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देवघर में एससी समुदाय पर अत्याचार के खिलाफ सामाजिक संगठनों की बैठक, सरकार को सख्त चेतावनी

देवघर में एससी समुदाय पर अत्याचार के खिलाफ सामाजिक संगठनों की बैठक, सरकार को सख्त चेतावनी

देवघर : देवघर में पिछले एक साल से अनुसूचित जाति समुदाय पर हो रहे अत्याचारों को लेकर सामाजिक संगठनों और राजनीतिक प्रतिनिधियों की एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। बैठक में पीड़ित परिवारों ने अपने अनुभव साझा किए और जिला प्रशासन की निष्क्रियता पर सवाल उठाए।

प्रतिनिधियों ने कहा कि प्रशासन के ढीले रवैये से अपराधियों के हौसले बढ़े हैं और समाज में आक्रोश फैला है। उनका आरोप है कि कुछ जातिवादी तत्वों को प्रशासनिक संरक्षण मिल रहा है, जिसके कारण घटनाओं पर त्वरित कार्रवाई नहीं हो पाती।

आज़ाद समाज पार्टी (कांशीराम) ने इस मुद्दे पर सख्त रुख अपनाते हुए झारखंड सरकार को चेतावनी दी है। पार्टी ने कहा कि यदि जातिवादी घटनाओं पर जल्द और कड़ी कार्रवाई नहीं हुई तो राज्यभर में बड़े पैमाने पर आंदोलन शुरू किया जाएगा।

प्रदेश अध्यक्ष काशिफ रज़ा ने कहा कि न्याय की मांग करने वालों के साथ खड़ा रहना उनका दायित्व है और पीड़ितों को न्याय मिलने तक संघर्ष जारी रहेगा।

देवघर की यह बैठक सामाजिक न्याय और प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर एक महत्वपूर्ण संदेश बनकर उभरी।

बिरसा मुंडा जयंती: शहीद की विरासत और समाज का गिरता सच

बिरसा मुंडा जयंती: शहीद की विरासत और समाज का गिरता सच

बिरसा मुंडा की जयंती: शहीद की याद या सांस्कृतिक पतन का उत्सव ?

15 नवंबर, अमर शहीद बिरसा मुंडा की जयंती—जिसे आदिवासी इतिहास में एक गौरवपूर्ण दिवस माना जाता है। वही दिन आज समाज में कैसे और किस रूप में मनाया जा रहा है, इस पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। सामाजिक चिंतक लक्ष्मीनारायण मुंडा ने अपने विस्तृत लेख में इस दिन को ‘सांस्कृतिक पतन का उत्सव’ बनाने की प्रवृत्ति पर तीखी आलोचना की है।
जहां एक युवा योद्धा ने ब्रिटिश साम्राज्यवाद और उसके देशी दलालों के खिलाफ विद्रोह का बिगुल फूंका। लेकिन अफसोस! आज यह दिन क्या बनकर रह गया है? एक बहाना – नाचने-गाने,शराब पीने, मांस भक्षण करने और फूहड़ आर्केस्ट्रा के नाम पर अश्लीलता फैलाने का आयोजन बन कर रह गया है। जहाँ संस्कृति के नाम पर द्विअर्थी गाने बजते हैं,अश्लील नृत्य होते हैं और लोग इतने मदमस्त हो जाते हैं कि उन्हें याद भी नही रहता कि किसके नाम पर यह सब हो रहा है। यह न सिर्फ बिरसा मुंडा की आत्मा का अपमान है, बल्कि पूरे आदिवासी संघर्ष की मिट्टी पलीद करने का घिनौना प्रयास है। हमारी पीढ़ी इतनी गिर चुकी है कि शहीदों की याद को भी बाजारु मनोरंजन में बदल देती है। मेरा यह आलेख इसी कटु सत्य की गहन पड़ताल करेगा, ताकि हम समझ सकें कि कैसे हमने अपने नायकों को भुला दिया है।

