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चाईबासा: कोल्हान विश्वविद्यालय की 44वीं शैक्षणिक परिषद बैठक में छात्रों के हित में कई अहम फैसले

चाईबासा: कोल्हान विश्वविद्यालय की 44वीं शैक्षणिक परिषद बैठक में छात्रों के हित में कई अहम फैसले

चाईबासा | कोल्हान विश्वविद्यालय, चाईबासा के सम्मेलन कक्ष में बुधवार को शैक्षणिक परिषद (Academic Council) की 44वीं बैठक कुलपति प्रो. (डॉ.) अंजिला गुप्ता की अध्यक्षता में आयोजित की गई। बैठक में विद्यार्थियों के हित, नई शिक्षा नीति (NEP)-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन तथा विश्वविद्यालय की शैक्षणिक एवं प्रशासनिक व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।

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बैठक का सबसे महत्वपूर्ण निर्णय स्नातक (यूजी) नामांकन के लिए आवेदन शुल्क में भारी कटौती का रहा। परिषद ने आवेदन शुल्क को ₹100 से घटाकर प्रति विषय, प्रति महाविद्यालय ₹25 करने का ऐतिहासिक फैसला लिया। कुलपति प्रो. (डॉ.) अंजिला गुप्ता की पहल पर किए गए इस निर्णय से शुल्क में 75 प्रतिशत की कमी आई है। इससे विद्यार्थियों को अपनी पसंद के विषयों में प्रवेश के लिए अधिक संख्या में महाविद्यालयों में आवेदन करने का अवसर मिलेगा तथा उन पर आर्थिक बोझ भी कम होगा।

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बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि प्रथम सेमेस्टर से लेकर छठे सेमेस्टर तक उत्तीर्ण सभी विद्यार्थी स्नातकोत्तर (पीजी) सत्र 2025-27 में नामांकन के लिए चांसलर पोर्टल के माध्यम से आवेदन कर सकेंगे। इसके अलावा, द्विवर्षीय स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए ऑनर्स (Honours) की अनिवार्यता समाप्त करने का निर्णय भी लिया गया, जिससे अधिक से अधिक विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।

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परिषद ने सभी संबद्ध एवं अंगीभूत महाविद्यालयों के प्राचार्यों के माध्यम से आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) तथा आरक्षित श्रेणी (SC/ST/OBC) के विद्यार्थियों को सलाह दी है कि वे शैक्षणिक सत्र 2025-30 में नामांकन के लिए समय रहते अपने आवासीय, आय एवं जाति प्रमाण-पत्र तैयार कर लें। परिषद ने स्पष्ट किया कि नामांकन प्रक्रिया में प्रस्तुत किए जाने वाले सभी प्रमाण-पत्र झारखंड सरकार के सक्षम पदाधिकारी द्वारा निर्गत एवं वैध होने चाहिए, ताकि विद्यार्थियों को प्रवेश के दौरान किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।
बैठक में शैक्षणिक सत्र 2026-30 के लिए स्नातक नामांकन प्रक्रिया, FYUGP के अंतर्गत सेमेस्टर-3 एवं सेमेस्टर-5 के प्रवेश दिशा-निर्देशों तथा पीजी सत्र 2025-27 में नामांकन से संबंधित विषयों पर भी विस्तृत विचार-विमर्श किया गया। इसके साथ ही वर्ष 2020 के नियमों के आलोक में विभिन्न विषयों की कोडिंग (Subject Coding) से जुड़े मामलों पर भी महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।

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शैक्षणिक परिषद ने 42वीं एवं 43वीं परिषद बैठकों की कार्यवाही की पुष्टि करते हुए उनके अनुपालन प्रतिवेदनों को अनुमोदित किया। बैठक में नई शिक्षा नीति-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन, विभिन्न पाठ्यक्रमों के संचालन, परीक्षा व्यवस्था तथा अन्य शैक्षणिक विषयों पर भी विस्तार से चर्चा हुई।
बैठक के दौरान विभिन्न शैक्षणिक प्रस्तावों को अधिष्ठाता (एकेडमिक) डॉ. संजय यादव ने परिषद के समक्ष प्रस्तुत किया तथा संबंधित विषयों पर विस्तृत जानकारी दी।
शैक्षणिक परिषद के सदस्यों, अधिष्ठाताओं, विभागाध्यक्षों एवं विश्वविद्यालय के अधिकारियों ने विद्यार्थियों के हित में लिए गए इन निर्णयों का स्वागत किया। कुलपति प्रो. (डॉ.) अंजिला गुप्ता के मार्गदर्शन में आयोजित यह बैठक विश्वविद्यालय की शैक्षणिक गुणवत्ता, शोध वातावरण तथा विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

