चांडिल | कपाली ओपी क्षेत्र से जुड़े एक चर्चित मामले ने एक बार फिर तूल पकड़ लिया है। आदिवासी नेता दिनकर कच्छप की हालिया गिरफ्तारी के बाद तत्कालीन कपाली ओपी प्रभारी, एक एएसआई और महिला आरक्षी पर लगाए गए आरोपों तथा उससे जुड़े घटनाक्रम को लेकर क्षेत्र में नई बहस शुरू हो गई है। स्थानीय स्तर पर मामले की निष्पक्ष एवं पारदर्शी जांच की मांग भी तेज हो गई है।

जानकारी के अनुसार, वर्ष 2021 में कपाली ओपी क्षेत्र की रहने वाली तस्कीन खानम को घर से भगाकर ले जाने के मामले में कांदरबेरा पुनर्वास कॉलोनी की एक युवती का नाम सामने आया था। इसके बाद जून 2026 में तस्कीन खानम को दोबारा भगाने के आरोप में कपाली पुलिस ने संबंधित युवती से पूछताछ की थी।

इसी दौरान तत्कालीन कपाली ओपी प्रभारी, एएसआई एवं महिला आरक्षी पर पूछताछ के दौरान मारपीट और अभद्र व्यवहार करने के आरोप लगाए गए थे। बताया जाता है कि इस मामले में दिनकर कच्छप ने कथित पीड़िता का पक्ष उठाया था।

इधर, जमशेदपुर पुलिस ने दिनकर कच्छप को बिष्टुपुर थाना कांड संख्या 02/2025 एवं 09/2025 में दर्ज मामलों के तहत गिरफ्तार किया है। पुलिस अभिलेखों के अनुसार, उनके विरुद्ध पूर्व से भी कई मामले दर्ज बताए जाते हैं। उपलब्ध रिकॉर्ड में बिरसानगर, सीतारामडेरा, गालूडीह, एमजीएम तथा बिष्टुपुर थाना क्षेत्रों में विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज मामलों का उल्लेख है। इनमें सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने, कानून-व्यवस्था भंग करने, बलवा तथा मारपीट जैसे आरोप शामिल हैं।

दिनकर कच्छप की गिरफ्तारी के बाद कपाली प्रकरण में लगाए गए आरोपों की सत्यता, जांच प्रक्रिया तथा उस समय लिए गए प्रशासनिक निर्णयों को लेकर सवाल उठने लगे हैं। कई स्थानीय लोगों का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच होने पर ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी और जनता के बीच बनी शंकाओं का समाधान होगा।

वहीं, कुछ लोगों ने तत्कालीन कपाली पुलिस की कार्यप्रणाली का समर्थन करते हुए कहा कि पुलिस ने उपलब्ध तथ्यों और शिकायतों के आधार पर कार्रवाई की थी। उनका मानना है कि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले पूरे मामले की वस्तुनिष्ठ एवं निष्पक्ष जांच आवश्यक है।

फिलहाल यह मामला क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है और लोगों की निगाहें जांच एजेंसियों तथा आगे की कानूनी प्रक्रिया पर टिकी हुई हैं।

