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पेसा नियमावली 2025 पर उठे सवाल, आदिवासी स्वशासन को लेकर चिंत

पेसा नियमावली 2025 पर उठे सवाल, आदिवासी स्वशासन को लेकर चिंत

चाईबासा : झारखंड निर्माण के 25 वर्षों बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अगुवाई वाली राज्य कैबिनेट द्वारा पेसा नियमावली 2025 को पारित किया जाना एक स्वागत योग्य कदम माना जा रहा है। हालांकि, इसे लेकर अभी बधाई देना जल्दबाजी होगी। यह देखना जरूरी है कि क्या इस नियमावली के माध्यम से पेसा कानून 1996 का मूल उद्देश्य—पारंपरिक ग्रामसभाओं को वास्तविक शासन शक्ति और अधिकार देना—पूरी तरह पूरा हो पा रहा है या नहीं।

आदिवासी संगठनों और बुद्धिजीवियों का कहना है कि यदि पेसा नियमावली 2025 के तहत फिर से पारंपरिक आदिवासी स्वशासन व्यवस्था पर पंचायत राज व्यवस्था थोपने का प्रयास किया गया, तो इसका कड़ा विरोध किया जाएगा। आरोप है कि झारखंड कैबिनेट ने संसदीय अधिनियम 1996 के अनुरूप नियमावली बनाने के बजाय झारखंड पंचायत राज अधिनियम 2001 की त्रि-स्तरीय पंचायत व्यवस्था को ही लागू कर दिया है।

गौरतलब है कि झारखंड उच्च न्यायालय ने आदिवासी बुद्धिजीवी मंच द्वारा दायर जनहित याचिका (WP(PIL) No. 1589/2021) में स्पष्ट कहा था कि पंचायत राज अधिनियम 2001 को संसदीय अधिनियम 1996 के अनुरूप नहीं माना जा सकता। इसके बावजूद राज्य सरकार द्वारा अनुसूचित क्षेत्रों के लिए बने संसदीय अधिनियम 1996 को नजरअंदाज कर नियमावली पारित करने पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान पेसा नियमावली 2025, संसदीय अधिनियम 1996 की धारा 3 और धारा 4(एम) के प्रावधानों के विपरीत है, जिनमें ग्रामसभा और पंचायतों को कुछ अपवादों के साथ कुल सात महत्वपूर्ण अधिकार दिए गए हैं। ऐसे में यह नियमावली आदिवासी स्वशासन की भावना को कमजोर करती प्रतीत हो रही है।

झारखंड की सेकोर टीम ने आंध्र प्रदेश में पेसा महोत्सव में हिस्सा लिया

झारखंड की सेकोर टीम ने आंध्र प्रदेश में पेसा महोत्सव में हिस्सा लिया

चाईबासा : 20 दिसंबर 2025 को झारखंड की सेकोर टीम आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम के लिए रवाना हुई। इस अवसर पर लेखक हिर्ला डोबरो बिरूली और टाटा स्टील फाउंडेशन के अधिकारी आनंद बोईपाई और बिरंग तियु ने खिलाड़ियों को विदाई दी।
पंचायत राज मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा आयोजित पेसा महोत्सव के अंतर्गत डेमो गेम में झारखंड की विशेष सेकोर टीम को आमंत्रित किया गया था। सभी खिलाड़ी सुरक्षित रूप से आंध्र प्रदेश पहुंच गए।
टीम के लिए चाईबासा से रांची तक यात्रा की सुविधा उपलब्ध कराई गई, जबकि रांची से आंध्र प्रदेश तक बस सेवा प्रदान की गई। महोत्सव के दौरान खिलाड़ियों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया।
डेमो खेल में जमशेद टाइगर (पूर्णिया), तंतनगर प्रखंड और मांझरी प्रखंड दिरीबासा से कोल्हान कुला—इन दोनों टीमों ने भाग लिया। आयोजन समिति ने दोनों टीमों को प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया।
इस अवसर पर बीरसिंह बोईपाई, मुकुरु बोईपाई, तुराम बोईपाई, सोमय बोईपाई, जराम कुंकल, गोपेश चंद्र कुंकल सहित अन्य खिलाड़ी उपस्थित रहे।

