Blog

बिजली विभाग की दोहरी नीति, अमीरों के लिए महफूज रास्ता, गरीबों के लिए सजा :- धी. रामहरि पेरियार

बिजली विभाग की दोहरी नीति, अमीरों के लिए महफूज रास्ता, गरीबों के लिए सजा :- धी. रामहरि पेरियार

चाईबासा : जिले में बिजली विभाग की वसूली व्यवस्था पूरी तरह से भ्रष्टाचार, पक्षपात और प्रशासनिक विफलता का चरम उदाहरण बन चुकी है। विभाग अब सेवा प्रदाता नहीं, बल्कि वसूली तंत्र के रूप में काम कर रहा है। शुक्रवार को दैनिक जागरूक अखबार में प्रकाशित समाचार में विभाग की दोहरी नीति साफ उजागर हो गई, लाखों-करोड़ों रुपये बकाया रखने वाले बड़े व्यापारी, उद्योगपति और रसूखदार व्यक्तियों पर न नोटिस जाता है, न दबाव बनता है और न ही उनके कनेक्शन काटने की किसी अधिकारी में हिम्मत दिखाई देती है।
लेकिन गरीब? महज 5–10 हजार रुपये का बकाया होते ही बिजली विभाग ऐसे टूट पड़ता है जैसे कोई बड़ा अपराध हो गया हो। गरीब परिवारों के घर में अंधेरा उतारने में विभाग को न शर्म, न संवेदना और न ही कोई सामाजिक जिम्मेदारी महसूस होती है। इसी दोहरे चरित्र ने यह साबित कर दिया है अमीरों को छूट, गरीबों को लूट ही आज के सिस्टम का असली चेहरा है।
       बड़े बकायेदारों पर चुप्पी, कमजोर पर कार्रवाई, इसी को विभाग नीति’ कहता है!
           एंटी करप्शन ऑफ इंडिया के झारखंड प्रदेश अध्यक्ष धी. रामहरि पेरियार ने कहा कि बिजली विभाग में भ्रष्टाचार इतना गहरा बैठ चुका है कि बड़े बकायेदारों के सामने अधिकारी नतमस्तक हो जाते हैं, जबकि गरीब उपभोक्ताओं पर तानाशाही थोपते हैं। करोड़ों की वसूली छोड़कर 5–10 हजार रुपये वाले गरीब परिवारों की बिजली काटना विभाग की मानसिकता का प्रमाण है। यह नीति नहीं, बल्कि सीधी-सीधी नालायकी + मिलीभगत है।
    उन्होंने स्पष्ट किया कि जिले के सभी बड़े बकायेदार उद्योगपतियों और व्यापारियों की सूची तुरंत सार्वजनिक की जाए। वसूली की शुरुआत उन्हीं से हो, जो लाखों–करोड़ों रुपये दबाकर बैठे हैं।गरीब परिवारों की बिजली काटने की मनमानी को तुरंत रोका जाए।विभागीय स्तर पर चल रही सेलेक्टिव वसूली और भ्रष्ट मिलीभगत की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए। गरीब उपभोक्ताओं के लिए राहत योजनाएँ तथा आसान किस्त व्यवस्था लागू की जाए। यदि विभाग की यह दोहरी नीति बंद नहीं हुई, यदि बड़े बकायेदारों पर तत्काल कार्रवाई नहीं की गई, और यदि गरीबों का उत्पीड़न जारी रहा तो एंटी करप्शन ऑफ इंडिया जिला मुख्यालय से लेकर प्रखंड स्तर तक बड़े पैमाने पर हस्ताक्षर अभियान एवं जनआंदोलन शुरू करेगा। इससे उत्पन्न स्थिति की पूरी जिम्मेदारी बिजली विभाग और उसके अधिकारियों की होगी।

पश्चिमी सिंहभूम में डीएमएफटी अनुशिक्षक बहाली हेतु आयोजित दक्षता परीक्षा का उपायुक्त ने किया निरीक्षण

पश्चिमी सिंहभूम में डीएमएफटी अनुशिक्षक बहाली हेतु आयोजित दक्षता परीक्षा का उपायुक्त ने किया निरीक्षण

चाईबासा : पश्चिमी सिंहभूम जिले के सरकारी उच्च विद्यालयों में कक्षा 9–10 के विद्यार्थियों की पढ़ाई में सहयोग के लिए डीएमएफटी के तहत 190 घंटी आधारित अनुशिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया जारी है। इसी क्रम में चाईबासा के टाटा कॉलेज परिसर स्थित बहुउद्देशीय सभागार में आयोजित दक्षता परीक्षा का निरीक्षण जिला दंडाधिकारी-सह-उपायुक्त श्री चंदन कुमार ने किया।

