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रांची राजभवन में ‘उरांव धर्म एवं प्रथाएं’ पुस्तक का भव्य लोकार्पण – राज्यपाल ने सराहा जनजातीय ज्ञान परंपराओं का संरक्षण

रांची राजभवन में ‘उरांव धर्म एवं प्रथाएं’ पुस्तक का भव्य लोकार्पण – राज्यपाल ने सराहा जनजातीय ज्ञान परंपराओं का संरक्षण

रांची : आज राजभवन में एक भव्य एवं गरिमामय समारोह में प्रसिद्ध मानवशास्त्री शरत चंद्र राय द्वारा लिखित तथा श्री राज रतन सहाय द्वारा हिंदी में अनुवादित पुस्तक ‘उरांव धर्म एवं प्रथाएं’ का औपचारिक लोकार्पण किया गया। समारोह की अध्यक्षता माननीय राज्यपाल श्री संतोष गंगवार ने की।

करीब सौ वर्ष पूर्व लिखी गई यह महत्वपूर्ण पुस्तक उरांव जनजाति की जीवन-पद्धति, धार्मिक आस्थाओं, सामाजिक संरचना और सांस्कृतिक परंपराओं पर आधारित एक विस्तृत एवं शोधसमृद्ध दस्तावेज मानी जाती है। इसके हिंदी रूपांतरण से शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों और सामान्य पाठकों के लिए जनजातीय समाज के अध्ययन का एक सुलभ स्रोत उपलब्ध हुआ है।

अपने संबोधन में राज्यपाल श्री संतोष गंगवार ने कहा कि यह पुस्तक केवल एक शोध-ग्रंथ नहीं, बल्कि भारत की समृद्ध जनजातीय विरासत का आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक परिचय है। उन्होंने अनुवाद की सहज भाषा और स्पष्ट प्रस्तुति की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह कृति मुख्यधारा के पाठकों को उरांव समाज की सोच, जीवन-दृष्टि और सांस्कृतिक धरोहर से परिचित कराती है। साथ ही उन्होंने चेताया कि पारंपरिक ज्ञान-व्यवस्था और सांस्कृतिक मूल्यों का संरक्षण आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है, और इस तरह के साहित्यिक प्रयास समाज के लिए अत्यंत महत्त्वपूर्ण हैं।

समारोह में उपस्थित पूर्व मुख्यमंत्री श्री अर्जुन मुंडा ने भी पुस्तक के लोकार्पण पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि जनजातीय संस्कृति और परंपराएँ किसी भी राज्य की पहचान व आत्मा होती हैं। अनुवाद कार्य को उन्होंने शब्दों का पुनर्लेखन नहीं, बल्कि भाव, संदर्भ और सांस्कृतिक संवेदनाओं के पुन:संप्रेषण की कला बताया, जो अत्यंत मूल्यवान है।

पुस्तक के अनुवादक श्री राज रतन सहाय ने इसे अपनी सेवा-भावना एवं जनजातीय समाज के प्रति समर्पण का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि इस कार्य के लिए स्वयं को नियति का चयनित मानते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि इससे पहले वे शरत चंद्र राय की दो अन्य महत्वपूर्ण पुस्तकों—‘आदिम मुंडा एवं उनका प्रदेश’ और ‘बिरहोर’—का भी सफलतापूर्वक हिंदी अनुवाद कर चुके हैं। उनका उद्देश्य है कि जनजातीय ज्ञान-परंपराएँ अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचे और शोध के नए आयाम खुलें।

कार्यक्रम में पूर्व मंत्री एवं विधायक श्री रामेश्वर उरांव, पूर्व मंत्री एवं जमशेदपुर पश्चिमी के विधायक श्री सरयू राय, पूर्व सांसद श्री सुदर्शन भगत, झारखंड राय विश्वविद्यालय की कुलपति श्रीमती सविता सेंगर, पूर्व कुलपति डॉ. सत्यनारायण मुंडा, डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी, सहित अनेक गणमान्य अतिथि, शिक्षाविद, शोधकर्ता, लेखक एवं विभिन्न जनजातीय समुदायों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

ईडी समन अवहेलना मामले में बड़ा मोड़ — हाईकोर्ट ने CM हेमंत सोरेन को दी गई राहत वापस ली, एमपी-एमएलए कोर्ट में सशरीर उपस्थिति अनिवार्य

