मंझारी | पश्चिमी सिंहभूम जिले के मंझारी थाना क्षेत्र अंतर्गत लमझरी गांव में 18 वर्षीय विवाहिता रांदाय सिंकू ने कथित रूप से फंदे से लटककर आत्महत्या कर ली। घटना बुधवार दोपहर की बताई जा रही है। घटना के बाद गांव में शोक का माहौल है।
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प्राप्त जानकारी के अनुसार, घटना के समय घर के अधिकांश सदस्य खेत गए हुए थे, जबकि मृतका का पति पेजे बारंगिया काम के सिलसिले में जमशेदपुर जा रहा था। इसी दौरान स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव में मच्छर भगाने की दवा के छिड़काव के लिए पहुंची।
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बताया जाता है कि टीम ने घर का दरवाजा खटखटाया और कई बार आवाज लगाई, लेकिन अंदर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। इसके बाद मृतका की देवरानी ने भी आवाज लगाई, परंतु कोई जवाब नहीं मिलने पर ग्रामीणों को बुलाया गया। दरवाजा खोले जाने पर रांदाय सिंकू का शव घर के अंदर फंदे से लटका मिला। घटना की सूचना मिलते ही मृतका का पति भी रास्ते से वापस लौट आया। मामले की जानकारी मिलने पर मंझारी थाना पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल, चाईबासा भेज दिया।
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पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। फिलहाल आत्महत्या के कारणों का पता नहीं चल सका है और पुलिस सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच कर रही है।
गिरिडीह | झारखंड के सुदूरवर्ती इलाकों में सड़क और स्वास्थ्य सुविधाओं की बदहाल स्थिति एक बार फिर सामने आई है। गिरिडीह जिले के पीरटांड़ प्रखंड अंतर्गत मधुबन थाना क्षेत्र के दालुवाडीह गांव में सड़क नहीं होने के कारण गर्भवती महिला को खटिया एंबुलेंस के सहारे अस्पताल पहुंचाना पड़ा। इस घटना के बाद ग्रामीणों में प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के प्रति नाराजगी बढ़ गई है।
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प्रसव पीड़ा के बीच खटिया बनी एंबुलेंस जानकारी के अनुसार, दालुवाडीह निवासी गर्भवती सुनीता सोरेन को अचानक प्रसव पीड़ा शुरू हुई। परिजनों ने तत्काल स्वास्थ्य विभाग से संपर्क कर एंबुलेंस बुलाने का प्रयास किया, लेकिन गांव तक सड़क नहीं होने का हवाला देते हुए एंबुलेंस गांव आने में असमर्थता जताई गई। महिला दर्द से तड़प रही थी, ऐसे में परिजनों और ग्रामीणों ने मजबूरी में सुनीता सोरेन को खटिया पर लिटाया और उबड़-खाबड़ रास्तों से करीब चार किलोमीटर पैदल चलकर पिपराडीह मुख्य सड़क तक पहुंचाया। वहां किसी तरह वाहन की व्यवस्था कर उन्हें अस्पताल भेजा गया। ग्रामीणों का कहना है कि यदि गांव तक सड़क बनी होती तो एंबुलेंस सीधे घर पहुंच सकती थी और महिला को समय पर चिकित्सा सुविधा मिल जाती। उन्होंने बताया कि पिपराडीह तक सड़क बनी हुई है, लेकिन उसके आगे आज तक सड़क निर्माण नहीं हो पाया है।
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सड़क नहीं होने से कई गांव प्रभावित ग्रामीणों के अनुसार, सड़क की कमी से कुरुवारांड, दालुवाडीह, डाहिया, ईटाबेड़ा, गाड़ापरोम, सहेरबेड़ा, जिरबेड़ा, सतकटिया और बोरवाबेड़ा समेत कई गांव प्रभावित हैं। बारिश के मौसम में हालात और भी गंभीर हो जाते हैं। बीमार मरीजों, गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों को अस्पताल पहुंचाना ग्रामीणों के लिए बड़ी चुनौती बन जाता है। ग्रामीणों में आक्रोश, जनप्रतिनिधियों पर उपेक्षा का आरोप घटना के बाद ग्रामीणों का गुस्सा