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मजदूरों के अधिकारों की लड़ाई में जेएलकेएम नेता राज महतो बने मजबूत आवाज

मजदूरों के अधिकारों की लड़ाई में जेएलकेएम नेता राज महतो बने मजबूत आवाज

गम्हरिया : मजदूरों के हक और अधिकार की लड़ाई में जेएलकेएम के मजदूर नेता राज महतो एक सशक्त और भरोसेमंद नाम के रूप में उभरे हैं। वे मजदूरों को न्याय दिलाने के लिए हर स्तर पर संघर्ष करते रहे हैं, चाहे इसके लिए उन्हें कानूनी चुनौतियों का सामना ही क्यों न करना पड़े।

राज महतो का कहना है कि जब तक मजदूर सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन नहीं जी पाएंगे, तब तक समाज का संतुलित विकास संभव नहीं है। वे केवल भाषण तक सीमित नहीं रहते, बल्कि ज़मीनी स्तर पर मजदूरों की समस्याओं को अपनी लड़ाई बनाकर सामने आते हैं।

क्राफ्ट्समेन कंपनी से जुड़े मजदूरों के लिए वे लगातार संघर्ष कर रहे हैं। मजदूरों का आरोप है कि लंबे समय से बकाया भुगतान, काम की असुरक्षा और अधिकारों के हनन जैसे मुद्दों पर राज महतो ने मजबूती से आवाज़ उठाई है। इस दौरान उन्हें दबाव, धमकी और मुकदमों जैसी परिस्थितियों का भी सामना करना पड़ा, लेकिन वे पीछे नहीं हटे।

राज महतो का स्पष्ट कहना है कि मजदूरों का शोषण किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उनका संघर्ष किसी एक कंपनी तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे क्षेत्र में मजदूरों को अधिकार, सम्मान और न्याय दिलाने की दिशा में वे लगातार प्रयासरत हैं। इसी कारण वे आज मजदूर वर्ग के बीच संघर्ष और भरोसे का प्रतीक बन चुके हैं।

नोवामुंडी क्षेत्र में हाथियों का आतंक जारी

नोवामुंडी क्षेत्र में हाथियों का आतंक जारी

नोवामुंडी : नोवामुंडी क्षेत्र में जंगली हाथियों का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है। हालिया घटनाओं में बाबाड़ीया गांव में चार लोगों की और बाड़ापासेया गांव में एक व्यक्ति की मौत हो गई है। प्रशासन और वन विभाग ने लोगों से सतर्क रहने की अपील की है। विशेषज्ञों के अनुसार भटके हुए एक हाथी का संतुलन बिगड़ गया है, जिससे वह किसी पर भी हमला कर रहा है। ऐसे में लोगों को सलाह दी गई है कि वे रात के समय घर से बाहर न निकलें और पूरी सावधानी बरतें।

मंझारी प्रखंड में जन्म–मृत्यु निबंधन पर प्रशिक्षण आयोजित

मंझारी प्रखंड में जन्म–मृत्यु निबंधन पर प्रशिक्षण आयोजित

मंझारी : प्रखंड सभागार, मंझारी में नागरिक निबंधन प्रणाली के तहत प्रखंड स्तरीय जन्म–मृत्यु (जीवनांक) प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रखंड विकास पदाधिकारी मंझारी, श्री विजय राम ने की। इसमें मंझारी, कुमारडुंगी एवं तांतनगर प्रखंडों के जन्म–मृत्यु निबंधन से जुड़े कर्मियों ने भाग लिया।

प्रशिक्षण प्रखंड मंझारी के प्रभारी प्रखंड सांख्यिकी पर्यवेक्षक श्री सत्यजीत सिंहदेव एवं जिला सांख्यिकी कार्यालय, चाईबासा के कंप्यूटर ऑपरेटर श्री मोहन ठाकुर द्वारा दिया गया। इस दौरान जन्म एवं मृत्यु निबंधन अधिनियम 1969 तथा 2023 के संशोधित अधिनियम की विस्तृत जानकारी दी गई।