पश्चिमीसिंहभूम में कांग्रेस का संगठन सृजन अभियान जारी

पश्चिमीसिंहभूम में कांग्रेस का संगठन सृजन अभियान जारी

चाईबासा : जिला कांग्रेस कमिटी, प०सिंहभूम के तत्वावधान में संगठन सृजन अभियान के तहत बुधवार को कांग्रेस भवन, चाईबासा में बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता जिला अध्यक्ष रंजन बोयपाई ने की।
बैठक में मुख्य रूप से राष्ट्रीय सचिव सह प्रदेश सह-प्रभारी भूपेंद्र मरावी उपस्थित थे। उन्होंने कहा कि संगठन सृजन अभियान कांग्रेस को मजबूत करेगा और सभी पदाधिकारियों को अपने कर्तव्यों और जिम्मेदारियों का पालन लगन के साथ करना चाहिए। उन्होंने जिला, प्रखण्ड, मंडल, पंचायत, वार्ड और बूथ स्तर के पदाधिकारियों को मार्गदर्शन भी दिया।
भूपेंद्र मरावी ने यह भी बताया कि कांग्रेस का 140वां स्थापना दिवस 28 दिसंबर 2025 को पूरे देश में मनाया जाएगा। झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमिटी ने निर्णय लिया है कि इस अवसर पर सभी जिला, प्रखंड, मंडल, ग्राम पंचायत और वार्ड स्तर पर कांग्रेस का झंडा फहराया जाएगा।
कार्यकारी अध्यक्ष सह पूर्व मंत्री बंधु तिर्की ने कहा कि स्थापना दिवस संगठन की मजबूती और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा का प्रतीक है। पूर्व कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष डॉ. प्रदीप कुमार बलमुचू ने संगठन को अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाने पर जोर दिया और कहा कि राहुल गांधी द्वारा उठाए गए जन मुद्दों को संगठनात्मक रणनीति से सफल बनाना होगा।
जिला अध्यक्ष रंजन बोयपाई ने कहा कि जिला कमिटी भाजपा की केंद्र सरकार के खिलाफ लगातार आंदोलन कर रही है और संगठन में नए लोगों को जोड़ने का काम बड़े पैमाने पर हो रहा है।

बैठक का संचालन युथ इंटक प्रदेश सचिव सुरेश सावैयां ने किया और धन्यवाद ज्ञापन कांग्रेस जिला प्रवक्ता त्रिशानु राय ने दिया। बैठक में आरजीपीआरएस प्रदेश अध्यक्ष सुनीत शर्मा, प्रदेश सचिव अशरफुल होदा , ओबीसी विभाग प्रदेश महासचिव मायाधर बेहरा, पूर्व जिलाध्यक्ष सन्नी सिंकु, जिला उपाध्यक्ष राजेश शुक्ला, जिला महासचिव कैरा बिरुवा , अविनाश कोड़ाह , आरजीपीआरएस जिलाध्यक्ष रितेश तामसोय , मुखिया अतेन सुरीन, नगर अध्यक्ष मो.सलीम, प्रखंड अध्यक्ष दिकु सावैयां , ललित दोराईबुरु , सोनाराम कोड़ाह , विजय सिंह सामड , सुखलाल हेम्ब्रम , जादोराय मुंडरी , चंद्र भूषण बिरुवा , सिकुर गोप , शैलेश गोप , सकारी दोंगो , सुरेश चन्द्र सावैयां , नगर उपाध्यक्ष मो.ऐहसान , सुभाष राम तुरी , महासचिव नसीम अख्तर , वरीय कांग्रेसी राम सिंह सावैयां , मो.तस्लीम अंसारी , ललित कर्ण , हरि राव,जुम्बल सुंडी, पूर्ण चन्द्र कायम, विवेक विशाल प्रधान , शिवकर बोयपाई, जितेन्द्र गोप , बिजय सिंह सुम्बरुई,महेश प्रसाद साहू,संजय बिरुवा, गोपी चाम्पिया , विनीत लागुरी,विश्वनाथ बोबोंगा , सेलाय बांकिरा,विक्रमादित्य सुंडी , सुबदिया पुरती,आशीष बेहरा,अमर ज्योति गोंड, राजीव बोयपाई, सुरसेन टोपनो, रोहित बिरुली,नारंगा देवगम,राजू गागराई,प्रवीण लागुरी , बिरसा बारजो,भोलेनाथ बोदरा , यारमिया चेरोवा,सुशील दास आदि उपस्थित थे।

