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चाईबासा ‘नो एंट्री’ मांग : प्रतिनिधिमंडल पहुँचा मंत्री कार्यालय, मंत्री अनुपस्थित

चाईबासा ‘नो एंट्री’ मांग : प्रतिनिधिमंडल पहुँचा मंत्री कार्यालय, मंत्री अनुपस्थित

पश्चिमी_सिंहभूम : चाईबासा में ‘नो एंट्री’ हटाने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे प्रतिनिधिमंडल को आज परिवहन मंत्री के चाईबासा स्थित कार्यालय में समन्वय वार्ता के लिए बुलाया गया था। प्रतिनिधियों को सुबह 8:30 बजे मिलने का समय दिया गया, लेकिन 9:30 बजे तक इंतजार कराने के बाद यह सूचना दी गई कि मंत्री अपने गांव में हैं और वार्ता में शामिल नहीं हो पाएंगे।

इसके बाद आंदोलनकारियों ने अपना ज्ञापन मंत्री के सचिव सुभाष बनर्जी को सौंपा।

प्रतिनिधिमंडल में मुख्य रूप से सुरेश सोय, रमेश बालमुचू, महेंद्र जामुदा, बमेया बारी, रेयांस सामड, साधु हो, वासिल प्रेम हेंब्रम, बनमाली तमसोय, चंद्र मोहन बिरुवा, संदीप देवगम सहित अन्य सामाजिक कार्यकर्ता और आंदोलनकारी शामिल थे।

चाईबासा में रिटायर्ड बैंककर्मी से 17 लाख की साइबर ठगी, एक आरोपी गिरफ्तार

चाईबासा में रिटायर्ड बैंककर्मी से 17 लाख की साइबर ठगी, एक आरोपी गिरफ्तार

चाईबासा : पश्चिमी सिंहभूम जिले के चाईबासा में साइबर अपराधियों ने एक सेवानिवृत्त बैंककर्मी से करीब 17 लाख रुपये की ठगी कर ली। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है।

कैसे हुई ठगी?


मुफ्फसिल थाना क्षेत्र के करलाजोड़ी निवासी परमेश्वर पुरती (सेवानिवृत्त बैंककर्मी) ने 13 नवंबर 2025 को आवेदन देकर बताया कि अपराधियों ने उन्हें “जीवन प्रमाण पत्र अपडेट” कराने के नाम पर झांसा दिया और उनके बैंक खाते से 16 लाख 92 हजार रुपये निकाल लिए।

पुलिस की कार्रवाई


घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक ने एक विशेष टीम बनाई। टीम ने तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क कर संबंधित बैंक खातों को फ्रीज करा दिया, जिससे रकम सुरक्षित रह सके।

एक आरोपी गिरफ्तार


तकनीकी जांच, बैंक डिटेल्स और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर पुलिस ने मो. सकीर अंसारी नामक आरोपी को 6 दिसंबर 2025 को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया।
मामले में मुफ्फसिल थाना कांड संख्या 185/2025 दर्ज किया गया है, जिसमें धारा 319(2)/318(4) BNS 2023 तथा IT Act की धारा 66(C)/66(D) लगाई गई है। पुलिस का कहना है कि बाकी आरोपियों की गिरफ्तारी भी जल्द होगी।

पुलिस की अपील


पुलिस ने नागरिकों से आग्रह किया है कि वे फोन या मैसेज पर किसी भी व्यक्ति को बैंक विवरण, ओटीपी या व्यक्तिगत जानकारी न दें। जीवन प्रमाण पत्र अपडेट जैसी सेवाओं के लिए सीधे बैंक शाखा या आधिकारिक Jeevan Pramaan Portal पर ही संपर्क करें।
किसी भी साइबर ठगी की स्थिति में तुरंत हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें या Cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें।

ईपीलसिंगी–ईच्छाकुटी सड़क पर धंसी पुलिया विकास नहीं, भ्रष्टाचार का स्मारक:- धी. रामहरि पेरियार

ईपीलसिंगी–ईच्छाकुटी सड़क पर धंसी पुलिया विकास नहीं, भ्रष्टाचार का स्मारक:- धी. रामहरि पेरियार

