नई दिल्ली | नीट पेपर लीक मामले को लेकर संसद से लेकर जंतर-मंतर तक विरोध प्रदर्शन जारी है। शुक्रवार को भी कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के नेतृत्व में विपक्षी सांसदों ने संसद भवन परिसर में धरना दिया और केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शन के दौरान विपक्ष ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग दोहराई और कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को स्वयं सदन में आकर नीट पेपर लीक, शिक्षा व्यवस्था की खामियों तथा जंतर-मंतर पर छात्रों के आंदोलन पर जवाब देना चाहिए।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार देर रात आश्वासन दिया था कि केंद्र सरकार पेपर लीक की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए कड़े कानून का प्रस्ताव केंद्रीय मंत्रिमंडल के समक्ष लाएगी और उसे संसद में पेश किया जाएगा। हालांकि विपक्ष का कहना है कि केवल वीडियो संदेश जारी करना पर्याप्त नहीं है। उनका आग्रह है कि सरकार इस मुद्दे पर संसद में विस्तृत चर्चा कराए और प्रधानमंत्री स्वयं सदन में अपना पक्ष रखें।

इस बीच कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने प्रधानमंत्री के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि युवाओं का आक्रोश केवल आश्वासनों से शांत नहीं होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री ने लंबे समय बाद इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया दी है, जबकि देश का युवा लगातार न्याय की मांग कर रहा है। खेड़ा ने कहा कि सरकार को ठोस और प्रभावी समाधान प्रस्तुत करना चाहिए।

उधर, सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने अपना अनशन समाप्त कर दिया है। उन्होंने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा, केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह तथा अन्य नेताओं की उपस्थिति में 25वें दिन अपना उपवास तोड़ा। वांगचुक ने कहा कि उन्होंने सरकार के आश्वासन के बाद अनशन समाप्त किया है। उनके अनुसार, 20 जुलाई की घटना के संबंध में किसी भी प्रदर्शनकारी के खिलाफ मुकदमा दर्ज नहीं किया जाएगा तथा पेपर लीक रोकने के लिए सख्त कानून लाया जाएगा।

हालांकि, आंदोलन से जुड़े अन्य संगठनों ने अपना विरोध जारी रखने का फैसला किया है। प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देते, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। इस बीच सरकार और आंदोलनकारियों के बीच बातचीत के लिए कॉन्स्टिट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया में बैठक प्रस्तावित की गई है।


