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आयुष चिकित्सा पद्धति अपनाने के लिए नुक्कड़ नाटक के माध्यम से लोगों को किया गया प्रेरित

आयुष चिकित्सा पद्धति अपनाने के लिए नुक्कड़ नाटक के माध्यम से लोगों को किया गया प्रेरित

सरायकेला | झारखंड सरकार के स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग के निर्देशानुसार सरायकेला-खरसावां जिला आयुष समिति के सौजन्य से राष्ट्रीय आयुष मिशन के अंतर्गत जिले के विभिन्न प्रखंडों में नुक्कड़ नाटक के माध्यम से लोगों को आयुष चिकित्सा पद्धति अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।

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इसी क्रम में सोमवार को सरस्वती शिशु मंदिर उच्च विद्यालय, सरायकेला के प्रांगण में नुक्कड़ नाटक का मंचन किया गया। इस अवसर पर जिला आयुष चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. पूनम कुमारी ने कहा कि क्रॉनिक बीमारियों को जड़ से खत्म करने की जो क्षमता आयुर्वेद में है, वह अन्य चिकित्सा पद्धतियों में कम देखने को मिलती है। उन्होंने कहा कि तत्काल राहत के लिए अंग्रेजी दवाओं का उपयोग किया जा सकता है, लेकिन लंबे समय तक स्वस्थ रहने के लिए आयुर्वेद, योग, होम्योपैथी और यूनानी चिकित्सा पद्धतियों को अपनाना आवश्यक है।

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उन्होंने उपस्थित शिक्षक एवं विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि युवाओं में राष्ट्र निर्माण की अपार शक्ति निहित होती है। युवा राष्ट्र के कर्णधार हैं और वे इस संदेश को घर-घर तक पहुंचाकर अधिक से अधिक लोगों को आयुष पद्धति अपनाने के लिए प्रेरित कर सकते हैं।

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जिला आयुष समिति द्वारा विभिन्न प्रखंडों में चलाए जा रहे स्वास्थ्य जांच शिविरों की जानकारी देते हुए लोगों से इसका लाभ उठाने की अपील भी की गई। सरायकेला प्रखंड के बड़बिल, कीता एवं मुकुंदपुर सहित अन्य गांवों में भी नुक्कड़ नाटक के माध्यम से आयुष चिकित्सा पद्धति के प्रति लोगों को जागरूक किया गया। साथ ही खान-पान में सावधानी बरतने तथा दैनिक दिनचर्या में नियमित योग और व्यायाम को शामिल करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया।