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पल्स पोलियो अभियान एवं राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस की तैयारियों की उपायुक्त ने की समीक्षा

पल्स पोलियो अभियान एवं राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस की तैयारियों की उपायुक्त ने की समीक्षा

चाईबासा | पश्चिमी सिंहभूम जिला समाहरणालय स्थित सभागार में जिला उपायुक्त मनीष कुमार की अध्यक्षता में पल्स पोलियो अभियान एवं राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस कार्यक्रम की तैयारियों को लेकर समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में उप विकास आयुक्त उत्कर्ष कुमार, सिविल सर्जन डॉ. जुझार माझी सहित विभिन्न जिला एवं क्षेत्रीय स्तरीय पदाधिकारी भौतिक रूप से उपस्थित रहे, जबकि अन्य संबंधित अधिकारी वर्चुअल माध्यम से जुड़े।

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बैठक में जिले में आगामी पल्स पोलियो अभियान (28 जून) तथा राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस (15 जून) के सफल संचालन को लेकर विस्तृत समीक्षा की गई। इस दौरान दोनों स्वास्थ्य कार्यक्रमों के विभिन्न महत्वपूर्ण पहलुओं पर चर्चा करते हुए संबंधित विभागों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।
उपायुक्त ने कहा कि पल्स पोलियो अभियान और राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस दोनों ही कार्यक्रम बच्चों के स्वास्थ्य एवं सुरक्षित भविष्य से सीधे जुड़े हुए हैं। इसलिए इनके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए सभी विभागों के बीच बेहतर समन्वय, सुदृढ़ कार्ययोजना तथा जमीनी स्तर पर सतत निगरानी सुनिश्चित की जानी चाहिए।

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बैठक में पल्स पोलियो अभियान के तहत शून्य से पांच वर्ष आयु वर्ग के बच्चों को पोलियो रोधी खुराक पिलाने के लिए बूथवार तैयारी, माइक्रोप्लान, दुर्गम क्षेत्रों तक पहुंच, मोबाइल टीमों की तैनाती, स्वास्थ्य कर्मियों एवं आंगनबाड़ी सेविकाओं की सहभागिता तथा शत-प्रतिशत बच्चों को कवर करने की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की गई। उपायुक्त ने निर्देश दिया कि जिले के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के साथ-साथ सुदूरवर्ती एवं विशेष क्षेत्रों में रहने वाले प्रत्येक बच्चे तक अभियान की पहुंच सुनिश्चित की जाए, ताकि कोई भी बच्चा पोलियो की खुराक से वंचित न रहे।

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वहीं, राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस के तहत बच्चों एवं किशोरों को कृमि संक्रमण से सुरक्षित रखने के उद्देश्य से स्कूलों, आंगनबाड़ी केंद्रों एवं अन्य निर्धारित संस्थानों के माध्यम से दवा वितरण और सेवन की तैयारियों की भी समीक्षा की गई। बैठक में निर्धारित आयु वर्ग के बच्चों को सुरक्षित रूप से दवा उपलब्ध कराने, अनुपस्थित बच्चों के लिए मॉप-अप गतिविधियां संचालित करने तथा स्वास्थ्य विभाग, विद्यालय शिक्षा विभाग और समाज कल्याण विभाग के बीच बेहतर समन्वय बनाए रखने पर विशेष जोर दिया गया।

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समीक्षा के दौरान व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाने की आवश्यकता पर भी बल दिया गया। उपायुक्त ने निर्देश दिया कि अधिक से अधिक अभिभावकों तक कार्यक्रमों की जानकारी पहुंचाने और जनभागीदारी सुनिश्चित करने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में जनप्रतिनिधियों, सहिया, आंगनबाड़ी सेविकाओं, स्वास्थ्यकर्मियों एवं अन्य स्थानीय संसाधनों का प्रभावी उपयोग किया जाए।
बैठक के अंत में जिला प्रशासन ने आमजनों से अपील की कि वे अपने बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य और सुरक्षित भविष्य को ध्यान में रखते हुए इन स्वास्थ्य कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी निभाएं तथा निर्धारित तिथियों पर बच्चों को संबंधित स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ अवश्य दिलाएं।