कोल्हान

नवोदय विद्यालय झींकपानी में सांस्कृतिक कार्यक्रम एवं पुरस्कार वितरण समारोह आयोजित, उपायुक्त ने विद्यार्थियों को किया प्रेरित

नवोदय विद्यालय झींकपानी में सांस्कृतिक कार्यक्रम एवं पुरस्कार वितरण समारोह आयोजित, उपायुक्त ने विद्यार्थियों को किया प्रेरित

चाईबासा | पश्चिमी सिंहभूम जिले के झींकपानी प्रखंड स्थित पीएम श्री जवाहर नवोदय विद्यालय में विद्यालय प्रबंध समिति की वार्षिक बैठक के बाद सांस्कृतिक कार्यक्रम एवं पुरस्कार वितरण समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में उपायुक्त-सह-जिला दंडाधिकारी मनीष कुमार ने विद्यार्थियों से संवाद कर उन्हें अनुशासन, सकारात्मक सोच, रचनात्मकता, आत्मविश्वास और निरंतर सीखने की प्रेरणा दी। इस दौरान उन्होंने विद्यार्थियों की शैक्षणिक, सांस्कृतिक एवं खेलकूद संबंधी उपलब्धियों की सराहना करते हुए कहा कि सर्वांगीण विकास के लिए पढ़ाई के साथ-साथ रचनात्मक गतिविधियों में भाग लेना भी जरूरी है।

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कार्यक्रम का शुभारंभ उपायुक्त मनीष कुमार, सहायक समाहर्ता ईरा जोरवाल, जिला शिक्षा पदाधिकारी और छात्राओं ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया। इसके बाद स्वागत नृत्य के माध्यम से अतिथियों का अभिनंदन किया गया। कार्यक्रम में असम से आई छात्राओं ने पारंपरिक बिहू नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति दी, जबकि छात्रा ऋषिका गौर ने कथक नृत्य के माध्यम से अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों ने सांस्कृतिक विविधता और रचनात्मकता का सुंदर समन्वय प्रस्तुत किया।

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विद्यार्थियों को अनुशासन और निरंतर प्रयास का दिया संदेश

उपायुक्त मनीष कुमार ने विद्यार्थियों से संवाद करते हुए उन्हें जीवन में लक्ष्य निर्धारित करने, नियमित अध्ययन करने और प्रत्येक कार्य को जिम्मेदारी के साथ पूरा करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी जीवन व्यक्तित्व निर्माण का महत्वपूर्ण चरण है। इस दौरान विकसित की गई अच्छी आदतें, अनुशासन और सीखने की ललक भविष्य में सफलता की मजबूत नींव तैयार करती हैं।

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उन्होंने कहा कि सफलता केवल परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त करने तक सीमित नहीं है, बल्कि ज्ञान को व्यवहार में उतारना, समस्याओं का समाधान खोजना, दूसरों के प्रति संवेदनशील रहना और कठिन परिस्थितियों में धैर्य बनाए रखना भी उतना ही आवश्यक है। विद्यार्थियों को अपनी रुचि और क्षमता पहचानकर निरंतर अभ्यास के माध्यम से उनमें सुधार करना चाहिए।

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उपायुक्त ने विद्यार्थियों को असफलताओं से निराश होने के बजाय उनसे सीख लेकर आगे बढ़ने, अपनी गलतियों को स्वीकार करने और उनमें सुधार करने की आदत विकसित करने की सलाह दी। उन्होंने पढ़ाई के साथ खेलकूद, संगीत, नृत्य, चित्रकला, विज्ञान और अन्य सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों में भाग लेने पर भी जोर दिया। उनके अनुसार, ऐसी गतिविधियों से आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता, टीम भावना और निर्णय लेने की क्षमता विकसित होती है।

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मानसिक स्वास्थ्य और सकारात्मक अभिव्यक्ति पर जोर

सहायक समाहर्ता ईरा जोरवाल ने विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य और भावनात्मक संतुलन के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को अपनी भावनाओं और विचारों को सकारात्मक एवं प्रभावी तरीके से व्यक्त करना चाहिए। पढ़ाई के दौरान आने वाली चुनौतियों का धैर्यपूर्वक सामना करना, आवश्यकता पड़ने पर शिक्षकों और अभिभावकों से संवाद करना तथा अपनी रुचियों के लिए समय निकालना व्यक्तित्व विकास में सहायक होता है।

जिला शिक्षा पदाधिकारी ने भी विद्यार्थियों को पूरे मनोयोग से पढ़ाई करने, विषयों को समझकर अध्ययन करने और नियमित रूप से पढ़ने की आदत विकसित करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने विद्यार्थियों को अपनी क्षमताओं पर विश्वास रखते हुए निरंतर सीखने और बेहतर प्रदर्शन करने का संदेश दिया।

विज्ञान एवं कला मॉडलों का किया अवलोकन

उपायुक्त मनीष कुमार ने विद्यार्थियों द्वारा तैयार किए गए विज्ञान एवं कला से संबंधित विभिन्न मॉडलों का अवलोकन किया। उन्होंने विद्यार्थियों से मॉडलों की अवधारणा, उपयोगिता और कार्यप्रणाली के बारे में जानकारी ली तथा उनकी रचनात्मक सोच और विषयों को व्यावहारिक रूप में प्रस्तुत करने की क्षमता की सराहना की।

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उन्होंने कहा कि विज्ञान और कला के माध्यम से नए विचारों को अभिव्यक्त करने तथा दैनिक जीवन की समस्याओं के समाधान खोजने के अवसर मिलते हैं। विद्यार्थियों को जिज्ञासु बने रहना चाहिए और पुस्तकीय ज्ञान के साथ प्रयोग एवं अनुभव के माध्यम से भी सीखने का प्रयास करना चाहिए।

शिवालिक सदन को मिला ओवरऑल चैंपियन का खिताब

विद्यालय में आयोजित वार्षिक खेलकूद प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले सदनों को सम्मानित किया गया। प्रतियोगिता में शिवालिक सदन ने ओवरऑल चैंपियन का खिताब हासिल किया। उदयगिरि सदन को द्वितीय और अरावली सदन को तृतीय पुरस्कार प्रदान किया गया।

शैक्षणिक क्षेत्र में अर्धवार्षिक परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को भी सम्मानित किया गया। कक्षा छह से आठ के कनीय वर्ग में अभिनव आनंद तथा कक्षा नौ से 12 के वरीय वर्ग में शुभम मंडल को पुरस्कार प्रदान किया गया।

नवोदय विद्यालय समिति द्वारा आयोजित कला उत्सव में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को भी सम्मानित किया गया। समूह वाद्ययंत्र प्रतियोगिता में गौरव, हरि, सोम और करण को, एकल गायन प्रतियोगिता में प्रीतम को तथा चित्रकला प्रतियोगिता में दीपांशु को पुरस्कार प्रदान किया गया। पुरस्कार वितरण के माध्यम से विद्यार्थियों की शैक्षणिक उपलब्धियों, खेल प्रतिभा और सांस्कृतिक अभिरुचि को प्रोत्साहित किया गया।

