जिला

सरायकेला में सड़क सुरक्षा जागरूकता अभियान

सरायकेला में सड़क सुरक्षा जागरूकता अभियान

सरायकेला : पुलिस अधीक्षक सरायकेला-खरसावाँ के निर्देश पर रविवार को सरायकेला शहर के गैराज चौक पर सड़क सुरक्षा जागरूकता अभियान चलाया गया। अभियान का नेतृत्व परीक्ष्यमान पुलिस उपाधीक्षक ने किया। इस दौरान ट्रैफिक इंस्पेक्टर और सरायकेला थाना प्रभारी भी उपस्थित रहे।

अभियान के तहत आम नागरिकों, वाहन चालकों और राहगीरों को सड़क सुरक्षा नियमों की जानकारी दी गई। उन्हें यातायात कानूनों के पालन, हेलमेट और सीट बेल्ट के उपयोग, ओवरस्पीडिंग के खतरों तथा गुड सेमेरिटन नियमों के बारे में जागरूक किया गया। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति की मदद करने वालों को कानून का संरक्षण प्राप्त है, इसलिए लोगों को बिना डर सहायता करनी चाहिए।

पुलिस ने लोगों से अपील की कि वे यातायात नियमों का पालन कर स्वयं सुरक्षित रहें और दूसरों की सुरक्षा सुनिश्चित करें। अधिकारियों ने कहा कि ऐसे जागरूकता अभियान आगे भी लगातार चलाए जाएंगे।

पश्चिमी सिंहभूम में बढ़ती ठंड और कोहरे को देखते हुए स्कूलों का अवकाश बढ़ाने की मांग

पश्चिमी सिंहभूम में बढ़ती ठंड और कोहरे को देखते हुए स्कूलों का अवकाश बढ़ाने की मांग

चाईबासा : पश्चिमी सिंहभूम जिले में लगातार गिरते तापमान, बढ़ती ठंड और घने कोहरे को देखते हुए कांग्रेस जिला प्रवक्ता त्रिशानु राय ने जिला प्रशासन से सभी सरकारी और निजी विद्यालयों में अवकाश कुछ दिनों तक बढ़ाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि 4 जनवरी 2026 को प्रकाशित समाचारों और मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार ठंड का असर और बढ़ने वाला है। जिले में न्यूनतम तापमान सात डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है, जबकि अगले दो दिनों के लिए घने कोहरे का येलो अलर्ट जारी किया गया है। सुबह के समय दृश्यता काफी कम हो रही है, जिससे बच्चों के लिए स्कूल जाना जोखिमभरा हो गया है।

त्रिशानु राय ने कहा कि ठंड, कोहरा और शीतलहर के कारण छोटे बच्चों में सर्दी, बुखार, निमोनिया और श्वसन संक्रमण जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। उन्होंने कहा कि शिक्षा के साथ-साथ बच्चों का स्वास्थ्य भी उतना ही महत्वपूर्ण है। इसको देखते हुए उन्होंने जिला प्रशासन से मांग की है कि नर्सरी से कक्षा आठवीं तक के सरकारी और निजी सभी विद्यालयों में एक समान रूप से अवकाश बढ़ाया जाए।

