मझगांव | पश्चिमी सिंहभूम जिले के मझगांव प्रखंड अंतर्गत पांडुकी गांव स्थित हो समाज के पवित्र देशाउली (बोंगा-बुरु पूजा स्थल) में सोमवार को ग्राम दिउरी ने पारंपरिक रीति-रिवाज एवं धार्मिक विधि-विधान के अनुसार जाते-परचि (शुद्धिकरण) अनुष्ठान संपन्न कराया।

अनुष्ठान में गांव के मानकी, मुंडा, दिउरी, बुजुर्ग, युवा एवं बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए। इस दौरान सभी ने देशाउली की पवित्रता, सुरक्षा और संरक्षण के प्रति सामूहिक संकल्प लिया।
कार्यक्रम की विशेषता यह रही कि गांव के प्रत्येक परिवार ने देशाउली के नाम एक-एक बांस समर्पित किया।

इसके उपरांत ग्रामीणों ने सामूहिक श्रमदान करते हुए पूजा स्थल की बांस से घेराबंदी की, ताकि इस धार्मिक एवं सांस्कृतिक धरोहर का संरक्षण सुनिश्चित किया जा सके और आने वाली पीढ़ियां भी अपनी परंपराओं एवं आस्था से जुड़ी रह सकें।

ग्रामीणों ने कहा कि देशाउली केवल पूजा-अर्चना का स्थल नहीं, बल्कि हो समाज की आस्था, संस्कृति, परंपराओं और पूर्वजों की अमूल्य विरासत का प्रतीक है।

इसकी पवित्रता और संरक्षण बनाए रखना समाज के प्रत्येक व्यक्ति की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने इस प्रकार के सामुदायिक प्रयासों को अपनी सांस्कृतिक पहचान और विरासत को सहेजने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।