प्रखंड विकास पदाधिकारी ने सभी पंचायत सचिवों को 21 दिनों के भीतर जन्म–मृत्यु निबंधन सुनिश्चित करते हुए प्रमाण पत्र निर्गत करने का निर्देश दिया। साथ ही निबंधन पोर्टल dc.crsorgi.gov.in पर कार्य करने की प्रक्रिया की जानकारी पंचायत सचिवों एवं कंप्यूटर ऑपरेटरों को दी गई। संबंधित अस्पताल से आए प्रतिभागियों को भी अधिनियम की धाराओं तथा 21 दिनों के भीतर प्रमाण पत्र जारी करने के निर्देश दिए गए।

कार्यक्रम में जन्म–मृत्यु निबंधन की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि एवं इसके महत्व पर भी प्रकाश डाला गया। प्रशिक्षण में मंझारी, कुमारडुंगी एवं तांतनगर प्रखंड के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी, प्रखंड सांख्यिकी पर्यवेक्षक, पंचायत सचिव, जनप्रतिनिधि तथा प्रखंड एवं अस्पताल के कंप्यूटर ऑपरेटर उपस्थित रहे।

रूंगटा कॉलोनी में महिला की आत्महत्या, कारणों की जांच में जुटी पुलिस

रूंगटा कॉलोनी में महिला की आत्महत्या, कारणों की जांच में जुटी पुलिस

राजनगर : सरायकेला-खरसावां जिले के राजनगर थाना क्षेत्र अंतर्गत चलियामा स्थित रूंगटा कॉलोनी में बीती रात एक महिला ने अपने घर में पंखे से लटककर आत्महत्या कर ली। आत्महत्या के कारणों का फिलहाल स्पष्ट पता नहीं चल सका है।

पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार सोमवार रात करीब नौ बजे राजनगर थाना को घटना की सूचना मिली। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर मंगलवार को पोस्टमार्टम के लिए सरायकेला सदर अस्पताल भेज दिया गया।

मृतका की पहचान गीतारानी जेना (27 वर्ष) के रूप में हुई है। वह ओडिशा के क्योंझर जिला अंतर्गत आनंदपुर थाना क्षेत्र की रहने वाली थी। उसका प्रेम विवाह हिमांशु शेखर जेना से हुआ था। दंपती की दो छोटी बेटियां हैं, जिनकी उम्र चार वर्ष और एक वर्ष बताई जा रही है।

हिमांशु शेखर जेना राजनगर थाना क्षेत्र के चलियामा स्थित रूंगटा स्टील प्लांट में कार्यरत है। कंपनी की ओर से रूंगटा कॉलोनी में क्वार्टर उपलब्ध कराया गया था, जहां वह अपनी पत्नी और दोनों बच्चों के साथ रहता था।

घटना के बाद मृतका के मायके पक्ष में शोक का माहौल है। मृतका के चचेरे भाई ने पति पर आरोप लगाते हुए राजनगर थाना में मामला दर्ज कराया है। इस संबंध में थाना प्रभारी विपुल कुमार ओझा ने बताया कि प्रथम दृष्टया मामला आत्महत्या का प्रतीत होता है, हालांकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी। रिपोर्ट के आधार पर आगे की विधिसंगत कार्रवाई की जाएगी।

सरायकेला में सामाजिक कुरीति निवारण योजना अंतर्गत अनुमंडल स्तरीय एक दिवसीय प्रशिक्षण सह कार्यशाला

सरायकेला में सामाजिक कुरीति निवारण योजना अंतर्गत अनुमंडल स्तरीय एक दिवसीय प्रशिक्षण सह कार्यशाला

