राजनीति

युवा कांग्रेस संगठनात्मक चुनाव: वीर सिंह बालमुचू सदर विधानसभा अध्यक्ष निर्वाचित

युवा कांग्रेस संगठनात्मक चुनाव: वीर सिंह बालमुचू सदर विधानसभा अध्यक्ष निर्वाचित

पश्चिमी सिंहभूम : युवा कांग्रेस के संगठनात्मक चुनाव में वीर सिंह बालमुचू को सदर विधानसभा अध्यक्ष चुना गया है। उनके निर्वाचन से संगठन में उत्साह का माहौल है।

वीर सिंह बालमुचू इससे पहले नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) के कोल्हान विश्वविद्यालय अध्यक्ष रह चुके हैं। छात्र राजनीति के दौरान उन्होंने छात्र हितों के साथ-साथ सामाजिक मुद्दों और अधिकारों की लड़ाई में सक्रिय भूमिका निभाई। वे कई सामाजिक संगठनों से भी जुड़े रहे हैं और जनसरोकारों से जुड़े विषयों पर लगातार सक्रिय रहे हैं।

छात्र राजनीति और सामाजिक आंदोलनों के माध्यम से वीर सिंह ने समाज में एक सक्रिय युवा नेता के रूप में पहचान बनाई है। उन्होंने दलित, पिछड़े और आदिवासी समुदायों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया और अन्याय के खिलाफ आवाज बुलंद की।

उनके सदर विधानसभा अध्यक्ष बनने से युवा कांग्रेस के संगठनात्मक ढांचे को मजबूती मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। पार्टी नेताओं का मानना है कि उनके नेतृत्व में युवा कांग्रेस संगठन को नई दिशा और मजबूती मिलेगी।

निर्वाचन के बाद पार्टी पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं और सामाजिक संगठनों ने वीर सिंह बालमुचू को बधाई और शुभकामनाएं दी हैं।

आयुर्वेदिक कॉलेज जगन्नाथपुर (बुकासाई) बना सिस्टम की सुस्ती और लापरवाही का प्रतीक:- धी रामहरि पेरियार

आयुर्वेदिक कॉलेज जगन्नाथपुर (बुकासाई) बना सिस्टम की सुस्ती और लापरवाही का प्रतीक:- धी रामहरि पेरियार

भवन तैयार, बजट खर्च… फिर भी कॉलेज बंद

जगन्नाथपुर : जगन्नाथपुर प्रखंड अंतर्गत बुकासाई में आयुर्वेदिक कॉलेज एवं अस्पताल के रूप में विकसित की जा रही महत्वाकांक्षी योजना कागजों में तो तेज रफ्तार से आगे बढ़ती दिखती है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट है। छात्रावास बनकर तैयार हैं, कॉलेज भवन खड़े हैं, सरकारी धन खर्च हो चुका है, इसके बावजूद आज तक कॉलेज का सुचारु संचालन शुरू नहीं हो पाया, जिससे स्थानीय जनता में भारी आक्रोश व्याप्त है। स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्षों से केवल उद्घाटन, निरीक्षण और आश्वासन का खेल चल रहा है। शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाओं के नाम पर जनता को सिर्फ सपने दिखाए गए हैं, जबकि वास्तविक लाभ शून्य है।


        पूर्व मुख्यमंत्री का क्षेत्र, फिर भी विकास ठप यह वही विधानसभा क्षेत्र है जहाँ से पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा और पूर्व सांसद गीता कोड़ा का पैतृक प्रखंड जुड़ा हुआ है। इसके बावजूद यदि क्षेत्र में इतनी महत्वपूर्ण शैक्षणिक और स्वास्थ्य परियोजना वर्षों तक ठप पड़ी है, तो यह साफ तौर पर शासन–प्रशासन की गंभीर विफलता को दर्शाता है।
       स्थानीय बुद्धिजीवियों का मानना है कि जब प्रभावशाली राजनीतिक पहचान के बावजूद योजनाएँ धरातल पर नहीं उतर पा रहीं, तो आम क्षेत्रों की स्थिति का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है।
योजना नहीं, परिणाम चाहिए
विशेषज्ञों का कहना है कि
सिर्फ योजना बना देना, शिलान्यास कर देना या औपचारिक निरीक्षण कर लेना विकास नहीं होता। विकास तब कहलाता है जब योजना तय समय-सीमा में पूरी हो, नियमित निगरानी हो और जनता को वास्तविक लाभ मिले।
     बुकासाई आयुर्वेदिक कॉलेज की वर्तमान स्थिति इस बात का उदाहरण बन चुकी है कि किस प्रकार योजनाओं को जानबूझकर लटकाकर लूट का बाजार खड़ा कर दिया जाता है।