निरीक्षण के दौरान उपायुक्त ने परीक्षा व्यवस्था की समीक्षा की और उपस्थित अभ्यर्थियों को परीक्षा के नियमों की जानकारी दी। उन्होंने निर्देश दिया कि सभी अभ्यर्थी अपने ओएमआर शीट में मांगी गई जानकारी स्पष्ट और सही रूप से भरें तथा उपस्थिति शीट में हस्ताक्षर अवश्य करें। नियमों से अवगत कराने के बाद उपायुक्त ने सभी अभ्यर्थियों को शुभकामनाएं भी दीं।

दो पालियों में आयोजित इस विषय-वार दक्षता परीक्षा में कुल 895 अभ्यर्थियों ने हिस्सा लिया। परीक्षा में शामिल होने के लिए अभ्यर्थियों को एडमिट कार्ड आज ही समाहरणालय परिसर में वितरित किए गए।

परीक्षा संचालन के दौरान सहायक समाहर्ता श्री सिद्धांत कुमार, नजारत उप-समाहर्ता श्री देवेंद्र कुमार, खुंटपानी के बीडीओ श्री धनंजय पाठक, कार्यपालक दंडाधिकारी श्री कुमार हर्ष, जिला शिक्षा अधीक्षक श्री प्रवीण कुमार सहित अन्य प्रतिनियुक्त पदाधिकारी व कर्मी उपस्थित रहे।

पूर्वी सिंहभूम की चार महिला रग्बी खिलाड़ी खेलो इंडिया जोनल गेम्स के लिए झारखंड टीम में चयनित

पूर्वी सिंहभूम की चार महिला रग्बी खिलाड़ी खेलो इंडिया जोनल गेम्स के लिए झारखंड टीम में चयनित

पूर्वी सिंहभूम : पूर्वी सिंहभूम जिले के लिए गौरव का विषय है कि जिला महिला रग्बी टीम की चार खिलाड़ी खेलो इंडिया जोनल रग्बी चैंपियनशिप के लिए झारखंड रग्बी टीम में चयनित हुई हैं। झारखंड रग्बी फुटबॉल द्वारा 23 नवंबर को गोड्डा जिले में आयोजित ट्रायल सेलेक्शन में इन खिलाड़ियों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए अपनी जगह सुनिश्चित की। यह उपलब्धि जिले के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर मानी जा रही है।

चयनित खिलाड़ियों के नाम :

रोशन सरदार – अंडर–15 टीम

प्रिया हांसदा – अंडर–18 टीम

प्रियंका सरदार – सीनियर टीम

रिंकी नायक – सीनियर टीम


सूत्रों के अनुसार, झारखंड रग्बी टीम के साथ सभी खिलाड़ी आज रात 8 बजे देवघर रेलवे स्टेशन से गुवाहाटी के लिए रवाना होंगी। 6–7 दिसंबर को इंदिरा गांधी एथलेटिक स्टेडियम, गुवाहाटी, असम में आयोजित होने वाली खेलो इंडिया जोनल रग्बी चैंपियनशिप में वे झारखंड का प्रतिनिधित्व करेंगी।

इस अवसर पर पूर्वी सिंहभूम जिला रग्बी फुटबॉल संघ के अध्यक्ष जेनाराम बोदरा, कोच जादुमुनि हेम्ब्रोम, कोच करिया मार्डी, कॉर्डिनेटर राजाराम सरदार एवं संघ के अन्य पदाधिकारियों ने चयनित खिलाड़ियों कोहार्दिक बधाई एवं सफल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।

मैट्रिक परीक्षा 2025 के परीक्षा केंद्रों को केवल जिला मुख्यालय में सीमित करने के निर्णय पर कड़ा विरोध:- धी रामहरि पेरियार

मैट्रिक परीक्षा 2025 के परीक्षा केंद्रों को केवल जिला मुख्यालय में सीमित करने के निर्णय पर कड़ा विरोध:- धी रामहरि पेरियार

