चाईबासा : मानव अधिकार परिषद, झारखंड प्रदेश महासचिव सह पूर्व लोकसभा, विधानसभा प्रत्याशी रहे धी. रामहरि पेरियार ने गुरुवार को पश्चिम सिंहभूम जिले के छोटानागरा थाना क्षेत्र अंतर्गत किरीबुरू मुठभेड़ से संबंधित प्रकाशित समाचारों पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि जिन लोगों पर कार्रवाई हुई, उनमें अधिकांश हमारे अपने आदिवासी मूलनिवासी समाज से थे। यह स्थिति न केवल अत्यंत दुखद है, बल्कि यह पूरे समाज और शासन व्यवस्था के लिए गंभीर आत्ममंथन की मांग भी करती है।
उन्होंने कहा कि यह सवाल बेहद महत्वपूर्ण है कि आखिर इतने वर्षों तक आदिवासी युवाओं को यह रास्ता क्यों चुनना पड़ा? क्या इसके पीछे बेरोजगारी, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की कमी, जल-जंगल-जमीन से बेदखली, सामाजिक उपेक्षा, राजनीतिक उपेक्षा या प्रशासनिक विफलता जैसे कारण जिम्मेदार हैं? जब विकास के अवसर सीमित होते हैं और संवैधानिक अधिकारों का संरक्षण नहीं होता, तब हाशिए पर खड़ा समाज गलत रास्तों की ओर धकेला जाता है।
धी. पेरियार ने स्पष्ट कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना आवश्यक है, लेकिन उससे कहीं अधिक जरूरी है उन सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक परिस्थितियों की निष्पक्ष जांच करना, जिन्होंने इन युवाओं को अपराध की ओर धकेला। केवल मुठभेड़ों और दमनात्मक कार्रवाई से समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है। स्थायी समाधान के लिए मूल कारणों पर आधारित गंभीर शोध, संवेदनशील नीति निर्माण और जमीनी स्तर पर प्रभावी कार्यान्वयन अनिवार्य है।
*उन्होंने सरकार और प्रशासन से निम्नलिखित ठोस मांगें रखीं*:-
1. इस पूरे मामले की सामाजिक, आर्थिक और मानवाधिकार दृष्टिकोण से स्वतंत्र न्यायिक जांच कराई जाए।
2. आदिवासी क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, स्थायी रोजगार और सम्मानजनक आजीविका के ठोस अवसर सुनिश्चित किए जाएं।
3. जल, जंगल और जमीन से जुड़े संवैधानिक अधिकारों का ईमानदारी और प्रभावी ढंग से पालन सुनिश्चित किया जाए।
4. आदिवासी युवाओं के लिए विशेष पुनर्वास, कौशल विकास और स्वरोजगार योजनाएं लागू की जाएं।
5. स्थानीय समुदायों को निर्णय प्रक्रिया में सहभागी बनाया जाए, ताकि नीतियां ज़मीनी सच्चाइयों के अनुरूप बन सकें।
धी. पेरियार ने कहा कि यह केवल कुछ व्यक्तियों की मौत का मामला नहीं है, बल्कि यह पूरे समाज और व्यवस्था की असफलताओं का आईना है। यदि समय रहते ठोस और संवेदनशील कदम नहीं उठाए गए, तो यह संकट और गहराएगा। अब समय आ गया है कि गोली नहीं, समाधान की राजनीति हो, दमन नहीं, बल्कि विकास, न्याय और अधिकार की राजनीति हो।
23
Jan

