सरायकेला | सरायकेला स्थित सरस्वती शिशु मंदिर उच्च विद्यालय में नव-प्रवेशित विद्यार्थियों के अभिभावकों की एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत विधिवत् वंदना के साथ हुई, जिससे पूरे वातावरण में सकारात्मकता और सांस्कृतिक भाव का संचार हुआ।

बैठक का मुख्य उद्देश्य अभिभावकों को विद्यालय की शिक्षण पद्धति, अनुशासन व्यवस्था, सांस्कृतिक परिवेश तथा विद्यार्थियों के समग्र विकास की अवधारणा से अवगत कराना था। कार्यक्रम का संचालन विद्यालय की आशा दीदी द्वारा किया गया, जिन्होंने बैठक की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए इसके उद्देश्य एवं महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला।

विद्यालय के उप-प्रधानाचार्य तुषार कांत पति ने विद्या भारती की शिक्षा प्रणाली पर चर्चा करते हुए बताया कि यहां शिक्षा केवल पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों के शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक और आध्यात्मिक विकास पर समान रूप से बल दिया जाता है। उन्होंने अभिभावकों से विद्यालय के साथ निरंतर संवाद बनाए रखने का आग्रह किया।

कार्यक्रम के दौरान आरती दीदी ने शिशु वाटिका की अवधारणा और उसके बारह आयामों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि खेल, गीत, भाषा, संस्कार एवं सृजनात्मक गतिविधियों के माध्यम से बच्चों का संतुलित विकास किया जाता है। साथ ही, उन्होंने स्वर्णप्राशन के महत्व पर भी प्रकाश डाला, जो बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता और स्मरण शक्ति को बढ़ाने में सहायक है।
विद्यालय के कोषाध्यक्ष प्रसाद महतो ने विद्यालय की पारदर्शी व्यवस्था और सहयोगात्मक वातावरण की जानकारी दी। वहीं, वरिष्ठ आचार्य रंजन आचार्य ने विद्यालय की गौरवशाली परंपरा एवं संस्कारमूलक शिक्षा प्रणाली पर अपने विचार साझा किए।
कार्यक्रम के अंत में रोज़ दीदी द्वारा धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया गया तथा सौरव आचार्य के नेतृत्व में वंदे मातरम् के सामूहिक गान के साथ बैठक का समापन हुआ।
इस दौरान अभिभावकों को विद्यालय की विभिन्न गतिविधियों, अनुशासन प्रणाली और सह-शैक्षिक कार्यक्रमों की जानकारी दी गई तथा उनकी जिज्ञासाओं का समाधान भी किया गया। अभिभावकों ने इस पहल की सराहना करते हुए भविष्य में भी ऐसे मार्गदर्शी कार्यक्रमों के आयोजन की अपेक्षा जताई।

