चाईबासा | पश्चिमी सिंहभूम के उपायुक्त मनीष कुमार की अध्यक्षता में सोमवार को समाहरणालय सभागार में विद्यालय से बाहर रह रहे दिव्यांग बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में जिला शिक्षा पदाधिकारी, जिला शिक्षा अधीक्षक, प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी (सदर), क्षेत्रीय शिक्षा पदाधिकारी, सहायक कार्यक्रम पदाधिकारी सहित विभिन्न विभागों के संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।

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बैठक के दौरान उपायुक्त ने जिले में विद्यालय से बाहर रह रहे दिव्यांग बच्चों की स्थिति की विस्तृत समीक्षा की और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक दिव्यांग बच्चे को शिक्षा का अधिकार सुनिश्चित करना जिला प्रशासन की प्राथमिकता है तथा कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे, इसके लिए सभी विभागों को समन्वित रूप से कार्य करना होगा।

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उपायुक्त ने निर्देश दिया कि 15 जून से 24 जून 2026 तक विशेष नामांकन अभियान चलाकर विद्यालय से बाहर रह रहे 74 चिन्हित दिव्यांग बच्चों का तत्काल विद्यालयों में नामांकन सुनिश्चित किया जाए। अभियान के सफल संचालन के लिए रिसोर्स टीचरों और थैरेपिस्टों को विशेष जिम्मेदारी सौंपी गई है। उन्हें प्रत्येक चिन्हित बच्चे के परिवार से संपर्क स्थापित कर नामांकन प्रक्रिया पूर्ण कराने का निर्देश दिया गया।

बैठक में बताया गया कि जिले में यू-डाइस (UDISE) पोर्टल पर लगभग 2,800 दिव्यांग विद्यार्थी निबंधित हैं, जिनमें से 1,892 विद्यार्थियों के पास दिव्यांगता प्रमाण पत्र उपलब्ध नहीं है। इस पर उपायुक्त ने सभी पात्र विद्यार्थियों को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने तथा उनकी शैक्षणिक आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए अगले 15 दिनों के भीतर विशेष शिविर आयोजित कर दिव्यांगता प्रमाण पत्र उपलब्ध कराने का निर्देश दिया।

इस कार्य के लिए सहायक कार्यक्रम पदाधिकारी सुभाष हेंब्रम को नोडल पदाधिकारी नामित किया गया है। उपायुक्त ने स्वास्थ्य विभाग एवं शिक्षा विभाग को आपसी समन्वय स्थापित कर शिविरों का आयोजन करने तथा निर्धारित समय-सीमा के भीतर कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए।

उपायुक्त ने कहा कि दिव्यांग बच्चों के लिए शिक्षा और आवश्यक प्रमाणिक दस्तावेजों की उपलब्धता उनके समग्र विकास एवं सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को अभियान की नियमित मॉनिटरिंग करने तथा प्रगति प्रतिवेदन उपलब्ध कराने का भी निर्देश दिया।

बैठक में दिव्यांग बच्चों के नामांकन, दिव्यांगता प्रमाण पत्र निर्गमन तथा समावेशी शिक्षा से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तृत चर्चा की गई। साथ ही निर्धारित लक्ष्यों की समयबद्ध प्राप्ति के लिए आवश्यक रणनीति भी तैयार की गई।