खुलकर सामने आया। ग्रामीण बुधन सोरेन, सुशील मुर्मू, सानो मरांडी, गोपाल मुर्मू, सोमरा मुर्मू, पतिराम मरांडी और बाबूलाल हांसदा समेत कई लोगों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों पर उपेक्षा का आरोप लगाया। ग्रामीणों का कहना है कि चुनाव के दौरान विधायक, मुखिया और अन्य जनप्रतिनिधि बड़े-बड़े वादे करते हैं, लेकिन चुनाव जीतने के बाद गांव की समस्याओं की ओर ध्यान नहीं देते। उनका आरोप है कि यह पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी कई मरीजों को खटिया पर ढोकर अस्पताल पहुंचाना पड़ा है, लेकिन अब तक सड़क निर्माण को लेकर कोई ठोस पहल नहीं की गई।
‘रोड नहीं तो वोट नहीं’ की चेतावनी सड़क निर्माण की मांग को लेकर ग्रामीणों ने कड़ा रुख अपनाते हुए आगामी चुनाव में वोट बहिष्कार की चेतावनी दी है। ग्रामीणों ने स्पष्ट कहा कि यदि जल्द सड़क निर्माण नहीं कराया गया, तो वे चुनाव में मतदान नहीं करेंगे। ग्रामीणों ने एक स्वर में नारा दिया— “रोड नहीं तो वोट नहीं।” खटिया एंबुलेंस के सहारे गर्भवती महिला को अस्पताल पहुंचाने की यह तस्वीर अब पूरे इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है और ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं की कमी पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है।
चक्रधरपुर | झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकार, रांची के निर्देशानुसार जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डालसा), पश्चिम सिंहभूम चाईबासा द्वारा संचालित 90 दिवसीय आउटरीच एवं गहन जागरूकता अभियान के तहत मंगलवार को चक्रधरपुर प्रखंड के प्रेम निवास स्टेशन रोड चौक पर शीतल जल एवं ओआरएस वितरण कार्यक्रम आयोजित किया गया।
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यह कार्यक्रम जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह डालसा अध्यक्ष मोहम्मद शाकिर तथा डालसा सचिव रवि चौधरी के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। भीषण गर्मी और लू की स्थिति को देखते हुए राहगीरों, बच्चों, बुजुर्गों, टोटो चालकों, ट्रैक्टर चालकों एवं महिलाओं के बीच शीतल जल और ओआरएस का वितरण किया गया।
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कार्यक्रम के दौरान उपस्थित लोगों को गर्मी एवं लू से बचाव के लिए आवश्यक सावधानियों की जानकारी भी दी गई। उन्हें सलाह दी गई कि अत्यधिक आवश्यक कार्य होने पर ही घर से बाहर निकलें, सिर को गमछे या कपड़े से ढककर रखें तथा पर्याप्त मात्रा में पानी का सेवन करें। इसके साथ ही जिला विधिक सेवा प्राधिकार द्वारा उपलब्ध कराई जाने वाली निशुल्क विधिक सहायता योजनाओं की जानकारी देकर लोगों को उनके कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक किया गया।
चाकुलिया/पूर्वी सिंहभूम | जिले के चाकुलिया वन क्षेत्र में सोमवार देर रात हाथियों के हमले में एक बाइक सवार व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो गया। यह घटना चाकुलिया-केरूकोचा मुख्य सड़क पर बड़ामारा गांव के पास हुई। घायल की पहचान बहरागोड़ा प्रखंड के धाधिका गांव निवासी नीलकंठ नायक (45) के रूप में हुई है, जो पेशे से सब्जी विक्रेता हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार, नीलकंठ नायक सोमवार को चाकुलिया के जोड़ाम हाट में सब्जी बेचने के बाद देर रात बाइक से अपने गांव लौट रहे थे। इसी दौरान बड़ामारा गांव के समीप सड़क पर उनका सामना हाथियों के एक झुंड से हो गया। अचानक हाथियों को सामने देखकर उन्होंने बाइक छोड़ दी और जान बचाने के लिए भागने लगे।