बिरसा मुंडा : एक योद्धा का जीवन और उलगुलान का विद्रोह।

बिरसा मुंडा का जन्म 15 नवंबर 1875 को झारखंड के छोटानागपुर क्षेत्र में एक मुंडा आदिवासी परिवार में हुआ था। वह कोई साधारण व्यक्ति नही थे। वह एक दूरदर्शी नेता थे, जिन्होंने ब्रिटिश हुकूमत की लूट और उसके सहयोगी जमींदारों-महाजनों की शोषणकारी नीतियों के खिलाफ आवाज उठाई। 19वीं शताब्दी के अंत में आदिवासी इलाकों में ब्रिटिशों ने जमींदारी प्रथा थोप दी थी,जिसके तहत आदिवासियों की जमीनें छीन ली जाती थी,उन्हें बंधुआ मजदूर बना दिया जाता था और सूदखोर महाजन उनके खून-पसीने को चूसते थे। बिरसा ने इससे सहन नही किया। उन्होंने ‘उलगुलान’ – अर्थात ‘महान विद्रोह’ – की शुरुआत की,जो 1899-1900 में चला।
उलगुलान कोई साधारण विद्रोह नही था। यह ‘आबुआ राज’ (हमारा राज) का सपना था – जहाँ आदिवासी अपनी जमीन,अपनी संस्कृति और अपनी स्वतंत्रता पर अपना हक जताते थे। बिरसा ने आदिवासियों को एकजुट किया,उन्हें बताया कि ब्रिटिश और उनके दलाल कैसे उनकी जड़ें काट रहे हैं। उन्होंने धार्मिक-सांस्कृतिक आंदोलन भी चलाया, जहाँ ईसाई मिशनरियों के प्रभाव से बचाव और अपनी परंपराओं की रक्षा पर जोर दिया। ब्रिटिश हुकूमत ने उन्हें गिरफ्तार किया और 9 जून 1900 को रांची जेल में उनकी मौत हो गई। संभवतः जहर देकर या यातनाओं से योजनाबद्ध षडयंत्र के तहत मार दिया गया। लेकिन उनका संदेश अमर रहा “अपनी जमीन बचाओ, शोषकों के खिलाफ लड़ो।” आज जब हम उनके इस संघर्ष को याद करते हैं, तो यह प्रेरणा का स्रोत होना चाहिए – न कि मदिरा पान और फूहड़ता में मदहोश।

आज की जयंती: शहीद की याद या बाजारु तमाशा ?

दुर्भाग्य से आज बिरसा मुंडा की जयंती पूरे देश में ‘धूमधाम’ से मनाई जा रही है – लेकिन किस तरह की धूमधाम? गांवों, शहरों और आदिवासी बाहुल्य इलाकों में कार्यक्रमों के नाम पर क्या हो रहा है ? नाच-गाना,डीजे पर तेज संगीत,शराब की बोतलें खुलना,मांस की दावतें और आर्केस्ट्रा जहाँ फूहड़ डांस होते हैं। संस्कृति के नाम पर द्विअर्थी गाने बजते हैं,अश्लील नृत्य होते हैं और युवा पीढ़ी इतनी मदहोश हो जाती है कि उन्हें पता भी नही चलता कि यह दिन किसके लिए है। क्या यही है बिरसा मुंडा को श्रद्धांजलि ? क्या उनका उलगुलान इसीलिए था कि हम उनकी याद में मदिरा पीकर नाचें और अपनी संस्कृति को अश्लीलता में डुबो दें?
यह कटु सत्य है कि हमारी समाज ने शहीदों को कमर्शियलाइज कर दिया है। राजनीतिक दल और स्थानीय नेता इस दिन को वोट बैंक की राजनीति के लिए इस्तेमाल करते हैं – रैलियां निकालते हैं, भाषण देते हैं,लेकिन शाम होते ही सब कुछ पार्टी में बदल जाता है। आदिवासी इलाकों में जहाँ बिरसा ने जमीन के लिए लड़ाई लड़ी,आज भी शोषण जारी है – कॉर्पोरेट लूट,खनन कंपनियां और विकास के नाम पर विस्थापन इत्यादि। लेकिन जयंती पर कोई इन मुद्दों पर कोई बात नही करता है। इसके बजाय फूहड़ कार्यक्रम होते हैं जहाँ महिलाओं को ऑब्जेक्टिफाई किया जाता है और पुरुष मदिरा में डूबकर अपनी मर्दानगी दिखाते हैं। यह न सिर्फ बिरसा मुंडा का अपमान है,बल्कि पूरे आदिवासी समाज की गरिमा का मखौल है। हम इतने गिर चुके हैं कि शहीद की याद को भी ‘एन्जॉयमेंट’ में बदल देते हैं – जैसे कोई त्योहार हो, न कि संघर्ष की याद। क्या बिरसा मुंडा ने इसके लिए जान दी थी ? क्या उलगुलान का मतलब यही था – शराब और अश्लीलता ?
यह स्थिति और भी दुखद तब हो जाती है जब हम देखते हैं कि युवा पीढ़ी को बिरसा मुंडा के बारे में कुछ पता ही नही है। स्कूलों में उनके बारे में पढ़ाया जाता है,लेकिन वह किताबी ज्ञान बनकर रह जाता है। जयंती पर वे नाचते हैं,पीते हैं और अगले दिन भूल जाते हैं। यह सांस्कृतिक पतन है – जहाँ परंपराएं विकृत हो रही हैं और शहीदों की विरासत को बाजारु मनोरंजन में बेच दिया जा रहा है। अगर बिरसा आज जीवित होते, तो शायद वे फिर से उलगुलान का बिगुल फूंकते – इस बार अपने ही लोगों की अज्ञानता और पतन के खिलाफ।

