मंझारी | विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) मंझारी मंडल की ओर से उत्क्रमित मध्य विद्यालय भरभरिया परिसर में पौधारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का नेतृत्व अभियान संयोजक गुरुचरण बानकीरा ने किया। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने “एक पेड़ मां के नाम” अभियान के तहत पौधे लगाकर पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लिया।
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कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित झारखंड सरकार के पूर्व मंत्री बड़कुवर गागराई ने कहा कि पौधारोपण एक पुण्य कार्य है और पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रत्येक व्यक्ति को अपनी जिम्मेदारी समझते हुए आगे आना चाहिए। उन्होंने लोगों से वर्ष में कम से कम पांच पौधे लगाने तथा उनके संरक्षण एवं संवर्धन की जिम्मेदारी निभाने की अपील की।
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पूर्व मंत्री ने कहा कि वर्तमान में यह अभियान सांकेतिक रूप से चलाया जा रहा है, लेकिन आने वाले दिनों में भाजपा कार्यकर्ता इसे बूथ स्तर तक ले जाकर व्यापक पौधारोपण अभियान संचालित करेंगे। उन्होंने आम लोगों से भी पर्यावरण संरक्षण के इस अभियान में सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने का आह्वान किया।
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कार्यक्रम में मंडल प्रभारी प्रताप कटियार, महतो बबलू बिरूवा, हरिश्चंद्र केसरी, रामचंद्र गोप, सोनाराम बिरूवा, मिथिलेश कुमार नंद, कमलेश्वर बेहरा सहित बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ता उपस्थित रहे। इस अवसर पर सभी ने अधिक से अधिक पौधे लगाने और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जनजागरूकता फैलाने का संकल्प लिया।
चाईबासा | जिला परिवहन पदाधिकारी (डीटीओ) गौतम कुमार ने जिले में संचालित झारखंड मोटर ड्राइविंग ट्रेनिंग स्कूल का औचक निरीक्षण कर वहां की प्रशिक्षण व्यवस्था एवं उपलब्ध आधारभूत सुविधाओं का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने प्रशिक्षण केंद्र में संचालित विभिन्न व्यवस्थाओं तथा प्रशिक्षण की गुणवत्ता की विस्तृत समीक्षा की।
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निरीक्षण के क्रम में डीटीओ ने प्रशिक्षण केंद्र के क्लासरूम, रिसेप्शन कक्ष, लेक्चर रूम, सिम्युलेटर रूम, शौचालय, ब्लैकबोर्ड तथा ट्रैफिक संकेत बोर्डों का अवलोकन किया। इसके साथ ही प्रशिक्षण के लिए आवश्यक उपकरणों, जैसे पंचर किट, टायर लीवर, जैक एवं टायर प्रेशर गेज की उपलब्धता और उनकी कार्यशीलता की भी जांच की।
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श्री गौतम कुमार ने प्रशिक्षण केंद्र में उपयोग किए जा रहे वाहनों का निरीक्षण करते हुए संचालक को वाहनों की नियमित सर्विसिंग एवं समुचित रखरखाव सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। उन्होंने प्रशिक्षण प्रदान करने वाले प्रशिक्षकों के ड्राइविंग लाइसेंस सहित अन्य आवश्यक दस्तावेजों की भी जांच की।
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निरीक्षण के दौरान जिला परिवहन पदाधिकारी ने कहा कि सड़क सुरक्षा को बढ़ावा देने और कुशल वाहन चालक तैयार करने के लिए गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण केंद्रों का समय-समय पर निरीक्षण किया जाता रहेगा, ताकि निर्धारित मानकों एवं दिशा-निर्देशों का अनुपालन सुनिश्चित किया जा सके।
उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रशिक्षण की गुणवत्ता के साथ किसी भी प्रकार की लापरवाही या अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यदि निरीक्षण के दौरान नियमों के उल्लंघन के मामले सामने आते हैं, तो संबंधित संस्थान के विरुद्ध नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
चाईबासा | पश्चिमी सिंहभूम जिला अंतर्गत टाटा कॉलेज, चाईबासा परिसर स्थित बहुउद्देशीय सभागार में जिला दंडाधिकारी-सह-उपायुक्त मनीष कुमार की अध्यक्षता में रसोईया एवं संयोजिकाओं के लिए एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में उप विकास आयुक्त उत्कर्ष कुमार एवं जिला शिक्षा अधीक्षक प्रवीण कुमार भी उपस्थित रहे। जिला प्रशासन द्वारा आयोजित इस कार्यशाला का उद्देश्य विद्यालयों में बच्चों को गुणवत्तापूर्ण, सुरक्षित एवं पौष्टिक मध्यान्ह भोजन उपलब्ध कराना, उनके पोषण स्तर में सुधार लाना तथा विद्यालय आधारित स्वास्थ्य एवं स्वच्छता गतिविधियों को सुदृढ़ करना था। कार्यशाला में मध्यान्ह भोजन की गुणवत्ता, स्वच्छता मानक, पोषण प्रबंधन, विद्यालयों में पोषण वाटिका निर्माण, स्वास्थ्य जागरूकता एवं विभिन्न जनकल्याणकारी अभियानों से संबंधित विषयों पर विस्तारपूर्वक चर्चा की गई।
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कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उपायुक्त मनीष कुमार ने कहा कि बच्चों के समग्र विकास में शिक्षा और पोषण दोनों की समान रूप से महत्वपूर्ण भूमिका होती है। एक स्वस्थ एवं पोषित बच्चा ही बेहतर तरीके से शिक्षा ग्रहण कर सकता है। उन्होंने कहा कि विद्यालय केवल शिक्षा का केंद्र नहीं, बल्कि बच्चों के शारीरिक, मानसिक और सामाजिक विकास का भी महत्वपूर्ण मंच है। उपायुक्त ने कहा कि रसोईया एवं संयोजिकाएं बच्चों के स्वास्थ्य और भविष्य निर्माण से प्रत्यक्ष रूप से जुड़ी हुई हैं, इसलिए उनकी जिम्मेदारी अत्यंत महत्वपूर्ण है। विद्यालयों में तैयार होने वाले मध्यान्ह भोजन में पौष्टिकता, गुणवत्ता एवं स्वच्छता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने निर्देश दिया कि भोजन तैयार करने के दौरान निर्धारित मानकों का पूर्ण अनुपालन सुनिश्चित किया जाए तथा खाद्य सामग्री के चयन से लेकर भोजन परोसने तक की पूरी प्रक्रिया में स्वच्छता का विशेष ध्यान रखा जाए।
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उन्होंने कहा कि भोजन केवल बच्चों की भूख मिटाने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह उनके स्वास्थ्य और सर्वांगीण विकास से भी सीधे जुड़ा हुआ है। कार्यशाला के दौरान उपायुक्त ने विद्यालयों में पोषण वाटिका विकसित करने पर विशेष जोर देते हुए कहा कि प्रत्येक विद्यालय परिसर में पोषण वाटिका तैयार की जाए, ताकि स्थानीय स्तर पर हरी सब्जियां, फल एवं अन्य पोषक खाद्य सामग्री उपलब्ध हो सके। उन्होंने कहा कि पोषण वाटिका बच्चों में पौष्टिक भोजन के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ जैविक खेती, पर्यावरण संरक्षण और आत्मनिर्भरता की भावना विकसित करने का प्रभावी माध्यम बनेगी। विद्यालय परिसरों में उपलब्ध भूमि का उपयोग करते हुए मौसमी सब्जियां, फलदार एवं औषधीय पौधे लगाने के निर्देश भी दिए गए।