युवा कांग्रेस संगठनात्मक चुनाव: वीर सिंह बालमुचू सदर विधानसभा अध्यक्ष निर्वाचित

युवा कांग्रेस संगठनात्मक चुनाव: वीर सिंह बालमुचू सदर विधानसभा अध्यक्ष निर्वाचित

पश्चिमी सिंहभूम : युवा कांग्रेस के संगठनात्मक चुनाव में वीर सिंह बालमुचू को सदर विधानसभा अध्यक्ष चुना गया है। उनके निर्वाचन से संगठन में उत्साह का माहौल है।

वीर सिंह बालमुचू इससे पहले नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) के कोल्हान विश्वविद्यालय अध्यक्ष रह चुके हैं। छात्र राजनीति के दौरान उन्होंने छात्र हितों के साथ-साथ सामाजिक मुद्दों और अधिकारों की लड़ाई में सक्रिय भूमिका निभाई। वे कई सामाजिक संगठनों से भी जुड़े रहे हैं और जनसरोकारों से जुड़े विषयों पर लगातार सक्रिय रहे हैं।

छात्र राजनीति और सामाजिक आंदोलनों के माध्यम से वीर सिंह ने समाज में एक सक्रिय युवा नेता के रूप में पहचान बनाई है। उन्होंने दलित, पिछड़े और आदिवासी समुदायों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया और अन्याय के खिलाफ आवाज बुलंद की।

उनके सदर विधानसभा अध्यक्ष बनने से युवा कांग्रेस के संगठनात्मक ढांचे को मजबूती मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। पार्टी नेताओं का मानना है कि उनके नेतृत्व में युवा कांग्रेस संगठन को नई दिशा और मजबूती मिलेगी।

निर्वाचन के बाद पार्टी पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं और सामाजिक संगठनों ने वीर सिंह बालमुचू को बधाई और शुभकामनाएं दी हैं।

के.एस. कॉलेज, सरायकेला में राष्ट्रीय गणित दिवस का आयोजन

के.एस. कॉलेज, सरायकेला में राष्ट्रीय गणित दिवस का आयोजन

सरायकेला : के.एस. कॉलेज, सरायकेला में बुधवार को राष्ट्रीय गणित दिवस का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रभारी प्राचार्य एवं भौतिकी विभागाध्यक्ष डॉ. प्रकाश सरकार ने महान गणितज्ञ श्रीनिवास रामानुजन के चित्र पर दीप प्रज्वलन एवं माल्यार्पण कर कार्यक्रम का उद्घाटन किया।

अपने संबोधन में डॉ. सरकार ने छात्र-छात्राओं को संख्या सिद्धांत, कंटीन्यू फ्रैक्शन, अनंत श्रेणी तथा पाई के मान की गणना की नई विधियों की जानकारी दी। उन्होंने विद्यार्थियों से मेहनत और लगन के साथ पढ़ाई करने का आह्वान करते हुए कहा कि वे ही महाविद्यालय का भविष्य हैं और अगले रामानुजन बन सकते हैं।

गणित विभागाध्यक्ष डॉ. अर्जुन कुमार ने रामानुजन के जीवन से प्रेरणा लेकर प्रतिभा निखारने की बात कही। आईटी विभागाध्यक्ष रवि शंकर झा ने रामानुजन के कार्यों और योगदान पर प्रकाश डाला। इतिहास विभाग के सहायक प्राध्यापक मोहन साहू ने शून्य के महत्व और उसकी खोज पर विस्तार से जानकारी दी, जबकि वाणिज्य विभाग की सहायक प्राध्यापक विभा कुमार ने गणित और वाणिज्य के आपसी संबंधों पर चर्चा की।