शिक्षक-शिक्षिकाओं के सहयोग से हुआ कार्यक्रम का आयोजन

कार्यक्रम का सफल आयोजन प्रभारी प्राचार्य पंकज कुमार गुप्ता के नेतृत्व में विद्यालय के शिक्षक-शिक्षिकाओं और अन्य सदस्यों के सहयोग से संपन्न हुआ। समारोह ने विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने, उपलब्धियों के लिए सम्मान प्राप्त करने और जीवन के महत्वपूर्ण मूल्यों को समझने का अवसर प्रदान किया।

अंत में वरीय शिक्षक सुशांत दास ने उपस्थित अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए उनके बहुमूल्य समय, मार्गदर्शन और सहभागिता के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया।

विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर मांगीलाल रूंगटा विद्यालय में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित

विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर मांगीलाल रूंगटा विद्यालय में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित

चाईबासा | पश्चिमी सिंहभूम जिले में विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर सोमवार को मांगीलाल रूंगटा +2 उच्च विद्यालय, चाईबासा में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को मानसिक स्वास्थ्य के महत्व के प्रति जागरूक करना, मानसिक तनाव एवं भावनात्मक समस्याओं को समझने तथा स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना था। इस दौरान विद्यार्थियों को पढ़ाई, खेलकूद, रचनात्मक गतिविधियों और संतुलित डिजिटल जीवनशैली के माध्यम से मानसिक स्वास्थ्य बेहतर बनाए रखने की जानकारी दी गई।

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कार्यक्रम में प्रशिक्षु आईएएस ईरा जोरवाल, सिविल सर्जन डॉ. मीना कलुंडिया, जिला शिक्षा पदाधिकारी प्रिंस कुमार, जिला गैर-संचारी रोग नियंत्रण कार्यक्रम की नोडल पदाधिकारी डॉ. मीनू कुमार, सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. शिव चरण हसदा, मनोचिकित्सक डॉ. दीपमाला, नैदानिक मनोवैज्ञानिक डॉ. भाग्यश्री कर, विद्यालय के प्राचार्य, जिला गैर-संचारी रोग नियंत्रण कार्यालय के कर्मी, एएनएम नर्सिंग स्कूल की छात्राएं एवं प्रशिक्षु, शिक्षक-शिक्षिकाएं तथा छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

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बच्चों के लिए शारीरिक स्वास्थ्य के साथ मानसिक स्वास्थ्य भी जरूरी

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रशिक्षु आईएएस ईरा जोरवाल ने कहा कि बच्चों के लिए शारीरिक स्वास्थ्य जितना महत्वपूर्ण है, मानसिक स्वास्थ्य भी उतना ही आवश्यक है। मानसिक रूप से स्वस्थ रहने से बच्चों की एकाग्रता बढ़ती है, सीखने की क्षमता में सुधार होता है और वे अपनी भावनाओं को समझने के साथ जीवन की चुनौतियों का बेहतर ढंग से सामना कर पाते हैं।

उन्होंने कहा कि बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने के लिए उनके व्यवहार में होने वाले बदलावों पर ध्यान देना जरूरी है। माता-पिता और शिक्षकों को बच्चों की भावनाओं, समस्याओं और दैनिक गतिविधियों के प्रति संवेदनशील रहना चाहिए, ताकि जरूरत पड़ने पर उन्हें समय पर सहयोग दिया जा सके।

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मोबाइल के अत्यधिक इस्तेमाल से बचें विद्यार्थी

जिला शिक्षा पदाधिकारी प्रिंस कुमार ने विद्यार्थियों को मोबाइल पर वीडियो देखने, गेम खेलने और सोशल मीडिया के इस्तेमाल में अत्यधिक समय व्यतीत करने से बचने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ खेलकूद, पुस्तक-पठन, संगीत, चित्रकला और अन्य रचनात्मक गतिविधियों में भी रुचि विकसित करनी चाहिए। नियमित दिनचर्या अपनाने तथा पढ़ाई, मनोरंजन और शारीरिक गतिविधियों के बीच संतुलन बनाए रखने पर भी उन्होंने जोर दिया।

मानसिक परेशानियों को नजरअंदाज न करें, विशेषज्ञों की लें मदद

सिविल सर्जन डॉ. मीना कलुंडिया ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना और इसे शारीरिक स्वास्थ्य के समान महत्व देना आवश्यक है। बच्चों में मानसिक तनाव या भावनात्मक परेशानी के संकेत दिखाई देने पर उन्हें डांटने अथवा उनकी समस्याओं को नजरअंदाज करने के बजाय उनकी बात समझने और सहयोग देने की जरूरत है।

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उन्होंने कहा कि परिवार के सदस्यों और शिक्षकों को बच्चों के लिए ऐसा वातावरण तैयार करना चाहिए, जिसमें वे बिना किसी संकोच के अपनी समस्याएं साझा कर सकें। जरूरत पड़ने पर योग्य मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों से परामर्श लेना चाहिए।

मानसिक स्वास्थ्य के प्रति सजग रहने की अपील

जिला गैर-संचारी रोग नियंत्रण कार्यक्रम की नोडल पदाधिकारी डॉ. मीनू कुमार ने लोगों से मानसिक स्वास्थ्य के प्रति सजग रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि स्वस्थ जीवन के लिए शारीरिक स्वास्थ्य के साथ मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखना भी जरूरी है। तनाव से बचने, पर्याप्त नींद लेने, नियमित व्यायाम करने और परिवार के सदस्यों के साथ समय बिताने से मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में मदद मिलती है।

उन्होंने मानसिक परेशानियों को छिपाने के बजाय उनके बारे में खुलकर बात करने तथा आवश्यकता पड़ने पर स्वास्थ्य विशेषज्ञों से परामर्श लेने की सलाह दी।

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डिजिटल जीवनशैली में संतुलन बनाए रखना जरूरी

सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. शिव चरण हसदा ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। जिस प्रकार शरीर को स्वस्थ रखना जरूरी है, उसी प्रकार मन को स्वस्थ रखना भी आवश्यक है। वर्तमान डिजिटल युग में स्मार्टफोन और सोशल मीडिया दैनिक जीवन का अभिन्न हिस्सा बन गए हैं। विशेषकर किशोरों और युवाओं में इंस्टाग्राम रील्स, यूट्यूब शॉर्ट्स और अन्य छोटे वीडियो देखने का चलन बढ़ रहा है।

उन्होंने कहा कि मनोरंजन के लिए सीमित समय तक वीडियो देखना सामान्य है, लेकिन लगातार कई घंटों तक मोबाइल स्क्रीन पर समय बिताने से पढ़ाई, कामकाज और पारिवारिक गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं। देर रात तक मोबाइल का इस्तेमाल करने से नींद पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है, जिससे अगले दिन की कार्यक्षमता और एकाग्रता प्रभावित हो सकती है।

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सकारात्मक गतिविधियों से बेहतर होता है मानसिक स्वास्थ्य

कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को संदेश दिया गया कि मानसिक स्वास्थ्य की देखभाल दैनिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। अपनी भावनाओं को समझना, समस्याओं को साझा करना, सकारात्मक गतिविधियों में भाग लेना और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञों की सहायता लेना मानसिक रूप से स्वस्थ रहने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।

