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कोल्हान के ऐतिहासिक संघर्ष की धरती पर नगर निगम चुनाव को लेकर विवाद

कोल्हान के ऐतिहासिक संघर्ष की धरती पर नगर निगम चुनाव को लेकर विवाद

19वीं सदी में ब्रिटिश साम्राज्य के खिलाफ कोल्हान क्षेत्र में कोल विद्रोह (1831–32) हुआ था। इसके बाद 1855 में संथाल परगना की धरती से अंग्रेजी हुकूमत के विरुद्ध देश का पहला जनआंदोलन शुरू हुआ। इन आंदोलनों के परिणामस्वरूप वर्ष 1874 में कोल्हान क्षेत्र को अनुसूचित जिला घोषित किया गया। उस समय टाटा स्टील जैसी किसी भी औद्योगिक कंपनी का अस्तित्व नहीं था।
कोल विद्रोह को लगभग 200 वर्ष पूरे होने जा रहे हैं। लंबे संघर्ष और अनेक शहीदों के बलिदान के बाद झारखंड राज्य का गठन हुआ, जिसे बने हुए अब 25 वर्ष हो चुके हैं। आरोप है कि वर्तमान में हेमंत सरकार और राज्यपाल संतोष गंगवार द्वारा पूर्वी सिंहभूम जिले में टाटा स्टील कंपनी के लीज क्षेत्र में नगर निगम चुनाव पर प्रतिबंध लगाया गया है। वहीं अनुसूचित एवं आदिवासी क्षेत्रों में संवैधानिक प्रावधानों की अनदेखी करते हुए नगर निगम चुनाव कराए जाने के लिए अधिसूचना जारी की गई है।
आंदोलनकारियों का कहना है कि लगभग 200 वर्षों के संघर्ष और शहीदों के सपनों से बने झारखंड को पूंजीपतियों के हाथों सौंपा जा रहा है।

खुंटपानी में मिशन वात्सल्य के तहत बाल संरक्षण पर उन्मुखीकरण बैठक

खुंटपानी में मिशन वात्सल्य के तहत बाल संरक्षण पर उन्मुखीकरण बैठक

पश्चिमी सिंहभूम : खुंटपानी प्रखंड कार्यालय में मिशन वात्सल्य (Sponsorship & Foster Care) के तहत एक इंटरफेस सह उन्मुखीकरण बैठक आयोजित की गई। बैठक का उद्देश्य बाल संरक्षण से जुड़े सभी हितधारकों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना और देखभाल एवं संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चों को सरकारी योजनाओं से जोड़ना था।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में खुंटपानी प्रखंड प्रमुख सिद्धार्थ होनहागा उपस्थित रहे। वहीं जिला परिषद सदस्य यमुना तियू, पंचायत समिति सदस्य वीरेंद्र हेम्ब्रम, जिला बाल संरक्षण पदाधिकारी पुनीता तिवारी, बाल कल्याण समिति के सदस्य एम.डी. समीम, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के प्रतिनिधि, पैरा लीगल वालंटियर्स, झारखंड राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के पूर्व सदस्य विकास दोदराजका सहित बड़ी संख्या में पंचायत प्रतिनिधि मौजूद थे। कार्यक्रम में प्लान इंडिया से अनूप होरे की भी सक्रिय भागीदारी रही।
बैठक में बताया गया कि जिले के 55 देखभाल एवं संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चों को मिशन वात्सल्य/प्रायोजन योजना से जोड़ा गया है। इससे इन बच्चों को शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण और समग्र विकास के लिए आर्थिक एवं संस्थागत सहयोग मिलेगा।
वक्ताओं ने बाल संरक्षण कानूनों, प्रायोजन एवं फॉस्टर केयर सेवाओं तथा पंचायत स्तर पर बच्चों की पहचान और संदर्भण प्रक्रिया की जानकारी दी। उन्होंने बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा और सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए आपसी सहयोग पर जोर दिया।
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि इस तरह की बैठकें आगे भी नियमित रूप से आयोजित की जाएंगी, ताकि बाल संरक्षण व्यवस्था को और मजबूत किया जा सके।