कुचाई में उत्पाद विभाग की बड़ी कार्रवाई, चार अवैध महुआ चुलाई भट्टियां ध्वस्त

कुचाई में उत्पाद विभाग की बड़ी कार्रवाई, चार अवैध महुआ चुलाई भट्टियां ध्वस्त

कुचाई | जिले में अवैध शराब के निर्माण, भंडारण और बिक्री पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने के उद्देश्य से चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत उत्पाद विभाग ने कुचाई थाना क्षेत्र के जिलिंग्दा गांव में सघन छापेमारी अभियान चलाया। कार्रवाई के दौरान चार अवैध महुआ चुलाई भट्टियों को ध्वस्त कर दिया गया तथा भारी मात्रा में अवैध शराब निर्माण में प्रयुक्त सामग्री बरामद की गई।

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उत्पाद विभाग को प्राप्त गुप्त सूचना के आधार पर बुधवार को की गई इस छापेमारी में करीब 1300 किलोग्राम जावा महुआ और 30 लीटर अवैध महुआ चुलाई शराब बरामद की गई। बरामद सामग्री को जब्त करने के बाद नियमानुसार नष्ट कर दिया गया।

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विभागीय अधिकारियों ने बताया कि छापेमारी के दौरान चिन्हित अवैध चुलाई अड्डों के संचालकों के विरुद्ध झारखंड उत्पाद अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज करने की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है। अभियान के दौरान क्षेत्र में अवैध शराब कारोबार से जुड़े अन्य संभावित ठिकानों की भी जांच की गई।

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जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि अवैध शराब के निर्माण, परिवहन, भंडारण एवं बिक्री में संलिप्त व्यक्तियों के खिलाफ आगे भी लगातार और कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी। प्रशासन ने आम नागरिकों से अपील की है कि अवैध शराब से संबंधित किसी भी गतिविधि की जानकारी तत्काल संबंधित विभाग को दें, ताकि समय रहते प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

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प्रशासन के अनुसार, अवैध शराब का कारोबार जनस्वास्थ्य, सामाजिक सुरक्षा तथा कानून-व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा है। इसी को देखते हुए जिले में इसके विरुद्ध विशेष अभियान लगातार चलाया जा रहा है।

जर्जर कच्चे मकानों में रहने को मजबूर दो परिवार, आवास योजना के लाभ से अब तक वंचित

जर्जर कच्चे मकानों में रहने को मजबूर दो परिवार, आवास योजना के लाभ से अब तक वंचित

चाईबासा | सरकार द्वारा गरीब एवं जरूरतमंद परिवारों को पक्का आवास उपलब्ध कराने के लिए विभिन्न योजनाएं संचालित की जा रही हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर आज भी कई पात्र परिवार इन योजनाओं के लाभ से वंचित हैं। ऐसा ही मामला पश्चिमी सिंहभूम जिले के मंझारी प्रखंड अंतर्गत भागाबिला पंचायत के बरकीमारा गांव से सामने आया है।
गांव की सुनीता पूर्ति के पास घर के नाम पर केवल मिट्टी की जर्जर दीवारें ही बची हैं, जबकि योगेंद्र बिरूवा आज भी मिट्टी और पुआल से बने कच्चे मकान में रहने को विवश हैं। बरसात के दिनों में उनके घरों की छत से पानी टपकता है, जिससे परिवारों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