चाईबासा : मंझारी प्रखंड के ईपीलसिंगी–ईच्छाकुटी मुख्य मार्ग के निरीक्षण के दौरान जो दृश्य सामने आया, वह केवल एक पुलिया के धंसने की घटना नहीं बल्कि पूरे सिस्टम की सड़ांध की सार्वजनिक घोषणा है। सड़क पर बनी पुलिया बीच से ऐसे धंस गई है, मानो भ्रष्टाचार, लूट और मिलीभगत का बोझ अब खुद ठेकेदारों और अधिकारियों की बनाई घटिया गुणवत्ता को ही तोड़ देने पर आमादा हो गया हो।

फाइलों में पुलिया मानक के अनुसार बनी हुई दिखती है, लेकिन जमीन पर इसकी हकीकत वो है जिसका सामना रोजाना ग्रामीणों को करना पड़ रहा है, लचर, खोखली और पूरी तरह भ्रष्टाचार में लिपटी हुई। यह साफ संकेत है कि विभागीय अधिकारियों, संवेदक और प्रखंड प्रशासन के बीच सेटिंग–गेटिंग का गंदा खेल खुलेआम खेला गया है। जनता का पैसा निगलकर कागजों में चमचमाती पुलिया दिखाना और जमीन पर ऐसा ढांचा खड़ा करना जो पहली बारिश भी न झेल सके, इसे विकास नहीं, सीधी-सीधी लूट कहा जाता है।

यह पुलिया का धंसना दुर्घटना नहीं, सुनियोजित भ्रष्टाचार का परिणाम है। यह उस व्यवस्था का आईना है जहाँ गरीब ग्रामीणों की सुरक्षा से ज्यादा कमीशन, कैरम बोर्ड और भीतरखाने की डील को महत्व दिया जाता है। यह प्रशासन की नींद में डूबी अंतरात्मा पर करारा तमाचा है।

एंटी करप्शन ऑफ इंडिया के झारखंड प्रदेश अध्यक्ष धी. रामहरि पेरियार ने कहा यह पुलिया नहीं धँसी है, यह भ्रष्टाचार का पूरा गठजोड़ धंस गया है। पर शर्म? वह अभी भी किसी के पास नहीं है। जनता की गाढ़ी कमाई से ऐसे खिलवाड़ करने वाले हर अधिकारी और ठेकेदार के खिलाफ कानूनन कार्रवाई ही अब अंतिम विकल्प बचा है।


उन्होंने एक्स (ट्विटर) पर जिला उपायुक्त श्री चंदन कुमार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा धंसी पुलिया का तुरंत पुनर्निर्माण शुरू कराया जाए, ताकि ग्रामीणों की आवाजाही बाधित न रहे। निर्माण कार्य में शामिल विभागीय अधिकारियों व ठेकेदार पर विभागीय एवं आपराधिक कार्रवाई तत्काल दर्ज की जाए। पुलिया निर्माण की गुणवत्ता, सामग्री, प्राक्कलन राशि और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की तकनीकी जांच कर 72 घंटे में सार्वजनिक रिपोर्ट जारी की जाए। जांच पूरी होने तक दुर्घटना रोकने हेतु अस्थायी सुरक्षित पुल/मार्ग तुरंत उपलब्ध कराया जाए। ऐसे भ्रष्ट निर्माण कार्यों की श्रृंखला पर रोक लगाने हेतु जिला स्तर पर विशेष सत्यापन अभियान शुरू किया जाए।


    धी. पेरियार ने कहा कि ग्रामीणों की सुरक्षा और करदाताओं के पैसों की लूट पर किसी भी कीमत पर समझौता नहीं किया जाएगा। अगर प्रशासन समयबद्ध कार्रवाई नहीं करता है, तो जनआंदोलन और कानूनी लड़ाई दोनों शुरू किए जाएंगे।

खरसावां में बाल विवाह मुक्त झारखंड अभियान का शुभारंभ — बीडीओ ने जागरूकता रथ को दिखाई हरी झंडी

खरसावां में बाल विवाह मुक्त झारखंड अभियान का शुभारंभ — बीडीओ ने जागरूकता रथ को दिखाई हरी झंडी