सरायकेला-खरसावां में वीर परिवार सहायता योजना 2025 के तहत विधिक जागरूकता एवं घर-घर संपर्क अभियान

सरायकेला-खरसावां में वीर परिवार सहायता योजना 2025 के तहत विधिक जागरूकता एवं घर-घर संपर्क अभियान

सरायकेला : राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली एवं झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, रांची के निर्देशानुसार सरायकेला-खरसावां जिले में वीर परिवार सहायता योजना (VPSY) 2025 के तहत व्यापक विधिक जागरूकता कार्यक्रम एवं घर-घर संपर्क अभियान चलाया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य पूर्व सैनिकों एवं उनके परिवारों को सरकार द्वारा उपलब्ध विधिक सहायता और कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी देना तथा योजना का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाना था।
अभियान के दौरान प्रशिक्षित पैरा लीगल वालंटियर्स एवं संबंधित हितधारकों ने सक्रिय भागीदारी निभाई और लाभार्थियों को योजना की विस्तृत जानकारी दी। राजनगर में एक विशेष सहायता डेस्क की स्थापना की गई, जहाँ पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों को पात्रता, लाभ एवं निःशुल्क विधिक सेवाओं की प्रक्रिया के बारे में मार्गदर्शन प्रदान किया गया।
इसके साथ ही खरसावां प्रखंड में सघन घर-घर संपर्क अभियान चलाया गया, जिसमें पूर्व सैनिकों के परिवारों की पहचान कर उन्हें योजना से संबंधित जानकारी दी गई। अभियान के दौरान निःशुल्क विधिक सहायता, अधिकारों एवं उपलब्ध सुविधाओं के बारे में भी विस्तार से बताया गया। इस पहल की स्थानीय लोगों ने सराहना की और कई परिवारों ने प्रशासन के प्रयासों पर संतोष व्यक्त किया।

नगर निकाय निर्वाचन–2026 की तैयारी को लेकर समीक्षा बैठक आयोजित

नगर निकाय निर्वाचन–2026 की तैयारी को लेकर समीक्षा बैठक आयोजित

सरायकेला : नगर निकाय आम निर्वाचन–2026 की तैयारियों को लेकर जिला निर्वाचन पदाधिकारी (नगरपालिका) सह उपायुक्त नितिश कुमार सिंह की अध्यक्षता में समाहरणालय सभागार में समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में पुलिस अधीक्षक मुकेश लुनायत भी उपस्थित रहे।
बैठक में राज्य निर्वाचन आयोग, झारखंड द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के आलोक में निर्वाचन को निष्पक्ष, शांतिपूर्ण और सुचारू रूप से संपन्न कराने की तैयारियों की समीक्षा की गई। उपायुक्त ने बताया कि निर्वाचन कार्य को प्रभावी ढंग से संपादित करने के लिए जिले में कुल 13 कोषांगों का गठन किया गया है।
उपायुक्त ने सभी कोषांगों को निर्वाचन कार्य के दौरान पूरी तरह सक्रिय रहने का निर्देश दिया। उन्होंने मतदान केंद्रों का प्रखंड विकास पदाधिकारी एवं नगर निकाय पदाधिकारियों द्वारा स्थलीय निरीक्षण कराने, उपलब्ध मूलभूत सुविधाओं की रिपोर्ट जिला निर्वाचन कार्यालय को देने, मतदान कर्मियों के लिए समयबद्ध प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने तथा मतदान केंद्रों से संबंधित आवश्यक सूचनाओं का संकलन समय पर पूरा करने के निर्देश दिए।
बैठक में नामांकन प्रक्रिया के सुचारू संचालन, आवश्यक दंडाधिकारियों एवं पुलिस बल की प्रतिनियुक्ति, तथा निर्वाचन से जुड़ी जन शिकायतों के निष्पादन के लिए टोल फ्री नंबर के व्यापक प्रचार-प्रसार पर भी चर्चा की गई।
साथ ही सभी कोषांगों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करते हुए प्रतिदिन अद्यतन प्रगति प्रतिवेदन जिला निर्वाचन कार्यालय को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया।
बैठक में जिला उप निर्वाचन पदाधिकारी (नगरपालिका), सभी कोषांगों के वरीय पदाधिकारी, विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं अन्य संबंधित पदाधिकारी उपस्थित थे।

