चाईबासा | विश्व रक्तदाता दिवस के अवसर पर पश्चिमी सिंहभूम जिला प्रशासन द्वारा “प्रोजेक्ट जागृति– बेहतर स्वास्थ्य की ओर एक कदम” के तहत जिले में स्वैच्छिक रक्तदान को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से विभिन्न स्थानों पर रक्तदान शिविरों का आयोजन किया गया। इस दौरान जिला उपायुक्त ने एमटीसी सदर अस्पताल, उर्दू लाइब्रेरी बड़ी बाजार, 174 बटालियन पुलिस लाइन तथा रेलवे अस्पताल चक्रधरपुर सहित विभिन्न शिविर स्थलों का निरीक्षण किया।

निरीक्षण के दौरान उपायुक्त ने रक्तदान के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि रक्तदान केवल एक सामाजिक दायित्व नहीं, बल्कि मानवता की सेवा का सर्वोत्तम माध्यम है। उन्होंने कहा कि एक यूनिट रक्त कई जरूरतमंद लोगों के जीवन को बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

दुर्घटनाओं, गंभीर बीमारियों, प्रसूति संबंधी जटिलताओं एवं अन्य आपातकालीन परिस्थितियों में रक्त की आवश्यकता को देखते हुए स्वैच्छिक रक्तदाताओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।

उपायुक्त ने जिले के युवाओं, सामाजिक संगठनों, शिक्षण संस्थानों तथा सक्षम नागरिकों से नियमित रूप से रक्तदान करने की अपील करते हुए कहा कि जिला प्रशासन जिले में रक्तदान की सकारात्मक संस्कृति विकसित करने के लिए लगातार प्रयासरत है।

रक्तदान शिविर में योगदान देने वाले रक्तवीरों को प्रशस्ति पत्र, कॉफी मग एवं मोमेंटो प्रदान कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में सदर अनुमंडल पदाधिकारी संजय कुमार, सिविल सर्जन डॉ. जुहार मांझी, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी, चिकित्सक, जिला प्रशासन के पदाधिकारी, विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में रक्तदाता उपस्थित थे।

इस अवसर पर जिला कोषागार पदाधिकारी ने टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत निक्षय मित्र बनकर पांच टीबी मरीजों के बीच पोषण आहार टोकरी का वितरण किया। उन्होंने बताया कि इन मरीजों को उपचार अवधि के दौरान छह माह तक नियमित रूप से पोषण किट उपलब्ध कराई जाएगी।

जिला प्रशासन के अनुसार जिले में कुल छह स्थानों पर आयोजित रक्तदान शिविरों के माध्यम से लगभग 250 यूनिट रक्त संग्रहित किया गया, जो जरूरतमंद मरीजों के उपचार में उपयोगी सिद्ध होगा।