निरीक्षण में भी खुली पोल
निरीक्षण के दौरान कॉलेज का सत्यापन एवं परीक्षण किया गया। निरीक्षण में यह स्पष्ट हुआ कि संसाधन उपलब्ध हैं, भवन पूरी तरह तैयार हैं, फिर भी न पढ़ाई शुरू है और न ही अस्पताल की कोई सेवा। यह स्थिति या तो घोर प्रशासनिक लापरवाही की ओर इशारा करती है, या फिर यह संदेह को जन्म देती है कि कहीं भ्रष्टाचार के कारण तो इस योजना को ठंडे बस्ते में नहीं डाला गया।
      जवाबदेही तय करने की मांग
इस मामले को लेकर एंटी करप्शन ऑफ इंडिया, झारखंड प्रदेश अध्यक्ष धी रामहरि पेरियार ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि इस सिस्टम को सुधारना केवल जरूरत नहीं, हमारा कर्तव्य है। अब सवालों से कोई नहीं बच सकता।


उन्होंने स्पष्ट रूप से सवाल उठाए
कॉलेज संचालन में देरी के लिए ज़िम्मेदार कौन है? तय समय-सीमा का उल्लंघन क्यों किया गया?
आयुर्वेदिक कॉलेज और अस्पताल आम जनता के लिए कब खोले जाएंगे? जनता को आश्वासन नहीं, कार्रवाई चाहिए, स्थानीय लोगों का कहना है कि अब वे झूठे आश्वासनों से थक चुके हैं। यदि शीघ्र ही कॉलेज और अस्पताल का संचालन शुरू नहीं हुआ, तो यह मुद्दा व्यापक स्तर पर उठाया जाएगा।
   अंत में एक ही सवाल गूंज रहा है,
विकास आखिर कब कागजों से निकलकर जमीन पर आएगा?
क्योंकि विकास कोई एहसान नहीं, जनता का अधिकार है।

युवा कांग्रेस सांगठनिक चुनाव परिणाम घोषित, प्रीतम बांकिरा पुनः  पश्चिमी सिंहभूम के जिलाध्यक्ष बने

युवा कांग्रेस सांगठनिक चुनाव परिणाम घोषित, प्रीतम बांकिरा पुनः  पश्चिमी सिंहभूम के जिलाध्यक्ष बने

पश्चिमी सिंहभूम : युवा कांग्रेस के सांगठनिक चुनाव के परिणाम घोषित कर दिए गए हैं। यह चुनाव प्रखंड अध्यक्ष, विधानसभा अध्यक्ष, जिला महासचिव, जिलाध्यक्ष, प्रदेश महासचिव और प्रदेश अध्यक्ष पदों के लिए आयोजित किया गया था। 18 से 35 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं ने सदस्यता लेकर मतदान में भाग लिया। मतदान की प्रक्रिया लगभग एक महीने तक चली।
चुनाव परिणामों के अनुसार प्रीतम बांकिरा को दूसरी बार पश्चिमी सिंहभूम जिला युवा कांग्रेस का अध्यक्ष निर्वाचित किया गया है। उनके पुनः जिलाध्यक्ष बनने पर जिले के युवा कार्यकर्ताओं में उत्साह और खुशी देखी जा रही है।
प्रीतम बांकिरा छात्र हितों और जिले की जनसमस्याओं को लेकर लगातार सक्रिय रहे हैं। उनके कार्यकाल में युवा कांग्रेस संगठन का विस्तार जिला से लेकर पंचायत स्तर तक किया गया है।
पुनः निर्वाचित होने के बाद प्रीतम बांकिरा ने कहा कि संगठन को जमीनी स्तर पर और अधिक मजबूत करना उनकी प्राथमिकता होगी। उन्होंने बताया कि ऐसे युवाओं को संगठन से जोड़ा जाएगा जिनकी कोई राजनीतिक पृष्ठभूमि नहीं है, लेकिन वे राजनीति के माध्यम से समाज सेवा करना चाहते हैं। शिक्षित और ऊर्जावान युवाओं की भागीदारी से आम जनता को सीधा लाभ मिलेगा।
प्रीतम बांकिरा के जिलाध्यक्ष बनने पर जगन्नाथपुर के विधायक सोनाराम सिंकु, जिला पर्यवेक्षक डॉ. प्रदीप बालमूचू, जिला कांग्रेस अध्यक्ष रंजन बोयपाई सहित कई कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने उन्हें बधाई दी।