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प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, भागने के दौरान एक हाथी ने उनका पीछा किया और पास के खेत में घेर लिया। इसके बाद हाथी ने उन पर हमला कर दिया, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए। बताया जा रहा है कि हाथी ने उनके सीने पर पैर भी रख दिया, जिससे उन्हें गंभीर चोटें आईं। हालांकि, किसी तरह नीलकंठ नायक वहां से निकलकर अपनी जान बचाने में सफल रहे। घटना के बाद स्थानीय लोगों की मदद से उन्हें इलाज के लिए चाकुलिया सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया। चिकित्सकों ने प्राथमिक उपचार के बाद उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए बेहतर इलाज के लिए पश्चिम बंगाल के झाड़ग्राम रेफर कर दिया। उनके शरीर पर कई जगह गंभीर चोटें आई हैं।
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घटना की सूचना मिलने पर विधायक समीर मोहंती अस्पताल पहुंचे और घायल को इलाज के लिए पहुंचाने में सहयोग किया। वहीं, वन विभाग की टीम ने भी अस्पताल पहुंचकर घायल का हालचाल लिया और मामले की जानकारी जुटाई। ग्रामीणों के अनुसार, बड़ामारा गांव के आसपास सात हाथियों का एक झुंड लगातार विचरण कर रहा है। हाथियों की लगातार आवाजाही के कारण ग्रामीणों को विशेषकर रात के समय आवागमन में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कई बार हाथी मुख्य सड़क पर भी आ जाते हैं, जिससे दुर्घटना और हमले का खतरा बना रहता है।
ग्रामीणों ने वन विभाग से हाथियों की गतिविधियों पर निगरानी बढ़ाने और सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम करने की मांग की है। उनका कहना है कि चाकुलिया वन क्षेत्र में हाथियों की लगातार मौजूदगी से खेतों और घरों को नुकसान पहुंच रहा है, वहीं हाथियों के हमलों की घटनाएं भी बढ़ रही हैं। ग्रामीणों ने लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की।
चाईबासा | पश्चिम सिंहभूम से गुरुवार को एक बड़ी खबर सामने आई है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की पश्चिम सिंहभूम जिला अध्यक्ष गीता बालमुचू एक भीषण सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हो गईं। हादसे के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई और स्थानीय लोगों की मदद से उन्हें तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया।
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प्राप्त जानकारी के अनुसार, गीता बालमुचू अपने चार पहिया वाहन से झींकपानी की ओर से चाईबासा लौट रही थीं। इसी दौरान सिंहपोखरिया के पास सामने से तेज रफ्तार में आ रही एक इनोवा वाहन को बचाने के प्रयास में चालक ने अचानक वाहन मोड़ दिया। तेज गति के कारण वाहन अनियंत्रित होकर दुर्घटनाग्रस्त हो गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार दुर्घटना काफी भयावह थी। हादसे में वाहन बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया, जबकि गीता बालमुचू के सिर और चेहरे पर गंभीर चोटें आई हैं। घटना के तुरंत बाद आसपास मौजूद लोगों ने राहत कार्य शुरू किया और उन्हें आनन-फानन में चाईबासा सदर अस्पताल पहुंचाया।
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अस्पताल में डॉक्टरों की टीम लगातार उनकी निगरानी कर रही है। चिकित्सकों के मुताबिक उनके सिर में गंभीर चोट लगी है और फिलहाल प्राथमिक उपचार जारी है। डॉक्टरों ने बताया कि सीटी स्कैन रिपोर्ट आने के बाद ही अंदरूनी चोटों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। घटना की जानकारी मिलते ही भाजपा कार्यकर्ताओं और समर्थकों में चिंता का माहौल बन गया। बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता और समर्थक अस्पताल पहुंचे तथा उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली। पार्टी नेताओं ने उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की है।
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इधर, स्थानीय प्रशासन और पुलिस भी मामले की जांच में जुट गई है। शुरुआती जांच में तेज रफ्तार और वाहन को अचानक मोड़ना दुर्घटना का प्रमुख कारण माना जा रहा है। इस घटना के बाद एक बार फिर सड़क सुरक्षा और ओवरस्पीडिंग को लेकर सवाल उठने लगे हैं। लगातार हो रही सड़क दुर्घटनाओं के बावजूद यातायात नियमों की अनदेखी चिंता का विषय बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि तेज रफ्तार और लापरवाही से वाहन चलाना ऐसे हादसों की बड़ी वजह है। वहीं, हादसे के बाद स्थानीय लोगों द्वारा समय रहते मदद पहुंचाए जाने की सराहना की जा रही है। समय पर अस्पताल पहुंचाए जाने से स्थिति को संभालने में काफी मदद मिली। फिलहाल सभी की नजर डॉक्टरों की अगली मेडिकल रिपोर्ट पर टिकी हुई है।
सरायकेला | झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशानुसार तथा प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश-सह-अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डीएलएसए) सरायकेला-खरसावां रामाशंकर सिंह के मार्गदर्शन एवं सचिव तौसिफ मेराज के पर्यवेक्षण में रविवार को मंडलीय कारा सरायकेला में जेल अदालत सह चिकित्सा जांच शिविर एवं विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में सिविल जज (वरिष्ठ प्रभाग)-सह-न्यायिक दण्डाधिकारी प्रथम श्रेणी अनामिका किस्कू, मंडलीय कारा सरायकेला के अधीक्षक सत्येन्द्र कुमार, मुख्य विधिक सहायता रक्षा परामर्शी दिलीप शॉ, उप मुख्य विधिक सहायता रक्षा परामर्शी सुनीत कर्मकार, सहायक विधिक सहायता रक्षा परामर्शी अम्बिका चरण पाणी एवं विजय कुमार महतो, जेलर सोनू कुमार सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे।
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कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) एवं झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशानुसार मंडलीय कारा के मुलाकाती क्षेत्र में स्थापित हेल्प डेस्क का शुभारंभ रहा। इस हेल्प डेस्क के माध्यम से आगंतुकों को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने के लिए पारा विधिक स्वयंसेवक मोहन कुमार हांसदा एवं तारामणि बांदिया को प्रतिनियुक्त किया गया है।
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इस अवसर पर डीएलएसए सचिव तौसिफ मेराज ने बंदियों को निःशुल्क विधिक सहायता, विधिक सहायता रक्षा परामर्शी प्रणाली-2022 तथा हाल ही में प्रारम्भ की गई स्पृह योजना की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने मुलाकाती क्षेत्र में स्थापित हेल्प डेस्क की उपयोगिता और इससे मिलने वाले लाभों से भी बंदियों एवं हितधारकों को अवगत कराया।
इसी क्रम में चिकित्सा पदाधिकारी अभिमन्यु महतो के नेतृत्व में चिकित्सा जांच शिविर का आयोजन किया गया, जिसमें बंदियों का गहन स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। यह चिकित्सा शिविर मासिक जेल अदालत के साथ आयोजित किया गया। कार्यक्रम के दौरान पदाधिकारियों ने महिला वार्ड का निरीक्षण भी किया तथा महिला बंदियों से उनके मामलों और विधिक समस्याओं को लेकर संवाद स्थापित कर आवश्यक जानकारी प्राप्त की। यह आयोजन बंदियों को विधिक सहायता, स्वास्थ्य सेवाओं तथा न्यायिक प्रक्रियाओं से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