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इस संबंध में जिला परिषद सदस्य माधव चंद्र कुंकल ने कहा कि यदि सरकार की योजनाओं का सही ढंग से क्रियान्वयन हो, तो गरीब एवं पात्र परिवारों को आवास का लाभ आसानी से मिल सकता है। उन्होंने कहा कि पंचायत स्तर पर आयोजित सरकारी शिविरों और कार्यक्रमों में ग्रामीण विभिन्न योजनाओं का लाभ मिलने की उम्मीद लेकर पहुंचते हैं, लेकिन कई बार ये शिविर केवल औपचारिकता बनकर रह जाते हैं।

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उन्होंने बताया कि सुनीता पूर्ति और योगेंद्र बिरूवा को अब तक न तो राज्य सरकार की अबुआ आवास योजना का लाभ मिला है और न ही केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री आवास योजना का। दोनों परिवार अत्यंत जर्जर और असुरक्षित आवासों में जीवन यापन कर रहे हैं।

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माधव चंद्र कुंकल ने कहा कि इन दोनों पात्र लाभुकों को आवास योजना से जोड़ने की मांग जल्द ही पश्चिमी सिंहभूम के उपायुक्त के समक्ष रखी जाएगी, ताकि उन्हें शीघ्र पक्का आवास उपलब्ध कराया जा सके।

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वहीं ग्रामीणों का कहना है कि सरकार की आवास योजनाओं का वास्तविक लाभ जरूरतमंद और पात्र परिवारों तक पहुंचना चाहिए, ताकि कोई भी परिवार जर्जर एवं असुरक्षित घरों में रहने को मजबूर न रहे।

भाजपा की जिला बैठक में ‘12 साल बेमिसाल’ और ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान को सफल बनाने की रणनीति तैयार

भाजपा की जिला बैठक में ‘12 साल बेमिसाल’ और ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान को सफल बनाने की रणनीति तैयार

चक्रधरपुर | भारतीय जनता पार्टी की जिला स्तरीय बैठक गुरुवार को स्थानीय वन विश्रामागार में जिला अध्यक्ष गुरुचरण नायक की अध्यक्षता में आयोजित हुई। बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में चलाए जाने वाले ‘12 साल बेमिसाल’ अभियान तथा ‘एक पेड़ मां के नाम’ कार्यक्रम को सफल बनाने को लेकर विस्तृत चर्चा की गई।

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बैठक में निर्णय लिया गया कि दोनों विधानसभा क्षेत्रों के सभी मंडलों एवं बूथों पर इन कार्यक्रमों का व्यापक स्तर पर आयोजन किया जाएगा। साथ ही केंद्र सरकार की उपलब्धियों को जन-जन तक पहुंचाने तथा पर्यावरण संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए विशेष अभियान भी चलाया जाएगा।
जिला अध्यक्ष गुरुचरण नायक ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश ने विकास, सुशासन, गरीब कल्याण और आत्मनिर्भरता के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। उन्होंने कहा कि ‘12 साल बेमिसाल’ अभियान के माध्यम से केंद्र सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं एवं उपलब्धियों को घर-घर तक पहुंचाया जाएगा। वहीं ‘एक पेड़ मां के नाम’ कार्यक्रम के तहत प्रत्येक कार्यकर्ता पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश देगा।

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उन्होंने सभी मंडल अध्यक्षों एवं कार्यकर्ताओं से बूथ स्तर तक कार्यक्रमों को सफलतापूर्वक आयोजित करने का आह्वान किया।
भाजपा नेता अशोक षाड़ंगी ने कहा कि पार्टी का संगठन बूथ स्तर तक मजबूत है और आगामी कार्यक्रमों को जनभागीदारी के साथ सफल बनाना सभी कार्यकर्ताओं की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ मातृ सम्मान का भी संदेश देता है।

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वरिष्ठ भाजपा नेता डॉ. विजय सिंह गागराई ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 12 वर्षों के कार्यकाल में गरीबों, किसानों, महिलाओं, युवाओं और आदिवासी समाज के कल्याण के लिए अनेक ऐतिहासिक योजनाएं लागू की गई हैं। उन्होंने कार्यकर्ताओं से गांव-गांव जाकर केंद्र सरकार की उपलब्धियों को लोगों तक पहुंचाने तथा अधिक से अधिक पौधारोपण करने का आह्वान किया।