खरसावां : खरसावां प्रखंड मुख्यालय में शुक्रवार को बाल विवाह मुक्त झारखंड अभियान के तहत व्यापक जन-जागरूकता अभियान की शुरुआत की गई। प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) प्रधान माझी ने जागरूकता रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इसी दौरान बीडीओ ने हस्ताक्षर अभियान का भी शुभारंभ किया, जिसके माध्यम से लोगों को बाल विवाह उन्मूलन के प्रति जागरूक करने और सामाजिक प्रतिबद्धता सुनिश्चित करने का संदेश दिया गया। सेविकाओं को बाल विवाह न करने की शपथ भी दिलाई गई।

जागरूकता रथ 23 दिसंबर 2025 तक खरसावां प्रखंड के विभिन्न गांवों का भ्रमण करेगा और बाल विवाह रोकथाम से जुड़े संदेश लोगों तक पहुँचाएगा।

मौके पर बीडीओ प्रधान माझी ने कहा कि बाल विवाह एक गंभीर सामाजिक बुराई है, जिसे समाप्त करने के लिए निरंतर जागरूकता जरूरी है। उन्होंने बताया कि कानून होने के बावजूद अज्ञानता के कारण कुछ समाजों में यह कुप्रथा अब भी जारी है, जो चिंता का विषय है। बाल विवाह से बालिकाओं के स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ता है, कम उम्र में गर्भधारण से जच्चा-बच्चा दोनों के स्वास्थ्य पर जोखिम बढ़ता है, तथा कम आयु में वैवाहिक जिम्मेदारियाँ मानसिक तनाव एवं शिक्षा में बाधा उत्पन्न करती हैं।

उन्होंने कहा कि यदि कहीं भी बाल विवाह की आशंका हो, तो तुरंत पंचायत प्रतिनिधियों या प्रखंड प्रशासन को सूचना दें। यह प्रत्येक नागरिक का सामाजिक दायित्व है।

जागरूकता रथ के माध्यम से लोगों को यह भी बताया जाएगा कि विवाह की न्यूनतम वैधानिक आयु— लड़कों के लिए 21 वर्ष और लड़कियों के लिए 18 वर्ष है। इसका उल्लंघन करने पर एक लाख रुपये तक का जुर्माना, दो वर्ष तक का कारावास या दोनों का प्रावधान है। इसके अलावा बाल श्रम, बाल तस्करी, बाल यौन शोषण और बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 से संबंधित जानकारी भी साझा की जाएगी।

कार्यक्रम में बीडीओ प्रधान माझी, सहायक अभियंता आशुतोष कुमार, कनिष्ठ अभियंता निरज सिन्हा सहित बड़ी संख्या में सेविकाएँ उपस्थित थीं।

आम जनता की समस्याओं का समाधान करने और समाज व क्षेत्र के अंतिम पंक्ति में खड़े लोगों को सरकारी योजनाओं से जोड़ने के लिए हमारा निरंतर प्रयास जारी है : विजय सोय

आम जनता की समस्याओं का समाधान करने और समाज व क्षेत्र के अंतिम पंक्ति में खड़े लोगों को सरकारी योजनाओं से जोड़ने के लिए हमारा निरंतर प्रयास जारी है : विजय सोय

जमशेदपुर : पश्चिमी विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत मानगो–बालीगुमा में मेरे निवास स्थान पर, हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी केंद्र एवं राज्य सरकार की योजनाओं का मेगा शिविर आयोजित किया जा रहा है।

आप सभी जानते हैं कि सरकारी कार्यालयों में किसी भी योजना का लाभ लेने के लिए लंबी कतारों में घंटों खड़ा रहना पड़ता है, और फिर भी यह निश्चित नहीं होता कि आपका काम उसी दिन हो पाएगा या नहीं।

मानगो क्षेत्र में अधिकांश परिवार दिहाड़ी मजदूरी पर निर्भर हैं—रोज कमाते हैं, रोज खाते हैं। ऐसे में, सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए
CO कार्यालय, नगर निगम, राशन विभाग, करनडीह ब्लॉक या प्रज्ञा केंद्र के चक्कर लगाना इनके लिए बेहद कठिन और खर्चीला हो जाता है।
बुजुर्ग और असहाय लोगों के लिए स्थिति और भी चुनौतीपूर्ण है, जिसके कारण वे अक्सर योजनाओं के लाभ से वंचित रह जाते हैं।

इन्हीं समस्याओं को देखते हुए, मैं और मेरी विजय सेना टीम कई वर्षों से लोगों के घर के नजदीक ही शिविर लगाकर उन्हें सीधा सरकारी योजनाओं से जोड़ने का कार्य कर रहे हैं।
सैकड़ों लोग इन शिविरों का लाभ उठा चुके हैं और लगातार उठा रहे हैं।