चाईबासा/मंझारी | पश्चिमी सिंहभूम जिले के मंझारी थाना क्षेत्र अंतर्गत तांतनगर ओपी के छोटा तेंताडा गांव में शनिवार को नदी में डूबने से तीन वर्षीय बच्ची की मौत हो गई। मृत बच्ची की पहचान संगीता सिरका के रूप में हुई है। इस दर्दनाक घटना ने ग्रामीण क्षेत्रों में आपात स्थिति के दौरान अंधविश्वास और समय पर चिकित्सा सुविधा नहीं मिलने की गंभीर समस्या को एक बार फिर उजागर कर दिया है। खेलते-खेलते नदी में उतरी बच्ची, गहरे पानी में डूबी प्राप्त जानकारी के अनुसार, संगीता गांव के अन्य बच्चों के साथ खेलते-खेलते नदी किनारे पहुंच गई थी। उस समय कुछ बच्चे नदी में नहा रहे थे। उन्हें देखकर वह भी पानी में उतर गई। खेल के दौरान वह अनजाने में गहरे पानी की ओर चली गई और डूबने लगी।
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आसपास मौजूद बच्चों ने शोर मचाया, जिसके बाद उसकी भाभी तत्काल मौके पर पहुंचीं और काफी मशक्कत के बाद उसे पानी से बाहर निकाला। बाहर निकालने तक बच्ची अचेत हो चुकी थी। अस्पताल ले जाने में हुई देरी, झाड़-फूंक का लिया सहारा घटना के बाद परिजनों में अफरा-तफरी मच गई। हालांकि बच्ची को तुरंत अस्पताल ले जाने के बजाय परिजन झाड़-फूंक के सहारे उसे ठीक करने की कोशिश में जुट गए। ग्रामीणों के अनुसार, काफी देर तक ओझा-गुनी के माध्यम से बच्ची को होश में लाने का प्रयास किया जाता रहा।
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जब उसकी हालत में कोई सुधार नहीं हुआ, तब देर शाम उसे सदर अस्पताल चाईबासा लाया गया, जहां चिकित्सकों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। समय पर इलाज से बच सकती थी जान चिकित्सकों का कहना है कि डूबने की घटनाओं में शुरुआती कुछ मिनट बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। समय पर प्राथमिक उपचार और तत्काल अस्पताल पहुंचाने से कई मामलों में जान बचाई जा सकती है।
इस घटना ने ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य जागरूकता की कमी और अंधविश्वास के कारण उपचार में होने वाली देरी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना के बाद पूरे गांव में शोक का माहौल है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है तथा यूडी केस दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।
सरायकेला | उपायुक्त नीतिश कुमार सिंह ने शनिवार को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) गम्हरिया एवं बीपीएचयू गम्हरिया का औचक निरीक्षण कर स्वास्थ्य व्यवस्थाओं का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान अस्पताल में साफ-सफाई, दवा भंडारण, वार्ड व्यवस्था, पेयजल, बिजली, जनरेटर, लैब सहित अन्य स्वास्थ्य सुविधाओं की गहन जांच की गई। निरीक्षण के दौरान अस्पताल परिसर एवं स्टोर रूम में बड़ी मात्रा में अनुपयोगी सामान और अव्यवस्था पाए जाने पर उपायुक्त ने नाराजगी जताई। उन्होंने तत्काल साफ-सफाई सुनिश्चित करने तथा जनरेटर एवं अन्य तकनीकी व्यवस्थाओं को अविलंब दुरुस्त करने का निर्देश दिया।
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दवा स्टॉक रूम की जांच में एक्सपायर एवं जल्द एक्सपायर होने वाली दवाएं मिलने पर उपायुक्त ने गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने अनुमंडल पदाधिकारी को टीम गठित कर पूरे स्टोर रूम की जांच, स्टॉक मिलान एवं भौतिक सत्यापन कराने का निर्देश दिया। साथ ही जर्जर एवं अनुपयोगी सामग्रियों की सूची तैयार कर नियमानुसार नीलामी प्रक्रिया संचालित करने तथा एक्सपायर दवाओं के सुरक्षित निष्पादन को सुनिश्चित करने को कहा।
