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डॉ. विजय सिंह गागराई ने रांची में भाजपा की सदस्यता ग्रहण की

डॉ. विजय सिंह गागराई ने रांची में भाजपा की सदस्यता ग्रहण की

रांची : भारतीय जनता पार्टी (BJP) झारखंड प्रदेश कार्यालय में शुक्रवार को आयोजित कार्यक्रम के दौरान सामाजिक कार्यकर्ता एवं जनसेवक डॉ. विजय सिंह गागराई ने औपचारिक रूप से भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। इस अवसर पर BJP Jharkhand के प्रदेश अध्यक्ष माननीय श्री आदित्य साहू जी तथा झारखंड के प्रथम मुख्यमंत्री एवं वर्तमान नेता प्रतिपक्ष माननीय श्री बाबूलाल मरांडी जी विशेष रूप से उपस्थित रहे।

भाजपा की सदस्यता ग्रहण करते हुए डॉ. विजय सिंह गागराई ने कहा कि यह क्षण उनके जीवन का ऐतिहासिक, प्रेरणादायक एवं संकल्पपूर्ण क्षण है। उन्होंने कहा कि झारखंड को सुशासन, विकास और समृद्धि की दिशा में आगे बढ़ाने के उद्देश्य से उन्होंने भाजपा से जुड़ने का निर्णय लिया है।

डॉ. गागराई ने कहा,

“मेरा दृढ़ विश्वास है कि झारखंड का समग्र विकास ही सशक्त भारत की मजबूत नींव है। जनता की सेवा ही मेरा धर्म है और यही मेरा सर्वोच्च कर्तव्य रहा है।”

उन्होंने आगे कहा कि वे झारखंड की जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरने, अपने क्षेत्र चक्रधरपुर सहित पूरे राज्य के उज्ज्वल भविष्य के लिए निरंतर समर्पित भाव से कार्य करते रहेंगे।

इस अवसर पर पार्टी पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं ने उनका स्वागत किया और उनके भाजपा परिवार में शामिल होने पर शुभकामनाएँ दीं।