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बैठक में पूर्व विधायक शशि सामड, कराईकेला मंडल अध्यक्ष सुशांत मंडल, चक्रधरपुर मंडल अध्यक्ष दुर्योधन प्रधान, नगर अध्यक्ष अनूप दुबे, टोकलो मंडल अध्यक्ष कांडे पड़िया, गोईलकेरा मंडल अध्यक्ष हरिचरण बाहंदा, सोनुवा मंडल अध्यक्ष निशांत महतो सहित सातों प्रखंडों के बड़ी संख्या में पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित थे।

लू और गर्म हवाओं से बचाव को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने जारी की एडवाइजरी, सावधानी बरतने की अपील

लू और गर्म हवाओं से बचाव को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने जारी की एडवाइजरी, सावधानी बरतने की अपील

चाईबासा | बढ़ती गर्मी और लू (हीट वेव) के खतरे को देखते हुए झारखंड सरकार के स्वास्थ्य विभाग ने आम लोगों से विशेष सतर्कता बरतने की अपील की है। विभाग द्वारा जारी जन-जागरूकता संदेश में कहा गया है कि अत्यधिक गर्मी और गर्म हवाओं के संपर्क में आने से स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। ऐसे में लोगों को पर्याप्त मात्रा में पानी पीने, हल्के एवं सूती कपड़े पहनने तथा धूप में निकलने से बचने की सलाह दी गई है।

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स्वास्थ्य विभाग के अनुसार लू लगने पर शरीर में पानी की कमी, चक्कर आना, सिरदर्द, कमजोरी, बेहोशी तथा अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। इससे बचाव के लिए नियमित रूप से पानी, नींबू-पानी, छाछ, लस्सी और अन्य तरल पदार्थों का सेवन करने की सलाह दी गई है।

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विभाग ने लोगों को घर से बाहर निकलते समय सिर को कपड़े, टोपी या छाते से ढकने, धूप का चश्मा पहनने तथा दोपहर के समय अनावश्यक रूप से बाहर न निकलने की सलाह दी है। साथ ही, घर और कार्यस्थल पर पर्याप्त वेंटिलेशन एवं ठंडे वातावरण की व्यवस्था बनाए रखने पर भी जोर दिया गया है।

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गर्मी के मौसम में डिहाइड्रेशन से बचाव के लिए ओआरएस (ORS) घोल के उपयोग की जानकारी भी साझा की गई है। विभाग ने बताया कि एक लीटर स्वच्छ पानी में ओआरएस का पूरा पैकेट मिलाकर घोल तैयार किया जा सकता है, जिसका उपयोग 24 घंटे के भीतर कर लेना चाहिए।

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स्वास्थ्य संबंधी किसी भी जानकारी, सलाह या शिकायत के लिए राज्य हेल्पलाइन नंबर 104 (टोल फ्री) पर संपर्क करने की अपील की गई है।

विश्व पर्यावरण दिवस विशेष: ‘सोना नहीं, पेड़ ही हमारी असली विरासत’ — आदिवासियत का प्रकृति संरक्षण संदेश

विश्व पर्यावरण दिवस विशेष: ‘सोना नहीं, पेड़ ही हमारी असली विरासत’ — आदिवासियत का प्रकृति संरक्षण संदेश

चाईबासा | एक ओर सोने और हीरों का ढेर है, तो दूसरी ओर लहलहाता हुआ हरा-भरा पेड़। दुनिया जिसे ‘दौलत’ कहती है, वह बंजर भूमि पर पड़ी चमकती वस्तुएँ हो सकती हैं, लेकिन आदिवासी समाज की दृष्टि में वास्तविक धन वह वृक्ष है, जिसकी जड़ों में संस्कृति और जिसकी शाखाओं में भविष्य सुरक्षित है।
विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर प्रकृति संरक्षण और आदिवासी जीवन-दर्शन पर केंद्रित यह संदेश आज के समय में और भी प्रासंगिक हो गया है। आदिवासी समाज सदियों से जल, जंगल और जमीन को केवल संसाधन नहीं, बल्कि जीवन का आधार और आस्था का केंद्र मानता आया है।