इस अवसर पर आयोजित क्विज प्रतियोगिता में करुणा कुमारी महतो ने प्रथम, अमन पति ने द्वितीय और कुमारी प्रिंसी ने तृतीय स्थान प्राप्त किया, जिन्हें पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम के दौरान छात्र-छात्राओं ने रामानुजन के चित्र पर रंगोली बनाई तथा उनके जन्मदिवस के अवसर पर केक काटकर उत्सव मनाया। कार्यक्रम में महाविद्यालय परिवार के सभी सदस्यों की गरिमामयी उपस्थिति रही।

आयुर्वेदिक कॉलेज जगन्नाथपुर (बुकासाई) बना सिस्टम की सुस्ती और लापरवाही का प्रतीक:- धी रामहरि पेरियार

आयुर्वेदिक कॉलेज जगन्नाथपुर (बुकासाई) बना सिस्टम की सुस्ती और लापरवाही का प्रतीक:- धी रामहरि पेरियार

भवन तैयार, बजट खर्च… फिर भी कॉलेज बंद

जगन्नाथपुर : जगन्नाथपुर प्रखंड अंतर्गत बुकासाई में आयुर्वेदिक कॉलेज एवं अस्पताल के रूप में विकसित की जा रही महत्वाकांक्षी योजना कागजों में तो तेज रफ्तार से आगे बढ़ती दिखती है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट है। छात्रावास बनकर तैयार हैं, कॉलेज भवन खड़े हैं, सरकारी धन खर्च हो चुका है, इसके बावजूद आज तक कॉलेज का सुचारु संचालन शुरू नहीं हो पाया, जिससे स्थानीय जनता में भारी आक्रोश व्याप्त है। स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्षों से केवल उद्घाटन, निरीक्षण और आश्वासन का खेल चल रहा है। शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाओं के नाम पर जनता को सिर्फ सपने दिखाए गए हैं, जबकि वास्तविक लाभ शून्य है।


        पूर्व मुख्यमंत्री का क्षेत्र, फिर भी विकास ठप यह वही विधानसभा क्षेत्र है जहाँ से पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा और पूर्व सांसद गीता कोड़ा का पैतृक प्रखंड जुड़ा हुआ है। इसके बावजूद यदि क्षेत्र में इतनी महत्वपूर्ण शैक्षणिक और स्वास्थ्य परियोजना वर्षों तक ठप पड़ी है, तो यह साफ तौर पर शासन–प्रशासन की गंभीर विफलता को दर्शाता है।
       स्थानीय बुद्धिजीवियों का मानना है कि जब प्रभावशाली राजनीतिक पहचान के बावजूद योजनाएँ धरातल पर नहीं उतर पा रहीं, तो आम क्षेत्रों की स्थिति का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है।
योजना नहीं, परिणाम चाहिए
विशेषज्ञों का कहना है कि
सिर्फ योजना बना देना, शिलान्यास कर देना या औपचारिक निरीक्षण कर लेना विकास नहीं होता। विकास तब कहलाता है जब योजना तय समय-सीमा में पूरी हो, नियमित निगरानी हो और जनता को वास्तविक लाभ मिले।
     बुकासाई आयुर्वेदिक कॉलेज की वर्तमान स्थिति इस बात का उदाहरण बन चुकी है कि किस प्रकार योजनाओं को जानबूझकर लटकाकर लूट का बाजार खड़ा कर दिया जाता है।


निरीक्षण में भी खुली पोल
निरीक्षण के दौरान कॉलेज का सत्यापन एवं परीक्षण किया गया। निरीक्षण में यह स्पष्ट हुआ कि संसाधन उपलब्ध हैं, भवन पूरी तरह तैयार हैं, फिर भी न पढ़ाई शुरू है और न ही अस्पताल की कोई सेवा। यह स्थिति या तो घोर प्रशासनिक लापरवाही की ओर इशारा करती है, या फिर यह संदेह को जन्म देती है कि कहीं भ्रष्टाचार के कारण तो इस योजना को ठंडे बस्ते में नहीं डाला गया।
      जवाबदेही तय करने की मांग
इस मामले को लेकर एंटी करप्शन ऑफ इंडिया, झारखंड प्रदेश अध्यक्ष धी रामहरि पेरियार ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि इस सिस्टम को सुधारना केवल जरूरत नहीं, हमारा कर्तव्य है। अब सवालों से कोई नहीं बच सकता।