UGC 2026 नियमों को लेकर देशभर में विवाद, लक्ष्मीनारायण मुंडा ने जताई गहरी आपत्ति

UGC 2026 नियमों को लेकर देशभर में विवाद, लक्ष्मीनारायण मुंडा ने जताई गहरी आपत्ति

रांची : भारत की उच्च शिक्षा व्यवस्था में हाल ही में लागू किए गए UGC (University Grants Commission) के “Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations, 2026” को लेकर देशभर में बहस तेज हो गई है। सामाजिक कार्यकर्ता लक्ष्मीनारायण मुंडा ने इन नियमों पर गंभीर सवाल उठाते हुए इसे केवल शिक्षा सुधार नहीं, बल्कि भारत की सामाजिक एकता और संप्रभुता के लिए खतरा बताया है।
लक्ष्मीनारायण मुंडा का कहना है कि ये नियम सतही तौर पर जाति-आधारित भेदभाव रोकने का दावा करते हैं, लेकिन वास्तव में यह एकतरफा और विभाजनकारी नीति है। उन्होंने आरोप लगाया कि नियमों में भेदभाव की परिभाषा केवल SC, ST और OBC वर्गों तक सीमित रखी गई है, जबकि सामान्य वर्ग के छात्रों के लिए किसी प्रकार की सुरक्षा व्यवस्था नहीं की गई है। इससे कैंपस में असंतुलन और तनाव बढ़ने की आशंका है।
UGC 2026 के तहत उच्च शिक्षण संस्थानों में इक्विटी कमेटी, इक्विटी एंबेसडर और हेल्पलाइन गठित करने का प्रावधान किया गया है। हालांकि, आलोचकों का कहना है कि इससे शिक्षा परिसरों में शिकायतों की राजनीति को बढ़ावा मिलेगा और शैक्षणिक माहौल प्रभावित होगा।
गौरतलब है कि इन नियमों को लेकर देश के विभिन्न हिस्सों में विरोध प्रदर्शन हुए। कई छात्र संगठनों ने इसे “कैंपस में अराजकता फैलाने वाला” बताया। 29 जनवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट द्वारा इन नियमों पर रोक लगाए जाने के बावजूद, राजनीतिक और सामाजिक बहस थमी नहीं है। भाजपा से जुड़े कुछ नेताओं और कार्यकर्ताओं के इस्तीफे भी सामने आए हैं।
लक्ष्मीनारायण मुंडा ने केंद्र की भाजपा सरकार की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि ‘सबका साथ, सबका विकास’ का दावा करने वाली सरकार ने इस तरह के नियम क्यों लागू किए। उन्होंने 2019 से चली आ रही जनहित याचिकाओं का हवाला देते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की आड़ में सरकार ने ऐसे प्रावधानों को आगे बढ़ाया, जो समाज को बांटने का काम कर रहे हैं।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि UGC 2026 नियमों को National Education Policy (NEP) 2020, Free Trade Agreement (FTA) और World Economic Forum (WEF) से अलग नहीं देखा जा सकता। उनका दावा है कि भारत-यूरोपीय संघ FTA और विदेशी विश्वविद्यालयों को भारत में कैंपस खोलने की अनुमति से भारतीय शिक्षा व्यवस्था पर वैश्विक नियंत्रण बढ़ेगा।
WEF के साथ स्किल डेवलपमेंट को लेकर हुए समझौतों पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि इससे भारत को “ग्लोबल स्किल हब” बनाने के नाम पर युवाओं को सस्ते श्रम के रूप में तैयार किया जा रहा है। उनका आरोप है कि ‘इक्विटी’ के नाम पर छात्रों को आपस में बांटकर वैश्विक पूंजीवाद के हित साधे जा रहे हैं।
मुंडा ने कहा कि यह नीति न तो वास्तविक समानता लाएगी और न ही रोजगार या विकास। बल्कि इससे भारत की शिक्षा, संस्कृति और संप्रभुता कमजोर होगी। उन्होंने छात्रों, युवाओं और नागरिकों से जागरूक होने और सरकार से जवाब मांगने की अपील की।
उन्होंने सवाल उठाया कि क्या देश वैश्विक पूंजीवाद की गुलामी की ओर बढ़ रहा है और क्या भारत को एक “वैश्विक कॉलोनी” में बदला जा रहा है। उनके अनुसार अब समय आ गया है कि इस पूरी नीति और इसके पीछे के एजेंडे को सार्वजनिक बहस में लाया जाए।

यूजीसी के नए नियमों पर सुप्रीम कोर्ट की रोक, 2012 का प्रावधान ही रहेगा लागू

यूजीसी के नए नियमों पर सुप्रीम कोर्ट की रोक, 2012 का प्रावधान ही रहेगा लागू

नई दिल्ली : भेदभाव की परिभाषा से संबंधित यूजीसी के नए नियमों पर सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार (29 जनवरी) को रोक लगा दी. अभी 2012 वाला पूरा नियम ही लागू रहेगा. यूजीसी के नियमों के विरोध करने वाले संगठनों ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया है. इस बीच जाने माने शिक्षक विकास दिव्यकीर्ति ने नए नियमों पर प्रतिक्रिया दी और इसको विस्तार से समझाने की भी कोशिश की. अपनी बातचीत में उन्होंने ये भी कहा, “मैं जनरल केटेगरी से हूं. लेकिन मैं रिजर्वेशन का, सोशल जस्टिस का सपोर्टर हूं. लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि मैं रिजर्वेशन या सोशल जस्टिस के नाम पर आने वाली हर पॉलिसी के हर प्वाइंट का समर्थक हूं. अगर उसमें कहीं कोई दिक्कत है तो उसका विरोध करना चाहिए.” 