साथ ही, अभिभावकों और शिक्षकों से बच्चों के व्यवहार में होने वाले बदलावों के प्रति सजग रहने तथा उन्हें सहयोगपूर्ण और सकारात्मक वातावरण उपलब्ध कराने की अपील की गई।

प्राकृतिक खेती से बदली बलेमा सामड की जिंदगी, ₹12 हजार की लागत में कमाया ₹53 हजार का शुद्ध मुनाफा

प्राकृतिक खेती से बदली बलेमा सामड की जिंदगी, ₹12 हजार की लागत में कमाया ₹53 हजार का शुद्ध मुनाफा

चक्रधरपुर | पश्चिमी सिंहभूम जिले के चक्रधरपुर प्रखंड अंतर्गत बिंडासोर्जोम गांव की महिला किसान बलेमा सामड ने प्राकृतिक खेती अपनाकर आत्मनिर्भरता की दिशा में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के तहत प्रशिक्षण और तकनीकी मार्गदर्शन प्राप्त कर उन्होंने अपने एक एकड़ खेत में प्राकृतिक खेती का मॉडल अपनाया। सीमित कृषि भूमि और खेती की बढ़ती लागत के बीच उन्होंने स्थानीय संसाधनों के उपयोग तथा फसल विविधीकरण के माध्यम से खेती की लागत को नियंत्रित करते हुए बेहतर आमदनी अर्जित की है। उनकी यह सफलता ग्रामीण क्षेत्र की अन्य महिला किसानों और छोटे एवं सीमांत किसानों के लिए प्रेरणास्रोत बन रही है।

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रासायनिक खेती छोड़ प्राकृतिक खेती को अपनाया

प्राकृतिक खेती अपनाने से पहले बलेमा सामड को खेती के लिए बाजार से रासायनिक उर्वरक और कीटनाशक खरीदने पड़ते थे। इससे प्रत्येक फसल चक्र में खेती की लागत बढ़ जाती थी और सीमित भूमि से होने वाली आमदनी का बड़ा हिस्सा कृषि कार्यों पर खर्च हो जाता था। ऐसे में बचत करना उनके लिए चुनौतीपूर्ण था।

राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन से जुड़ने के बाद उन्हें प्राकृतिक खेती के सिद्धांतों, स्थानीय संसाधनों के उपयोग और खेत में ही प्राकृतिक जैव-आदान तैयार करने की तकनीकों का प्रशिक्षण मिला। इसके बाद उन्होंने अपने एक एकड़ खेत में प्राकृतिक खेती का मॉडल लागू किया और बाजार से खरीदे जाने वाले रासायनिक आदानों पर निर्भरता कम करते हुए स्थानीय स्तर पर उपलब्ध प्राकृतिक सामग्रियों के इस्तेमाल को प्राथमिकता दी।

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स्थानीय संसाधनों से तैयार किए प्राकृतिक जैव-आदान

प्राकृतिक खेती के तहत बलेमा सामड ने बीजामृत, जीवामृत, घनजीवामृत, नीमास्त्र, अग्निअस्त्र, सुपर कम्पोस्ट और अंडा टॉनिक जैसी सामग्रियों का उपयोग किया। बीजामृत का इस्तेमाल बीज उपचार के लिए, जबकि जीवामृत और घनजीवामृत का उपयोग मिट्टी की गुणवत्ता तथा लाभकारी सूक्ष्मजीवों की सक्रियता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किया गया।

वहीं, सुपर कम्पोस्ट के माध्यम से मिट्टी में पोषक तत्वों की उपलब्धता बढ़ाने तथा नीमास्त्र और अग्निअस्त्र जैसे प्राकृतिक घोलों से कीट नियंत्रण के प्रयास किए गए। अंडा टॉनिक का उपयोग पौधों की वृद्धि और फलों की गुणवत्ता बेहतर बनाने के उद्देश्य से किया गया। इन उपायों से खेती में बाजार से खरीदे जाने वाले रासायनिक आदानों पर निर्भरता कम करने और स्थानीय संसाधनों के बेहतर उपयोग का अवसर मिला।

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फसल विविधीकरण से उत्पादन और आमदनी में बढ़ोतरी

बलेमा सामड ने एक ही फसल पर निर्भर रहने के बजाय अपने खेत में करेला, बरबटी, झींगा, नेनुआ और मक्का जैसी विभिन्न फसलों की खेती की। उन्होंने जून 2026 में फसलों की बुवाई की। नियमित देखभाल, प्राकृतिक जैव-आदानों के उपयोग और समय पर तुड़ाई के जरिए सब्जियों की कुल 18 बार व्यावसायिक तुड़ाई की गई।

अलग-अलग फसलों की खेती से खेत का बेहतर उपयोग हुआ और बाजार में विभिन्न प्रकार की उपज बेचकर आमदनी अर्जित करने का अवसर मिला। फसल विविधीकरण से एक ही फसल पर निर्भरता कम करने में भी मदद मिली। इस प्रकार प्राकृतिक खेती और फसल विविधीकरण के समन्वय से उन्होंने सीमित कृषि भूमि से बेहतर आर्थिक परिणाम हासिल किए।

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₹12 हजार की लागत में ₹65 हजार की सकल आय

बलेमा सामड की सफलता का प्रमुख पहलू खेती की लागत पर नियंत्रण और उससे प्राप्त आय का संतुलन है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, एक एकड़ खेत में प्राकृतिक खेती से उन्हें लगभग 1,800 किलोग्राम कुल उत्पादन प्राप्त हुआ। खेती पर कुल ₹12,000 की लागत आई।

मुख्य फसलों से ₹55,000 और सह-फसलों से ₹10,000 की आय हुई। इस तरह उनकी कुल सकल आय ₹65,000 रही। खेती की कुल लागत घटाने के बाद उन्हें ₹53,000 का शुद्ध लाभ प्राप्त हुआ।

यह उपलब्धि दर्शाती है कि उचित कृषि प्रबंधन, स्थानीय संसाधनों के उपयोग और फसल विविधीकरण के माध्यम से छोटे एवं सीमांत किसान भी अपनी खेती को अधिक लाभकारी बनाने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।

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मिट्टी के स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण पर जोर

प्राकृतिक खेती का लाभ केवल आमदनी बढ़ाने तक सीमित नहीं है। इस पद्धति में स्थानीय संसाधनों से तैयार जैव-आदानों का उपयोग कर रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों पर निर्भरता कम करने का प्रयास किया जाता है। जीवामृत, घनजीवामृत और सुपर कम्पोस्ट जैसी सामग्रियों का उचित उपयोग मिट्टी की जैविक गुणवत्ता सुधारने में सहायक हो सकता है। वहीं, प्राकृतिक कीट नियंत्रण के उपाय रासायनिक कीटनाशकों के इस्तेमाल को कम करने में मदद कर सकते हैं।

बलेमा सामड की पहल आजीविका को मजबूत बनाने, मिट्टी के स्वास्थ्य को बेहतर रखने और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उनके खेत में उत्पादित विभिन्न प्रकार की सब्जियां परिवार के भोजन में विविधता लाने में भी सहायक हैं।

किसानों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रयासरत जिला प्रशासन : मनीष कुमार