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उपायुक्त ने कहा कि विद्यालयों में कार्यरत रसोईया एवं संयोजिकाओं को समय-समय पर प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाना आवश्यक है, ताकि वे खाद्य सुरक्षा, पोषण संतुलन, स्वच्छता मानकों तथा सुरक्षित खाद्य प्रबंधन से संबंधित अद्यतन जानकारी प्राप्त कर सकें। कार्यशाला में प्रतिभागियों को संतुलित भोजन तैयार करने, बच्चों की पोषण आवश्यकताओं को समझने, स्वच्छ रसोई संचालन, खाद्य सामग्री के सुरक्षित भंडारण एवं गुणवत्तापूर्ण भोजन परोसने से संबंधित व्यवहारिक प्रशिक्षण भी दिया गया। रसोईघरों की आधारभूत व्यवस्थाओं की समीक्षा करते हुए उपायुक्त ने निर्देश दिया कि सभी विद्यालयों के रसोईघर स्वच्छ, यथासंभव धुआं एवं प्रदूषण मुक्त तथा पर्याप्त प्रकाश एवं वेंटिलेशन युक्त हों। सुरक्षित एवं स्वास्थ्यकर वातावरण में भोजन तैयार किए जाने को सुनिश्चित करने के लिए नियमित निरीक्षण एवं आवश्यक व्यवस्थाओं को सुदृढ़ करने के निर्देश भी दिए गए।
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विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर उपायुक्त ने विद्यालयों में पौधारोपण अभियान संचालित करने का निर्देश देते हुए कहा कि सभी विद्यालय निर्धारित तिथि पर पौधारोपण कार्यक्रम आयोजित करें तथा बच्चों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करें। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि सामूहिक सामाजिक दायित्व है। कार्यशाला के दौरान मलेरिया जागरूकता माह, “चुप्पी तोड़ो, स्वस्थ रहो” अभियान तथा स्वास्थ्य एवं स्वच्छता से जुड़े विभिन्न विषयों पर भी प्रतिभागियों को जानकारी दी गई। उपस्थित सभी प्रतिभागियों ने पर्यावरण संरक्षण, स्वास्थ्य जागरूकता एवं सामाजिक जागरूकता से संबंधित विषयों पर शपथ ग्रहण कर समाज में सकारात्मक संदेश प्रसारित करने का संकल्प लिया। इस अवसर पर प्रत्येक माह की 20 तारीख को विद्यालयों में आयोजित होने वाले तिथि भोजन कार्यक्रम के सफल संचालन में उत्कृष्ट योगदान देने वाली लगभग 36 रसोईया एवं संयोजिकाओं को प्रशस्ति पत्र एवं अंगवस्त्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में शिक्षा विभाग के एपीओ, बीआरपी, सीआरपी सहित लगभग 1500 रसोईया एवं संयोजिकाओं ने सक्रिय सहभागिता निभाई।
चाईबासा | पश्चिमी सिंहभूम जिले में मनरेगा अंतर्गत संचालित बिरसा हरित ग्राम योजना के तहत उत्पादित फलों के विपणन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुक्रवार को सदर अनुमंडल कार्यालय के द्वितीय प्रवेश द्वार पर दूसरे आम बिक्री केंद्र का उद्घाटन किया गया। इस अवसर पर सदर अनुमंडल पदाधिकारी संजय कुमार, भूमि सुधार उप समाहर्ता जीतराय मुर्मू, सामाजिक कार्यकर्ता त्रिशानु राय सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
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जिला प्रशासन द्वारा प्रोजेक्ट बदलाव के तहत झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसायटी (जेएसएलपीएस) के समन्वित प्रयासों से संचालित इस पहल का उद्देश्य किसानों एवं लाभुकों को उनके उत्पादों के लिए बेहतर बाजार उपलब्ध कराना है। कार्यक्रम के दौरान खूंटपानी प्रखंड की पूर्णिया पंचायत की बिरसा हरित ग्राम योजना की लाभुक सुनीता होनहागा ने अपने बागान में उत्पादित आमों की बिक्री के लिए स्टॉल लगाया।
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अधिकारियों ने बताया कि इस व्यवस्था के माध्यम से स्थानीय उत्पादकों को सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंचने का अवसर मिल रहा है। इससे बिचौलियों पर निर्भरता कम होगी तथा किसानों को उनके उत्पादों का बेहतर मूल्य मिलने की संभावना बढ़ेगी। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सदर अनुमंडल पदाधिकारी संजय कुमार ने कहा कि बिरसा हरित ग्राम योजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण किसानों की आय में वृद्धि करना और उन्हें सीधे बाजार से जोड़ना है। उन्होंने कहा कि प्रोजेक्ट बदलाव के तहत जेएसएलपीएस की सहभागिता से किसानों को उत्पादन के साथ-साथ विपणन व्यवस्था से जोड़ने की दिशा में भी प्रभावी कार्य किया जा रहा है।