भरनियां पंचायत में जल जीवन मिशन ठप, ग्रामीणों ने आंदोलन का किया ऐलान

भरनियां पंचायत में जल जीवन मिशन ठप, ग्रामीणों ने आंदोलन का किया ऐलान

चक्रधरपुर : भरनियां पंचायत में केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी जल जीवन मिशन योजना दम तोड़ती नजर आ रही है। पंचायत के विभिन्न गांवों और टोलों में जल-नल योजना का कार्य वर्षों से अधूरा पड़ा है, जिससे ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। रविवार को डुकरी पताडीह में आयोजित एक आम सभा में ग्रामीणों ने इस समस्या को लेकर आंदोलन का ऐलान किया।
सभा को संबोधित करते हुए कांग्रेस नेता विजय सिंह सामाड ने कहा कि पंचायत के डुकरी, पताडीह, बांधासाई, गुंजा, साईतोपा, दुड़ियाम और डांगोडीह गांवों में स्थिति बेहद खराब है। कई स्थानों पर पाइपलाइन बिछाकर छोड़ दी गई है, जबकि कई टोलों में अब तक बोरिंग का काम भी शुरू नहीं हुआ है। सरकारी कागजों में योजना संचालित दिख रही है, लेकिन हकीकत में लोग पीने के पानी के लिए परेशान हैं।
ग्रामीणों ने कहा कि वे अपनी मांगों को लेकर सड़क से लेकर विभागीय कार्यालय तक संघर्ष करने को तैयार हैं। हालांकि विजय सिंह सामाड ने ग्रामीणों से शांति बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि आंदोलन कानून के दायरे में रहकर किया जाएगा। उन्होंने बताया कि पहले सभी ग्रामीणों के हस्ताक्षरयुक्त आवेदन संबंधित विभाग के उच्च अधिकारियों को सौंपे जाएंगे। यदि इसके बाद भी कार्य शुरू नहीं हुआ तो उग्र आंदोलन किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक हर घर में पेयजल की सुविधा नहीं मिलेगी, आंदोलन जारी रहेगा।
इस आम सभा में राजेंद्र सामाड, मंगल सिंह बोदरा, रामसिंह सामाड, ब्रिज मोहन महतो, बासुदेव मुखी, नवीन सामाड, रामजीवन लोहरा, सुखराम लोहरा, हरिचरण सामाड, बेरगा सामाड, बेरगा बोदरा, सोमा गुंदुवा, दिलीप सामाड, जगाया बोदरा, रामराई बोदरा सहित सैकड़ों महिला-पुरुष उपस्थित थे।

कोलाबीरा में पेसा नियमावली को लेकर आदिवासी प्रतिनिधियों की बैठक

कोलाबीरा में पेसा नियमावली को लेकर आदिवासी प्रतिनिधियों की बैठक

प्रस्तावित स्वामी विवेकानंद उच्च विद्यालय, कोलाबीरा में सिंहदिशोम देश परगना श्री फकीर मोहन टुडू की अध्यक्षता में एक बैठक आयोजित की गई। बैठक में राज्य सरकार द्वारा जारी पेसा नियमावली पर विस्तृत चर्चा हुई। इसमें विभिन्न आदिवासी समुदायों के प्रतिनिधियों और बुद्धिजीवियों ने अपनी-अपनी राय रखी।

चर्चा के बाद सर्वसम्मति से यह निष्कर्ष निकाला गया कि वर्तमान पेसा नियमावली आदिवासी परंपरागत स्वशासन व्यवस्था के अनुकूल नहीं है। वक्ताओं का कहना था कि इसमें झारखंड पंचायत राज अधिनियम (JPRA) 2001 के अधिकांश प्रावधानों को ही थोप दिया गया है। इस कारण बैठक में पेसा नियमावली का पुरजोर विरोध करने का निर्णय लिया गया। साथ ही इसके लिए जल्द ही रणनीति तैयार करने पर भी सहमति बनी।

बैठक में दुगनी पिंड परगना दिवाकर सोरेन, बृहस्पति सिंह सरदार, राष्ट्रीय कोल सेना अध्यक्ष विष्णु बानरा, पूर्व मुखिया सह अध्यक्ष गणेश गगराई, खरसावां पिंड मानकी दोलू सिंह सरदार, प्राणिक बाबा कमल किशोर हांसदा, चारडीहा माझी बाबा सालखान मुर्मू, पिंड कारजी सह घाट परगना बाबा लखीराम हांसदा, हतु मुंडा बोसेन मुंडा, सुकलाल किसकु, बबलू मुर्मू, नूना राम हांसदा, गांव गणराज्य अध्यक्ष बलराम सरदार सहित आदिवासी परंपरागत स्वशासन व्यवस्था से जुड़े कई पदाधिकारी और ग्रामीण उपस्थित थे।