भरडीहा में खेलकूद प्रतियोगिता का समापन, पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास रहे मुख्य अतिथि

भरडीहा में खेलकूद प्रतियोगिता का समापन, पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास रहे मुख्य अतिथि

चक्रधरपुर : पश्चिमी सिंहभूम जिला के गोइलकेरा प्रखंड के भरडीहा गांव में प्रगति स्पोर्ट्स एसोसिएशन द्वारा आयोजित दो दिवसीय खेलकूद प्रतियोगिता का गुरुवार को समापन हुआ। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास थे। उन्होंने फीता काटकर प्रतियोगिता का उद्घाटन किया और विजेता प्रतिभागियों को पुरस्कार देकर प्रोत्साहित किया।
इस दौरान रघुवर दास ने कहा कि गांव-घर में खेलकूद आयोजनों से समाज मजबूत होता है और बच्चों व युवाओं को खेलों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेना चाहिए। उन्होंने भरडीहा में आयोजित चौपाल कार्यक्रम में भी भाग लिया और राज्य सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया। उन्होंने मंईयां सम्मान योजना में लाभुक महिलाओं की संख्या में कटौती का जिक्र किया और कहा कि सरकार की नीतियों का असर आगामी चुनावों में देखने को मिलेगा।
ग्रामीणों ने स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी की समस्या भी उठाई। उन्होंने बताया कि सरकारी डॉक्टर नियमित रूप से नहीं आते और गंभीर स्थिति में उन्हें करीब 20 किलोमीटर दूर गोइलकेरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जाना पड़ता है।
कार्यक्रम में पूर्व विधायक गुरुचरण नायक, भाजपा जिला उपाध्यक्ष किशोर डागा, जिला मंत्री सुशीला टोप्पो, आजसू केंद्रीय सदस्य बिरसा मुंडा, जिला परिषद सदस्य शिव रतन नायक, केदार नायक सहित कई समिति सदस्य और ग्रामीण उपस्थित थे।

चाईबासा में भाजपा का जिला सम्मेलन आयोजित

चाईबासा में भाजपा का जिला सम्मेलन आयोजित

पश्चिम सिंहभूम : चाईबासा स्थित बासा बासाटोंटो के बलिस ब्यनकेट हॉल में बुधवार को भारतीय जनता पार्टी, पश्चिम सिंहभूम जिला की ओर से “विकसित भारत–गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) VB-G RAM G” का जिला सम्मेलन आयोजित किया गया। सम्मेलन में भारत सरकार के पूर्व केंद्रीय जनजातीय मंत्री अर्जुन मुंडा मुख्य अतिथि एवं मुख्य वक्ता के रूप में शामिल हुए। उनके आगमन पर जिला अध्यक्ष गीता बालमुचू सहित पार्टी कार्यकर्ताओं ने ढोल-नगाड़ों और स्थानीय रीति-रिवाज के साथ स्वागत किया।
अपने संबोधन में अर्जुन मुंडा ने पश्चिम सिंहभूम जिले में पहली बार एक आदिवासी महिला के जिला अध्यक्ष बनने पर गीता बालमुचू को शुभकामनाएं दीं और सम्मेलन के सफल आयोजन के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि देश के सर्वोच्च पद राष्ट्रपति पर आदिवासी महिला द्रौपदी मुर्मू के आसीन होने से आदिवासी समाज का सम्मान बढ़ा है और महिला सशक्तिकरण को मजबूती मिली है।
उन्होंने कहा कि कोल्हान क्षेत्र में चाईबासा जिले का विशेष महत्व है और सम्मेलन में कार्यकर्ताओं की बड़ी उपस्थिति यह दर्शाती है कि लोग VB-G RAM G योजना के बारे में जानना चाहते हैं। उन्होंने कार्यकर्ताओं से गांव-गांव जाकर योजना की जानकारी देने और यह बताने की अपील की कि इसमें मजदूरी राशि की हेराफेरी की कोई संभावना नहीं है।
अर्जुन मुंडा ने राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि कोल्हान क्षेत्र में विल्किन्सन रूल और छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम को कमजोर करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने मानकी व्यवस्था, पेशा कानून और कोल्हान सुपरिटेंडेंट के पद पर स्थायी नियुक्ति नहीं होने को लेकर भी सरकार की आलोचना की।
सम्मेलन में अनूप कुमार सुल्तानिया, सतीश पूरी, मनीष राम, राकेश बबलू शर्मा, हर्ष रवानी, चंदन झा, हेमंत कुमार केशरी, दिलीप अग्रवाल, अनंत शयनम, शुशीला पूर्ति, रूपा सिंह दास, मृदुला निषाद, संगीता नायक, ब्रजमोहन चातोम्बा, बेबी मित्रा, उषा सिंकू, रानी तिरिया, शुशीला नायक, खुशबू हेम्ब्रम, नितम गागराई, सुकमती बिरुवा, सुदामा हाइबुरु, चंद्रमोहन गोप, चैतन्य गोप, धीरज सिंह, राय भूमिज, शंभू हाजरा, अजित सिंह, संजय अखाड़ा, धुनिया कुम्हार, सुकलाल कुंकल, अर्जुन सरदार, पीतांबर रावत, रामेश्वर सिंकू, सिद्धार्थ गोप, जोगेश्वर गोप सहित हजारों कार्यकर्ता उपस्थित थे।