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उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन किसानों की आजीविका को सुदृढ़ करने तथा स्थानीय उत्पादों के लिए बेहतर विपणन व्यवस्था विकसित करने के लिए निरंतर प्रयासरत है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सके।
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इस अवसर पर सहायक जिला परियोजना पदाधिकारी विवेक कुमार पाढ़ी, जिला आजीविका प्रबंधक पलाश भरत राठौर सहित बड़ी संख्या में स्थानीय लोग उपस्थित थे।
सरायकेला । समाहरणालय सभागार में उपायुक्त नीतिश कुमार सिंह की अध्यक्षता में जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट (डीएमएफटी) की शासी परिषद की बैठक आयोजित की गई। बैठक में खनन प्रभावित क्षेत्रों में संचालित विभिन्न विकास योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई तथा नई योजनाओं के चयन और उनके प्रभावी क्रियान्वयन पर विस्तृत चर्चा हुई।
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बैठक में खरसावां विधायक दशरथ गागराई, ईचागढ़ विधायक सविता महतो, जिला परिषद अध्यक्ष सोनाराम बोदरा, उप विकास आयुक्त रीना हांसदा सहित शासी परिषद के सदस्य एवं विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।
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समीक्षा के दौरान स्वास्थ्य, शिक्षा, कौशल विकास, पेयजल, आंगनबाड़ी भवन निर्माण, विद्यालयों की आधारभूत संरचना सुदृढ़ीकरण, कृषि एवं आजीविका संवर्द्धन तथा स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार से संबंधित योजनाओं की प्रगति पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।
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परिषद के सदस्यों ने जिले में हड्डी रोग विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने, शव वाहनों की संख्या बढ़ाने, बंद पड़े कोल्ड स्टोरेज को पुनः संचालित करने तथा जर्जर आंगनबाड़ी भवनों के निर्माण जैसे महत्वपूर्ण सुझाव दिए। उपायुक्त नीतिश कुमार सिंह ने संबंधित विभागों को प्राप्त सुझावों पर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश देते हुए कहा कि डीएमएफटी निधि का उपयोग खनन प्रभावित क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य, आधारभूत संरचना, कौशल विकास एवं आजीविका संवर्द्धन जैसी जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए प्राथमिकता के आधार पर किया जाए, ताकि स्थानीय समुदायों को अधिकतम लाभ मिल सके।
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बैठक के दौरान विभिन्न विभागों द्वारा योजनाओं की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की गई। साथ ही परिषद के सदस्यों द्वारा दिए गए सुझावों के आधार पर भावी कार्ययोजना एवं विकास कार्यों को और अधिक प्रभावी बनाने के उपायों पर भी चर्चा की गई।
सरायकेला | विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर सरायकेला-खरसावां के उपायुक्त नीतिश कुमार सिंह ने साहिबगंज स्थित वृद्धाश्रम का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने वरिष्ठ नागरिकों के साथ वृक्षारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। कार्यक्रम में उप विकास आयुक्त रीना हांसदा एवं जिला समाज कल्याण पदाधिकारी सत्या ठाकुर भी उपस्थित रहीं।
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निरीक्षण के दौरान उपायुक्त ने वृद्धाश्रम में उपलब्ध आवासीय, स्वास्थ्य एवं अन्य मूलभूत सुविधाओं की समीक्षा की। उन्होंने वृद्धजनों से संवाद कर उनकी समस्याओं एवं आवश्यकताओं की जानकारी ली। साथ ही, बढ़ती गर्मी को देखते हुए कूलर, प्रकाश व्यवस्था तथा अन्य आवश्यक सुविधाओं की समुचित उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए।
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उपायुक्त ने वृद्धाश्रम परिसर में वरिष्ठ नागरिकों द्वारा की जा रही फल एवं सब्जी की खेती का भी अवलोकन किया और उनके आत्मनिर्भरता के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने जिला कृषि पदाधिकारी को नियमित रूप से वृद्धाश्रम का भ्रमण कर आवश्यक बीज, कृषि सामग्री एवं तकनीकी सहयोग उपलब्ध कराने तथा कृषि गतिविधियों को और प्रोत्साहित करने का निर्देश दिया।
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इस अवसर पर उपायुक्त ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ वरिष्ठ नागरिकों को सम्मानजनक, सुरक्षित और स्वस्थ जीवन उपलब्ध कराना जिला प्रशासन की प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने कहा कि वृक्षारोपण जैसे कार्यक्रम न केवल पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देते हैं, बल्कि समाज में जागरूकता और सामुदायिक सहभागिता को भी मजबूत बनाते हैं।
रांची | झारखंड के 200 से अधिक आदिवासी, मूलवासी, जन संगठनों के प्रतिनिधियों, पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था के पदाधिकारियों, शिक्षाविदों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने संयुक्त वक्तव्य जारी कर राज्यवासियों से 9 जून को धरती आबा बिरसा मुंडा के शहादत दिवस पर जन कार्यक्रम आयोजित करने की अपील की है। अपील में कहा गया है कि इस दिन आदिवासी संस्कृति, संघर्ष और उलगुलान की विरासत को याद करते हुए राज्य के विभिन्न हिस्सों में कार्यक्रम आयोजित किए जाएं तथा बिरसा मुंडा की विरासत को आरएसएस, जनजाति सुरक्षा मंच और वनवासी कल्याण आश्रम जैसे संगठनों द्वारा कथित रूप से किए जा रहे वैचारिक हस्तक्षेप से बचाने का संकल्प लिया जाए।
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संयुक्त अपील पर हस्ताक्षर करने वालों में पूर्व मंत्री गीताश्री उरांव, पूर्व विधायक बहादुर उरांव और मंगल सिंह बोबोंगा, ज्योत्सना केरकेट्टा, देवकीनंदन बेदिया, कुमारचंद्र मार्डी, डेमका सोय, रमेश जराई, रजनी मुर्मू, सुखनाथ लोहरा, दुर्गावती उरांव, अलोका कुजूर, बिंसाय मुंडा, हरी कुमार भगत, कालीचरण बिरुवा, दिनेश मुर्मू, साधु हो, जयकिशन गोडसोरा और वासवी किड़ो सहित अनेक सामाजिक-राजनीतिक कार्यकर्ता शामिल हैं। इसके अलावा शिक्षाविद एवं सांस्कृतिक क्षेत्र के प्रमुख हस्ताक्षरों में जसिन्ता केरकेट्टा, जोसेफ बाड़ा, अनुज लुगुन और नीतीश खलखो के नाम भी शामिल हैं।
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अपील का समर्थन करने वाले संगठनों में अखिल भारतीय आदिवासी विकास समिति, गाँव गणराज्य परिषद, सरना सगोम समिति (खूंटी), आदिवासी संघर्ष मोर्चा, आदिवासी मूलवासी अधिकार मंच (बोकारो), भारत जकत माझी परगना महल (रामगढ़), पारंपरिक ग्राम सभा समन्वय समिति (खूंटी), आदिवासी अधिकार मंच, मानकी-मुंडा स्वशासन व्यवस्था (पश्चिमी सिंहभूम), आदिवासी हो समाज सेवानिवृत्त संगठन (चाईबासा), आदिवासी आंदोलनकारी मोर्चा, आदिवासी समन्वय समिति, बिरसा सेना, आदिवासी एकता मंच, मुंडा आदिवासी समाज महासभा, संयुक्त ग्राम सभा, युवा झुमुर, झारखंड जनाधिकार महासभा, जोहार, ओमोन महिला संगठन और झारखंड जनतांत्रिक महासभा सहित कई संगठन शामिल हैं।