उन्होंने स्पष्ट रूप से सवाल उठाए
कॉलेज संचालन में देरी के लिए ज़िम्मेदार कौन है? तय समय-सीमा का उल्लंघन क्यों किया गया?
आयुर्वेदिक कॉलेज और अस्पताल आम जनता के लिए कब खोले जाएंगे? जनता को आश्वासन नहीं, कार्रवाई चाहिए, स्थानीय लोगों का कहना है कि अब वे झूठे आश्वासनों से थक चुके हैं। यदि शीघ्र ही कॉलेज और अस्पताल का संचालन शुरू नहीं हुआ, तो यह मुद्दा व्यापक स्तर पर उठाया जाएगा।
   अंत में एक ही सवाल गूंज रहा है,
विकास आखिर कब कागजों से निकलकर जमीन पर आएगा?
क्योंकि विकास कोई एहसान नहीं, जनता का अधिकार है।

युवा कांग्रेस सांगठनिक चुनाव परिणाम घोषित, प्रीतम बांकिरा पुनः  पश्चिमी सिंहभूम के जिलाध्यक्ष बने

युवा कांग्रेस सांगठनिक चुनाव परिणाम घोषित, प्रीतम बांकिरा पुनः  पश्चिमी सिंहभूम के जिलाध्यक्ष बने

पश्चिमी सिंहभूम : युवा कांग्रेस के सांगठनिक चुनाव के परिणाम घोषित कर दिए गए हैं। यह चुनाव प्रखंड अध्यक्ष, विधानसभा अध्यक्ष, जिला महासचिव, जिलाध्यक्ष, प्रदेश महासचिव और प्रदेश अध्यक्ष पदों के लिए आयोजित किया गया था। 18 से 35 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं ने सदस्यता लेकर मतदान में भाग लिया। मतदान की प्रक्रिया लगभग एक महीने तक चली।
चुनाव परिणामों के अनुसार प्रीतम बांकिरा को दूसरी बार पश्चिमी सिंहभूम जिला युवा कांग्रेस का अध्यक्ष निर्वाचित किया गया है। उनके पुनः जिलाध्यक्ष बनने पर जिले के युवा कार्यकर्ताओं में उत्साह और खुशी देखी जा रही है।
प्रीतम बांकिरा छात्र हितों और जिले की जनसमस्याओं को लेकर लगातार सक्रिय रहे हैं। उनके कार्यकाल में युवा कांग्रेस संगठन का विस्तार जिला से लेकर पंचायत स्तर तक किया गया है।
पुनः निर्वाचित होने के बाद प्रीतम बांकिरा ने कहा कि संगठन को जमीनी स्तर पर और अधिक मजबूत करना उनकी प्राथमिकता होगी। उन्होंने बताया कि ऐसे युवाओं को संगठन से जोड़ा जाएगा जिनकी कोई राजनीतिक पृष्ठभूमि नहीं है, लेकिन वे राजनीति के माध्यम से समाज सेवा करना चाहते हैं। शिक्षित और ऊर्जावान युवाओं की भागीदारी से आम जनता को सीधा लाभ मिलेगा।
प्रीतम बांकिरा के जिलाध्यक्ष बनने पर जगन्नाथपुर के विधायक सोनाराम सिंकु, जिला पर्यवेक्षक डॉ. प्रदीप बालमूचू, जिला कांग्रेस अध्यक्ष रंजन बोयपाई सहित कई कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने उन्हें बधाई दी।