पश्चिमी सिंहभूम के उपायुक्त मनीष कुमार ने कहा कि प्राकृतिक खेती किसानों की लागत कम करने, स्थानीय संसाधनों का बेहतर उपयोग करने और आमदनी बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। बलेमा सामड जैसी महिला किसानों की सफलता ग्रामीण क्षेत्रों में टिकाऊ कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने के लिए प्रेरणादायक है।उन्होंने कहा कि किसानों को प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन और सरकारी योजनाओं की जानकारी उपलब्ध कराकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए जिला प्रशासन निरंतर प्रयासरत है। प्राकृतिक खेती और फसल विविधीकरण अपनाकर किसान अपनी आजीविका को और मजबूत बना सकते हैं।

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कम खर्च में बेहतर खेती करने की मिली नई राह : बलेमा सामड

महिला किसान बलेमा सामड ने बताया कि पहले खेती में खाद और कीटनाशक खरीदने पर काफी खर्च करना पड़ता था। राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के तहत प्रशिक्षण मिलने के बाद उन्होंने अपने खेत में प्राकृतिक खेती की तकनीकों को अपनाया। स्थानीय स्तर पर उपलब्ध सामग्रियों से प्राकृतिक खाद तैयार की और कीट नियंत्रण के उपायों का इस्तेमाल किया।

उन्होंने कहा कि अलग-अलग सब्जियों की खेती और कई बार तुड़ाई से अच्छी आमदनी अर्जित करने का अवसर मिला है। प्राकृतिक खेती ने उन्हें कम खर्च में बेहतर ढंग से खेती करने की नई राह दिखाई है। उन्होंने अन्य किसानों से भी प्राकृतिक खेती की तकनीकों को सीखने और अपनाने की अपील की।

अन्य किसानों के लिए बनीं प्रेरणास्रोत

बलेमा सामड की सफलता यह संदेश देती है कि खेती को लाभकारी बनाने के लिए केवल अधिक भूमि या महंगे कृषि संसाधनों की आवश्यकता नहीं है। उचित प्रशिक्षण, स्थानीय संसाधनों का उपयोग, फसल विविधीकरण और नियमित देखभाल के जरिए छोटे एवं सीमांत किसान भी अपनी आय बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।

राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के तहत प्राप्त प्रशिक्षण को अपने खेत में लागू कर बलेमा सामड ने खेती की लागत नियंत्रित करने और आमदनी बढ़ाने का उदाहरण प्रस्तुत किया है। उनकी उपलब्धि ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को प्रोत्साहित करने की दिशा में महत्वपूर्ण है।

चाईबासा में कांग्रेस ने मनाया ‘काला दिवस’, प्रधानमंत्री का पुतला दहन कर जताया विरोध

चाईबासा में कांग्रेस ने मनाया ‘काला दिवस’, प्रधानमंत्री का पुतला दहन कर जताया विरोध

चाईबासा | लोकतंत्र, संविधान तथा देश की चुनावी व्यवस्था की निष्पक्षता और पारदर्शिता की रक्षा के संकल्प के साथ जिला कांग्रेस कमिटी, पश्चिमी सिंहभूम ने शनिवार को चाईबासा में ‘काला दिवस’ मनाया। इस दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने शहीद पार्क चौक पर विरोध प्रदर्शन करते हुए प्रधानमंत्री का पुतला दहन किया। प्रदर्शन के माध्यम से पार्टी ने लोकतांत्रिक मूल्यों, नागरिकों के मताधिकार और चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता से जुड़े मुद्दों पर अपना विरोध दर्ज कराया। कार्यक्रम का नेतृत्व कांग्रेस जिलाध्यक्ष सह विधायक सोनाराम सिंकु ने किया।

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कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कांग्रेस जिला प्रभारी धर्मेंद्र सोनकर ने कहा कि लोकतंत्र की वास्तविक ताकत जनता के मताधिकार और स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव व्यवस्था में निहित है। लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता बनाए रखना और संविधान प्रदत्त अधिकारों की रक्षा करना प्रत्येक नागरिक का दायित्व है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी इन बुनियादी सवालों पर अपनी आवाज बुलंद करती रहेगी और जनहित से जुड़े मुद्दों पर संघर्ष जारी रखेगी।

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कांग्रेस जिलाध्यक्ष सह विधायक सोनाराम सिंकु ने कहा कि ‘काला दिवस’ मनाने का उद्देश्य लोकतंत्र, संविधान और चुनावी निष्पक्षता से जुड़े सवालों की ओर जनता का ध्यान आकर्षित करना है। उन्होंने कहा कि मताधिकार केवल मतदान करने का अधिकार नहीं, बल्कि लोकतंत्र में जनता की भागीदारी और उसकी आवाज का आधार है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता का विश्वास बनाए रखने के लिए चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता सर्वोपरि है।

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उन्होंने कहा कि कांग्रेस इन लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा और संवैधानिक अधिकारों के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है। पार्टी का संघर्ष किसी व्यक्ति विशेष तक सीमित नहीं है, बल्कि यह लोकतांत्रिक परंपराओं, संवैधानिक मर्यादाओं और जनता के अधिकारों की रक्षा के व्यापक संकल्प से जुड़ा है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस कार्यकर्ता जनहित के मुद्दों पर एकजुट होकर लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठाते रहेंगे।

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कार्यक्रम के माध्यम से जिला कांग्रेस कमिटी, पश्चिमी सिंहभूम ने लोकतंत्र और संविधान की रक्षा, मताधिकार की गरिमा बनाए रखने तथा चुनावी व्यवस्था में जनता का विश्वास मजबूत करने के अपने संकल्प को दोहराया।

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ये रहे उपस्थित

कार्यक्रम में विधानसभा प्रभारी मायाधर बेहरा, चंद्रशेखर दास, रईस रिजवी छब्बन, सह प्रभारी नितिमा बारी, पूर्व जिलाध्यक्ष सन्नी सिंकु, जिला प्रवक्ता त्रिशानु राय, युवा कांग्रेस जिलाध्यक्ष प्रीतम बांकिरा, ओबीसी प्रकोष्ठ अध्यक्ष रंजीत यादव, एनएसयूआई जिलाध्यक्ष अनीष गोप, आरजीपीआरएस जिलाध्यक्ष रितेश तामसोय, यूथ इंटक जिलाध्यक्ष सुरेश सावैयां, जिला परिषद सदस्य जय प्रकाश महतो, शिक्षा विभाग के चेयरमैन पुरुषोत्तम दास पान, प्रखंड अध्यक्ष दिकु सावैयां, सिकुर गोप, सकारी दोंगो, सुरेश चंद्र सावैयां, विजय सिंह सामड, मंडल अध्यक्ष सोमा पुरती और अशोक मुंडरी सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता उपस्थित थे।

