बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था पर भाजपा नेता ने उठाए सवाल

चाईबासा सदर अस्पताल की बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था पर भाजपा नेता ने उठाए सवाल

चाईबासा | भारतीय जनता पार्टी के पूर्व जिला उपाध्यक्ष पवन शंकर पांडे ने चाईबासा सदर अस्पताल की स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर राज्य सरकार एवं स्वास्थ्य विभाग पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जिले का एकमात्र सदर अस्पताल खुद बदहाल स्थिति में है, जिसके कारण मरीजों को समुचित स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं।

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पवन शंकर पांडे ने कहा कि अस्पताल में बड़े-बड़े भवन तो बना दिए गए हैं, लेकिन चिकित्सकों की भारी कमी बनी हुई है। कई विशेषज्ञ डॉक्टरों के पद अब भी रिक्त हैं, जिससे मरीजों को इलाज में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि अस्पताल में जनरेटर की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने के कारण बिजली कटौती के दौरान मरीजों को भीषण गर्मी झेलनी पड़ती है। बिजली चले जाने पर वार्डों में पंखे बंद हो जाते हैं और कई बार ऑपरेशन तक टॉर्च की रोशनी में करने की नौबत आ जाती है।

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उन्होंने कहा कि सदर अस्पताल में एमआरआई, सीटी स्कैन समेत कई आवश्यक चिकित्सा सुविधाओं का अभाव है। इसके कारण मरीजों को जांच और इलाज के लिए दूसरे शहरों का रुख करना पड़ता है। पांडे ने कहा कि पश्चिमी सिंहभूम एक आदिवासी बहुल एवं पिछड़ा जिला है, जहां अधिकांश लोगों के पास निजी अस्पतालों में महंगा इलाज कराने के संसाधन उपलब्ध नहीं हैं।

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भाजपा नेता ने ब्लड बैंक की स्थिति पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि पिछले कई महीनों से सदर अस्पताल के ब्लड बैंक से मरीजों को रक्त उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। उनके अनुसार अब तक ब्लड बैंक को लाइसेंस नहीं मिलने के कारण लोगों को रक्त के लिए जमशेदपुर जाना पड़ता है, जिससे मरीजों एवं उनके परिजनों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ रहा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि स्वास्थ्य विभाग चाईबासा सदर अस्पताल की समस्याओं के समाधान को लेकर गंभीर नहीं है। विभिन्न प्रखंडों एवं अनुमंडल अस्पतालों से मरीजों को सदर अस्पताल रेफर किया जाता है, लेकिन वहां से भी कई मरीजों को एमजीएम अस्पताल भेज दिया जाता है। इससे मरीजों और उनके परिजनों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
अंत में पवन शंकर पांडे ने राज्य सरकार से मांग की कि चाईबासा सदर अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं को जल्द सुदृढ़ किया जाए, ताकि जिले के लोगों को इलाज के लिए दूसरे शहरों पर निर्भर न रहना पड़े।