पेसा नियमावली 2025 को लेकर झारखंड में कानूनी बहस तेज

पेसा नियमावली 2025 को लेकर झारखंड में कानूनी बहस तेज

झारखंड सरकार द्वारा बहुप्रतीक्षित पेसा नियमावली–2025 को अधिसूचित किए जाने के बाद इसके समर्थन और विरोध में राज्यभर में बहस शुरू हो गई है। यह नियमावली झारखंड पंचायत राज अधिनियम–2001 (जेपीआरए) की धारा 131(1) के तहत बनाई गई है, जिसमें सरकार को अधिनियम के उद्देश्यों की पूर्ति के लिए नियमावली बनाने का अधिकार दिया गया है।
हालांकि, इस नियमावली की वैधानिकता को लेकर गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं। जानकारों का कहना है कि जेपीआरए–2001 संविधान के भाग–9 के तहत सामान्य क्षेत्रों के लिए बना कानून है, जबकि संविधान का अनुच्छेद 243(एम) अनुसूचित क्षेत्रों में भाग–9 के प्रावधानों को लागू करने से स्पष्ट रूप से रोकता है।
आलोचकों के अनुसार, यदि अनुसूचित क्षेत्र और सामान्य क्षेत्र के कानूनों के बीच टकराव होता है, तो जेपीआरए–2001 के प्रावधान पेसा नियमावली–2025 पर हावी हो जाएंगे, जिससे पेसा नियमावली निष्प्रभावी हो सकती है।
इसके अलावा, पेसा अधिनियम–1996 की धारा 5 के तहत अनुसूचित क्षेत्रों में पंचायतों से संबंधित कोई भी असंगत राज्य कानून केवल एक वर्ष तक ही प्रभावी रह सकता है। इस संदर्भ में जेपीआरए–2001 की धारा 1(ii) को पांचवीं अनुसूची और राष्ट्रपति आदेश–1950 के विपरीत बताया जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह विवाद केवल एक नियमावली तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संविधान, पेसा अधिनियम, पांचवीं अनुसूची और राज्य के सामान्य पंचायत कानूनों के बीच अधिकारों के टकराव का मामला है। इसे अनुसूचित क्षेत्रों में राज्य के सामान्य कानूनों को “पिछले दरवाजे से” लागू करने का प्रयास बताया जा रहा है।
यह भी सवाल उठाया जा रहा है कि क्या एक स्वतंत्र केंद्रीय कानून (पेसा अधिनियम–1996) की नियमावली, राज्य के पंचायत कानून जेपीआरए–2001 के उद्देश्यों की पूर्ति के लिए बनाई जा सकती है, जबकि जेपीआरए की धारा 131 केवल उसी अधिनियम के प्रयोजनों के लिए नियम बनाने की अनुमति देती है।
इस पूरे मामले ने झारखंड में पेसा कानून के वास्तविक क्रियान्वयन और आदिवासी स्वशासन के अधिकारों को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
— बिर सिंह बिरुली
अध्यक्ष, ईचा–खरकई बांध विरोधी संघ, कोल्हान

बेतेरकिया गांव में जरूरतमंदों के बीच पप्पु गौड़ ने किया कंबल वितरण

बेतेरकिया गांव में जरूरतमंदों के बीच पप्पु गौड़ ने किया कंबल वितरण

नोवामुंडी : नोवामुंडी प्रखंड अंतर्गत दुधविला पंचायत के बेतेरकिया गांव में गौड़ सेवा संघ के प्रखंड अध्यक्ष एवं समाजसेवी पप्पु गौड़ ने जरूरतमंदों के बीच कंबल का वितरण किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी नववर्ष के शुभ अवसर पर कंबल वितरण कार्यक्रम आयोजित किया गया है। ठंड बढ़ने के कारण कंबल से गरीब परिवारों को राहत मिलेगी। उन्होंने यह भी बताया कि आगे भी कंबल वितरण का यह कार्यक्रम जारी रहेगा।

राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह–2026: राजनगर बाईपास पर रेट्रो रिफ्लेक्टिव टेप जांच व जागरूकता अभियान

राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह–2026: राजनगर बाईपास पर रेट्रो रिफ्लेक्टिव टेप जांच व जागरूकता अभियान

सरायकेला : राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह–2026 के तीसरे दिन शनिवार को सरायकेला-खरसावां जिला परिवहन पदाधिकारी गिरिजा शंकर महतो के निर्देशन में राजनगर बाईपास रोड पर “शाइनिंग सेफ्टी रेट्रो रिफ्लेक्टिव टेप इंस्टॉलेशन” कार्यक्रम आयोजित किया गया।
इस दौरान भारी मोटर वाहनों में निर्धारित मानकों के अनुसार रेट्रो रिफ्लेक्टिव टेप की जांच की गई। साथ ही वाहनों की हेडलाइट, टेललाइट एवं अन्य प्रकाश व्यवस्था का निरीक्षण किया गया। वाहन चालकों को रात्रि के समय दृश्यता बढ़ाने, वाहनों की नियमित तकनीकी जांच कराने और सड़क सुरक्षा नियमों का पालन करने के लिए जागरूक किया गया।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाना, वाहनों की बेहतर दृश्यता सुनिश्चित करना और सुरक्षित यातायात व्यवस्था को मजबूत करना है। अभियान में मोटरयान निरीक्षक दिलीप कुमार, रवि प्रसाद सहित सड़क सुरक्षा से जुड़े विभागीय टीम के सदस्य उपस्थित रहे।