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प्रकृति ही हमारी सबसे बड़ी पूँजी
आदिवासियत का मूल भाव प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित कर जीवन जीना है। आदिवासी समुदाय के लिए पेड़ केवल लकड़ी का स्रोत नहीं, बल्कि देवतुल्य संरक्षक और सांस्कृतिक विरासत हैं। आज जब विकास की अंधी दौड़ में कंक्रीट के जंगल खड़े किए जा रहे हैं, तब स्वच्छ हवा, शीतल छाया और प्राकृतिक संतुलन का महत्व पहले से कहीं अधिक बढ़ गया है।
सोना और हीरे भले ही आर्थिक समृद्धि के प्रतीक हों, लेकिन वे न तो ऑक्सीजन प्रदान कर सकते हैं और न ही भीषण गर्मी में छाया दे सकते हैं। इसी संदर्भ में एक प्रसिद्ध कथन याद आता है— “जब आखिरी पेड़ काट दिया जाएगा, आखिरी नदी प्रदूषित हो जाएगी और आखिरी मछली पकड़ ली जाएगी, तब इंसान को समझ आएगा कि वह पैसों को खा नहीं सकता।”

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इस वर्ष की थीम: प्रकृति से प्रेरित, भविष्य के लिए समर्पित
इस वर्ष विश्व पर्यावरण दिवस की थीम “Inspired by Nature. For Climate. For Our Future” (प्रकृति से प्रेरित। जलवायु के लिए। हमारे भविष्य के लिए।) रखी गई है। इसके साथ ही दुनिया भर में #NowForClimate अभियान चलाया जा रहा है।
यह थीम आदिवासी जीवन-दर्शन से पूरी तरह मेल खाती है। आदिवासी समाज सदैव प्रकृति को अपना गुरु मानता रहा है। जलवायु परिवर्तन जैसी वैश्विक चुनौती का समाधान प्रकृति के संरक्षण में ही निहित है। जंगल कार्बन अवशोषित करते हैं, नदियाँ जीवन देती हैं और पर्वत प्राकृतिक संतुलन बनाए रखते हैं।

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विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ते वैश्विक तापमान और चरम मौसमीय घटनाओं के दौर में टिकाऊ जीवनशैली अपनाना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
जल, जंगल और जमीन से जुड़ा अस्तित्व
आदिवासी समाज का भूमि से रिश्ता केवल स्वामित्व का नहीं, बल्कि श्रद्धा और जिम्मेदारी का है। समुदाय यह भलीभांति समझता है कि जंगलों का अस्तित्व ही मानव जीवन की सुरक्षा सुनिश्चित करता है। वृक्ष ऑक्सीजन, फल, औषधियाँ और प्राकृतिक संतुलन प्रदान करते हैं, जो जीवन के लिए अनिवार्य हैं।

जलवायु संकट के दौर में आदिवासियत की प्रासंगिकता
आज पूरी दुनिया जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग जैसी समस्याओं से जूझ रही है। ऐसे समय में आदिवासी संस्कृति का प्रकृति-केंद्रित जीवन-दर्शन एक महत्वपूर्ण समाधान प्रस्तुत करता है। यह समाज हमेशा आवश्यकता भर ही प्रकृति से लेने और उसके संरक्षण को प्राथमिकता देने की सीख देता रहा है।
आदिवासी मान्यता के अनुसार, सोना-चांदी और हीरे जीवन की वास्तविक जरूरतों को पूरा नहीं कर सकते। कठिन परिस्थितियों में जीवन बचाने का आधार हरियाली, जल स्रोत और स्वच्छ वातावरण ही होते हैं। यही कारण है कि पर्यावरण दिवस हमें यह याद दिलाता है कि मनुष्य प्रकृति का मालिक नहीं, बल्कि उसका अभिन्न हिस्सा है।
आने वाली पीढ़ियों के लिए हरियाली की विरासत
पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए समाज के बुद्धिजीवियों का कहना है कि विकास आवश्यक है, लेकिन ऐसा विकास नहीं जो प्रकृति और मानव जीवन के बीच की दूरी बढ़ा दे। आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित भविष्य देने के लिए वृक्षारोपण और प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण समय की मांग है।
आदिवासी समाज का मानना है कि वास्तविक विरासत सोना-चांदी नहीं, बल्कि वे पेड़ हैं जिन्हें हम अपने बच्चों और आने वाली पीढ़ियों के लिए छोड़कर जाते हैं।
“पेड़ लगाइए, जीवन बचाइए। क्योंकि प्रकृति है, तभी हम हैं।”