ईडी समन अवहेलना मामले में बड़ा मोड़ — हाईकोर्ट ने CM हेमंत सोरेन को दी गई राहत वापस ली, एमपी-एमएलए कोर्ट में सशरीर उपस्थिति अनिवार्य

रांची : प्रवर्तन निदेशालय (ED) के समनों की अवहेलना मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने आज एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को दी गई अंतरिम राहत को निरस्त कर दिया। इस फैसले के बाद अब उन्हें एमपी-एमएलए कोर्ट में ट्रायल के दौरान सशरीर उपस्थित होना अनिवार्य होगा।

हाईकोर्ट ने 4 दिसंबर 2024 को अपने अंतरिम आदेश में मुख्यमंत्री की याचिका पर सुनवाई करते हुए एमपी-एमएलए कोर्ट में व्यक्तिगत उपस्थित से राहत दी थी। हालांकि, मौजूदा आदेश के बाद यह राहत खत्म हो गई है। इससे पहले निचली अदालत ने भी व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट देने से साफ इनकार कर दिया था, जिसके खिलाफ मुख्यमंत्री ने हाईकोर्ट की शरण ली थी।

मामले की पृष्ठभूमि

यह पूरा मामला ईडी द्वारा जारी किए गए समनों से जुड़ा है। लैंड स्कैम समेत कई संवेदनशील मामलों में पूछताछ के लिए ईडी ने पहली बार 14 अगस्त 2023 को हेमंत सोरेन को बुलाया था, लेकिन वे उपस्थित नहीं हुए। इसके बाद लगातार 10 बार समन जारी किए गए, मगर मुख्य मंत्री हर बार गैरहाज़िर रहे। अंततः 10वें समन के बाद उन्होंने पूछताछ के लिए सहमति दी।

इसके बाद ईडी की टीम सीएम हाउस पहुंची और दो दिनों की पूछताछ के बाद 31 जनवरी 2024 को सोरेन को गिरफ्तार कर लिया गया। उनके गिरफ्तार होते ही राजनीतिक घटनाक्रम तेजी से बदला। उसी शाम उन्होंने राजभवन जाकर मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया।
2 फरवरी 2024 को झामुमो विधायक चंपाई सोरेन ने नए मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली।

चक्रधरपुर में कांग्रेस की अहम बैठक संपन्न — दर्जनों युवाओं ने थामा कांग्रेस का दामन

चक्रधरपुर में कांग्रेस की अहम बैठक संपन्न — दर्जनों युवाओं ने थामा कांग्रेस का दामन


चक्रधरपुर : चक्रधरपुर स्थित स्वर्गीय विजय सिंह सोय के समाधि स्थल के निकट ULB पर्यवेक्षक एवं प्रदेश प्रतिनिधि सुश्री अनुप्रिया सोय की अध्यक्षता में कांग्रेस की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक की शुरुआत नव-नियुक्त जिला अध्यक्ष रंजन बोयपाई के स्वागत से हुई, जिसके बाद उपस्थित नेताओं और कार्यकर्ताओं ने पूर्व सांसद स्वर्गीय विजय सिंह सोय की समाधि पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। इसके उपरांत विधिवत कार्यक्रम की शुरुआत की गई।

बैठक में कांग्रेस विचारधारा से प्रभावित होकर शैखावत हुसैन के नेतृत्व में दर्जनों युवाओं ने पुष्पगुच्छ एवं माला पहनाकर कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की। इस अवसर पर जिला अध्यक्ष रंजन बोयपाई ने कहा कि देश में वर्तमान समय में दो विचारधाराओं के बीच संघर्ष स्पष्ट है। एक विचारधारा पूंजीवाद को बढ़ावा देकर किसानों, मजदूरों व गरीबों को हतोत्साहित कर रही है — इसी के तहत गलत कृषि कानून लाकर किसान हितों को नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया गया और 80 हजार से अधिक स्कूल बंद कर शिक्षा के अधिकार को कमजोर किया गया। दूसरी ओर, कांग्रेस की विचारधारा लोकतंत्र, स्वराज और सभी वर्गों की भागीदारी के साथ देश के विकास का मार्ग प्रशस्त करना चाहती है।

ULB पर्यवेक्षक सुश्री अनुप्रिया सोय ने अपने संबोधन में कहा कि कांग्रेस को मजबूत बनाने के लिए मूल्य आधारित संघर्ष आवश्यक है। उन्होंने कहा कि युवाओं को केवल चुनाव तक सीमित न रहकर कांग्रेस की वैचारिक यात्रा से जुड़ना होगा। इतिहास को समझते हुए संगठन में नई ऊर्जा का संचार करना आज की जरूरत है।

कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण करने वाले प्रमुख नाम :
साखवत हुसैन, एमडी हलीम, आसिफ, दानिश परवेज, अरबाज, अरमान, छोटू, सबदार, दानिश अंसारी, जिशान सहित कई युवाओं ने कांग्रेस का दामन थामा।

कार्यक्रम को संबोधित करने वाले प्रमुख नेता :
राजेश ठाकुर (नगर अध्यक्ष), विजय सिंह सामाड (प्रखंड अध्यक्ष), कमल राम (जिलाध्यक्ष SC मोर्चा), सुरेश सावैंया (प्रदेश सचिव, इंटक), पूनम होनहागा सावैंया, सीमा सामाड, राजेश शुक्ला (पर्यवेक्षक, बंदगांव), लक्ष्मण हांसदा (प्रदेश आमंत्रित सदस्य), पोंडेराम सामाड और विजय सुंबरुई समेत अन्य नेताओं ने कार्यक्रम को संबोधित किया।

उपस्थित गण :
शिवकर बोईपाई, अविनाश कोड़ा, आर्यन हांसदा, महेश साहू, सतीश चंद्र कोया, हरि राव, मुकेश मुखी, भोलेनाथ बोदरा, चंद्रशेखर सामड, नाज़िस, सुभाष सहित कई कार्यकर्ता मौजूद रहे।

कोल्हान विश्वविद्यालय में छठा दीक्षांत समारोह आज — तैयारियां पूरी, राज्यपाल होंगे मुख्य अतिथि

कोल्हान विश्वविद्यालय में छठा दीक्षांत समारोह आज — तैयारियां पूरी, राज्यपाल होंगे मुख्य अतिथि

चाईबासा : कोल्हान विश्वविद्यालय में , 26 नवंबर 2025 (बुधवार) को छठा दीक्षांत समारोह आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन ने सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं और समारोह अब पूरी तरह अंतिम रूप ले चुका है।

इस महत्वपूर्ण अवसर पर महामहिम राज्यपाल एवं विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति संतोष कुमार गंगवार मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। उनकी उपस्थिति में स्नातक, स्नातकोत्तर और शोधरत विद्यार्थियों को उपाधि और पदक प्रदान किए जाएंगे।

विश्वविद्यालय अधिकारियों ने बताया कि कार्यक्रम को गरिमापूर्ण और सुव्यवस्थित बनाने के लिए सुरक्षा व्यवस्था, मंच संचालन और अतिथि सत्कार से जुड़े सभी इंतजाम सुनिश्चित कर दिए गए हैं।

सारजोम युवा फाउंडेशन की बैठक — नशा मुक्त समाज के लिए लिया संकल्प

सारजोम युवा फाउंडेशन की बैठक — नशा मुक्त समाज के लिए लिया संकल्प

जमशेदपुर : सोमवार को सारजोम युवा फाउंडेशन की ओर से दुःखू टोला, करनडीह में एक आवश्यक बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता फाउंडेशन के अध्यक्ष सागर हेंब्रम ने की। बैठक का मुख्य विषय था — नशा मुक्त समाज का निर्माण।

बैठक में संगठन की महिलाओं ने नशे के बढ़ते प्रचलन पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि नशा एक सामाजिक बुराई है, जिसके कारण परिवार और समाज दोनों प्रभावित हो रहे हैं। खासकर युवाओं में नशे की लत बढ़ने से वे दिशा हीन हो रहे हैं और आये दिन अप्रिय घटनाएं सामने आ रही हैं।

अध्यक्ष सागर हेंब्रम ने कहा कि नशा मुक्त समाज बनाने के लिए जागरूकता फैलाना अत्यंत आवश्यक है। नशा एक अभिशाप है, जो सिर्फ व्यक्ति को नहीं बल्कि पूरे समाज को प्रभावित करता है। उन्होंने सभी सदस्यों से संकल्प लेने और समय-समय पर जागरूकता अभियान चलाने की अपील की।

बैठक के अंत में सभी सदस्यों ने नशा मुक्त समाज के निर्माण के लिए संकल्प लिया। बैठक को सफल बनाने में सरस्वती सुंडी, नीलम बिरुआ, फूलो सवैया और अन्य सदस्य उपस्थित रहे।