किरिबुरु में एंटी क्राइम चेकिंग के दौरान चोरी की बाइक बरामद, चालक गिरफ्तार

किरिबुरु में एंटी क्राइम चेकिंग के दौरान चोरी की बाइक बरामद, चालक गिरफ्तार

गुवा : किरीबुरु थाना पुलिस ने एंटी क्राइम चेकिंग अभियान के दौरान एक चोरी की बाइक बरामद की है और बाइक चला रहे दारा सिंह बगवार को गिरफ्तार किया है। बरामद बाइक के संबंध में सदर थाना में पहले से चोरी का मामला दर्ज है। गिरफ्तार आरोपी दारा सिंह बगवार किरीबुरु का निवासी है। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि चोरी और अन्य आपराधिक गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए एंटी क्राइम चेकिंग अभियान आगे भी जारी रहेगा। साथ ही आम लोगों से अपील की गई है कि किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें।

मनरेगा रद्द करना गरीब मजदूरों के खिलाफ साजिश : बुधराम लागुरी

मनरेगा रद्द करना गरीब मजदूरों के खिलाफ साजिश : बुधराम लागुरी

चाईबासा : झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के जिला प्रवक्ता बुधराम लागुरी ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि मनरेगा को रद्द करना भाजपा की गरीब और मजदूर विरोधी मानसिकता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि मनरेगा ग्रामीण मजदूरों के लिए केवल एक योजना नहीं, बल्कि उनकी आजीविका का सुरक्षा कवच है, जिसे केंद्र की भाजपा सरकार साजिश के तहत समाप्त करने का प्रयास कर रही है।
श्री लागुरी ने बताया कि मनरेगा और प्रस्तावित “वीबी-जी रामजी बिल 2025” में बड़ा अंतर है। यह बिल संसद के शीतकालीन सत्र में राज्यों से बिना परामर्श और व्यापक चर्चा के जल्दबाजी में पारित किया गया, जिससे ग्रामीण गरीबों के रोजगार के संवैधानिक अधिकार कमजोर होंगे।
उन्होंने कहा कि मनरेगा का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में प्रत्येक परिवार को हर साल कम से कम 100 दिनों का गारंटीकृत रोजगार देकर गरीबी कम करना, टिकाऊ परिसंपत्तियों का निर्माण करना और महिलाओं तथा एससी/एसटी वर्गों को सामाजिक रूप से सशक्त बनाना है।
बुधराम लागुरी ने घोषणा की कि 27 दिसंबर को दिन के 11 बजे भाजपा सरकार के खिलाफ पुराना डीसी कार्यालय, चाईबासा में जोरदार विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। इस कार्यक्रम में झामुमो पश्चिमी सिंहभूम जिला के सभी जिला व वर्ग संगठन, प्रखंड, नगर समितियों के सदस्य, पदाधिकारी और केंद्रीय सदस्य शामिल होंगे।
उन्होंने कहा कि मनरेगा ग्रामीणों को काम, सम्मान और आर्थिक सुरक्षा देता है, जबकि नया बिल मजदूरों की सौदेबाजी की ताकत छीनने का प्रयास है।

पेसा नियमावली 2025 एक स्वागतयोग्य कदम या पारंपरिक स्वशासन पर नया हमला?

पेसा नियमावली 2025 एक स्वागतयोग्य कदम या पारंपरिक स्वशासन पर नया हमला?