चाईबासा : एंटी करप्शन ऑफ इंडिया के झारखंड प्रदेश अध्यक्ष धी. रामहरि पेरियार ने  गुरुवार को पश्चिम सिंहभूम के उपायुक्त चंदन कुमार को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपकर झारखंड अधिविद्यालय परिषद् द्वारा मैट्रिक बोर्ड परीक्षा–2025 के परीक्षा केंद्रों को केवल जिला मुख्यालयों में सीमित करने के फैसले का कड़ा विरोध दर्ज कराया।
     धी. पेरियार ने कहा कि यह निर्णय न केवल अव्यावहारिक, बल्कि प्रत्यक्ष रूप से ग्रामीण छात्र–छात्राओं के भविष्य पर हमला है। प्रदेश के लाखों गरीब, पहाड़ी, दूरदराज और वन क्षेत्र के छात्रों के सामने यह निर्णय भारी संकट खड़ा कर देगा।

धी.पेरियार द्वारा बताए गए प्रमुख तथ्य और आपत्तियाँ :-

1. दशकों की सफल प्रणाली को तोड़ने का औचित्य समझ से परे
संयुक्त बिहार काल से लेकर झारखंड गठन तक परीक्षा केंद्र हमेशा स्थानीय स्तर पर ही रहते आए हैं और परीक्षा शांति व सुव्यवस्था से होती रही है। ऐसे सफल मॉडल को अचानक ध्वस्त करना प्रशासनिक विवेक की जगह छात्रों पर बोझ डालने जैसा है।

2. सुरक्षा का तर्क भ्रामक, सुविधाएँ गाँवों तक उपलब्ध
आज ग्रामीण क्षेत्रों में बैंक शाखाएँ, थाना चौकियाँ, सुरक्षित स्ट्रॉन्ग रूम, और पर्याप्त पुलिस बल—सब मौजूद हैं। प्रश्नपत्र सुरक्षा का हवाला देकर केवल शहरों में केंद्र बनाना तथ्यहीन और गैर-जरूरी है।

3. शहरों पर अनावश्यक बोझ—ग्रामीण छात्रों के लिए मानसिक व आर्थिक संकट
शहर पहले ही जाम, आवास की कमी और भीड़भाड़ से जूझ रहे हैं। लाखों ग्रामीण छात्रों को अचानक शहर भेजना महँगा किराया, अस्थायी आवास और असुरक्षित माहौल में रहने की मजबूरी पैदा करेगा—यह छात्र हित नहीं, शोषण है।

4. गरीब परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक मार
झारखंड में अधिकांश परिवार खेती, दिहाड़ी मजदूरी और मौसमी आय पर निर्भर हैं। अपने बच्चे को शहर भेजना बहुतों के लिए असंभव है। परीक्षा देना अधिकार है—उसे प्राप्त करने का रास्ता कठिन बनाना अन्याय है।

5. यातायात व्यवस्था चरमराएगी
शहरों का टेंपो/टोटो आधारित परिवहन वर्तमान लोड ही झेल नहीं पा रहा। लाखों छात्रों के एक साथ आने से यातायात व्यवस्था ठप हो सकती है, जिससे सुरक्षा और प्रबंधन दोनों प्रभावित होंगे। स्पष्ट माँग: निर्णय तुरंत वापस लिया जाए

धी पेरियार ने कहा यह निवेदन नहीं, छात्र–हित और न्याय–हित में स्पष्ट और दृढ़ माँग है कि परिषद् इस निर्णय पर तत्काल पुनर्विचार करे।
उन्होंने कहा कि परीक्षा केंद्रों को स्थानीय/प्रखंड स्तर पर रखना ही व्यावहारिक, सुरक्षित और छात्रहितकारी समाधान है, जिससे सभी तबके के विद्यार्थियों को समान अवसर मिल सके।
   यदि परिषद् इस अव्यावहारिक निर्णय पर अडिग रहती है, तो संगठन व्यापक जन–आंदोलन और कानूनी विकल्पों पर विचार करेगा, ताकि छात्रों का भविष्य सुरक्षित रह सके।

पश्चिमी सिंहभूम में राजस्व व भू-अर्जन कार्यों की समीक्षा बैठक—उपायुक्त ने लंबित मामलों के जल्द निष्पादन के दिए निर्देश

पश्चिमी सिंहभूम में राजस्व व भू-अर्जन कार्यों की समीक्षा बैठक—उपायुक्त ने लंबित मामलों के जल्द निष्पादन के दिए निर्देश

चाईबासा : ‌पश्चिमी सिंहभूम जिला समाहरणालय स्थित सभागार में मंगलवार को उपायुक्त-सह-जिला दंडाधिकारी चंदन कुमार की अध्यक्षता में राजस्व संग्रहण, गैर-विभागीय राजस्व, नीलाम पत्र वाद, भू-अर्जन और अन्य राजस्व कार्यों की समीक्षा बैठक आयोजित की गई।