उप विकास आयुक्त ने मंझगांव प्रखंड में विभिन्न विकास योजनाओं का किया निरीक्षण, योजनाओं की प्रगति को लेकर समीक्षा बैठक आयोजित

उप विकास आयुक्त ने मंझगांव प्रखंड में विभिन्न विकास योजनाओं का किया निरीक्षण, योजनाओं की प्रगति को लेकर समीक्षा बैठक आयोजित

मंझगांव : पश्चिमी सिंहभूम के उप विकास आयुक्त द्वारा मनरेगा अंतर्गत बिरसा हरित ग्राम योजना, बिरसा सिंचाई कूप संवर्धन मिशन के तहत कूप निर्माण, दीदी बाड़ी योजना एवं तालाब निर्माण कार्यों का कार्यस्थल निरीक्षण किया गया। साथ ही ग्रामीण विकास विभाग अंतर्गत निर्माणाधीन अबुआ आवास योजना एवं प्रधानमंत्री आवास योजना की प्रगति का निरीक्षण कर लाभुकों को कार्य में तेजी लाने के लिए प्रोत्साहित किया गया।
इसके अलावा डीएमएफटी मद से संचालित निर्माणाधीन विद्यालय भवन का भौतिक निरीक्षण कर संबंधित कनीय एवं सहायक अभियंताओं को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए। 15वें वित्त आयोग मद से संचालित दो उप स्वास्थ्य केंद्रों तथा पंचायत क्षेत्र में निर्माणाधीन 3.5 किलोमीटर पीसीसी सड़क का भी निरीक्षण किया गया, जिसमें लघु सिंचाई विभाग के कनीय एवं सहायक अभियंताओं को आवश्यक निर्देश दिए गए।
निरीक्षण के उपरांत उप विकास आयुक्त की अध्यक्षता में मंझगांव प्रखंड सभागार में मनरेगा एवं आवास योजनाओं की प्रगति को लेकर समीक्षात्मक बैठक आयोजित की गई। बैठक में प्रखंड विकास पदाधिकारी मंझगांव विजय रंजन तिर्की, अंचल अधिकारी विजय हेमराज खालको, प्रखंड प्रमुख, उप प्रमुख, जिला परिषद सदस्य, विधायक प्रतिनिधि, पंचायत समिति सदस्य, सभी पंचायतों के मुखिया, पंचायत सचिव, रोजगार सेवक सहित प्रखंड स्तर के कर्मी उपस्थित रहे।