सरायकेला : सामाजिक कुरीति निवारण योजना अंतर्गत संचालित “हमारा संकल्प  सुरक्षित एवं सशक्त महिला, सशक्त झारखंड” कार्यक्रम के तहत मंगलवार को नगर भवन, सरायकेला में बाल विवाह मुक्त झारखंड एवं डायन प्रथा उन्मूलन विषयक अनुमंडल स्तरीय एक दिवसीय प्रशिक्षण सह कार्यशाला का आयोजन किया गया.
कार्यक्रम के दौरान बाल विवाह मुक्त झारखंड विषय पर आधारित एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म का प्रदर्शन किया गया, जिसके माध्यम से उपस्थित जनों को बाल विवाह से बालिकाओं, परिवार एवं समाज पर पड़ने वाले सामाजिक, शैक्षणिक एवं स्वास्थ्यगत दुष्परिणामों के संबंध में जागरूक किया गया.प्रशिक्षण सत्रों में बाल विवाह एवं डायन प्रथा से संबंधित कानूनी प्रावधानों की विस्तृत जानकारी दी गई. इसके अतिरिक्त छात्राओं एवं महिलाओं के लिए संचालित विभिन्न सरकारी योजनाओं के संबंध में जानकारी देकर उन्हें शिक्षा, सुरक्षा एवं सशक्तिकरण की दिशा में लाभ लेने हेतु प्रेरित किया गया.

जिला परिषद उपाध्यक्ष मधुश्री महतो द्वारा उपस्थित प्रतिभागियों को बाल विवाह मुक्त झारखंड एवं दहेज/डायन प्रथा उन्मूलन हेतु शपथ दिलाई गई, जिसमें सभी ने अपने परिवार, पड़ोस एवं समाज में इन सामाजिक कुरीतियों को रोकने तथा किसी भी ऐसी घटना की सूचना संबंधित प्रशासन को देने का संकल्प लिया.

जिला परिषद अध्यक्ष सोनाराम बोदरा ने जिले वासियों को नववर्ष की शुभकामनाएँ देते हुए कहा बाल विवाह मुक्त झारखंड के लिए बनाए गए कानूनी प्रावधानों का सख्ती से अनुपालन तथा समाज को निरंतर जागरूक करना अत्यंत आवश्यक है. उन्होंने बालक एवं बालिकाओं को समान शिक्षा का अवसर प्रदान करने, बेटियों एवं महिलाओं को सशक्त बनाने तथा “न दहेज लेंगे, न दहेज देंगे” का सामूहिक संकल्प लेने का आह्वान किया.

उप विकास आयुक्त ने कहा सामाजिक कुरीतियों का मूल कारण शिक्षा एवं जागरूकता का अभाव है. उन्होंने बताया राज्य सरकार द्वारा महिलाओं एवं बालिकाओं के संरक्षण, सशक्तिकरण एवं आत्मनिर्भरता हेतु अनेक कल्याणकारी योजनाएँ संचालित की जा रही हैं, जिनका लाभ पात्र महिलाओं एवं छात्राओं को अवश्य लेना चाहिए.
उन्होंने अपील की कि यदि समाज, परिवार अथवा आसपास कहीं भी बाल विवाह अथवा डायन प्रथा से संबंधित कोई जानकारी प्राप्त होती है, तो नजदीकी पंचायत, प्रखंड कार्यालय, संबंधित प्रशासन अथवा टोल फ्री हेल्पलाइन नंबर 181 पर तत्काल सूचित करें.

कार्यक्रम में उपस्थित पद्मश्री छुटनी महतो ने डायन प्रथा जैसी अमानवीय सामाजिक कुप्रथा के विरुद्ध अपने सामाजिक संघर्ष एवं अनुभव साझा किया.

कार्यशाला में जिला परिवहन पदाधिकारी, जिला समाज कल्याण पदाधिकारी, निदेशक, सामाजिक सुरक्षा, सभी सीडीपीओ, महिला पर्यवेक्षक, सेविका सहित विभिन्न विभागों के पदाधिकारी एवं प्रतिनिधि उपस्थित रहे.

झारखंड में पेसा नियमावली को लेकर आदिवासी संगठनों ने जताई नाराज़गी

झारखंड में पेसा नियमावली को लेकर आदिवासी संगठनों ने जताई नाराज़गी

झारखंड में पेसा कानून की नियमावली को लेकर आदिवासी समाज में गहरी नाराज़गी देखी जा रही है। आरोप है कि राज्य सरकार ने पेसा के पहले ही पन्ने में ग्राम सभा के अध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर पारंपरिक ग्राम प्रधानों के अलावा “अन्य” का विकल्प जोड़कर पिछला दरवाज़ा खोल दिया है। इससे आदिवासी समाज की परंपरागत सामाजिक व्यवस्था को कमजोर करने की आशंका जताई जा रही है।