‘चुप्पी तोड़ो, स्वस्थ रहो’ महाअभियान से जुड़ने की उपायुक्त मनीष कुमार ने की अपील

‘चुप्पी तोड़ो, स्वस्थ रहो’ महाअभियान से जुड़ने की उपायुक्त मनीष कुमार ने की अपील

चाईबासा | पश्चिमी सिंहभूम के उपायुक्त मनीष कुमार ने जिलेवासियों से माहवारी स्वच्छता एवं इससे जुड़ी सामाजिक भ्रांतियों को समाप्त करने के उद्देश्य से संचालित ‘चुप्पी तोड़ो, स्वस्थ रहो’ महाअभियान में सक्रिय भागीदारी निभाने की अपील की है।

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उपायुक्त ने अपने संदेश में कहा कि इस अभियान का मुख्य उद्देश्य माहवारी से जुड़े मिथकों, गलत धारणाओं और सामाजिक संकोच को दूर करते हुए किशोरियों एवं महिलाओं के बीच स्वास्थ्य तथा स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। उन्होंने कहा कि आज भी समाज में माहवारी को लेकर अनेक भ्रांतियां और झिझक मौजूद हैं, जिन्हें सामूहिक प्रयासों के माध्यम से समाप्त करना आवश्यक है।

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उन्होंने जिलेवासियों से ‘रेड डॉट चैलेंज’ से जुड़ने और अपने-अपने स्तर पर जागरूकता फैलाने का आह्वान किया। उपायुक्त ने कहा कि इस विषय पर जितनी खुलकर चर्चा होगी, उतनी ही तेजी से इससे जुड़ी वर्जनाएं और सामाजिक टैबू समाप्त होंगे। उन्होंने कहा कि यह केवल एक अभियान नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।


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मनीष कुमार ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति की जिम्मेदारी है कि वह अपने क्षेत्र की किशोरियों एवं महिलाओं को स्वास्थ्य, स्वच्छता और माहवारी प्रबंधन से संबंधित सही एवं वैज्ञानिक जानकारी उपलब्ध कराने में सहयोग करे। उन्होंने नागरिकों, जनप्रतिनिधियों, स्वयंसेवी संस्थाओं, शैक्षणिक संस्थानों तथा युवाओं से इस महाअभियान को जनआंदोलन का स्वरूप देकर सफल बनाने की अपील की।


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अंत में उपायुक्त ने कहा कि सभी लोग मिलकर चुप्पी तोड़ें और जिले की किशोरियों एवं महिलाओं को स्वस्थ, सुरक्षित एवं सशक्त बनाने की दिशा में सार्थक योगदान दें।

जमशेदपुर: मार्कशीट में देरी से छात्रों का भविष्य अधर में, नामांकन प्रक्रिया प्रभावित

जमशेदपुर: मार्कशीट में देरी से छात्रों का भविष्य अधर में, नामांकन प्रक्रिया प्रभावित

जमशेदपुर | झारखंड एकेडमिक काउंसिल (जैक) की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। मैट्रिक परीक्षा का परिणाम घोषित हुए एक महीने से अधिक समय बीत जाने के बावजूद विद्यार्थियों को अब तक मूल अंकपत्र (मार्कशीट) उपलब्ध नहीं कराया गया है। इसका सीधा असर 11वीं और स्नातक स्तर पर नामांकन की प्रक्रिया पर पड़ रहा है। बेहतर शिक्षण संस्थानों में प्रवेश की तैयारी कर रहे हजारों छात्र आवश्यक दस्तावेजों के अभाव में परेशानियों का सामना कर रहे हैं।