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उपायुक्त ने निर्देश दिया कि सीएचसी एवं बीपीएचयू में उपलब्ध सभी निशुल्क स्वास्थ्य सेवाओं की सूची प्रमुख स्थानों पर प्रदर्शित की जाए, ताकि आम लोगों को जांच, दवा वितरण, ब्लड टेस्ट, यूरिन टेस्ट एवं अन्य सुविधाओं की जानकारी आसानी से मिल सके। इसके लिए अस्पताल परिसर में बड़े सूचना पट्ट एवं बैनर लगाने के निर्देश भी दिए गए। निरीक्षण के बाद आयोजित समीक्षा बैठक में उपायुक्त ने चिकित्सकों एवं स्वास्थ्य कर्मियों की कार्यशैली पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि कई कर्मी रोस्टर के अनुसार समय पर ड्यूटी नहीं करते हैं तथा रात्रि ड्यूटी में भी लापरवाही बरती जाती है। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और दोषी कर्मियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी। बैठक के दौरान बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली में त्रुटियां पाए जाने तथा अनुपस्थित कर्मियों को शोकॉज जारी करते हुए एक दिन के वेतन कटौती का निर्देश दिया गया। इसके अलावा तीन वर्ष से अधिक समय से एक ही स्वास्थ्य केंद्र में पदस्थापित चिकित्सकों एवं कर्मियों के स्थानांतरण की प्रक्रिया शुरू करने तथा डेपुटेशन पर कार्यरत कर्मियों को मूल कार्यस्थल पर वापस भेजने के निर्देश भी दिए गए।
निरीक्षण के क्रम में उपायुक्त ने विभिन्न वार्डों में भर्ती मरीजों से बातचीत कर स्वास्थ्य सेवाओं की जानकारी ली। मरीजों ने बताया कि अस्पताल में आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं तथा किसी प्रकार की अवैध राशि की मांग नहीं की जाती है। मौके पर अनुमंडल पदाधिकारी अभिनव प्रकाश, सिविल सर्जन डॉ. सरयू प्रसाद सिंह सहित अन्य संबंधित पदाधिकारी उपस्थित थे।
चाईबासा | पश्चिम सिंहभूम पुलिस विभाग द्वारा यूनिसेफ एवं सेंटर फॉर चाइल्ड राइट्स (CCR), NUSRL के तकनीकी सहयोग से पुलिस लाइन स्थित कॉन्फ्रेंस हॉल में “बाल-संवेदनशील पुलिसिंग: मामले का दस्तावेजीकरण और बाल-संवेदनशील प्रक्रियाएं” विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विशेष किशोर पुलिस इकाइयों (SJPU) को सशक्त बनाना तथा बाल संरक्षण से जुड़ी प्रक्रियाओं को अधिक संवेदनशील और प्रभावी बनाना था।
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कार्यशाला में रांची जिले के विभिन्न थानों से आए 39 बाल कल्याण पुलिस अधिकारियों (CWPO) ने भाग लिया। इस दौरान पश्चिम सिंहभूम के पुलिस अधीक्षक अमित रेनू ने किशोर न्याय अधिनियम (JJ Act) एवं पॉक्सो अधिनियम (POCSO Act) के तहत मामलों के उचित दस्तावेजीकरण और बाल-संवेदनशील प्रक्रियाओं के महत्व पर प्रकाश डालते हुए अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
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पुलिस लाइन के मेजर मंसूर गोप ने बताया कि यूनिसेफ और CCR, NUSRL के सहयोग से सभी बाल कल्याण पुलिस पदाधिकारियों के लिए सात चरणों में संवेदनशीलता कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का पांचवां चरण सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत CCR, NUSRL के अनिरुद्ध सरकार के स्वागत भाषण एवं प्रशिक्षण-पूर्व मूल्यांकन सत्र के साथ हुई। तकनीकी सत्र में यूनिसेफ से जुड़े बाल संरक्षण अधिकारी गौरव कुमार ने किशोर न्याय अधिनियम 2015 और झारखंड किशोर न्याय नियम 2017 के अंतर्गत बाल-संवेदनशील पुलिसिंग के सिद्धांतों पर विस्तार से जानकारी दी।