यूजीसी रूल्स 2026 पर विवाद के बीच केंद्र सरकार की सफाई, धर्मेंद्र प्रधान बोले— किसी के साथ नहीं होगा भेदभाव

यूजीसी रूल्स 2026 पर विवाद के बीच केंद्र सरकार की सफाई, धर्मेंद्र प्रधान बोले— किसी के साथ नहीं होगा भेदभाव

यूजीसी रूल्स 2026 पर केंद्र सरकार की पहली प्रतिक्रिया सामने आई है। देशभर में नए नियमों को लेकर हो रहे विरोध और सियासी बहस के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा है कि इन नियमों के तहत किसी भी वर्ग के साथ भेदभाव नहीं होगा और न ही इनके दुरुपयोग की अनुमति दी जाएगी।
धर्मेंद्र प्रधान का यह बयान ऐसे समय आया है, जब यूजीसी के नए प्रावधानों को लेकर सवर्ण समाज से जुड़े कई संगठनों ने आपत्ति जताई है और विभिन्न राज्यों में विरोध प्रदर्शन जारी हैं। राजनीतिक हलकों में इसे भाजपा के पारंपरिक वोट बैंक से जोड़कर भी देखा जा रहा है।
केंद्र सरकार का कहना है कि नए यूजीसी नियमों का उद्देश्य उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता सुनिश्चित करना और जातिगत भेदभाव की शिकायतों पर सख्त कार्रवाई करना है। इसके तहत सभी कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में समानता समितियों का गठन अनिवार्य किया गया है, जिनमें ओबीसी, एससी, एसटी, दिव्यांग और महिला प्रतिनिधियों की भागीदारी जरूरी होगी।
इसके साथ ही हर संस्थान में समान अवसर केंद्र (Equal Opportunity Centre – EOC) की स्थापना भी अनिवार्य की गई है। यह केंद्र वंचित वर्गों के लिए चलाई जा रही योजनाओं की निगरानी करेगा और छात्रों को शिक्षा, आर्थिक सहायता और सामाजिक मुद्दों पर मार्गदर्शन देगा। जिन संस्थानों में समिति के लिए पर्याप्त सदस्य नहीं होंगे, वहां विश्वविद्यालय का EOC यह जिम्मेदारी निभाएगा।
नियमों के अनुसार, किसी भी शिकायत पर 24 घंटे के भीतर समिति की बैठक करना अनिवार्य होगा और तय समयसीमा में कार्रवाई सुनिश्चित करनी होगी। नियमों का पालन नहीं करने वाले संस्थानों को यूजीसी की योजनाओं से वंचित किया जा सकता है। इस मुद्दे को लेकर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ज्ञापन भी भेजे गए हैं।
कुल मिलाकर, यूजीसी रूल्स 2026 को लेकर जारी विवाद के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री का यह बयान सरकार की ओर से संतुलन बनाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है, ताकि समानता के उद्देश्य के साथ किसी भी वर्ग में असंतोष न फैले।

दावोस से ऑक्सफोर्ड तक: मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के विदेश दौरे से झारखंड को निवेश की उम्मीद

दावोस से ऑक्सफोर्ड तक: मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के विदेश दौरे से झारखंड को निवेश की उम्मीद