राजनगर के टंगरानी गांव में नाले में डूबने से युवक की मौत, जांच में जुटी पुलिस

राजनगर के टंगरानी गांव में नाले में डूबने से युवक की मौत, जांच में जुटी पुलिस

सरायकेला-खरसावां : सरायकेला-खरसावां जिले के राजनगर थाना क्षेत्र अंतर्गत टंगरानी गांव में नाले में डूबने से एक व्यक्ति की मौत हो गई। मृतक की पहचान टंगरानी गांव निवासी 35 वर्षीय लोधा हांसदा के रूप में हुई है।

परिजनों के अनुसार लोधा हांसदा प्रतिदिन सुबह गम्हारिया स्थित एक फैक्ट्री में काम करने जाता था। शुक्रवार को जब वह ड्यूटी पर नहीं पहुंचा तो परिजनों ने उसकी तलाश शुरू की।

खोजबीन के दौरान शनिवार दोपहर करीब दो बजे गांव के नाले में पानी के भीतर उसका शव तैरता हुआ मिला। इसके बाद परिजनों ने तत्काल पुलिस को सूचना दी।

सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

सरायकेला में क्षेत्रीय गौड़ समाज का वार्षिक वनभोज सह मिलन समारोह

सरायकेला में क्षेत्रीय गौड़ समाज का वार्षिक वनभोज सह मिलन समारोह

सरायकेला : क्षेत्रीय गौड़ समाज महालिमोरूप का वार्षिक वनभोज सह मिलन समारोह 4 जनवरी, रविवार को सरायकेला प्रखंड के मुरुप स्थित दैवी स्थल माता ठाकुराणी के दरबार में आयोजित होगा।
समाज के अध्यक्ष नागेश्वर प्रधान ने बताया कि समारोह के दौरान माता ठाकुराणी के दरबार में पूजा अर्चना की जाएगी और समाज के सुख, शांति व समृद्धि की कामना की जाएगी। इसके बाद गौड़ समाज के सर्वांगीण विकास पर चर्चा की जाएगी और गौड़ सेवा संघ के कार्यक्रम का वार्षिक कैलेंडर भी विमोचित किया जाएगा।
समारोह में गौड़ सेवा संघ के केंद्रीय, जिला और प्रखंड कमेटी के पदाधिकारी अतिथि के रूप में शामिल होंगे। अध्यक्ष नागेश्वर प्रधान ने समाज के बुद्धिजीवी और क्षेत्रीय लोगों से परिवार सहित समारोह में उपस्थित होने की अपील की है।

चक्रधरपुर: पद्मावती जैन सरस्वती शिशु विद्या मंदिर में सावित्रीबाई फुले जयंती समारोह आयोजित

चक्रधरपुर: पद्मावती जैन सरस्वती शिशु विद्या मंदिर में सावित्रीबाई फुले जयंती समारोह आयोजित

चक्रधरपुर: पद्मावती जैन सरस्वती शिशु विद्या मंदिर, इंग्लिश मीडियम, पंप रोड शत्रुघ्न नगर चक्रधरपुर में सावित्रीबाई फुले की जयंती हर्षोल्लास के साथ मनाई गई।

कार्यक्रम की शुरुआत विद्यालय के प्रधानाचार्य आनंद चन्द्र प्रधान ने सावित्रीबाई फुले के चित्र पर दीप प्रज्ज्वलन एवं पुष्पार्चन कर की। इस अवसर पर उन्होंने सावित्रीबाई फुले के जीवन और योगदान पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वे भारत की पहली महिला शिक्षिका, समाज सुधारक और कवयित्री थीं। उन्होंने अपने पति ज्योतिराव फुले के साथ मिलकर महिला शिक्षा और सामाजिक समानता की नींव रखी। वर्ष 1848 में पुणे में उन्होंने पहला बालिका विद्यालय खोला और 1848 से 1852 के बीच 18 से अधिक विद्यालयों की स्थापना की।

उन्होंने विधवाओं और वंचित वर्गों के उत्थान के लिए भी कार्य किया तथा 1873 में सत्यशोधक समाज की स्थापना कर सामाजिक समानता, जाति भेदभाव के उन्मूलन और विधवा पुनर्विवाह के लिए प्रयास किए। इसी कारण उन्हें भारत की प्रथम शिक्षिका और नारी मुक्ति की प्रतीक के रूप में जाना जाता है।

कार्यक्रम के दौरान सौभीक घटक ने भी सावित्रीबाई फुले की जीवनी पर विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम को सफल बनाने में जय श्री दास, मीना कुमारी, भारती कुमारी, चांदनी जोंको और जयंती तांती का सराहनीय योगदान रहा।