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एजेंसी बदलने से बढ़ी परेशानी
सूत्रों के अनुसार, अंकपत्रों की छपाई के लिए पूर्व एजेंसी को हटाकर नई एजेंसी को जिम्मेदारी सौंपी गई है। विभागीय समन्वय की कमी और छपाई कार्य में हुई देरी के कारण छात्रों को समय पर मूल दस्तावेज नहीं मिल सके हैं। इसका खामियाजा विद्यार्थियों को भुगतना पड़ रहा है।
मार्कशीट नहीं, तो माइग्रेशन और टीसी भी नहीं
नियमों के अनुसार किसी भी नए स्कूल या कॉलेज में प्रवेश के लिए मार्कशीट, माइग्रेशन सर्टिफिकेट और स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट (टीसी) अनिवार्य होते हैं। मूल अंकपत्र उपलब्ध नहीं होने के कारण माइग्रेशन प्रमाणपत्र जारी नहीं हो पा रहा है। वहीं कई शिक्षण संस्थान आवश्यक मूल दस्तावेजों के अभाव में टीसी जारी करने से भी इनकार कर रहे हैं। इसके चलते परीक्षा उत्तीर्ण कर चुके अनेक छात्र-छात्राएं नए संस्थानों में दाखिला नहीं ले पा रहे हैं।

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समय से पहले परिणाम, लेकिन छात्रों को नहीं मिला लाभ
इस वर्ष जैक ने मैट्रिक का परिणाम 23 अप्रैल और इंटरमीडिएट का परिणाम 6 मई को घोषित किया था, जो पिछले वर्षों की तुलना में काफी पहले जारी किया गया। हालांकि, परिणाम समय से पहले घोषित होने के बावजूद विद्यार्थियों को इसका अपेक्षित लाभ नहीं मिल सका। मूल अंकपत्र उपलब्ध नहीं होने के कारण वे उच्च शिक्षा के लिए आवेदन और नामांकन प्रक्रिया पूरी नहीं कर पा रहे हैं।

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अस्थायी व्यवस्था से चल रहा नामांकन
स्थिति को देखते हुए कई स्कूल और कॉलेज ऑनलाइन अंकपत्र के प्रिंटआउट तथा अभिभावकों से शपथ-पत्र (अंडरटेकिंग) लेकर अस्थायी रूप से नामांकन कर रहे हैं। छात्र मोहम्मद खालिद, जिन्होंने मैट्रिक परीक्षा में 81 प्रतिशत अंक प्राप्त किए हैं, ने बताया कि मूल अंकपत्र नहीं मिलने के कारण उन्हें कई संस्थानों से निराशा हाथ लगी। बाद में एक विद्यालय ने ऑनलाइन अंकपत्र के आधार पर उनका नामांकन स्वीकार किया।

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छात्रों और अभिभावकों में नाराजगी
छात्रों और अभिभावकों का कहना है कि परिणाम घोषित होने के बाद भी मूल दस्तावेज समय पर उपलब्ध नहीं कराना जैक की प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। उन्होंने मांग की है कि अंकपत्रों का वितरण जल्द से जल्द सुनिश्चित किया जाए, ताकि विद्यार्थियों का शैक्षणिक सत्र प्रभावित न हो।

चिरिया: टुंगविल माइंस के पुनः संचालन की सुगबुगाहट के बीच ग्रामीणों ने खोला मोर्चा, स्थानीय युवाओं को रोजगार और मुआवजे की मांग

चिरिया: टुंगविल माइंस के पुनः संचालन की सुगबुगाहट के बीच ग्रामीणों ने खोला मोर्चा, स्थानीय युवाओं को रोजगार और मुआवजे की मांग

चिरिया । बंद पड़ी टुंगविल माइंस के पुनः संचालन की चर्चाओं के बीच स्थानीय ग्रामीणों और बेरोजगार युवाओं ने अपने अधिकारों को लेकर आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है। बुधवार को चिरिया टुंगविल माइंस से प्रभावित छह गांवों—चिरिया, बिनुवा, अंकुवा, लोइडी, टिमरा और सोंगा—के ग्रामीणों की एक सामूहिक बैठक हाट परिसर में आयोजित की गई।