रांची : झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन 10 दिन के विदेश दौरे के बाद मंगलवार को रांची लौट आए। मुख्यमंत्री 17 जनवरी को स्विट्ज़रलैंड के दावोस में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) की बैठक में शामिल होने के लिए रवाना हुए थे, इसके बाद उन्होंने यूनाइटेड किंगडम का दौरा किया।
मुख्यमंत्री 18 से 23 जनवरी तक दावोस में रहे, जहां उन्होंने WEF की 56वीं वार्षिक बैठक में भाग लिया। इस दौरान उन्होंने झारखंड को निवेश के लिए उभरते औद्योगिक राज्य के रूप में प्रस्तुत किया और वैश्विक निवेशकों व उद्योगपतियों से मुलाकात की। सरकार के अनुसार, इस दौरान राज्य में लगभग ₹11 हजार करोड़ के निवेश प्रस्ताव मिलने की संभावना बनी है।
इसके बाद मुख्यमंत्री 23 से 26 जनवरी तक इंग्लैंड में रहे। इस दौरान उन्होंने लंदन और ऑक्सफोर्ड में निवेश, उद्योग, शिक्षा और अनुसंधान से जुड़े विषयों पर अहम बैठकें कीं। उन्होंने इंपीरियल कॉलेज लंदन के अनुसंधान केंद्रों का दौरा किया और क्रिटिकल मिनरल्स व वैल्यू एडेड इंडस्ट्री पर चर्चा की।
ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के सेंट जॉन्स कॉलेज भ्रमण के दौरान मुख्यमंत्री ने मरांग गोमके जयपाल सिंह मुंडा से जुड़े ऐतिहासिक अभिलेखों का अवलोकन किया। इस अवसर पर कॉलेज प्रशासन ने उनका औपचारिक स्वागत किया।
सरकार का कहना है कि इस विदेश दौरे से झारखंड को खनन आधारित राज्य की छवि से आगे बढ़ाकर औद्योगिक, आईटी और हरित तकनीक के केंद्र के रूप में विकसित करने में मदद मिलेगी। निवेश प्रस्तावों के क्रियान्वयन के लिए विशेष टास्क फोर्स गठित करने की तैयारी की जा रही है, ताकि निवेश जमीन पर उतर सके और राज्य में रोजगार के नए अवसर पैदा हों।

UGC के नई नियमावली जारी, मनुवादियों का विरोध; अभियान के स्टूडेंट्स विंग का समर्थन—29 जनवरी को धरना-प्रदर्शन।

UGC के नई नियमावली जारी, मनुवादियों का विरोध; अभियान के स्टूडेंट्स विंग का समर्थन—29 जनवरी को धरना-प्रदर्शन।

चाईबासा। 13 जनवरी 2026 को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा एक महत्वपूर्ण नियमावली जारी की गई, जिसका उद्देश्य विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के विद्यार्थियों के साथ जाति, धर्म, लिंग और क्षेत्र के आधार पर हो रहे अन्याय, उत्पीड़न और भेदभाव को रोकना है। यह नियमावली भारतीय संविधान में निहित समानता, गरिमा और सामाजिक न्याय के मूल्यों को सुदृढ़ करने की दिशा में एक आवश्यक कदम है।

लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण तथ्य यह है कि इस नियमावली के जारी होते ही तथाकथित कुछ वर्गों द्वारा इसका विरोध किया जाने लगा। यह विरोध केवल एक प्रशासनिक असहमति नहीं है, बल्कि यह मनुवादी, ब्राह्मणवादी और ऊँच-नीच पर आधारित उस रुग्ण मानसिकता को उजागर करता है, जो आज भी बहुजन समाज के विद्यार्थियों को समान अवसर मिलने से रोकना चाहती है।

इस विरोध का सीधा अर्थ यही निकाला जा सकता है कि हजारों वर्षों से चली आ रही जातिगत वर्चस्व की मानसिकता को आज भी बहुजन समाज के विद्यार्थियों पर थोपा जा रहा है। विश्वविद्यालय, महाविद्यालय और अन्य पावर सेंटरों से दलित, आदिवासी और पिछड़े वर्ग के विद्यार्थियों को दूर रखने की एक सुनियोजित कोशिश लगातार जारी है।