लेकिन ऐसे कई लोग भी हैं जो पिछली बार शिविर में शामिल नहीं हो पाए थे और उन्होंने शिकायत की कि उनका राशन कार्ड या आयुष्मान कार्ड अब तक नहीं बन पाया, जिसके कारण वे महत्वपूर्ण सरकारी सुविधाओं से वंचित रह गए।

इसीलिए, जो लोग पिछले कैंपों में छूट गए थे, उनके लिए एक बार फिर
रविवार, 07 दिसंबर 2025 को बालीगुमा स्थित मेरे निवास स्थान पर शिविर लगाया जा रहा है।



शिविर में किए जाने वाले मुख्य कार्य

1. राशन कार्ड से संबंधित सभी कार्य


2. ई-श्रम कार्ड से संबंधित सभी कार्य


3. लेबर कार्ड से संबंधित सभी कार्य


4. आयुष्मान कार्ड से संबंधित सभी कार्य



महत्वपूर्ण निर्देश

शिविर में आने वाले सभी लोगों को साथ लाना अनिवार्य है :

1. आधार कार्ड

2. बैंक पासबुक

3. मोबाइल नंबर

4. सभी दस्तावेजों की फोटोकॉपी

5. दो रंगीन पासपोर्ट साइज फोटो




शिविर का विवरण

दिनांक : 07/12/2025

दिन : रविवार

समय : सुबह 10 बजे से दोपहर 1 बजे तक

स्थान : बालीगुमा, सूकना बस्ती, NH-33, मेरे निवास स्थान पर

संपर्क नंबर : 7992336119

बिजली विभाग की दोहरी नीति, अमीरों के लिए महफूज रास्ता, गरीबों के लिए सजा :- धी. रामहरि पेरियार

बिजली विभाग की दोहरी नीति, अमीरों के लिए महफूज रास्ता, गरीबों के लिए सजा :- धी. रामहरि पेरियार

चाईबासा : जिले में बिजली विभाग की वसूली व्यवस्था पूरी तरह से भ्रष्टाचार, पक्षपात और प्रशासनिक विफलता का चरम उदाहरण बन चुकी है। विभाग अब सेवा प्रदाता नहीं, बल्कि वसूली तंत्र के रूप में काम कर रहा है। शुक्रवार को दैनिक जागरूक अखबार में प्रकाशित समाचार में विभाग की दोहरी नीति साफ उजागर हो गई, लाखों-करोड़ों रुपये बकाया रखने वाले बड़े व्यापारी, उद्योगपति और रसूखदार व्यक्तियों पर न नोटिस जाता है, न दबाव बनता है और न ही उनके कनेक्शन काटने की किसी अधिकारी में हिम्मत दिखाई देती है।
लेकिन गरीब? महज 5–10 हजार रुपये का बकाया होते ही बिजली विभाग ऐसे टूट पड़ता है जैसे कोई बड़ा अपराध हो गया हो। गरीब परिवारों के घर में अंधेरा उतारने में विभाग को न शर्म, न संवेदना और न ही कोई सामाजिक जिम्मेदारी महसूस होती है। इसी दोहरे चरित्र ने यह साबित कर दिया है अमीरों को छूट, गरीबों को लूट ही आज के सिस्टम का असली चेहरा है।
       बड़े बकायेदारों पर चुप्पी, कमजोर पर कार्रवाई, इसी को विभाग नीति’ कहता है!
           एंटी करप्शन ऑफ इंडिया के झारखंड प्रदेश अध्यक्ष धी. रामहरि पेरियार ने कहा कि बिजली विभाग में भ्रष्टाचार इतना गहरा बैठ चुका है कि बड़े बकायेदारों के सामने अधिकारी नतमस्तक हो जाते हैं, जबकि गरीब उपभोक्ताओं पर तानाशाही थोपते हैं। करोड़ों की वसूली छोड़कर 5–10 हजार रुपये वाले गरीब परिवारों की बिजली काटना विभाग की मानसिकता का प्रमाण है। यह नीति नहीं, बल्कि सीधी-सीधी नालायकी + मिलीभगत है।
    उन्होंने स्पष्ट किया कि जिले के सभी बड़े बकायेदार उद्योगपतियों और व्यापारियों की सूची तुरंत सार्वजनिक की जाए। वसूली की शुरुआत उन्हीं से हो, जो लाखों–करोड़ों रुपये दबाकर बैठे हैं।गरीब परिवारों की बिजली काटने की मनमानी को तुरंत रोका जाए।विभागीय स्तर पर चल रही सेलेक्टिव वसूली और भ्रष्ट मिलीभगत की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए। गरीब उपभोक्ताओं के लिए राहत योजनाएँ तथा आसान किस्त व्यवस्था लागू की जाए। यदि विभाग की यह दोहरी नीति बंद नहीं हुई, यदि बड़े बकायेदारों पर तत्काल कार्रवाई नहीं की गई, और यदि गरीबों का उत्पीड़न जारी रहा तो एंटी करप्शन ऑफ इंडिया जिला मुख्यालय से लेकर प्रखंड स्तर तक बड़े पैमाने पर हस्ताक्षर अभियान एवं जनआंदोलन शुरू करेगा। इससे उत्पन्न स्थिति की पूरी जिम्मेदारी बिजली विभाग और उसके अधिकारियों की होगी।

पश्चिमी सिंहभूम में डीएमएफटी अनुशिक्षक बहाली हेतु आयोजित दक्षता परीक्षा का उपायुक्त ने किया निरीक्षण

पश्चिमी सिंहभूम में डीएमएफटी अनुशिक्षक बहाली हेतु आयोजित दक्षता परीक्षा का उपायुक्त ने किया निरीक्षण

चाईबासा : पश्चिमी सिंहभूम जिले के सरकारी उच्च विद्यालयों में कक्षा 9–10 के विद्यार्थियों की पढ़ाई में सहयोग के लिए डीएमएफटी के तहत 190 घंटी आधारित अनुशिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया जारी है। इसी क्रम में चाईबासा के टाटा कॉलेज परिसर स्थित बहुउद्देशीय सभागार में आयोजित दक्षता परीक्षा का निरीक्षण जिला दंडाधिकारी-सह-उपायुक्त श्री चंदन कुमार ने किया।

निरीक्षण के दौरान उपायुक्त ने परीक्षा व्यवस्था की समीक्षा की और उपस्थित अभ्यर्थियों को परीक्षा के नियमों की जानकारी दी। उन्होंने निर्देश दिया कि सभी अभ्यर्थी अपने ओएमआर शीट में मांगी गई जानकारी स्पष्ट और सही रूप से भरें तथा उपस्थिति शीट में हस्ताक्षर अवश्य करें। नियमों से अवगत कराने के बाद उपायुक्त ने सभी अभ्यर्थियों को शुभकामनाएं भी दीं।

दो पालियों में आयोजित इस विषय-वार दक्षता परीक्षा में कुल 895 अभ्यर्थियों ने हिस्सा लिया। परीक्षा में शामिल होने के लिए अभ्यर्थियों को एडमिट कार्ड आज ही समाहरणालय परिसर में वितरित किए गए।

परीक्षा संचालन के दौरान सहायक समाहर्ता श्री सिद्धांत कुमार, नजारत उप-समाहर्ता श्री देवेंद्र कुमार, खुंटपानी के बीडीओ श्री धनंजय पाठक, कार्यपालक दंडाधिकारी श्री कुमार हर्ष, जिला शिक्षा अधीक्षक श्री प्रवीण कुमार सहित अन्य प्रतिनियुक्त पदाधिकारी व कर्मी उपस्थित रहे।

पूर्वी सिंहभूम की चार महिला रग्बी खिलाड़ी खेलो इंडिया जोनल गेम्स के लिए झारखंड टीम में चयनित

पूर्वी सिंहभूम की चार महिला रग्बी खिलाड़ी खेलो इंडिया जोनल गेम्स के लिए झारखंड टीम में चयनित

पूर्वी सिंहभूम : पूर्वी सिंहभूम जिले के लिए गौरव का विषय है कि जिला महिला रग्बी टीम की चार खिलाड़ी खेलो इंडिया जोनल रग्बी चैंपियनशिप के लिए झारखंड रग्बी टीम में चयनित हुई हैं। झारखंड रग्बी फुटबॉल द्वारा 23 नवंबर को गोड्डा जिले में आयोजित ट्रायल सेलेक्शन में इन खिलाड़ियों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए अपनी जगह सुनिश्चित की। यह उपलब्धि जिले के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर मानी जा रही है।

