चाईबासा | पश्चिमी सिंहभूम के उपायुक्त श्री मनीष कुमार ने शुक्रवार को कार्यपालक अभियंता, पेयजल एवं स्वच्छता प्रमंडल, चाईबासा श्री विनोद कुमार की उपस्थिति में जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट (DMFT) मद से चाईबासा के आयता में निर्माणाधीन ग्रामीण जलापूर्ति योजना का स्थलीय निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने निर्माण कार्य की प्रगति का जायजा लिया तथा संबंधित कनीय अभियंता से योजना की वर्तमान स्थिति और अब तक किए गए कार्यों की जानकारी प्राप्त की।

निरीक्षण के दौरान कनीय अभियंता ने उपायुक्त को बताया कि संबंधित संवेदक द्वारा मार्च माह के बाद से निर्माण कार्य बंद कर दिया गया है, जिसके कारण योजना में कोई विशेष प्रगति नहीं हो सकी है। इस पर उपायुक्त ने नाराजगी जताते हुए कार्यपालक अभियंता एवं संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि संवेदक से तत्काल संपर्क स्थापित कर निर्माण कार्य अविलंब पुनः शुरू कराया जाए।

उपायुक्त ने स्पष्ट निर्देश दिया कि ग्रामीण जलापूर्ति योजना को निर्धारित समय-सीमा के भीतर हर हाल में पूरा करते हुए पोषित क्षेत्र के सभी लाभुकों तक सुरक्षित एवं नियमित पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि पेयजल जैसी मूलभूत सुविधा से जुड़ी योजनाओं में किसी भी प्रकार की लापरवाही अथवा अनावश्यक विलंब स्वीकार्य नहीं होगा। साथ ही, संबंधित विभाग को योजना की सतत मॉनिटरिंग करने, निर्माण कार्य की नियमित समीक्षा करने तथा प्रगति प्रतिवेदन उपलब्ध कराने का निर्देश भी दिया।

इसके बाद उपायुक्त ने पुराना चाईबासा स्थित जल शोधन संयंत्र का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान संयंत्र सुचारू रूप से संचालित पाया गया। उन्होंने जल शोधन प्रक्रिया, संयंत्र की कार्यप्रणाली तथा पेयजल आपूर्ति व्यवस्था का अवलोकन करते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

उपायुक्त ने कार्यपालक अभियंता, पेयजल एवं स्वच्छता प्रमंडल को निर्देशित किया कि जिले में संचालित सभी ग्रामीण एवं शहरी जलापूर्ति योजनाओं का नियमित निरीक्षण कर उनकी कार्यशीलता सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि जहां कहीं भी तकनीकी अथवा अन्य कारणों से जलापूर्ति प्रभावित हो रही हो, वहां त्वरित कार्रवाई कर समस्या का समाधान किया जाए, ताकि आम नागरिकों को निर्बाध एवं गुणवत्तापूर्ण पेयजल उपलब्ध हो सके।

उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता जिले के प्रत्येक नागरिक तक स्वच्छ एवं सुरक्षित पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करना है। इसके लिए सभी संबंधित विभागीय अधिकारियों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करते हुए योजनाओं के समयबद्ध क्रियान्वयन एवं गुणवत्तापूर्ण संचालन को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी होगी।


