सरायकेला | सरायकेला प्रखंड के मुरुप गांव में रोजो संक्रांति के अवसर पर पारंपरिक छऊ नृत्य महोत्सव का भव्य आयोजन किया गया। हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी आयोजित महोत्सव में कलाकारों की मनमोहक प्रस्तुतियों ने दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया और सभी का दिल जीत लिया।

महोत्सव में मुरुप एवं घोड़ालांग छऊ नृत्य दल के चयनित कलाकारों ने अपनी उत्कृष्ट कला का प्रदर्शन किया। मुरुप छऊ नृत्य दल का नेतृत्व छऊ गुरु लालमोहन महतो ने किया, जबकि घोड़ालांग छऊ नृत्य दल का नेतृत्व जगदीश महतो ने संभाला।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुरुप छऊ नृत्य दल द्वारा गणेश वंदना की प्रस्तुति से हुआ।

इसके पश्चात कलाकारों ने भगवान गणेश, भगवान शिव, मां दुर्गा सहित विभिन्न पौराणिक पात्रों के साथ-साथ बाघ, भालू, हिरण, हाथी और घोड़े जैसे पशु-पक्षियों के आकर्षक मुखौटे धारण कर पारंपरिक छऊ नृत्य प्रस्तुत किया। ढोल-नगाड़ों की गूंज और कलाकारों की भावपूर्ण प्रस्तुतियों ने पूरे वातावरण को भक्तिमय एवं उत्साहपूर्ण बना दिया।

महोत्सव का समापन घोड़ालांग छऊ नृत्य दल द्वारा प्रस्तुत प्रसिद्ध ‘गयासुर पाषाण’ नृत्य से हुआ, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा।

छऊ नृत्य महोत्सव का आनंद लेने के लिए मुरुप समेत आसपास के दर्जनों गांवों से बड़ी संख्या में ग्रामीण, कला प्रेमी एवं दर्शक पहुंचे। रातभर चले इस सांस्कृतिक आयोजन में लोगों ने सरायकेला की समृद्ध छऊ परंपरा और लोक संस्कृति का भरपूर आनंद उठाया।

इस अवसर पर छऊ गुरु लालमोहन महतो, ग्राम प्रधान जीतमोहन महतो, मणी प्रधान, लखी प्रमाणिक, भैरब प्रधान, जगदीश प्रधान, फुलचंद प्रमाणिक, दिलमोहन महतो, दामोदर प्रमाणिक, दिनेश हो, जगत किशोर प्रधान, रमण प्रधान, हेमसागर प्रधान, साधु चरण महतो सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।