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वक्तव्य में यह भी उल्लेख किया गया है कि आदिवासी अधिकारों के मुद्दों पर कार्यरत राष्ट्रीय स्तर के सामाजिक कार्यकर्ताओं और शिक्षाविदों, जैसे नंदिनी सुंदर, बेला भाटिया, प्रफुल्ल समंतरा और ईश्वर आहिरे ने भी इस अपील का समर्थन किया है। संयुक्त अपील में 24 मई 2026 को दिल्ली में आयोजित जनजाति सांस्कृतिक समागम का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े संगठन जनजाति सुरक्षा मंच द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में वक्ताओं, विशेषकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, ने आदिवासियों को बार-बार “वनवासी” कहकर संबोधित किया। वक्तव्य में आरोप लगाया गया है कि कार्यक्रम में बिरसा मुंडा के जल, जंगल और जमीन की रक्षा के संघर्ष तथा शोषण के विरुद्ध उनके आंदोलन का उल्लेख नहीं किया गया।
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अपील जारी करने वालों का कहना है कि आरएसएस और उससे जुड़े संगठन “आदिवासी” शब्द के बजाय “वनवासी” शब्द का प्रयोग करते हैं और आदिवासी समाज की स्वतंत्र पहचान को कमजोर करने का प्रयास करते हैं। वक्तव्य में आरोप लगाया गया है कि “सरना-सनातन एक” जैसे नारों के माध्यम से आदिवासियों की अलग सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान को समाप्त करने तथा ईसाई आदिवासियों की डिलिस्टिंग की मांग के जरिए आदिवासी समाज की एकजुटता को तोड़ने की कोशिश की जा रही है। वक्तव्य में कहा गया है कि बिरसा मुंडा का उलगुलान जल, जंगल और जमीन की रक्षा तथा औपनिवेशिक शासन एवं शोषणकारी शक्तियों के खिलाफ संघर्ष का प्रतीक था, जिसने झारखंड आंदोलन की वैचारिक नींव रखी। अपीलकर्ताओं ने आरोप लगाया कि संघ परिवार और उससे जुड़े संगठन इस इतिहास की नई व्याख्या प्रस्तुत करने का प्रयास कर रहे हैं। संयुक्त वक्तव्य में पूर्व की भाजपा सरकार द्वारा छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम (CNT Act) में संशोधन के प्रयासों का भी उल्लेख किया गया है। वक्तव्य में कहा गया है कि आदिवासी स्वायत्तता, जल-जंगल-जमीन से जुड़े संवैधानिक अधिकारों तथा सरना धर्म को अलग धार्मिक कोड के रूप में मान्यता देने जैसी मांगों के प्रति भी विरोध का रुख अपनाया गया है। अपील के अंत में आदिवासियों, मूलवासियों, झारखंडियों और आदिवासियत समर्थकों से आह्वान किया गया है कि वे 9 जून को बिरसा मुंडा की पुण्यतिथि पर उनकी विरासत, संघर्ष और विचारों को जन-जन तक पहुंचाने के लिए कार्यक्रम आयोजित करें तथा उनकी ऐतिहासिक विरासत की रक्षा के लिए एकजुट हों।
चाईबासा | अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) के सचिव एवं झारखंड के सह प्रभारी डॉ. सिरिबेला प्रसाद की माता सिरिबेला सुनीता जॉन प्रसाद का बुधवार को आकस्मिक निधन हो गया। उनके निधन पर गुरुवार को कांग्रेस भवन, चाईबासा में शोक सभा का आयोजन किया गया।
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शोक सभा में उपस्थित कांग्रेस नेताओं एवं कार्यकर्ताओं ने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि अर्पित की। साथ ही ईश्वर से प्रार्थना की गई कि शोक संतप्त परिवार को इस अपार दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करें।