बिरसा मुंडा के संदेश की आज की प्रासंगिकता।

बिरसा मुंडा का संघर्ष आज भी उतना ही समसामयिक है। आज आदिवासी इलाकों में क्या हो रहा है? विकास के नाम पर जंगलों की कटाई, खनन कंपनियों  की लूट,आदिवासियों की जमीनें छीन रही हैं और सरकारी नीतियां उन्हें मुख्यधारा से बाहर रख रही हैं। बिरसा ने ‘आबुआ राज’ का सपना देखा था – स्वशासन का, जहाँ आदिवासी अपनी किस्मत खुद लिखें। लेकिन आज हम क्या कर रहे हैं? उनकी जयंती पर मदिरा पीकर नाच रहे हैं, जबकि उनके बताए रास्ते पर चलने की बजाय हम शोषण को सहन कर रहे हैं।
उनका संदेश था – एकजुट होकर लड़ो, अपनी संस्कृति बचाओ। लेकिन आज संस्कृति के नाम पर क्या बच रहा है? फूहड़ डांस और अश्लील कार्यक्रम ? यह तो संस्कृति का विनाश है। बिरसा ने ब्रिटिश दलालों के खिलाफ लड़ाई लड़ी, लेकिन आज के दलाल – राजनीतिक नेता, एनजीओ और कॉर्पोरेट – उनके नाम पर पैसा कमा रहे हैं। जयंती पर अगर हम सच्ची श्रद्धांजलि देना चाहते हैं, तो उनके संघर्ष से प्रेरणा लें। आदिवासी अधिकारों के लिए आवाज उठाएं, जमीन बचाने के लिए लड़ें और सांस्कृतिक शुद्धता बनाए रखें। लेकिन अफसोस हमारी पीढ़ी इतनी कमजोर और स्वार्थी हो चुकी है कि शहीदों को भी ‘पार्टी’ में बदल देती है।
बिरसा मुंडा की जयंती कोई उत्सव नही, बल्कि चिंतन और संघर्ष का दिन होना चाहिए। हमें इस कटु सत्य को स्वीकार करना होगा कि हमने उनके बलिदान को भुला दिया है। नाच-गाना,शराब और फूहड़ता से हम उनकी आत्मा को और पीड़ा दे रहे हैं। सच्ची श्रद्धांजलि है – उनके इतिहास को पढ़ना, युवाओं को सिखाना और आज के शोषण के खिलाफ आवाज उठाना। अगर हम ऐसा नही करेंगे, तो बिरसा मुंडा जैसे नायक सिर्फ कैलेंडर की तारीख बनकर रह जाएंगे। आइए इस पतन को रोकें – वरना हमारी आने वाली पीढ़ियां हमें कभी माफ नही करेंगी। बिरसा मुंडा अमर रहें, लेकिन उनकी याद को अमर रखने की जिम्मेदारी हमारी है। जागो, वरना उलगुलान फिर से जरुरी हो जाएगा – इस बार खुद के खिलाफ !
आज बिरसा मुंडा के सपनों और उद्देश्यों के विरोधी हमारे अपने समाज के अंदर हैं।
इससे बदलना होगा।
यही वक्त की जरुरत है।

घोड़ाबांधा में अर्जुन मुंडा ने एशियन मास्टर्स चैम्पियन श्री एस. के. तोमर को दी बधाई

घोड़ाबांधा में अर्जुन मुंडा ने एशियन मास्टर्स चैम्पियन श्री एस. के. तोमर को दी बधाई

जमशेदपुर : भाजपा के पूर्व सांसद व झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने आज जमशेदपुर के घोड़ाबांधा स्थित अपने आवास में श्री एस. के. तोमर से मुलाकात की।
श्री तोमर ने हाल ही में चेन्नई में आयोजित 23वीं एशियन मास्टर्स एथलेटिक्स चैम्पियनशिप (5–9 नवम्बर 2025) में भारत का प्रतिनिधित्व किया था। उन्होंने 50+ आयु वर्ग में बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए हैमर थ्रो में स्वर्ण पदक और डिस्कस थ्रो में रजत पदक जीतकर देश और राज्य का नाम रोशन किया।

