सरायकेला | जिला मुख्यालय सरायकेला में सरकारी नर्सरी नहीं होने के कारण आम लोगों को पौधे खरीदने के लिए दूसरे शहरों का रुख करना पड़ रहा है। पर्यावरण संरक्षण और हरित आवरण बढ़ाने के उद्देश्य से हर वर्ष विभिन्न स्तरों पर पौधारोपण अभियान चलाए जाते हैं, लेकिन जिला मुख्यालय में सरकारी नर्सरी के अभाव से इन प्रयासों की प्रभावशीलता प्रभावित हो रही है।

स्थानीय लोगों के अनुसार, कुछ वर्ष पहले सरायकेला में सरकारी नर्सरी संचालित होती थी, जहां फलदार, छायादार और सजावटी पौधे आसानी से उपलब्ध हो जाते थे। नर्सरी बंद होने के बाद अब लोगों को पौधों की खरीद के लिए अन्य शहरों पर निर्भर रहना पड़ता है। इसका असर न केवल आम नागरिकों पर पड़ रहा है, बल्कि स्कूलों, सामाजिक संगठनों और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े लोगों को भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जिला मुख्यालय में सरकारी नर्सरी नहीं होने से पौधारोपण अभियानों को भी अपेक्षित गति नहीं मिल पा रही है। उनका मानना है कि यदि वन विभाग द्वारा पुनः सरकारी नर्सरी शुरू की जाए या नई नर्सरी स्थापित की जाए, तो स्थानीय स्तर पर गुणवत्तापूर्ण पौधों की उपलब्धता सुनिश्चित हो सकेगी और हरियाली बढ़ाने के प्रयासों को भी मजबूती मिलेगी।

नागरिकों ने जिला प्रशासन और वन विभाग से मांग की है कि सरायकेला मुख्यालय में जल्द से जल्द सरकारी नर्सरी की स्थापना अथवा पूर्व की नर्सरी का पुनः संचालन सुनिश्चित किया जाए। उनका कहना है कि इससे लोगों को सुलभ दरों पर पौधे उपलब्ध होंगे और पर्यावरण संरक्षण तथा पौधारोपण अभियान को व्यापक जनसहभागिता के साथ सफल बनाया जा सकेगा।