यदि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के पिछले पाँच वर्षों के आंकड़ों पर नज़र डालें, तो यह स्पष्ट होता है कि जातीय भेदभाव के मामलों में लगभग 118% की वृद्धि हुई है। यह आंकड़ा इस बात का प्रमाण है कि हाल के वर्षों में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के विद्यार्थियों के साथ विश्वविद्यालयों में भेदभाव और उत्पीड़न बढ़ा है, न कि घटा है।

आज भी समाज का एक वर्ग अपनी वर्चस्ववादी सोच के तहत दबे-कुचले समुदायों के लोगों के साथ अमानवीय व्यवहार करता है। वे नहीं चाहते कि पिछड़े वर्गों के लोग उच्च पदों पर पहुँचें, निर्णय-निर्माण की प्रक्रिया में भाग लें और देश व समाज की सेवा करें। यही कारण है कि देश के केंद्रीय विश्वविद्यालयों में आज भी प्रतिनिधित्व की स्थिति अत्यंत चिंताजनक है—

अनुसूचित जनजाति के लगभग 83%,

अनुसूचित जाति के लगभग 64%,

और अन्य पिछड़ा वर्ग के लगभग 80%

असिस्टेंट प्रोफेसर के पद खाली पड़े हैं।

ऐसी परिस्थितियों में सामाजिक न्याय और समान अवसर की बात किस आधार पर की जा सकती है? जहाँ दलित, आदिवासी और पिछड़े वर्गों का प्रतिनिधित्व नाममात्र का हो, वहाँ वे वर्चस्ववादी समाज के सामने अपनी बात मजबूती से कैसे रख सकते हैं?

विगत वर्षों में अनेक ऐसे मामले सामने आए हैं, जहाँ विश्वविद्यालयों में दलित, पिछड़े और आदिवासी विद्यार्थियों को जाति, धर्म और क्षेत्र के आधार पर इतना प्रताड़ित किया गया कि कई विद्यार्थियों ने आत्महत्या जैसा कठोर कदम उठा लिया। यह हमारे शैक्षणिक तंत्र और सामाजिक संवेदनशीलता पर एक गहरा प्रश्नचिह्न है।

ऐसी स्थिति में यदि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग उत्पीड़न और भेदभाव को रोकने के लिए नियमावली बनाता है, तो उसका विरोध करना वास्तव में अमानवीय व्यवहार को जायज ठहराने जैसा है। सवाल यह है कि वे कौन लोग हैं, जो आज भी जानवरों जैसा व्यवहार इंसानों के साथ करने को सही ठहराना चाहते हैं?

यह नियमावली किसी के अधिकार छीनने का प्रयास नहीं है, बल्कि यह उन विद्यार्थियों को सुरक्षा और सम्मान देने की कोशिश है, जिन्हें सदियों से वंचित रखा गया है। यदि हमें एक सच्चे लोकतांत्रिक और संवैधानिक गणराज्य का निर्माण करना है, तो ऐसी प्रगतिशील पहलों का समर्थन करना ही होगा—विरोध नहीं।

UGC के नए नियमों को लेकर विवाद, बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट ने इस्तीफा दिया

UGC के नए नियमों को लेकर विवाद, बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट ने इस्तीफा दिया

नई दिल्ली : बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए नियमों के विरोध में इस्तीफा दे दिया है। सुप्रीम कोर्ट तक इस नियम को भेदभाव बढ़ाने वाला बताकर याचिका दाखिल की गई है।
UGC ने उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देना विनियम, 2026 जारी किया है। इसके तहत ओबीसी छात्रों को भी एससी-एसटी के समान सुरक्षा मिलेगी। नियम के अनुसार हर कॉलेज/यूनिवर्सिटी में ‘इक्विटी कमेटी’ बनेगी, जिसमें एससी, एसटी, ओबीसी, महिला और दिव्यांग वर्ग के प्रतिनिधि अनिवार्य होंगे। हालांकि, सामान्य वर्ग के प्रतिनिधि का कोई प्रावधान नहीं है।
नए नियमों में कहा गया है कि एससी, एसटी और ओबीसी सदस्यों के साथ होने वाले किसी भी अनुचित व्यवहार को भेदभाव माना जाएगा। शिकायत मिलने पर कमेटी को 24 घंटे के अंदर कार्रवाई करनी होगी और 15 दिनों में रिपोर्ट देनी होगी। संस्थानों को 24/7 हेल्पलाइन और ऑनलाइन शिकायत प्रणाली शुरू करनी होगी। नियमों का पालन न करने पर विश्वविद्यालय की डिग्री देने की शक्ति या अनुदान रोका जा सकता है।
विरोध करने वाले कहते हैं कि सामान्य वर्ग के प्रतिनिधि न होने से जांच निष्पक्ष नहीं होगी और नियमों का दुरुपयोग झूठी शिकायतों के लिए किया जा सकता है।
सरकार का कहना है कि उच्च शिक्षा में ओबीसी छात्रों को भी भेदभाव का सामना करना पड़ता है, इसलिए उन्हें सुरक्षा देना जरूरी है। यह सिफारिश शिक्षा संबंधी संसदीय समिति ने भी की थी।

कार्तिक मेमोरियल क्लब की खेलकूद प्रतियोगिता में विधायक दशरथ गागराई ने किया विजेताओं का सम्मान

कार्तिक मेमोरियल क्लब की खेलकूद प्रतियोगिता में विधायक दशरथ गागराई ने किया विजेताओं का सम्मान

सरायकेला (सीनी पदमपुर) : सरायकेला प्रखंड के सीनी पदमपुर (घोड़ा चौक) में कार्तिक मेमोरियल क्लब द्वारा आयोजित खेलकूद प्रतियोगिता में खरसावां के माननीय विधायक श्री दशरथ गागराई मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित हुए। इस अवसर पर विधायक श्री गागराई ने प्रतियोगिता में विजयी प्रतिभागियों को अपने कर-कमलों से पुरस्कार प्रदान कर उनका उत्साहवर्धन किया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए माननीय विधायक ने ग्रामीण क्षेत्रों में छिपी खेल प्रतिभाओं को मंच प्रदान करने और उन्हें निखारने के लिए कार्तिक मेमोरियल क्लब के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन न केवल युवाओं को सकारात्मक दिशा प्रदान करते हैं, बल्कि खेल संस्कृति को भी मजबूत करते हैं।
प्रतियोगिता के दौरान विभिन्न खेल स्पर्धाओं का आयोजन किया गया, जिसमें स्थानीय युवा और बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम में क्लब के सदस्य, स्थानीय जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में ग्रामीण दर्शक उपस्थित थे।

गोलमुरी में आदिवासी हो समाज भवन में 77वां गणतंत्र दिवस समारोह आयोजित

गोलमुरी में आदिवासी हो समाज भवन में 77वां गणतंत्र दिवस समारोह आयोजित

जमशेदपुर : गोलमुरी स्थित आदिवासी हो समाज भवन में 26 जनवरी को 77वां गणतंत्र दिवस हर्षोल्लास एवं गरिमामय वातावरण में मनाया गया। इस अवसर पर झंडोत्तोलन कर राष्ट्रीय पर्व को सम्मानपूर्वक मनाया गया।
कार्यक्रम में समाज के कई गणमान्य सदस्य उपस्थित रहे। प्रमुख रूप से रवि सवैया, सरस्वती बिरूवा सवैया, सुरा बुरुली, निकिता सोए बिरुली, उपेन्द्र बानरा, मनोज मेलगंडी, अमित हेंब्रम, अजय बिरुली, डिबार पूर्ति, मनीष बनरा, भूलटू बारी, लालमोहन जमुदा, राजकुमार बानरा, देवेंद्र बिरुवा, वीरसिंह देवगम, सिरमा देवगम, प्रकाश कोया, सुबोध श्रीवास्तव, गुरुचरण मुखी एवं जुलेश मुखी सहित अन्य सदस्य उपस्थित थे।
इस अवसर पर उपस्थित सभी लोगों ने भारतीय संविधान के प्रति निष्ठा व्यक्त की तथा देश की एकता, अखंडता और सामाजिक समरसता बनाए रखने का संकल्प लिया।