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प्रकाश सिद्धू की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में पांच गांवों के पारंपरिक मुंडाओं सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण और युवा शामिल हुए। बैठक के दौरान वक्ताओं ने सेल (SAIL) प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वर्षों से जारी खनन गतिविधियों के कारण स्थानीय लोगों की उपजाऊ कृषि भूमि और खलिहान प्रभावित हुए हैं। साथ ही क्षेत्र की नदियों का पानी भी प्रदूषित हुआ है, जिससे किसानों को लगातार आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।

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ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि माइंस से निकलने वाले अपशिष्ट पदार्थों के कारण खेतों का कटाव बढ़ा है और प्रभावित परिवारों को आज तक उचित मुआवजा नहीं मिल सका है। उन्होंने कहा कि पीढ़ियों से इस समस्या का सामना करने के बावजूद उनकी मांगों की अनदेखी की जाती रही है।


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बैठक में उपस्थित युवाओं ने भी नाराजगी जताते हुए कहा कि सेल प्रबंधन स्थानीय प्रभावित परिवारों के युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता देने के बजाय बाहरी लोगों को अवसर दे रहा है। इसे स्थानीय लोगों के साथ अन्याय बताते हुए युवाओं ने रोजगार में प्राथमिकता सुनिश्चित करने की मांग की।


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सेल प्रबंधन की कथित वादाखिलाफी के विरोध में ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से 3 जून से आंदोलन शुरू करने का निर्णय लिया। आंदोलन की प्रमुख मांगों में प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा, स्थानीय युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता तथा क्षेत्रीय हितों की रक्षा शामिल है।
बैठक में मुंडा विजय लागुरी, सोमा चेरवा, गांजो सुरीन, माडु चेरवा सहित कई ग्रामीण और युवा उपस्थित थे।

अवैध शराब के खिलाफ उत्पाद विभाग की बड़ी कार्रवाई, दो गिरफ्तार, 17 लीटर चुलाई शराब जब्त

अवैध शराब के खिलाफ उत्पाद विभाग की बड़ी कार्रवाई, दो गिरफ्तार, 17 लीटर चुलाई शराब जब्त

चाईबासा | पश्चिमी सिंहभूम जिले में अवैध शराब के निर्माण, बिक्री एवं परिवहन पर रोक लगाने के लिए उत्पाद विभाग द्वारा लगातार अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में अधीक्षक उत्पाद, पश्चिमी सिंहभूम के निर्देश पर 3 जून 2026 को चक्रधरपुर एवं टोकलो थाना क्षेत्रों में छापेमारी कर दो लोगों को गिरफ्तार किया गया।

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उत्पाद विभाग की टीम ने चक्रधरपुर थाना क्षेत्र के चैनपुर गांव में अवैध रूप से शराब बिक्री की सूचना के आधार पर छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान एक आरोपी को अवैध चुलाई शराब बेचते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया।

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इसी तरह टोकलो थाना क्षेत्र के चीटपिल गांव में अवैध चुलाई शराब की बिक्री के लिए कुख्यात स्थल पर छापेमारी की गई। इस दौरान एक अन्य शराब विक्रेता को गिरफ्तार किया गया।
दोनों अभियानों के दौरान कुल 17 लीटर अवैध चुलाई शराब बरामद की गई। गिरफ्तार आरोपियों के विरुद्ध उत्पाद अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

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सके अतिरिक्त उपायुक्त के निर्देश पर अनुज्ञप्ति प्राप्त खुदरा शराब दुकानों (अनुज्ञप्ति संख्या 001_COM_WES_25-26 एवं 007_COM_WES_25-26) का औचक निरीक्षण भी किया गया। निरीक्षण के दौरान एक दुकान में अनधिकृत व्यक्ति द्वारा मदिरा बिक्री किए जाने का मामला सामने आया। इस पर संबंधित अनुज्ञप्तिधारी के विरुद्ध अनियमितता दर्ज करते हुए दंडात्मक कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

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उत्पाद विभाग ने स्पष्ट किया है कि जिले में अवैध शराब के निर्माण, बिक्री एवं परिवहन के विरुद्ध अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा तथा कानून का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।