चाईबासा | पश्चिमी सिंहभूम जिले के सदर अस्पताल परिसर, चाईबासा स्थित झारखंड सरकार के कल्याण विभाग के अंतर्गत प्रेजा फाउंडेशन द्वारा संचालित नर्सिंग कौशल कॉलेज में छठे बैच (सत्र 2024-26) की 120 प्रशिक्षु छात्राओं का लैंप लाइटिंग एवं कैपिंग समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता उपायुक्त मनीष कुमार ने की।

कार्यक्रम का शुभारंभ उपायुक्त मनीष कुमार ने उप विकास आयुक्त उत्कर्ष कुमार सहित अन्य अतिथियों की मौजूदगी में दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इसके बाद विधिवत रूप से लैंप लाइटिंग एवं कैपिंग समारोह आयोजित किया गया। इस दौरान प्रशिक्षु छात्राओं ने नर्सिंग सेवा के प्रति समर्पण, सेवा भावना, अनुशासन तथा अपने दायित्वों का ईमानदारी और निष्ठा के साथ निर्वहन करने का संकल्प लिया।

नर्सिंग सेवा में तकनीकी दक्षता के साथ मानवीय संवेदना भी आवश्यक : उपायुक्त
समारोह को संबोधित करते हुए उपायुक्त मनीष कुमार ने कहा कि नर्सिंग का क्षेत्र सीधे तौर पर मानव सेवा से जुड़ा हुआ है। नर्सिंग कर्मी स्वास्थ्य व्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी हैं। वे मरीजों के उपचार में सहयोग करने के साथ-साथ उनके मानसिक संबल और आत्मविश्वास को बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

उन्होंने कहा कि एक कुशल नर्स बनने के लिए केवल तकनीकी ज्ञान और प्रशिक्षण पर्याप्त नहीं है, बल्कि मरीजों के प्रति संवेदनशीलता, धैर्य, अनुशासन, विनम्र व्यवहार और सेवा भावना भी आवश्यक है। उन्होंने प्रशिक्षु छात्राओं से प्रशिक्षण के दौरान प्राप्त ज्ञान और कौशल को पूरी निष्ठा के साथ आत्मसात करने की अपील की।

उपायुक्त ने कहा कि छात्राएं भविष्य में अपने कार्यक्षेत्र में पूरी ईमानदारी और जिम्मेदारी के साथ कार्य करते हुए समाज एवं जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने में योगदान दें। उन्होंने कहा कि यह समारोह प्रशिक्षु छात्राओं के व्यावसायिक जीवन की महत्वपूर्ण शुरुआत का प्रतीक है। उन्होंने सभी छात्राओं को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वे अपने कार्य एवं आचरण से नर्सिंग पेशे की गरिमा को और ऊंचा करें।

सेवा, समर्पण और अनुशासन को बनाएं कार्यशैली का हिस्सा : डीडीसी
उप विकास आयुक्त उत्कर्ष कुमार ने कहा कि स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में कार्य करने वाले प्रत्येक व्यक्ति के लिए सेवा भावना सर्वोपरि होनी चाहिए। नर्सिंग एक ऐसा पेशा है, जिसमें मरीजों के साथ निरंतर संपर्क और देखभाल की आवश्यकता होती है। ऐसे में धैर्य, संवेदनशीलता और अनुशासन नर्सिंग कर्मियों के प्रमुख गुण होने चाहिए।
उन्होंने प्रशिक्षु छात्राओं से प्रशिक्षण के दौरान प्राप्त ज्ञान का निरंतर अभ्यास करने और अपने कौशल को विकसित करते रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने में प्रशिक्षित नर्सिंग कर्मियों की महत्वपूर्ण भूमिका है। छात्राएं भविष्य में जहां भी कार्य करें, वहां पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ मरीजों एवं आमजनों की सेवा को प्राथमिकता दें।

समारोह के दौरान लैंप लाइटिंग एवं कैपिंग की औपचारिक प्रक्रिया पूरी की गई। इस अवसर पर प्रशिक्षु छात्राओं में विशेष उत्साह और उमंग देखने को मिला। समारोह ने छात्राओं को नर्सिंग सेवा के मूल्यों, दायित्वों और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का बोध कराने के साथ-साथ बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के लिए समर्पित होकर कार्य करने की प्रेरणा दी।
कार्यक्रम में सहायक समाहर्ता ईरा जोरवाल, सिविल सर्जन मीना कालंडिया, उपाधीक्षक शिवचरण हांसदा, प्रेजा फाउंडेशन के ऑपरेशन लीड रवि कुमार, उप निदेशक नैंसी राजेल, प्राचार्या सहित नर्सिंग कौशल कॉलेज के सभी कर्मी उपस्थित रहे। समारोह में सातवें एवं आठवें बैच की प्रशिक्षु छात्राएं भी शामिल हुईं।