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वक्ताओं ने कहा कि स्वर्गीय सिरिबेला सुनीता जॉन प्रसाद एक समर्पित शिक्षिका थीं। उन्होंने अपने ज्ञान, संस्कार और सेवा भाव से न केवल विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया, बल्कि समाज में भी विशिष्ट सम्मान और पहचान अर्जित की। उनके निधन को शिक्षा जगत और समाज के लिए अपूरणीय क्षति बताया गया।
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शोक सभा में कांग्रेस जिलाध्यक्ष रंजन बोयपाई, जिला प्रवक्ता त्रिशानु राय, पूर्व जिला सचिव जगदीश सुंडी, संतोष सिन्हा, अजीत कांडेयांग, सूरज सुंडी, हरिचंद्र सोय, सनातन सावैयाँ, संजय नाथ, सुशील दास, जंबल सुंडी, राहुल पान सहित अन्य कांग्रेसजन उपस्थित थे।
सरायकेला । समाहरणालय सभागार में उप विकास आयुक्त रीना हांसदा की अध्यक्षता में जिले के आकांक्षी प्रखंडों—सरायकेला, गम्हरिया एवं कुकड़ू—में संचालित आकांक्षी प्रखंड कार्यक्रम की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में स्वास्थ्य एवं पोषण, शिक्षा, कृषि, पशुपालन, पेयजल एवं स्वच्छता, वित्तीय समावेशन तथा आधारभूत संरचना विकास सहित विभिन्न प्रमुख प्रदर्शन संकेतकों (केपीआई) की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की गई।
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समीक्षा के दौरान उप विकास आयुक्त ने विद्यालयों, स्वास्थ्य केंद्रों, आंगनबाड़ी केंद्रों तथा उप स्वास्थ्य केंद्रों में शौचालय, पेयजल एवं स्वच्छता सुविधाओं को सुदृढ़ करने के निर्देश दिए। उन्होंने ग्राम स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं पोषण दिवस (वीएचएसएनडी) का नियमित आयोजन सुनिश्चित करने तथा स्वास्थ्य एवं पोषण संबंधी गतिविधियों के प्रभावी संचालन पर विशेष जोर दिया।
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बैठक में विभिन्न विभागों को निर्धारित लक्ष्यों की शत-प्रतिशत प्राप्ति सुनिश्चित करने, योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन तथा कम प्रगति वाले संकेतकों में सुधार के लिए विशेष कार्ययोजना तैयार कर समयबद्ध कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया। उप विकास आयुक्त ने कहा कि आकांक्षी प्रखंड कार्यक्रम का उद्देश्य केवल रैंकिंग में सुधार करना नहीं, बल्कि आमजन के जीवन स्तर में गुणात्मक बदलाव लाना है।
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उन्होंने सभी विभागीय अधिकारियों को योजनाओं की नियमित मॉनिटरिंग, क्षेत्रीय भ्रमण तथा लाभार्थियों तक योजनाओं की पहुंच सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही, संबंधित पोर्टलों पर अद्यतन आंकड़ों को समय पर अपलोड करने पर भी बल दिया। उन्होंने स्वास्थ्य, शिक्षा, पोषण, पेयजल एवं स्वच्छता जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सतत सुधार के लिए समन्वित एवं परिणामोन्मुख कार्यशैली अपनाने की आवश्यकता बताई।
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बैठक में जिला समाज कल्याण पदाधिकारी सत्या ठाकुर, उप निदेशक आत्मा विजय कुमार सिंह, जिला पशुपालन पदाधिकारी, डीपीएम-जेएसएलपीएस, संबंधित प्रखंडों के चिकित्सा पदाधिकारी, सीडीपीओ, ब्लॉक समन्वयक, जिला एवं प्रखंड फेलो सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं कर्मी उपस्थित थे।