चयनित खिलाड़ियों के नाम :

रोशन सरदार – अंडर–15 टीम

प्रिया हांसदा – अंडर–18 टीम

प्रियंका सरदार – सीनियर टीम

रिंकी नायक – सीनियर टीम


सूत्रों के अनुसार, झारखंड रग्बी टीम के साथ सभी खिलाड़ी आज रात 8 बजे देवघर रेलवे स्टेशन से गुवाहाटी के लिए रवाना होंगी। 6–7 दिसंबर को इंदिरा गांधी एथलेटिक स्टेडियम, गुवाहाटी, असम में आयोजित होने वाली खेलो इंडिया जोनल रग्बी चैंपियनशिप में वे झारखंड का प्रतिनिधित्व करेंगी।

इस अवसर पर पूर्वी सिंहभूम जिला रग्बी फुटबॉल संघ के अध्यक्ष जेनाराम बोदरा, कोच जादुमुनि हेम्ब्रोम, कोच करिया मार्डी, कॉर्डिनेटर राजाराम सरदार एवं संघ के अन्य पदाधिकारियों ने चयनित खिलाड़ियों कोहार्दिक बधाई एवं सफल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।

मैट्रिक परीक्षा 2025 के परीक्षा केंद्रों को केवल जिला मुख्यालय में सीमित करने के निर्णय पर कड़ा विरोध:- धी रामहरि पेरियार

मैट्रिक परीक्षा 2025 के परीक्षा केंद्रों को केवल जिला मुख्यालय में सीमित करने के निर्णय पर कड़ा विरोध:- धी रामहरि पेरियार

चाईबासा : एंटी करप्शन ऑफ इंडिया के झारखंड प्रदेश अध्यक्ष धी. रामहरि पेरियार ने  गुरुवार को पश्चिम सिंहभूम के उपायुक्त चंदन कुमार को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपकर झारखंड अधिविद्यालय परिषद् द्वारा मैट्रिक बोर्ड परीक्षा–2025 के परीक्षा केंद्रों को केवल जिला मुख्यालयों में सीमित करने के फैसले का कड़ा विरोध दर्ज कराया।
     धी. पेरियार ने कहा कि यह निर्णय न केवल अव्यावहारिक, बल्कि प्रत्यक्ष रूप से ग्रामीण छात्र–छात्राओं के भविष्य पर हमला है। प्रदेश के लाखों गरीब, पहाड़ी, दूरदराज और वन क्षेत्र के छात्रों के सामने यह निर्णय भारी संकट खड़ा कर देगा।

धी.पेरियार द्वारा बताए गए प्रमुख तथ्य और आपत्तियाँ :-

1. दशकों की सफल प्रणाली को तोड़ने का औचित्य समझ से परे
संयुक्त बिहार काल से लेकर झारखंड गठन तक परीक्षा केंद्र हमेशा स्थानीय स्तर पर ही रहते आए हैं और परीक्षा शांति व सुव्यवस्था से होती रही है। ऐसे सफल मॉडल को अचानक ध्वस्त करना प्रशासनिक विवेक की जगह छात्रों पर बोझ डालने जैसा है।

2. सुरक्षा का तर्क भ्रामक, सुविधाएँ गाँवों तक उपलब्ध
आज ग्रामीण क्षेत्रों में बैंक शाखाएँ, थाना चौकियाँ, सुरक्षित स्ट्रॉन्ग रूम, और पर्याप्त पुलिस बल—सब मौजूद हैं। प्रश्नपत्र सुरक्षा का हवाला देकर केवल शहरों में केंद्र बनाना तथ्यहीन और गैर-जरूरी है।

3. शहरों पर अनावश्यक बोझ—ग्रामीण छात्रों के लिए मानसिक व आर्थिक संकट
शहर पहले ही जाम, आवास की कमी और भीड़भाड़ से जूझ रहे हैं। लाखों ग्रामीण छात्रों को अचानक शहर भेजना महँगा किराया, अस्थायी आवास और असुरक्षित माहौल में रहने की मजबूरी पैदा करेगा—यह छात्र हित नहीं, शोषण है।