उन्होंने गरिमा, गोपनीयता, भेदभाव-रहित दृष्टिकोण और बाल हित सर्वोपरि रखने जैसे विषयों के साथ-साथ बाल भिक्षावृत्ति, मादक पदार्थों की तस्करी और बाल अपराध से जुड़े मामलों की पहचान एवं कार्रवाई की प्रक्रिया पर भी चर्चा की। कार्यशाला के दौरान बाल विवाह, लैंगिक शोषण तथा विधि से संघर्षरत बच्चों (CCL) से संबंधित मामलों पर केस स्टडी आधारित अभ्यास कराया गया। वहीं, बाल कल्याण समिति के सदस्य मोहम्मद समीम ने प्रतिभागियों की क्षमता आकलन और भविष्य की रणनीतियों पर समूह चर्चा का संचालन किया। कार्यक्रम में पालक देखभाल (Foster Care) एवं आफ्टर केयर योजनाओं की भी जानकारी साझा की गई। इसके अतिरिक्त, पीसीआई इंडिया के सलाहकार हिमांशु जेना ने बाल विवाह उन्मूलन सहित विभिन्न बाल संरक्षण मुद्दों पर अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।
चाईबासा | भारतीय जनता पार्टी के पूर्व जिला उपाध्यक्ष पवन शंकर पांडे ने चाईबासा सदर अस्पताल की स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर राज्य सरकार एवं स्वास्थ्य विभाग पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जिले का एकमात्र सदर अस्पताल खुद बदहाल स्थिति में है, जिसके कारण मरीजों को समुचित स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं।
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पवन शंकर पांडे ने कहा कि अस्पताल में बड़े-बड़े भवन तो बना दिए गए हैं, लेकिन चिकित्सकों की भारी कमी बनी हुई है। कई विशेषज्ञ डॉक्टरों के पद अब भी रिक्त हैं, जिससे मरीजों को इलाज में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि अस्पताल में जनरेटर की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने के कारण बिजली कटौती के दौरान मरीजों को भीषण गर्मी झेलनी पड़ती है। बिजली चले जाने पर वार्डों में पंखे बंद हो जाते हैं और कई बार ऑपरेशन तक टॉर्च की रोशनी में करने की नौबत आ जाती है।
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उन्होंने कहा कि सदर अस्पताल में एमआरआई, सीटी स्कैन समेत कई आवश्यक चिकित्सा सुविधाओं का अभाव है। इसके कारण मरीजों को जांच और इलाज के लिए दूसरे शहरों का रुख करना पड़ता है। पांडे ने कहा कि पश्चिमी सिंहभूम एक आदिवासी बहुल एवं पिछड़ा जिला है, जहां अधिकांश लोगों के पास निजी अस्पतालों में महंगा इलाज कराने के संसाधन उपलब्ध नहीं हैं।
भाजपा नेता ने ब्लड बैंक की स्थिति पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि पिछले कई महीनों से सदर अस्पताल के ब्लड बैंक से मरीजों को रक्त उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। उनके अनुसार अब तक ब्लड बैंक को लाइसेंस नहीं मिलने के कारण लोगों को रक्त के लिए जमशेदपुर जाना पड़ता है, जिससे मरीजों एवं उनके परिजनों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि स्वास्थ्य विभाग चाईबासा सदर अस्पताल की समस्याओं के समाधान को लेकर गंभीर नहीं है। विभिन्न प्रखंडों एवं अनुमंडल अस्पतालों से मरीजों को सदर अस्पताल रेफर किया जाता है, लेकिन वहां से भी कई मरीजों को एमजीएम अस्पताल भेज दिया जाता है। इससे मरीजों और उनके परिजनों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। अंत में पवन शंकर पांडे ने राज्य सरकार से मांग की कि चाईबासा सदर अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं को जल्द सुदृढ़ किया जाए, ताकि जिले के लोगों को इलाज के लिए दूसरे शहरों पर निर्भर न रहना पड़े।