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इसके अलावा कैरा बिरुवा, सत्याशीला हेम्ब्रम, अशोक बारिक, मोहन सिंह हेम्ब्रम, अविनाश कोड़ाह, जम्बी कुदादा, अशरफुल होदा, जंग बहादुर, राखी सालूजा, अमृत माझी, इम्तियाज खान, जया सिंकु, प्रदीप बाग, विजय लक्ष्मी सिंकु, राधा मोहन बनर्जी, राकेश सिंह, बालेमा कुई, संतोष सिन्हा, संदीप सन्नी देवगम, लियोनर्ड बोदरा, संजय रवि, राजीव बोयपाई, प्रतीक कुमार, सनातन बिरुवा, मोटाई सुंडी, शिवा बांदिया, क्रांति प्रकाश, गोपाल बोदरा, लक्ष्मी बेसरा, मथुरा चाम चाम्पिया, विक्रमादित्य सुंडी, गंगा कच्छप, एस. बिरुवा, सुरेश कच्छप, बिक्रम बिरुली, बुल्लू दास, सुल्तान अहमद, चंदन यादव, करण सोनकर, हेमंत भंज, सुशील दास और भोलेनाथ बोदरा समेत अन्य कार्यकर्ता मौजूद थे।

जेटेया, नोवामुंडी और टाटानगर में छिनतई व लूट की घटनाओं पर पुलिस की कार्रवाई, एक आरोपी गिरफ्तार

जेटेया, नोवामुंडी और टाटानगर में छिनतई व लूट की घटनाओं पर पुलिस की कार्रवाई, एक आरोपी गिरफ्तार

चाईबासा | पश्चिमी सिंहभूम जिले के जेटेया, नोवामुंडी और टाटानगर क्षेत्र में हुई छिनतई और लूट की अलग-अलग घटनाओं के उद्भेदन के लिए पुलिस ने विशेष छापेमारी अभियान चलाया। इस दौरान पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपी की पहचान गोपाल कोड़ा (करीब 29 वर्ष), पिता मातलूम सिंह कोड़ा, निवासी पाताहातु, थाना जगन्नाथपुर, जिला पश्चिमी सिंहभूम के रूप में हुई है। पुलिस ने उसके पास से घटना में प्रयुक्त हथियार, बिना नंबर प्लेट की मोटरसाइकिल, नकदी और घटना के समय पहने गए कपड़े बरामद करने का दावा किया है।

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पुलिस की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, जिले के जेटेया, नोवामुंडी और टाटानगर क्षेत्र में छिनतई एवं लूट की तीन घटनाएं सामने आई थीं। संबंधित थानों में दर्ज प्राथमिकी के आधार पर पुलिस ने जांच तेज करते हुए विशेष छापेमारी दल का गठन किया।

मोबाइल छिनतई के दौरान युवक पर हमला

जेटेया थाना कांड संख्या 12/26 के अनुसार, 5 अक्टूबर 2026 की शाम करीब 6:45 बजे कातिकोडा निवासी विभीषण तिरिया प्रमाणपत्र निकलवाने के लिए कोटगढ़ चौक गए थे। शाम करीब 7 बजे लौटने के दौरान कोटगढ़ बाजार से जेटेया थाना की ओर जाते समय उन्होंने अपनी मोटरसाइकिल रोककर फोन पर बात करना शुरू किया।

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इसी दौरान सड़क किनारे खड़ी एक लड़की से उन्होंने कुछ पूछताछ की, लेकिन उसने कोई जवाब नहीं दिया। आरोप है कि तभी पल्सर मोटरसाइकिल पर सवार तीन युवक वहां पहुंचे और विभीषण तिरिया का मोबाइल फोन छीन लिया। मोबाइल उठाने के बाद आरोपियों ने दोबारा उसे छीन लिया। विरोध करने पर एक युवक ने पीछे से उनके कान के पास हमला कर दिया, जिससे वह घायल हो गए।

मुर्गी फार्म में घुसकर चोरी का प्रयास

नोवामुंडी थाना कांड संख्या 30/26 के अनुसार, शिकायतकर्ता रूपेश ठाकुर 6 अक्टूबर की सुबह अपने मुर्गी फार्म गए थे। दिनभर काम करने के बाद घर लौटने पर वहां तैनात सुरक्षा गार्ड ने मोबाइल फोन के माध्यम से सूचना दी कि शाम करीब 6:40 बजे दो व्यक्ति चोरी के इरादे से फार्म में घुसे थे।

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आरोप है कि इनमें से एक व्यक्ति हथियार दिखाकर सुरक्षा गार्ड को चुप रहने की धमकी दे रहा था। इसके बाद आरोपियों ने ड्रॉअर की तलाशी ली। पैसे नहीं मिलने पर ड्रॉअर को क्षतिग्रस्त कर दिया गया।

बाइक सवार तीन युवकों ने फेरीवाले से लूटे 6 हजार रुपये

टाटानगर ओपी कांड संख्या 55/26 के अनुसार, 6 अक्टूबर 2026 को दोपहर करीब 12:30 बजे पश्चिम बंगाल के बांकोड़ा थाना क्षेत्र के निवासी बताए गए इमामुद्दीन अंसारी फेरी का काम करने के लिए क्षेत्र में आए थे।

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आरोप है कि एक सुनसान पुलिया के पास काले रंग की पल्सर मोटरसाइकिल पर सवार तीन युवकों ने उनकी बाइक को धक्का मारकर गिरा दिया। इसके बाद उन्हें बाइक से उतारकर गर्दन पर कटारी रख दी और उनकी जेब से 6,000 रुपये नकद तथा खाने-पीने का कुछ सामान लूट लिया।

विशेष छापेमारी दल ने आरोपी को किया गिरफ्तार

पुलिस अधीक्षक, पश्चिमी सिंहभूम, चाईबासा के निर्देश पर अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी किरीबुरू एवं जगन्नाथपुर के नेतृत्व में विशेष छापेमारी दल का गठन किया गया था। पुलिस के अनुसार, अभियान के दौरान गोपाल कोड़ा को गिरफ्तार किया गया। उसके पास से घटनाओं से संबंधित सामान बरामद किए गए हैं।

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पुलिस ने हथियार, बाइक और नकदी की बरामदगी की

छापेमारी के दौरान पुलिस ने निम्नलिखित सामान बरामद किए हैं:

– एक लोहे का चापड़, जिसका इस्तेमाल घटना में किए जाने की बात कही गई है।
– बिना नंबर प्लेट की काले और लाल रंग की पल्सर एनएस 160 मोटरसाइकिल।
– 3,600 रुपये नकद।
– घटना के समय पहने गए कपड़े।

आरोपी के खिलाफ पहले से कई मामले दर्ज

पुलिस की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, गिरफ्तार आरोपी के विरुद्ध जगन्नाथपुर, हाटगम्हरिया, खरसावां और मुफस्सिल थाना क्षेत्रों में पहले से कई आपराधिक मामले दर्ज हैं।

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छापेमारी दल में नोवामुंडी के पुलिस निरीक्षक वासुदेव मुंडा, जेटेया थाना प्रभारी रितेश कुमार सिंह, नोवामुंडी थाना प्रभारी नयन कुमार सिंह, जेटेया थाना के संजीत कुमार रजक एवं संतोष पिंगुआ, नोवामुंडी के तारकनाथ सिंह तथा सशस्त्र बल के जवान शामिल थे।

पुलिस की इस कार्रवाई से क्षेत्र में हुई छिनतई और लूट की घटनाओं की जांच में प्रगति होने की उम्मीद है। अन्य आरोपियों की संलिप्तता के संबंध में जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

मनोहरपुर में 11 किसानों को 90% अनुदान पर मिले सोलर पंप सेट, सांसद जोबा माझी ने किया वितरण