4. गरीब परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक मार
झारखंड में अधिकांश परिवार खेती, दिहाड़ी मजदूरी और मौसमी आय पर निर्भर हैं। अपने बच्चे को शहर भेजना बहुतों के लिए असंभव है। परीक्षा देना अधिकार है—उसे प्राप्त करने का रास्ता कठिन बनाना अन्याय है।

5. यातायात व्यवस्था चरमराएगी
शहरों का टेंपो/टोटो आधारित परिवहन वर्तमान लोड ही झेल नहीं पा रहा। लाखों छात्रों के एक साथ आने से यातायात व्यवस्था ठप हो सकती है, जिससे सुरक्षा और प्रबंधन दोनों प्रभावित होंगे। स्पष्ट माँग: निर्णय तुरंत वापस लिया जाए

धी पेरियार ने कहा यह निवेदन नहीं, छात्र–हित और न्याय–हित में स्पष्ट और दृढ़ माँग है कि परिषद् इस निर्णय पर तत्काल पुनर्विचार करे।
उन्होंने कहा कि परीक्षा केंद्रों को स्थानीय/प्रखंड स्तर पर रखना ही व्यावहारिक, सुरक्षित और छात्रहितकारी समाधान है, जिससे सभी तबके के विद्यार्थियों को समान अवसर मिल सके।
   यदि परिषद् इस अव्यावहारिक निर्णय पर अडिग रहती है, तो संगठन व्यापक जन–आंदोलन और कानूनी विकल्पों पर विचार करेगा, ताकि छात्रों का भविष्य सुरक्षित रह सके।

पश्चिमी सिंहभूम में राजस्व व भू-अर्जन कार्यों की समीक्षा बैठक—उपायुक्त ने लंबित मामलों के जल्द निष्पादन के दिए निर्देश

पश्चिमी सिंहभूम में राजस्व व भू-अर्जन कार्यों की समीक्षा बैठक—उपायुक्त ने लंबित मामलों के जल्द निष्पादन के दिए निर्देश

चाईबासा : ‌पश्चिमी सिंहभूम जिला समाहरणालय स्थित सभागार में मंगलवार को उपायुक्त-सह-जिला दंडाधिकारी चंदन कुमार की अध्यक्षता में राजस्व संग्रहण, गैर-विभागीय राजस्व, नीलाम पत्र वाद, भू-अर्जन और अन्य राजस्व कार्यों की समीक्षा बैठक आयोजित की गई।

बैठक में भू-लगान, दाखिल-खारिज, ऑनलाइन राजस्व न्यायालय, अंतरविभागीय भू-हस्तांतरण, जीएम लैंड सर्वे, सीमांकन, खासमहल लीज नवीकरण और परीशोधन झारभूमि शिकायत समेत विभिन्न मामलों की बिंदुवार समीक्षा की गई। उपायुक्त ने निर्देश दिया कि ऑनलाइन राजस्व न्यायालय में 5 साल से लंबित मामलों का जल्द से जल्द निष्पादन सुनिश्चित किया जाए। साथ ही भूमि सीमांकन के लंबित मामलों के निपटारे के लिए विशेष शिविर आयोजित किए जाएँ और राजस्व वसूली की रफ्तार बढ़ाई जाए।

गैर-विभागीय राजस्व संग्रहण की समीक्षा के दौरान बताया गया कि अब तक खनन विभाग से ₹214674.15 लाख, उत्पाद विभाग से ₹8786 लाख, राज्य कर कार्यालय से ₹28677 लाख, अवर निबंधन कार्यालय चाईबासा से ₹853 लाख, चक्रधरपुर से ₹354 लाख तथा परिवहन विभाग से लक्ष्य के विरुद्ध ₹2100 लाख का राजस्व प्राप्त हुआ है।

उपायुक्त ने चाईबासा एवं चक्रधरपुर नगर परिषद, माप-तौल विभाग, विद्युत आपूर्ति प्रमंडल, जिला मत्स्य कार्यालय और अन्य विभागों को इस वित्तीय वर्ष में निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप राजस्व संग्रहण पूरा करने का निर्देश दिया।

बैठक में भू-अर्जन से संबंधित मामलों और जिले में राष्ट्रीय राजमार्ग पर प्रस्तावित रेल ओवरब्रिज तथा पथ निर्माण विभाग द्वारा संचालित सड़क परियोजनाओं की भी विस्तृत समीक्षा की गई।