अर्जुन मुंडा ने उनकी इस उपलब्धि पर शुभकामनाएं देते हुए कहा कि श्री तोमर की सफलता कई खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा बनेगी। उन्होंने उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

कुचाई के दलभंगा में भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती पारंपरिक तरीके से मनाई गई

कुचाई के दलभंगा में भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती पारंपरिक तरीके से मनाई गई

खरसावां : कुचाई प्रखंड के दलभंगा स्थित बिरसा चौक में सोमवार को बकास्त मुंडारी खुटकट्टी रक्षा एवं विकास समिति, 39 मौजा दलभंगा के तत्वावधान में भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती पारंपरिक तरीके से मनाई गई। समारोह में मुंडा–मानकियों ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ जुलूस निकाला। साल वृक्ष की पूजा-अर्चना के बाद भगवान बिरसा मुंडा की प्रतिमा पर श्रद्धांजलि अर्पित की गई।

इस मौके पर समिति के संस्थापकों—स्वर्गीय महिपति सिंह मुंडा, धन सिंह मुंडा, भगवत सिंह मुंडा, नोयल नाग, सहदेव सिंह मुंडा, गोपाल सिंह मुंडा और सीताराम सिंह मुंडा—के चित्रों पर भी माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि दी गई।

राज्य स्तरीय झारखंड खेल प्रतियोगिता में हाईजंप में स्वर्ण पदक जीतने वाली कुचाई की रीता सरदार और डिस्कस थ्रो में कांस्य पदक विजेता विजय दास के परिवारों को सम्मानित किया गया। विभिन्न गांवों के कलाकारों ने पारंपरिक नृत्य प्रस्तुत कर कार्यक्रम में रंग भर दिए। साथ ही फुटबॉल प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया।

“आदिवासी एक कम्युनिटी है, उसका अपना चरित्र है” — गागराई

कार्यक्रम में पहुंचे खरसावां विधायक दशरथ गागराई ने कहा कि आदिवासी समुदाय की भाषा और संस्कृति का संरक्षण आवश्यक है। उन्होंने कहा कि छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम भगवान बिरसा मुंडा के आंदोलन की देन है और उनके आदर्शों को अपनाकर ही समाज का विकास संभव है।

समिति के अध्यक्ष मान सिंह मुंडा ने कहा कि भगवान बिरसा मुंडा ने आदिवासियों के अधिकारों की रक्षा के लिए जनजागरण अभियान चलाया और अलग झारखंड राज्य की नींव रखी। समिति के सचिव लखीराम मुंडा ने कहा कि बिरसा मुंडा के आदर्शों पर चलते हुए राज्य के विकास का संघर्ष जारी रहेगा।

“शहीदों के सपनों को पूरा करना ही सच्ची श्रद्धांजलि” — मीरा मुंडा

कार्यक्रम में शामिल झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा की पत्नी और भाजपा नेतृी मीरा मुंडा ने कहा कि झारखंड शहीदों के बलिदान से बना है। उनके सपनों को पूरा करना ही उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि होगी। उन्होंने कहा कि भगवान बिरसा मुंडा का योगदान न सिर्फ झारखंड, बल्कि पूरी दुनिया के इतिहास में दर्ज है।

कार्यक्रम में मौजूद रहे :-


विधायक दशरथ गागराई, बांसती गागराई, भाजपा नेतृी मीरा मुंडा, प्रमुख गुड्डी देवी, बीडीओ साधुचरण देवगम, विकास समिति के अध्यक्ष मान सिंह मुंडा, सचिव लखीराम मुंडा, मुखिया करम सिंह मुंडा, रेखामनी उरांव, मंगल सिंह मुंडा, पंसस वादमुनी मुंडा, सोनामनी मुंडा, उपमुखिया कौशल्या मुंडा, कांग्रेस जिलाध्यक्ष राज बागची, छोटराय किस्कू, इद्रजीत सिंह मुंडा, बहादुर सिंह मुंडा, फाकु मुंडा, दिनेश चन्द्र मुंडा, सुशील सिंह मुंडा, सुकनाथ मुंडा, मोहलाल मुंडा, जोगेन्द्र पहान, विदावंन सिंह मुंडा, मधुसूदन मुंडा, इस्टिफन मुंडा, दशरथ उरावं, धमेन्द्र साडिल, धमेन्द्र सिंह मुंड़ा, मुन्ना सोय, भरत सिंह मुंडा, लुबूराम सोयसहित अनेक मुंडा-मानकी और ग्रामीण उपस्थित थे।

कांग्रेस प्रवक्ता ने राष्ट्रीय प्रेस दिवस पर दी शुभकामनाएं

कांग्रेस प्रवक्ता ने राष्ट्रीय प्रेस दिवस पर दी शुभकामनाएं

चाईबासा: पश्चिम सिंहभूम जिला कांग्रेस के प्रवक्ता त्रिशानु राय ने रविवार को राष्ट्रीय प्रेस दिवस के अवसर पर मीडिया कर्मियों को बधाई और शुभकामनाएं दीं और कहा कि यह दिवस भारतीय प्रेस परिषद (PCI) की स्थापना के सम्मान में प्रतिवर्ष 16 नवंबर को मनाया जाता है।

त्रिशानु राय ने कहा कि राष्ट्रीय प्रेस दिवस लोकतंत्र के चौथे स्तंभ—मीडिया—की स्वतंत्रता, उसकी भूमिका और जिम्मेदारियों की ओर ध्यान आकर्षित करता है। उन्होंने कहा कि प्रेस की स्वतंत्र, निष्पक्ष और जिम्मेदार कार्यशैली ही लोकतंत्र को मजबूत बनाती है।

उन्होंने कहा कि मीडिया जनमानस की आवाज को सरकार और प्रशासन तक पहुंचाने में सेतु का कार्य करता है तथा समाज में पारदर्शिता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसी कारण प्रेस दिवस सभी के लिए अपनी जिम्मेदारियों और संवेदनशीलता को पुनः याद करने का अवसर प्रदान करता है।

कांग्रेस प्रवक्ता ने लोकतंत्र की मजबूती और जनहित में प्रभावी संवाद सुनिश्चित करने के लिए सभी को मिलकर कार्य करने का आह्वान किया।

चक्रधरपुर में बिरसा मुंडा जयंती पर सामुदायिक सेवा कार्यक्रम

चक्रधरपुर में बिरसा मुंडा जयंती पर सामुदायिक सेवा कार्यक्रम

चक्रधरपुर : भगवान बिरसा मुंडा की जयंती, झारखंड स्थापना दिवस के 25वें वर्ष और जनजातीय गौरव दिवस के अवसर पर मुखिया संघ, चक्रधरपुर ने सामुदायिक सेवा कार्यक्रम का आयोजन किया। इस दौरान चक्रधरपुर अनुमंडल अस्पताल में भर्ती 87 मरीजों में फल वितरित किए गए।

कार्यक्रम की शुरुआत मुखिया संघ के अध्यक्ष जंगल सिंह गागराई के नेतृत्व में आदिवासी मित्र मंडल द्वारा पोटका स्थित भगवान बिरसा मुंडा की प्रतिमा पर माल्यार्पण से हुई। इसके बाद अनुमंडल अस्पताल में प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. अंशुमन शर्मा की मौजूदगी में मरीजों को फल बांटे गए।

मुखिया संघ के सदस्यों ने प्रखंड कार्यालय परिसर स्थित भगवान बिरसा मुंडा की प्रतिमा पर भी श्रद्धांजलि अर्पित की। अध्यक्ष जंगल सिंह गागराई ने कहा कि भगवान बिरसा मुंडा का जीवन आदिवासी समाज के संघर्ष और उनके अधिकारों की रक्षा का प्रेरक स्रोत है।

कार्यक्रम में भरनियां पंचायत की मुखिया सरीता गागराई, गुलकेडा की लक्ष्मी केराई, आसनतलिया की कैरी बोदरा, चंद्री की सुरूमणी बारला, पदमपुर की समीना गागराई, इटोर के सोमनाथ कोया, कोलचकड़ा के अरविंद तिग्गा, समाजसेवी मंटू गागराई और दया सागर केराई उपस्थित थे।

खरसावां में ट्रेन दुर्घटना में महिला की मौत, झामुमो नेताओं ने व्यक्त की शोक संवेदना

खरसावां में ट्रेन दुर्घटना में महिला की मौत, झामुमो नेताओं ने व्यक्त की शोक संवेदना