मनोहरपुर में 11 किसानों को 90% अनुदान पर मिले सोलर पंप सेट, सांसद जोबा माझी ने किया वितरण

मनोहरपुर | किसान समृद्धि योजना के तहत शनिवार को मनोहरपुर प्रखंड कार्यालय परिसर में 11 किसानों के बीच सोलर पंप सेट का वितरण किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में सिंहभूम की सांसद जोबा माझी उपस्थित रहीं। उन्होंने लाभुक किसानों को सोलर पंप सेट प्रदान करते हुए कृषि कार्यों को बढ़ावा देने और सरकारी योजनाओं का लाभ उठाकर खेती को अधिक लाभकारी बनाने की अपील की।

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इस दौरान सुगड़ सलीम चेरवा, नादो चेरवा, अजीत चेरवा, विश्राम चेरवा, प्रतिमा महतो, गंगाराम तिर्की, छगन लाल महतो, सोनाराम तिर्की, राजेश महतो, मोहन कुम्हार और मेजरीन सिंदरी को 90 प्रतिशत अनुदान पर सोलर पंप सेट दिए गए।

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मौके पर सांसद जोबा माझी ने कहा कि मनोहरपुर क्षेत्र के किसान मेहनती हैं और यहां कृषि की अपार संभावनाएं हैं। सिंचाई की बेहतर सुविधा उपलब्ध होने से खेती को और अधिक उन्नत बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि सोलर पंप सेट किसानों के लिए उपयोगी साबित होंगे और सिंचाई व्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

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सांसद ने संबंधित विभागीय अधिकारियों को सोलर पंप वितरण का लक्ष्य बढ़ाने और योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार करने का निर्देश दिया, ताकि अधिक से अधिक किसान इसका लाभ उठा सकें। उन्होंने ग्रामीणों से कृषि कार्यों से जुड़ने और खेती को आजीविका का मजबूत साधन बनाने की अपील करते हुए कहा कि राज्य सरकार किसानों के हित में कई योजनाएं संचालित कर रही है। किसानों को इन योजनाओं की जानकारी लेकर उनका लाभ उठाना चाहिए, ताकि कृषि उत्पादन बढ़ने के साथ उनकी आर्थिक स्थिति भी मजबूत हो सके।

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कार्यक्रम के दौरान संबंधित एजेंसी के प्रतिनिधियों ने लाभुक किसानों को सोलर पंप सेट के संचालन और उपयोग की विस्तृत जानकारी दी।

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इस अवसर पर बीडीओ शक्ति कुंज, सीओ प्रदीप कुमार, उप प्रमुख दीपक एक्का, मुखिया पूजा कुजूर, अशोक बांदा, बीटीएम बंदना उरांव, चंचल रवानी, विक्रम सिंह, अजहर अली, मोहम्मद उमर सहित अन्य जनप्रतिनिधि, लाभुक किसान और ग्रामीण उपस्थित थे।

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गुदड़ी और टोंटो में दिव्यांगजनों व वरिष्ठ नागरिकों के लिए आकलन शिविर संपन्न, 1,100 लोगों ने लिया भाग

गुदड़ी और टोंटो में दिव्यांगजनों व वरिष्ठ नागरिकों के लिए आकलन शिविर संपन्न, 1,100 लोगों ने लिया भाग

चाईबासा | पश्चिमी सिंहभूम जिले के आकांक्षी प्रखंड गुदड़ी और टोंटो में दिव्यांगजनों एवं वरिष्ठ नागरिकों को आवश्यक सहायक उपकरण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से भारतीय कृत्रिम अंग निर्माण निगम (एएलआईएमसीओ) के सहयोग से आयोजित आकलन शिविरों का सफलतापूर्वक समापन हो गया। दोनों प्रखंडों में आयोजित इन शिविरों में लगभग 1,100 दिव्यांगजनों एवं वरिष्ठ नागरिकों ने भाग लिया। शिविरों के माध्यम से जरूरतमंद लोगों की शारीरिक स्थिति और दैनिक जीवन की आवश्यकताओं का आकलन किया गया, ताकि उन्हें उनकी जरूरत के अनुरूप सहायक उपकरण उपलब्ध कराए जा सकें।

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आकांक्षी प्रखंड गुदड़ी में 5 एवं 6 अक्टूबर 2026 को आयोजित शिविर में लगभग 600 दिव्यांगजनों एवं वरिष्ठ नागरिकों ने भाग लिया। वहीं, टोंटो प्रखंड में 7 एवं 8 अक्टूबर 2026 को आयोजित शिविर में लगभग 500 लोगों की सहभागिता रही।

इसी क्रम में उपायुक्त मनीष कुमार एवं उप विकास आयुक्त उत्कर्ष कुमार ने सहायक समाहर्ता ईरा जोरवाल तथा जिला समाज कल्याण पदाधिकारी श्वेता भारती की उपस्थिति में टोंटो प्रखंड में संचालित आकलन शिविर का निरीक्षण किया। इस दौरान अधिकारियों ने शिविर की गतिविधियों का जायजा लिया और उपस्थित दिव्यांगजनों एवं वरिष्ठ नागरिकों से संवाद कर उनकी आवश्यकताओं की जानकारी प्राप्त की। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को पात्र लाभुकों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए आवश्यक समन्वय सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।

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उपायुक्त मनीष कुमार ने कहा कि जिला प्रशासन का उद्देश्य दिव्यांगजनों एवं वरिष्ठ नागरिकों को सम्मानजनक, सुगम और आत्मनिर्भर जीवन जीने के लिए आवश्यक सहायता उपलब्ध कराना है। एएलआईएमसीओ के सहयोग से आयोजित ये शिविर जरूरतमंद लोगों की वास्तविक आवश्यकताओं की पहचान करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल हैं। आकलन के बाद पात्र लाभुकों को उनकी जरूरत के अनुरूप सहायक उपकरण उपलब्ध कराए जाएंगे, जिससे दैनिक गतिविधियों में सुविधा मिलने के साथ उनकी गतिशीलता और आत्मनिर्भरता को भी बढ़ावा मिलेगा।

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उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन समाज के वंचित एवं जरूरतमंद वर्गों तक जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। विशेष रूप से आकांक्षी प्रखंडों में इस तरह के शिविर आयोजित कर यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है कि कोई भी पात्र दिव्यांगजन या वरिष्ठ नागरिक आवश्यक सहायता से वंचित न रहे।
उप विकास आयुक्त उत्कर्ष कुमार ने कहा कि दिव्यांगजनों एवं वरिष्ठ नागरिकों को उनकी जरूरत के अनुसार सहायक उपकरण उपलब्ध कराना उनके जीवन को अधिक सहज, सुरक्षित और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में प्रभावी कदम है। एएलआईएमसीओ के तकनीकी सहयोग से शिविरों में लाभुकों की आवश्यकताओं का आकलन किया गया है। इसके आधार पर पात्र व्यक्तियों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत सहायक उपकरण उपलब्ध कराए जाएंगे।