मनरेगा रद्द करना गरीब मजदूरों के खिलाफ साजिश : बुधराम लागुरी

मनरेगा रद्द करना गरीब मजदूरों के खिलाफ साजिश : बुधराम लागुरी

चाईबासा : झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के जिला प्रवक्ता बुधराम लागुरी ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि मनरेगा को रद्द करना भाजपा की गरीब और मजदूर विरोधी मानसिकता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि मनरेगा ग्रामीण मजदूरों के लिए केवल एक योजना नहीं, बल्कि उनकी आजीविका का सुरक्षा कवच है, जिसे केंद्र की भाजपा सरकार साजिश के तहत समाप्त करने का प्रयास कर रही है।
श्री लागुरी ने बताया कि मनरेगा और प्रस्तावित “वीबी-जी रामजी बिल 2025” में बड़ा अंतर है। यह बिल संसद के शीतकालीन सत्र में राज्यों से बिना परामर्श और व्यापक चर्चा के जल्दबाजी में पारित किया गया, जिससे ग्रामीण गरीबों के रोजगार के संवैधानिक अधिकार कमजोर होंगे।
उन्होंने कहा कि मनरेगा का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में प्रत्येक परिवार को हर साल कम से कम 100 दिनों का गारंटीकृत रोजगार देकर गरीबी कम करना, टिकाऊ परिसंपत्तियों का निर्माण करना और महिलाओं तथा एससी/एसटी वर्गों को सामाजिक रूप से सशक्त बनाना है।
बुधराम लागुरी ने घोषणा की कि 27 दिसंबर को दिन के 11 बजे भाजपा सरकार के खिलाफ पुराना डीसी कार्यालय, चाईबासा में जोरदार विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। इस कार्यक्रम में झामुमो पश्चिमी सिंहभूम जिला के सभी जिला व वर्ग संगठन, प्रखंड, नगर समितियों के सदस्य, पदाधिकारी और केंद्रीय सदस्य शामिल होंगे।
उन्होंने कहा कि मनरेगा ग्रामीणों को काम, सम्मान और आर्थिक सुरक्षा देता है, जबकि नया बिल मजदूरों की सौदेबाजी की ताकत छीनने का प्रयास है।

राज्य कैबिनेट की बैठक में 39 प्रस्तावों को मंजूरी, पेसा नियमावली को मिली स्वीकृति

राज्य कैबिनेट की बैठक में 39 प्रस्तावों को मंजूरी, पेसा नियमावली को मिली स्वीकृति

रांची : राज्य मंत्रिपरिषद की बैठक में कुल 39 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। इनमें सबसे अहम फैसला पेसा (PESA) नियमावली को स्वीकृति देना रहा। लंबे समय से लंबित इस नियमावली के लागू होने से अनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम सभाओं को अधिक अधिकार और स्वायत्तता मिलेगी।

सरकार के अनुसार, पेसा नियमावली से जल, जंगल और जमीन से जुड़े मामलों में ग्राम सभाओं की भूमिका मजबूत होगी। इससे आदिवासी बहुल क्षेत्रों में निर्णय प्रक्रिया अधिक लोकतांत्रिक बनेगी और विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में स्थानीय सहभागिता बढ़ेगी।

बैठक में पारित अन्य 38 प्रस्तावों में प्रशासनिक सुधार, विभिन्न विभागों से जुड़े नीतिगत निर्णय और जनहित से संबंधित मुद्दे शामिल हैं। सरकार ने बताया कि पेसा नियमावली के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए आगे विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे।