क्षमता से अधिक सवारी ढोने वाले वाहनों पर परिवहन विभाग की सख्त कार्रवाई

क्षमता से अधिक सवारी ढोने वाले वाहनों पर परिवहन विभाग की सख्त कार्रवाई

चाईबासा : जिले में क्षमता से अधिक सवारी ढोने वाले वाहनों के खिलाफ जिला परिवहन पदाधिकारी गौतम कुमार द्वारा कार्रवाई की गई। उन्होंने बताया कि लगातार मिल रही शिकायतों तथा पूर्व में वाहन चालकों और वाहन स्वामियों को कई बार समझाने के बावजूद नियमों का उल्लंघन किया जा रहा था। इसी के मद्देनज़र आज ऐसे वाहनों पर दंडात्मक कार्रवाई करते हुए दर्जनों वाहनों से जुर्माना वसूला गया।
जिला परिवहन पदाधिकारी ने कहा कि विद्यार्थियों की सुरक्षा से जुड़ी लापरवाही किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इस तरह का अभियान परिवहन विभाग द्वारा लगातार चलाया जाएगा और जो भी दोषी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि बच्चे देश का भविष्य हैं और उन्हें सड़कों पर सुरक्षित रखना हम सभी का नैतिक कर्तव्य है। साथ ही उन्होंने आम लोगों से इस अभियान में सहयोग करने की अपील की।

यूजीसी गैजेट नोटिफिकेशन के समर्थन में कोल्हान विश्वविद्यालय के मुख्य गेट पर छात्र संगठन का सांकेतिक धरना।<br>

यूजीसी गैजेट नोटिफिकेशन के समर्थन में कोल्हान विश्वविद्यालय के मुख्य गेट पर छात्र संगठन का सांकेतिक धरना।

चाईबासा : झारखंड पुनरुत्थान अभियान स्टूडेंट्स विंग के जिला अध्यक्ष समीर हेंब्रम की अध्यक्षता में गुरुवार को कोल्हान विश्वविद्यालय के मुख्य गेट पर एक दिवसीय सांकेतिक धरना-प्रदर्शन आयोजित किया गया। यह धरना विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा जारी गैजेट नोटिफिकेशन के समर्थन में किया गया।

धरना-प्रदर्शन के बाद एक प्रतिनिधिमंडल ने कुलपति की अनुपस्थिति में विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक के माध्यम से यूजीसी के अध्यक्ष एवं झारखंड के राज्यपाल को मांग-पत्र सौंपा।

धरना को संबोधित करते हुए स्टूडेंट्स विंग के मेंटर बासिल हेंब्रम ने कहा कि यूजीसी के गैजेट नोटिफिकेशन का विरोध समाज में गहरी जड़ें जमाए भेदभावपूर्ण मानसिकता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि समानता और न्याय की बातें करने वाले वर्ग, अपने वर्चस्व पर सवाल उठते ही इसका विरोध करने लगते हैं। यूजीसी का यह नोटिफिकेशन इसी असमानता को उजागर करता है।

अभियान के केंद्रीय अध्यक्ष अरिल सिंकु ने कहा कि विश्वविद्यालय का अर्थ सभी के लिए समान अवसर होना चाहिए, लेकिन देश के कई विश्वविद्यालयों में व्याप्त भेदभाव के कारण एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग के छात्रों को गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ा है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर गठित संसदीय समिति की रिपोर्ट के आधार पर ही यूजीसी ने इक्विटी से जुड़ा यह नोटिफिकेशन जारी किया है।

उन्होंने बताया कि यह नोटिफिकेशन विशेष रूप से ओबीसी और दिव्यांग वर्ग को भेदभाव से बचाने के लिए है, लेकिन इसे लेकर हो रहा विरोध दुर्भाग्यपूर्ण है।

झारखंड पुनरुत्थान अभियान स्टूडेंट्स विंग ने यूजीसी के गैजेट नोटिफिकेशन का पूर्ण समर्थन करते हुए कहा कि यह धरना-प्रदर्शन इसी उद्देश्य से आयोजित किया गया।

धरना-प्रदर्शन को अभियान के केंद्रीय अध्यक्ष सन्नी सिंकु, केंद्रीय महासचिव अमृत माझी, यूथ इंटक के जिला अध्यक्ष सुरेश सवैया सहित कई सामाजिक कार्यकर्ताओं और छात्र नेताओं ने संबोधित किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।