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उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन का प्रयास है कि सरकारी योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। गुदड़ी और टोंटो जैसे आकांक्षी प्रखंडों में इस प्रकार के शिविर आयोजित होने से जरूरतमंद लोगों को स्थानीय स्तर पर सुविधा मिलती है और उन्हें अपनी आवश्यकताओं का आकलन कराने के लिए दूर-दराज के क्षेत्रों में जाने की परेशानी से राहत मिलती है।

एडीआईपी और राष्ट्रीय वयोश्री योजना के तहत मिलेंगे उपकरण

आकलन के बाद पात्र दिव्यांगजनों को दिव्यांगजनों के सहायक उपकरण खरीदने एवं उपलब्ध कराने संबंधी सहायता योजना (एडीआईपी) तथा पात्र वरिष्ठ नागरिकों को राष्ट्रीय वयोश्री योजना (आरवीवाई) के तहत उनकी आवश्यकताओं के अनुरूप सहायक उपकरण उपलब्ध कराए जाएंगे।

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इन उपकरणों में व्हीलचेयर, बैसाखी, वॉकर, चलने की छड़ी, दृष्टिबाधित व्यक्तियों के लिए सफेद छड़ी, श्रवण बाधित व्यक्तियों के लिए श्रवण यंत्र, कृत्रिम अंग, कैलिपर्स तथा अन्य सहायक उपकरण शामिल हो सकते हैं। वरिष्ठ नागरिकों को भी पात्रता एवं आवश्यकता के अनुसार छड़ी, वॉकर, व्हीलचेयर, श्रवण यंत्र, चश्मा और अन्य निर्धारित उपकरण उपलब्ध कराए जाएंगे।

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उपकरणों का अंतिम चयन लाभुक की शारीरिक स्थिति, व्यक्तिगत जरूरत, आकलन के निष्कर्ष और संबंधित योजना के पात्रता मानदंडों के आधार पर किया जाएगा।

स्पॉन्सरशिप योजना के तहत 145 बच्चों को मिलेगा लाभ, डीसी ने दिए पारदर्शी क्रियान्वयन के निर्देश

स्पॉन्सरशिप योजना के तहत 145 बच्चों को मिलेगा लाभ, डीसी ने दिए पारदर्शी क्रियान्वयन के निर्देश

चाईबासा | पश्चिमी सिंहभूम जिला समाहरणालय स्थित प्रकोष्ठ में उपायुक्त मनीष कुमार की अध्यक्षता में स्पॉन्सरशिप योजना से संबंधित समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में उप विकास आयुक्त उत्कर्ष कुमार, सहायक समाहर्ता ईरा जोरवाल, जिला बाल संरक्षण पदाधिकारी पुनीता तिवारी सहित संबंधित पदाधिकारी उपस्थित रहे।

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बैठक के दौरान स्पॉन्सरशिप योजना के तहत प्राप्त आवेदनों एवं संलग्न दस्तावेजों की विस्तृत समीक्षा की गई। समीक्षा के बाद निर्धारित पात्रता मानकों को पूरा करने वाले 145 योग्य बच्चों को स्पॉन्सरशिप योजना का लाभ प्रदान करने की स्वीकृति दी गई।

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शिक्षा, पोषण और स्वास्थ्य के लिए मिलेगा सहयोग
स्पॉन्सरशिप योजना मिशन वात्सल्य के तहत संचालित परिवार आधारित गैर-संस्थागत देखभाल की महत्वपूर्ण व्यवस्था है। इसका उद्देश्य कठिन परिस्थितियों में रह रहे तथा देखभाल एवं संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चों को उनके परिवार या विस्तारित परिवार के साथ सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना है। योजना के माध्यम से बच्चों की शिक्षा, पोषण, स्वास्थ्य एवं समुचित विकास के लिए आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है।
योजना का उद्देश्य बच्चों को अनावश्यक रूप से संस्थागत देखभाल में जाने से रोकते हुए परिवार एवं समुदाय के बीच सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण में उनके विकास को सुनिश्चित करना है।

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प्रति बच्चे ₹4,000 प्रतिमाह की सहायता
मिशन वात्सल्य के तहत स्पॉन्सरशिप योजना में पात्र बच्चों के लिए प्रति बच्चा ₹4,000 प्रतिमाह की आर्थिक सहायता का प्रावधान है। यह राशि बच्चों की देखभाल, शिक्षा, स्वास्थ्य एवं विकास से जुड़ी आवश्यकताओं को पूरा करने में परिवार को सहयोग प्रदान करती है।

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उपायुक्त मनीष कुमार ने पात्र बच्चों को योजना का लाभ समयबद्ध एवं पारदर्शी तरीके से उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि जिले में कोई भी पात्र बच्चा अपने अधिकार एवं कल्याणकारी योजनाओं के लाभ से वंचित नहीं रहना चाहिए। यह जिला प्रशासन की प्राथमिकता है।

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उन्होंने संबंधित पदाधिकारियों को बच्चों के हित में संवेदनशीलता के साथ कार्य करने तथा योजना के लाभ की निरंतर निगरानी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। उपायुक्त ने कहा कि जिला प्रशासन स्पॉन्सरशिप योजना के माध्यम से बच्चों के संरक्षण, शिक्षा, स्वास्थ्य एवं समग्र विकास को मजबूत करते हुए उन्हें सुरक्षित, सम्मानजनक एवं बेहतर भविष्य की दिशा में आगे बढ़ाने के लिए लगातार प्रयासरत है।

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सड़क दुर्घटना पीड़ितों को ₹1.50 लाख तक कैशलेस उपचार, पीएम राहत योजना का लाभ दिलाने पर जोर

सड़क दुर्घटना पीड़ितों को ₹1.50 लाख तक कैशलेस उपचार, पीएम राहत योजना का लाभ दिलाने पर जोर

चाईबासा | सड़क दुर्घटनाओं में घायल व्यक्तियों को दुर्घटना के बाद के स्वर्णिम समय में तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने तथा आर्थिक कारणों से उपचार में किसी प्रकार की देरी रोकने के उद्देश्य से केंद्र सरकार द्वारा प्रधानमंत्री–सड़क दुर्घटना पीड़ितों के अस्पताल में भर्ती एवं सुनिश्चित उपचार योजना (पीएम राहत) लागू की गई है। योजना का मुख्य उद्देश्य सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मृत्यु को कम करना और पात्र दुर्घटना पीड़ितों को समय पर जीवनरक्षक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना है।

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पश्चिमी सिंहभूम के जिला परिवहन पदाधिकारी श्री गौतम कुमार ने बताया कि पीएम राहत योजना के तहत किसी भी श्रेणी की सड़क पर मोटर वाहन के कारण हुई दुर्घटना के प्रत्येक पात्र पीड़ित को दुर्घटना की तिथि से अधिकतम सात दिनों तक प्रति पीड़ित ₹1.50 लाख तक का कैशलेस उपचार उपलब्ध कराने का प्रावधान है। इसके लिए दुर्घटना पीड़ित या उसके परिजनों को उपचार के लिए तत्काल राशि की व्यवस्था करने की आवश्यकता नहीं होगी।

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उन्होंने बताया कि योजना में दुर्घटना के बाद के शुरुआती समय को विशेष महत्व दिया गया है। गंभीर रूप से घायल व्यक्ति को तत्काल स्थिरीकरण उपचार उपलब्ध कराया जाना आवश्यक है, ताकि उपचार में देरी के कारण किसी व्यक्ति की जान न जाए। योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए पुलिस, अस्पताल, स्वास्थ्य विभाग एवं परिवहन विभाग के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है।