सारंडा के रेड़ा टोला में विकास की पोल—78 साल बाद भी पानी के लिए संघर्ष, महिलाओं ने सरकार से पूछा तीखा सवाल

सारंडा के रेड़ा टोला में विकास की पोल—78 साल बाद भी पानी के लिए संघर्ष, महिलाओं ने सरकार से पूछा तीखा सवाल

मनोहरपुर : जहां झारखंड अपने 25 वर्षों के सफर में तेज रफ्तार विकास का दावा करता है, वहीं सारंडा के समथा गांव के रेड़ा टोला की स्थिति इस दावे को सीधा चुनौती देती है। आज़ादी के 78 साल बाद भी यहां की तस्वीर गांव नहीं, बल्कि उपेक्षा और संघर्ष की कहानी कहती है।

पेयजल संकट — सबसे बड़ी चिंता
रेड़ा टोला में पेयजल की समस्या इतनी गंभीर है कि महिलाओं का दिन पानी की तलाश से शुरू होकर पानी पर ही समाप्त हो जाता है। बरसात में नाला उफान पर होता है, और कमर तक पानी पार करके पीने का पानी लाना पड़ता है। गर्मी में नाला सूख जाता है, तब महिलाएं नमी वाली जगहों पर चुवाँ (छोटे गड्ढे) बनाकर पानी छानकर पीने को मजबूर होती हैं।

एक महिला ने स्पष्ट शब्दों में कहा —
“घर में खाने से ज्यादा मुश्किल पानी लाना है। सरकार सुनती है, लेकिन काम नहीं करती।”

नेताओं के वादे बनाम ज़मीन की हकीकत
चुनाव के समय नेताओं के भाषणों में विकास की बरसात होती है, लेकिन रेड़ा टोला की महिलाओं के लिए पानी लाना आज भी संघर्ष का पर्याय है। हर चुनाव के बाद यहां सिर्फ वादे लौटते हैं, नतीजे नहीं।

अधूरी योजनाओं की लंबी सूची

हर घर जल योजना अभी तक पूरी नहीं

स्वास्थ्य केंद्र दूर और अनुपलब्ध

सड़कें उबड़-खाबड़ और खतरनाक

सरकारी सप्लाई व्यवस्था ठप


गांव की महिलाओं का सरकार से सीधा सवाल

क्या हमें साफ पानी के लिए और सौ साल इंतज़ार करना पड़ेगा?

क्या विकास सिर्फ शहरों तक सीमित है?

क्या हम सिर्फ वोट बैंक बनकर रह गए हैं?

25 साल के झारखंड का यही विकास मॉडल है?


झारखंड की पहचान भले ही जंगल, खनिज और समृद्ध संस्कृति से हो, लेकिन रेड़ा टोला जैसे गांव आज भी हाशिये पर हैं — भूले हुए नक्शों और अधूरे वादों के बीच फंसे हुए।

सरकार से जवाब मांगता है रेड़ा टोला
क्या विकास का अधिकार सबका है, या सिर्फ चुनिंदा इलाकों का?

झारखंड में एसआईआर को लेकर सियासी गर्मी तेज — चंपाई सोरेन ने घुसपैठ पर उठाए गंभीर सवाल

झारखंड में एसआईआर को लेकर सियासी गर्मी तेज — चंपाई सोरेन ने घुसपैठ पर उठाए गंभीर सवाल

सरायकेला : झारखंड में एसआईआर (Systematic Investigation of Registration) को लेकर सियासत तेज हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता चंपाई सोरेन ने सोशल मीडिया के माध्यम से बड़ा बयान देते हुए दावा किया कि कोलकाता से सटे हावड़ा जिले के कई इलाकों में 80% से अधिक बांग्लादेशी घुसपैठिए पाए जा रहे हैं। ऐसे में सीमावर्ती जिलों और ग्रामीण क्षेत्रों की वास्तविक स्थिति और भी गंभीर हो सकती है।

चंपाई सोरेन ने लिखा कि भारत का संविधान केवल भारतीय नागरिकों को मतदान का अधिकार देता है। चुनाव आयोग की इस पहल के बाद घुसपैठियों के सहारे सत्ता हासिल करना अब बेहद मुश्किल हो जाएगा। उन्होंने आगे कहा कि एसआईआर की प्रक्रिया शुरू होने पर पश्चिम बंगाल से करोड़ों और झारखंड से लाखों घुसपैठियों के नाम voter list से हटाए जा सकते हैं।