आदिवासी नेताओं का कहना है कि पेसा कानून का मूल उद्देश्य आदिवासी समाज की रूढ़िजन्य विधियों, सामाजिक-धार्मिक प्रथाओं, परंपराओं और स्वशासन प्रणाली को संवैधानिक संरक्षण देना है। लेकिन झारखंड में बनाए गए नियमों में रूढ़िजन्य विधि और धार्मिक प्रथा जैसे महत्वपूर्ण शब्दों को ही हटा दिया गया है।

आरोप है कि पहले सरकार ने ट्राइबल एडवाइजरी काउंसिल (TAC) से राज्यपाल को अलग किया और अब शेड्यूल एरिया में राज्यपाल के अधिकारों को सीमित कर उपायुक्त को अधिक अधिकार दिए जा रहे हैं, जिससे प्रशासन मनमानी कर सके।

नियमावली में ग्राम सभाओं के अधिकार भी सीमित कर दिए गए हैं। पहले ग्राम सभा राज्य की योजनाओं और DMFT जैसे कार्यक्रमों को स्वीकृति देती थी, लेकिन अब केवल सहमति ली जाएगी। यदि 30 दिनों के भीतर सहमति नहीं दी गई तो योजना को स्वीकृत मान लिया जाएगा। इसे ग्राम सभा के अधिकारों का हनन बताया जा रहा है।

लघु खनिज जैसे बालू, मिट्टी, पत्थर और मोरम पर पहले ग्राम सभा का पूर्ण अधिकार था, लेकिन अब उन्हें केवल “सरकारी निर्देशों का पालन” करना होगा। इसी तरह CNT/SPT एक्ट के उल्लंघन पर भूमि की वापसी का अधिकार और जमीन हस्तांतरण से पहले ग्राम सभा की सहमति का प्रावधान भी हटा दिया गया है।

नियमावली में शेड्यूल एरिया में लगने वाले उद्योगों को लेकर कोई स्पष्ट गाइडलाइन नहीं है। सवाल उठाया जा रहा है कि यदि कंपनियां मुनाफा कमाएं और आदिवासी विस्थापित होते जाएं, तो ऐसे विकास का क्या अर्थ है। आदिवासी समाज का कहना है कि वे विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन वे चाहते हैं कि जमीन देने के बदले प्रभावित परिवारों को उद्योगों के लाभ में हिस्सेदार बनाया जाए।

आरोप लगाया गया कि जिस दिन कैबिनेट में पेसा अधिनियम को मंजूरी दी गई, उसी दिन नोवामुंडी (पश्चिम सिंहभूम) में हिंडाल्को को करीब 850 एकड़ जमीन बिना ग्राम सभा की सहमति के दे दी गई। इस भूमि पर आदिवासी वर्षों से खेती, पशुपालन करते आए हैं और वहां देशाउली व जाहेरस्थान भी स्थित है। ग्रामीण इसका विरोध कर रहे हैं।

आदिवासी संगठनों का कहना है कि सरकार को शेड्यूल एरिया में शराब की दुकानों और भट्ठियों की याद तो रही, लेकिन आदिवासियों के संवैधानिक अधिकारों की अनदेखी की गई। उन्होंने ऐलान किया है कि वे गांव-गांव जाकर इस नियमावली और आदिवासी अधिकारों को कमजोर करने की कोशिशों का विरोध करेंगे।

मकरंडा पंचायत में बाल श्रम मुक्त घोषणा कार्यक्रम आयोजित, ग्रामीणों ने लिया संकल्प

मकरंडा पंचायत में बाल श्रम मुक्त घोषणा कार्यक्रम आयोजित, ग्रामीणों ने लिया संकल्प