चाईबासा | कोल्हान विश्वविद्यालय, चाईबासा के सम्मेलन कक्ष में बुधवार को शैक्षणिक परिषद (Academic Council) की 44वीं बैठक कुलपति प्रो. (डॉ.) अंजिला गुप्ता की अध्यक्षता में आयोजित की गई। बैठक में विद्यार्थियों के हित, नई शिक्षा नीति (NEP)-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन तथा विश्वविद्यालय की शैक्षणिक एवं प्रशासनिक व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।
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बैठक का सबसे महत्वपूर्ण निर्णय स्नातक (यूजी) नामांकन के लिए आवेदन शुल्क में भारी कटौती का रहा। परिषद ने आवेदन शुल्क को ₹100 से घटाकर प्रति विषय, प्रति महाविद्यालय ₹25 करने का ऐतिहासिक फैसला लिया। कुलपति प्रो. (डॉ.) अंजिला गुप्ता की पहल पर किए गए इस निर्णय से शुल्क में 75 प्रतिशत की कमी आई है। इससे विद्यार्थियों को अपनी पसंद के विषयों में प्रवेश के लिए अधिक संख्या में महाविद्यालयों में आवेदन करने का अवसर मिलेगा तथा उन पर आर्थिक बोझ भी कम होगा।
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बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि प्रथम सेमेस्टर से लेकर छठे सेमेस्टर तक उत्तीर्ण सभी विद्यार्थी स्नातकोत्तर (पीजी) सत्र 2025-27 में नामांकन के लिए चांसलर पोर्टल के माध्यम से आवेदन कर सकेंगे। इसके अलावा, द्विवर्षीय स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए ऑनर्स (Honours) की अनिवार्यता समाप्त करने का निर्णय भी लिया गया, जिससे अधिक से अधिक विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।
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परिषद ने सभी संबद्ध एवं अंगीभूत महाविद्यालयों के प्राचार्यों के माध्यम से आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) तथा आरक्षित श्रेणी (SC/ST/OBC) के विद्यार्थियों को सलाह दी है कि वे शैक्षणिक सत्र 2025-30 में नामांकन के लिए समय रहते अपने आवासीय, आय एवं जाति प्रमाण-पत्र तैयार कर लें। परिषद ने स्पष्ट किया कि नामांकन प्रक्रिया में प्रस्तुत किए जाने वाले सभी प्रमाण-पत्र झारखंड सरकार के सक्षम पदाधिकारी द्वारा निर्गत एवं वैध होने चाहिए, ताकि विद्यार्थियों को प्रवेश के दौरान किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। बैठक में शैक्षणिक सत्र 2026-30 के लिए स्नातक नामांकन प्रक्रिया, FYUGP के अंतर्गत सेमेस्टर-3 एवं सेमेस्टर-5 के प्रवेश दिशा-निर्देशों तथा पीजी सत्र 2025-27 में नामांकन से संबंधित विषयों पर भी विस्तृत विचार-विमर्श किया गया। इसके साथ ही वर्ष 2020 के नियमों के आलोक में विभिन्न विषयों की कोडिंग (Subject Coding) से जुड़े मामलों पर भी महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।
शैक्षणिक परिषद ने 42वीं एवं 43वीं परिषद बैठकों की कार्यवाही की पुष्टि करते हुए उनके अनुपालन प्रतिवेदनों को अनुमोदित किया। बैठक में नई शिक्षा नीति-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन, विभिन्न पाठ्यक्रमों के संचालन, परीक्षा व्यवस्था तथा अन्य शैक्षणिक विषयों पर भी विस्तार से चर्चा हुई। बैठक के दौरान विभिन्न शैक्षणिक प्रस्तावों को अधिष्ठाता (एकेडमिक) डॉ. संजय यादव ने परिषद के समक्ष प्रस्तुत किया तथा संबंधित विषयों पर विस्तृत जानकारी दी। शैक्षणिक परिषद के सदस्यों, अधिष्ठाताओं, विभागाध्यक्षों एवं विश्वविद्यालय के अधिकारियों ने विद्यार्थियों के हित में लिए गए इन निर्णयों का स्वागत किया। कुलपति प्रो. (डॉ.) अंजिला गुप्ता के मार्गदर्शन में आयोजित यह बैठक विश्वविद्यालय की शैक्षणिक गुणवत्ता, शोध वातावरण तथा विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।