राज्य में बढ़ी राजनीतिक हलचल

झारखंड में एसआईआर को लेकर राजनीतिक तापमान तेजी से बढ़ रहा है। कांग्रेस और झामुमो इस प्रक्रिया पर लगातार सवाल उठा रहे हैं। वहीं राजद के नेता भी प्रतिदिन एसआईआर के खिलाफ आवाज बुलंद कर रहे हैं। इसके बावजूद निर्वाचन आयोग ने झारखंड में प्रारंभिक तैयारियां शुरू कर दी हैं।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि जैसे ही झारखंड में एसआईआर की प्रक्रिया औपचारिक तौर पर शुरू होगी, यह राज्य की राजनीति में बड़ा विवाद और चुनावी बहस का विषय बन सकता है। फिलहाल, इस मुद्दे की जमीन तैयार होती हुई दिखाई दे रही है।

45 लाख बच्चों की परीक्षा 8 महीने से ठप, अबुआ सरकार जश्नों में मशगूल, बच्चों का भविष्य रसातल में: धी. रामहरि पेरियार

45 लाख बच्चों की परीक्षा 8 महीने से ठप, अबुआ सरकार जश्नों में मशगूल, बच्चों का भविष्य रसातल में: धी. रामहरि पेरियार

चाईबासा : झारखंड में 45 लाख बच्चों की परीक्षाएँ पिछले 8 महीनों से ठप पड़ी हैं, लेकिन सरकार का पूरा ध्यान नाच-गान, मेला, मंच और सरकारी कार्यक्रमों पर है। शिक्षा जैसी गंभीर व्यवस्था को बुरी तरह ध्वस्त कर देने वाली यह स्थिति अभिभावकों और छात्रों को गहरी चिंता में डाल रही है।
    एंटी करप्शन ऑफ इंडिया, झारखंड प्रदेश अध्यक्ष धी. रामहरि पेरियार ने सरकार की कार्यशैली पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि एक अखबार की कटिंग ही अबुआ सरकार की सच्चाई बयान करने के लिए काफी है। कार्यक्रमों की धूम है, लेकिन बच्चों का भविष्य अंधेरे में पड़ा है।
   उन्होंने कहा कि 25 वर्षों की सबसे बड़ी उपलब्धि यही बची है, बच्चों की परीक्षा रोक देना।
पेरियार ने सरकार पर आरोप लगाया कि शिक्षा व्यवस्था को मजाक बना दिया गया है। सरकार जश्न मना रही है, जबकि 45 लाख बच्चों का भविष्य राख किया जा रहा है। यह सिर्फ लापरवाही नहीं, यह आने वाली पीढ़ियों के साथ विश्वासघात है।

प्रशासन मौन, जवाबदही गायब

पेरियार ने कहा कि प्रशासन सरकारी कार्यक्रमों में व्यस्त है, लेकिन बच्चों की परीक्षा की तिथि पर न कोई जवाब है, न मंशा। यह सिर्फ प्रशासनिक विफलता नहीं, यह राज्य के भविष्य को कुचलने की सरकारी नीति है।

अभिभावकों में हताशा-स्कूलों में भय का माहौल

लगातार 8 महीनों से परीक्षा रुकी होने से बच्चों की पढ़ाई की लय टूट चुकी है। अभिभावक चिंता में हैं, स्कूलों का पूरा अकादमिक कैलेंडर चरमरा गया है और पढ़ाई पूरी तरह अस्त-व्यस्त है।

प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्र सबसे ज्यादा प्रभावित

शिक्षा विभाग अब तक किसी स्पष्ट समय-सारिणी की घोषणा नहीं कर पाया है। इससे छात्रों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
पेरियार ने कहा, जो सरकार भविष्य रोक दे, वह विकास का दावा किस मुंह से कर सकती है?