मनरेगा मुद्दे पर राहुल आदित्य का केंद्र सरकार पर हमला, 27 दिसंबर को धरना

मनरेगा मुद्दे पर राहुल आदित्य का केंद्र सरकार पर हमला, 27 दिसंबर को धरना

चाईबासा : झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) पश्चिमी सिंहभूम के जिला सचिव राहुल आदित्य ने लेटर जारि करते हुए कहा है कि केंद्रीय समिति के निर्देशानुसार केंद्र की भाजपा सरकार द्वारा देश की महत्वाकांक्षी रोजगार योजना मनरेगा को रद्द कर VB-GRAM-G बिल 2025 को जबरन पारित करना उसकी गरीब-विरोधी मानसिकता को उजागर करता है।
उन्होंने कहा कि मनरेगा जैसी योजना करोड़ों ग्रामीण गरीबों के लिए जीवनरेखा है, जिसे समाप्त कर केंद्र सरकार गरीब, मजदूर और आदिवासी विरोधी नीति अपना रही है। इसके विरोध में झामुमो द्वारा दिनांक 27 दिसंबर 2025 (शुक्रवार) को पुराना डीसी कार्यालय, चाईबासा के समक्ष पूर्वाह्न 11 बजे से एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन का आयोजन किया जा रहा है।

इस धरना-प्रदर्शन में केंद्रीय समिति के पदाधिकारीगण,केंद्रीय सदस्यगण,जिला समिति के सभी पदाधिकारी एवं सदस्यगण,
जिला स्तरीय वर्ग संगठन के पदाधिकारीगण,प्रखंड/नगर अध्यक्ष-सचिव सहित पार्टी के सभी स्तर के पदाधिकारी एवं सम्मानित कार्यकर्तागण की सहभागिता सुनिश्चित की गई है।

झामुमो जिला सचिव राहुल आदित्य ने सभी पार्टी साथियों एवं कार्यकर्ताओं से कार्यक्रम में अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर आंदोलन को सफल बनाने की अपील की है।

पर्यावरण एवं प्रदूषण नियंत्रण समिति ने पश्चिमी सिंहभूम का किया दौरा

पर्यावरण एवं प्रदूषण नियंत्रण समिति ने पश्चिमी सिंहभूम का किया दौरा

चाईबासा : झारखंड विधानसभा की पर्यावरण एवं प्रदूषण नियंत्रण समिति ने अपने निर्धारित भ्रमण एवं स्थल अध्ययन कार्यक्रम के तहत पश्चिमी सिंहभूम जिला का दौरा किया। समिति के चाईबासा आगमन पर परिसदन में जिले के वरीय पदाधिकारियों द्वारा समिति के सभापति एवं सदस्यों का पुष्पगुच्छ देकर स्वागत किया गया।

इसके बाद परिसदन सभागार में समिति के सभापति विधायक उदय शंकर सिंह की अध्यक्षता में समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में समिति सदस्य विधायक श्वेता सिंह, जिगा सुसारन होरो, संजीव सरदार एवं रोशन लाल चौधरी सहित सभी वन प्रमंडल पदाधिकारी, अपर उपायुक्त, सिविल सर्जन, कार्यपालक अभियंता एवं अन्य जिला स्तरीय पदाधिकारी उपस्थित रहे।

बैठक में जिले की खदानों की स्थिति, बालू घाटों की अद्यतन जानकारी तथा राजस्व संग्रह की प्रगति की समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप राजस्व संग्रह किया जा रहा है। साथ ही अवैध खनन के विरुद्ध की गई कार्रवाई, दर्ज प्राथमिकी, जब्त वाहन एवं वसूली गई राशि की जानकारी समिति को दी गई। समिति ने अवैध खनन, भंडारण एवं परिवहन पर सख्त एवं निरंतर कार्रवाई के निर्देश दिए।

प्रदूषण नियंत्रण विभाग से औद्योगिक इकाइयों में प्रदूषण की स्थिति की समीक्षा की गई। समिति ने सभी इकाइयों में एयर पॉल्यूशन कंट्रोल यूनिट की अनिवार्य स्थापना, पर्यावरणीय मानकों का कड़ाई से पालन, पौधारोपण, चाहरदीवारी निर्माण तथा सड़कों पर नियमित जल छिड़काव सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही प्रदूषण से संबंधित शिकायतों का समयबद्ध निष्पादन करने को कहा गया।

बैठक में श्रम अधीक्षक को न्यूनतम मजदूरी भुगतान और श्रम कानूनों के पालन की नियमित निगरानी करने के निर्देश दिए गए। नियोजन पदाधिकारी को स्थानीय लोगों को 75 प्रतिशत रोजगार उपलब्ध कराने हेतु प्रभावी कार्रवाई करने को कहा गया। स्वास्थ्य विभाग को बायो-मेडिकल वेस्ट का वैज्ञानिक एवं सुरक्षित निस्तारण सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया।

इसके अलावा समिति ने पेयजल, डीएमएफटी, भू-अर्जन, नगर निकाय सहित अन्य विभागों की भी समीक्षा की और सभी योजनाओं के प्रभावी, पारदर्शी एवं समयबद्ध क्रियान्वयन के निर्देश दिए।

चक्रधरपुर में श्रीनिवास रामानुजन जयंती सह राष्ट्रीय गणित दिवस मनाया गया

चक्रधरपुर में श्रीनिवास रामानुजन जयंती सह राष्ट्रीय गणित दिवस मनाया गया

पश्चिमी सिंहभूम : चक्रधरपुर के पद्मावती जैन सरस्वती शिशु विद्या मंदिर इंग्लिश मीडियम, पंप रोड में सोमवार को महान गणितज्ञ श्रीनिवास रामानुजन की जयंती सह राष्ट्रीय गणित दिवस श्रद्धा एवं उत्साह के साथ मनाया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ विद्यालय के प्रधानाचार्य आनंद चन्द्र प्रधान ने भारत माता एवं श्रीनिवास रामानुजन के चित्र पर दीप प्रज्ज्वलन और पुष्प अर्पित कर किया।
इस अवसर पर प्रधानाचार्य ने विद्यार्थियों को रामानुजन जयंती की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि मजबूत इच्छाशक्ति से कोई भी कार्य असंभव नहीं होता। उन्होंने श्रीनिवास रामानुजन को भारत का महान एवं असाधारण गणितज्ञ बताया, जिन्हें बचपन से ही गणित में विशेष रुचि थी और यही रुचि उन्हें महान उपलब्धियों तक ले गई।
आचार्य सौभीक घटक ने श्रीनिवास रामानुजन के जीवन पर प्रकाश डालते हुए बताया कि उन्होंने गणित में हजारों सूत्रों की खोज की। उनके कार्यों से प्रभावित होकर प्रो. हार्डी ने उन्हें इंग्लैंड बुलाया, जहां दोनों ने मिलकर महत्वपूर्ण गणितीय शोध किए।
कार्यक्रम का संचालन मीना कुमारी ने किया। उन्होंने बताया कि रामानुजन की स्मृति में कक्षा स्तर पर गणित एवं चित्रकला प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। कार्यक्रम को सफल बनाने में जयश्री दास, शांति देवी, मीना कुमारी, स्वस्तिक सोय, भारती कुमारी एवं जयंती तांती का सराहनीय योगदान रहा।

भोगनाडीह कार्यक्रम में शामिल होने से रोके जाने का आरोप, चम्पाई सोरेन ने सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

भोगनाडीह कार्यक्रम में शामिल होने से रोके जाने का आरोप, चम्पाई सोरेन ने सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

साहिबगंज : पूर्व मुख्यमंत्री एवं जनप्रतिनिधि चम्पाई सोरेन ने राज्य सरकार पर उन्हें भोगनाडीह जाने से रोकने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि 22 दिसंबर को वीर सिदो-कान्हू हूल फाउंडेशन द्वारा आयोजित संथाल परगना स्थापना दिवस कार्यक्रम में उन्हें शामिल होना था, लेकिन सरकार ने कार्यक्रम को रोकने के लिए पूरी प्रशासनिक ताकत झोंक दी।
उन्होंने बताया कि कार्यक्रम की अनुमति के लिए आवेदन देने के बावजूद दो सप्ताह तक उसे लंबित रखा गया। इसके बाद जिला प्रशासन ने दर्जन भर मजिस्ट्रेट की तैनाती कर दी और कई कठोर व असामान्य शर्तें लगा दीं। आयोजकों से 30 वॉलंटियरों की सूची आधार कार्ड के साथ थाने में जमा करने, मैदान के बाहर गेट निर्माण की अनुमति न देने तथा पूरे प्रशासन को अलर्ट पर रखने जैसे निर्देश दिए गए।
चम्पाई सोरेन ने सवाल उठाया कि क्या कभी किसी सामान्य खेल या सामाजिक कार्यक्रम में इतने मजिस्ट्रेट और पुलिस बल की तैनाती होती है। उन्होंने कहा कि ट्रैफिक प्रबंधन, नशा मुक्ति और जुआ-सट्टा रोकने जैसी जिम्मेदारियां प्रशासन की होती हैं, लेकिन इन्हें आयोजकों पर थोपने का प्रयास किया जा रहा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि साहिबगंज जिले में उनके कार्यक्रमों पर अघोषित प्रतिबंध लगाया गया है, जबकि राज्य के अन्य जिलों में उन्होंने कई सामाजिक कार्यक्रमों में बिना किसी समस्या के भाग लिया है। उन्होंने यह भी कहा कि आयोजकों के खिलाफ कार्रवाई की साजिश रची जा रही है ताकि बाद में पुलिसिया दमन किया जा सके।
नगड़ी आंदोलन का जिक्र करते हुए चम्पाई सोरेन ने कहा कि इससे पहले भी सरकार ने उन्हें रोकने की कोशिश की थी, लेकिन जनता की ताकत के आगे सरकार को पीछे हटना पड़ा था। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार दमन का रास्ता अपनाएगी तो उसका जवाब जनआंदोलन से दिया जाएगा।
उन्होंने घोषणा की कि आगामी 30 जून 2026 को हूल दिवस के अवसर पर झारखंड, पश्चिम बंगाल, बिहार और ओडिशा से लाखों आदिवासी समाज के लोग रथ यात्रा के साथ भोगनाडीह पहुंचेंगे और अगर सरकार में ताकत हो, तो हमें रोक के दिखाए।

मनरेगा को कमजोर करने का आरोप, कांग्रेस ने किया विरोध

मनरेगा को कमजोर करने का आरोप, कांग्रेस ने किया विरोध

दिल्ली : कांग्रेस संसदीय दल (CPP) की चेयरपर्सन श्रीमती सोनिया गांधी ने केंद्र सरकार पर मनरेगा को कमजोर करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि लगभग 20 वर्ष पहले तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के नेतृत्व में संसद ने सर्वसम्मति से मनरेगा कानून पारित किया था, जिससे करोड़ों ग्रामीण परिवारों, खासकर गरीब, वंचित और अतिगरीब वर्ग को रोजगार का कानूनी अधिकार मिला।

सोनिया गांधी ने कहा कि मनरेगा के कारण ग्रामीणों का पलायन रुका और ग्राम पंचायतों को सशक्त बनाया गया। यह योजना महात्मा गांधी के ग्राम स्वराज के सपनों को साकार करने की दिशा में एक बड़ा कदम थी। उन्होंने कहा कि कोविड-19 महामारी के दौरान भी मनरेगा गरीबों के लिए संजीवनी साबित हुआ।

उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले 11 वर्षों में मोदी सरकार ने मनरेगा को लगातार कमजोर करने की कोशिश की है। हाल ही में सरकार द्वारा बिना विचार-विमर्श और विपक्ष को विश्वास में लिए मनरेगा के स्वरूप में बदलाव किया गया है, जिससे इसकी मूल भावना को ठेस पहुंची है। उन्होंने यह भी कहा कि अब रोजगार से जुड़े फैसले जमीनी जरूरतों के बजाय दिल्ली से तय किए जाएंगे।

सोनिया गांधी ने कहा कि मनरेगा किसी एक पार्टी की नहीं, बल्कि देशहित और जनहित से जुड़ी योजना है। कांग्रेस इसे कमजोर करने के खिलाफ संघर्ष जारी रखेगी और किसानों, श्रमिकों व भूमिहीन ग्रामीण गरीबों के हितों की रक्षा के लिए पूरी मजबूती से खड़ी रहेगी।

उन्होंने कहा कि जैसे 20 साल पहले गरीबों को रोजगार का अधिकार दिलाने के लिए संघर्ष किया गया था, वैसे ही आज भी मनरेगा के पक्ष में लड़ाई जारी रहेगी।