खरसावां : खरसावां प्रखंड के शिमला पंचायत अंतर्गत जारका टोला की निवासी बिनीता सामांड की ट्रेन चपेट में आकर मौत हो गई। घटना की जानकारी मिलने पर झामुमो कार्यकर्ता उनके आवास पहुंचे और परिजनों से मिलकर शोक संवेदना व्यक्त की।

इस मौके पर खरसावां विधानसभा क्षेत्र विधायक प्रतिनिधि अर्जुन उर्फ नायडू गोप, प्रखंड अध्यक्ष अरुण जामुदा, उपाध्यक्ष सुकरा महतो, सचिव सनगी हेंब्रम, दशरथ महतो, यशवंत प्रधान, केदार प्रधान, लालन तिवारी, राजेश दालबेहरा, नागेन सोय, प्रवीण ठाकुर सहित कई झामुमो कार्यकर्ता मौजूद रहे।

नर्मदा में भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती पर प्रधानमंत्री ने वंशजों को किया सम्मानित

नर्मदा में भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती पर प्रधानमंत्री ने वंशजों को किया सम्मानित

गुजरात : गुजरात के नर्मदा में भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती और जनजातीय गौरव दिवस के अवसर पर भव्य कार्यक्रम आयोजित किया गया। गुजरात सरकार के विशेष आमंत्रण पर धरती आबा के वंशज श्री बुधराम मुंडा और श्री रवि मुंडा उपस्थित रहे। कार्यक्रम में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने दोनों अतिथियों को सम्मानित कर भगवान बिरसा मुंडा की महान विरासत को नमन किया।

चाईबासा में झारखंड स्थापना दिवस और बिरसा मुंडा जयंती पर भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित

चाईबासा में झारखंड स्थापना दिवस और बिरसा मुंडा जयंती पर भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित

चाईबासा : पश्चिम सिंहभूम जिला मुख्यालय चाईबासा के पिल्लई हॉल में झारखंड स्थापना दिवस और भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती के अवसर पर जिला स्तरीय सांस्कृतिक कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया।

कार्यक्रम की शुरुआत मंत्री दीपक बिरुवा, प्रमंडलीय आयुक्त नेलसन एयोन बागे, जिला उपायुक्त चंदन कुमार और उप विकास आयुक्त संदीप कुमार मीणा सहित अन्य पदाधिकारियों ने दीप प्रज्वलन और भगवान बिरसा मुंडा के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर की।

इस अवसर पर विभिन्न स्कूलों के बच्चों ने झारखंड स्थापना दिवस थीम पर गीत, नृत्य और नाटक प्रस्तुत किए, जिसे सभी अतिथियों और दर्शकों ने सराहा।

सांस्कृतिक प्रतियोगिता में कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय चक्रधरपुर प्रथम, नेताजी सुभाष चंद्र बोस बालिका आवासीय विद्यालय चाईबासा द्वितीय और राज्यकृत बालिका उच्च विद्यालय चाईबासा तृतीय स्थान पर रहे।

खैरबनी में एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय का उद्घाटन, आदिवासी शिक्षा को नई दिशा

खैरबनी में एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय का उद्घाटन, आदिवासी शिक्षा को नई दिशा

राजनगर : जनजातीय गौरव दिवस के अवसर पर राजनगर प्रखंड अंतर्गत खैरबनी में एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय का भव्य उद्घाटन समारोह आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में चंपाई सोरेन शामिल हुए और आदिवासी विद्यार्थियों के लिए केंद्र सरकार की इस महत्वाकांक्षी पहल को महत्वपूर्ण कदम बताया।

कार्यक्रम के दौरान बताया गया कि आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशभर में 42 एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालयों का उद्घाटन किया, साथ ही 50 नए विद्यालयों का शिलान्यास भी किया।
भारत सरकार द्वारा संचालित ये विद्यालय आदिवासी छात्रों को निःशुल्क गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, आवासीय सुविधा और समग्र विकास के अवसर प्रदान करेंगे।

सूचना के अनुसार, वर्ष 2014 से पहले देश में केवल 123 एकलव्य विद्यालय थे, जबकि वर्तमान में इनकी संख्या बढ़कर 715 हो गई है, जिनमें से 313 निर्माणाधीन हैं। इन स्कूलों में लगभग 1 लाख 33 हजार आदिवासी विद्यार्थी अध्ययनरत हैं।
झारखंड में पहले मात्र 7 एकलव्य विद्यालय संचालित होते थे, जबकि अब यह संख्या बढ़कर 91 हो गई है, जिनमें 39 विद्यालय निर्माणाधीन हैं।