कुर्सी में 43वीं फुटबॉल प्रतियोगिता का सफल समापन — विजेता टीमों को ट्रॉफी व प्रशस्ति पत्र देकर किया गया सम्मानित

कुर्सी में 43वीं फुटबॉल प्रतियोगिता का सफल समापन — विजेता टीमों को ट्रॉफी व प्रशस्ति पत्र देकर किया गया सम्मानित

चाईबासा : सरायकेला जिला के कुर्सी (रंगो) में सरना क्लब द्वारा आयोजित 43वीं तीन दिवसीय फुटबॉल प्रतियोगिता 2025 का समापन समारोह मंगलवार को उत्साह और खेल भावना के साथ संपन्न हुआ। समापन कार्यक्रम में पूर्व मुख्यमंत्री एवं सरायकेला विधायक चंपई सोरेन के प्रतिनिधि के रूप में रानी बांदिया मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं।

मुख्य अतिथि ने विजेता दिलजले एफसी (रोलाडीह) और उपविजेता ब्लू रेबेल (खैरपाल) की टीमों को ट्रॉफी व प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। इस दौरान खिलाड़ियों के बीच जबरदस्त उत्साह देखने को मिला।

कार्यक्रम में कुर्सी पंचायत की मुखिया नीरेस देवगम, पंचायत समिति सदस्य सावन तियु, राकेश गोप, मरंग बाबू और मुख्य संरक्षक सुरेंद्र कुजूर मौजूद रहे।

समापन समारोह को संबोधित करते हुए रानी बांदिया ने खिलाड़ियों का मनोबल बढ़ाया और कहा कि खेल केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि अनुशासन, स्वास्थ्य और सामाजिक समरसता की राह दिखाता है। उन्होंने युवाओं से खेल को जीवन का हिस्सा बनाने की अपील करते हुए ग्रामीणों को स्वास्थ्यप्रद जीवनशैली अपनाने तथा नशे से दूर रहने की सलाह दी।

पालोबेड़ा में दर्दनाक हादसा — घर पर पलटा हाइवा, पिता-बेटी की मौत, कंपनी ने दिया 25 लाख मुआवजे का आश्वासन

पालोबेड़ा में दर्दनाक हादसा — घर पर पलटा हाइवा, पिता-बेटी की मौत, कंपनी ने दिया 25 लाख मुआवजे का आश्वासन

ग़म्हरिया : कांड्रा थाना अंतर्गत हुदु पंचायत के पालोबेड़ा गांव में रविवार की सुबह एक बड़ा हादसा हो गया। गिट्टी से लदा हाइवा वाहन अनियंत्रित होकर बीरबल मुर्मू के घर पर पलट गया। हादसे के समय परिवार घर के भीतर सो रहा था। गिट्टी और दीवार गिरने से बीरबल मुर्मू (37) और उनकी डेढ़ साल की बेटी अनुश्री मुर्मू की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि उनकी पत्नी गंभीर रूप से घायल हो गईं।

सूत्रों के अनुसार, हुदु पंचायत में लीडिंग कंस्ट्रक्शन कंपनी द्वारा सड़क निर्माण कार्य चल रहा था। इसी दौरान यह हादसा हुआ। घटना के बाद ग्रामीणों में आक्रोश फैल गया, लेकिन शीघ्र ही पंचायत प्रतिनिधियों, प्रशासन और कंपनी के मैनेजर के साथ सकारात्मक वार्ता हुई।

वार्ता हुई सफल — कंपनी देगी 25 लाख रुपये व नया घर
हुदु पंचायत की मुखिया श्रीमती सुगी मुर्मू और झारखंड मुक्ति मोर्चा के केन्द्रीय सदस्य श्री कृष्णा बास्के के नेतृत्व में बैठक हुई। कंपनी ने सहानुभूति जताते हुए पीड़ित परिवार को 25 लाख रुपये और एक नया घर बनाने की लिखित सहमति दी है। साथ ही, श्राद्ध कर्म के लिए तुरंत 50,000 रुपये दिए गए हैं और अगले दिन 50,000 रुपये और दिए जाएंगे। शेष राशि 26 नवंबर को RTGS के माध्यम से बीरबल की पत्नी शेफाली मुर्मू के खाते में भेजी जाएगी।

बैठक में मौजूद रहे अधिकारी व ग्रामीण
बैठक में मुख्य रूप से प्रखंड विकास पदाधिकारी श्री साधु चरण देवगम, थाना प्रभारी श्री विनोद कुमार मुर्मू, प्रखंड समन्वयक श्री सावन सोय, कनिष्ठ अभियंता श्री नामी सिंह मुंडा, पंचायत समिति सदस्य मोनो टुडू, ग्राम प्रधान रागदू किस्कू, लक्ष्मण सरदार, फागु मुर्मू, विजय महतो, राजेश मुर्मू, भगतू मुर्मू, रूपक मुर्मू, मनसा मुर्मू, मंगल मुंडा, बालेश्वर मुर्मू सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे।