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कोल्हान विश्वविद्यालय में आपात बैठक, क्लस्टर प्रणाली और शिक्षण पुनर्गठन पर हुई विस्तृत चर्चा

कोल्हान विश्वविद्यालय में आपात बैठक, क्लस्टर प्रणाली और शिक्षण पुनर्गठन पर हुई विस्तृत चर्चा

पश्चिम सिंहभूम | चाईबासा स्थित कोल्हान विश्वविद्यालय में मंगलवार को माननीय कुलपति प्रो. (डॉ.) अंजिला गुप्ता की अध्यक्षता में शैक्षणिक परिषद एवं विभिन्न अंगीभूत महाविद्यालयों के प्राचार्यों/प्राचार्य-प्रभारियों की एक आपात बैठक आयोजित की गई। बैठक में शैक्षणिक परिषद के सदस्य, विभिन्न कॉलेजों के प्राचार्य, विश्वविद्यालय के विभागाध्यक्ष एवं पदाधिकारी उपस्थित रहे।

बैठक का मुख्य एजेंडा झारखंड सरकार के उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग द्वारा प्रस्तावित क्लस्टर प्रणाली (Cluster System) तथा कोल्हान विश्वविद्यालय एवं उसके अंगीभूत महाविद्यालयों में शिक्षण कार्यक्रमों के पुनर्गठन पर विस्तृत चर्चा करना था। इस दौरान कुलसचिव डॉ. रंजीत कुमार कर्ण ने क्लस्टर प्रणाली, विषय संयोजन, संकाय संरचना, सीट निर्धारण एवं प्रस्तावित पुनर्गठन से जुड़े विभिन्न बिंदुओं पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया। इसके बाद डीन एकेडमिक डॉ. संजय यादव ने विषयवार जानकारी साझा करते हुए प्रस्तुतीकरण के विभिन्न पहलुओं को विस्तार से स्पष्ट किया।

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बैठक में उच्च शिक्षा के स्वरूप निर्धारण, वित्तीय संसाधन, उपलब्ध शिक्षकों की संख्या, विषय एवं संकाय वर्गीकरण, प्रमुख विषयों में सीट निर्धारण, पूरक विषयों की उपलब्धता, आधारभूत संरचना, पुनर्संरचना तथा विषय संयोजन से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर गहन विचार-विमर्श किया गया।

विभिन्न महाविद्यालयों के लिए प्रस्तावित विषय संयोजनों एवं संशोधनों पर भी चर्चा हुई। टाटा कॉलेज, चाईबासा में मुंडारी के स्थान पर कुरमाली विषय शामिल करने, महिला कॉलेज, चाईबासा में स्थानीय भाषा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से समाजशास्त्र के स्थान पर ‘हो’ भाषा को शामिल करने की संभावना पर विचार किया गया। वहीं जमशेदपुर वर्कर्स कॉलेज में इतिहास, राजनीति विज्ञान, भूगोल, हिन्दी एवं अंग्रेज़ी विषयों को शामिल करने के प्रस्ताव पर सीटों के पुनर्निर्धारण एवं संकाय पुनर्विन्यास को लेकर चर्चा हुई।

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इसके अलावा घाटशिला कॉलेज में समाजशास्त्र के स्थान पर मनोविज्ञान, एस.बी. कॉलेज, चांडिल में मानवशास्त्र के स्थान पर संताली, बहरागोड़ा कॉलेज में मनोविज्ञान के स्थान पर मुंडारी तथा जेएलएन कॉलेज, चक्रधरपुर में समाजशास्त्र के स्थान पर कुरमाली विषय प्रस्तावित करने पर विचार किया गया। बहरागोड़ा एवं जेएलएन कॉलेज में ओड़िया भाषा को TRS से पृथक करने के प्रस्ताव पर भी चर्चा हुई। वहीं के.एस. कॉलेज, सरायकेला में गणित विषय की सीटों, कुरमाली विषय के लिए प्रस्तावित सीटों तथा संकाय पुनर्विन्यास के मुद्दों पर विचार-विमर्श किया गया।

बैठक में यह भी सामने आया कि अधिकांश महाविद्यालयों में वर्तमान विषय संयोजन को यथावत रखने का प्रस्ताव रखा गया। इस दौरान प्राचार्यों ने यह मुद्दा उठाया कि क्लस्टर प्रणाली के तहत कुछ स्थानीय, आदिवासी एवं क्षेत्रीय भाषाओं/विषयों को केवल कम नामांकन क्षमता (60 से कम) के आधार पर हटाने का प्रस्ताव किया जा रहा है। प्राचार्यों ने मांग की कि क्षेत्रीय पहचान, सांस्कृतिक विरासत एवं स्थानीय आवश्यकताओं से जुड़े ऐसे विषयों को महाविद्यालयों में बनाए रखा जाए। इस पर विश्वविद्यालय ने सरकार एवं संबंधित विभाग के समक्ष इन विषयों के संरक्षण के लिए अपना पक्ष रखने और आवश्यक अनुशंसा भेजने पर सहमति जताई।

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बैठक के दौरान प्राचार्या डॉ. वीणा प्रियदर्शी ने सुझाव दिया कि नामांकन प्रक्रिया के दौरान आरक्षित वर्ग के कई विद्यार्थी आवश्यक दस्तावेज समय पर प्रस्तुत नहीं कर पाते, जिससे बाद में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। इस पर कुलपति प्रो. (डॉ.) अंजिला गुप्ता ने निर्देश दिया कि चूंकि क्लस्टर प्रणाली विद्यार्थियों के लिए नई व्यवस्था होगी, इसलिए विश्वविद्यालय के अंतर्गत आने वाले सभी महाविद्यालयों की वेबसाइट पर इससे संबंधित स्पष्ट दिशा-निर्देश, विषय संयोजन एवं आवश्यक सूचनाएं उपलब्ध कराई जाएं। साथ ही इसकी जानकारी समाचार पत्रों के माध्यम से भी व्यापक स्तर पर प्रकाशित की जाए।

कुलपति ने सभी प्राचार्यों को निर्देश दिया कि नामांकन प्रक्रिया शुरू होने से पहले अपने-अपने महाविद्यालयों में हेल्पलाइन संचालित करें और विद्यार्थियों को किसी प्रकार की असुविधा न हो, यह सुनिश्चित करें। उन्होंने विशेष रूप से आरक्षित वर्ग के विद्यार्थियों को सलाह दी कि वे जाति, आवासीय एवं आय प्रमाण-पत्र पहले से तैयार रखें, ताकि नामांकन प्रक्रिया के दौरान किसी प्रकार की परेशानी न हो।

बैठक में उपस्थित सदस्यों ने नई क्लस्टर प्रणाली के शैक्षणिक, प्रशासनिक एवं छात्रहित से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर अपने सुझाव साझा किए। अंत में धन्यवाद ज्ञापन डॉ. राजेंद्र भारती द्वारा किया गया।