बैठक में भू-लगान, दाखिल-खारिज, ऑनलाइन राजस्व न्यायालय, अंतरविभागीय भू-हस्तांतरण, जीएम लैंड सर्वे, सीमांकन, खासमहल लीज नवीकरण और परीशोधन झारभूमि शिकायत समेत विभिन्न मामलों की बिंदुवार समीक्षा की गई। उपायुक्त ने निर्देश दिया कि ऑनलाइन राजस्व न्यायालय में 5 साल से लंबित मामलों का जल्द से जल्द निष्पादन सुनिश्चित किया जाए। साथ ही भूमि सीमांकन के लंबित मामलों के निपटारे के लिए विशेष शिविर आयोजित किए जाएँ और राजस्व वसूली की रफ्तार बढ़ाई जाए।

गैर-विभागीय राजस्व संग्रहण की समीक्षा के दौरान बताया गया कि अब तक खनन विभाग से ₹214674.15 लाख, उत्पाद विभाग से ₹8786 लाख, राज्य कर कार्यालय से ₹28677 लाख, अवर निबंधन कार्यालय चाईबासा से ₹853 लाख, चक्रधरपुर से ₹354 लाख तथा परिवहन विभाग से लक्ष्य के विरुद्ध ₹2100 लाख का राजस्व प्राप्त हुआ है।

उपायुक्त ने चाईबासा एवं चक्रधरपुर नगर परिषद, माप-तौल विभाग, विद्युत आपूर्ति प्रमंडल, जिला मत्स्य कार्यालय और अन्य विभागों को इस वित्तीय वर्ष में निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप राजस्व संग्रहण पूरा करने का निर्देश दिया।

बैठक में भू-अर्जन से संबंधित मामलों और जिले में राष्ट्रीय राजमार्ग पर प्रस्तावित रेल ओवरब्रिज तथा पथ निर्माण विभाग द्वारा संचालित सड़क परियोजनाओं की भी विस्तृत समीक्षा की गई।

पंड्रासाली में पारिवारिक विवाद के बाद युवक का आत्महत्या का प्रयास, गंभीर हालत में एमजीएम जमशेदपुर रेफर

पंड्रासाली में पारिवारिक विवाद के बाद युवक का आत्महत्या का प्रयास, गंभीर हालत में एमजीएम जमशेदपुर रेफर

पश्चिम सिंहभूम : खुंटपानी प्रखंड अंतर्गत पंड्रासाली गांव में गुरुचरण पुरती ने पत्नी से पारिवारिक विवाद के बाद आत्महत्या का प्रयास किया। उन्होंने घर में ही अपने छाती में तलवार घोंपकर खुद को घायल कर लिया।

घटना की जानकारी मिलते ही परिजनों ने उन्हें तुरंत सदर अस्पताल, चाईबासा पहुंचाया। प्राथमिक उपचार के बाद चिकित्सकों ने उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए एमजीएम अस्पताल, जमशेदपुर रेफर कर दिया।

परिवार की सूचना पर प्रखंड प्रमुख सिद्धार्थ होनहागा भी सदर अस्पताल पहुंचे और पीड़ित से मुलाकात की। उन्होंने पीड़ित को एमजीएम ले जाने के लिए एंबुलेंस की व्यवस्था कराई।

परिवार के अनुसार, घरेलू विवाद के कारण स्थिति गंभीर हो गई थी, जिससे यह दुखद घटना हुई।

झारखंड राजभवन का नाम बदला — अब “लोक भवन झारखंड” के नाम से जाना जाएगा

झारखंड राजभवन का नाम बदला — अब “लोक भवन झारखंड” के नाम से जाना जाएगा

झारखंड के राजभवन का नाम अब बदलकर “लोक भवन झारखंड” कर दिया गया है। इस संबंध में आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी गई है। राज्यपाल संतोष गंगवार ने अपने एक्स हैंडल पर पोस्ट करते हुए बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और गृह मंत्रालय की पहल के तहत देश के सभी राजभवनों को लोक-केंद्रित पहचान दी जा रही है।

इसी क्रम में अब रांची और दुमका के राजभवन को आधिकारिक रूप से लोक भवन नाम दिया गया है। राज्यपाल के अपर मुख्य सचिव नितीन मदन कुलकर्णी के हस्ताक्षर से बुधवार को आदेश जारी किया गया।