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जिला परिवहन पदाधिकारी ने बताया कि सड़क दुर्घटना की सूचना मिलने के बाद संबंधित पुलिस पदाधिकारी द्वारा इलेक्ट्रॉनिक विस्तृत दुर्घटना प्रतिवेदन (ई-डार) पर दुर्घटना एवं पीड़ित से संबंधित आवश्यक विवरण समयबद्ध तरीके से दर्ज किया जाना है। ई-डार व्यवस्था के माध्यम से दुर्घटना की सूचना, पीड़ित की पहचान, पुलिस प्रमाणीकरण तथा अस्पताल में उपचार की प्रक्रिया को डिजिटल रूप से जोड़ा गया है।

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उन्होंने कहा कि स्वर्णिम समय में उपचार उपलब्ध कराना योजना की सबसे महत्वपूर्ण प्राथमिकता है। दुर्घटना के बाद पहला एक घंटा घायल व्यक्ति के जीवन के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में किसी भी सड़क दुर्घटना की स्थिति में आम लोगों को घायल व्यक्ति की सहायता करने और उसे यथाशीघ्र नजदीकी सक्षम अस्पताल पहुंचाने में सहयोग करना चाहिए।
श्री गौतम कुमार ने जिले के संबंधित पदाधिकारियों एवं अस्पताल प्रबंधन से अपील की कि पीएम राहत योजना के प्रावधानों का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए तथा पात्र सड़क दुर्घटना पीड़ितों को बिना अनावश्यक विलंब के योजना का लाभ उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने पुलिस पदाधिकारियों से ई-डार पर दुर्घटना की सूचना एवं आवश्यक कार्रवाई निर्धारित समय-सीमा के भीतर सुनिश्चित करने को कहा, ताकि पीड़ित के उपचार की प्रक्रिया निर्बाध रूप से आगे बढ़ सके।

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उन्होंने आमजनों से भी अपील की कि सड़क दुर्घटना की स्थिति में घायल व्यक्ति को अकेला न छोड़ें और तत्काल 112 आपातकालीन सेवा से संपर्क करें। साथ ही, उपलब्ध संसाधनों के माध्यम से घायल को निकटतम सक्षम अस्पताल पहुंचाने में सहयोग करें। समय पर मिली चिकित्सा सहायता दुर्घटना पीड़ित के लिए जीवन और मृत्यु के बीच निर्णायक अंतर साबित हो सकती है।

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जिला परिवहन पदाधिकारी ने कहा कि पीएम राहत योजना केवल उपचार की व्यवस्था नहीं, बल्कि सड़क दुर्घटना के प्रत्येक पात्र पीड़ित को समय पर जीवनरक्षक चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने की एक महत्वपूर्ण मानवीय पहल है। इसका प्रभावी क्रियान्वयन प्रशासन, पुलिस, स्वास्थ्य संस्थानों और आम नागरिकों के सामूहिक सहयोग से ही सुनिश्चित किया जा सकता है।

चक्रधरपुर के ग्रामीण पुस्तकालयों का उपायुक्त ने किया निरीक्षण, सुविधाएं बढ़ाने के दिए निर्देश

चक्रधरपुर के ग्रामीण पुस्तकालयों का उपायुक्त ने किया निरीक्षण, सुविधाएं बढ़ाने के दिए निर्देश

चक्रधरपुर | पश्चिमी सिंहभूम के उपायुक्त श्री मनीष कुमार ने गुरुवार को चक्रधरपुर प्रखंड अंतर्गत विभिन्न पंचायतों में संचालित पुस्तकालयों का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने कोलचकरा पंचायत के कुरुलिया स्थित कार्तिक उरांव डिजिटल पुस्तकालय तथा पदमपुर पंचायत के टिकारचापी स्थित पुस्तकालय का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने पुस्तकालयों में अध्ययनरत विद्यार्थियों एवं युवाओं से संवाद कर उनकी पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारियों की जानकारी ली।

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निरीक्षण के दौरान उप विकास आयुक्त श्री उत्कर्ष कुमार, पोड़ाहाट-चक्रधरपुर अनुमंडल पदाधिकारी सुश्री श्रुति राजलक्ष्मी, सहायक समाहर्ता सुश्री ईरा जोरवाल, चक्रधरपुर प्रखंड विकास पदाधिकारी श्री कंचन मुखर्जी, अंचल अधिकारी श्री सुरेश सिन्हा सहित संबंधित अभियंता उपस्थित रहे।

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कुरुलिया स्थित कार्तिक उरांव डिजिटल पुस्तकालय में उपायुक्त ने अध्ययनरत युवक-युवतियों एवं बच्चों से बातचीत की। उन्होंने विद्यार्थियों को नियमित अध्ययन, अनुशासन और निर्धारित लक्ष्य के प्रति निरंतर प्रयासरत रहने के लिए प्रेरित किया। उपायुक्त ने कहा कि पुस्तकालय केवल पुस्तकों के अध्ययन का स्थान नहीं, बल्कि युवाओं के ज्ञान, व्यक्तित्व विकास और भविष्य निर्माण का महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने विद्यार्थियों से उपलब्ध संसाधनों का अधिकतम उपयोग करते हुए अपने लक्ष्य की दिशा में निरंतर आगे बढ़ने का आह्वान किया।

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उपायुक्त ने पुस्तकालय परिसर में हैंडवॉश यूनिट की व्यवस्था, पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था तथा फेवर ब्लॉक लगाने सहित अन्य आवश्यक सुविधाओं को सुदृढ़ करने का निर्देश संबंधित पदाधिकारियों एवं अभियंताओं को दिया। उन्होंने पुस्तकालय परिसर को स्वच्छ, सुविधाजनक और अध्ययन के अनुकूल बनाए रखने पर विशेष जोर दिया। इस दौरान उपस्थित पदाधिकारियों द्वारा परिसर में पौधारोपण भी किया गया।

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इसके बाद उपायुक्त ने पदमपुर पंचायत के टिकारचापी स्थित पुस्तकालय का निरीक्षण किया और वहां चल रहे निर्माण कार्य की प्रगति का जायजा लिया। उन्होंने निर्माण कार्य की गुणवत्ता का अवलोकन करते हुए इसे निर्धारित मानकों के अनुरूप बेहतर ढंग से पूरा करने का निर्देश दिया। साथ ही पुस्तकालय की खिड़कियों में जाली लगाने, सभी कमरों में पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था सुनिश्चित करने तथा परिसर का उचित सौंदर्यीकरण कराने के संबंध में भी आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

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उपायुक्त ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में पुस्तकालयों को बेहतर और उपयोगी स्वरूप प्रदान करने से विद्यार्थियों एवं प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं को अध्ययन के लिए अनुकूल वातावरण मिलेगा। उन्होंने संबंधित पदाधिकारियों को पुस्तकालयों में आवश्यक मूलभूत सुविधाएं सुनिश्चित करने के साथ-साथ इनके नियमित एवं प्रभावी संचालन पर विशेष ध्यान देने का निर्देश दिया।

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