खरसावां | वारंग चिति लिपि के खोजकर्ता, महान समाज सुधारक एवं हो भाषा के पुरोधा ओत गुरु कोल लाको बोदरा की पुण्यतिथि के अवसर पर सोमवार को खरसावां स्थित आदिवासी सांस्कृतिक एवं कला केंद्र परिसर में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया।

इस अवसर पर उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण कर भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई तथा भाषा, साहित्य, संस्कृति और समाज के प्रति उनके अमूल्य योगदान को स्मरण किया गया।

कार्यक्रम में आदिवासी हो समाज महासभा के जिलाध्यक्ष मनोज सोय, हो भाषा के शिक्षक सिद्धेश्वर कुदादा, मानसिंह बांकिरा, श्याम सोय, गणेश बांकिरा, बादल हेंब्रम सहित बड़ी संख्या में बुद्धिजीवियों एवं समाज के लोगों ने भाग लिया।

उपस्थित लोगों ने ओत गुरु के आदर्शों पर चलने तथा मातृभाषा, सांस्कृतिक विरासत और साहित्य के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए सामूहिक रूप से कार्य करने का संकल्प लिया।

सभा को संबोधित करते हुए जिलाध्यक्ष मनोज सोय ने कहा कि ओत गुरु कोल लाको बोदरा ने वारंग चिति लिपि की खोज कर हो भाषा को नई पहचान दिलाई।

उनका योगदान केवल एक लिपि के निर्माण तक सीमित नहीं था, बल्कि उन्होंने शिक्षा, सामाजिक जागरूकता और सांस्कृतिक अस्मिता को भी नई दिशा प्रदान की। उनके विचार आज भी समाज के लिए प्रेरणास्रोत हैं।

वक्ताओं ने युवाओं से अपनी मातृभाषा, साहित्य, संस्कृति और पारंपरिक विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। कार्यक्रम का समापन ओत गुरु कोल लाको बोदरा को श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए उनके बताए मार्ग पर चलने के सामूहिक संकल्प के साथ हुआ।