रांची : झारखंड राज्य के गठन को 25 वर्ष पूरे होने पर “अबुआ सरकार” झामुमो नेतृत्व वाली हेमंत सोरेन द्वारा 23 दिसंबर 2025 को कैबिनेट में पंचायती राज (अनुसूचित क्षेत्रों में विस्तार) झारखंड नियमावली, 2025 को मंजूरी देना निश्चित रुप से एक महत्वपूर्ण घटना है। यह पेसा अधिनियम 1996 की राज्य स्तर पर नियमावली बनाने की लंबी प्रतीक्षा का अंत प्रतीत होता है। केंद्र सरकार द्वारा 1996 में पारित पेसा कानून का मूल उद्देश्य अनुसूचित क्षेत्रों में आदिवासी समुदायों की पारंपरिक ग्राम सभाओं को शासन की वास्तविक शक्ति प्रदान करना था – जल, जंगल,जमीन और खनिज संसाधनों पर नियंत्रण,स्थानीय विकास योजनाओं की मंजूरी और परंपरागत स्वशासन व्यवस्था की रक्षा।
यह कदम स्वागतयोग्य है क्योंकि इससे राज्य के 15 अनुसूचित जिलों में ग्राम सभाओं को खनन, भूमि अधिग्रहण,वन उत्पाद और स्थानीय योजनाओं पर निर्णायक अधिकार मिलने का रास्ता खुलता है। कैबिनेट की मंजूरी के बाद अधिसूचना जारी होने पर बालू घाटों की नीलामी जैसी रुकी हुई प्रशासनिक प्रक्रियाएं भी आगे बढ़ सकती हैं। झारखंड हाईकोर्ट की लगातार निगरानी और अवमानना याचिकाओं के दबाव में यह निर्णय आया है,जो दर्शाता है कि न्यायिक हस्तक्षेप ने सरकार को मजबूर किया है।
लेकिन बधाई देना जरुरी है मगर रुकिए ?
मेरी चिंता यह है कि क्या यह नियमावली वाकई पेसा कानून की “आत्मा” को जीवंत करेगी, या फिर यह पारंपरिक आदिवासी स्वशासन पर सामान्य पंचायती राज व्यवस्था को थोपने का एक और प्रयास होगी ? पिछले अनुभव और उपलब्ध जानकारी से यह संदेह गहराता है।
पेसा अधिनियम की मूल भावना भूरिया समिति की सिफारिशों पर आधारित थी, जो आदिवासियों की रुढ़िगत व्यवस्था को प्राथमिकता देती है। लेकिन कई राज्यों में पेसा नियमावलियां बनाते समय राज्य सरकारों ने इसे सामान्य पंचायती राज अधिनियमों के साथ मिलाकर कमजोर कर दिया है। झारखंड में भी 2023-2025 के ड्राफ्ट्स पर आदिवासी संगठनों और विशेषज्ञों ने यही आलोचना की है कि नियमावली में ग्राम सभा की शक्ति को ऊपरी पंचायत स्तरों (पंचायत समिति या जिला परिषद) से बांधने की कोशिश की गई है। इसमें उल्लेख है कि ड्राफ्ट में पारंपरिक प्रमुखों (जैसे मानकी-मुंडा) की भूमिका को सीमित रखा गया है,जबकि तीन-स्तरीय पंचायत व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है – जो पेसा की भावना के विपरीत है।
खुंटी,गुमला जैसे आदिवासी बहुल जिलों में पत्थलगड़ी आंदोलन जैसी घटनाएं इसी संदेह से उपजी हैं,जहाँ ग्राम सभाओं ने खुद को संविधान की पांचवीं अनुसूची के तहत स्वायत्त घोषित किया है। हाल के वर्षों में 30-40 गांवों ने राज्य सरकार की देरी से तंग आकर खुद पेसा लागू करने की घोषणा की है। यदि नई नियमावली में पारंपरिक ग्राम सभाओं की बजाय चुनावी पंचायतों को प्राथमिकता दी गई, तो यह आदिवासी अस्मिता पर एक और कुठाराघात  होगा। हम भी इस मंजूरी का स्वागत के साथ चेतावनी भी देते हैं कि यदि नियमावली में “आत्मा से छेड़छाड़” हुई तो विरोध होगा। इसलिए सतर्कता और संघर्ष जरुरी है।
यह नियमावली अभी केवल कैबिनेट से पारित हुई है। अधिसूचना और वास्तविक कार्यान्वयन बाकी है। आदिवासी संगठनों,बुद्धिजीवियों और नागरिक समाज को इसका बारीकी से अध्ययन करना चाहिए। यदि यह पारंपरिक स्वशासन को मजबूत करने की बजाय केंद्रीकृत नियंत्रण बढ़ाती है तो इसका पुरजोर विरोध करना है। पेसा सिर्फ एक कानून नही है बल्कि आदिवासी अधिकारों की रक्षा का संवैधानिक हथियार है। 25 वर्षों की प्रतीक्षा के बाद मिला यह कदम यदि आधा-अधूरा साबित हुआ तो यह झारखंड के आदिवासियों के साथ विश्वासघात होगा।
जय जोहार! जय आदिवासी! सतर्क रहें,संघर्ष जारी रखें।

लक्ष्मीनारायण मुंडा (रांची)