जमशेदपुर | जसकानडीह में आदिवासी हो समाज युवा महासभा एवं ग्रामसभा जसकानडीह द्वारा वारंग चिति लिपि के जनक एवं हो समाज के महान समाज सुधारक ओत गुरु लको बोदरा की पुण्यतिथि के अवसर पर श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम का शुभारंभ पदाधिकारियों एवं समाज के गणमान्य लोगों द्वारा गुरु लको बोदरा की आदमकद प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया। इसके बाद उपस्थित सभी लोगों ने दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत आत्मा को श्रद्धांजलि दी।

इस अवसर पर आदिवासी हो समाज युवा महासभा के केंद्रीय उपाध्यक्ष सुरा बिरुली ने कहा कि गुरु लको बोदरा केवल वारंग चिति लिपि के रचयिता ही नहीं, बल्कि हो समाज की अस्मिता और सांस्कृतिक पहचान के निर्माता थे।

उन्होंने कहा कि वारंग चिति लिपि का निर्माण कर गुरु बोदरा ने हो भाषा को वैज्ञानिक आधार प्रदान किया तथा सदियों से मौखिक रूप में चली आ रही हो संस्कृति और परंपराओं को लिखित स्वरूप देकर उनके संरक्षण का ऐतिहासिक कार्य किया। उनके अथक प्रयासों का ही परिणाम है कि आज हो समाज अपनी भाषा में शिक्षा, साहित्य और अन्य क्षेत्रों में निरंतर आगे बढ़ रहा है।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उप प्रमुख शिव हांसदा एवं ग्रामसभा सचिव गांगराम बानरा ने कहा कि गुरु लको बोदरा का जीवन संघर्ष, त्याग और समाज सेवा की अद्भुत मिसाल है।

उन्होंने युवाओं से गुरु बोदरा के आदर्शों का अनुसरण करते हुए हो भाषा, संस्कृति और वारंग चिति लिपि के संरक्षण एवं प्रचार-प्रसार के लिए निरंतर कार्य करने का आह्वान किया।

कार्यक्रम के अंत में ग्रामसभा के सदस्यों ने “गुरु लको बोदरा अमर रहें”, “हो भाषा ज़िंदाबाद” तथा “वारंग चिति ज़ोरोंग जिड” के नारे लगाए। साथ ही सभी ने हो भाषा, संस्कृति और वारंग चिति लिपि के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए सामूहिक रूप से संकल्प लिया।

इस अवसर पर सुरा बिरुली, गांगराम बानरा, शिव हांसदा, मोना देवगम, मोसो सोय, बेंतों कुकल, मरसल समद, रामसिंह समद सहित बड़ी संख्या में समाज के सदस्य एवं स्थानीय ग्रामीण उपस्थित थे।