सरकार के अनुसार यह बदलाव राज्य सरकार के प्रस्ताव पर राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद लागू हुआ है। नए नाम की घोषणा के बाद राज्य में राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। सरकार का कहना है कि नाम बदलने का उद्देश्य यह संदेश देना है कि सरकार सेवा के लिए है।

सियालजोड़ा–देवगांव पीसीसी पथ निर्माण में पुल की मांग, किसानों ने जताई चिंता

सियालजोड़ा–देवगांव पीसीसी पथ निर्माण में पुल की मांग, किसानों ने जताई चिंता

चाईबासा : दिनांक 2 दिसंबर 2025 को आदिवासी किसान मजदूर पार्टी के जिला अध्यक्ष एवं जिला परिषद सदस्य मानसिंह तिरिया ने ग्रामीणों की शिकायत पर सियालजोड़ा ग्राम देवगांव में चल रहे पीसीसी पथ निर्माण कार्य का निरीक्षण किया। यह सड़क मुख्य मार्ग से रामतीर्थ तक बनाई जा रही है और कार्यपालक अभियंता, लघु सिंचाई प्रमंडल चाईबासा द्वारा निर्माण कार्य कराया जा रहा है।

निरीक्षण के दौरान ग्रामीणों ने बताया कि सड़क निर्माण के बीच दो स्थानों पर पुल निर्माण की आवश्यकता है, लेकिन चिन्हांकन के दौरान इसे शामिल नहीं किया गया। किसानों का कहना है कि खेतों में पानी के प्रवाह का रास्ता बंद होने से खेती प्रभावित होगी।

ग्रामीणों ने बहादुर हांसदा के खेत (जामुन गढ़) के सामने एक पुल और राजू पुरती के खेत के सामने एक अन्य पुल निर्माण की मांग की है। इस संबंध में जब विभाग के एसडीओ से बात की गई तो उन्होंने मांग पत्र लिखित रूप में देने को कहा।

तिरिया ने बताया कि निरीक्षण के दौरान सड़क किनारे जीएसबी (GSV) की मात्रा कम पाई गई और मजदूरों को न्यूनतम मजदूरी नहीं मिलने की शिकायत भी सामने आई। उन्होंने कहा कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो मामला विभागीय स्तर तक ले जाया जाएगा।

इस मुद्दे को लेकर उपायुक्त को एक मांग पत्र सौंपा गया, जिसकी प्रति लघु सिंचाई प्रमंडल चाईबासा को भी भेजी गई है।

झारखंड आंदोलनकारी आसमान सुंडी बने संयुक्त मोर्चा के अध्यक्ष, चाईबासा में किया गया सम्मानित

झारखंड आंदोलनकारी आसमान सुंडी बने संयुक्त मोर्चा के अध्यक्ष, चाईबासा में किया गया सम्मानित

चाईबासा : झारखंड आंदोलनकारी श्री आसमान सुंडी को झारखंड आंदोलनकारी संयुक्त मोर्चा का अध्यक्ष बनाए जाने पर सोमवार को जिला परिषद कार्यालय में उनका सम्मान किया गया। प्रखंड अध्यक्ष सोमनाथ चातर और सचिव शाहिद अहमद के नेतृत्व में उन्हें फूलमाला और गुलदस्ता देकर स्वागत किया गया।

दोनों पदाधिकारियों ने कहा कि श्री सुंडी एक अनुभवी और संघर्षशील आंदोलनकारी हैं। उनके निरंतर प्रयासों का ही परिणाम है कि आज कई झारखंड आंदोलनकारियों को पेंशन का लाभ मिल रहा है और कई का चिन्हीकरण भी हो चुका है।

स्वागत समारोह में जगमोहन तिरिया, प्रमिला तिरिया, अंकुरा तिरिया, गर्दी संवैयां सहित बड़ी संख्या में आंदोलनकारी और आश्रित मौजूद थे।

90 दिनों में हर स्मार्टफोन पर अनिवार्य Sanchar Saathi: डेटा एक्सेस और सरकारी मॉनिटरिंग को लेकर उठे सवाल

90 दिनों में हर स्मार्टफोन पर अनिवार्य Sanchar Saathi: डेटा एक्सेस और सरकारी मॉनिटरिंग को लेकर उठे सवाल

भारत के दूरसंचार मंत्रालय ने एक बड़ा कदम उठाते हुए मोबाइल फोन निर्माताओं को निर्देश दिया है कि वे सरकार समर्थित साइबर सुरक्षा ऐप ‘Sanchar Saathi’ को अगले 90 दिनों के भीतर सभी नए स्मार्टफोनों में प्री-इंस्टॉल करें। यह ऐप न तो हटाया जा सकेगा और न ही डिसेबल होगा।
यह आदेश रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार जारी किया गया है।

ho language

क्या है Sanchar Saathi?

Sanchar Saathi एक सरकारी साइबर सुरक्षा प्लेटफ़ॉर्म है, जो वेब, Android और iOS पर उपलब्ध है। यह नागरिकों को टेलीकॉम फ्रॉड से बचाने और मोबाइल से जुड़े कई महत्वपूर्ण कार्यों में मदद करता है। इसके मुख्य फीचर्स हैं—

  • संदिग्ध कॉल, SMS और वेबसाइट लिंक की रिपोर्टिंग
  • चोरी हुए मोबाइल फोन को ब्लॉक या ट्रैक करना
  • अपने नाम पर कितने मोबाइल कनेक्शन चलते हैं, यह जांचना
  • अंतरराष्ट्रीय कॉल्स जिनके नंबर +91 से शुरू होते हैं, उनकी रिपोर्टिंग (ताकि विदेशी अवैध कॉल सेटअप को पकड़ा जा सके)

सरकार के अनुसार, इस तरह की कॉल आमतौर पर इंटरनेट के जरिए विदेशी लोकेशन से भेजी जाती हैं, ताकि वे भारतीय नंबर जैसी दिखाई दें, और यह फ्रॉड व राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करती हैं।

ऐप के अब तक के प्रभाव

  • कुल इंस्टॉलेशन: 1.14 करोड़ से अधिक
  • सबसे अधिक उपयोग: आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र
  • लॉन्च: मई 2023
  • अब तक ब्लॉक किए गए खोए/चोरी हुए मोबाइल: 42 लाख से अधिक
  • ट्रेस किए गए: 26 लाख
  • सफल रिकवरी: 7,23,638 डिवाइस

कौन-कौन से परमिशन लेता है ऐप?

Google Play Store में सूचीबद्ध ऐप निम्न परमिशन का उपयोग करता है—

  • SMS (पढ़ना/भेजना)
  • कॉल लॉग व फोन स्टेटस
  • फोटो/फाइल्स को पढ़ना और संशोधित करना
  • कैमरा
  • स्टोरेज
  • डिवाइस ID व कॉल जानकारी
  • नेटवर्क कनेक्शन की मॉनिटरिंग
  • स्टार्टअप पर रन करना, वाइब्रेशन नियंत्रित करना

निर्माताओं को क्या करना होगा?

28 नवंबर 2025 को जारी निर्देश के अनुसार—

  • नई डिवाइस में ऐप प्री-लोड करना होगा
  • सप्लाई चेन में मौजूद फोन में OTA अपडेट के जरिए ऐप भेजना होगा
  • ऐप को पहली बार डिवाइस सेटअप करते समय आसानी से दिखना चाहिए
  • इसके फीचर्स को डिसेबल या लिमिट नहीं किया जा सकेगा

सरकार का कहना है कि यह कदम नकली IMEI, स्पूफिंग, चोरी की डिवाइस की बिक्री और फर्जीवाड़े को रोकने के लिए जरूरी है।

रूस के MAX ऐप जैसा कदम?

भारत का यह निर्देश रूस की नीति से काफी मिलता-जुलता बताया जा रहा है।
रूस ने 1 सितंबर 2025 से सभी स्मार्ट डिवाइस पर घरेलू मैसेंजर ऐप MAX को अनिवार्य किया था। आलोचकों ने इसे निगरानी का माध्यम बताया, जबकि सरकार ने इन आरोपों को खारिज किया।

रूस ने Telegram और WhatsApp पर भी सख़्ती बढ़ाई है और कई क्षेत्रों में इनकी 40% तक पहुँच सीमित है। Roskomnadzor का दावा है कि इन ऐप्स का उपयोग आतंकवाद, धोखाधड़ी और अपराध गतिविधियों में बढ़ रहा है।

भारत में इस कदम पर क्या सवाल उठेंगे?

तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि—

  • अनइंस्टॉल न होने वाले सरकारी ऐप व्यक्तिगत गोपनीयता पर सवाल खड़े कर सकते हैं।
  • व्यापक परमिशन के कारण नागरिकों में डेटा सुरक्षा की चिंता बढ़ सकती है।
  • लेकिन सरकार इसे टेलीकॉम सुरक्षा को मजबूत करने और फ्रॉड रोकने के लिए जरूरी बता रही है।