समाहरणालय में शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक आयोजित

समाहरणालय में शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक आयोजित

सरायकेला : समाहरणालय सभाकक्ष में उपायुक्त नीतीश कुमार सिंह की अध्यक्षता में शिक्षा विभाग की विभिन्न योजनाओं की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में जिला शिक्षा पदाधिकारी, सभी प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी, प्रखंड कार्यक्रम पदाधिकारी, संकुल और प्रखंड संसाधन व्यक्ति सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
उपायुक्त ने विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, विद्यार्थियों की कक्षा उपस्थिति बढ़ाने, आधारभूत साक्षरता और संख्यात्मकता मिशन के लक्ष्य प्राप्त करने, तथा शिक्षकों की नियमित उपस्थिति और समयबद्ध अध्यापन पर जोर दिया। उन्होंने निर्देश दिया कि लगातार अनुपस्थित शिक्षकों और कर्मियों की सूची तैयार कर उनके खिलाफ निलंबन या बर्खास्तगी की कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
साथ ही, उन्होंने विद्यालयों में स्वास्थ्य जांच शिविर, कम उपस्थिति वाले विद्यालयों में अभिभावकों और ग्रामीणों को जागरूक करने, स्थानीय पदाधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और पंचायत प्रतिनिधियों से सहयोग लेने, और छूटी हुई किशोरियों को सवित्रीबाई फुले किशोरी समृद्धि योजना से जोड़ने के लिए आवेदन शीघ्र विभाग को भेजने के निर्देश दिए।

उच्च शिक्षण संस्थानों में भेदभाव रोकने की व्यवस्था पर विवाद, समता समिति को लेकर सियासी बहस तेज

उच्च शिक्षण संस्थानों में भेदभाव रोकने की व्यवस्था पर विवाद, समता समिति को लेकर सियासी बहस तेज

पिछले पाँच वर्षों में आईआईटी, आईआईएम और अन्य राष्ट्रीय महत्व के उच्च शिक्षण संस्थानों में लगभग 87 छात्रों की आत्महत्या के मामले सामने आए हैं। इनमें से अधिकांश छात्र अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, ओबीसी और अल्पसंख्यक समुदायों से थे।
दलित शोधार्थी रोहित वेमुला (हैदराबाद) और आदिवासी डॉक्टर पायल तड़वी (मुंबई) की आत्महत्या के मामले देशभर में चर्चा का विषय बने रहे। इन घटनाओं के बाद पीड़ित परिवारों ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया, जिस पर न्यायालय ने केंद्र सरकार को उच्च शिक्षण संस्थानों में जाति और सामाजिक आधार पर होने वाले भेदभाव को रोकने के लिए प्रभावी नियम बनाने के निर्देश दिए।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन में संसद की एक समिति गठित की गई, जिसके अध्यक्ष वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह और उपाध्यक्ष घनश्याम तिवाड़ी थे। समिति की सिफारिशों के आधार पर विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने इक्विटी (समता) समिति का गठन किया। इसका उद्देश्य दलित, आदिवासी, ओबीसी, अल्पसंख्यक, महिला और दिव्यांग छात्रों के साथ होने वाले भेदभाव की शिकायतों की सुनवाई और कार्रवाई सुनिश्चित करना था।
हालांकि, अब इसी व्यवस्था को कुछ समूहों द्वारा “सवर्ण विरोधी” बताकर इसका विरोध किया जा रहा है। सवाल यह उठ रहा है कि जब यह पूरी प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों, संसदीय समिति की सिफारिशों और UGC की वैधानिक व्यवस्था के तहत हुई, तो विरोध का दायरा केवल मौजूदा केंद्र सरकार तक ही क्यों सीमित है।
विशेषज्ञों का मानना है कि बहस का केंद्र राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप नहीं, बल्कि यह होना चाहिए कि क्या यह व्यवस्था वास्तव में उन छात्रों को सुरक्षा और न्याय दे पा रही है, जिनके लिए इसे लागू किया गया था।