मनोहरपुर : मनोहरपुर प्रखंड के मकरंडा पंचायत में पंचायत स्तरीय बाल श्रम मुक्त घोषणा कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में प्रखंड की विभिन्न पंचायतों से बड़ी संख्या में ग्रामीण, बच्चे और युवा शामिल हुए, जिससे माहौल जागरूकता और उत्साह से भरा रहा।
इस अवसर पर बताया गया कि मनोहरपुर प्रखंड के अंतर्गत डिंबुली, लाईलोर और मकरंडा पंचायत को बाल श्रम मुक्त घोषित किया जा चुका है। यह उपलब्धि प्रशासन, पंचायत प्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों और ग्रामीणों के संयुक्त प्रयास से संभव हुई है।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि मकरंडा पंचायत की मुखिया श्रीमती रानी गुड़िया रहीं। विशिष्ट अतिथि के रूप में उप मुखिया भीमसेन महतो, एस्पायर संस्था के प्रखंड समन्वयक राजेश लगुरी, स्टेट को-ऑर्डिनेटर एन. नरेश और जिला सहायक रामन उपस्थित थे। इसके अलावा दिलबर गुड़िया, मनोज चंपिया, मंच संचालक नीमा लुगुन, ग्राम मुंडा नोंदो सुरीन सहित सैकड़ों ग्रामीण, बच्चे और युवा मौजूद रहे।
कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन कर किया गया। वक्ताओं ने अपने संबोधन में कहा कि बाल श्रम एक सामाजिक बुराई है, जिसे समाप्त करने के लिए पंचायत स्तर पर निरंतर निगरानी, शिक्षा को बढ़ावा और जनजागरूकता आवश्यक है। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि बच्चों को श्रम के बजाय विद्यालय भेजें।
एस्पायर संस्था के प्रतिनिधियों ने बाल श्रम उन्मूलन, बच्चों के पुनर्वास, शिक्षा से जोड़ने और सरकारी योजनाओं की जानकारी दी। कार्यक्रम के अंत में ग्रामीणों ने बाल श्रम के खिलाफ संकल्प लेते हुए पंचायत को बाल श्रम मुक्त बनाए रखने का भरोसा दिलाया.

उदालकम गांव में दो दिवसीय वार्षिक खेलकूद प्रतियोगिता का शुभारंभ

उदालकम गांव में दो दिवसीय वार्षिक खेलकूद प्रतियोगिता का शुभारंभ

पश्चिम सिंहभूम : चक्रधरपुर प्रखंड के उदालकम गांव में प्रत्येक वर्ष की तरह इस वर्ष भी खेल और उत्साह का माहौल देखने को मिला। भरनिया ग्राम विकास मंच समिति की ओर से आयोजित दो दिवसीय वार्षिक खेलकूद प्रतियोगिता का भव्य शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य अतिथि पूर्व मुखिया एवं कांग्रेस नेता विजय सिंह सामाड ने किया। उन्होंने खेलों की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए स्वयं सीटी बजाकर बच्चियों की दौड़ प्रतियोगिता की शुरुआत की।

इस अवसर पर बासुदेव मुखी, भोलेनाथ बोदरा, पुटु कांडेयांग और वासु गुंजा सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे और खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन किया। प्रतियोगिता के पहले दिन बच्चों और युवाओं के लिए विभिन्न दौड़ प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। इनमें बच्चों, बच्चियों, बड़ी लड़कियों, बुजुर्गों और युवाओं के लिए अलग-अलग वर्गों में दौड़ कराई गई।

इसके अलावा बच्चों के लिए आटा रेस, तीन पैर की दौड़, सुई-धागा रेस, जूता रेस और मेंढक रेस का भी आयोजन हुआ, जिसका दर्शकों ने भरपूर आनंद लिया। विजय सिंह सामाड ने कहा कि खेलों से न केवल शारीरिक विकास होता है, बल्कि अनुशासन और टीम भावना भी विकसित होती है। ग्रामीण क्षेत्रों में छिपी प्रतिभाओं को मंच देना सराहनीय कार्य है।

इस आयोजन को सफल बनाने में समिति के सदस्यों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसमें अध्यक्ष रामेश्वर गिलुवा, सचिव जुगदू बांकिरा, रामसिंह गागराई, मुचीराय गागराई, विडराय गिलुवा, सुकरा गिलुवा, गुलाब लोहार, चरण गागराई, मुहीराम गागराई, राजेन्द्र सामाड, सुशील गिलुवा और रुईदास सरदार का विशेष योगदान रहा।

नशामुक्ति अभियान के तहत जिले में विविध कार्यक्रम आयोजित

नशामुक्ति अभियान के तहत जिले में विविध कार्यक्रम आयोजित

नालसा : नई दिल्ली एवं झालसा, रांची के निर्देशानुसार जिले में एक सप्ताह की गतिविधि योजना के अंतर्गत विभिन्न जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इसी क्रम में अर्का जैन विश्वविद्यालय, गम्हरिया में निबंध एवं चित्रकला प्रतियोगिता आयोजित हुई, जिसमें विश्वविद्यालय के छात्रों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

कार्यक्रम का आयोजन प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डीएलएसए) सरायकेला-खरसावां रामाशंकर सिंह के मार्गदर्शन में किया गया। इसमें डीएलएसए की सचिव (प्रभारी) अनामिका किस्कू का सक्रिय सहयोग रहा, जबकि मुख्य एलएडीसी दिलीप कुमार शॉ ने विश्वविद्यालय में आयोजित कार्यक्रम का नेतृत्व किया।

निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार जिले के विभिन्न स्थानों पर नुक्कड़ नाटक, स्ट्रीट प्ले एवं युवाओं द्वारा संवाद कार्यक्रम आयोजित किए गए। इन गतिविधियों में पारा लीगल वॉलंटियर्स ने भाग लिया और नशामुक्त जीवन तथा स्वास्थ्य के महत्व पर लोगों को जागरूक किया।

कार्यक्रमों के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि नशा न केवल व्यक्ति के जीवन को नुकसान पहुंचाता है, बल्कि समाज पर भी इसके गंभीर नकारात्मक प्रभाव पड़ते हैं। अभियान का मुख्य उद्देश्य नशामुक्त जीवन को बढ़ावा देना, युवाओं को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना और समाज में नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूकता फैलाना रहा।

इस पहल को छात्रों, युवाओं और आम नागरिकों ने सराहा और इसे समाजहित में एक महत्वपूर्ण प्रयास बताया।

समाहरणालय सभागार में धान अधिप्राप्ति की समीक्षा बैठक आयोजित

समाहरणालय सभागार में धान अधिप्राप्ति की समीक्षा बैठक आयोजित

सरायकेला : समाहरणालय सभागार में उप विकास आयुक्त रीना हांसदा की अध्यक्षता में धान अधिप्राप्ति से संबंधित समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में जिला आपूर्ति पदाधिकारी पुष्कर सिंह मुंडा, जिला कृषि पदाधिकारी रौशन नीलकमल, जिला सहकारिता पदाधिकारी सहित अन्य संबंधित पदाधिकारी उपस्थित थे।

बैठक में जिले में धान अधिप्राप्ति की अद्यतन स्थिति की समीक्षा की गई। बताया गया कि अब तक 742 किसानों से कुल 42,089.02 क्विंटल धान की खरीद की जा चुकी है। जिले में कुल 6,191 किसान पंजीकृत हैं, जिनमें से 447 किसानों को धान विक्रय की राशि का भुगतान किया जा चुका है, जबकि शेष किसानों का भुगतान प्रक्रियाधीन है।

समीक्षा के दौरान उप विकास आयुक्त ने सभी धान अधिप्राप्ति केंद्रों (लैम्प्सवार) की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने किसानों के पंजीकरण में वृद्धि सुनिश्चित करने, सभी केंद्रों से समय पर धान का उठाव कराने, एडवांस सीएमआर का नियत समय-सीमा में जनरेशन एवं प्राप्ति सुनिश्चित करने तथा धान विक्रय के बाद किसानों को देय राशि का त्वरित एवं सुचारु भुगतान करने का निर्देश दिया।

उन्होंने सभी संबंधित पदाधिकारियों को पारदर्शिता बनाए रखते हुए दस्तावेजों का समयबद्ध संधारण, डेटा का नियमित अद्यतन एवं निरंतर अनुश्रवण के माध्यम से धान अधिप्राप्ति कार्य का प्रभावी और समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित करने तथा राज्य सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुसार किसान हित में कार्य करने का निर्देश दिया।